<?xml version='1.0' encoding='UTF-8' ?><rss xmlns:content='http://purl.org/rss/1.0/modules/content/' xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/'  version='2.0'><channel><title>GTC Bharat</title><link>https://www.gtcbharat.com</link><lastBuildDate><![CDATA[Wed, 07 Oct 2026 19:55:59 +0530 ]]></lastBuildDate><language>en</language><image><title>GTC Bharat</title><url>https://media.gtcbharat.com/uploads/GTC-Bhart.svg</url><link>https://www.gtcbharat.com</link></image><description>GTC Bharat: Hindi News(हिंदी न्यूज़): Bharat की ताज़ा खबरें | Hindi News, हिंदी समाचार </description><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-aap-cm-2027-6835 ]]></guid><title><![CDATA[ Punjab Politics: 2027 की तैयारी में AAP का बड़ा दांव, पंजाब CM के चेहरे पर दांव; CBI जांच से बढ़ी सियासी चुनौती ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-aap-cm-2027-6835 ]]></link><pubDate><![CDATA[Wed, 07 Oct 2026 12:19:50 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ चंडीगढ़:&nbsp;पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे तेज होती दिखाई दे रही हैं। आम आदमी पार्टी (AAP) ने अपने मौजूदा नेतृत्व और सरकार की योजनाओं को केंद्र में रखते हुए&nbsp; पंजाब CM&nbsp ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>चंडीगढ़:</b>&nbsp;पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे तेज होती दिखाई दे रही हैं। आम आदमी पार्टी (AAP) ने अपने मौजूदा नेतृत्व और सरकार की योजनाओं को केंद्र में रखते हुए&nbsp; पंजाब CM&nbsp; को चुनावी राजनीति का प्रमुख चेहरा बनाना शुरू कर दिया है। राज्य के कई हिस्सों में लगे बड़े-बड़े होर्डिंग और सार्वजनिक कार्यक्रमों में सरकार की उपलब्धियों का प्रचार इसी रणनीति की ओर इशारा करता है।</p><p>हालांकि, इसी समय मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े कुछ आरोपों की&nbsp; CBI जांच के आदेश&nbsp; ने सरकार और पार्टी के सामने राजनीतिक चुनौती भी खड़ी कर दी है। विपक्ष इस मामले को लेकर सरकार और मुख्यमंत्री की जवाबदेही पर सवाल उठा रहा है, जबकि पंजाब CM और AAP की ओर से इसे राजनीतिक दबाव और चुनाव से पहले छवि खराब करने की कोशिश बताया जा रहा है।</p><h5 class=""><b>होर्डिंग से लेकर जनसभाओं तक पंजाब CM पर फोकस</b></h5><p>2021 के विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब में AAP के प्रचार में पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व का चेहरा अधिक प्रमुख दिखाई देता था। बाद में पार्टी ने मुख्यमंत्री पद के लिए जनता की राय लेने का दावा किया और पंजाब CM को अपना चेहरा घोषित किया।</p><p>2022 के विधानसभा चुनाव में AAP ने 117 में से 92 सीटें जीतकर पंजाब की राजनीति में बड़ा बदलाव किया। अब 2027 के चुनाव को लेकर पार्टी का प्रचार काफी हद तक सरकार के कामकाज और मुख्यमंत्री के नेतृत्व के इर्द-गिर्द केंद्रित होता दिखाई दे रहा है।</p><p>राज्य की सड़कों पर लगे प्रचार सामग्री में पंजाब CM की तस्वीर के साथ सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को प्रमुखता दी जा रही है। संदेश यह देने की कोशिश है कि पार्टी का नेतृत्व राज्य में मजबूत है और सरकार अपने काम के आधार पर दोबारा जनता के बीच जाने की तैयारी कर रही है।</p><h5 class=""><b>मुफ्त बिजली और महिलाओं की आर्थिक मदद पर जोर</b></h5><p>AAP के जनसंपर्क अभियान में मुफ्त बिजली योजना प्रमुख मुद्दों में शामिल है। सरकार की ओर से 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली की सुविधा को प्रमुख उपलब्धि के रूप में प्रचारित किया जा रहा है। दो महीने के बिलिंग चक्र के कारण इसे कई जगह 600 यूनिट के रूप में भी प्रस्तुत किया जाता है।</p><p>इसके साथ महिलाओं के लिए शुरू की गई आर्थिक सहायता योजना को भी चुनावी प्रचार में महत्वपूर्ण स्थान दिया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार पात्र दलित महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये और अन्य पात्र महिलाओं को 1,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है।</p><p>पंजाब CM अपने कार्यक्रमों में इस योजना को सीधे परिवारों और महिलाओं के आर्थिक सहयोग से जोड़ते हैं। उनका कहना है कि सरकार की कोशिश ऐसी योजनाओं को लगातार जारी रखने की है, जिससे लाभार्थियों को नियमित आर्थिक सहायता मिलती रहे।</p><p>ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार नहरों के जरिए सिंचाई के लिए पानी की पहुंच बढ़ाने और स्वास्थ्य बीमा जैसी योजनाओं को भी अपनी उपलब्धियों के तौर पर पेश कर रही है। AAP का राजनीतिक संदेश स्पष्ट रूप से सरकार के काम और योजनाओं को 2027 के चुनाव से जोड़ने की कोशिश करता नजर आ रहा है।</p><h5 class=""><b>विपक्ष पर हमलावर रुख भी जारी</b></h5><p>जनसभाओं और सार्वजनिक कार्यक्रमों में पंजाब CM विपक्षी दलों पर भी लगातार निशाना साध रहे हैं। कांग्रेस और अकाली दल को लेकर उनके बयान अक्सर राजनीतिक चर्चा का विषय बनते हैं।</p><p>कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद की दावेदारी को लेकर भी पंजाब CM ने तंज कसा है। वहीं पारंपरिक राजनीतिक परिवारों को लेकर भी वह विपक्ष पर निशाना साधते रहे हैं।</p><p>उनके भाषणों में यह संदेश भी दिखाई देता है कि चुनाव नजदीक आने के साथ विपक्ष मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए अलग-अलग रणनीतियां अपना सकता है। AAP अपने समर्थकों को सरकार की योजनाओं और कामकाज के आधार पर पार्टी के पक्ष में समर्थन बनाए रखने की अपील कर रही है।</p><h5 class=""><b>नशे का मुद्दा बना बड़ा राजनीतिक हथियार</b></h5><p>पंजाब में नशे की समस्या 2027 के चुनाव में भी प्रमुख मुद्दा बनने की संभावना है। BJP सहित विपक्षी दल इस विषय को लेकर AAP सरकार पर सवाल उठाते रहे हैं।</p><p>पंजाब CM का जवाब है कि राज्य में नशे की समस्या की जड़ें पिछली सरकारों के कार्यकाल में मजबूत हुईं। वह सीमा पार से होने वाली तस्करी का मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार की जिम्मेदारी की ओर भी ध्यान दिलाते हैं।</p><p>पंजाब की पाकिस्तान से लगती लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा के कारण सीमा पार से मादक पदार्थों की तस्करी का मुद्दा राज्य की राजनीति में संवेदनशील बना हुआ है। ऐसे में आने वाले चुनाव में केंद्र और राज्य सरकार की जिम्मेदारियों को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।</p><h5 class=""><b>CBI जांच ने बढ़ाई राजनीतिक मुश्किल</b><br></h5><p>AAP के लिए सबसे बड़ी चुनौती मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े आरोपों की CBI जांच का आदेश है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मामले की जांच CBI से कराने का निर्देश दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक यह मामला प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी पर पंजाब पुलिस की कार्रवाई से जुड़ा है।