नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों पर विरोध प्रदर्शनों के दौरान शारीरिक हमला करने और उनकी जान लेने की कोशिश करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। भारद्वाज ने दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार, दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन को लिखित शिकायत भेजकर प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने और मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।
भारद्वाज का आरोप है कि 29 सितंबर, 4 अक्टूबर और 12 अक्टूबर को हुए तीन अलग-अलग प्रदर्शनों के दौरान पुलिसकर्मियों ने उनके साथ हिंसक व्यवहार किया। उन्होंने दावा किया कि इन घटनाओं के वीडियो सबूत भी शिकायत के साथ दिए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और पुलिस का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
सौरभ भारद्वाज ने सोशल मीडिया पर क्या कहा?
सौरभ भारद्वाज ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी शिकायत की जानकारी साझा करते हुए कहा कि उन्होंने राजनीतिक नेताओं और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ कथित पुलिस हिंसा के व्यापक मामले को अधिकारियों के संज्ञान में लाया है।
उन्होंने दावा किया कि आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह और माकपा सांसद जॉन ब्रिटास के साथ भी कथित तौर पर गला दबाने जैसी घटनाएं हुई हैं। भारद्वाज ने कहा कि उन्होंने अपनी जान लेने की कथित तीन कोशिशों के वीडियो साक्ष्य भी शिकायत में शामिल किए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई तो पार्टी न्यायालय का रुख करेगी।
IMPORTANT
I have filed a written complaint to @CPDelhi , @LtGovDelhi & Home Secreatary @PIBHomeAffairs regarding broader, systemic, and highly alarming pattern of violence currently being weaponized by security forces in Delhi against political figures and public representatives.
I have given accounts of strangulation attempts on AAP MP @SanjayAzadSln , CPI(M) MP @JohnBrittas and video evidence of three attempts on my life by @DelhiPolice
I have demanded FIR and if it does not happen, we will approach Court.
— Saurabh Bharadwaj (@Saurabh_MLAgk) October 15, 2026
12 अक्टूबर: जनपथ के पास प्रदर्शन के दौरान गला दबाने का आरोप
भारद्वाज की 13 अक्टूबर को दी गई शिकायत के अनुसार, सबसे हालिया घटना 12 अक्टूबर को हुई। उस दिन वह संजय सिंह समेत आम आदमी पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जनपथ के पास प्रदर्शन कर रहे थे।
भारद्वाज का आरोप है कि दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों ने प्रदर्शनकारियों को रोका और उनके साथ मारपीट की। उन्होंने दावा किया कि जब सुरक्षाकर्मी उन्हें उठा रहे थे और खींच रहे थे, तब पीछे से एक पुलिसकर्मी ने उनकी कमीज का कॉलर पकड़कर इतनी जोर से खींचा कि उनकी सांस लेने का रास्ता बाधित हो गया।
भारद्वाज ने अपनी शिकायत में इसे महज रोकने की कार्रवाई नहीं, बल्कि जानबूझकर गला दबाने की कोशिश बताया। उनके अनुसार, उन्होंने कई बार चिल्लाकर बताया कि उनका दम घुट रहा है, लेकिन पकड़ ढीली नहीं की गई। उन्होंने दावा किया कि मौके पर मौजूद अभिषेक कुमार ने हस्तक्षेप किया और शोर मचाया। इसके बाद कथित तौर पर उनके साथ भी मारपीट की गई। भारद्वाज के मुताबिक, अन्य लोगों के मौके पर पहुंचने और अभिषेक कुमार के लगातार विरोध करने के बाद ही उनका कॉलर छोड़ा गया।
4 अक्टूबर: इंडिया गेट पर प्रदर्शन के दौरान दुर्व्यवहार का आरोप
शिकायत में दूसरी घटना 4 अक्टूबर को दोपहर करीब 3:30 बजे इंडिया गेट सर्कल पर हुए विरोध मार्च से जुड़ी बताई गई है। भारद्वाज ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने उनके पैरों को हिंसक तरीके से हवा में उठा दिया और उन्हें उल्टा लटकाने जैसी स्थिति पैदा की। उनका दावा है कि इस तरह की कार्रवाई से गर्दन और रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट लग सकती थी।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने मीडिया कैमरों को रोकने और आसपास मौजूद लोगों को घटना की रिकॉर्डिंग करने से बचाने के लिए उन्हें चारों ओर से घेर लिया था। भारद्वाज के अनुसार, इस घटना से संबंधित वीडियो फुटेज शिकायत के साथ संलग्न किए गए हैं।
29 सितंबर: विकासपुरी में बेहोश होने का दावा
भारद्वाज ने अपनी शिकायत में 29 सितंबर की एक अन्य कथित घटना का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, विकासपुरी इलाके और विकासपुरी पुलिस थाने के बाहर प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ झड़प के बीच उनका गला दबाया गया और वह बेहोश हो गए। उन्होंने दावा किया कि महिला कार्यकर्ताओं ने हस्तक्षेप कर उन्हें बचाया। भारद्वाज ने कहा कि इस घटना के संबंध में वह पहले भी लिखित शिकायत दे चुके हैं, लेकिन अब तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है।
