नई दिल्ली: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और फॉर्म 6 में कथित बदलाव को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधते हुए कहा कि भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने सुप्रीम कोर्ट में खुली अदालत के दौरान स्पष्ट किया था कि अदालत ने फॉर्म 6 में किसी भी बदलाव को मंजूरी नहीं दी है।

यह बयान ऐसे समय आया है, जब विपक्षी गठबंधन INDIA के नेताओं ने ‘लोकतंत्र बचाओ’ के नारे के साथ निर्वाचन आयोग की ओर मार्च शुरू किया। पत्रकारों से बातचीत में चिदंबरम ने निर्वाचन आयोग का बचाव करने के लिए बीजेपी की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी सार्वजनिक रिकॉर्ड का हिस्सा है और इसे कई बार प्रसारित भी किया गया है।

पी चिदंबरम ने फॉर्म 6 को लेकर कही ये बातें

चिदंबरम ने कहा, “बीजेपी स्पष्ट रूप से हिंदी या अंग्रेजी नहीं पढ़ सकती। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने साफ कहा था कि हमने फॉर्म 6 में किसी भी बदलाव को मंजूरी नहीं दी है। उन्होंने यह बात खुली अदालत में कही थी और कई वकीलों ने इसे सुना था।”

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने बीजेपी के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी इस बात से इनकार कैसे कर सकती है कि मुख्य न्यायाधीश ने ऐसी टिप्पणी नहीं की थी। उन्होंने आगे कहा, “मैंने घोषणा-पत्र देखा है और यह वास्तव में फॉर्म 6 में संशोधन है। यह फॉर्म 6 में एक अतिरिक्त प्रावधान है और कुछ जोड़ना भी संशोधन ही होता है।”

ओडिशा में 20 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाने का आरोप

विपक्षी मार्च में शामिल बीजू जनता दल (BJD) के राज्यसभा सांसद मानस मंगराज ने कहा कि उनकी पार्टी इस प्रदर्शन में शामिल जरूर हुई है, लेकिन वह INDIA गठबंधन का हिस्सा नहीं है। मंगराज ने कहा कि उनकी पार्टी की मुख्य मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी अपने नेता नवीन पटनायक के निर्देश पर एक जिम्मेदार क्षेत्रीय विपक्षी दल के रूप में प्रदर्शन में हिस्सा ले रही है।

ओडिशा में मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर आरोप लगाते हुए मंगराज ने दावा किया कि राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान 20 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी के प्रतिनिधिमंडलों ने इस मामले में ओडिशा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से कई बार मुलाकात की थी। प्रतिनिधिमंडलों ने कथित अनियमितताओं को दूर करने की मांग की, लेकिन उनके अनुसार, शिकायतों और ज्ञापनों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

नसीर हुसैन ने की मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग

मंगराज ने आरोप लगाया कि मतदाताओं के नाम हटाने की कार्रवाई जानबूझकर की गई। हालांकि, ये आरोप बीजेडी सांसद के दावे हैं और उपलब्ध जानकारी में इनके स्वतंत्र सत्यापन का विवरण नहीं दिया गया है।

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद सैयद नसीर हुसैन ने भी निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूरे मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना चाहिए और SIR प्रक्रिया को रद्द किया जाना चाहिए। साथ ही, जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं या जिन्हें प्रक्रिया से बाहर रखा गया है, उनके नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल किए जाने चाहिए।

हुसैन ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले की जांच से यह सामने आना चाहिए कि इसके पीछे कौन लोग हैं और किसके निर्देश पर कथित तौर पर मतदाताओं के अधिकार प्रभावित किए जा रहे हैं।

धर्मेंद्र यादव ने बीजेपी से पूछे सवाल

समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने भी विपक्षी प्रदर्शन में हिस्सा लेते हुए बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल किया कि निर्वाचन आयोग की ओर से सफाई देने का अधिकार बीजेपी को किसने दिया है। यादव ने संविधान को लेकर बीजेपी के रुख पर सवाल उठाते हुए संसद में 150 सांसदों के निलंबन और विभिन्न कानूनों को पारित किए जाने का जिक्र किया। उन्होंने पूछा कि बीजेपी निर्वाचन आयोग की ओर से स्पष्टीकरण कैसे दे सकती है।

मतदाता सूची में पारदर्शिता को लेकर विपक्ष का आंदोलन

विपक्षी दलों का यह मार्च मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं और SIR प्रक्रिया को लेकर चल रहे विरोध का हिस्सा है। विपक्ष लगातार निर्वाचन आयोग से अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों की जांच कराने की मांग कर रहा है। मार्च शुरू होने से पहले केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के डीआईजी संजय कुमार सैन ने संसद की सुरक्षा में तैनात कर्मचारियों के साथ संसद परिसर के बाहर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।

फॉर्म 6 में कथित बदलाव, मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के आरोप और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग के बीच यह विवाद अब राजनीतिक बहस का प्रमुख मुद्दा बन गया है। हालांकि, फॉर्म 6 को लेकर अदालत की टिप्पणी और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के आरोपों के संदर्भ में संबंधित आधिकारिक दस्तावेजों तथा निर्वाचन आयोग के पक्ष की स्वतंत्र पुष्टि महत्वपूर्ण होगी।