</p><p>आरोपों में मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े एक अधिकारी और अन्य लोगों की भूमिका की जांच का विषय शामिल है। मामले में अधिकारियों की पोस्टिंग, विभागीय कार्रवाई और कुछ प्रशासनिक फैसलों को प्रभावित करने जैसे आरोपों की जांच की जा रही है।</p><p>CBI ने इसके बाद संबंधित ठिकानों पर तलाशी कार्रवाई की। रिपोर्ट के अनुसार मुख्यमंत्री के कैंप ऑफिस से जुड़े परिसर और एक अधिकारी के आवास समेत कई स्थानों पर जांच एजेंसी ने कार्रवाई की।</p><p>यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि&nbsp; CBI जांच या FIR में नाम आने का अर्थ दोष साबित होना नहीं है । मामले की जांच जारी है और आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के जरिए ही होगी।</p><h5 class=""><b>विपक्ष ने उठाए मुख्यमंत्री की जवाबदेही पर सवाल</b></h5><p>CBI जांच के आदेश के बाद विपक्ष को AAP सरकार को घेरने का मौका मिला है। कांग्रेस सहित विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाया है कि यदि मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े अधिकारियों पर गंभीर आरोपों की जांच हो रही है, तो मुख्यमंत्री की प्रशासनिक जिम्मेदारी पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।</p><p>विपक्ष का तर्क है कि मुख्यमंत्री कार्यालय में होने वाली महत्वपूर्ण गतिविधियों की राजनीतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी शीर्ष नेतृत्व से अलग नहीं की जा सकती। कुछ विपक्षी नेताओं ने मुख्यमंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेने और जवाब देने की मांग भी की है।</p><p>दूसरी ओर, AAP इस मामले को राजनीतिक रंग दिए जाने का आरोप लगा रही है। पंजाब CM का कहना है कि चुनाव से पहले उनकी और सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।<br></p><h5 class=""><b>क्या CBI जांच चुनावी रणनीति बदल पाएगी?</b></h5><p>2027 के चुनाव में अभी समय है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। AAP का फोकस फिलहाल पंजाब CM की व्यक्तिगत लोकप्रियता, सरकार की योजनाओं और पिछले कार्यकाल की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने पर है।</p><p>दूसरी तरफ विपक्ष के पास सरकार को घेरने के लिए नशा, प्रशासनिक फैसले, रोजगार, कानून-व्यवस्था और अब CBI जांच जैसे मुद्दे हैं।</p><p>ग्रामीण पंजाब में इस विवाद को लेकर लोगों की राय अभी पूरी तरह एक दिशा में जाती दिखाई नहीं देती। कुछ लोगों का मानना है कि आरोपों की वास्तविकता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। उनके लिए राजनीतिक आरोपों से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि सरकार के कामकाज का जमीनी असर क्या है।<br></p><p>यही कारण है कि पंजाब CM फिलहाल लगातार जनता के बीच पहुंचने और सरकार की योजनाओं को सीधे लोगों तक ले जाने की रणनीति पर आगे बढ़ते दिखाई दे रहे हैं।<br></p><p>आने वाले महीनों में AAP के लिए सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि वह अपनी सरकार की उपलब्धियों को चुनावी मुद्दा बनाए रखते हुए CBI जांच से जुड़े राजनीतिक सवालों का प्रभावी जवाब कैसे देती है। वहीं विपक्ष के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या वह इस मामले को व्यापक जनमुद्दा बना पाता है या फिर जनता चुनाव में सरकार के कामकाज को प्राथमिकता देती है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ Punjab Politics: 2027 की तैयारी में AAP का बड़ा दांव, पंजाब CM के चेहरे पर दांव; CBI जांच से बढ़ी सियासी चुनौती ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-cbi-row-chugh-6833 ]]></guid><title><![CDATA[ CBI कार्रवाई पर पंजाब में सियासी घमासान, CM के आरोपों पर तरुण चुघ का पलटवार ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-cbi-row-chugh-6833 ]]></link><pubDate><![CDATA[Wed, 07 Oct 2026 11:16:16 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ चंडीगढ़:&nbsp; पंजाब में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की कार्रवाई को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री की ओर से CBI कार्रवाई को आगामी विधानसभा चुनावों से जोड़ने के बाद भारतीय जनता पार्टी (B ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>चंडीगढ़:</b>&nbsp; पंजाब में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की कार्रवाई को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री की ओर से CBI कार्रवाई को आगामी विधानसभा चुनावों से जोड़ने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद तरुण चुघ ने पलटवार किया है। दोनों पक्षों की प्रतिक्रियाओं के बाद पंजाब की राजनीति में इस मुद्दे को लेकर आरोप-प्रत्यारोप बढ़ गए हैं।</p><p>यह मामला मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े अधिकारियों और अन्य लोगों पर लगे कथित भ्रष्टाचार तथा प्रशासनिक मामलों को प्रभावित करने के आरोपों की जांच से संबंधित है। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के निर्देश के बाद CBI ने मामले में FIR दर्ज की है और कई स्थानों पर तलाशी भी ली है।</p><h5 class=""><b>CM ने CBI कार्रवाई को चुनावी तैयारी से जोड़ा</b></h5><p>CBI की कार्रवाई के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि भाजपा ने पंजाब में होने वाले चुनावों की तैयारी शुरू कर दी है। उन्होंने दावा किया कि केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक बदले की कार्रवाई के लिए किया जा रहा है।</p><p>मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि आने वाले समय में पंजाब में ED और CBI की कार्रवाई बढ़ सकती है और सरकार तथा आम आदमी पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य की जनता से पार्टी को मिल रहे समर्थन से भाजपा परेशान है।</p><p>हालांकि, मुख्यमंत्री की ओर से लगाए गए ये राजनीतिक आरोप हैं। CBI की कार्रवाई का आधार पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का आदेश और जांच से जुड़े दस्तावेज हैं।</p><p>&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="pa" dir="ltr"&gt;ਭਾਜਪਾ ਵੱਲੋਂ ਪੰਜਾਬ ਦੀਆਂ ਚੋਣਾਂ ਦੀ ਤਿਆਰੀ ਸ਼ੁਰੂ..ਮੇਰੇ ਕੈਂਪ ਆਫ਼ਿਸ ਵਿੱਚ&nbsp; CBI ਰੇਡ ਕੀਤੀ ਗਈ..ਹੁਣ ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ED ਤੇ CBI ਦੀ ਦੁਰਵਰਤੋਂ ਕੀਤੀ ਜਾਵੇਗੀ..ਤਾਂ ਕਿ&nbsp; ਪੰਜਾਬ ਸਰਕਾਰ ਅਤੇ ਮੈਨੂੰ ਬਦਨਾਮ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕੇ..ਲੋਕਾਂ ਵੱਲੋਂ ਮਿਲਦੇ ਪਿਆਰ ਨੂੰ ਦੇਖਕੇ ਭਾਜਪਾ ਘਬਰਾਹਟ ਵਿੱਚ ਹੈ..