नई दिल्ली: चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर विपक्षी INDIA गठबंधन के मार्च के बीच कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ पर तंज कसते हुए ‘जन की बात’ का नारा दिया। कांग्रेस ने आकाशवाणी भवन के अंदर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा की लोगों से बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा किया।
कांग्रेस ने वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा, “दोस्तों... ‘जन की बात’ आकाशवाणी से प्रसारित हो रही है।” पार्टी का यह संदेश ऐसे समय आया, जब INDIA गठबंधन के सांसद मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली की सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे थे।
आकाशवाणी भवन पहुंचे राहुल और प्रियंका
मंगलवार को विपक्षी सांसदों ने निर्वाचन आयोग के कार्यालय की ओर मार्च शुरू किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इसी दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा आकाशवाणी भवन के अंदर पहुंचे और वहां मौजूद लोगों से बातचीत की।
प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने INDIA गठबंधन के कई सांसदों को हिरासत में लिया। प्रियंका गांधी को भी कुछ समय के लिए हिरासत में लिया गया, हालांकि बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया। रिहाई के बाद वह राहुल गांधी के साथ विरोध प्रदर्शन में शामिल हुईं।
More than 300 Opposition MPs marched from Parliament to the Election Commission today to meet the Election Commissioners.
We represent crores of Indians.
- Why aren't the Election Commissioners meeting us?
- Why is the police stopping and threatening us? https://t.co/tlIck8WoZX
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) October 6, 2026
नीति आयोग के पास विपक्ष का धरना
निर्वाचन आयोग की ओर आगे बढ़ने की अनुमति नहीं मिलने के बाद राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों ने नीति आयोग कार्यालय के पास बैठकर धरना दिया। प्रदर्शन में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले और तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी समेत कई प्रमुख विपक्षी नेता शामिल हुए।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी केंद्र सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार लोगों के अधिकारों को कमजोर कर रही है और मुख्य चुनाव आयुक्त उसके इशारे पर काम कर रहे हैं।
एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग पर विपक्ष के सवाल
विपक्षी दलों ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ लगातार मोर्चा खोल रखा है। 30 सितंबर को 19 विपक्षी दलों की बैठक के बाद इस प्रदर्शन का आह्वान किया गया था।
विपक्ष का आरोप है कि एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई। विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की मांग कर रहे हैं।
दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
विपक्षी मार्च को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। कई स्तरों वाली बैरिकेडिंग की गई और सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) स्तर तथा उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए बॉडी कैमरा पहनना अनिवार्य किया गया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को निर्धारित मार्ग से आगे बढ़ने से रोकने के लिए कई स्थानों पर सुरक्षा बलों की तैनाती की।
चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद की रिपोर्ट पर विवाद
एसआईआर को लेकर राजनीतिक विवाद उस समय और बढ़ गया, जब इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने एसआईआर प्रक्रिया के दौरान अन्य चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की चिंताओं को नजरअंदाज करते हुए स्वतंत्र रूप से फैसले लिए।
रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर चिंताएं जताई थीं और हाल के महीनों में निर्णय लेने की प्रक्रिया पर 14 मौकों पर सवाल उठाए थे। हालांकि, निर्वाचन आयोग ने इन मतभेदों को लेकर कहा कि उसके विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियां होना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच एसआईआर को लेकर जारी यह विवाद अब संसद से लेकर सड़कों तक राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है। कांग्रेस का ‘जन की बात’ वाला तंज भी इसी राजनीतिक संघर्ष के बीच सामने आया है।
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