<?xml version='1.0' encoding='UTF-8' ?><rss xmlns:content='http://purl.org/rss/1.0/modules/content/' xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/'  version='2.0'><channel><title>GTC Bharat</title><link>https://www.gtcbharat.com</link><lastBuildDate><![CDATA[Wed, 07 Oct 2026 19:56:30 +0530 ]]></lastBuildDate><language>en</language><image><title>GTC Bharat</title><url>https://media.gtcbharat.com/uploads/GTC-Bhart.svg</url><link>https://www.gtcbharat.com</link></image><description>GTC Bharat: Hindi News(हिंदी न्यूज़): Bharat की ताज़ा खबरें | Hindi News, हिंदी समाचार </description><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/lifestyle-news/old-clothes-diy-hacks-6821 ]]></guid><title><![CDATA[ Old Clothes DIY: पुराने कपड़े फेंकने की बजाय ऐसे करें Reuse, घर के काम आएंगी ये 3 चीजें ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/lifestyle-news/old-clothes-diy-hacks-6821 ]]></link><pubDate><![CDATA[Tue, 06 Oct 2026 15:43:39 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ अलमारी में लंबे समय से रखे पुराने कपड़े अक्सर जगह घेरते रहते हैं। कुछ कपड़े छोटे हो जाते हैं तो कुछ फैशन से बाहर होने के कारण इस्तेमाल नहीं किए जाते। ऐसे कपड़ों को कूड़े में डालने के बजाय दोबारा इस्ते ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p>अलमारी में लंबे समय से रखे पुराने कपड़े अक्सर जगह घेरते रहते हैं। कुछ कपड़े छोटे हो जाते हैं तो कुछ फैशन से बाहर होने के कारण इस्तेमाल नहीं किए जाते। ऐसे कपड़ों को कूड़े में डालने के बजाय दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे घर में बेकार सामान कम होगा और नई चीजें खरीदने पर होने वाला खर्च भी बचाया जा सकता है।</p><p>पुरानी टी-शर्ट, कॉटन शर्ट, जींस और दूसरे मजबूत कपड़ों की मदद से कई उपयोगी घरेलू सामान आसानी से तैयार किए जा सकते हैं। इसके लिए बहुत ज्यादा सामान या विशेष कौशल की जरूरत भी नहीं होती। आइए जानते हैं ऐसे तीन आसान DIY आइडिया।</p><h5 class=""><b>1. पुराने कपड़ों से बनाएं Reusable Shopping Bag</b></h5><p>पुरानी कॉटन शर्ट, कुर्ती या किसी मजबूत कपड़े से दोबारा इस्तेमाल होने वाला बैग तैयार किया जा सकता है। कपड़े को अपनी जरूरत के अनुसार काटकर उसके किनारों और निचले हिस्से को सिल दें। इसके बाद बचे हुए कपड़े से दो मजबूत हैंडल तैयार करके बैग के साथ जोड़ सकते हैं।</p><p>इस तरह तैयार बैग का इस्तेमाल सब्जियां, किराने का सामान, किताबें या रोजमर्रा की दूसरी चीजें रखने के लिए किया जा सकता है। प्लास्टिक बैग की जगह कपड़े का बैग इस्तेमाल करना भी अधिक टिकाऊ विकल्प है।</p><h5 class=""><b>2. पुराने कपड़ों को बनाएं Cleaning Cloth</b></h5><p>मुलायम पुरानी टी-शर्ट या सूती कपड़ों को छोटे टुकड़ों में काटकर सफाई के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इन्हें फर्नीचर, शीशे, खिड़कियों, अलमारियों और किचन की सतहों की सफाई में काम लिया जा सकता है।</p><p>इस्तेमाल से पहले कपड़े को अच्छी तरह धो लेना चाहिए। अगर कपड़े में बटन, जिप या कोई कठोर हिस्सा लगा है तो उसे हटा दें। इससे सफाई के दौरान सतह पर खरोंच आने का खतरा कम रहेगा।</p><h5 class=""><b>3. पुराने कपड़ों से बनाएं Planter Cover</b></h5><p>अगर घर में छोटे गमले रखे हैं तो पुराने जींस, शर्ट या किसी मोटे कपड़े से उनके लिए आकर्षक कवर बनाया जा सकता है। इसके लिए गमले की ऊंचाई और चौड़ाई के अनुसार कपड़े को काटें और उसे सिलकर या उचित तरीके से बांधकर गमले के बाहर लगाएं।</p><p>पुराने कपड़ों के अलग-अलग रंग और डिजाइन आपके साधारण प्लांटर को नया लुक दे सकते हैं। खासकर जींस के कपड़े से बने कवर घर की सजावट में कैजुअल और आधुनिक अंदाज जोड़ सकते हैं।</p><h5 class=""><b>तीन आसान DIY आइडिया, एक स्मार्ट Reuse</b></h5><p>पुराने कपड़ों का दोबारा इस्तेमाल सिर्फ पैसे बचाने का तरीका नहीं है, बल्कि यह घर में अनावश्यक सामान और कपड़ा बर्बाद होने से रोकने का भी आसान उपाय है। अगली बार अलमारी साफ करते समय पुराने कपड़ों को फेंकने से पहले देखें कि उन्हें किस तरह उपयोगी घरेलू सामान में बदला जा सकता है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ Old Clothes DIY: पुराने कपड़े फेंकने की बजाय ऐसे करें Reuse, घर के काम आएंगी ये 3 चीजें ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/lifestyle-news/delhi-uttarakhand-5000-trip-6723 ]]></guid><title><![CDATA[ Long Weekend Trip: दिल्ली-NCR से कम बजट में उत्तराखंड के इन 3 पहाड़ी ठिकानों का करें प्लान, 5 हजार के आसपास हो सकता है खर्च ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/lifestyle-news/delhi-uttarakhand-5000-trip-6723 ]]></link><pubDate><![CDATA[Thu, 01 Oct 2026 15:40:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ लंबे वीकेंड का मतलब यह नहीं कि हर बार महंगी फ्लाइट या लग्जरी होटल की जरूरत पड़े। अगर यात्रा पहले से प्लान की जाए और चार लोगों का ग्रुप बनाया जाए, तो उत्तराखंड की पहाड़ियों में छोटी यात्रा का खर्च नियं ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p>लंबे वीकेंड का मतलब यह नहीं कि हर बार महंगी फ्लाइट या लग्जरी होटल की जरूरत पड़े। अगर यात्रा पहले से प्लान की जाए और चार लोगों का ग्रुप बनाया जाए, तो उत्तराखंड की पहाड़ियों में छोटी यात्रा का खर्च नियंत्रित किया जा सकता है। दिल्ली-NCR से निकलने वाले यात्रियों के लिए मुक्तेश्वर, औली और बिनसर तीन अलग-अलग तरह के अनुभव देते हैं।</p><p>इन तीनों जगहों को एक ही यात्रा में कवर करने के बजाय किसी एक डेस्टिनेशन को चुनकर 2-3 दिन का प्लान बनाना ज्यादा व्यावहारिक रहेगा। खासकर अगर आपका लक्ष्य लगभग ₹5,000 प्रति व्यक्ति के आसपास बजट रखना है।</p><p>ध्यान रहे कि ₹5,000 कोई निश्चित पैकेज कीमत नहीं है। यात्रा की तारीख, परिवहन, होटल की उपलब्धता, भोजन और घूमने की गतिविधियों के कारण वास्तविक खर्च इससे कम या ज्यादा हो सकता है।</p><h5 class=""><b>1. मुक्तेश्वर: पहाड़, मंदिर और शांति</b></h5><p>अगर आपका मकसद भीड़भाड़ से दूर शांत वातावरण में समय बिताना है, तो मुक्तेश्वर एक विकल्प हो सकता है। उत्तराखंड के नैनीताल क्षेत्र में स्थित यह जगह पहाड़ी दृश्यों और प्राकृतिक वातावरण के लिए जानी जाती है।</p><p>मुक्तेश्वर में मुक्तेश्वर मंदिर और Chauli Ki Jali प्रमुख आकर्षणों में शामिल हैं। उत्तराखंड पर्यटन विभाग के अनुसार Chauli Ki Jali मुक्तेश्वर मंदिर के पीछे चट्टानी क्षेत्र में स्थित है और यहां से आसपास के पहाड़ी इलाकों के दृश्य देखे जा सकते हैं। यह जगह उन लोगों के लिए खासतौर पर उपयुक्त हो सकती है जो ट्रिप में ज्यादा एडवेंचर के बजाय प्रकृति, शांत माहौल और स्थानीय अनुभव चाहते हैं।</p><p><img style="width: 780.067px;" src="https://media.gtcbharat.com/wp-content/uploads/2026/10/muketeshwar_1790848151.jpg"><br></p><h5 class=""><b>बजट कैसे रखें?</b></h5><p>चार लोगों का ग्रुप बनाकर यात्रा करने पर कार या टैक्सी का खर्च साझा किया जा सकता है। दूसरा विकल्प सार्वजनिक परिवहन और स्थानीय वाहन का इस्तेमाल है। रहने के लिए महंगे रिसॉर्ट की जगह बजट होटल या होमस्टे चुनना खर्च कम रखने में मदद कर सकता है।</p><h5 class=""><b>2. औली: बर्फ, हिमालय और एडवेंचर</b></h5><p>अगर आपकी Long Weekend Trip में पहाड़ों के साथ एडवेंचर भी शामिल होना चाहिए, तो औली एक अलग तरह का अनुभव देता है।<br>उत्तराखंड पर्यटन के मुताबिक औली करीब 2,800 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और देश के प्रमुख स्कीइंग डेस्टिनेशन में शामिल है। यहां से नंदा देवी समेत कई ऊंची हिमालयी चोटियों के दृश्य दिखाई देते हैं।</p><p><img style="width: 780.067px;" src="https://media.gtcbharat.com/wp-content/uploads/2026/10/auli_3877a68522c8a87bc4f218df40eb53ee_1280X720.webp"><br></p><p>औली के आसपास Gorson Bugyal और अन्य ट्रेकिंग रूट भी आकर्षण का हिस्सा हैं। पर्यटन विभाग के अनुसार Gorson Bugyal लगभग 3,056 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और यहां से हिमालयी चोटियों के मनोरम दृश्य मिलते हैं।&nbsp;</p><p>सर्दियों में बर्फ और स्कीइंग के कारण यहां यात्रा का खर्च बढ़ सकता है। इसलिए ₹5,000 के आसपास का बजट बनाते समय स्कीइंग या दूसरी paid activities को अलग खर्च के रूप में रखना बेहतर होगा।</p><p>पर्यटन विभाग के अनुसार स्कीइंग के लिए जनवरी से मार्च का समय उपयुक्त माना जाता है, जबकि प्रकृति और हिमालयी दृश्यों के लिए अन्य मौसमों में भी औली जाया जा सकता है।</p><h5 class=""><b>3. बिनसर: जंगल के बीच हिमालय का नजारा</b></h5><p>अगर आपको शांत पहाड़, जंगल और प्रकृति के करीब रहना पसंद है, तो बिनसर को ट्रिप की सूची में शामिल किया जा सकता है।<br>बिनसर करीब 2,420 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और उत्तराखंड पर्यटन विभाग के अनुसार यह अपने हिमालयी दृश्यों तथा वन क्षेत्र के लिए जाना जाता है। यहां से चौखंबा, त्रिशूल, नंदा देवी, शिवलिंग और पंचाचूली जैसी चोटियों के दृश्य दिखाई दे सकते हैं।</p><p><img style="width: 780.067px;" src="https://media.gtcbharat.com/wp-content/uploads/2026/10/binsar_1790848151.jpg"><br></p><p>यहां का Binsar Wildlife Sanctuary भी प्रमुख आकर्षण है। पर्यटन विभाग के अनुसार अभयारण्य लगभग 47 वर्ग किलोमीटर में फैला है और यहां विभिन्न वन्यजीवों के साथ करीब 200 प्रजातियों के पक्षियों को देखा जा सकता है।</p><p>बिनसर में Zero Point तक ट्रेकिंग और जंगल के बीच नेचर वॉक जैसे विकल्प भी हैं।&nbsp;</p><h5 class=""><b>यहां बजट कैसे नियंत्रित करें?</b></h5><p>बजट ट्रिप के लिए पहले से होमस्टे या सस्ता होटल तलाशें। अगर चार लोग साथ जा रहे हैं तो कमरे और स्थानीय वाहन का खर्च साझा किया जा सकता है। साथ ही, यात्रा से पहले यह जरूर जांच लें कि जिन जगहों पर आप जाना चाहते हैं, वहां प्रवेश शुल्क या अन्य स्थानीय शुल्क लागू है या नहीं।</p><h5 class=""><b>₹5,000 में Trip का बजट कैसे बनाएं?</b></h5><p><b>अगर लक्ष्य प्रति व्यक्ति लगभग ₹5,000 रखना है, तो यात्रा को तीन हिस्सों में बांटना उपयोगी होगा:</b></p><ul><li>Travel: दिल्ली-NCR से आने-जाने का सार्वजनिक परिवहन या साझा वाहन।<br></li><li>Stay: चार लोगों के ग्रुप में बजट होटल या होमस्टे।<br></li><li>Food &amp; Local Travel: स्थानीय भोजन और साझा वाहन का इस्तेमाल।</li></ul><p>एक जरूरी बात यह है कि ₹5,000 को अनुमानित बजट मानें, निश्चित खर्च नहीं। Long Weekend, त्योहार, बर्फबारी या पर्यटन सीजन में होटल और परिवहन की कीमत बढ़ सकती है।</p><p>इसलिए टिकट और होटल जितना संभव हो पहले बुक करना बेहतर रहेगा। औली जैसे स्थानों पर एडवेंचर एक्टिविटी जोड़ने पर कुल खर्च और बढ़ सकता है।</p><h5 class=""><b>कौन सा डेस्टिनेशन चुनें?</b></h5><p>अगर आपकी प्राथमिकता शांति और पहाड़ी वातावरण है तो मुक्तेश्वर पर विचार कर सकते हैं। अगर आपको बर्फ और एडवेंचर पसंद है तो औली बेहतर विकल्प हो सकता है। वहीं जंगल, पक्षी और हिमालयी नजारों के लिए बिनसर को चुना जा सकता है।</p><p>यानी दिल्ली-NCR से Long Weekend में उत्तराखंड जाने वालों के पास तीनों जगहों पर अलग-अलग तरह का अनुभव लेने का विकल्प है। सही बजट, मौसम और यात्रा के साधन को ध्यान में रखकर इनमें से किसी एक जगह की 2-3 दिन की यात्रा तैयार की जा सकती है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ Long Weekend Trip: दिल्ली-NCR से कम बजट में उत्तराखंड के इन 3 पहाड़ी ठिकानों का करें प्लान, 5 हजार के आसपास हो सकता है खर्च ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/lifestyle-news/moringa-rice-flour-face-pack-6668 ]]></guid><title><![CDATA[ Beauty Tips: चावल के आटे में मिलाएं मोरिंगा पाउडर और दही, डल स्किन के लिए घर पर बनाएं DIY Face Pack ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/lifestyle-news/moringa-rice-flour-face-pack-6668 ]]></link><pubDate><![CDATA[Mon, 28 Sep 2026 17:29:07 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ त्वचा अगर बेजान, थकी हुई या रूखी नजर आने लगे तो अक्सर लोग महंगे स्किन केयर प्रोडक्ट्स की ओर रुख करते हैं। हालांकि, घर पर मौजूद कुछ सामान्य चीजों से तैयार किया गया DIY फेस पैक त्वचा को साफ, मुलायम और फ ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p>त्वचा अगर बेजान, थकी हुई या रूखी नजर आने लगे तो अक्सर लोग महंगे स्किन केयर प्रोडक्ट्स की ओर रुख करते हैं। हालांकि, घर पर मौजूद कुछ सामान्य चीजों से तैयार किया गया DIY फेस पैक त्वचा को साफ, मुलायम और फ्रेश महसूस कराने में मदद कर सकता है। ऐसा ही एक आसान मिश्रण मोरिंगा पाउडर, चावल के आटे और दही से तैयार किया जा सकता है।</p><p>मोरिंगा में एंटीऑक्सीडेंट कंपाउंड पाए जाते हैं, जबकि दही में मौजूद लैक्टिक एसिड त्वचा की ऊपरी सतह पर हल्का एक्सफोलिएशन करने में मदद कर सकता है। वहीं चावल का आटा त्वचा को साफ और स्मूद महसूस कराने में सहायक हो सकता है। हालांकि, इस तरह के घरेलू पैक को किसी त्वचा रोग का इलाज नहीं माना जाना चाहिए।</p><h5 class=""><b>DIY Face Pack बनाने के लिए क्या चाहिए?</b></h5><p>इस घरेलू पैक को तैयार करने के लिए बहुत ज्यादा सामग्री की जरूरत नहीं है। इसके लिए आपको मुख्य रूप से मोरिंगा पाउडर, चावल का आटा और दही चाहिए।</p><p>अगर शरीर की त्वचा पर मुंहासे की समस्या है तो इसमें थोड़ी मात्रा में नीम पाउडर मिलाने का विकल्प भी बताया जाता है। हालांकि, पहली बार इस पैक को इस्तेमाल करते समय नीम को शामिल न करना बेहतर है, ताकि किसी संभावित प्रतिक्रिया की स्थिति में कारण पहचानना आसान रहे।</p><p>एक साफ कटोरी में मोरिंगा पाउडर और चावल का आटा लें। दोनों को अच्छी तरह मिलाने के बाद इसमें जरूरत के अनुसार दही डालें। मिश्रण को तब तक मिलाएं जब तक एक समान और मुलायम पेस्ट तैयार न हो जाए।</p><p>पेस्ट न बहुत पतला होना चाहिए और न ही इतना गाढ़ा कि त्वचा पर फैलाना मुश्किल हो।</p><h5 class=""><b>Face और Body पर कैसे लगाएं?</b></h5><ul><li>पैक लगाने से पहले त्वचा को साफ कर लें। इसके बाद तैयार मिश्रण की एक पतली और समान परत चेहरे या शरीर की साफ त्वचा पर लगाएं।</li><li>इसे पूरी तरह सूखने तक त्वचा पर छोड़ने की जरूरत नहीं है। जब पैक हल्का सूख जाए तो सामान्य या गुनगुने पानी से धीरे-धीरे साफ कर लें।</li><li>पैक हटाते समय त्वचा को जोर से रगड़ने या स्क्रब करने से बचें। धोने के बाद त्वचा पर मॉइस्चराइजर लगाया जा सकता है।</li><li>अगर इस्तेमाल के दौरान जलन या असहजता महसूस हो तो पैक को तुरंत हटा देना चाहिए।</li></ul><h5 class=""><b>मोरिंगा, दही और चावल का आटा क्यों किए जाते हैं इस्तेमाल?</b></h5><p>मोरिंगा को एंटीऑक्सीडेंट कंपाउंड्स के लिए जाना जाता है। ये यौगिक त्वचा को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से होने वाले नुकसान से बचाने में भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, केवल मोरिंगा का त्वचा पर इस्तेमाल किसी बीमारी या त्वचा संबंधी समस्या के इलाज की गारंटी नहीं देता।</p><p>दही में प्राकृतिक रूप से लैक्टिक एसिड पाया जाता है। यह त्वचा की ऊपरी सतह पर हल्का एक्सफोलिएशन करने में मदद कर सकता है। इसी वजह से दही को कुछ घरेलू स्किन केयर रूटीन में शामिल किया जाता है।</p><p>चावल का आटा त्वचा को साफ करने और उसे अपेक्षाकृत स्मूद महसूस कराने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन इसके महीन कणों को त्वचा पर जोर से रगड़ना उचित नहीं है, क्योंकि इससे जलन या लालिमा हो सकती है।</p><h5 class=""><b>Sensitive Skin वालों के लिए जरूरी सावधानी</b></h5><p>हर DIY स्किन केयर पैक सभी लोगों की त्वचा पर एक जैसा असर नहीं करता। खासकर संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को सीधे चेहरे पर कोई नया मिश्रण लगाने से पहले Patch Test करना चाहिए।</p><p>इसके लिए थोड़ी मात्रा में पैक हाथ या त्वचा के किसी छोटे हिस्से पर लगाकर प्रतिक्रिया देखें। अगर वहां खुजली, लालिमा, जलन या सूजन दिखाई देती है तो इसे तुरंत पानी से धो लें और दोबारा इस्तेमाल न करें।</p><p>अगर त्वचा पर पहले से सक्रिय मुंहासे, घाव, संक्रमण या बहुत ज्यादा संवेदनशीलता है, तो ऐसे घरेलू प्रयोग करने से पहले त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।</p><h5 class=""><b>कितनी बार इस्तेमाल करें?</b></h5><p>दिए गए घरेलू नुस्खे में इस्तेमाल की कोई निश्चित आवृत्ति निर्धारित नहीं है। इसलिए इसे रोजाना लगाने के बजाय त्वचा की प्रतिक्रिया को ध्यान में रखना जरूरी है। किसी भी DIY पैक का उद्देश्य त्वचा को साफ और आरामदायक महसूस कराना होना चाहिए, न कि अत्यधिक स्क्रबिंग या एक्सफोलिएशन करना।</p><p>अगर पैक लगाने के बाद त्वचा सामान्य रहती है तो इसे अपनी सामान्य स्किन केयर रूटीन में सीमित रूप से शामिल किया जा सकता है। वहीं किसी तरह की प्रतिक्रिया होने पर इसका इस्तेमाल रोक देना चाहिए।