&lt;/p&gt;&amp;mdash; Bhagwant Mann (@BhagwantMann) &lt;a href="https://x.com/BhagwantMann/status/2107454890947838039?ref_src=twsrc^tfw"&gt;October 6, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt;<br>&lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</p><h5 class=""><b>तरुण चुघ ने कहा- हाई कोर्ट के आदेश पर हुई कार्रवाई</b></h5><p>भाजपा नेता तरुण चुघ ने मुख्यमंत्री के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि CBI को केंद्र सरकार ने राजनीतिक उद्देश्य से पंजाब नहीं भेजा है। उनके मुताबिक, पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने ED की ओर से प्रस्तुत सामग्री और आरोपों के आधार पर मामले की जांच CBI को सौंपने का निर्देश दिया था।</p><p>चुघ ने कहा कि अदालत के निर्देश के बाद जांच एजेंसी अपनी कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि मामले को राजनीतिक रंग देने के बजाय जांच को अपना काम करने दिया जाना चाहिए।</p><p>भाजपा नेता ने यह भी कहा कि यदि लगाए गए आरोप गलत हैं तो जांच के दौरान तथ्य सामने आ जाएंगे और स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। उन्होंने पंजाब में पारदर्शिता और जवाबदेही को जरूरी बताते हुए जांच के नतीजे का इंतजार करने की बात कही।</p><p>&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;.@BhagwantMann , the facts are clear. The CBI has not been sent to Punjab by the Government of India. The Punjab &amp;amp; Haryana High Court directed the CBI to register a case and investigate the allegations based on material placed before it by the ED.<br><br>The allegations under investigation include alleged interference in IAS/IPS postings, departmental proceedings, policy decisions, tender conditions, licences, CLU matters, property disputes and Revenue Department matters.<br><br>Instead of political allegations, let the investigation and judicial process take their course. If the allegations are unfounded, the investigation will establish that as well.<br><br>Punjab deserves transparency, facts and accountability. Let the evidence speak.&lt;/p&gt;&amp;mdash; Tarun Chugh (@tarunchughbjp) &lt;a href="https://x.com/tarunchughbjp/status/2107486172704625083?ref_src=twsrc^tfw"&gt;October 6, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt;<br>&lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</p><h5 class=""><b>किन मामलों की जांच कर रही है CBI?</b></h5><p>CBI की जांच में अधिकारियों की पोस्टिंग और ट्रांसफर से जुड़े आरोपों के अलावा कई प्रशासनिक और सरकारी मामलों को शामिल किया गया है। इनमें IAS और IPS अधिकारियों की नियुक्ति, विभागीय कार्यवाही, नीतिगत फैसले, प्रशासनिक मंजूरियां, टेंडर की शर्तें, लाइसेंस, भूमि उपयोग परिवर्तन यानी CLU, संपत्ति विवाद तथा राजस्व और भूमि से जुड़े मामले शामिल हैं।</p><p>जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इन सरकारी प्रक्रियाओं को आर्थिक लाभ के बदले प्रभावित किया गया था। इसके अलावा कुछ आरोपों में यह भी कहा गया है कि सरकारी आदेशों और नीतियों के ड्राफ्ट जारी होने से पहले निजी लोगों तक पहुंचाए गए।</p><p>मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े OSD राजबीर घुम्मन समेत कई लोगों के नाम FIR में शामिल किए गए हैं। हालांकि, FIR में दर्ज आरोप अभी जांच का विषय हैं और इन्हें अदालत द्वारा साबित तथ्य नहीं माना जा सकता।</p><h5 class=""><b>कई शहरों में तलाशी, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद</b></h5><p>CBI ने मामले में चंडीगढ़, मोहाली, गुरदासपुर, लुधियाना, पटियाला, संगरूर और जालंधर में कुल आठ स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। जांच एजेंसी के अनुसार, तलाशी के दौरान लैपटॉप, मोबाइल फोन और कई दस्तावेज बरामद किए गए हैं।</p><p>CBI इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की जांच कर रही है। एजेंसी का कहना है कि इनसे कथित रिश्वतखोरी, प्रशासनिक प्रभाव और अन्य अनियमितताओं से संबंधित जानकारी मिल सकती है।</p><p>जांच अभी शुरुआती चरण में है। बरामद सामग्री के विश्लेषण और संबंधित लोगों से पूछताछ के बाद ही मामले में आगे की कार्रवाई तय होगी।</p><h5 class=""><b>चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक गर्मी</b></h5><p>पंजाब में आगामी चुनावों को देखते हुए CBI की कार्रवाई ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। आम आदमी पार्टी इसे केंद्रीय एजेंसियों के कथित राजनीतिक इस्तेमाल के रूप में देख रही है, जबकि भाजपा का कहना है कि जांच अदालत के आदेश पर हो रही है और इसे राजनीति से जोड़ना उचित नहीं है।</p><p>फिलहाल दोनों पक्षों के आरोपों के बीच जांच का केंद्र कथित भ्रष्टाचार और प्रशासनिक फैसलों में संभावित अनियमितताओं पर है। आने वाले समय में CBI की जांच से सामने आने वाले तथ्य यह तय करेंगे कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या मामले में आगे किसी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का आधार बनता है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ CBI कार्रवाई पर पंजाब में सियासी घमासान, CM के आरोपों पर तरुण चुघ का पलटवार ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-cm-office-cbi-raid-6830 ]]></guid><title><![CDATA[ पंजाब CM के कैंप ऑफिस पर CBI की कार्रवाई, बोले- पंजाब में BJP की चुनावी तैयारी शुरू ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-cm-office-cbi-raid-6830 ]]></link><pubDate><![CDATA[Tue, 06 Oct 2026 19:29:24 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ चंडीगढ़:&nbsp; पंजाब के मुख्यमंत्री के कैंप ऑफिस में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की कार्रवाई ने राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। यह कार्रवाई अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग और कथित भ्रष् ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>चंडीगढ़:&nbsp;</b> पंजाब के मुख्यमंत्री के कैंप ऑफिस में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की कार्रवाई ने राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। यह कार्रवाई अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग और कथित भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के हालिया आदेश के बाद हुई है। पंजाब CM ने कार्रवाई को राजनीतिक रंग देते हुए इसे आगामी पंजाब चुनाव की तैयारी बताया है।</p><p>पंजाब CM ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए केंद्र की भाजपा सरकार पर निशाना साधा। मुख्यमंत्री का आरोप है कि पंजाब में आने वाले समय में केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा सकता है। उन्होंने दावा किया कि CBI और ED के जरिए उनकी सरकार तथा आम आदमी पार्टी को बदनाम करने की कोशिश होगी।