गुरदासपुर, पंजाब: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को पंजाब के गुरदासपुर में बिक्रमजीत सिंह के परिवार से मुलाकात की। बिक्रमजीत सिंह की कथित तौर पर नशा तस्करी के खिलाफ आवाज उठाने के कारण हत्या कर दी गई थी। अमित शाह का यह दौरा पंजाब में नशे के कारोबार और कानून-व्यवस्था को लेकर बढ़ती चिंता के बीच हुआ है।
गृह मंत्री के पंजाब दौरे के दौरान मानसा, संगरूर और गुरदासपुर में नशा तस्करों के खिलाफ आवाज उठाने के बाद जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों से मुलाकात का कार्यक्रम है। भाजपा का कहना है कि पंजाब को नशामुक्त बनाने के लिए पार्टी अपनी प्रतिबद्धता पूरी करेगी।
31 दिसंबर 2029 तक पंजाब को नशामुक्त करने का संकल्प
पंजाब भाजपा के उपाध्यक्ष फतेहजंग सिंह बाजवा ने अमित शाह के दौरे को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि भाजपा ने जालंधर में पंजाब से नशे के कारोबार को पूरी तरह खत्म करने का वादा किया था। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को 31 दिसंबर 2029 तक हासिल करने का संकल्प लिया गया है।
बाजवा ने परविंदर सिंह झोटा की हत्या और पंजाब में सामने आई अन्य घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि अमित शाह का दौरा जनता को यह संदेश देता है कि भाजपा अपने वादों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
#WATCH | Gurdaspur, Punjab: Gurnam Singh, uncle of deceased Vikramjit Singh, says, "He had left from his house in the evening for a walk. It must have been 7.30-8 pm. 10-15 drug addicts surrounded him, along with 2 others. They took all three inside. The space is entirely covered with blood now. My nephew died on the spot and the two others sustained critical injuries. They are admitted to the hospital right now. My nephew used to work against drug menace; he had no personal enmity. Amit Shah visited us just now. He assured us that there will be a CBI inquiry and we will get justice...We felt good that he visited us here and spoke to us..."
— ANI (@ANI) October 20, 2026
"नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों को चुप नहीं कराया जा सकता"
अमित शाह ने नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ आवाज उठाने के बाद अपने परिजनों को खोने वाले परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इन परिवारों का दर्द शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। गृह मंत्री ने जोर दिया कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों को चुप कराने की कोशिशें सफल नहीं होंगी। उन्होंने नशा तस्करों की पहचान कर उन्हें जेल भेजने और पंजाब सहित पूरे देश को नशामुक्त बनाने की केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
झोटा हत्याकांड में सीबीआई जांच का ऐलान
मानसा के नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की 13 अक्टूबर को गोली लगने से मौत हो गई थी। आरोप है कि नशीले पदार्थों की बिक्री को लेकर हुए विवाद के दौरान उन्हें गोली मारी गई थी। इस घटना के बाद किसान और मजदूर संगठनों ने 15 अक्टूबर को पंजाब बंद का आह्वान किया था। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने झोटा के परिवार की मांग स्वीकार करते हुए मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने की घोषणा की है। भाजपा भी इस मामले में सीबीआई जांच की मांग करती रही है।
गृह मंत्रालय ने पंजाब सरकार से मांगी रिपोर्ट
बिक्रमजीत सिंह की हत्या और इस कथित नशा-संबंधी हमले में घायल हुए निशान सिंह तथा गुरमुख सिंह के मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पंजाब सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। मंत्रालय ने पंजाब के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर बटाला तहसील के श्री हरगोबिंदपुर थाने के अंतर्गत मरी पनवां गांव में हुई घटना और राज्य सरकार की ओर से की गई कार्रवाई का ब्योरा मांगा है।
गृह मंत्रालय ने झोटा हत्याकांड पर भी तथ्यात्मक रिपोर्ट और नशामुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी है। इन कदमों में एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स को मजबूत करना, नशे से जुड़े मामलों में वित्तीय जांच करना, नार्को-कोऑर्डिनेशन सेंटर के माध्यम से एजेंसियों के बीच तालमेल बढ़ाना, अभियोजन प्रक्रिया को मजबूत करना, एनडीपीएस अधिनियम के तहत विशेष अदालतों की व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय नशा तस्करी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई शामिल हैं।
पंजाब में नशे के मुद्दे पर राजनीतिक टकराव तेज
अमित शाह के दौरे के बीच पंजाब में नशे की समस्या को लेकर भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हैं। भाजपा ने राज्य की आप सरकार पर नशा तस्करी पर प्रभावी रोक लगाने में विफल रहने का आरोप लगाया है।
दूसरी ओर, पंजाब के कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने अमित शाह के दौरे का स्वागत करते हुए पाकिस्तान से लगी 543 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा और गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर 3,000 किलोग्राम हेरोइन पहुंचने को लेकर सवाल उठाए हैं। ऐसे में अमित शाह का यह दौरा न केवल नशे के खिलाफ कार्रवाई, बल्कि पंजाब में कानून-व्यवस्था और राजनीतिक जवाबदेही के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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