</p><p>&lt;blockquote class="instagram-media" data-instgrm-captioned data-instgrm-permalink="https://www.instagram.com/reel/DPQkAdvEaNv/?utm_source=ig_embed&amp;amp;utm_campaign=loading" data-instgrm-version="14" style=" background:#FFF; border:0; border-radius:3px; box-shadow:0 0 1px 0 rgba(0,0,0,0.5),0 1px 10px 0 rgba(0,0,0,0.15); margin: 1px; max-width:540px; min-width:326px; padding:0; width:99.375%; width:-webkit-calc(100% - 2px); width:calc(100% - 2px);"&gt;&lt;div style="padding:16px;"&gt; &lt;a href="https://www.instagram.com/reel/DPQkAdvEaNv/?utm_source=ig_embed&amp;amp;utm_campaign=loading" style=" background:#FFFFFF; line-height:0; padding:0 0; text-align:center; text-decoration:none; width:100%;" target="_blank"&gt; &lt;div style=" display: flex; flex-direction: row; align-items: center;"&gt; &lt;div style="background-color: #F4F4F4; border-radius: 50%; flex-grow: 0; height: 40px; margin-right: 14px; width: 40px;"&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="display: flex; flex-direction: column; flex-grow: 1; justify-content: center;"&gt; &lt;div style=" background-color: #F4F4F4; border-radius: 4px; flex-grow: 0; height: 14px; margin-bottom: 6px; width: 100px;"&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style=" background-color: #F4F4F4; border-radius: 4px; flex-grow: 0; height: 14px; width: 60px;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="padding: 19% 0;"&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="display:block; height:50px; margin:0 auto 12px; width:50px;"&gt;&lt;svg width="50px" height="50px" 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type='plain'><![CDATA[ Beauty Tips: चावल के आटे में मिलाएं मोरिंगा पाउडर और दही, डल स्किन के लिए घर पर बनाएं DIY Face Pack ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/lifestyle-news/pitru-paksha-2026-shradh-dates-calendar-6552 ]]></guid><title><![CDATA[ पितृपक्ष 2026: 26 या 27 सितंबर से शुरू होगा श्राद्ध पक्ष? जानें पूरी तिथियां, महत्व और कौए को भोजन कराने की वजह ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/lifestyle-news/pitru-paksha-2026-shradh-dates-calendar-6552 ]]></link><pubDate><![CDATA[Thu, 24 Sep 2026 11:32:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ नई दिल्ली: हिंदू धर्म में पितृपक्ष या श्राद्ध पक्ष को पूर्वजों के स्मरण और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने की महत्वपूर्ण अवधि माना जाता है। इस दौरान लोग अपने दिवंगत पूर्वजों के लिए श्राद्ध, तर्पण, पिंड ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>नई दिल्ली: </b>हिंदू धर्म में पितृपक्ष या श्राद्ध पक्ष को पूर्वजों के स्मरण और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने की महत्वपूर्ण अवधि माना जाता है। इस दौरान लोग अपने दिवंगत पूर्वजों के लिए श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान, दान और भोजन कराने जैसे धार्मिक कर्म करते हैं। वर्ष 2026 में पितृपक्ष की शुरुआत को लेकर 26 और 27 सितंबर की तारीख सामने आ रही है। इसकी वजह पूर्णिमा श्राद्ध और प्रतिपदा से शुरू होने वाले मुख्य पितृपक्ष के बीच का अंतर है।</span></p><h5 class=""><b>26 या 27 सितंबर, कब से शुरू होगा पितृपक्ष?</b></h5><p>पंचांग के अनुसार, 26 सितंबर 2026, शनिवार को भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा का श्राद्ध किया जाएगा। इसके अगले दिन यानी 27 सितंबर, रविवार को आश्विन कृष्ण पक्ष प्रतिपदा से नियमित पितृपक्ष की शुरुआत मानी जाती है। यही कारण है कि कुछ पंचांग और धार्मिक लेख पितृपक्ष या श्राद्ध पक्ष का व्यापक आरंभ 26 सितंबर से बताते हैं, जबकि मुख्य पितृपक्ष की तिथि 27 सितंबर से मानी जाती है।&nbsp;</p><p><span style="font-size: 1rem;">जानकारी के मुताबिक, आश्विन कृष्ण पक्ष प्रतिपदा तिथि 26 सितंबर की रात में शुरू हो जाएगी, लेकिन प्रतिपदा का श्राद्ध 27 सितंबर को किया जाएगा। वहीं 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध और तर्पण का विधान रहेगा।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">इसलिए आसान भाषा में समझें तो 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध और 27 सितंबर से प्रतिपदा सहित मुख्य पितृपक्ष माना जा सकता है। पितृपक्ष का समापन 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा।</span></p><h5 class=""><b>पितृपक्ष 2026 की श्राद्ध तिथियां</b></h5><p>विभिन्न पंचांगों में तिथियों के आरंभ और समाप्ति के समय के आधार पर कुछ अंतर दिखाई देता है। उपलब्ध पंचांग-स्रोतों के अनुसार 2026 में प्रमुख श्राद्ध तिथियां इस प्रकार हैं:</p><table class="table table-bordered"><tbody><tr><td>तारीख<span style="white-space:pre">	</span></td><td>दिन</td><td>श्राद्ध</td></tr><tr><td>26 सितंबर<span style="white-space:pre">	</span></td><td>शनिवार</td><td>पूर्णिमा श्राद्ध</td></tr><tr><td>27 सितंबर</td><td>रविवार</td><td>प्रतिपदा श्राद्ध</td></tr><tr><td>28 सितंबर</td><td>सोमवार</td><td>द्वितीया श्राद्ध</td></tr><tr><td>29 सितंबर</td><td>मंगलवार</td><td>तृतीया श्राद्ध</td></tr><tr><td>30 सितंबर</td><td>बुधवार</td><td>चतुर्थी श्राद्ध</td></tr><tr><td>1 अक्टूबर</td><td>गुरुवार</td><td>पंचमी श्राद्ध</td></tr><tr><td>2 अक्टूबर</td><td>शुक्रवार</td><td>षष्ठी/सप्तमी से जुड़े श्राद्ध</td></tr><tr><td>3 अक्टूबर</td><td>शनिवार</td><td>अष्टमी श्राद्ध</td></tr><tr><td>4 अक्टूबर</td><td>रविवार</td><td><p>नवमी श्राद्ध</p></td></tr><tr><td>5 अक्टूबर</td><td>सोमवार</td><td>दशमी श्राद्ध</td></tr><tr><td>6 अक्टूबर</td><td>मंगलवार</td><td>एकादशी श्राद्ध</td></tr><tr><td>7 अक्टूबर</td><td>बुधवार</td><td>द्वादशी श्राद्ध</td></tr><tr><td>8 अक्टूबर</td><td>गुरुवार</td><td>त्रयोदशी श्राद्ध</td></tr><tr><td>9 अक्टूबर</td><td>शुक्रवार</td><td>चतुर्दशी श्राद्ध</td></tr><tr><td>10 अक्टूबर</td><td>शनिवार</td><td>सर्वपितृ अमावस्या</td></tr></tbody></table><h5 class=""><b>किस तिथि को किसका श्राद्ध किया जाता है?</b></h5><p>इस वर्ष षष्ठी और सप्तमी का श्राद्ध 2 अक्टूबर को एक ही दिन पड़ रहा है। वहीं द्रिक पंचांग की सूची में कुछ तिथियों के एक ही दिन आने का विवरण अलग है। इससे स्पष्ट है कि श्राद्ध के लिए केवल सामान्य कैलेंडर तारीख देखने के बजाय स्थानीय पंचांग और तिथि के समय को ध्यान में रखना जरूरी है।</p><p><span style="font-size: 1rem;">पितृपक्ष में सामान्य तौर पर पूर्वज का श्राद्ध उनकी मृत्यु की तिथि यानी जिस चंद्र तिथि को उनका निधन हुआ था, उसी तिथि पर करने की परंपरा बताई जाती है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी व्यक्ति का निधन कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को हुआ था, तो पितृपक्ष में दशमी तिथि पर उनका श्राद्ध किया जाता है।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">अगर किसी पूर्वज की मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं है या किसी कारण से उस तिथि पर श्राद्ध नहीं हो पाया, तो धार्मिक परंपरा में सर्वपितृ अमावस्या को उनके लिए श्राद्ध और तर्पण करने का महत्व बताया गया है। 2026 में सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर, शनिवार को होगी।</span></p><h5 class=""><b>पितृपक्ष में तर्पण और पिंडदान का क्या महत्व है?</b></h5><p>धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृपक्ष में पूर्वजों का स्मरण करते हुए तर्पण और पिंडदान किया जाता है। तर्पण के लिए जल में काले तिल और कुश आदि का प्रयोग किए जाने की परंपरा है। इसके बाद विधि के अनुसार पितरों को जल अर्पित किया जाता है।</p><p>पिंडदान में चावल, जौ का आटा, काले तिल, दूध, घी और शहद जैसी सामग्री से पिंड तैयार कर पूर्वजों को अर्पित करने की मान्यता है। इसके अलावा जरूरतमंद लोगों को भोजन कराना और अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र या अन्य चीजों का दान करना भी इस अवधि से जुड़ी धार्मिक परंपराओं में शामिल है।</p><h5 class=""><b>श्राद्ध में कौए को क्यों खिलाया जाता है खाना?</b></h5><p>पितृपक्ष के दौरान कौए को भोजन कराने की परंपरा सबसे ज्यादा दिखाई देने वाली रस्मों में से एक है। लाइव हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, श्राद्ध के भोजन में पंचबलि की परंपरा बताई गई है, जिसमें कौए, कुत्ते, गाय, चींटियों और देवताओं के लिए भोजन निकालने का विधान बताया गया है।</p><p>कौए को भोजन कराने को काक बलि कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार कौए को पितरों का प्रतीक माना जाता है और उसके माध्यम से पूर्वजों तक भोजन पहुंचने की प्रतीकात्मक धारणा जुड़ी हुई है। इसी वजह से श्राद्ध के भोजन में सबसे पहले कौए के लिए भोजन निकालने की परंपरा कई परिवारों में निभाई जाती है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">इसके साथ ही गाय, कुत्ते और चींटियों के लिए भी भोजन निकालने की परंपरा बताई गई है। यह व्यवस्था केवल धार्मिक कर्मकांड तक सीमित नहीं है, बल्कि जीव-जंतुओं के प्रति भोजन और करुणा की भावना से भी जुड़ी हुई मानी जाती है।</span></p><h5 class=""><b>श्राद्ध में ब्राह्मण भोजन और दान की परंपरा</b></h5><p class="blue-bg-white"><b><i>पितृपक्ष के दौरान कई परिवार अपने पूर्वजों की तिथि पर ब्राह्मण भोजन कराने की परंपरा निभाते हैं। भोजन के बाद वस्त्र, अन्न और दक्षिणा देने की परंपरा भी कई धार्मिक मान्यताओं में बताई गई है। साथ ही जरूरतमंद लोगों को भोजन कराना और दान करना भी इस अवधि का हिस्सा माना जाता है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">धार्मिक परंपरा में इस पूरे कर्म का उद्देश्य पूर्वजों का स्मरण, उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना और परिवार की ओर से श्रद्धा अर्पित करना माना जाता है।</span></i></b></p><h5 class=""><b>10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या क्यों खास?</b></h5><p>10 अक्टूबर 2026, शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या होगी। इसे पितृपक्ष का अंतिम दिन माना जाता है। इस दिन उन पूर्वजों के लिए भी श्राद्ध-तर्पण करने की परंपरा है जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है या जिनका श्राद्ध किसी कारण से निर्धारित तिथि पर नहीं हो पाया।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">इसी वजह से सर्वपितृ अमावस्या को पितृपक्ष का महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। इस दिन लोग अपने सभी ज्ञात-अज्ञात पूर्वजों का स्मरण करते हुए तर्पण, पिंडदान, भोजन और दान जैसे कर्म करते हैं।</span></p><h5 class=""><b>2026 में पितृपक्ष को लेकर क्या ध्यान रखें?</b></h5><p>पितृपक्ष की तिथियां चंद्र तिथियों पर आधारित होती हैं। इसलिए सामान्य अंग्रेजी कैलेंडर की तारीख और वास्तविक तिथि के आरंभ या समाप्ति समय में अंतर हो सकता है। अलग-अलग स्थानों के पंचांग में भी समय का अंतर संभव है। इसलिए यदि कोई व्यक्ति अपने परिवार के पूर्वज का श्राद्ध कर रहा है, तो स्थानीय पंचांग के अनुसार तिथि और श्राद्ध मुहूर्त की पुष्टि करना उचित रहेगा।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">कुल मिलाकर, वर्ष 2026 में 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध, 27 सितंबर से मुख्य पितृपक्ष और 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या रहेगी। इस दौरान श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान, दान और जीव-जंतुओं के लिए भोजन निकालने की धार्मिक परंपराएं निभाई जाएंगी।</span></p><p class="grey-bg-red"><b><i>नोट: धार्मिक तिथियों और कर्मकांडों की विधि अलग-अलग क्षेत्र, परिवार और पंचांग परंपराओं के अनुसार भिन्न हो सकती है। यहां दी गई जानकारी उपलब्ध पंचांग और प्रकाशित धार्मिक स्रोतों पर आधारित है।</i></b></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ पितृपक्ष 2026: 26 या 27 सितंबर से शुरू होगा श्राद्ध पक्ष? जानें पूरी तिथियां, महत्व और कौए को भोजन कराने की वजह ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/lifestyle-news/pink-modak-recipe-6348 ]]></guid><title><![CDATA[ Pink Modak Recipe: बिना गैस और चाशनी के 5 मिनट में बनाएं बप्पा के लिए गुलाबी मोदक ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/lifestyle-news/pink-modak-recipe-6348 ]]></link><pubDate><![CDATA[Mon, 14 Sep 2026 15:46:51 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ Pink Modak Recipe: गणेश उत्सव के दौरान बप्पा को मोदक का भोग लगाने की परंपरा है। अगर आप भी घर पर कुछ ऐसा बनाना चाहते हैं जो स्वादिष्ट होने के साथ जल्दी तैयार हो जाए, तो बिना पकाए बनने वाले ये पिंक मोदक ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p>Pink Modak Recipe: <b>गणेश उत्सव</b> के दौरान बप्पा को मोदक का भोग लगाने की परंपरा है। अगर आप भी घर पर कुछ ऐसा बनाना चाहते हैं जो स्वादिष्ट होने के साथ जल्दी तैयार हो जाए, तो बिना पकाए बनने वाले ये पिंक मोदक एक आसान विकल्प हो सकते हैं। इस रेसिपी में न तो गैस जलाने की जरूरत है और न ही चाशनी बनाने की झंझट। खास बात यह है कि इसे करीब 5 मिनट में तैयार किया जा सकता है।</p><p>इस आसान रेसिपी को @EatYammiecious ने अपने YouTube चैनल पर शेयर किया है। काजू, नारियल, मिल्क पाउडर और गुलाब सिरप से तैयार होने वाले इन मोदक का रंग गुलाबी होता है और गुलाब की खुशबू इन्हें खास स्वाद देती है।</p><h5 class=""><b>पिंक मोदक बनाने के लिए चाहिए ये सामग्री</b></h5><p><b>इस नो-कुक मोदक को बनाने के लिए आपको बहुत ज्यादा सामान की जरूरत नहीं होगी। इसके लिए&nbsp;</b></p><ul><li>आधा कप काजू,</li><li>थोड़ा कम डेसिकेटेड कोकोनट</li><li>एक कप मिल्क पाउडर</li><li>1 से 2 टेबलस्पून चीनी</li><li>करीब एक चौथाई कप गुलाब सिरप</li><li>आधा टीस्पून इलायची पाउडर </li><li> थोड़ा सा जायफल</li></ul><p>मिश्रण को नरम और अच्छी तरह बाइंड करने के लिए एक टेबलस्पून ताजी दूध की मलाई इस्तेमाल की जाएगी। मोदक को सजाने के लिए बारीक कटे पिस्ता और सूखे गुलाब की पंखुड़ियां ली जा सकती हैं।</p><h5 class=""><b>सबसे पहले तैयार करें मोदक का मिश्रण</b></h5><p>सबसे पहले मिक्सी जार में काजू, डेसिकेटेड कोकोनट, चीनी और आधा कप मिल्क पाउडर डालें। इन सभी चीजों को बहुत बारीक करने के बजाय दरदरा-बारीक पीसें।</p><p>यहां एक बात का ध्यान रखना जरूरी है कि मिक्सी को लगातार न चलाएं। इसे थोड़ी-थोड़ी देर में रोककर चलाने से काजू ज्यादा तेल नहीं छोड़ेंगे और मिश्रण का टेक्सचर बेहतर रहेगा।</p><p>अब तैयार मिश्रण को एक बड़े बर्तन में निकाल लें। इसमें बचा हुआ मिल्क पाउडर, इलायची पाउडर और थोड़ा सा घिसा हुआ जायफल डालकर अच्छी तरह मिला लें।</p><h5 class=""><b>गुलाब सिरप देगा पिंक कलर</b></h5><p>अब मिश्रण में धीरे-धीरे गुलाब सिरप डालते जाएं और हाथों से इसे मसलते हुए गूंथें। सिरप एक साथ डालने के बजाय थोड़ा-थोड़ा मिलाना बेहतर रहेगा, ताकि मिश्रण की कंसिस्टेंसी को आसानी से नियंत्रित किया जा सके।</p><p>गुलाब सिरप न सिर्फ मिश्रण को गुलाबी रंग देगा, बल्कि इसमें हल्की गुलाब की खुशबू भी आएगी।</p><p>जब मिश्रण थोड़ा बंधने लगे तो इसमें एक टेबलस्पून ताजी दूध की मलाई डालें। इसे अच्छी तरह मसलते हुए तब तक मिलाएं, जब तक एक नरम और चिकना डो जैसा मिश्रण तैयार न हो जाए।</p><h5 class=""><b>मोदक मोल्ड में दें खूबसूरत शेप</b></h5><p>अब मोदक के सांचे को हल्का सा चिकना कर लें। सांचे के अंदर बारीक कटे पिस्ता और सूखे गुलाब की पंखुड़ियां डालें। इसके बाद तैयार मिश्रण को मोल्ड में भरकर दोनों तरफ से अच्छी तरह दबाएं।</p><p>सांचा खोलने पर गुलाबी रंग का खूबसूरत मोदक तैयार हो जाएगा। इसे प्लेट में निकालकर ऊपर से भी पिस्ता या सूखे गुलाब की पंखुड़ियों से सजाया जा सकता है।</p><p>इस रेसिपी की खासियत इसकी आसान तैयारी है। इसमें गैस पर कुछ पकाने की जरूरत नहीं पड़ती और चाशनी बनाने का झंझट भी नहीं होता। गणेश उत्सव के दौरान अगर कम समय में घर पर मोदक तैयार करने हैं, तो यह नो-कुक पिंक मोदक ट्राई किया जा सकता है।</p><p>&lt;iframe width="560" height="315" src="https://www.youtube.com/embed/lMpFWRet_98?si=QhM-tI24qpyP_Iy8" title="YouTube video player" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture; web-share" referrerpolicy="strict-origin-when-cross-origin" allowfullscreen&gt;&lt;/iframe&gt;</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ Pink Modak Recipe: बिना गैस और चाशनी के 5 मिनट में बनाएं बप्पा के लिए गुलाबी मोदक ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/lifestyle-news/miss-uganda-csection-gown-6157 ]]></guid><title><![CDATA[ Miss World Uganda का ‘Layers of Life’ गाउन क्यों है खास? C-Section की परतों से जुड़ी है मां बनने की कहानी ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/lifestyle-news/miss-uganda-csection-gown-6157 ]]></link><pubDate><![CDATA[Thu, 03 Sep 2026 14:01:15 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ Miss World Uganda 2026: फैशन की दुनिया में कुछ आउटफिट अपनी खूबसूरती के लिए याद किए जाते हैं, जबकि कुछ अपने पीछे छिपी कहानी की वजह से चर्चा में आ जाते हैं। मिस वर्ल्ड 2026 के World Designer Award में ऐ ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>Miss World Uganda 2026: </b>फैशन की दुनिया में कुछ आउटफिट अपनी खूबसूरती के लिए याद किए जाते हैं, जबकि कुछ अपने पीछे छिपी कहानी की वजह से चर्चा में आ जाते हैं। मिस वर्ल्ड 2026 के <b>World Designer Award</b> में ऐसा ही एक गाउन देखने को मिला, जिसने फैशन को मां बनने की शारीरिक यात्रा से जोड़ दिया।</p><p>वियतनाम में आयोजित इस कार्यक्रम में<b> Miss Uganda 2026</b> एक खास कॉउचर गाउन में नजर आईं। पहली नजर में यह एक खूबसूरत और आकर्षक डिजाइन दिखाई देता है, लेकिन इसकी थीम जानने के बाद इसकी अहमियत और बढ़ जाती है। इस आउटफिट को <b>‘Layers of Life’</b> नाम दिया गया है और इसकी प्रेरणा <b>C-section</b> यानी सीजेरियन डिलीवरी के दौरान शरीर की अलग-अलग परतों से ली गई है।</p><h5 class=""><b>मां बनने की यात्रा को फैशन में दिखाने की कोशिश</b></h5><p>‘Layers of Life’ को युगांडा की डिजाइनर<b> Keesha Abdallah</b> ने तैयार किया है। इस डिजाइन के पीछे उनके व्यक्तिगत अनुभव की भी भूमिका बताई गई है। नई मां बनने के अनुभव से गुजरने के बाद उनके मन में बच्चे के जन्म से जुड़ी शारीरिक प्रक्रिया को एक अलग माध्यम से प्रस्तुत करने का विचार आया।</p><p>डिजाइनर ने एक वीडियो में बताया कि वह इस बात को लेकर सोच रही थीं कि बच्चे के जन्म के दौरान शरीर जिन अलग-अलग परतों से होकर गुजरता है, उन्हें कॉउचर के माध्यम से कैसे दिखाया जा सकता है। इसी सोच से गाउन का कॉन्सेप्ट विकसित हुआ।</p><p>इस आउटफिट में अलग-अलग रंग, फैब्रिक टेक्सचर और लेयरिंग का इस्तेमाल सिर्फ सजावट के लिए नहीं किया गया। इनका उद्देश्य शरीर की अंदरूनी संरचनाओं और मां बनने की जटिल शारीरिक यात्रा को एक विजुअल रूप देना था।</p><h5 class=""><b>गाउन में क्यों दिखाई गईं सात परतें?</b></h5><p><b>C-section</b> को आम तौर पर लोग पेट पर लगाए गए चीरे और बाद में दिखाई देने वाले निशान से जोड़कर देखते हैं। लेकिन सर्जरी की प्रक्रिया इससे कहीं अधिक जटिल होती है। बच्चे तक पहुंचने के लिए सर्जिकल टीम को शरीर की कई परतों और संरचनाओं से होकर काम करना पड़ता है।</p><p>इसी अवधारणा को <b>‘Layers of Life’</b> में सात लेयर के जरिए प्रदर्शित करने की कोशिश की गई है। हालांकि, विशेषज्ञों के मुताबिक इसे इस तरह नहीं समझना चाहिए कि हर सीजेरियन ऑपरेशन में बिल्कुल सात परतों को एक जैसी तकनीक से काटा जाता है। सर्जिकल तरीका महिला की स्थिति और सर्जन द्वारा अपनाई गई तकनीक के अनुसार अलग हो सकता है।