</p><h5 class=""><b>हाई कोर्ट के आदेश के बाद जांच ने पकड़ा जोर</b></h5><p>मामला अधिकारियों के तबादले और नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में पंजाब के पुलिस महानिदेशक को कई पत्र भेजे थे। इन पत्रों में कुछ लोगों पर अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग तथा सरकारी कामकाज में कथित हस्तक्षेप से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए थे।</p><p>ED की ओर से जिन लोगों के नाम सामने आए, उनमें मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े अधिकारी राजबीर सिंह घुम्मन के अलावा नितिन गोहल और बीर देविंदर का भी उल्लेख किया गया है। एजेंसी ने आरोप लगाया था कि अधिकारियों की पोस्टिंग और तबादलों के साथ-साथ सरकारी टेंडरों से संबंधित मामलों में भी कथित तौर पर प्रभाव डाला जा रहा था।</p><p>इन आरोपों पर पंजाब पुलिस की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए मामला पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट पहुंचा। याचिकाकर्ता की ओर से मामले की स्वतंत्र जांच CBI से कराने की मांग की गई थी।</p><p>हाई कोर्ट ने सोमवार को मामले की जांच CBI को सौंपने का निर्देश दिया। अदालत ने जांच को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने को भी कहा। इसके ठीक बाद CBI की कार्रवाई सामने आने से पंजाब की सियासत गरमा गई है।</p><h5 class=""><b>पंजाब CM ने कार्रवाई को बताया राजनीतिक कदम</b></h5><p>CBI की कार्रवाई के बाद पंजाब CM ने भाजपा पर सीधा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल पंजाब की राजनीतिक परिस्थितियों को प्रभावित करने के लिए किया जा सकता है।</p><p>मुख्यमंत्री ने अपने बयान में कहा कि भाजपा ने पंजाब में चुनावी तैयारियां शुरू कर दी हैं। उनका आरोप है कि आने वाले समय में CBI और ED की कार्रवाई बढ़ सकती है तथा आम आदमी पार्टी सरकार को निशाना बनाया जा सकता है।</p><p>पंजाब CM ने यह भी दावा किया कि उनकी पार्टी को जनता से मिल रहे समर्थन के कारण भाजपा परेशान है। हालांकि, ये मुख्यमंत्री के राजनीतिक आरोप हैं और जांच एजेंसी की कार्रवाई का कानूनी आधार हाई कोर्ट के आदेश से जुड़ा हुआ है।</p><h5 class=""><b>CBI ने 6 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की</b></h5><p>CBI के अनुसार, पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के आदेश और प्रवर्तन निदेशालय (ED) से मिली रिपोर्ट के आधार पर भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए FIR दर्ज की गई है। जांच में पंजाब के मुख्यमंत्री के OSD और उनके सहयोगियों पर अधिकारियों, जिनमें IAS और IPS अधिकारी भी शामिल हैं, की पोस्टिंग को कथित तौर पर प्रभावित और नियंत्रित करने के आरोपों की जांच की जा रही है।</p><p>CBI के मुताबिक, आरोपों में विभागीय कार्यवाही, नीतियां बनाने से जुड़े मामलों, प्रशासनिक मंजूरियों, टेंडर की शर्तों, लाइसेंस से जुड़े मामलों, भूमि उपयोग परिवर्तन, संपत्ति विवाद तथा राजस्व और भूमि से संबंधित मामलों में कथित तौर पर आर्थिक लाभ के बदले प्रभाव डालने की बात शामिल है।</p><p>जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ आरोपी सरकारी कर्मचारियों ने सरकार की ओर से आदेश और नीतियां जारी होने से पहले उनके ड्राफ्ट कथित तौर पर निजी लोगों को उपलब्ध कराए। मामले में CBI ने कुल छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इनमें पंजाब के मुख्यमंत्री के OSD राजबीर घुम्मन, नितिन गोहल, जितिन गोहल उर्फ राजा, रोमी राजा महाजन, बीर देविंदर, आर.एस. नागरा तथा कुछ अज्ञात सरकारी कर्मचारी और निजी व्यक्तियों के नाम शामिल हैं।</p><h5 class=""><b>सात शहरों में 8 ठिकानों पर CBI की तलाशी</b></h5><p>FIR दर्ज करने के बाद CBI ने आरोपियों से जुड़े परिसरों पर व्यापक और समन्वित तलाशी अभियान चलाया। एजेंसी के अनुसार, चंडीगढ़, मोहाली, गुरदासपुर, लुधियाना, पटियाला, संगरूर और जालंधर में कुल 8 ठिकानों पर तलाशी ली गई।</p><p>तलाशी के दौरान CBI ने लैपटॉप, मोबाइल फोन और कई दस्तावेज समेत ऐसे सामान बरामद किए हैं, जिनमें कथित रिश्वतखोरी और अनियमितताओं से संबंधित जानकारी होने की आशंका है। एजेंसी इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की जांच कर रही है ताकि मामले में कथित भ्रष्टाचार और आर्थिक लेन-देन से जुड़े सबूतों का पता लगाया जा सके।</p><p>CBI ने कहा है कि जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की विस्तृत जांच की जा रही है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि क्या इनका इस्तेमाल अधिकारियों की पोस्टिंग, प्रशासनिक फैसलों या अन्य सरकारी मामलों को प्रभावित करने के लिए किया गया था।</p><h5 class=""><b>क्या है ट्रांसफर-पोस्टिंग विवाद?</b></h5><p>पूरे मामले की शुरुआत अधिकारियों के तबादले और पोस्टिंग में कथित भ्रष्टाचार तथा बाहरी हस्तक्षेप के आरोपों से हुई। ED की ओर से पंजाब पुलिस को भेजे गए पत्रों में आरोप लगाया गया था कि कुछ लोग प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्तियों को प्रभावित करने और सरकारी ठेकों से जुड़े मामलों में दखल देने की कोशिश कर रहे थे।</p><p>आरोपों में मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े लोगों की कथित भूमिका की भी जांच की मांग की गई। चूंकि इन आरोपों पर पंजाब पुलिस द्वारा कार्रवाई किए जाने को लेकर सवाल उठे, इसलिए याचिका के जरिए अदालत से हस्तक्षेप की मांग की गई।</p><p>अब CBI को जांच सौंपे जाने के बाद एजेंसी को आरोपों, संबंधित दस्तावेजों और कथित लेन-देन या प्रशासनिक हस्तक्षेप से जुड़े पहलुओं की जांच करनी होगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई का आधार बनता है।</p><h5 class=""><b>आगे बढ़ सकता है राजनीतिक विवाद</b></h5><p>CBI की कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब पंजाब की राजनीति में चुनावी माहौल को लेकर चर्चाएं तेज हैं। आम आदमी पार्टी इसे केंद्रीय एजेंसियों के कथित राजनीतिक इस्तेमाल के तौर पर देख रही है, जबकि विपक्ष इसे भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच की दिशा में कदम बता रहा है।</p><p>फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि CBI जांच अदालत के निर्देश के तहत आगे बढ़ रही है। जांच के दौरान सामने आने वाले दस्तावेज और अधिकारियों के बयान इस मामले की दिशा तय करेंगे। आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े लोगों की भूमिका और ट्रांसफर-पोस्टिंग से संबंधित आरोपों पर और जानकारी सामने आने की संभावना है।