जॉन ब्रिटास के साथ कथित घटना का भी जिक्र
भारद्वाज ने अपनी शिकायत में माकपा के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास के साथ 11 अक्टूबर को हुई कथित घटना को भी शामिल किया है। शिकायत के मुताबिक, ब्रिटास कनॉट प्लेस के पास मीडिया से बातचीत कर रहे थे, तभी पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर उन्हें खींचा और पुलिस वाहन में बैठा दिया। भारद्वाज ने आरोप लगाया कि वाहन के भीतर उन्हें सीट पर दबाकर रखा गया और उनका दम घुटने जैसी स्थिति पैदा हुई।
शिकायत में यह भी दावा किया गया कि बाद में ब्रिटास को सड़क किनारे छोड़ दिया गया, जहां उनकी हालत खराब थी। इसके बाद उन्हें चिकित्सकीय जांच और छाती का एक्स-रे कराने के लिए राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाया गया। भारद्वाज का आरोप है कि इन सभी घटनाओं में गर्दन, गले और रीढ़ की हड्डी को निशाना बनाने तथा मीडिया और आम लोगों को घटनाओं की रिकॉर्डिंग से रोकने का एक समान तरीका दिखाई देता है। ये आरोप शिकायत में किए गए दावों पर आधारित हैं।
FIR, CCTV फुटेज और स्वतंत्र जांच की मांग
सौरभ भारद्वाज ने संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत आपराधिक साजिश, हमला, गंभीर चोट पहुंचाने की कोशिश और हत्या के प्रयास जैसे आरोपों की जांच की मांग की है। उन्होंने अधिकारियों से 29 सितंबर, 4 अक्टूबर और 12 अक्टूबर की घटनाओं से संबंधित पुलिस की आधिकारिक वीडियो रिकॉर्डिंग, प्रदर्शन स्थलों के सीसीटीवी फुटेज तथा पुलिस वाहनों के डैशकैम और केबिन कैमरों की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने का अनुरोध किया है।
शिकायत में संजय सिंह और अभिषेक कुमार समेत प्रमुख प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज करने की मांग भी की गई है। भारद्वाज ने कहा कि चूंकि आरोप पुलिस और सुरक्षा बलों के कर्मियों के खिलाफ हैं, इसलिए केवल विभागीय जांच पर्याप्त नहीं होगी। उन्होंने जांच किसी स्वतंत्र बाहरी एजेंसी को सौंपने की मांग की है, ताकि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हो सके। शिकायत की प्रतियां दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन को भी भेजी गई हैं।
सुप्रीम कोर्ट में इंटरनेट प्रतिबंधों को लेकर भी कार्यवाही
यह घटनाक्रम दिल्ली में प्रदर्शनों के दौरान लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही कार्यवाही के बीच सामने आया है। केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने अदालत की अवमानना संबंधी नोटिस के जवाब में बिना शर्त माफी मांगी है। उन्होंने कहा कि 9 अक्टूबर के आदेश का जानबूझकर या दुर्भावनापूर्ण तरीके से पालन नहीं किया गया था।
मोहन ने अपने जवाब में कहा कि केंद्र सरकार का 9 अक्टूबर का निर्देश शांति बनाए रखने और सार्वजनिक व्यवस्था में संभावित बाधा को रोकने के उद्देश्य से जारी किया गया था। उन्होंने प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए आवश्यक अनुमति नहीं होने का हवाला दिया और 20 जुलाई को नीट प्रश्नपत्र लीक के मुद्दे पर हुए प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस के अनुभव का भी उल्लेख किया। सुप्रीम कोर्ट ने 9 अक्टूबर के अपने आदेश में कुछ सेवाओं पर लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध को हटाने और आवश्यक सीमा तक ही प्रतिबंध लागू रखने का निर्देश दिया था, ताकि दिल्ली के आम नागरिकों को परेशानी न हो।
मोबाइल इंटरनेट निलंबित करने का अनुरोध किया था- गृह सचिव
इंटरनेट सेवाओं के मामले में गृह सचिव ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने एक दिन के लिए मोबाइल इंटरनेट निलंबित करने का अनुरोध किया था और इस पर कानून के अनुसार कार्रवाई की गई। उनके मुताबिक, मोबाइल इंटरनेट सेवा 9 अक्टूबर रात 10 बजे से 10 अक्टूबर रात 10 बजे तक रायसीना हिल के चार किलोमीटर के दायरे में बंद रही। यह प्रतिबंध केवल मोबाइल इंटरनेट पर लागू था, वाई-फाई और ब्रॉडबैंड सेवाओं पर नहीं।
मोहन ने अदालत से अवमानना नोटिस समाप्त करने और 11 अक्टूबर के आदेश में संशोधन करने का अनुरोध भी किया है, ताकि कानूनी सुरक्षा उपायों के अधीन आवश्यकता पड़ने पर इंटरनेट सेवाओं को निलंबित किया जा सके। इस बीच, सौरभ भारद्वाज की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज होने, स्वतंत्र जांच शुरू होने और आरोपों के संबंध में दिल्ली पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आने से मामले की आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
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