चुनाव आयोग की मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर विपक्ष और निर्वाचन व्यवस्था के बीच विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के 10 अन्य नेताओं ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। याचिका में अदालत से इस मामले में हस्तक्षेप करने और मतदाता सूची से कथित तौर पर बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के मुद्दे पर सुनवाई करने की मांग की गई है।
विपक्षी नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया चुनावी भागीदारी से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। ऐसे में SIR की प्रक्रिया और उसके प्रभावों की न्यायिक समीक्षा की जरूरत है। हालांकि, याचिका में लगाए गए आरोपों और दावों पर अंतिम निर्णय अदालत की सुनवाई तथा संबंधित पक्षों के जवाब के बाद ही सामने आएगा।
इस मामले में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिका का प्रमुख उद्देश्य SIR से जुड़े विवाद को न्यायालय के समक्ष रखना और प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों पर कानूनी हस्तक्षेप प्राप्त करना है।
CJI से मुलाकात नहीं हुई तो नेताओं ने अपनाया कानूनी रास्ता
इससे पहले विपक्षी नेताओं की योजना मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को ज्ञापन सौंपने की थी। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और INDIA गठबंधन के समर्थकों ने इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मार्च भी किया। विपक्ष की ओर से चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर अपनी चिंताएं अदालत के सामने रखने की कोशिश की गई।
हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने नेताओं से मुलाकात करने के बजाय उन्हें एक याचिकाकर्ता के रूप में उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाने की सलाह दी। इसके बाद विपक्षी नेताओं ने औपचारिक याचिका दाखिल करने का निर्णय लिया।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राहुल गांधी निर्धारित समय सीमा शाम 4:30 बजे से पहले सुप्रीम कोर्ट नहीं पहुंच सके। ऐसे में उनकी ओर से वकील एस. प्रसन्ना ने याचिका दाखिल की। इस घटनाक्रम के बाद विपक्ष ने अपनी मांगों को ज्ञापन के बजाय औपचारिक न्यायिक प्रक्रिया के जरिए आगे बढ़ाया।
याचिका दाखिल करने वाले 11 नेताओं में कौन-कौन शामिल?
इस याचिका में राहुल गांधी का नाम पहले याचिकाकर्ता के रूप में दर्ज है। उनके अलावा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के तेजस्वी प्रसाद यादव और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के संजय राउत शामिल हैं।
अन्य याचिकाकर्ताओं में एम. ए. बेबी, डी. राजा, महुआ माझी, सुप्रिया सुले और ई. टी. मोहम्मद बशीर के नाम बताए गए हैं। इन नेताओं ने संयुक्त रूप से SIR प्रक्रिया और उससे जुड़े मतदाता सूची के मुद्दे को अदालत के सामने उठाया है।
याचिका में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं। विपक्षी नेताओं की मुख्य चिंता यह है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित न हों और प्रक्रिया को लेकर उठने वाले सवालों का कानूनी परीक्षण किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्री को क्या निर्देश दिया?
याचिका पर जल्द सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्री से प्रक्रिया पूरी करने को कहा है। निर्देश का उद्देश्य यह है कि यदि याचिका में कोई तकनीकी कमी या दस्तावेज संबंधी खामी हो, तो उसे समय रहते दूर कराया जा सके। इससे मामले को अगले दिन सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने की संभावना बनी रहेगी।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ के सामने 13 अक्टूबर 2026 को मामला आने की संभावना बताई गई है। हालांकि, अंतिम सुनवाई की पुष्टि अदालत की आधिकारिक सूची से ही होगी।
अब इस मामले में सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर है। अदालत यह तय करेगी कि याचिका में उठाए गए सवालों पर किस तरह आगे बढ़ना है और चुनाव आयोग से जवाब मांगने सहित क्या कानूनी कदम उचित होंगे। फिलहाल, याचिका दाखिल होना विपक्ष की मांगों को न्यायिक प्रक्रिया में ले जाने की दिशा में अहम घटनाक्रम है। SIR को लेकर आगे होने वाली सुनवाई से मतदाता सूची पुनरीक्षण और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े विवाद पर महत्वपूर्ण स्पष्टता मिलने की उम्मीद है।
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