</p><p>&lt;iframe width="560" height="315" src="https://www.youtube.com/embed/81Efxk2_gWw?si=8xK41lRgXuiQ6Fs5" title="YouTube video player" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture; web-share" referrerpolicy="strict-origin-when-cross-origin" allowfullscreen&gt;&lt;/iframe&gt;</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब CM के कैंप ऑफिस पर CBI की कार्रवाई, बोले- पंजाब में BJP की चुनावी तैयारी शुरू ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/congress-to-launch-punjab-poll-campaign-soon-6804 ]]></guid><title><![CDATA[ Congress likely to launch Punjab poll campaign soon after Pargat Singh’s appointment as PPCC chief ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/congress-to-launch-punjab-poll-campaign-soon-6804 ]]></link><pubDate><![CDATA[Tue, 06 Oct 2026 11:57:27 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ New Delhi:&nbsp; Ahead of the forthcoming 2027 assembly polls,&nbsp;Congress is set to kickstart a statewide campaign in Punjab soon, with the fresh appointment of Pargat Singh as Punjab Pradesh Congr ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>New Delhi:&nbsp; </b>Ahead of the forthcoming 2027 assembly polls,&nbsp;Congress is set to kickstart a statewide campaign in Punjab soon, with the fresh appointment of Pargat Singh as Punjab Pradesh Congress Committee (PPCC) president, who is also a former Indian hockey captain.&nbsp;</p><p>Senior Congress leader Sachin Pilot welcomed the appointment of Olympian Pargat Singh as the new president of the Punjab Congress, stating that the party is gearing up to launch its campaign in the state soon.</p><p>Speaking to reporters here, Pilot described Pargat Singh as a widely respected sports figure and a national icon whose leadership would strengthen the party's grassroots base in Punjab.</p><p>"The All India Congress Committee (AICC) has appointed a new president. Pargat Singh, who is a well-known sportsman and Olympian, has been the captain of the Indian hockey team and is also a national icon. The party has entrusted him with this key responsibility," Pilot said.</p><p>Highlighting the party's upcoming roadmap, Pilot revealed that the leadership is set to travel to Punjab to formally kick-start its political outreach.&nbsp;</p><p>"Very soon, I think we will go there and launch our campaign, and within the next few days, we will visit Punjab and Chandigarh," the Congress leader added.</p><p>"Certainly, we are making a program for Rahul Gandhi to visit Punjab," he stated.&nbsp;</p><p>Earlier on October 4, Congress leader and Punjab Congress incharge Sachin Pilot alleged that the law and order situation in Punjab had completely collapsed under the Bhagwant Mann government.</p><p>He also expressed confidence that the Congress would form the government in the state with a comfortable majority in the upcoming assembly elections.</p><p>Speaking to reporters, Pilot said, "...Gangsters are openly firing shots in Punjab, encounters are taking place, and individuals operating from within jails are demanding extortion money. Law and order there has completely collapsed. Deadly drugs are being delivered to homes via orders placed over the phone. The Bhagwant Mann government has completely failed to handle the situation... I am confident that we will form the government in Punjab with a comfortable majority."</p><p>Earlier, Pilot participated in a victory rally held to celebrate Mayank Goyal becoming the Chairperson of the Tonk Municipal Council.</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ Congress likely to launch Punjab poll campaign soon after Pargat Singh’s appointment as PPCC chief ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-govt-to-move-sc-against-cbi-probe-6803 ]]></guid><title><![CDATA[ Punjab govt to move SC against HC-ordered CBI probe into ED letter to DGP ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-govt-to-move-sc-against-cbi-probe-6803 ]]></link><pubDate><![CDATA[Tue, 06 Oct 2026 11:55:24 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ Chandigarh: The Punjab government will approach the Supreme Court to challenge the Punjab and Haryana High Court's order directing a CBI probe into the matter concerning letters written by the Enforce ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>Chandigarh:</b> The Punjab government will approach the Supreme Court to challenge the Punjab and Haryana High Court's order directing a CBI probe into the matter concerning letters written by the Enforcement Directorate (ED) to the Punjab Director General of Police (DGP), according to sources in the AAP.</p><p>The state government will file an appeal before the Supreme Court against the High Court's order in the matter.</p><p>The Punjab and Haryana High Court had ordered the investigation into the matter concerning letters written by the Enforcement Directorate (ED) to the Punjab Director General of Police (DGP) to be handed over to the Central Bureau of Investigation (CBI) yesterday.</p><p>Notably, the ED had written three letters to the Punjab DGP seeking the registration of an FIR against Rajbir Singh Ghumman, Officer on Special Duty (OSD) to Chief Minister Bhagwant Mann, and certain other individuals, alleging their involvement in corruption.</p><p>The PIL was filed in the High Court after the Punjab Police failed to register a case.</p><p>The direction came during the hearing of a PIL filed by Advocate Nikhil Thamman, who submitted that Punjab has not had a regular DGP for more than four years.</p><p>The petition referred to the Supreme Court's judgment in the Prakash Singh vs Union of India case and the directions regarding the appointment of a regular DGP. The petitioner submitted that the Supreme Court's directions provide for the appointment of a DGP from a panel recommended by the Union Public Service Commission (UPSC).</p><p>Meanwhile, Punjab Congress Chief Pargat Singh alleged systemic corruption in the state administration and warned officials against aligning with the government, following the Punjab and Haryana High Court's directive to transfer the case involving letters written by the Enforcement Directorate (ED) to the Punjab Director General of Police (DGP) to the Central Bureau of Investigation (CBI) on Monday.</p><p>Speaking to ANI, Singh took a swipe at the Aam Aadmi Party (AAP), terming it and the party members a "sham," adding that even the office of Punjab Chief Minister Bhagwant Mann has been under scrutiny.