</p><p>&lt;blockquote class="instagram-media" data-instgrm-captioned data-instgrm-permalink="https://www.instagram.com/p/DcwDJWGAsu3/?utm_source=ig_embed&amp;amp;utm_campaign=loading" data-instgrm-version="14" style=" background:#FFF; 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&lt;div style=" color:#3897f0; font-family:Arial,sans-serif; font-size:14px; font-style:normal; font-weight:550; line-height:18px;"&gt;View this post on Instagram&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="padding: 12.5% 0;"&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="display: flex; flex-direction: row; margin-bottom: 14px; align-items: center;"&gt;&lt;div&gt; &lt;div style="background-color: #F4F4F4; border-radius: 50%; height: 12.5px; width: 12.5px; transform: translateX(0px) translateY(7px);"&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="background-color: #F4F4F4; height: 12.5px; transform: rotate(-45deg) translateX(3px) translateY(1px); width: 12.5px; flex-grow: 0; margin-right: 14px; margin-left: 2px;"&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="background-color: #F4F4F4; border-radius: 50%; height: 12.5px; width: 12.5px; transform: translateX(9px) translateY(-18px);"&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="margin-left: 8px;"&gt; &lt;div style=" background-color: #F4F4F4; border-radius: 50%; flex-grow: 0; height: 20px; width: 20px;"&gt;&lt;/div&gt; 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border-radius: 4px; flex-grow: 0; height: 14px; width: 144px;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;/a&gt;&lt;p style=" color:#c9c8cd; font-family:Arial,sans-serif; font-size:14px; line-height:17px; margin-bottom:0; margin-top:8px; overflow:hidden; padding:8px 0 7px; text-align:center; text-overflow:ellipsis; white-space:nowrap;"&gt;&lt;a href="https://www.instagram.com/p/DcwDJWGAsu3/?utm_source=ig_embed&amp;amp;utm_campaign=loading" style=" color:#c9c8cd; font-family:Arial,sans-serif; font-size:14px; font-style:normal; font-weight:normal; line-height:17px; text-decoration:none;" target="_blank"&gt;A post shared by Leading Ladies Africa™️ (@leadingladiesafrica)&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&lt;/div&gt;&lt;/blockquote&gt;<br>&lt;script async src="//www.instagram.com/embed.js"&gt;&lt;/script&gt;</p><h5 class=""><b>C-Section की सात परतों को कैसे समझाया गया?</b></h5><p>इस कॉन्सेप्ट को समझाने के लिए जिन प्रमुख परतों का उल्लेख किया गया है, उनमें सबसे पहले <b>त्वचा (Skin)</b> आती है। यह शरीर की बाहरी सुरक्षा परत है, जहां सर्जिकल चीरा लगाया जाता है।</p><p>इसके नीचे <b>Subcutaneous Fat</b> यानी त्वचा के नीचे मौजूद फैटी टिश्यू होता है। यह शरीर को कुशनिंग देने और ऊर्जा के भंडारण में भूमिका निभाता है।</p><p>इसके बाद<b> Fascia </b>आता है। यह मजबूत कनेक्टिव टिश्यू है, जो शरीर की मांसपेशियों और दूसरी संरचनाओं को सपोर्ट देने में मदद करता है।</p><p>अगली संरचना <b>Abdominal Muscle</b> यानी पेट की मांसपेशियां हैं। ये शरीर को मजबूती और सहारा देने का काम करती हैं। सीजेरियन सर्जरी में तकनीक का उद्देश्य अनावश्यक मांसपेशी क्षति को कम रखना होता है।<br></p><p>इसके बाद <b>Peritoneum</b> नाम की पतली झिल्ली आती है, जो पेट की अंदरूनी गुहा को लाइन करती है और कई अंगों को ढकती है।</p><p>फिर सर्जन <b>Uterus</b> यानी गर्भाशय तक पहुंचते हैं। गर्भावस्था के दौरान भ्रूण का विकास इसी अंग में होता है और सीजेरियन डिलीवरी में बच्चे को बाहर निकालने के लिए गर्भाशय पर सर्जिकल चीरा लगाया जाता है।</p><p>आखिर में <b>Amniotic Sac</b> यानी एम्नियोटिक सैक का उल्लेख किया जाता है। यह वह थैली है जिसमें गर्भावस्था के दौरान बच्चा एम्नियोटिक फ्लूइड के बीच सुरक्षित रहता है। डिलीवरी की प्रक्रिया में जरूरत के अनुसार इसे खोला जा सकता है।<br></p><h5 class=""><b>डॉक्टरों ने भी बताया डिजाइन का महत्व</b></h5><p>गायनेकोलॉजी विशेषज्ञ अनुसार, इस तरह का कॉन्सेप्ट <b>C-section</b> की जटिलता को आम लोगों के लिए एक विजुअल तरीके से समझाने में मदद कर सकता है।</p><p>उनके अनुसार, सीजेरियन डिलीवरी को सिर्फ पेट पर लगे एक कट के तौर पर देखना पूरी प्रक्रिया की पूरी तस्वीर नहीं बताता। सर्जरी के दौरान शरीर के भीतर मौजूद विभिन्न टिश्यू और संरचनाओं से होकर काम किया जाता है। गाउन इन्हीं अदृश्य प्रक्रियाओं को बाहरी डिजाइन के जरिए समझाने की कोशिश करता है।</p><p>गायनेकोलॉजी विशेषज्ञ ने भी इस तरह के डिजाइन को एक प्रभावी विजुअल कॉन्सेप्ट के तौर पर देखा। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि <b>C-section </b>को केवल <b>‘सात परतों को काटने’</b> वाली प्रक्रिया मानना पूरी तरह सटीक नहीं होगा।</p><p><img style="width: 780.067px;" src="https://media.gtcbharat.com/wp-content/uploads/2026/09/layers-of-life_1788425024.webp"><br></p><p><br></p><h5 class=""><b>सिर्फ फैशन नहीं, मां बनने की कहानी भी</b></h5><p><b>‘Layers of Life’ </b>की खासियत यही है कि यह एक ऐसे अनुभव को फैशन की भाषा में सामने लाता है, जिसके बारे में आमतौर पर कपड़ों के डिजाइन के संदर्भ में कल्पना नहीं की जाती। गाउन की लेयरिंग मां के शरीर में होने वाली जटिल प्रक्रिया का प्रतीक बनती है, जबकि इसका पूरा कॉन्सेप्ट बच्चे के जन्म और मातृत्व की यात्रा पर ध्यान खींचता है।</p><p>इस तरह<b> Miss Uganda 2026 </b>का यह गाउन केवल एक डिजाइनर आउटफिट नहीं रह जाता, बल्कि मां बनने के अनुभव, शरीर की जटिलता और सीजेरियन डिलीवरी को लेकर जागरूकता की एक रचनात्मक प्रस्तुति बन जाता है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ Miss World Uganda का ‘Layers of Life’ गाउन क्यों है खास? C-Section की परतों से जुड़ी है मां बनने की कहानी ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/lifestyle-news/atta-vs-suji-golgappa-6106 ]]></guid><title><![CDATA[ सूजी वाले या आटे वाले गोलगप्पे? Nutritionist ने बताया कौन-सा विकल्प है थोड़ा बेहतर, जानें वजह ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/lifestyle-news/atta-vs-suji-golgappa-6106 ]]></link><pubDate><![CDATA[Mon, 31 Aug 2026 12:04:25 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ गोलगप्पे, पानीपुरी, पुचका या पतासी&nbsp;— नाम अलग हो सकते हैं, लेकिन इनका स्वाद लोगों को खूब पसंद आता है। सड़क किनारे गोलगप्पे का ठेला देखते ही कई लोग रुक जाते हैं। इसके बाद गोलगप्पे वाला अक्सर एक सवा ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>गोलगप्पे, पानीपुरी, पुचका या पतासी&nbsp;</b>— नाम अलग हो सकते हैं, लेकिन इनका स्वाद लोगों को खूब पसंद आता है। सड़क किनारे गोलगप्पे का ठेला देखते ही कई लोग रुक जाते हैं। इसके बाद गोलगप्पे वाला अक्सर एक सवाल पूछता है—“<b>सूजी वाले खाएंगे या आटे वाले?</b>”</p><p>आमतौर पर लोग अपनी पसंद, कुरकुरेपन या स्वाद के आधार पर इसका जवाब देते हैं। लेकिन अगर बात पोषण की हो तो क्या दोनों विकल्प एक जैसे हैं? अगर आपको इन दोनों में से किसी एक को चुनना हो, तो पूरे गेहूं के आटे से बनी पुरी को थोड़ा बेहतर विकल्प माना जा सकता है।</p><p>हालांकि, इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आटे वाले गोलगप्पे हेल्दी फूड बन जाते हैं। गोलगप्पे की पुरी आमतौर पर डीप फ्राई की जाती है। इसलिए इसे खाते समय मात्रा और बाकी सामग्री का भी ध्यान रखना जरूरी है।</p><h5 class=""><b>आटे वाले गोलगप्पे क्यों हो सकते हैं बेहतर?</b></h5><p>सूजी और आटे से बनी पुरी के बीच सबसे अहम अंतर उनके पोषण से जुड़ा है। अगर गोलगप्पे पूरे गेहूं के आटे से तैयार किए गए हैं, तो उनमें सूजी की तुलना में फाइबर अधिक हो सकता है।</p><p>फाइबर पाचन प्रक्रिया को धीमा करने में मदद करता है। इसके मुकाबले रिफाइंड सूजी अपेक्षाकृत जल्दी पच सकती है। यही वजह है कि पोषण के नजरिए से पूरे गेहूं के आटे से बनी पुरी को सूजी वाली पुरी पर थोड़ी प्राथमिकता दी जा सकती है।</p><p>इसके अलावा, पूरे गेहूं के आटे में कुछ विटामिन, मिनरल्स और अन्य प्लांट कंपाउंड्स भी मिल सकते हैं। हालांकि, इन दोनों के बीच अंतर को इतना बड़ा नहीं माना जाना चाहिए कि गोलगप्पे को संपूर्ण या हेल्दी मील समझ लिया जाए।</p><h5 class=""><b>क्या सूजी वाले गोलगप्पे बिल्कुल नहीं खाने चाहिए?</b></h5><p>ऐसा नहीं है। अगर आपको सूजी वाले गोलगप्पे ज्यादा पसंद हैं तो कभी-कभार इन्हें खाया जा सकता है। सूजी की पुरी अपनी कुरकुरी और क्रिस्पी टेक्सचर के लिए काफी पसंद की जाती है।</p><p>लेकिन यहां एक और बात ध्यान देने वाली है। पुरी को डीप फ्राई किया जाता है और इससे खाने में तेल की मात्रा बढ़ती है। उपलब्ध एक्सपर्ट जानकारी के मुताबिक, कुछ परिस्थितियों में सूजी की पुरी ज्यादा तेल सोख सकती है, जिससे उसमें फैट की मात्रा बढ़ सकती है।</p><p>फिर भी यह याद रखना जरूरी है कि सूजी और आटे दोनों की पुरी तली हुई होती हैं। इसलिए केवल आटे वाली पुरी चुन लेने से गोलगप्पे पूरी तरह हेल्दी स्नैक नहीं बन जाते।</p><h5 class=""><b>गोलगप्पे की पूरी प्लेट का पोषण भी मायने रखता है</b></h5><p>जब हम गोलगप्पे खाते हैं तो सिर्फ पुरी नहीं खाते। उसके अंदर आलू या दूसरी फिलिंग, मसाले, नमक, मीठी चटनी और पानी भी होता है। इसलिए पूरी प्लेट का पोषण केवल इस बात पर निर्भर नहीं करता कि पुरी सूजी की है या आटे की।</p><p>अगर आप थोड़ा बेहतर विकल्प चाहते हैं तो गोलगप्पे की फिलिंग पर भी ध्यान दिया जा सकता है। चना या स्प्राउट्स जैसी चीजों को शामिल करने से स्नैक में प्रोटीन और फाइबर बढ़ाया जा सकता है। इससे सिर्फ आलू पर निर्भरता भी कम हो सकती है।</p><h5 class=""><b>अगली बार गोलगप्पे वाले से क्या कहें?</b></h5><p>अगर आपके सामने दो विकल्प हैं और एक पुरी पूरे गेहूं के आटे से बनी है, जबकि दूसरी रिफाइंड सूजी से, तो पोषण के लिहाज से आटे वाली पुरी चुनना थोड़ा बेहतर फैसला हो सकता है।</p><p>लेकिन असली बात यहां मात्रा की है। आटे की पुरी चुनने के बाद भी अगर आप बहुत ज्यादा गोलगप्पे खा लेते हैं तो इसका फायदा सीमित हो जाएगा। इसलिए इसे कभी-कभार और सीमित मात्रा में खाना बेहतर है।</p><p>साथ ही, गोलगप्पे खाते समय साफ-सफाई का भी ध्यान रखना चाहिए। खासकर सड़क किनारे मिलने वाले पानी और सामग्री की स्वच्छता महत्वपूर्ण है।</p><h5 class=""><b>ये बात हमेशा याद रखें</b></h5><p>गोलगप्पे स्वाद के लिए खाए जाने वाला स्नैक हैं, इन्हें रोजाना के संतुलित भोजन का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। यदि आप वजन, ब्लड शुगर या किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या के कारण अपनी डाइट को लेकर विशेष सावधानी बरत रहे हैं, तो व्यक्तिगत सलाह के लिए डॉक्टर या योग्य न्यूट्रिशनिस्ट से संपर्क करना बेहतर है।</p><p>सूजी और आटे के गोलगप्पों में चुनाव करना हो तो पूरे गेहूं के आटे वाले गोलगप्पे को थोड़ा बेहतर विकल्प माना जा सकता है, खासकर फाइबर के नजरिए से। लेकिन दोनों ही डीप फ्राई होते हैं, इसलिए सबसे ज्यादा जरूरी है—कम मात्रा, बेहतर फिलिंग और साफ-सफाई का ध्यान।</p><h5 class=""><b>Disclaimer</b></h5><p><b>अस्वीकरण: </b>यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी एवं विशेषज्ञ की राय पर आधारित है। स्वास्थ्य या डाइट से जुड़ा कोई भी बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ सूजी वाले या आटे वाले गोलगप्पे? Nutritionist ने बताया कौन-सा विकल्प है थोड़ा बेहतर, जानें वजह ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/lifestyle-news/monsoon-insects-light-natural-repellent-home-tips-5961 ]]></guid><title><![CDATA[ शाम होते ही लाइट के आसपास क्यों जमा होते हैं कीड़े? अपनाएं ये 2 आसान उपाय ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/lifestyle-news/monsoon-insects-light-natural-repellent-home-tips-5961 ]]></link><pubDate><![CDATA[Fri, 21 Aug 2026 15:28:29 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ मानसून के मौसम में शाम ढलते ही घर की लाइट के आसपास छोटे-छोटे उड़ने वाले कीड़े नजर आना आम बात है। तेज रोशनी, नमी और आसपास जमा पानी की वजह से मच्छर, छोटी मक्खियां और दूसरे कीड़े घर के आसपास ज्यादा दिखाई ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p>मानसून के मौसम में शाम ढलते ही घर की लाइट के आसपास छोटे-छोटे उड़ने वाले कीड़े नजर आना आम बात है। तेज रोशनी, नमी और आसपास जमा पानी की वजह से <b>मच्छर, छोटी मक्खियां </b>और दूसरे <b>कीड़े</b> घर के आसपास ज्यादा दिखाई दे सकते हैं। अगर आप भी रोज इस परेशानी से जूझ रहे हैं, तो कुछ आसान उपायों से इनकी संख्या कम की जा सकती है।</p><h5 class=""><b>मानसून में क्यों बढ़ जाती है कीड़ों की परेशानी?</b></h5><p>बारिश के मौसम में वातावरण में नमी बढ़ जाती है। इसके साथ घरों के आसपास पानी जमा होने और शाम के समय रोशनी जलने से कई तरह के छोटे उड़ने वाले कीड़े आकर्षित हो सकते हैं। खासतौर पर बालकनी, दरवाजे, खिड़कियों और गार्डन के पास इनकी संख्या ज्यादा नजर आ सकती है।</p><p>कई बार ये कीड़े घर के अंदर भी पहुंच जाते हैं। खाने-पीने की चीजों के आसपास इनके मंडराने से परेशानी बढ़ सकती है। ऐसे में केवल कीड़ों को भगाने के बजाय उन कारणों को कम करना जरूरी है, जिनकी वजह से वे घर की ओर आकर्षित हो रहे हैं।</p><h5 class=""><b>पहला उपाय: बाहर की लाइट बदलें</b></h5><p>अगर आपके घर के बाहर शाम होते ही लाइट के आसपास बड़ी संख्या में कीड़े जमा हो जाते हैं, तो सबसे पहले रोशनी के प्रकार पर ध्यान दें।</p><p>उड़ने वाले कई कीड़े रात में रोशनी की ओर आकर्षित होते हैं। तेज सफेद रोशनी वाली लाइट के आसपास इनकी मौजूदगी ज्यादा महसूस हो सकती है। इसलिए बालकनी, दरवाजे या गार्डन में ऐसी LED लाइट इस्तेमाल करना बेहतर विकल्प हो सकता है, जिसमें UV रोशनी कम हो।</p><p>आप चाहें तो <b>Warm</b> या<b> पीले रंग</b> की <b>LED</b> का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे बाहर की रोशनी भी बनी रहती है और कुछ परिस्थितियों में कीड़ों का आकर्षण कम किया जा सकता है।</p><h5 class=""><b>दूसरा उपाय: Natural Repellent का इस्तेमाल</b></h5><p>घर के उन हिस्सों में जहां कीड़े बार-बार आते हैं, कुछ प्राकृतिक खुशबू वाले रिपेलेंट इस्तेमाल किए जा सकते हैं।</p><p>लैवेंडर, पेपरमिंट, सिट्रोनेला और यूकेलिप्टस जैसे essential oils की तेज खुशबू कई प्रकार के कीड़ों को दूर रखने में मदद कर सकती है। इन्हें उचित तरीके से इस्तेमाल करते हुए उन जगहों पर लगाया जा सकता है जहां कीड़ों की मौजूदगी ज्यादा रहती है।</p><p>बालकनी या गार्डन में तुलसी, रोजमेरी और लेमनग्रास जैसे पौधे रखना भी एक अतिरिक्त उपाय हो सकता है। हालांकि, इन पौधों या तेलों को मच्छरों और दूसरे कीड़ों से पूरी तरह बचाव का विकल्प नहीं मानना चाहिए।</p><h5 class=""><b>सिर्फ लाइट बदलना काफी नहीं</b></h5><p>अगर घर में कीड़ों की समस्या लगातार बनी हुई है, तो आसपास का वातावरण भी जांचें। लाइट, खिड़की और दरवाजे के आसपास धूल या गंदगी जमा न होने दें। नियमित सफाई से कीड़ों के जमा होने की जगह कम की जा सकती है।</p><p>मानसून के दौरान जमा पानी पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। गमले की प्लेट, बाल्टी, कूलर, पुराने डिब्बे या किसी अन्य कंटेनर में पानी जमा न रहने दें। ठहरा हुआ पानी मच्छरों के लिए प्रजनन की जगह बन सकता है।</p><p>इसके अलावा खिड़की, दरवाजे, दीवार या छत में छोटे छेद या गैप दिखाई दें तो उन्हें बंद कर दें। इससे बाहर मौजूद कीड़ों के घर के अंदर आने के रास्ते भी कम किए जा सकते हैं।</p><h5 class=""><b>आसान फॉर्मूला याद रखें</b></h5><p><b>Warm LED   Natural Repellent   साफ-सफाई   जमा पानी से बचाव = घर के आसपास कीड़ों की परेशानी कम करने में मदद।</b></p><p>अगर कीड़ों की संख्या असामान्य रूप से ज्यादा हो, या घर में मच्छरों की समस्या लगातार बनी रहे, तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय उचित <b>pest-control </b>या स्थानीय स्वास्थ्य सलाह लेना बेहतर है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ शाम होते ही लाइट के आसपास क्यों जमा होते हैं कीड़े? अपनाएं ये 2 आसान उपाय ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/lifestyle-news/egg-vs-chicken-protein-weight-loss-muscle-gain-5854 ]]></guid><title><![CDATA[ अंडा या चिकन? Weight Loss और Muscle Gain के लिए कौन सा Protein है ज्यादा बेहतर? ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/lifestyle-news/egg-vs-chicken-protein-weight-loss-muscle-gain-5854 ]]></link><pubDate><![CDATA[Thu, 13 Aug 2026 11:54:22 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ Chicken vs Egg: फिटनेस डाइट में किसे दें ज्यादा जगह?आज के समय में Weight Loss से लेकर Muscle Gain तक, फिटनेस पर ध्यान देने वाले लोगों की डाइट में प्रोटीन को खास महत्व दिया जाता है। जिम जाने वालों के ब ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>Chicken vs Egg: फिटनेस डाइट में किसे दें ज्यादा जगह?</b></p><p>आज के समय में <b>Weight Loss</b> से लेकर <b>Muscle Gain</b> तक, फिटनेस पर ध्यान देने वाले लोगों की डाइट में प्रोटीन को खास महत्व दिया जाता है। जिम जाने वालों के बीच अक्सर यह सवाल रहता है कि रोजाना प्रोटीन की जरूरत पूरी करने के लिए अंडा बेहतर है या चिकन?</p><p>दोनों ही प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं, लेकिन दोनों की पोषण संबंधी खूबियां अलग हैं। अगर आपका फोकस कम कैलोरी में ज्यादा प्रोटीन लेने पर है, तो चिकन ब्रेस्ट आगे निकलता है। वहीं, अगर प्रोटीन के साथ दूसरे जरूरी पोषक तत्व भी चाहिए तो अंडा एक अच्छा विकल्प हो सकता है।</p><h5 class=""><b>100 ग्राम चिकन और अंडे में कितना Protein?</b></h5><p>अगर केवल प्रोटीन की मात्रा की तुलना करें तो चिकन ब्रेस्ट का पलड़ा भारी है। 100 ग्राम पके हुए और बिना स्किन वाले चिकन ब्रेस्ट में करीब 31 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है। इसके मुकाबले 100 ग्राम उबले अंडे में लगभग 12.6 ग्राम प्रोटीन मिलता है।</p><p>इस अंतर की वजह से कम कैलोरी में ज्यादा प्रोटीन लेने वाले लोगों के लिए चिकन ब्रेस्ट उपयोगी विकल्प बन सकता है। खासतौर पर जिन लोगों का लक्ष्य रोजाना अपने Protein Target को पूरा करना है, उनके लिए चिकन को भोजन में शामिल करना आसान हो सकता है।</p><p>हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अंडा कम उपयोगी है।