हैदराबाद: तेलंगाना हाईकोर्ट ने विधानसभा के बाहर प्रदर्शन के दौरान महिला बीआरएस विधायकों के साथ कथित बदसलूकी के मामले में राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) सीवी आनंद को संबंधित पुलिस अधिकारियों की पहचान करने का निर्देश दिया है। यह मामला विधानसभा सत्र के पहले दिन हुए विरोध-प्रदर्शन से जुड़ा है।
भारत राष्ट्र समिति (BRS) के विधायकों ने आरोप लगाया था कि विधानसभा के मुख्य द्वार पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उनके साथ दुर्व्यवहार और धक्का-मुक्की की। पार्टी की कानूनी टीम की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कथित घटना में शामिल पुलिसकर्मियों की पहचान करने का निर्देश दिया।
महिला विधायकों ने लगाए थे गंभीर आरोप
विधानसभा सत्र के पहले दिन बीआरएस के कई विधायक काले कपड़े पहनकर विधानसभा पहुंचे थे। पुलिस ने उन्हें विधानसभा परिसर में प्रवेश करने से रोका, जिसके बाद मुख्य द्वार पर तनाव की स्थिति बन गई। बीआरएस की महिला विधायक सुनीता लक्ष्मा रेड्डी ने आरोप लगाया था कि पुलिसकर्मियों ने उनके साथ धक्का-मुक्की की और उनकी साड़ी खींची। पूर्व मंत्री एवं बीआरएस विधायक सबिता इंद्रा रेड्डी के साथ भी कथित तौर पर बदसलूकी के आरोप लगाए गए थे।
बीआरएस ने घटना की जांच और जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। इस मामले में तेलंगाना हाईकोर्ट ने इससे पहले भी विधानसभा के बाहर विधायकों के साथ पुलिस की कथित कार्रवाई पर गंभीरता दिखाई थी। अदालत ने कथित घटनाक्रम से जुड़े पुलिस अधिकारियों की पहचान करने और संबंधित कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ने के निर्देश दिए थे।
Telangana High Court has directed the Director General of Police (DGP) CV Anand to identify police officials who allegedly misbehaved with women BRS MLAs during a protest on the first day of the Assembly session, according to the BRS party legal team.BRS MLAs had filed a…
— ANI (@ANI) September 29, 2026
पुलिस और बीआरएस के बीच आमने-सामने की स्थिति
विरोध-प्रदर्शन के दौरान बीआरएस विधायकों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बनी थी। पुलिस की ओर से यह कहा गया था कि विधायकों को ऐसे नारे और संदेश लिखे काले टी-शर्ट पहनने के कारण विधानसभा में प्रवेश से रोका गया था।
घटना के बाद बीआरएस नेताओं ने पुलिस पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने का आरोप लगाया। वहीं, पुलिस की ओर से भी कुछ बीआरएस नेताओं के खिलाफ महिला पुलिसकर्मियों के साथ कथित दुर्व्यवहार को लेकर मामला दर्ज किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी।
रेवंत रेड्डी ने बीआरएस पर लगाए विधानसभा बाधित करने के आरोप
इस पूरे घटनाक्रम के बीच मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने विधानसभा की कार्यवाही को बाधित करने के लिए बीआरएस पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल सदन की कार्यवाही को रोकने की कोशिश कर रहा था। 22-ए निषिद्ध सूची से संबंधित चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने बीआरएस सदस्यों पर सदन में हंगामा करने का आरोप लगाया। उनके अनुसार, सरकार की जमीन, फीस प्रतिपूर्ति और सूखे जैसी समस्याओं समेत कई मुद्दों पर चर्चा होनी थी।
रेवंत रेड्डी ने यह भी कहा कि विधानसभा अध्यक्ष ने विपक्षी सदस्यों को सदन में आने का अवसर दिया था, लेकिन बाद में हंगामे के कारण कुछ सदस्यों को निलंबित करना पड़ा। मुख्यमंत्री ने सदन में अध्यक्ष के पद की गरिमा बनाए रखने को विधानसभा की परंपरा से जोड़ा।
अब डीजीपी की रिपोर्ट पर नजर
हाईकोर्ट के ताजा निर्देश के बाद मामले में आगे की कार्रवाई अब संबंधित पुलिस अधिकारियों की पहचान और उनके खिलाफ प्रस्तावित कदमों पर केंद्रित होगी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, अदालत के निर्देश का उद्देश्य विधानसभा परिसर के बाहर हुई कथित घटना में शामिल पुलिस अधिकारियों की पहचान स्पष्ट करना है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब तेलंगाना विधानसभा में सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी बीआरएस के बीच विभिन्न मुद्दों को लेकर तीखी राजनीतिक बहस जारी है। मामले में पुलिस कार्रवाई और बीआरएस विधायकों के आरोपों से जुड़े तथ्यों पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण रहेगी।
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