</p><p>"This party was created by the BJP as their own B-team, but the idea was to make the laws so strict that no matter who the minister or senior official was, anyone involved in corruption would automatically end up in jail. Today, that is the situation. The entire episode involving Arvind Kejriwal and his associates is a sham. Even the Chief Minister's Office has been linked to allegations of corruption, which had also been raised earlier by the Enforcement Directorate," he said.</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ Punjab govt to move SC against HC-ordered CBI probe into ED letter to DGP ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/amritsar-central-university-demand-6785 ]]></guid><title><![CDATA[ अमृतसर में केंद्रीय विश्वविद्यालय की मांग तेज, तरुण चुग ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री से की मुलाकात ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/amritsar-central-university-demand-6785 ]]></link><pubDate><![CDATA[Mon, 05 Oct 2026 12:00:46 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ अमृतसर:&nbsp; गुरु नगरी अमृतसर में केंद्रीय विश्वविद्यालय स्थापित करने की मांग एक बार फिर सामने आई है। राज्यसभा सांसद और भाजपा के राष्ट्रीय मुख्यालय प्रभारी तरुण चुग ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>अमृतसर:</b>&nbsp; गुरु नगरी अमृतसर में केंद्रीय विश्वविद्यालय स्थापित करने की मांग एक बार फिर सामने आई है। राज्यसभा सांसद और भाजपा के राष्ट्रीय मुख्यालय प्रभारी तरुण चुग ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात कर अमृतसर में केंद्रीय विश्वविद्यालय स्थापित करने का प्रस्ताव रखा। इस दौरान&nbsp; अमृतसर विकास मंच&nbsp; की ओर से भी शिक्षा मंत्री को एक मांग-पत्र सौंपा गया।</p><p>मांग को अमृतसर के 450वें स्थापना दिवस से जोड़ते हुए मंच ने केंद्र सरकार से शहर की ऐतिहासिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक पहचान को देखते हुए विश्वविद्यालय स्थापित करने पर प्राथमिकता से विचार करने का आग्रह किया है।</p><p>हालांकि, फिलहाल यह एक मांग और प्रस्ताव के स्तर पर है। केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना को लेकर केंद्र सरकार की ओर से किसी अंतिम मंजूरी की घोषणा नहीं की गई है।</p><h5 class=""><b>अमृतसर में केंद्रीय विश्वविद्यालय की क्यों उठी मांग?</b></h5><p>तरुण चुग के मुताबिक, अमृतसर पंजाब के सबसे महत्वपूर्ण शहरों में शामिल है। शहर की पहचान धार्मिक और ऐतिहासिक पर्यटन के साथ-साथ शिक्षा, व्यापार और सीमावर्ती क्षेत्र के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में भी है।</p><p>अमृतसर में श्री हरमंदिर साहिब, जलियांवाला बाग, दुर्गियाना मंदिर, भगवान वाल्मीकि तीर्थ स्थल और अटारी-वाघा सीमा जैसे प्रमुख स्थल मौजूद हैं। यहां देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक और श्रद्धालु पहुंचते हैं।</p><p>इसके अलावा अमृतसर में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, रेल नेटवर्क और सड़क संपर्क जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। मांग रखने वालों का तर्क है कि इन सुविधाओं और शहर की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए यहां केंद्रीय स्तर के उच्च शिक्षा संस्थान की स्थापना से पूरे क्षेत्र को लाभ मिल सकता है।</p><h5 class=""><b>माझा क्षेत्र के छात्रों को मिल सकता है फायदा</b></h5><p>केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना के पक्ष में दिए जा रहे तर्कों में सबसे प्रमुख उच्च शिक्षा तक बेहतर पहुंच का है। प्रस्ताव के समर्थकों का कहना है कि अमृतसर में ऐसा संस्थान स्थापित होने से अमृतसर के साथ-साथ पूरे&nbsp; माझा क्षेत्र&nbsp; के विद्यार्थियों को लाभ मिल सकता है।</p><p>विश्वविद्यालय में आधुनिक पाठ्यक्रम, शोध सुविधाएं और उच्च शिक्षा के विभिन्न अवसर विकसित किए जा सकते हैं। इससे उन विद्यार्थियों को स्थानीय स्तर पर बेहतर विकल्प मिलने की संभावना होगी, जिन्हें उच्च शिक्षा के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है।</p><p>तरुण चुग ने कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालय से युवाओं के लिए शिक्षा और शोध के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। उनका कहना है कि इससे अमृतसर को एक प्रमुख शिक्षा केंद्र के रूप में विकसित करने में मदद मिल सकती है।</p><h5 class=""><b>पंजाब की विरासत पर रिसर्च का केंद्र बनाने का सुझाव</b></h5><p>मांग रखने वालों ने विश्वविद्यालय को केवल सामान्य उच्च शिक्षा संस्थान के तौर पर विकसित करने के बजाय पंजाब और सीमावर्ती क्षेत्रों से जुड़े विषयों पर शोध का केंद्र बनाने की संभावना भी जताई है।</p><p>प्रस्ताव के मुताबिक, विश्वविद्यालय में पंजाब की विरासत, इतिहास, संस्कृति, सीमावर्ती क्षेत्रों से जुड़े विषयों और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में अध्ययन और शोध को बढ़ावा दिया जा सकता है।</p><p>अमृतसर की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए भारत-पाकिस्तान सीमा, सीमा क्षेत्र का सामाजिक-आर्थिक विकास, विभाजन का इतिहास और पंजाब की सांस्कृतिक विरासत जैसे विषय उच्च शिक्षा और शोध के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र हो सकते हैं।</p><h5 class=""><b>450वें स्थापना दिवस से जोड़ी गई मांग</b></h5><p>अमृतसर के 450वें स्थापना दिवस के अवसर पर केंद्रीय विश्वविद्यालय की मांग को विशेष महत्व देने की अपील की गई है। अमृतसर विकास मंच ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि इस ऐतिहासिक अवसर को शहर के शैक्षणिक विकास से जोड़ा जाए।</p><p>मंच का कहना है कि विश्वविद्यालय की स्थापना से शहर की पहचान केवल धार्मिक और पर्यटन केंद्र तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे उच्च शिक्षा और शोध के एक प्रमुख केंद्र के रूप में भी विकसित किया जा सकेगा।</p><p>तरुण चुग ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री से इस प्रस्ताव पर प्राथमिकता से विचार करने का आग्रह किया। उन्होंने अमृतसर के विकास और युवाओं के लिए शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने को इस पहल का प्रमुख उद्देश्य बताया।</p><h5 class=""><b>तरुण चुग ने क्या कहा?</b></h5><p>मुलाकात के दौरान तरुण चुग ने अमृतसर के साथ अपने जुड़ाव का उल्लेख करते हुए कहा कि शहर का विकास और यहां की नई पीढ़ी के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराना उनके लिए महत्वपूर्ण है।</p><p>उन्होंने कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालय अमृतसर के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और शोध की सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।