</p><h5 class=""><b>अंडे की खासियत सिर्फ Protein नहीं</b></h5><p>अंडा एक ऐसा खाद्य पदार्थ है जिसमें प्रोटीन के अलावा कई दूसरे पोषक तत्व भी मिलते हैं। इसमें Vitamin A, Vitamin D, Vitamin B12, Choline और Selenium जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं।</p><p>यही कारण है कि फिटनेस डाइट में अंडे की भूमिका केवल प्रोटीन तक सीमित नहीं रहती। इसे बनाना भी आसान है और नाश्ते से लेकर दिन के दूसरे भोजन तक अलग-अलग तरीकों से शामिल किया जा सकता है।</p><p>जो लोग बजट और आसानी से बनने वाले भोजन को भी ध्यान में रखते हैं, उनके लिए अंडा रोज की डाइट में प्रोटीन जोड़ने का सुविधाजनक विकल्प हो सकता है।</p><h5 class=""><b>Weight Loss में Chicken कैसे मददगार हो सकता है?</b></h5><p>Weight Loss के दौरान कई लोग अपनी कैलोरी सीमित रखते हुए पर्याप्त प्रोटीन लेना चाहते हैं। ऐसे में चिकन ब्रेस्ट एक उपयोगी विकल्प हो सकता है, क्योंकि इसमें प्रोटीन की मात्रा ज्यादा होती है।</p><p>हालांकि चिकन किस तरह से पकाया जा रहा है, यह भी महत्वपूर्ण है। Deep Fried Chicken, ज्यादा तेल वाली ग्रेवी या हाई-कैलोरी सॉस भोजन की कुल कैलोरी बढ़ा सकते हैं। इसलिए फिटनेस डाइट में चिकन को उबालकर, ग्रिल करके या कम तेल में तैयार करना बेहतर विकल्प माना जा सकता है।</p><h5 class=""><b>अंडे को कैसे शामिल करें?</b></h5><p>अंडे को भी कई तरह से डाइट में शामिल किया जा सकता है। नाश्ते में उबले अंडे, वेजिटेबल ऑमलेट या एग भुर्जी जैसे विकल्प लिए जा सकते हैं। इसे मल्टीग्रेन टोस्ट और सब्जियों के साथ भी खाया जा सकता है।</p><p>यहां भी खाना पकाने का तरीका मायने रखता है। बहुत ज्यादा तेल या कैलोरी वाली सामग्री जोड़ने से आपकी पूरी डाइट का कैलोरी बैलेंस प्रभावित हो सकता है।</p><h5 class=""><b>Muscle Gain के लिए कौन बेहतर?</b></h5><p>Muscle Gain के लिए शरीर को पर्याप्त प्रोटीन की जरूरत होती है। इस लिहाज से चिकन ब्रेस्ट में प्रति 100 ग्राम ज्यादा प्रोटीन मिलने के कारण यह Protein Target पूरा करने में मददगार विकल्प हो सकता है।</p><p>लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि Muscle Gain करने वालों को अंडे को डाइट से हटाना चाहिए। अंडे में प्रोटीन के साथ कई जरूरी पोषक तत्व भी मिलते हैं। इसलिए दोनों को अपनी डाइट और जरूरत के अनुसार शामिल किया जा सकता है।</p><h5 class=""><b>Chicken या Egg, आखिर किसे चुनें?</b></h5><p>अगर आपकी प्राथमिकता कम कैलोरी में ज्यादा प्रोटीन लेना है, तो चिकन ब्रेस्ट बेहतर विकल्प हो सकता है। वहीं, अगर आप प्रोटीन के साथ अलग-अलग Vitamins और Minerals भी लेना चाहते हैं, तो अंडा मजबूत विकल्प है।</p><p>सबसे जरूरी बात यह है कि फिटनेस डाइट को केवल एक खाद्य पदार्थ तक सीमित करने की जरूरत नहीं है। Chicken और Egg दोनों को संतुलित मात्रा में शामिल करके रोज की Protein Requirement को पूरा करने की कोशिश की जा सकती है।</p><p>इसलिए सवाल सिर्फ यह नहीं है कि Chicken बेहतर है या Egg, बल्कि यह है कि आपके फिटनेस लक्ष्य, भोजन की पसंद और डाइट की जरूरत के हिसाब से दोनों को किस तरह शामिल किया जाए।</p><p><b>नोट: प्रोटीन की जरूरत हर व्यक्ति की उम्र, गतिविधि, शरीर और फिटनेस लक्ष्य के अनुसार अलग हो सकती है। किसी विशेष डाइट प्लान के लिए योग्य Nutritionist/Dietitian की सलाह लेना बेहतर है।</b></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ अंडा या चिकन? Weight Loss और Muscle Gain के लिए कौन सा Protein है ज्यादा बेहतर? ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/lifestyle-news/moong-dal-bhalla-protein-recipe-5829 ]]></guid><title><![CDATA[ Moong Dal Bhalla Recipe: जिम जाने वालों के लिए प्रोटीन से भरपूर हेल्दी नाश्ता, ऐसे बनाएं ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/lifestyle-news/moong-dal-bhalla-protein-recipe-5829 ]]></link><pubDate><![CDATA[Tue, 11 Aug 2026 11:24:08 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ वजन कम करने या फिटनेस पर ध्यान देने वाले लोगों के लिए डाइट का संतुलित होना बेहद जरूरी माना जाता है। अक्सर लोग फिटनेस रूटीन शुरू करते समय अपनी पसंदीदा चीजों को पूरी तरह छोड़ देते हैं, लेकिन अगर खाने को ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p>वजन कम करने या फिटनेस पर ध्यान देने वाले लोगों के लिए डाइट का संतुलित होना बेहद जरूरी माना जाता है। अक्सर लोग फिटनेस रूटीन शुरू करते समय अपनी पसंदीदा चीजों को पूरी तरह छोड़ देते हैं, लेकिन अगर खाने को सही तरीके से तैयार किया जाए तो स्वाद और हेल्दी डाइट दोनों को साथ रखा जा सकता है। ऐसी ही एक डिश है <b>मूंग दाल भल्ला</b>, जिसे बिना डीप फ्राई किए तैयार किया जा सकता है।</p><p>इस रेसिपी में <b>मूंग दाल </b>और थोड़ी <b>उड़द दाल</b> का इस्तेमाल किया जाता है। दी गई रेसिपी के अनुसार एक सर्विंग में करीब 285 कैलोरी और 17 ग्राम प्रोटीन मिलता है। इसके अलावा इसमें कार्बोहाइड्रेट, फैट, फाइबर और कैल्शियम भी मौजूद हैं। यही वजह है कि यह डिश ब्रेकफास्ट, लंच या डिनर के लिए एक विकल्प हो सकती है।</p><h5 class=""><b>मूंग दाल भल्ले में क्या है खास?</b></h5><p>पारंपरिक दही भल्ले को आमतौर पर तेल में तले हुए वड़ों से तैयार किया जाता है। वहीं इस रेसिपी में बैटर को तेल में तलने के बजाय स्टीम किया जाता है। इससे भल्ले हल्के और सॉफ्ट बनते हैं।</p><p>रेसिपी में इस्तेमाल होने वाली मूंग दाल प्रोटीन का स्रोत है, जबकि उड़द दाल भल्लों को टेक्सचर देने में मदद करती है। इसमें अदरक, हरी मिर्च, जीरा और हरा धनिया जैसे मसाले स्वाद बढ़ाते हैं।</p><p>दी गई पोषण जानकारी के मुताबिक एक सर्विंग में लगभग <b>17 ग्राम प्रोटीन, 37 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 6.87 ग्राम फैट, 4.32 ग्राम फाइबर और 302 मिलीग्राम कैल्शियम</b> मिलता है। हालांकि वास्तविक पोषण मात्रा इस्तेमाल की गई सामग्री और सर्विंग साइज के अनुसार बदल सकती है।</p><h5 class=""><b>मूंग दाल भल्ला बनाने के लिए सामग्री</b></h5><p>इस हेल्दी रेसिपी के लिए 100 ग्राम मूंग दाल और 30 ग्राम उड़द दाल की जरूरत होगी। इसके साथ आधा इंच अदरक, दो चुटकी हींग, दो हरी मिर्च, एक छोटा चम्मच जीरा, एक मुट्ठी हरा धनिया और स्वाद के अनुसार नमक लिया जाता है।</p><p>भल्लों को फुलाने के लिए करीब एक चौथाई छोटा चम्मच बेकिंग सोडा या एक छोटा चम्मच इनो इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा लगभग 1500 मिलीलीटर छाछ की जरूरत होगी।</p><p>हरी चटनी के लिए हरा धनिया, पुदीना, हरी मिर्च, 3-4 लहसुन की कलियां, थोड़ा अदरक और जीरा लिया जा सकता है।</p><h5 class=""><b>ऐसे तैयार करें सॉफ्ट भल्ले</b></h5><p>सबसे पहले मूंग और उड़द दाल को अच्छी तरह धोकर करीब 4 से 5 घंटे के लिए पानी में भिगो दें। दाल अच्छी तरह फूल जाए तो उसका पानी निकालकर इसे मिक्सर में डालें। इसमें <b>अदरक, हरी मिर्च, हरा धनिया और जीरा</b> मिलाकर बारीक पीस लें।</p><p>अब तैयार बैटर को एक बर्तन में निकालें और करीब दो मिनट तक अच्छी तरह फेंटें। बैटर को फेंटने से भल्लों को सॉफ्ट और स्पंजी टेक्सचर मिलने में मदद मिलती है। इसके बाद इसमें नमक और बेकिंग सोडा या इनो डालकर अच्छी तरह मिलाएं।</p><p>अब बैटर को तेल में तलने के बजाय हल्के से ग्रीस किए हुए मिनी इडली मोल्ड में डालें। इसे करीब 10 मिनट तक स्टीम करें। भल्ले तैयार होने के बाद उन्हें बाहर निकालकर थोड़ा ठंडा होने दें।</p><p>&lt;blockquote class="instagram-media" data-instgrm-captioned data-instgrm-permalink="https://www.instagram.com/reel/DZCLrZooFLQ/?utm_source=ig_embed&amp;amp;utm_campaign=loading" data-instgrm-version="14" style=" background:#FFF; border:0; border-radius:3px; box-shadow:0 0 1px 0 rgba(0,0,0,0.5),0 1px 10px 0 rgba(0,0,0,0.15); margin: 1px; max-width:540px; min-width:326px; padding:0; width:99.375%; width:-webkit-calc(100% - 2px); width:calc(100% - 2px);"&gt;&lt;div style="padding:16px;"&gt; &lt;a 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class=""><b>मसालेदार छाछ से बढ़ेगा स्वाद</b></h5><p>भल्लों के लिए छाछ तैयार करने के लिए हरा धनिया, पुदीना, हरी मिर्च, लहसुन, अदरक और जीरा दरदरा पीस लें। एक बड़े बर्तन में छाछ लें और उसमें यह मिश्रण डालें। स्वाद के अनुसार नमक और जीरा पाउडर मिलाएं।<br></p><p>अब स्टीम किए हुए भल्लों को इस मसालेदार छाछ में डाल दें। इन्हें करीब 1 से 2 घंटे तक छाछ में रहने दें, ताकि भल्ले अच्छी तरह छाछ सोख लें।</p><p>इसके बाद तैयार हैं सॉफ्ट, मसालेदार और प्रोटीन से भरपूर मूंग दाल भल्ले। इन्हें अपनी पसंद के अनुसार नाश्ते या दिन के किसी अन्य भोजन में शामिल किया जा सकता है।</p><h5 class=""><b>फिटनेस डाइट में कैसे करें शामिल?</b></h5><p>जिम जाने वाले या वजन घटाने पर ध्यान देने वाले लोग अक्सर ऐसी डिश की तलाश करते हैं जो स्वादिष्ट होने के साथ उनकी डाइट में प्रोटीन भी जोड़ सके। मूंग दाल भल्ला इसी तरह का एक विकल्प है। खास बात यह है कि इसमें वड़ों को तलने के बजाय स्टीम किया जाता है।</p><p>हालांकि वजन कम करने के लिए सिर्फ किसी एक रेसिपी पर निर्भर रहना सही नहीं है। पूरे दिन की डाइट, कुल कैलोरी, शारीरिक गतिविधि और व्यक्तिगत जरूरतों को ध्यान में रखना जरूरी है। किसी खास डाइट या फिटनेस लक्ष्य के लिए विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहेगा।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ Moong Dal Bhalla Recipe: जिम जाने वालों के लिए प्रोटीन से भरपूर हेल्दी नाश्ता, ऐसे बनाएं ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/lifestyle-news/relationship-tips-partner-texting-mistakes-healthy-communication-5718 ]]></guid><title><![CDATA[ Relationship Tips: पार्टनर को मैसेज करते समय भूलकर न करें ये 5 गलतियां, वरना बढ़ सकती हैं दूरियां ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/lifestyle-news/relationship-tips-partner-texting-mistakes-healthy-communication-5718 ]]></link><pubDate><![CDATA[Mon, 03 Aug 2026 12:28:31 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ आज के समय में रिश्तों की शुरुआत हो या उन्हें निभाने की बात, मैसेजिंग हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुकी है। कई बार लोग दिनभर व्यस्त रहते हैं और बातचीत का सबसे आसान जरिया टेक्स्ट मैसेज ही ह ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p>आज के समय में रिश्तों की शुरुआत हो या उन्हें निभाने की बात, <b>मैसेजिंग</b> हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुकी है। कई बार लोग दिनभर व्यस्त रहते हैं और बातचीत का सबसे आसान जरिया टेक्स्ट मैसेज ही होता है। लेकिन यही चैटिंग अगर सही तरीके से न की जाए, तो मजबूत रिश्तों में भी गलतफहमियां पैदा हो सकती हैं।</p><p>रिश्तों के विशेषज्ञ मानते हैं कि सिर्फ क्या लिखा जा रहा है, यह मायने नहीं रखता, बल्कि कैसे लिखा जा रहा है और सामने वाला उसे किस तरह समझ रहा है, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है। कई बार हमारी छोटी-सी टेक्स्टिंग आदतें सामने वाले को असहज कर देती हैं और धीरे-धीरे बातचीत कम होने लगती है।</p><p>अगर आप चाहते हैं कि आपका रिश्ता मजबूत बना रहे, तो मैसेज करते समय इन सामान्य गलतियों से बचना जरूरी है।</p><h5 class=""><b>1. हर बात को खुद से जोड़ना</b></h5><p>जब आपका पार्टनर अपनी किसी परेशानी या अनुभव के बारे में बात कर रहा हो, तो तुरंत अपनी कहानी बताने की बजाय पहले उसकी बात ध्यान से सुनें। हर बातचीत को अपने अनुभव की ओर मोड़ देने से सामने वाले को लग सकता है कि उसकी भावनाओं को महत्व नहीं दिया जा रहा।</p><p>कई बार लोगों को सलाह नहीं, सिर्फ एक अच्छा श्रोता चाहिए होता है।</p><h5 class=""><b>2. हमेशा छोटे और रूखे जवाब देना</b></h5><p>अगर हर मैसेज का जवाब सिर्फ "ओके", "हम्म", "ठीक है" या "नाइस" जैसे एक शब्दों में दिया जाए, तो बातचीत धीरे-धीरे खत्म होने लगती है।</p><p>बेहतर होगा कि जवाब में एक-दो लाइन और जोड़ें या कोई सवाल पूछें ताकि बातचीत स्वाभाविक रूप से आगे बढ़ सके।</p><h5 class=""><b>3. मजाक और ताने की सीमा समझें</b></h5><p>टेक्स्ट मैसेज में चेहरे के भाव और आवाज का अंदाज दिखाई नहीं देता। इसलिए जो बात आपको मजाक लग रही हो, वह सामने वाले को ताना या कटाक्ष महसूस हो सकती है।</p><p>अगर रिश्ता मजबूत रखना चाहते हैं तो संवेदनशील विषयों पर चैट में हल्के-फुल्के मजाक से भी सावधानी बरतनी चाहिए।</p><h5 class=""><b>4. तुरंत रिप्लाई की उम्मीद न करें</b></h5><p>हर व्यक्ति की अपनी दिनचर्या और जिम्मेदारियां होती हैं। अगर आपका पार्टनर तुरंत जवाब नहीं देता, तो लगातार मैसेज भेजना या बार-बार पूछना कि "कहां हो?" या "रिप्लाई क्यों नहीं कर रहे?" रिश्ते में अनावश्यक दबाव पैदा कर सकता है।</p><p>थोड़ा धैर्य रखना और सामने वाले के समय का सम्मान करना स्वस्थ रिश्ते की पहचान है।</p><h5 class=""><b>5. सिर्फ जरूरत पड़ने पर मैसेज करना</b></h5><p>अगर आपकी हर बातचीत किसी काम, मदद या जरूरत से शुरू होती है, तो धीरे-धीरे सामने वाले को यह महसूस हो सकता है कि आप उसे सिर्फ अपने काम के लिए याद करते हैं।</p><p>बिना किसी खास वजह के भी हालचाल पूछना, दिन कैसा रहा जानना या छोटी-सी शुभकामना भेजना रिश्ते को मजबूत बनाता है।</p><h5 class=""><b>इन आदतों से भी बचें</b></h5><p><b>कुछ और छोटी आदतें भी रिश्तों में दूरी बढ़ा सकती हैं—</b></p><ul><li>बिना वजह हर बात का गलत मतलब निकालना।<br></li><li>एक साथ बहुत लंबे-लंबे मैसेज भेजना।<br></li><li>चैट के बीच में बिना बताए घंटों गायब हो जाना।<br></li><li>हर बात में व्यंग्य या ताने का इस्तेमाल करना।<br></li><li>सामने वाले की बात पूरी पढ़े बिना जवाब देना।<br></li><li>बेहतर टेक्स्टिंग से मजबूत बनते हैं रिश्ते</li></ul><p>रिश्ते केवल बड़े सरप्राइज या महंगे गिफ्ट से नहीं चलते, बल्कि रोजमर्रा की छोटी-छोटी बातों से मजबूत होते हैं। एक विनम्र जवाब, सही समय पर भेजा गया संदेश और सामने वाले की भावनाओं का सम्मान रिश्ते में विश्वास बढ़ाता है।</p><p>अगर बातचीत के दौरान धैर्य, सम्मान और ईमानदारी बनाए रखी जाए, तो डिजिटल दुनिया में भी रिश्ते पहले की तरह गहरे और मजबूत बने रह सकते हैं।</p><p>याद रखें, एक छोटा-सा मैसेज कई बार बड़ी गलतफहमी को रोक सकता है। इसलिए टेक्स्ट करते समय शब्दों का चुनाव सोच-समझकर करें और रिश्तों को सकारात्मक संवाद के साथ आगे बढ़ाएं।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ Relationship Tips: पार्टनर को मैसेज करते समय भूलकर न करें ये 5 गलतियां, वरना बढ़ सकती हैं दूरियां ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/lifestyle-news/bedmi-puri-recipe-crispy-bedmi-puri-atta-suji-recipe-5652 ]]></guid><title><![CDATA[ Bedmi Puri Recipe: घर पर बनाएं बाजार जैसी कुरकुरी बेड़मी पूड़ी ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/lifestyle-news/bedmi-puri-recipe-crispy-bedmi-puri-atta-suji-recipe-5652 ]]></link><pubDate><![CDATA[Tue, 28 Jul 2026 12:26:41 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ भारतीय रसोई में पूड़ी का अपना अलग ही महत्व है। त्योहार हो, वीकेंड का नाश्ता या फिर किसी खास मेहमान की मेहमाननवाजी, गरमागरम पूड़ियां हर मौके को खास बना देती हैं। हालांकि रोज़ की सादी पूड़ी से अलग अगर आ ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p>भारतीय रसोई में <b>पूड़ी </b>का अपना अलग ही महत्व है। त्योहार हो, वीकेंड का नाश्ता या फिर किसी खास मेहमान की मेहमाननवाजी, गरमागरम पूड़ियां हर मौके को खास बना देती हैं। हालांकि रोज़ की सादी पूड़ी से अलग अगर आप कुछ मसालेदार और पारंपरिक स्वाद का आनंद लेना चाहते हैं, तो उत्तर भारत की मशहूर बेड़मी पूड़ी आपके लिए बेहतरीन विकल्प है।</p><p>दिल्ली, आगरा, मथुरा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की गलियों में सुबह-सुबह बेड़मी पूड़ी और मसालेदार आलू की सब्जी की खुशबू लोगों को अपनी ओर खींच लेती है। बाहर से सुनहरी और कुरकुरी, जबकि अंदर से उड़द दाल और मसालों के स्वाद से भरपूर यह पूड़ी हर उम्र के लोगों को पसंद आती है। अच्छी बात यह है कि इसे घर पर भी बेहद आसान तरीके से तैयार किया जा सकता है।</p><h5 class=""><b>बेड़मी पूड़ी की खासियत क्या है?</b></h5><p>सामान्य पूड़ी और बेड़मी पूड़ी में सबसे बड़ा अंतर इसके मसालेदार मिश्रण का होता है। इसमें उड़द दाल के साथ सौंफ, धनिया, जीरा, हींग और अदरक जैसे मसालों का इस्तेमाल किया जाता है, जो इसे खास खुशबू और स्वाद देते हैं।</p><p>इसके अलावा आटे में थोड़ी सूजी मिलाने से पूड़ी ज्यादा कुरकुरी बनती है और लंबे समय तक अपनी क्रिस्पीनेस बनाए रखती है।</p><h5 class=""><b>बनाने के लिए जरूरी सामग्री</b></h5><ul><li>आटे के लिए<br></li><li>2 कप गेहूं का आटा<br></li><li>2 बड़े चम्मच सूजी<br></li><li>स्वादानुसार नमक<br></li><li>1 बड़ा चम्मच तेल<br></li><li>जरूरत अनुसार पानी<br></li><li>मसालेदार मिश्रण के लिए<br></li><li>आधा कप उड़द दाल (भीगी हुई)<br></li><li>1 छोटा चम्मच सौंफ<br></li><li>1 छोटा चम्मच साबुत धनिया<br></li><li>आधा छोटा चम्मच जीरा<br></li><li>आधा छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर<br></li><li>एक चुटकी हींग<br></li><li>1 इंच अदरक<br></li><li>1-2 हरी मिर्च<br></li><li>स्वादानुसार नमक</li></ul><h5 class=""><b>ऐसे तैयार करें स्वादिष्ट बेड़मी पूड़ी</b></h5><p>सबसे पहले उड़द दाल को लगभग 4 से 5 घंटे तक पानी में भिगो दें। इसके बाद अतिरिक्त पानी निकालकर दाल को दरदरा पीस लें। ध्यान रखें कि दाल का पेस्ट बहुत बारीक न हो, क्योंकि हल्का दानेदार मिश्रण पूड़ी के स्वाद को और बेहतर बनाता है।</p><p>अब सौंफ, धनिया और जीरे को हल्का भून लें। ठंडा होने के बाद इन्हें दरदरा कूट लें। फिर इस मसाले को पिसी हुई उड़द दाल, हींग, लाल मिर्च, अदरक, हरी मिर्च और नमक के साथ अच्छी तरह मिला लें।</p><p>दूसरी ओर एक बड़े बर्तन में गेहूं का आटा, सूजी, नमक और थोड़ा तेल डालें। इसमें तैयार दाल वाला मिश्रण मिलाकर थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए सख्त आटा गूंथ लें। आटे को 10 से 15 मिनट तक ढककर रख दें ताकि सभी मसालों का स्वाद अच्छी तरह मिल जाए।</p><p>अब छोटी-छोटी लोइयां बनाकर उन्हें हल्का मोटा बेलें। पूड़ी बहुत पतली या बहुत मोटी नहीं होनी चाहिए।</p><h5 class=""><b>तलने का सही तरीका</b></h5><p>कड़ाही में पर्याप्त तेल गर्म करें। जब तेल अच्छी तरह गर्म हो जाए, तब एक-एक करके पूड़ियां डालें। कलछी से हल्का दबाते हुए पूड़ी को फुलाएं और दोनों तरफ से सुनहरा होने तक तलें। सही तापमान पर तली गई पूड़ी बाहर से कुरकुरी और अंदर से नरम बनती है।</p><h5 class=""><b>किसके साथ करें सर्व?