पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले परविंदर सिंह झोटा की हत्या का मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पेरिस से लौटने के बाद इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री के इस फैसले को झोटा के परिवार की प्रमुख मांग से जोड़कर देखा जा रहा है। परिवार अब तक मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी से कराने और पोस्टमार्टम PGI के डॉक्टरों की टीम से करवाने की मांग कर रहा था।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि सरकार परविंदर झोटा के परिवार के साथ खड़ी है और पंजाब में नशे के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी। इस घोषणा के बाद मामले में जांच की दिशा और आगे की सरकारी कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।
ਨਸ਼ਿਆਂ ਖਿਲਾਫ਼ ਲੜ ਰਹੇ ਪਰਮਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਝੋਟਾ ਦੇ ਪਿਤਾ ਅਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਪਰਿਵਾਰ ਨਾਲ ਅਸੀਂ ਹਰ ਸਮੇਂ ਡੱਟ ਕੇ ਖੜ੍ਹੇ ਹਾਂ...ਪਰਿਵਾਰ ਦੀ ਮੰਗ ਨੂੰ ਪ੍ਰਵਾਨ ਕਰਦੇ ਹੋਏ, ਅਸੀਂ ਇਹ ਕੇਸ CBI ਨੂੰ ਸੌਂਪ ਰਹੇ ਹਾਂ...ਨਸ਼ੇ ਦੇ ਸੌਦਾਗਰਾਂ ਖਿਲਾਫ਼ ਸਾਡੀ ਲੜਾਈ ਆਰ-ਪਾਰ ਦੀ ਹੈ... ਪੰਜਾਬ ਨੂੰ ਨਸ਼ਾ-ਮੁਕਤ ਕਰਨ ਲਈ ਸਾਨੂੰ ਜੋ ਵੀ ਸਖ਼ਤ ਕਦਮ ਚੁੱਕਣਾ ਪਿਆ, ਅਸੀਂ ਪਿੱਛੇ ਨਹੀਂ ਹਟਾਂਗੇ...
— Bhagwant Mann (@BhagwantMann) October 20, 2026
परिवार और विपक्ष लगातार कर रहे थे CBI जांच की मांग
परविंदर झोटा हत्याकांड में CBI जांच की मांग केवल परिवार तक सीमित नहीं थी। शिरोमणि अकाली दल, भारतीय जनता पार्टी और अन्य विपक्षी दल भी मामले की केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की मांग उठा रहे थे। परिवार और इस मामले में गठित इंसाफ कमेटी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर भी CBI जांच की मांग की थी।
परिवार का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच और उनकी अन्य मांगों पर कार्रवाई जरूरी है। इसी कारण झोटा का अंतिम संस्कार भी अब तक नहीं किया गया था। परिवार की मांगों में शव का पोस्टमार्टम PGI के डॉक्टरों की टीम से कराने की बात भी शामिल है।
मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि CBI जांच को औपचारिक रूप से सौंपने की प्रक्रिया कब और किस तरह पूरी होती है। जांच एजेंसी की भूमिका और आगे की कार्रवाई से जुड़े आधिकारिक विवरण सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
परिवार से बातचीत के लिए बनाई गई थी कमेटी
मामले में परिवार और समर्थकों की मांगों को लेकर पंजाब सरकार ने तीन महिला IAS अधिकारियों की एक कमेटी भी गठित की थी। इसमें कंवलप्रीत कौर बराड़, अपनीत रियात और मानसा की उपायुक्त नवजोत कौर शामिल थीं।
इस कमेटी का उद्देश्य परिवार और समर्थकों से बातचीत करना तथा उनकी मांगों को समझना बताया गया था। झोटा की मौत के बाद स्थानीय स्तर पर भी आक्रोश देखने को मिला और इंसाफ कमेटी ने मामले में कार्रवाई के साथ कुछ अन्य मांगें भी उठाईं।
कमेटी की भूमिका और CBI जांच की घोषणा के बाद सरकार के सामने परिवार की मांगों पर आगे की कार्रवाई का सवाल बना हुआ है।
SGPC से शहीद का दर्जा देने की मांग
परविंदर झोटा की ओर से गठित एंटी ड्रग टास्क फोर्स के सदस्यों और समर्थकों ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) से उन्हें शहीद का दर्जा देने की मांग की है। इसके अलावा, जिस दुकान के पास झोटा की हत्या हुई थी, वहां उनकी प्रतिमा स्थापित करने की मांग भी उठाई गई है।
झोटा कथित तौर पर नशा बेचने वालों के खिलाफ आवाज उठाते थे और इस संबंध में सोशल मीडिया पर लाइव वीडियो भी साझा करते थे। उनके समर्थक उन्हें नशे के खिलाफ अभियान से जुड़ा सक्रिय चेहरा बताते हैं। उनकी मौत के बाद मामले ने पंजाब में नशे की समस्या और इसके खिलाफ काम करने वालों की सुरक्षा को लेकर बहस तेज कर दी है।
कैसे हुई थी परविंदर झोटा की हत्या?
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 13 अक्टूबर को एक फार्मेसी में परविंदर झोटा और दुकान के मालिक के बीच विवाद हुआ था। बताया गया कि झोटा ने दुकान के मालिक से उस व्यक्ति के बारे में सवाल किया था, जिसने कथित तौर पर उसी सुबह वहां से नशीले पदार्थ खरीदे थे।
इसी बात को लेकर बहस बढ़ गई। आरोप है कि विवाद के दौरान गोली चली, जिसमें परविंदर झोटा की मौत हो गई। घटना के बाद दुकान का मालिक मौके से फरार हो गया था, लेकिन पुलिस ने बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया।
घटना से पहले झोटा का मेडिकल स्टोर के मालिक अश्वनी कुमार से सामना होने की बात भी रिपोर्टों में सामने आई है। हालांकि, विवाद की पूरी परिस्थितियों, गोलीबारी की घटनाक्रम और जिम्मेदारी से जुड़े तथ्यों की पुष्टि जांच के निष्कर्षों से ही होगी।
अब आगे क्या?
मुख्यमंत्री भगवंत मान की CBI जांच की घोषणा से परिवार की प्रमुख मांग को लेकर आगे बढ़ने का रास्ता खुला है। हालांकि, जांच के औपचारिक हस्तांतरण, पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार से जुड़े मामलों पर आगे की स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
इस मामले ने पंजाब में नशे के खिलाफ अभियान, कानून-व्यवस्था और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग को फिर केंद्र में ला दिया है। अब सभी की निगाहें जांच की प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों की अगली कार्रवाई पर रहेंगी।
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