</p><p>उनके मुताबिक, विश्वविद्यालय बनने से अमृतसर और आसपास के जिलों के छात्रों को उच्च शिक्षा के नए विकल्प मिलेंगे और क्षेत्र में अकादमिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।</p><h5 class=""><b>अब केंद्र के फैसले पर नजर</b></h5><p>अमृतसर में केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना के प्रस्ताव को लेकर अब आगे की प्रक्रिया केंद्र सरकार के निर्णय पर निर्भर करेगी। इसके लिए स्थान, बजट, संस्थान का स्वरूप, प्रशासनिक व्यवस्था और केंद्रीय विश्वविद्यालय से जुड़े वैधानिक प्रावधानों पर विचार करना होगा।</p><p>फिलहाल अमृतसर विकास मंच और तरुण चुग ने केंद्र के सामने अपनी मांग रखी है। यदि प्रस्ताव पर आगे सकारात्मक निर्णय होता है, तो अमृतसर के शिक्षा क्षेत्र में एक नई केंद्रीय संस्था स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।</p><p>शहर के 450वें स्थापना दिवस के संदर्भ में उठाई गई यह मांग अब राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है। आने वाले समय में केंद्र सरकार की ओर से इस प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाया जाता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ अमृतसर में केंद्रीय विश्वविद्यालय की मांग तेज, तरुण चुग ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री से की मुलाकात ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/sukhpal-khaira-fir-punjab-6783 ]]></guid><title><![CDATA[ पंजाब कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा पर FIR, महिला नेता से जुड़े सोशल मीडिया विवाद की जांच शुरू ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/sukhpal-khaira-fir-punjab-6783 ]]></link><pubDate><![CDATA[Mon, 05 Oct 2026 11:27:38 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ चंडीगढ़: पंजाब के कपूरथला जिले की भुलत्थ विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा के खिलाफ एक महिला नेता से जुड़े कथित आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो के मामले में FIR दर्ज की गई है। पुल ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>चंडीगढ़: </b>पंजाब के कपूरथला जिले की भुलत्थ विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा के खिलाफ एक महिला नेता से जुड़े कथित आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो के मामले में FIR दर्ज की गई है। पुलिस ने यह कार्रवाई आम आदमी पार्टी (AAP) से जुड़े एक नेता की शिकायत के आधार पर की है।</p><p>पुलिस के अनुसार, शिकायत में सोशल मीडिया पर महिला नेता के चरित्र, व्यवहार और प्रतिष्ठा को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों का आरोप लगाया गया है। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 के तहत केस दर्ज किया गया है।</p><p>हालांकि, FIR में लगाए गए आरोप अभी जांच के दायरे में हैं। किसी भी आरोप की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।</p><h5 class=""><b>किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?</b></h5><p>पुलिस ने सुखपाल सिंह खैरा के खिलाफ BNS की धारा 75(1)(iv), 75(3), 79, 351 और 61 के अलावा IT Act की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया है।</p><p>पुलिस का कहना है कि शिकायत में जिन सोशल मीडिया पोस्ट और टिप्पणियों का उल्लेख किया गया है, उनमें संबंधित महिला नेता की प्रतिष्ठा और निजी जीवन को लेकर कथित तौर पर आपत्तिजनक बातें कही गई थीं।</p><p>अब जांच एजेंसियां उन पोस्ट, वीडियो और अन्य डिजिटल सामग्री को खंगालेंगी, जिनके आधार पर शिकायत दर्ज हुई है। जांच का एक अहम हिस्सा यह भी होगा कि संबंधित सामग्री किसने पोस्ट की, उसका संदर्भ क्या था और उसमें लगाए गए आरोपों या टिप्पणियों का कोई दस्तावेजी आधार था या नहीं।</p><h5 class=""><b>X को भी भेजा गया था पुलिस का नोटिस</b></h5><p>मामले में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X की भूमिका भी सामने आई है। पंजाब पुलिस के स्टेट साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर से 27 सितंबर को प्लेटफॉर्म को एक ई-मेल भेजे जाने की जानकारी सामने आई थी।</p><p>पुलिस ने संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट को हटाने या उसकी पहुंच सीमित करने के साथ-साथ डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने को कहा था। नोटिस में खैरा और दो अन्य सोशल मीडिया अकाउंट से जुड़े कंटेंट का उल्लेख किया गया था।</p><p>पुलिस की ओर से यह भी कहा गया था कि संबंधित पोस्ट में महिला नेता के चरित्र और प्रतिष्ठा को लेकर कथित आपत्तिजनक एवं आधारहीन टिप्पणियां की गई थीं। पुलिस ने इन सामग्री से जुड़ी शिकायत के आधार पर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई है।</p><h5 class=""><b>सरकारी आवास से शुरू हुआ था विवाद</b></h5><p>मामले की शुरुआत सितंबर के आखिरी सप्ताह में एक अलग राजनीतिक विवाद से हुई थी। सुखपाल सिंह खैरा ने चंडीगढ़ के सेक्टर-39 स्थित एक सरकारी आवास को लेकर सवाल उठाए थे।</p><p>खैरा ने आरोप लगाया था कि आम आदमी पार्टी के पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया से जुड़े लोगों की ओर से ऐसे सरकारी आवास का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो कथित तौर पर पंजाब सरकार के एक मंत्री को आवंटित था।</p><p>इसी मुद्दे पर सोशल मीडिया पर हुई बहस के दौरान AAP की महिला नेता गायत्री बिश्नोई का नाम भी सामने आया। बिश्नोई ने खैरा की टिप्पणियों पर आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया था कि उनके चरित्र और प्रतिष्ठा को निशाना बनाया गया।</p><p>महिला नेता का कहना था कि वह अपने पिता के इलाज के दौरान परिवार की अनुमति से संबंधित आवास में रह रही थीं। इसके बाद दोनों पक्षों की ओर से आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हुआ।</p><h5 class=""><b>खैरा ने कार्रवाई को बताया राजनीतिक</b></h5><p>कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है। उनका आरोप है कि पंजाब की AAP सरकार उनकी राजनीतिक आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है।</p><p>दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि FIR शिकायत और उपलब्ध सामग्री के आधार पर दर्ज की गई है। अब मामले की जांच के दौरान सोशल मीडिया पोस्ट, वीडियो, डिजिटल रिकॉर्ड और शिकायत से जुड़े अन्य तथ्यों की पड़ताल की जाएगी।</p><h5 class=""><b>आगे क्या होगा?</b></h5><p>FIR दर्ज होने के बाद पुलिस डिजिटल साक्ष्यों की जांच करेगी। इसमें संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट, पोस्ट, वीडियो और उनके प्रसार से जुड़े रिकॉर्ड शामिल हो सकते हैं।</p><p>जांच के दौरान पुलिस यह भी तय करेगी कि शिकायत में लगाए गए आरोपों से संबंधित धाराओं के तहत आवश्यक कानूनी तत्व पूरे होते हैं या नहीं। जांच के निष्कर्ष के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।