</b></h5><p>बेड़मी पूड़ी का असली स्वाद मसालेदार आलू की सब्जी के साथ आता है। इसके अलावा इसे खट्टी-मीठी कद्दू की सब्जी, दही, अचार या हरी चटनी के साथ भी परोसा जा सकता है। यह संयोजन नाश्ते को पूरी तरह पारंपरिक और स्वादिष्ट बना देता है।</p><h5 class=""><b>हर बार बाजार जैसी बेड़मी पूड़ी बनाने की आसान ट्रिक</b></h5><p>अगर आप चाहते हैं कि आपकी बेड़मी पूड़ी बिल्कुल बाजार जैसी बने, तो कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें। उड़द दाल पीसते समय उसमें बहुत कम पानी डालें। आटा हमेशा थोड़ा सख्त गूंथें और पूड़ियों को मध्यम से तेज गर्म तेल में तलें। इससे पूड़ी बाहर से क्रिस्पी और अंदर से स्वाद से भरपूर बनेगी। साथ ही सूजी मिलाने से इसकी बनावट और भी बेहतर हो जाती है।</p><p>अगर इस वीकेंड आप परिवार के लिए कुछ नया और पारंपरिक बनाना चाहते हैं, तो बेड़मी पूड़ी एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है। इसकी खुशबू, कुरकुरापन और मसालेदार स्वाद हर किसी का दिल जीत लेगा।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ Bedmi Puri Recipe: घर पर बनाएं बाजार जैसी कुरकुरी बेड़मी पूड़ी ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/lifestyle-news/garhwali-chaunsa-dal-recipe-uttarakhand-pahadi-food-hindi-5601 ]]></guid><title><![CDATA[ गढ़वाल की मशहूर चौंसा दाल: स्वाद ऐसा कि उंगलियां चाटते रह जाएंगे, घर पर बनाएं पहाड़ी स्पेशल रेसिपी ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/lifestyle-news/garhwali-chaunsa-dal-recipe-uttarakhand-pahadi-food-hindi-5601 ]]></link><pubDate><![CDATA[Fri, 24 Jul 2026 13:45:42 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ उत्तराखंड का पहाड़ी खानपान अपने सादे लेकिन अनोखे स्वाद के लिए पूरे देश में मशहूर है। यहां के पारंपरिक व्यंजन स्थानीय मसालों, देसी तकनीकों और पौष्टिक सामग्री से तैयार किए जाते हैं, जो स्वाद के साथ-साथ  ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>उत्तराखंड</b> का पहाड़ी खानपान अपने सादे लेकिन अनोखे स्वाद के लिए पूरे देश में मशहूर है। यहां के पारंपरिक व्यंजन स्थानीय मसालों, देसी तकनीकों और पौष्टिक सामग्री से तैयार किए जाते हैं, जो स्वाद के साथ-साथ सेहत का भी पूरा ध्यान रखते हैं। इन्हीं खास व्यंजनों में से एक है गढ़वाल की पारंपरिक चौंसा दाल, जिसे अपने अलग स्वाद, गाढ़ी बनावट और देसी फ्लेवर के लिए बेहद पसंद किया जाता है।</p><p>अगर आप रोज़ की अरहर, मूंग या मसूर की दाल से कुछ अलग बनाना चाहते हैं, तो यह रेसिपी आपके किचन में नया स्वाद जोड़ सकती है। खास बात यह है कि इसे बनाने के लिए किसी महंगे या मुश्किल से मिलने वाले सामान की जरूरत नहीं पड़ती। घर में मौजूद सामान्य सामग्री से ही इसे आसानी से तैयार किया जा सकता है।</p><h5 class=""><b>क्या है गढ़वाली चौंसा दाल की खासियत?</b></h5><p>गढ़वाल की चौंसा दाल सामान्य दालों से काफी अलग होती है। इसमें उड़द दाल को पहले हल्का भूनकर दरदरा पीसा जाता है और फिर पारंपरिक मसालों के साथ धीमी आंच पर पकाया जाता है। इस प्रक्रिया से दाल में एक अलग ही सुगंध और गाढ़ापन आ जाता है, जो इसे बाकी दालों से अलग पहचान देता है।</p><p>सरसों के तेल का तड़का, ओखली में कुटे मसाले और धीमी आंच पर पकाने की पारंपरिक विधि इस रेसिपी का असली स्वाद सामने लाती है।</p><h5 class=""><b>चौंसा दाल बनाने के लिए जरूरी सामग्री</b></h5><p><b>इस पारंपरिक रेसिपी को बनाने के लिए आपको चाहिए—</b></p><ul><li>1 कप धुली उड़द दाल<br></li><li>2 बड़े चम्मच गेहूं का आटा<br></li><li>सरसों का तेल<br></li><li>1 बड़ा चम्मच साबुत धनिया<br></li><li>1 छोटा चम्मच जीरा<br></li><li>1 छोटा चम्मच साबुत काली मिर्च<br></li><li>1 इंच अदरक<br></li><li>10–15 लहसुन की कलियां<br></li><li>3 हरी मिर्च<br></li><li>1 छोटा चम्मच राई<br></li><li>एक चुटकी हींग<br></li><li>1 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर<br></li><li>स्वादानुसार नमक<br></li><li>आवश्यकता अनुसार पानी<br></li><li>बारीक कटा हरा धनिया</li></ul><h5 class=""><b>ऐसे तैयार करें गढ़वाली चौंसा दाल</b></h5><p>सबसे पहले उड़द दाल को अच्छी तरह धो लें। अब एक पैन में थोड़ा सरसों का तेल गर्म करें और उसमें दाल को लगभग पांच मिनट तक हल्का भून लें। भुनने के बाद दाल को ठंडा होने दें और मिक्सर में दरदरा पीस लें। ध्यान रखें कि दाल का महीन पाउडर नहीं बनाना है।</p><p>अब साबुत धनिया, जीरा और काली मिर्च को ओखली में कूट लें। इसके बाद इसमें अदरक, लहसुन और हरी मिर्च डालकर मोटा पेस्ट तैयार करें।</p><p>एक कड़ाही में फिर से सरसों का तेल गर्म करें। इसमें राई और हींग का तड़का लगाएं। इसके बाद तैयार किया गया मसाला डालकर 2–3 मिनट तक भूनें। अब इसमें दरदरी पिसी हुई उड़द दाल और गेहूं का आटा डालें और लगातार चलाते हुए कुछ मिनट तक भूनें।</p><p>धीरे-धीरे पानी मिलाते जाएं ताकि गुठलियां न बनें। स्वादानुसार नमक डालें और दाल को करीब 30 मिनट तक धीमी आंच पर पकने दें। जब दाल गाढ़ी और अच्छी तरह पक जाए, तब ऊपर से ताजा हरा धनिया डालकर गैस बंद कर दें।</p><h5 class=""><b>किसके साथ खाएं?</b></h5><p>गढ़वाली चौंसा दाल का असली स्वाद गर्म-गर्म चावल के साथ आता है। इसे देसी घी की कुछ बूंदों के साथ परोसें तो स्वाद कई गुना बढ़ जाता है। इसके अलावा यह रोटी, मंडुवे की रोटी या बाजरे की रोटी के साथ भी बेहद स्वादिष्ट लगती है।</p><h5 class=""><b>सेहत के लिए भी है फायदेमंद</b></h5><p>उड़द दाल प्रोटीन, आयरन, फाइबर और कैल्शियम का अच्छा स्रोत मानी जाती है। इसमें मौजूद पोषक तत्व मांसपेशियों को मजबूत बनाने, पाचन तंत्र को बेहतर रखने और लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करते हैं। वहीं देसी मसाले स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ पाचन में भी सहायक होते हैं।</p><p><b>इन बातों का रखें ध्यान</b></p><ul><li>दाल को हमेशा दरदरा ही पीसें।<br></li><li>मसालों को ताजा कूटने से स्वाद बेहतर आता है।<br></li><li>धीमी आंच पर पकाने से दाल का असली फ्लेवर निकलकर आता है।<br></li><li>सरसों के तेल का इस्तेमाल पारंपरिक स्वाद बनाए रखता है।</li></ul><p>अगर आप अपने खाने में कुछ नया और पारंपरिक स्वाद जोड़ना चाहते हैं, तो गढ़वाल की चौंसा दाल एक बेहतरीन विकल्प है। पौष्टिकता, देसी खुशबू और शानदार स्वाद से भरपूर यह रेसिपी हर उम्र के लोगों को पसंद आ सकती है। अगली बार जब घर में कुछ खास बनाने का मन हो, तो इस पहाड़ी स्पेशल दाल को जरूर ट्राई करें।</p><p>&lt;blockquote class="instagram-media" data-instgrm-captioned data-instgrm-permalink="https://www.instagram.com/reel/DaiJvG8PMKu/?utm_source=ig_embed&amp;amp;utm_campaign=loading" data-instgrm-version="14" style=" background:#FFF; border:0; border-radius:3px; box-shadow:0 0 1px 0 rgba(0,0,0,0.5),0 1px 10px 0 rgba(0,0,0,0.15); margin: 1px; max-width:540px; 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19% 0;"&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="display:block; height:50px; margin:0 auto 12px; width:50px;"&gt;&lt;svg width="50px" height="50px" viewBox="0 0 60 60" version="1.1" xmlns="https://www.w3.org/2000/svg" xmlns:xlink="https://www.w3.org/1999/xlink"&gt;&lt;g stroke="none" stroke-width="1" fill="none" fill-rule="evenodd"&gt;&lt;g transform="translate(-511.000000, -20.000000)" fill="#000000"&gt;&lt;g&gt;&lt;path d="M556.869,30.41 C554.814,30.41 553.148,32.076 553.148,34.131 C553.148,36.186 554.814,37.852 556.869,37.852 C558.924,37.852 560.59,36.186 560.59,34.131 C560.59,32.076 558.924,30.41 556.869,30.41 M541,60.657 C535.114,60.657 530.342,55.887 530.342,50 C530.342,44.114 535.114,39.342 541,39.342 C546.887,39.342 551.658,44.114 551.658,50 C551.658,55.887 546.887,60.657 541,60.657 M541,33.886 C532.1,33.886 524.886,41.1 524.886,50 C524.886,58.899 532.1,66.113 541,66.113 C549.9,66.113 557.115,58.899 557.115,50 C557.115,41.1 549.9,33.886 541,33.886 M565.378,62.101 C565.244,65.022 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565.552,42.003 565.552,50 C565.552,57.996 565.522,58.943 565.378,62.101 M570.82,37.631 C570.674,34.438 570.167,32.258 569.425,30.349 C568.659,28.377 567.633,26.702 565.965,25.035 C564.297,23.368 562.623,22.342 560.652,21.575 C558.743,20.834 556.562,20.326 553.369,20.18 C550.169,20.033 549.148,20 541,20 C532.853,20 531.831,20.033 528.631,20.18 C525.438,20.326 523.257,20.834 521.349,21.575 C519.376,22.342 517.703,23.368 516.035,25.035 C514.368,26.702 513.342,28.377 512.574,30.349 C511.834,32.258 511.326,34.438 511.181,37.631 C511.035,40.831 511,41.851 511,50 C511,58.147 511.035,59.17 511.181,62.369 C511.326,65.562 511.834,67.743 512.574,69.651 C513.342,71.625 514.368,73.296 516.035,74.965 C517.703,76.634 519.376,77.658 521.349,78.425 C523.257,79.167 525.438,79.673 528.631,79.82 C531.831,79.965 532.853,80.001 541,80.001 C549.148,80.001 550.169,79.965 553.369,79.82 C556.562,79.673 558.743,79.167 560.652,78.425 C562.623,77.658 564.297,76.634 565.965,74.965 C567.633,73.296 568.659,71.625 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अगर आप कम स ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p>हर घर में रोजाना यही सवाल होता है कि आज खाने में क्या बनाया जाए। एक जैसी दाल, सूखी सब्जी या साधारण करी खाते-खाते परिवार के लोग भी कुछ नया और स्वादिष्ट खाने की इच्छा जताने लगते हैं। ऐसे में अगर आप कम समय में बनने वाली, मसालेदार और हल्की खट्टी डिश की तलाश कर रहे हैं, तो उत्तर प्रदेश की मशहूर <b>दही के आलू (Dahi Ke Aloo) </b>आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकते हैं।</p><p>यह पारंपरिक डिश अपने अनोखे स्वाद के लिए जानी जाती है। उबले हुए आलू, फेंटा हुआ दही, देसी मसाले और हल्की खटास का ऐसा मेल तैयार होता है कि इसका स्वाद लंबे समय तक याद रहता है। खास बात यह है कि इसे बनाने में ज्यादा मेहनत भी नहीं लगती और यह रोटी, पराठा, पूरी या सादे चावल के साथ शानदार लगती है।</p><h5 class=""><b>क्या खास है दही के आलू में?</b></h5><p>उत्तर प्रदेश के कई शहरों और गांवों में दही के आलू पारंपरिक व्यंजनों में शामिल हैं। खासतौर पर त्योहारों, व्रत के बाद या खास पारिवारिक भोजन में इसे पसंद किया जाता है। दही की हल्की खटास और मसालों की खुशबू आलू के साधारण स्वाद को एकदम अलग बना देती है।</p><p>अगर दही उपलब्ध न हो, तो कई लोग इसमें इमली का पल्प या अमचूर पाउडर का इस्तेमाल भी करते हैं, जिससे इसका स्वाद और भी चटपटा हो जाता है।</p><h5 class=""><b>दही के आलू बनाने के लिए आवश्यक सामग्री</b></h5><p><b>इस स्वादिष्ट रेसिपी के लिए आपको चाहिए—</b></p><ul><li>4–5 उबले हुए आलू<br></li><li>आधा कप फेंटा हुआ दही (या 3 बड़े चम्मच इमली का पल्प)<br></li><li>2 बारीक कटी हरी मिर्च<br></li><li>1 छोटा चम्मच कद्दूकस किया हुआ अदरक<br></li><li>1 छोटा चम्मच जीरा<br></li><li>आधा छोटा चम्मच राई<br></li><li>एक चुटकी हींग<br></li><li>आधा छोटा चम्मच हल्दी<br></li><li>1 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर<br></li><li>1½ छोटा चम्मच धनिया पाउडर<br></li><li>आधा छोटा चम्मच गरम मसाला<br></li><li>अमचूर पाउडर (जरूरत अनुसार)<br></li><li>स्वादानुसार नमक<br></li><li>2 बड़े चम्मच सरसों का तेल<br></li><li>सजाने के लिए हरा धनिया</li></ul><h5 class=""><b>बनाने की आसान विधि</b></h5><p>सबसे पहले उबले हुए आलुओं को छीलकर छोटे टुकड़ों में काट लें या छोटे आलुओं में हल्के छेद कर लें।</p><p>अब कढ़ाई में सरसों का तेल गर्म करें। तेल अच्छी तरह गर्म होने के बाद उसमें जीरा, राई और हींग डालें। इसके बाद अदरक और हरी मिर्च डालकर कुछ सेकंड तक भूनें।</p><p>अब गैस की आंच धीमी करें और हल्दी, लाल मिर्च व धनिया पाउडर डालकर मसालों को हल्का सा भून लें। इसके बाद आलू डालकर अच्छी तरह मिलाएं ताकि मसाले हर टुकड़े पर चढ़ जाएं।</p><p>अब इसमें फेंटा हुआ दही डालें और लगातार चलाते रहें ताकि दही फटे नहीं। यदि दही की जगह इमली का इस्तेमाल कर रहे हैं तो इमली का पानी मिलाएं। इसके बाद नमक, गरम मसाला और थोड़ा पानी डालकर 5 से 7 मिनट तक धीमी आंच पर पकने दें।</p><p>जब ग्रेवी हल्की गाढ़ी हो जाए और मसालों का स्वाद आलू में अच्छी तरह समा जाए, तब गैस बंद कर दें। ऊपर से ताजा हरा धनिया डालकर गर्मागर्म परोसें।</p><h5 class=""><b>किन चीजों के साथ खाएं?</b></h5><p>दही के आलू का स्वाद पूरी, पराठा, तंदूरी रोटी, मिस्सी रोटी और जीरा राइस के साथ सबसे अच्छा लगता है। इसे लंच, डिनर या वीकेंड स्पेशल मील के रूप में भी परोसा जा सकता है।</p><h5 class=""><b>कुछ आसान किचन टिप्स</b></h5><ul><li>दही डालते समय आंच हमेशा धीमी रखें।<br></li><li>अगर ग्रेवी ज्यादा खट्टी पसंद है तो थोड़ा अमचूर या इमली का पल्प मिला सकते हैं।<br></li><li>सरसों के तेल का इस्तेमाल करने से पारंपरिक स्वाद और भी बढ़ जाता है।<br></li><li>ऊपर से भुना हुआ जीरा पाउडर डालने पर इसका फ्लेवर और शानदार हो जाता है।</li></ul><p>अगर आप रोजमर्रा के खाने में कुछ नया स्वाद जोड़ना चाहते हैं, तो यूपी की यह पारंपरिक रेसिपी जरूर ट्राई करें। कम समय में बनने वाली यह डिश बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आएगी और आपके खाने की थाली को खास बना देगी।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ रोज की दाल-सब्जी से हटकर बनाएं यूपी के चटपटे दही आलू, हर निवाला कर देगा स्वाद से भरपूर ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/lifestyle-news/beer-zero-fat-vitamin-b12-health-benefits-side-effects-5472 ]]></guid><title><![CDATA[ Beer में Zero Fat और Vitamin B12... क्या वाकई हेल्दी है? जानिए एक्सपर्ट की राय ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/lifestyle-news/beer-zero-fat-vitamin-b12-health-benefits-side-effects-5472 ]]></link><pubDate><![CDATA[Thu, 16 Jul 2026 18:00:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ बीयर दुनिया की सबसे लोकप्रिय अल्कोहलिक ड्रिंक्स में से एक है। हाल के वर्षों में सोशल मीडिया और कई चर्चाओं में यह दावा किया जाने लगा है कि बीयर में Zero Fat, Vitamin B12 और कुछ जरूरी मिनरल होते हैं, इस ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p>बीयर दुनिया की सबसे लोकप्रिय अल्कोहलिक ड्रिंक्स में से एक है। हाल के वर्षों में सोशल मीडिया और कई चर्चाओं में यह दावा किया जाने लगा है कि बीयर में<b> Zero Fat, Vitamin B12 </b>और कुछ जरूरी मिनरल होते हैं, इसलिए यह सेहत के लिए फायदेमंद हो सकती है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के दावों को पूरी सच्चाई मान लेना सही नहीं है।</p><p>बीयर अनाज, यीस्ट और हॉप्स से तैयार की जाती है। इसी वजह से इसमें कुछ मात्रा में बी-विटामिन, पोटैशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम और अन्य पोषक तत्व मौजूद रहते हैं। लेकिन इनकी मात्रा इतनी नहीं होती कि शरीर की दैनिक पोषण जरूरतें पूरी की जा सकें।</p><h5 class=""><b>क्या बीयर में सचमुच होता है Vitamin B12?</b></h5><p>विशेषज्ञों के अनुसार बीयर में कुछ मात्रा में बी-कॉम्प्लेक्स विटामिन पाए जा सकते हैं, लेकिन इसे Vitamin B12 का भरोसेमंद स्रोत नहीं माना जाता। यदि शरीर में B12 की कमी है तो उसकी पूर्ति डॉक्टर द्वारा सुझाए गए आहार या सप्लीमेंट से ही करनी चाहिए।</p><p>इसी तरह बीयर में फैट नहीं होने का मतलब यह नहीं कि यह पूरी तरह हेल्दी ड्रिंक बन जाती है। इसमें मौजूद अल्कोहल शरीर पर कई तरह के प्रभाव डाल सकता है।</p><h5 class=""><b>क्या सीमित मात्रा में मिल सकते हैं कुछ फायदे?</b></h5><p>कुछ अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों में यह संकेत मिले हैं कि सीमित मात्रा में बीयर का सेवन कुछ लोगों में HDL (अच्छे कोलेस्ट्रॉल) के स्तर को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। इसके अलावा कुछ रिसर्च में इंसुलिन सेंसिटिविटी और हड्डियों की मजबूती पर भी सकारात्मक प्रभाव की संभावना जताई गई है।</p><p>हालांकि वैज्ञानिक यह भी स्पष्ट करते हैं कि इन संभावित लाभों के आधार पर किसी व्यक्ति को बीयर पीना शुरू करने की सलाह नहीं दी जा सकती। इन अध्ययनों के निष्कर्ष सभी लोगों पर समान रूप से लागू नहीं होते।</p><h5 class=""><b>ज्यादा मात्रा में पीना हो सकता है नुकसानदायक</b></h5><p>स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बीयर का अत्यधिक सेवन कई गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। नियमित रूप से अधिक मात्रा में शराब पीने से लीवर, हृदय, मस्तिष्क और पाचन तंत्र पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसके अलावा मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर और कई प्रकार के कैंसर का जोखिम भी बढ़ सकता है।</p><p>बीयर में मौजूद अल्कोहल शरीर को डिहाइड्रेट भी करता है। इसलिए इसे पानी या हाइड्रेशन का विकल्प समझना एक बड़ी गलतफहमी है।</p><h5 class=""><b>किन लोगों को बीयर से बचना चाहिए?</b></h5><p>स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार कुछ लोगों को बीयर का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। इनमें गर्भवती महिलाएं, लीवर या किडनी की बीमारी से जूझ रहे मरीज, कम उम्र के बच्चे, शराब की लत से पीड़ित लोग और वे लोग शामिल हैं जो ऐसी दवाएं ले रहे हैं जिन पर अल्कोहल का असर पड़ सकता है।</p><p>इसके अलावा जो लोग दिनभर अत्यधिक मात्रा में कॉफी पीते हैं, उनके लिए भी बीयर का सेवन शरीर में पानी की कमी को और बढ़ा सकता है।</p><h5 class=""><b>क्या बीयर पोषण का विकल्प हो सकती है?</b></h5><p>विशेषज्ञों का साफ कहना है कि बीयर को कभी भी फल, सब्जियां, दूध, दालें या अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों का विकल्प नहीं माना जा सकता। शरीर को आवश्यक विटामिन और मिनरल प्राकृतिक एवं संतुलित आहार से ही मिलने चाहिए।</p><p>यदि कोई व्यक्ति शराब का सेवन करता भी है, तो उसे चिकित्सकीय सलाह और सुरक्षित सीमा का ध्यान रखना चाहिए।