चंडीगढ़, पंजाब: भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मुख्यालय प्रभारी एवं सांसद तरुण चुग ने पंजाब में नशे के कारोबार और नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार पर सवाल उठाए हैं। चुग ने परविंदर सिंह झोटा की हत्या, गुलजार सिंह की आत्महत्या और विक्रमजीत सिंह की हत्या का उल्लेख करते हुए कहा कि इन घटनाओं ने राज्य में नशा तस्करी के नेटवर्क, कानून-व्यवस्था और सरकार की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

चुग ने सवाल किया कि पंजाब में नशे के कारोबार को चुनौती देने वाले लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा? उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों को सुरक्षा देने और तस्करी के नेटवर्क को तोड़ने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।

गुलजार सिंह की मौत पर निष्पक्ष जांच की मांग

तरुण चुग ने कहा कि गुलजार सिंह ने अपने क्षेत्र में सिंथेटिक नशे की उपलब्धता को लेकर सवाल उठाए थे। उनके अनुसार, इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पंजाब सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। चुग ने आरोप लगाया कि गुलजार सिंह को स्थानीय स्तर पर उत्पीड़न और दबाव का सामना करना पड़ा था। उन्होंने भगवंत मान सरकार से पूछा कि गुलजार सिंह की मौत से जुड़े हालात की निष्पक्ष जांच में अब तक क्या कार्रवाई हुई है और नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।

चुग ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपने इलाके में नशे की उपलब्धता पर सवाल उठाता है, तो उसकी मौत से जुड़े मामले में सरकार की जवाबदेही तय होनी चाहिए। हालांकि, उन्होंने इन घटनाओं के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध को लेकर जांच के निष्कर्ष प्रस्तुत नहीं किए।

गुजरात, राजस्थान और हरियाणा का उदाहरण देकर सरकार को घेरा

भाजपा सांसद ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के उस तर्क पर सवाल उठाए, जिसमें दूसरे राज्यों में नशे की बरामदगी का उल्लेख किया जाता है। चुग ने कहा कि नशे की खेप पकड़ना और नशे की पूरी सप्लाई चेन को तोड़ना अलग-अलग बातें हैं। उन्होंने दावा किया कि गुजरात, राजस्थान और हरियाणा में भाजपा की डबल इंजन सरकारें नशे की बड़ी खेप पकड़ रही हैं, जबकि पंजाब के गांवों, गलियों, बाजारों और मोहल्लों में अब भी चिट्टा उपलब्ध होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।

चुग ने पंजाब सरकार से पूछा कि स्थानीय तस्करी नेटवर्क के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। उन्होंने बड़े तस्करों को जेल पहुंचाने और युवाओं तक नशा पहुंचने से रोकने के लिए सरकार की ओर से उठाए गए ठोस कदमों का ब्योरा भी मांगा।

झोटा हत्याकांड पर हरपाल सिंह चीमा के बयानों पर सवाल

तरुण चुग ने पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड पर दिए गए बयानों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की भूमिका पर सवाल खड़े करने से सरकार की जिम्मेदारी समाप्त नहीं हो जाती।

चुग ने पूछा कि सरकार की प्राथमिकता नशा तस्करी के खिलाफ आवाज उठाने वालों को कटघरे में खड़ा करना है या तस्करी के नेटवर्क को ध्वस्त करना। उन्होंने आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की चुप्पी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि गुलजार सिंह, परविंदर सिंह झोटा और विक्रमजीत सिंह के मामलों में जनता को राजनीतिक बयानबाजी के बजाय स्पष्ट जवाब और कार्रवाई चाहिए।

तीनों मामलों में समयबद्ध जांच की मांग

चुग ने कहा कि पंजाब में केवल बैठकों, विज्ञापनों और नशा-मुक्ति के दावों से काम नहीं चलेगा। उन्होंने तीनों मामलों में निष्पक्ष और समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने, दोषियों को सजा दिलाने तथा नशा माफिया को राजनीतिक संरक्षण मिलने के आरोपों की जांच कराने की मांग की।

उन्होंने कहा कि सरकार की सफलता का आकलन इस आधार पर होना चाहिए कि नशा तस्करी के कितने नेटवर्क तोड़े गए, कितने बड़े तस्करों को जेल भेजा गया और नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले कितने लोगों को सुरक्षा प्रदान की गई। तरुण चुग ने कहा कि भगवंत मान सरकार को इन सवालों का जवाब देना चाहिए और पंजाब में नशे की सप्लाई चेन तोड़ने के लिए ठोस कार्रवाई करनी चाहिए। ये सभी आरोप और सवाल भाजपा नेता तरुण चुग की ओर से जारी बयान का हिस्सा हैं।