</p><h5 class=""><b>निष्कर्ष</b></h5><p>बीयर में कुछ विटामिन और मिनरल जरूर पाए जाते हैं और सीमित मात्रा में इसके कुछ संभावित फायदे भी बताए गए हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इसे हेल्दी ड्रिंक घोषित कर दिया जाए। अत्यधिक सेवन से होने वाले नुकसान कहीं अधिक गंभीर हो सकते हैं। इसलिए स्वस्थ जीवनशैली के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और पर्याप्त पानी पीना ही सबसे सुरक्षित और प्रभावी विकल्प माना जाता है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ Beer में Zero Fat और Vitamin B12... क्या वाकई हेल्दी है? जानिए एक्सपर्ट की राय ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/lifestyle-news/rajasthani-mirchi-vada-recipe-crispy-spicy-evening-snack-5423 ]]></guid><title><![CDATA[ घर पर बनाएं राजस्थानी मिर्ची वड़ा, हर बाइट में मिलेगा कुरकुरापन और मसालेदार स्वाद ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/lifestyle-news/rajasthani-mirchi-vada-recipe-crispy-spicy-evening-snack-5423 ]]></link><pubDate><![CDATA[Tue, 14 Jul 2026 20:00:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ भारत के अलग-अलग राज्यों की अपनी खास खानपान परंपराएं हैं और राजस्थान अपने मसालेदार एवं लाजवाब व्यंजनों के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। दाल-बाटी-चूरमा से लेकर प्याज कचौरी और मिर्ची वड़ा तक, यहां के स्वाद  ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p>भारत के अलग-अलग राज्यों की अपनी खास खानपान परंपराएं हैं और राजस्थान अपने मसालेदार एवं लाजवाब व्यंजनों के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। दाल-बाटी-चूरमा से लेकर प्याज कचौरी और मिर्ची वड़ा तक, यहां के स्वाद लोगों को बार-बार अपनी ओर खींचते हैं। इन्हीं लोकप्रिय स्नैक्स में शामिल है राजस्थानी मिर्ची वड़ा, जो बाहर से सुनहरा और कुरकुरा होता है, जबकि अंदर मसालेदार आलू की स्टफिंग इसका स्वाद कई गुना बढ़ा देती है।</p><p>अगर आप भी रोजाना के समोसे या पकौड़ों से कुछ अलग ट्राई करना चाहते हैं, तो यह रेसिपी आपके लिए शानदार विकल्प हो सकती है। इसे घर पर आसानी से बनाया जा सकता है और यह परिवार के साथ शाम की चाय का स्वाद दोगुना कर देता है।</p><h5 class=""><b>क्या है राजस्थानी मिर्ची वड़ा की खासियत?</b></h5><p>राजस्थानी मिर्ची वड़ा की सबसे बड़ी खासियत इसकी स्टफिंग और कुरकुरा बेसन का लेप है। इसमें मोटी हरी या पीली मिर्च के अंदर मसालेदार आलू का मिश्रण भरकर बेसन में डुबोकर डीप फ्राई किया जाता है।</p><p>मिर्च के बीज निकाल देने से इसका तीखापन काफी कम हो जाता है, जिससे इसे लगभग हर उम्र के लोग आसानी से खा सकते हैं।</p><h5 class=""><b>बनाने के लिए जरूरी सामग्री</b></h5><p><b>इस स्वादिष्ट स्नैक को बनाने के लिए आपको चाहिए—</b></p><ul><li>5–6 बड़ी हरी या पीली मोटी मिर्च<br></li><li>1 कप बेसन<br></li><li>2–3 उबले हुए आलू<br></li><li>1 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर<br></li><li>1 छोटा चम्मच गरम मसाला<br></li><li>आधा छोटा चम्मच अमचूर पाउडर<br></li><li>स्वादानुसार नमक<br></li><li>तलने के लिए तेल</li></ul><p>इन आसान सामग्रियों से आप घर पर ही बाजार जैसा स्वाद तैयार कर सकते हैं।</p><h5 class=""><b>ऐसे तैयार करें मसालेदार स्टफिंग</b></h5><p>सबसे पहले उबले हुए आलू को अच्छी तरह मैश करें। अब इसमें लाल मिर्च पाउडर, गरम मसाला, अमचूर और नमक मिलाकर स्वादिष्ट मसाला तैयार करें।</p><p>इसके बाद मिर्चियों को धोकर बीच में लंबाई में हल्का चीरा लगाएं और अंदर के बीज निकाल दें। अब तैयार आलू की स्टफिंग मिर्चियों के भीतर अच्छी तरह भर दें।<br></p><h5 class=""><b>बेसन का घोल और फ्राई करने का तरीका</b></h5><p>एक बर्तन में बेसन लें और उसमें थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए गाढ़ा घोल तैयार करें। चाहें तो इसमें चुटकीभर हल्दी और थोड़ा अजवाइन भी मिला सकते हैं, जिससे स्वाद और बेहतर हो जाएगा।</p><p>अब कड़ाही में तेल गर्म करें। स्टफिंग भरी मिर्चियों को बेसन के घोल में अच्छी तरह डुबोकर सुनहरा और कुरकुरा होने तक तलें।</p><p>जब वड़े अच्छी तरह पक जाएं तो अतिरिक्त तेल निकालने के लिए उन्हें टिश्यू पेपर पर रखें।</p><h5 class=""><b>किसके साथ करें सर्व?</b></h5><p>गरमा-गरम राजस्थानी मिर्ची वड़ा हरी धनिया की चटनी, इमली की मीठी चटनी या टोमैटो केचप के साथ बेहद स्वादिष्ट लगता है।</p><p>इसे शाम की चाय, बारिश के मौसम या मेहमानों के लिए स्नैक के रूप में भी परोसा जा सकता है।</p><p><b>कुछ आसान टिप्स</b></p><ul><li>मोटी और कम तीखी मिर्च का इस्तेमाल करें।<br></li><li>बेसन का घोल बहुत पतला न रखें।<br></li><li>तेल को मध्यम आंच पर गर्म रखें ताकि वड़ा बाहर से जले नहीं और अंदर तक अच्छी तरह पक जाए।<br></li><li>अधिक कुरकुरापन के लिए बेसन में थोड़ा चावल का आटा भी मिलाया जा सकता है।<br></li><li>स्वाद और परंपरा का शानदार मेल</li></ul><p>अगर आप घर पर कुछ नया, मसालेदार और पारंपरिक स्वाद ट्राई करना चाहते हैं, तो राजस्थानी मिर्ची वड़ा जरूर बनाएं। कम सामग्री और आसान विधि से तैयार होने वाला यह स्नैक बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आता है। बारिश के मौसम या वीकेंड पर परिवार के साथ इसका आनंद लेना एक बेहतरीन अनुभव हो सकता है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ घर पर बनाएं राजस्थानी मिर्ची वड़ा, हर बाइट में मिलेगा कुरकुरापन और मसालेदार स्वाद ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/lifestyle-news/moringa-cheela-recipe-healthy-breakfast-iron-calcium-benefits-5410 ]]></guid><title><![CDATA[ नाश्ते में शामिल करें मोरिंगा चीला, आयरन-कैल्शियम से भरपूर यह सुपरफूड देगा भरपूर पोषण ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/lifestyle-news/moringa-cheela-recipe-healthy-breakfast-iron-calcium-benefits-5410 ]]></link><pubDate><![CDATA[Mon, 13 Jul 2026 16:17:17 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ सुबह का नाश्ता पूरे दिन की ऊर्जा का आधार माना जाता है। ऐसे में अगर दिन की शुरुआत पोषण से भरपूर भोजन के साथ हो, तो शरीर और दिमाग दोनों बेहतर तरीके से काम करते हैं। यदि आप रोजाना पोहा, पराठा या उपमा जैस ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p>सुबह का नाश्ता पूरे दिन की ऊर्जा का आधार माना जाता है। ऐसे में अगर दिन की शुरुआत पोषण से भरपूर भोजन के साथ हो, तो शरीर और दिमाग दोनों बेहतर तरीके से काम करते हैं। यदि आप रोजाना पोहा, पराठा या उपमा जैसे पारंपरिक नाश्ते से कुछ अलग और ज्यादा पौष्टिक विकल्प तलाश रहे हैं, तो <b>मोरिंगा मूंग दाल चीला </b>आपके लिए बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है।</p><p><b>मोरिंगा</b>, जिसे सहजन या ड्रमस्टिक के नाम से भी जाना जाता है, लंबे समय से आयुर्वेद में एक औषधीय पौधे के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसमें आयरन, कैल्शियम, फाइबर, विटामिन ए, विटामिन सी और कई एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। जब इसे प्रोटीन से भरपूर मूंग दाल के साथ मिलाकर बनाया जाता है, तो यह एक संतुलित और हेल्दी ब्रेकफास्ट बन जाता है।</p><h5 class=""><b>मोरिंगा क्यों है सुपरफूड?</b></h5><p>मोरिंगा को पोषण का पावरहाउस कहा जाता है। इसमें मौजूद आयरन शरीर में हीमोग्लोबिन बनाए रखने में मदद कर सकता है, जबकि कैल्शियम हड्डियों और दांतों को मजबूत रखने में सहायक माना जाता है। इसके अलावा इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और कोशिकाओं को नुकसान से बचाने में मदद कर सकते हैं।</p><p>विशेषज्ञों का मानना है कि संतुलित मात्रा में मोरिंगा का सेवन बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों सभी के लिए फायदेमंद हो सकता है।</p><h5 class=""><b>मूंग दाल के साथ बढ़ जाता है पोषण</b></h5><p>मूंग दाल प्रोटीन, फाइबर और कई आवश्यक मिनरल्स का अच्छा स्रोत मानी जाती है। इसे आसानी से पचने वाली दालों में शामिल किया जाता है।</p><p>जब मूंग दाल और मोरिंगा का संयोजन किया जाता है, तो यह नाश्ता लंबे समय तक पेट भरा रखने के साथ शरीर को पर्याप्त ऊर्जा भी देता है। यही वजह है कि यह वजन नियंत्रित रखने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए भी अच्छा विकल्प माना जाता है।</p><h5 class=""><b>घर पर ऐसे बनाएं हेल्दी मोरिंगा चीला</b></h5><p>इस रेसिपी के लिए आपको सहजन की फलियों का गूदा, भीगी हुई धुली मूंग दाल, हरी मिर्च, अदरक, नमक और थोड़ा-सा तेल चाहिए।</p><p>सबसे पहले सहजन की फली से गूदा निकाल लें। फिर भीगी हुई मूंग दाल, मोरिंगा पल्प, अदरक और हरी मिर्च को हल्का दरदरा पीस लें। इस मिश्रण में स्वादानुसार नमक मिलाकर कुछ मिनट तक अच्छी तरह फेंटें ताकि बैटर हल्का और फूला हुआ बन जाए।</p><p>इसके बाद हल्का तेल लगाकर गर्म तवे पर बैटर फैलाएं और दोनों तरफ से सुनहरा होने तक सेक लें। तैयार मोरिंगा चीले को हरी चटनी, नारियल की चटनी या दही के साथ परोस सकते हैं।</p><h5 class=""><b>किन लोगों के लिए फायदेमंद हो सकता है?</b></h5><p><b>मोरिंगा चीला उन लोगों के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है जो—</b></p><ul><li>प्रोटीन युक्त नाश्ता चाहते हैं।<br></li><li>आयरन और कैल्शियम से भरपूर भोजन लेना चाहते हैं।<br></li><li>बच्चों की डाइट में पौष्टिक विकल्प शामिल करना चाहते हैं।<br></li><li>फिटनेस और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना चाहते हैं।<br></li><li>लंबे समय तक पेट भरा रखने वाला नाश्ता पसंद करते हैं।</li></ul><h5 class=""><b>कुछ बातों का रखें ध्यान</b></h5><p>हालांकि मोरिंगा पोषक तत्वों से भरपूर होता है, लेकिन यदि आप किसी गंभीर बीमारी, किडनी संबंधी समस्या या गर्भावस्था के दौरान विशेष डाइट पर हैं, तो इसे नियमित रूप से आहार में शामिल करने से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लेना बेहतर होगा।</p><p>साथ ही हमेशा ताजा और अच्छी गुणवत्ता वाली सामग्री का ही इस्तेमाल करें, ताकि भोजन सुरक्षित और पौष्टिक बना रहे।</p><h5 class=""><b>स्वाद और सेहत का बेहतरीन मेल</b></h5><p>अगर आप अपने नाश्ते को हेल्दी, स्वादिष्ट और पोषण से भरपूर बनाना चाहते हैं, तो मोरिंगा मूंग दाल चीला जरूर ट्राई करें। यह रेसिपी कम तेल में तैयार हो जाती है और आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन व फाइबर जैसे जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण पूरे परिवार के लिए एक बेहतरीन ब्रेकफास्ट विकल्प बन सकती है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ नाश्ते में शामिल करें मोरिंगा चीला, आयरन-कैल्शियम से भरपूर यह सुपरफूड देगा भरपूर पोषण ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/lifestyle-news/90s-kids-school-bag-memories-steel-tiffin-champak-comics-5327 ]]></guid><title><![CDATA[ स्टील का टिफिन, चंपक और 2 रुपये का सिक्का... 90s Kids की अनमोल यादें ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/lifestyle-news/90s-kids-school-bag-memories-steel-tiffin-champak-comics-5327 ]]></link><pubDate><![CDATA[Tue, 07 Jul 2026 20:00:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ आज के बच्चों के स्कूल बैग में लैपटॉप, टैबलेट, स्मार्ट गैजेट्स और आधुनिक स्टेशनरी आसानी से देखने को मिल जाती है। लेकिन अगर बात 90 के दशक की करें, तो उस समय का स्कूल बैग सिर्फ पढ़ाई का सामान रखने की जगह ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p>आज के बच्चों के स्कूल बैग में लैपटॉप, टैबलेट, स्मार्ट गैजेट्स और आधुनिक स्टेशनरी आसानी से देखने को मिल जाती है। लेकिन अगर बात 90 के दशक की करें, तो उस समय का स्कूल बैग सिर्फ पढ़ाई का सामान रखने की जगह नहीं था, बल्कि बचपन की अनगिनत यादों का एक चलता-फिरता खजाना हुआ करता था। उस दौर की हर छोटी-सी चीज आज भी लोगों के चेहरे पर मुस्कान ले आती है। स्टील का टिफिन, धातु का पेंसिल बॉक्स, चंपक कॉमिक्स और जेब खर्च के लिए रखा 1 या 2 रुपये का सिक्का आज भी 90s किड्स की यादों में ताजा है।</p><h5 class=""><b>स्टील का पेंसिल बॉक्स था स्टाइल की पहचान</b></h5><p>90 के दशक में प्लास्टिक के बजाय स्टील का पेंसिल बॉक्स बच्चों की पहली पसंद होता था। उसमें पेंसिल, रबड़, शार्पनर और स्केल करीने से रखे जाते थे। कई बच्चे अपने नाम का स्टिकर भी उस पर चिपकाते थे। नटराज या अप्सरा की पेंसिल और सफेद रबड़ हर छात्र के बैग का जरूरी हिस्सा होती थी। पेंसिल को ब्लेड से नुकीला बनाना भी किसी कला से कम नहीं माना जाता था।</p><h5 class=""><b>स्टील का टिफिन और दोस्तों के साथ लंच शेयर करना</b></h5><p>स्कूल की घंटी बजते ही सबसे पहले बैग से स्टील का टिफिन बाहर निकलता था। उसमें घर की बनी रोटी, सब्जी, पराठा या अचार होता था। लेकिन उस दौर की सबसे खूबसूरत बात यह थी कि बच्चे अपना खाना अकेले नहीं खाते थे। दोस्त मिलकर टिफिन बदल-बदलकर खाते थे और यही दोस्ती की सबसे प्यारी याद बन जाती थी।</p><h5 class=""><b>किताबों पर अखबार और भूरे कागज का कवर</b></h5><p>नया सत्र शुरू होते ही किताबों पर अखबार या भूरे कागज का कवर चढ़ाना एक खास काम होता था। बच्चे बड़े गर्व से अपने हाथों से नाम, क्लास और सेक्शन लिखते थे। कई बच्चे रंग-बिरंगे स्टिकर लगाकर अपनी किताबों को अलग पहचान भी देते थे।</p><h5 class=""><b>पेंसिल बॉक्स में छिपा रहता था 1 या 2 रुपये का सिक्का</b></h5><p>90 के दशक में बच्चों के पास ज्यादा जेब खर्च नहीं होता था। मां अक्सर पेंसिल बॉक्स या बैग की छोटी जेब में 1 या 2 रुपये रख देती थीं। स्कूल की छुट्टी के बाद इन्हीं पैसों से आइसक्रीम, संतरे वाली टॉफी, इमली, चूरन गोली या बर्फ का गोला खरीदने का अलग ही मजा होता था।</p><h5 class=""><b>चंपक और कॉमिक्स का अलग ही क्रेज</b></h5><p>उस समय मोबाइल या सोशल मीडिया नहीं था। बच्चों की सबसे बड़ी एंटरटेनमेंट पार्टनर होती थीं चंपक, नंदन, लोटपोट और दूसरी कॉमिक्स। कई बच्चे इन्हें छिपाकर स्कूल ले जाते थे और लंच ब्रेक में दोस्तों के साथ मिलकर पढ़ते थे। टीचर के आने की आहट मिलते ही कॉमिक्स तुरंत बैग के अंदर गायब हो जाती थी।</p><h5 class=""><b>स्कूल बैग में सिर्फ सामान नहीं, यादें भी रहती थीं</b></h5><p>उस दौर का स्कूल बैग केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं था। उसमें दोस्ती, मासूमियत, छोटी-छोटी खुशियां और बचपन के अनगिनत किस्से भी साथ चलते थे। आज तकनीक ने बच्चों की पढ़ाई का तरीका बदल दिया है, लेकिन 90 के दशक की सादगी और अपनापन आज भी लोगों के दिलों में बसा हुआ है।</p><h5 class=""><b>आज भी ताजा हैं वो सुनहरे दिन</b></h5><p>90s के बच्चों के लिए स्कूल बैग सिर्फ एक बैग नहीं था, बल्कि बचपन की सबसे खूबसूरत यादों का हिस्सा था। स्टील का टिफिन, पेंसिल बॉक्स, चंपक कॉमिक्स और दो रुपये का सिक्का आज भी उस दौर को याद कर चेहरे पर मुस्कान ला देते हैं। शायद यही वजह है कि 90 का दशक आज भी "गोल्डन एरा ऑफ चाइल्डहुड" कहा जाता है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ स्टील का टिफिन, चंपक और 2 रुपये का सिक्का... 90s Kids की अनमोल यादें ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/lifestyle-news/monsoon-health-tips-healthy-foods-to-eat-and-avoid-in-rainy-season-5296 ]]></guid><title><![CDATA[ मानसून में इन 3 फूड्स से रहें सावधान, जानिए कौन-सी चीजें रखेंगी आपको स्वस्थ और फिट ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/lifestyle-news/monsoon-health-tips-healthy-foods-to-eat-and-avoid-in-rainy-season-5296 ]]></link><pubDate><![CDATA[Mon, 06 Jul 2026 20:00:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ बारिश का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है, लेकिन इसके साथ कई स्वास्थ्य चुनौतियां भी लेकर आता है। इस दौरान हवा में नमी बढ़ने से बैक्टीरिया, वायरस और फंगस तेजी से पनपते हैं, जिससे फूड इंफेक्शन, पेट खराब  ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p>बारिश का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है, लेकिन इसके साथ कई स्वास्थ्य चुनौतियां भी लेकर आता है। इस दौरान हवा में नमी बढ़ने से बैक्टीरिया, वायरस और फंगस तेजी से पनपते हैं, जिससे फूड इंफेक्शन, पेट खराब होना, वायरल बुखार और पाचन संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के दौरान खानपान में थोड़ी सावधानी बरतकर इन समस्याओं से काफी हद तक बचा जा सकता है।</p><p>विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ सब्जियां ऐसी हैं जिनका सेवन बारिश के मौसम में सोच-समझकर करना चाहिए, जबकि कुछ खाद्य पदार्थ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और पाचन को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। सही भोजन का चुनाव इस मौसम में आपकी सेहत को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाता है।</p><h5 class=""><b>पालक खाते समय रखें विशेष सावधानी</b></h5><p>पालक पोषण से भरपूर हरी सब्जी है और इसमें आयरन, फोलेट तथा कई जरूरी विटामिन पाए जाते हैं। हालांकि मानसून के दौरान इसकी पत्तियों पर मिट्टी, कीड़े और सूक्ष्म जीव आसानी से चिपक सकते हैं। यदि पालक को अच्छी तरह धोकर और पकाकर नहीं खाया जाए, तो पेट में संक्रमण, गैस, दस्त और अन्य पाचन संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। इसलिए बारिश के मौसम में पालक का सेवन करने से पहले उसकी अच्छी तरह सफाई करना बेहद जरूरी है।</p><h5 class=""><b>फूलगोभी भी बन सकती है परेशानी की वजह</b></h5><p>फूलगोभी की बनावट ऐसी होती है कि उसके अंदर छोटे-छोटे कीड़े और गंदगी आसानी से छिप जाती है। मानसून में नमी बढ़ने के कारण इसमें संक्रमण का खतरा और अधिक हो सकता है। इसके अलावा कई लोगों को फूलगोभी खाने के बाद गैस और ब्लोटिंग की समस्या भी हो सकती है। यदि इसका सेवन करना हो तो इसे नमक वाले गर्म पानी में अच्छी तरह साफ करने के बाद ही पकाना चाहिए।</p><h5 class=""><b>मशरूम खरीदते समय रखें गुणवत्ता का ध्यान</b></h5><p>मशरूम पोषण से भरपूर खाद्य पदार्थ माना जाता है, लेकिन बारिश के मौसम में इसकी गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। यदि मशरूम ताजा न हो या सही तरीके से स्टोर न किया गया हो, तो उसमें फफूंद और बैक्टीरिया विकसित हो सकते हैं। ऐसे मशरूम का सेवन पेट संबंधी समस्याओं और फूड पॉइजनिंग का कारण बन सकता है।</p><h5 class=""><b>मानसून में ये फूड्स बन सकते हैं बेहतर विकल्प</b></h5><h5 class=""><b>लौकी</b></h5><p>लौकी हल्की, आसानी से पचने वाली और पानी से भरपूर सब्जी है। यह शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव नहीं डालती। मानसून में इसे नियमित भोजन का हिस्सा बनाया जा सकता है।</p><h5 class=""><b>कद्दू</b></h5><p>कद्दू में विटामिन A, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद करता है और पाचन को भी बेहतर बनाए रखता है।</p><h5 class=""><b>कॉर्न</b></h5><p>बारिश के मौसम में भुट्टा खाना कई लोगों की पसंद होता है। कॉर्न में फाइबर, कार्बोहाइड्रेट और कई आवश्यक पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जो शरीर को ऊर्जा देने के साथ लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करते हैं। हालांकि इसे हमेशा अच्छी तरह पकाकर ही खाना चाहिए।</p><h5 class=""><b>दाल और चना</b></h5><p>मानसून में संक्रमण से लड़ने के लिए शरीर को पर्याप्त प्रोटीन की जरूरत होती है। दालें और चना प्रोटीन, फाइबर और कई जरूरी मिनरल्स के अच्छे स्रोत हैं। ये पाचन को बेहतर रखते हैं और शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत बनाने में मदद कर सकते हैं।</p><h5 class=""><b>मानसून में खानपान से जुड़ी जरूरी सावधानियां</b></h5><p>बारिश के मौसम में केवल सही भोजन चुनना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि साफ-सफाई का ध्यान रखना भी जरूरी है। सब्जियों और फलों को अच्छी तरह धोकर ही इस्तेमाल करें। बाहर का खुला और कटे हुए फल, बासी भोजन तथा अधपका खाना खाने से बचें। पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें और ताजा, गर्म तथा घर का बना भोजन प्राथमिकता दें।</p><h5 class=""><b>स्वस्थ रहने का आसान तरीका</b></h5><p>विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून में खानपान में थोड़े बदलाव करके कई मौसमी बीमारियों से बचा जा सकता है। पौष्टिक, ताजा और स्वच्छ भोजन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है। यदि संतुलित आहार के साथ नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और अच्छी स्वच्छता की आदत भी अपनाई जाए, तो बारिश के मौसम का आनंद बिना स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के लिया जा सकता है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ मानसून में इन 3 फूड्स से रहें सावधान, जानिए कौन-सी चीजें रखेंगी आपको स्वस्थ और फिट ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/lifestyle-news/job-loss-after-40-financial-planning-emergency-fund-career-tips-5244 ]]></guid><title><![CDATA[ 40 की उम्र के बाद नौकरी छूटने का डर? इन 5 स्मार्ट तैयारियों से सुरक्षित करें अपना भविष्य ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/lifestyle-news/job-loss-after-40-financial-planning-emergency-fund-career-tips-5244 ]]></link><pubDate><![CDATA[Fri, 03 Jul 2026 20:00:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ आज के दौर में नौकरी की गारंटी पहले जैसी नहीं रही। तकनीक में तेजी से हो रहे बदलाव, ऑटोमेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और कंपनियों की बदलती रणनीतियों के कारण किसी भी समय नौकरी पर असर पड़ सकता है। खासक ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p>आज के दौर में नौकरी की गारंटी पहले जैसी नहीं रही। तकनीक में तेजी से हो रहे बदलाव, ऑटोमेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और कंपनियों की बदलती रणनीतियों के कारण किसी भी समय नौकरी पर असर पड़ सकता है। खासकर <b>40 वर्ष</b> की उम्र के बाद यह चिंता और बढ़ जाती है, क्योंकि इस समय तक परिवार, बच्चों की पढ़ाई, होम लोन, मेडिकल खर्च और भविष्य की जिम्मेदारियां काफी बढ़ चुकी होती हैं।</p><p>ऐसे में घबराने के बजाय पहले से सही वित्तीय और पेशेवर तैयारी करना अधिक समझदारी है। अगर आपने समय रहते कुछ महत्वपूर्ण कदम उठा लिए, तो नौकरी जाने जैसी चुनौती का सामना भी आत्मविश्वास के साथ किया जा सकता है।</p><h5 class=""><b>सबसे पहले बनाएं मजबूत इमरजेंसी फंड</b></h5><p>हर नौकरीपेशा व्यक्ति के लिए सबसे जरूरी है कि उसके पास कम से कम 6 से 12 महीने के खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड मौजूद हो। इसमें घर का मासिक खर्च, बच्चों की फीस, होम लोन या अन्य EMI, मेडिकल खर्च और रोजमर्रा की जरूरतों को शामिल करना चाहिए।</p><p>अगर अचानक नौकरी चली भी जाए, तो यह फंड आपको बिना घबराहट के नई नौकरी तलाशने का समय देता है और आर्थिक दबाव कम करता है।</p><h5 class=""><b>नई स्किल्स सीखते रहें</b></h5><p>40 की उम्र का मतलब सीखना बंद करना नहीं है। आज कंपनियां ऐसे कर्मचारियों को प्राथमिकता देती हैं जो नई तकनीकों और बदलते कामकाज के साथ खुद को अपडेट रखते हैं।</p><p>AI, डेटा एनालिटिक्स, डिजिटल मार्केटिंग, क्लाउड टेक्नोलॉजी, साइबर सिक्योरिटी या अपनी फील्ड से जुड़ी नई स्किल्स सीखने से आपके करियर के नए अवसर खुल सकते हैं। नियमित अपस्किलिंग आपको नौकरी के बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाए रखती है।</p><h5 class=""><b>कमाई का दूसरा स्रोत जरूर बनाएं</b></h5><p>सिर्फ एक सैलरी पर पूरी तरह निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए कोशिश करें कि आपके पास अतिरिक्त आय का भी कोई माध्यम हो।</p><p>यह फ्रीलांसिंग, ऑनलाइन कंसल्टिंग, कंटेंट क्रिएशन, ट्यूशन, ब्लॉगिंग, निवेश से मिलने वाली आय या कोई छोटा बिजनेस भी हो सकता है। अतिरिक्त कमाई न केवल आर्थिक सुरक्षा देती है, बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ाती है।</p><h5 class=""><b>प्रोफेशनल नेटवर्क को बनाए रखें</b></h5><p>करियर में आगे बढ़ने के लिए सिर्फ अच्छी स्किल्स ही नहीं, बल्कि मजबूत नेटवर्क भी जरूरी होता है। कई बार नई नौकरी या बेहतर अवसर किसी पुराने सहकर्मी, क्लाइंट या इंडस्ट्री संपर्क के माध्यम से मिल जाते हैं।</p><p>इसलिए अपने पुराने साथियों से जुड़े रहें, प्रोफेशनल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय रहें और इंडस्ट्री इवेंट्स में भाग लेते रहें। मजबूत नेटवर्क कठिन समय में बड़ा सहारा बन सकता है।</p><h5 class=""><b>हेल्थ इंश्योरेंस और सेहत पर दें ध्यान</b></h5><p>नौकरी के साथ मिलने वाला मेडिकल इंश्योरेंस नौकरी छूटने पर समाप्त हो सकता है। इसलिए व्यक्तिगत हेल्थ इंश्योरेंस पहले से लेना बेहतर फैसला है।</p><p>इसके अलावा नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद और तनाव प्रबंधन भी उतना ही जरूरी है। अच्छी शारीरिक और मानसिक सेहत कठिन परिस्थितियों का सामना करने की ताकत देती है।</p><h5 class=""><b>घबराएं नहीं, भविष्य की योजना बनाएं</b></h5><p>नौकरी का भविष्य पूरी तरह किसी के नियंत्रण में नहीं होता, लेकिन अपनी तैयारी जरूर हमारे हाथ में होती है। अगर आपके पास पर्याप्त बचत, नई स्किल्स, मजबूत नेटवर्क, अतिरिक्त आय और सही बीमा सुरक्षा है, तो किसी भी चुनौती का सामना अपेक्षाकृत आसान हो जाता है।</p><p>40 की उम्र करियर खत्म होने की नहीं, बल्कि उसे और मजबूत बनाने की उम्र है। समय रहते सही वित्तीय और पेशेवर फैसले लेकर आप न सिर्फ नौकरी जाने के डर को कम कर सकते हैं, बल्कि भविष्य को भी ज्यादा सुरक्षित और स्थिर बना सकते हैं।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ 40 की उम्र के बाद नौकरी छूटने का डर? इन 5 स्मार्ट तैयारियों से सुरक्षित करें अपना भविष्य ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/lifestyle-news/palak-patta-chaat-recipe-delhi-style-healthy-street-food-5138 ]]></guid><title><![CDATA[ घर पर बनाएं दिल्ली की मशहूर पालक पत्ता चाट, हर बाइट में मिलेगा चटपटा स्वाद ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/lifestyle-news/palak-patta-chaat-recipe-delhi-style-healthy-street-food-5138 ]]></link><pubDate><![CDATA[Fri, 26 Jun 2026 20:00:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ अगर आप चटपटा स्ट्रीट फूड पसंद करते हैं और घर पर कुछ नया बनाने की सोच रहे हैं, तो दिल्ली की मशहूर **पालक पत्ता चाट** आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकती है। कुरकुरे पालक के पत्ते, मीठा दही, खट्टी-मीठी इमली ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p>अगर आप चटपटा स्ट्रीट फूड पसंद करते हैं और घर पर कुछ नया बनाने की सोच रहे हैं, तो दिल्ली की मशहूर **<b>पालक पत्ता चाट</b>** आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकती है। कुरकुरे पालक के पत्ते, मीठा दही, खट्टी-मीठी इमली की चटनी और चाट मसालों का अनोखा मेल इस डिश को खास बनाता है। सबसे अच्छी बात यह है कि इसे घर पर आसानी से तैयार किया जा सकता है और यह स्वाद के साथ-साथ पोषण से भी भरपूर होती है।</p><p>पालक आयरन, फाइबर और कई जरूरी विटामिन का अच्छा स्रोत है। आमतौर पर लोग पालक की सब्जी या पकौड़े बनाकर खाते हैं, लेकिन पालक पत्ता चाट एक ऐसी डिश है जो बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आती है। गर्मियों और बारिश के मौसम में यह स्नैक चाय के साथ भी शानदार लगता है।</p><h5 class=""><b>पालक पत्ता चाट के लिए सामग्री</b></h5><p><b>पकोड़े के लिए:</b></p><ul><li>10-12 ताजे पालक के पत्ते<br></li><li>1 कप बेसन<br></li><li>1 छोटी चम्मच बारीक कटी हरी मिर्च<br></li><li>1 छोटी चम्मच कद्दूकस किया हुआ अदरक<br></li><li>आधा छोटा चम्मच हल्दी<br></li><li>1 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर<br></li><li>नमक स्वादानुसार<br></li><li>पानी (घोल बनाने के लिए)<br></li><li>तलने के लिए तेल</li></ul><p><b>मीठे दही के लिए:</b></p><ul><li>1 कप दही<br></li><li>3 बड़े चम्मच चीनी<br></li><li>थोड़ा काला नमक<br></li><li>स्वादानुसार साधारण नमक</li></ul><p><b>इमली की चटनी के लिए:</b></p><p>1 कप इमली का गूदा<br>4 बड़े चम्मच चीनी<br>1 छोटा चम्मच काला नमक<br>थोड़ा भुना जीरा पाउडर<br>नमक स्वादानुसार<br>1½ कप पानी<br>कटे हुए अंगूर<br>कटा हुआ केला<br>खरबूजे के बीज<br>पुदीने की चटनी</p><h5 class=""><b>बनाने की आसान विधि:</b></h5><p>सबसे पहले पालक के पत्तों को अच्छी तरह धोकर सुखा लें। अब एक बाउल में बेसन, हल्दी, लाल मिर्च, नमक, अदरक, हरी मिर्च और पानी मिलाकर गाढ़ा व चिकना घोल तैयार करें।</p><p>एक कड़ाही में तेल गर्म करें। पालक के प्रत्येक पत्ते को बेसन के घोल में डुबोकर सुनहरा और कुरकुरा होने तक तल लें। तैयार पकोड़ों को टिश्यू पेपर पर निकालकर अतिरिक्त तेल अलग कर दें।</p><p>अब दही में चीनी, काला नमक और साधारण नमक मिलाकर अच्छी तरह फेंट लें, ताकि दही हल्का और स्मूद हो जाए।</p><p>इमली की चटनी बनाने के लिए एक पैन में इमली का गूदा, चीनी, पानी, काला नमक और भुना जीरा डालकर 15 से 18 मिनट तक पकाएं। ठंडा होने के बाद इसमें कटे हुए अंगूर, केला और खरबूजे के बीज मिला दें।</p><h5 class=""><b>ऐसे करें सर्व</b></h5><p>सर्विंग प्लेट में सबसे पहले कुरकुरे पालक के पकोड़े रखें। इनके ऊपर मीठा दही, इमली की चटनी और पुदीने की चटनी डालें। आखिर में चाट मसाला, भुना जीरा पाउडर और चाहें तो थोड़ा अनार या सेव भी डाल सकते हैं।</p><p>यह कुरकुरी और चटपटी पालक पत्ता चाट स्वाद के साथ पोषण का भी बेहतरीन मेल है। अगर आप घर पर दिल्ली के स्ट्रीट फूड का स्वाद लेना चाहते हैं, तो यह रेसिपी जरूर ट्राई करें।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ घर पर बनाएं दिल्ली की मशहूर पालक पत्ता चाट, हर बाइट में मिलेगा चटपटा स्वाद ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/lifestyle-news/sadhguru-message-on-international-yoga-day-2026-5046 ]]></guid><title><![CDATA[ 'योग धर्म नहीं, जीवन की विज्ञान आधारित तकनीक है', सद्गुरु ने बताया इसका महत्व... ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/lifestyle-news/sadhguru-message-on-international-yoga-day-2026-5046 ]]></link><pubDate><![CDATA[Sun, 21 Jun 2026 09:00:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ नई दिल्ली: अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 से पहले आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने योग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि योग किसी धर्म, विचारधारा या आस्था का विषय नहीं, बल्कि मानव जीवन को बेहत ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>नई दिल्ली: </b>अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 से पहले आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने योग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि योग किसी धर्म, विचारधारा या आस्था का विषय नहीं, बल्कि मानव जीवन को बेहतर बनाने वाली एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि योग मनुष्य के भीतर मौजूद असीम संभावनाओं और प्रतिभा को उजागर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।</span></p><p>एक वीडियो संदेश में सद्गुरु ने कहा कि लोगों को योग को केवल शारीरिक व्यायाम या शरीर को मोड़ने-तोड़ने की क्रिया के रूप में नहीं देखना चाहिए।</p><p><b>'योग आंतरिक कल्याण का विज्ञान है'</b></p><p>सद्गुरु ने कहा, "जैसे बाहरी जीवन को बेहतर बनाने के लिए विज्ञान और तकनीक है, उसी तरह आंतरिक सुख-शांति और संतुलन के लिए भी एक संपूर्ण विज्ञान और तकनीक मौजूद है, जिसे योग कहा जाता है।"&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने जोर देकर कहा कि योग किसी विशेष समुदाय, धर्म, जाति, नस्ल या लिंग के लिए नहीं है, बल्कि हर इंसान के लिए समान रूप से उपयोगी है।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;&lt;a href="https://x.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#WATCH&lt;/a&gt; | Sadhguru Jaggi Vasudev&amp;#39;s message on 12 years of International Day of Yoga.&lt;br&gt;&lt;br&gt;Sadhguru Jaggi Vasudev says, &amp;quot;21st of June, the summer solstice, the longest day in the year. Fortunately, the world has recognized this day as the International Day of Yoga. Thanks to everyone… &lt;a href="https://t.co/oyR2PO3BJE"&gt;pic.twitter.com/oyR2PO3BJE&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; ANI (@ANI) &lt;a href="https://x.com/ANI/status/2068315878597562877?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 20, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p><b>'हर व्यक्ति के भीतर छिपे जीनियस को जगाता है योग'</b></p><p>सद्गुरु के अनुसार, योग शरीर, मन, भावनाओं, बुद्धि और ऊर्जा के स्तर पर व्यक्ति को विकसित करने का माध्यम है। उन्होंने कहा, "योग हर इंसान के भीतर मौजूद जीनियस यानी असाधारण क्षमता को जागृत करने की ताकत रखता है। इस क्षमता को पहचानना और विकसित करना बेहद जरूरी है।"</p><p><b>तनाव और मानसिक समस्याओं का समाधान</b></p><p class="grey-bg-red"><b><i>सद्गुरु ने कहा कि यदि मानव अनुभव को उसकी सर्वोच्च क्षमता तक पहुंचाना है तो योग सबसे प्रभावी मार्ग है। उन्होंने बताया कि तनाव, चिंता, मानसिक दबाव और अन्य आंतरिक समस्याओं के समाधान योग के माध्यम से संभव हैं।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने कहा, "दुनिया का कोई भी व्यक्ति ऐसा न रहे जिसे यह न पता हो कि अपने भीतर की समस्याओं को दूर करने के उपाय मौजूद हैं। योग इन समस्याओं का समाधान प्रदान करता है।"</span></i></b></p><p><b>सिर्फ 7 मिनट का अभ्यास भी लाभकारी</b></p><p>सद्गुरु ने लोगों से नियमित योग अपनाने की अपील करते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक योग साधना नहीं कर सकता, तो भी प्रतिदिन केवल सात मिनट का अभ्यास उसके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने कहा, "योग बाहर नहीं, हमारे भीतर होना चाहिए। यदि आप रोजाना सिर्फ सात मिनट भी योग के लिए निकालते हैं तो यह आपके जीवन को कई तरीकों से बदल सकता है।"</span></p><p><b>'योग फॉर हेल्दी एजिंग' है इस वर्ष की थीम</b></p><p>गौरतलब है कि वर्ष 2026 में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का 12वां संस्करण मनाया जा रहा है। इस वर्ष की थीम 'योग फॉर हेल्दी एजिंग' (स्वस्थ उम्र बढ़ने के लिए योग) रखी गई है। इसका उद्देश्य लोगों को हर उम्र में सक्रिय, स्वस्थ और आत्मनिर्भर बनाए रखने में योग की भूमिका को रेखांकित करना है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ 'योग धर्म नहीं, जीवन की विज्ञान आधारित तकनीक है', सद्गुरु ने बताया इसका महत्व... ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/lifestyle-news/zeaxanthin-nutrient-boosts-cancer-immunotherapy-study-university-of-chicago-4389 ]]></guid><title><![CDATA[ आंखों के लिए फायदेमंद यह पोषक तत्व कैंसर इलाज को बना सकता है और असरदार: स्टडी ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/lifestyle-news/zeaxanthin-nutrient-boosts-cancer-immunotherapy-study-university-of-chicago-4389 ]]></link><pubDate><![CDATA[Sat, 11 Apr 2026 15:00:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ वॉशिंगटन डीसी, अमरीका: शिकागो विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने ज़ीएक्सैंथिन (Zeaxanthin) नामक एक पौधों से मिलने वाले पोषक तत्व की एक नई भूमिका का खुलासा किया है, जो अब तक आंखों के स्वास्थ्य के लिए जाना  ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>वॉशिंगटन डीसी, अमरीका:</b> शिकागो विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने ज़ीएक्सैंथिन (Zeaxanthin) नामक एक पौधों से मिलने वाले पोषक तत्व की एक नई भूमिका का खुलासा किया है, जो अब तक आंखों के स्वास्थ्य के लिए जाना जाता था।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;"><b>Cell Reports Medicine</b> में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार, यह कैरोटेनॉयड अब इम्यून सिस्टम को कैंसर से लड़ने में मदद कर सकता है, क्योंकि यह महत्वपूर्ण इम्यून कोशिकाओं की कार्यक्षमता को बढ़ाता है।&nbsp;</span></p><p><span style="font-size: 1rem;">शोध के अनुसार, ज़ीएक्सैंथिन एक सरल और आसानी से उपलब्ध सप्लीमेंट हो सकता है, जो कैंसर इम्यूनोथेरेपी को और प्रभावी बना सकता है।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">अध्ययन की वरिष्ठ लेखिका Jing Chen ने कहा कि हमें यह देखकर आश्चर्य हुआ कि आंखों के लिए फायदेमंद ज़ीएक्सैंथिन कैंसर के खिलाफ इम्यूनिटी को बढ़ाने में भी नई भूमिका निभाता है।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">उन्होंने आगे कहा कि यह साधारण पोषक तत्व आधुनिक कैंसर उपचार जैसे इम्यूनोथेरेपी को और मजबूत बना सकता है।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; text-wrap-mode: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;Zeaxanthin the &amp;quot;eye health carotenoid&amp;quot; was recently shown to bind to the T cell receptor complex on CD8  T cells and amplify their ability to kill tumor cells.&lt;br&gt;&lt;br&gt;Its near-identical isomer lutein had zero effect.&lt;br&gt;&lt;br&gt;One structural difference. Completely different immune outcome.… &lt;a href="https://t.co/Yjlnp0y1NS"&gt;pic.twitter.com/Yjlnp0y1NS&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; William A. Wallace, Ph.D. (@drwilliamwallac) &lt;a href="https://twitter.com/drwilliamwallac/status/2042628522489851927?ref_src=twsrc^tfw"&gt;April 10, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p><b>कैसे काम करता है ज़ीएक्सैंथिन?</b></p><p>यह शोध इस बात पर आधारित है कि पोषक तत्व इम्यून सिस्टम को कैसे प्रभावित करते हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि ज़ीएक्सैंथिन सीधे CD8  T-सेल्स की क्षमता को बढ़ाता है, जो कैंसर कोशिकाओं को पहचानने और नष्ट करने में अहम भूमिका निभाते हैं।</p><p><b>ज़ीएक्सैंथिन T-सेल रिसेप्टर (TCR) को स्थिर बनाता है, जिससे:</b></p><ul><li>T-सेल्स ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं</li><li>साइटोकाइन उत्पादन बढ़ता है</li><li>कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने की क्षमता मजबूत होती है</li></ul><p><b>इम्यूनोथेरेपी को मिला बूस्ट</b></p><p>चूहों पर किए गए परीक्षण में पाया गया कि ज़ीएक्सैंथिन देने से ट्यूमर की वृद्धि धीमी हो गई।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">जब इसे इम्यून चेकपॉइंट इनहिबिटर्स (एक प्रकार की इम्यूनोथेरेपी) के साथ दिया गया, तो इसका असर और ज्यादा बढ़ गया।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">लैब में मानव T-सेल्स पर किए गए प्रयोगों में भी यह पाया गया कि ज़ीएक्सैंथिन ने&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">मेलानोमा,&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">मल्टीपल मायलोमा,&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">ग्लियोब्लास्टोमा&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">जैसे कैंसर सेल्स को नष्ट करने की क्षमता बढ़ा दी।</span></p><p><b>सुरक्षित और आसानी से मिलने वाला पोषक तत्व</b></p><p>ज़ीएक्सैंथिन पहले से ही आंखों के लिए सप्लीमेंट के रूप में उपयोग किया जाता है और यह प्राकृतिक रूप से इन खाद्य पदार्थों में पाया जाता है:</p><ul><li>संतरे वाली शिमला मिर्च</li><li>पालक</li><li>केल</li><li>यह सस्ता, सुरक्षित और आसानी से उपलब्ध होने के कारण कैंसर उपचार के साथ उपयोग के लिए संभावित विकल्प माना जा रहा है।</li></ul><p><b>आगे क्या?</b></p><p>हालांकि परिणाम उत्साहजनक हैं, लेकिन अभी यह शोध शुरुआती चरण में है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">अभी तक के निष्कर्ष मुख्य रूप से लैब और जानवरों पर आधारित हैं। इंसानों पर इसके प्रभाव को समझने के लिए क्लीनिकल ट्रायल जरूरी होंगे।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">Jing Chen ने कहा कि यह खोज न्यूट्रिशनल इम्यूनोलॉजी के एक नए क्षेत्र को खोलती है, जहां हम समझ सकते हैं कि भोजन के तत्व इम्यून सिस्टम के साथ कैसे काम करते हैं।</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ आंखों के लिए फायदेमंद यह पोषक तत्व कैंसर इलाज को बना सकता है और असरदार: स्टडी ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/lifestyle-news/dcgi-crackdown-90-unapproved-fdc-drugs-paracetamol-multivitamin-action-4266 ]]></guid><title><![CDATA[ पैरासिटामोल और मल्टीविटामिन समेत 90 दवाएं अनअप्रूव्ड, देशभर में जांच के आदेश... ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/lifestyle-news/dcgi-crackdown-90-unapproved-fdc-drugs-paracetamol-multivitamin-action-4266 ]]></link><pubDate><![CDATA[Mon, 23 Mar 2026 11:00:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ नई दिल्ली,भारत: ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने अनअप्रूव्ड फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन (FDC) दवाओं के खिलाफ देशभर में अभियान शुरू किया है। दवा नियामक ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ड्रग कंट् ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>नई दिल्ली,भारत:</b> ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने अनअप्रूव्ड फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन (FDC) दवाओं के खिलाफ देशभर में अभियान शुरू किया है। दवा नियामक ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ड्रग कंट्रोलर्स से 90 FDC दवाओं की जांच करने को कहा है कि क्या इनकी स्वीकृति दी गई है या नहीं।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">इन दवाओं में मल्टीविटामिन, फोलिक एसिड, सिरप, पैरासिटामोल, क्लोट्रिमाजोल और बेटामेथासोन क्रीम, डाइक्लोफेनाक पोटेशियम और डाइसाइक्लोमाइन हाइड्रोक्लोराइड टैबलेट्स आदि शामिल हैं।</span></p><p><span style="font-size: 1rem;"><b>जानकारी</b></span><span style="font-size: 1rem;"><b>&nbsp;के अनुसार,</b> “साल 2025 के SUGAM लैब परीक्षण डेटा में बड़ी संख्या में दवा सैंपल (FDCs) अनअप्रूव्ड पाए गए हैं और इन्हें ‘न्यू ड्रग’ की श्रेणी में रखा गया है। किसी भी नई दवा का निर्माण बिक्री के लिए तब तक नहीं किया जा सकता, जब तक उसे लाइसेंसिंग अथॉरिटी से मंजूरी न मिल जाए, जैसा कि न्यू ड्रग्स एंड क्लिनिकल ट्रायल रूल्स, 2019 के नियम 3 में परिभाषित है। साथ ही, नियम 80 के अनुसार, जो भी व्यक्ति API या फार्मास्यूटिकल फॉर्मुलेशन के रूप में नई दवा का निर्माण बिक्री या वितरण के लिए करना चाहता है, उसे केंद्रीय लाइसेंसिंग प्राधिकरण से अनुमति के लिए फॉर्म CT-21 में आवेदन करना होगा और छठी अनुसूची के अनुसार शुल्क जमा करना होगा।”</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; text-wrap-mode: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;90 FDC drug samples, including Paracetamol and multivitamins, found unapproved; regulator asks states to take action&lt;br&gt;&lt;br&gt;Read &lt;a href="https://twitter.com/ANI?ref_src=twsrc^tfw"&gt;@ANI&lt;/a&gt; Story |&lt;a href="https://t.co/LgaBNIFYNg"&gt;https://t.co/LgaBNIFYNg&lt;/a&gt;&lt;a href="https://twitter.com/hashtag/DCGI?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#DCGI&lt;/a&gt; &lt;a href="https://twitter.com/hashtag/FDCs?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#FDCs&lt;/a&gt; &lt;a href="https://twitter.com/hashtag/unapproveddrugs?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#unapproveddrugs&lt;/a&gt; &lt;a href="https://twitter.com/hashtag/drugregulator?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#drugregulator&lt;/a&gt; &lt;a href="https://twitter.com/hashtag/publichealth?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#publichealth&lt;/a&gt; &lt;a href="https://twitter.com/hashtag/NDCTRules?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#NDCTRules&lt;/a&gt; &lt;a href="https://t.co/L7zUt5Q0BF"&gt;pic.twitter.com/L7zUt5Q0BF&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; ANI Digital (@ani_digital) &lt;a href="https://twitter.com/ani_digital/status/2035947600181071921?ref_src=twsrc^tfw"&gt;March 23, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><p><b>अनअप्रूव्ड दवाओं की मौजूदगी गंभीर चिंता का विषय</b></p><p>मीडिया में आई खबर के अनुसार आदेश में कहा गया कि सप्लाई चेन में अनअप्रूव्ड दवाओं की मौजूदगी गंभीर चिंता का विषय है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए संभावित खतरा पैदा करती है। यह ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 और इसके तहत बनाए गए नियमों के उल्लंघन को भी दर्शाता है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">इसलिए संबंधित निर्माताओं, मार्केटर्स और अन्य हितधारकों के खिलाफ उचित जांच और नियामकीय कार्रवाई शुरू करें। साथ ही यह सुनिश्चित करें कि ऐसी अनअप्रूव्ड दवाओं के निर्माण, बिक्री और वितरण को रोकने के लिए सख्त निगरानी और प्रवर्तन किया जाए।</span></p><p><b>नियामक ने इसे गंभीर मामला&nbsp;<span style="font-size: 1rem;"></span><span style="font-size: 1rem;">बताया</span></b></p><p>जनहित को ध्यान में रखते हुए नियामक ने इसे गंभीर मामला बताया है और कहा है, “यदि किसी निर्माता ने निर्माण लाइसेंस मिलने से पहले, NDCT नियम 2019 के नियम 83 के तहत आवश्यक ‘न्यू ड्रग’ अनुमति जमा की है, तो उसकी प्रति उपलब्ध कराएं। साथ ही आपसे अनुरोध है कि जल्द से जल्द इस पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट (ATR) इस कार्यालय को भेजें। सार्वजनिक स्वास्थ्य के हित में इस मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।”</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ पैरासिटामोल और मल्टीविटामिन समेत 90 दवाएं अनअप्रूव्ड, देशभर में जांच के आदेश... ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/lifestyle-news/age-does-not-matter-style-speaks-kareena-kapoor-off-shoulder-gown-look-4100 ]]></guid><title><![CDATA[ उम्र नहीं, स्टाइल बोलता है: करीना कपूर का ऑफ-शोल्डर गाउन लुक ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/lifestyle-news/age-does-not-matter-style-speaks-kareena-kapoor-off-shoulder-gown-look-4100 ]]></link><pubDate><![CDATA[Fri, 20 Feb 2026 16:13:49 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ करीना कपूर ने इस कार्यक्रम के लिए एक डार्क एमराल्ड ग्रीन (पन्ना हरा) रंग का 'ऑफ-शोल्डर गाउन' चुना था, जो उनके सुडौल व्यक्तित्व पर पूरी तरह जंच रहा था। इस गाउन का डिजाइन काफी आधुनिक था, जिसमें स्लीक कट ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p data-path-to-node="3">करीना कपूर ने इस कार्यक्रम के लिए एक डार्क एमराल्ड ग्रीन (पन्ना हरा) रंग का 'ऑफ-शोल्डर गाउन' चुना था, जो उनके सुडौल व्यक्तित्व पर पूरी तरह जंच रहा था। इस गाउन का डिजाइन काफी आधुनिक था, जिसमें स्लीक कट्स और एक लंबी ट्रेल दी गई थी। उनके इस लुक को प्रसिद्ध डिजाइनर सब्यसाची के लेटेस्ट कलेक्शन से बताया जा रहा है। गाउन की फिटिंग और करीना के चलने के अंदाज ने यह स्पष्ट कर दिया कि उम्र उनके लिए केवल एक संख्या है। उन्होंने कम से कम एक्सेसरीज के साथ इस लुक को कैरी किया, जिससे पूरा ध्यान उनके परिधान और व्यक्तित्व पर बना रहा।</p><p data-path-to-node="4">करीना के मेकअप की बात करें तो उन्होंने 'न्यूड ग्लैम' लुक को प्राथमिकता दी। स्मोकी आइज और न्यूड शेड की लिपस्टिक के साथ उनका चेहरा काफी फ्रेश और ग्लोइंग लग रहा था। बालों को उन्होंने स्लीक बैक बन (जुड़ा) स्टाइल में बांधा था, जो उनके नेकलाइन और ऑफ-शोल्डर डिजाइन को खूबसूरती से उभार रहा था। उनके गले में एक कीमती डायमंड चोकर था, जो उनकी रॉयल्टी में चार चांद लगा रहा था। फैशन समीक्षकों का कहना है कि करीना का यह लुक 'क्वाइट लग्जरी' का बेहतरीन उदाहरण है, जहाँ सादगी में ही सबसे अधिक चमक छिपी होती है।</p><p data-path-to-node="5">कार्यक्रम के दौरान जब उनसे उनके स्टाइल सीक्रेट के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि आत्म-विश्वास ही सबसे बड़ा फैशन स्टेटमेंट है। सोशल मीडिया पर उनके फैंस उन्हें 'एजलेस ब्यूटी' और 'अल्टीमेट फैशन क्वीन' जैसे खिताबों से नवाज रहे हैं। यह पहली बार नहीं है जब करीना ने ऑफ-शोल्डर स्टाइल को इतने ग्रेस के साथ कैरी किया हो, लेकिन 2026 के इस नए अवतार ने निश्चित रूप से आने वाले वेडिंग और पार्टी सीजन के लिए एक नया ट्रेंड सेट कर दिया है। आज की शाम करीना ने वाकई दिखा दिया कि स्टाइल उम्र का मोहताज नहीं होता।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ उम्र नहीं, स्टाइल बोलता है: करीना कपूर का ऑफ-शोल्डर गाउन लुक ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/lifestyle-news/mall-road-in-hill-stations-a-journey-from-british-heritage-to-modern-tourism-4099 ]]></guid><title><![CDATA[ हिल स्टेशनों में मॉल रोड: ब्रिटिश विरासत से आधुनिक पर्यटन का सफर ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/lifestyle-news/mall-road-in-hill-stations-a-journey-from-british-heritage-to-modern-tourism-4099 ]]></link><pubDate><![CDATA[Fri, 20 Feb 2026 16:01:31 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ औपनिवेशिक इतिहास और 'मॉल' शब्द का अर्थ
हिल स्टेशनों में मॉल रोड की अवधारणा 19वीं शताब्दी में ब्रिटिश शासन के दौरान विकसित हुई। 'मॉल' शब्द वास्तव में लंदन के प्रसिद्ध 'पॉल मॉल' (Pall Mall) बुलेवार्ड स ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b data-path-to-node="2" data-index-in-node="0">औपनिवेशिक इतिहास और 'मॉल' शब्द का अर्थ</b>
हिल स्टेशनों में मॉल रोड की अवधारणा 19वीं शताब्दी में ब्रिटिश शासन के दौरान विकसित हुई। 'मॉल' शब्द वास्तव में लंदन के प्रसिद्ध 'पॉल मॉल' (Pall Mall) बुलेवार्ड से प्रेरित है, जो पैदल चलने के लिए एक सुंदर मार्ग था। भारत की झुलसा देने वाली गर्मी से बचने के लिए अंग्रेजों ने शिमला, मसूरी और नैनीताल जैसे शहरों को ग्रीष्मकालीन राजधानी और छावनी के रूप में विकसित किया। मॉल रोड को विशेष रूप से ब्रिटिश अधिकारियों और उनके परिवारों के लिए एक 'एक्सक्लूसिव' सामाजिक केंद्र के रूप में बनाया गया था, जहाँ वे शाम को टहल सकें, खरीदारी कर सकें और सामाजिक मेलजोल बढ़ा सकें। एक अन्य रोचक सिद्धांत के अनुसार, इसे 'Married Accommodation and Living Line' (MALL) का संक्षिप्त रूप भी माना जाता था, जहाँ विवाहित अधिकारियों के आवास स्थित होते थे।</p><p><b data-path-to-node="3" data-index-in-node="0">सामाजिक केंद्र और वाहनों का प्रतिबंध</b>
मॉल रोड की सबसे बड़ी विशेषता इसका 'पैदल यात्री क्षेत्र' (Pedestrian Zone) होना है। ब्रिटिश काल में, इन सड़कों पर आम भारतीयों के प्रवेश पर अक्सर पाबंदियां होती थीं, और यह क्षेत्र पूरी तरह से यूरोपीय शैली के मनोरंजन का केंद्र था। यहाँ क्लब, बेकरी, थिएटर और सरकारी डाकघर जैसी इमारतें बनाई गई थीं, जिनका स्थापत्य (Architecture) आज भी विक्टोरियन शैली की याद दिलाता है। वर्तमान में, शिमला की मॉल रोड जैसी जगहों पर आपातकालीन वाहनों को छोड़कर किसी भी वाहन का प्रवेश वर्जित है। यह शांतिपूर्ण वातावरण पर्यटकों को बिना किसी शोर-शराबे और प्रदूषण के प्रकृति का आनंद लेने और खरीदारी करने का अवसर देता है, जो इसे पूरे हिल स्टेशन का 'हृदय' बना देता है।</p><p><b data-path-to-node="4" data-index-in-node="0">आधुनिक बदलाव और आर्थिक महत्व</b>
आज के दौर में मॉल रोड केवल टहलने की जगह नहीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुकी है। 2026 के आंकड़ों के अनुसार, किसी भी हिल स्टेशन के कुल पर्यटन राजस्व का लगभग 60% हिस्सा केवल मॉल रोड और उसके आसपास के बाजारों से आता है। यहाँ स्थानीय हस्तशिल्प, ऊनी कपड़े और क्षेत्रीय व्यंजनों के कैफे पर्यटकों के मुख्य आकर्षण होते हैं। सरकार अब 'स्मार्ट सिटी' प्रोजेक्ट के तहत इन सड़कों पर डिजिटल साइनेज, मुफ्त वाई-फाई और बेहतर स्वच्छता सुविधाएं प्रदान कर रही है। हालांकि आधुनिकता बढ़ रही है, लेकिन मॉल रोड का असली आकर्षण आज भी उस पुराने औपनिवेशिक दौर की यादों और पहाड़ों की शुद्ध हवा में टहलने के अहसास में ही छिपा है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ हिल स्टेशनों में मॉल रोड: ब्रिटिश विरासत से आधुनिक पर्यटन का सफर ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/lifestyle-news/lifestyle-2026-digital-detox-ai-doctors-and-a-new-era-of-sustainable-fashion-4098 ]]></guid><title><![CDATA[ लाइफस्टाइल 2026: डिजिटल डिटॉक्स, एआई डॉक्टर और सस्टेनेबल फैशन का नया दौर ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/lifestyle-news/lifestyle-2026-digital-detox-ai-doctors-and-a-new-era-of-sustainable-fashion-4098 ]]></link><pubDate><![CDATA[Fri, 20 Feb 2026 15:47:17 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ डिजिटल डिटॉक्स और वेलनेस का बदलता चेहरा
फरवरी 2026 में 'डिजिटल डिटॉक्स' केवल एक शब्द नहीं, बल्कि एक आवश्यक जीवनशैली बन चुका है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लोग अब मोबाइल नोटिफिकेशन की 'गुलामी' से ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b data-path-to-node="2" data-index-in-node="0">डिजिटल डिटॉक्स और वेलनेस का बदलता चेहरा</b>
फरवरी 2026 में 'डिजिटल डिटॉक्स' केवल एक शब्द नहीं, बल्कि एक आवश्यक जीवनशैली बन चुका है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लोग अब मोबाइल नोटिफिकेशन की 'गुलामी' से आजादी पाने के लिए 'साइलेंट रिट्रीट' और प्रकृति के करीब जाने वाले वेकेशन प्लान कर रहे हैं। 2026 में फिटनेस का मतलब सिर्फ जिम जाना नहीं है, बल्कि इसमें मानसिक शांति और गहरी नींद को प्राथमिकता दी जा रही है। एआई-संचालित गैजेट्स अब 'पर्सनल हेल्थ कोच' की भूमिका निभा रहे हैं, जो आपके पसीने और धड़कन के सूक्ष्म बदलावों को ट्रैक करके बीमारी होने से 24 घंटे पहले ही अलर्ट कर देते हैं।</p><p><b data-path-to-node="3" data-index-in-node="0">सस्टेनेबल फैशन और 'स्मार्ट' कपड़ों का क्रेज</b>
फैशन की दुनिया में 2026 'सस्टेनेबिलिटी' और 'टेक्नोलॉजी' के मेल का साल है। लोग अब 'फास्ट फैशन' के बजाय 'क्वाइट लग्जरी' और 'सर्कुलर फैशन' को अपना रहे हैं, जहाँ पुराने कपड़ों को नया लुक देना एक स्टेटस सिंबल बन गया है। दिलचस्प बात यह है कि 'स्मार्ट क्लॉथिंग' अब भारतीय बाजारों में भी अपनी जगह बना रही है। उदाहरण के लिए, अब ऐसे 'पोस्चर-करेक्टिंग' डेनिम और जिम वियर उपलब्ध हैं जिनमें छिपे हुए सेंसर्स आपकी बॉडी अलाइनमेंट खराब होने पर हल्का वाइब्रेशन देते हैं। इसके साथ ही, जेंडर-फ्लुइड और कंफर्ट-फर्स्ट आउटफिट्स युवाओं की पहली पसंद बने हुए हैं।</p><p><b data-path-to-node="4" data-index-in-node="0">होम डेकोर और रिश्तों में नया बदलाव</b>
घर अब केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि एक 'मल्टी-फंक्शनल स्पेस' बन गया है। 2026 में 'नियो-डेकोर' और मिनिमल डिजाइन का चलन बढ़ा है, जहाँ लोग प्राकृतिक रोशनी और इनडोर पौधों को अधिक महत्व दे रहे हैं। रिश्तों के मामले में भी एक बड़ा बदलाव देखा जा रहा है; 'डिजिटल डिटॉक्स डेटिंग' का ट्रेंड जोर पकड़ रहा है, जहाँ लोग स्क्रीन पर स्वाइप करने के बजाय बुक क्लब और ऑफलाइन इवेंट्स में मिलना पसंद कर रहे हैं। कुल मिलाकर, 2026 की जीवनशैली तकनीक के स्मार्ट उपयोग और वास्तविक मानवीय संबंधों के बीच एक आदर्श संतुलन बनाने की दिशा में अग्रसर है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ लाइफस्टाइल 2026: डिजिटल डिटॉक्स, एआई डॉक्टर और सस्टेनेबल फैशन का नया दौर ]]></media:description></item></channel></rss>