</p><p>फिलहाल यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के साथ-साथ कानूनी जांच का विषय बन गया है। FIR में दर्ज आरोपों को अदालत में साबित किया जाना बाकी है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा पर FIR, महिला नेता से जुड़े सोशल मीडिया विवाद की जांच शुरू ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-cmo-cbi-probe-6782 ]]></guid><title><![CDATA[ पंजाब CMO में कथित भ्रष्टाचार के आरोपों पर हाईकोर्ट सख्त, CBI को जांच का जिम्मा; 2 महीने में रिपोर्ट ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-cmo-cbi-probe-6782 ]]></link><pubDate><![CDATA[Mon, 05 Oct 2026 11:08:21 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी है। अदालत ने केंद्रीय एजेंसी को मामले की जां ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>चंडीगढ़:</b> पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी है। अदालत ने केंद्रीय एजेंसी को मामले की जांच कर दो महीने के भीतर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। यह मामला प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से पंजाब पुलिस के महानिदेशक को भेजे गए पत्रों और उन पर कथित तौर पर कार्रवाई नहीं होने से जुड़ा है।</p><p>हाईकोर्ट का यह आदेश उस जनहित याचिका पर आया, जिसमें ईडी द्वारा उठाए गए आरोपों के बावजूद पंजाब पुलिस की ओर से पर्याप्त कार्रवाई नहीं किए जाने का मुद्दा उठाया गया था। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच पंजाब पुलिस से हटाकर सीबीआई को सौंपने का फैसला किया।</p><h5 class=""><b>ED ने पंजाब DGP को भेजे थे तीन पत्र</b></h5><p>मामले की शुरुआत प्रवर्तन निदेशालय की ओर से पंजाब के पुलिस महानिदेशक को भेजे गए तीन पत्रों से हुई। इन पत्रों में राज्य में सरकारी कामकाज से जुड़े कुछ मामलों में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे।</p><p>ईडी के पत्रों में ट्रांसफर-पोस्टिंग, चेंज ऑफ लैंड यूज (CLU) और कुछ अन्य सरकारी प्रक्रियाओं में कथित भ्रष्टाचार का उल्लेख किया गया था। एजेंसी ने इन आरोपों की जांच और आवश्यक कार्रवाई के लिए पंजाब पुलिस से हस्तक्षेप की मांग की थी।</p><p>इन पत्रों में कुछ निजी व्यक्तियों के साथ-साथ पंजाब मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े अधिकारी OSD राजबीर घुमन का भी उल्लेख किए जाने की बात सामने आई थी। हालांकि, इन सभी आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।</p><h5 class=""><b>पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल</b></h5><p>ईडी की ओर से पत्र भेजे जाने के बावजूद मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया गया। इसके बाद यह मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट तक पहुंचा।</p><p>अधिवक्ता निखिल सराफ की ओर से दाखिल जनहित याचिका में पुलिस की कथित निष्क्रियता का मुद्दा उठाते हुए मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की गई थी। याचिका में अदालत से यह भी आग्रह किया गया था कि आरोपों की गंभीरता को देखते हुए किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी से मामले की जांच कराई जाए।</p><p>सुनवाई के दौरान अदालत के सामने ईडी के पत्रों और उनमें लगाए गए आरोपों से जुड़े पहलुओं को रखा गया। मामले की प्रकृति और उपलब्ध सामग्री को देखते हुए हाईकोर्ट ने जांच की जिम्मेदारी सीबीआई को सौंपने का निर्णय लिया।</p><h5 class=""><b>दो महीने में CBI को देनी होगी रिपोर्ट</b></h5><p>हाईकोर्ट ने सीबीआई को मामले की विस्तृत जांच करने और दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट अदालत में पेश करने का निर्देश दिया है। अब केंद्रीय जांच एजेंसी यह देखेगी कि ईडी की ओर से लगाए गए आरोपों में प्रथम दृष्टया कोई तथ्य है या नहीं और यदि है तो उसमें किन लोगों की भूमिका रही है।</p><p>अदालत के आदेश के बाद जांच का अगला चरण सीबीआई की कार्रवाई पर निर्भर करेगा। एजेंसी संबंधित दस्तावेजों, सरकारी प्रक्रियाओं और पत्राचार समेत मामले से जुड़े अन्य रिकॉर्ड की जांच कर सकती है।</p><p>यह भी महत्वपूर्ण है कि फिलहाल सामने आए आरोपों को अदालत द्वारा दोष सिद्ध नहीं माना गया है। जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की वास्तविकता और किसी व्यक्ति की संभावित भूमिका को लेकर स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।</p><h5 class=""><b>CMO से जुड़े आरोपों पर बढ़ी निगरानी</b></h5><p>मुख्यमंत्री कार्यालय किसी भी राज्य सरकार के प्रशासनिक कामकाज का महत्वपूर्ण केंद्र होता है। ऐसे में CMO से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों की स्वतंत्र जांच का हाईकोर्ट का फैसला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p><p>अब सभी की नजर सीबीआई की जांच और अदालत में पेश होने वाली रिपोर्ट पर रहेगी। दो महीने की समयसीमा के भीतर रिपोर्ट दाखिल किए जाने के बाद मामले की आगे की कानूनी दिशा भी स्पष्ट होने की उम्मीद है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब CMO में कथित भ्रष्टाचार के आरोपों पर हाईकोर्ट सख्त, CBI को जांच का जिम्मा; 2 महीने में रिपोर्ट ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/pargat-singh-aap-mla-suspension-punjab-congress-6770 ]]></guid><title><![CDATA[ पंजाब में विधायक के निलंबन पर परगट सिंह का AAP पर हमला, बोले- ‘तानाशाही है, सच्चा लोकतंत्र नहीं’ ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/pargat-singh-aap-mla-suspension-punjab-congress-6770 ]]></link><pubDate><![CDATA[Sun, 04 Oct 2026 13:00:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ नई दिल्ली: पंजाब कांग्रेस के नवनियुक्त अध्यक्ष परगट सिंह ने आम आदमी पार्टी (AAP) द्वारा विधायक सुखवीर सिंह मैसरखाना को निलंबित किए जाने पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस कार्रवाई को “तानाशाही” कर ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>नई दिल्ली:</b> पंजाब कांग्रेस के नवनियुक्त अध्यक्ष परगट सिंह ने आम आदमी पार्टी (AAP) द्वारा विधायक सुखवीर सिंह मैसरखाना को निलंबित किए जाने पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस कार्रवाई को “तानाशाही” करार देते हुए आरोप लगाया कि AAP सरकार राज्य की जमीनी हकीकत पर उठने वाली आलोचना को स्वीकार नहीं कर रही है।</span></p><p>AAP ने मैसरखाना को कथित “पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता” के आरोप में प्राथमिक सदस्यता से निलंबित किया है। विधायक ने अपने विधानसभा क्षेत्र के स्कूलों में शिक्षकों के खाली पदों और अन्य बुनियादी समस्याओं को लेकर सार्वजनिक रूप से चिंता जताई थी।</p><h5 class=""><b>‘जमीनी हकीकत बताने वालों से सहमत नहीं होते केजरीवाल’</b></h5><p>मैसरखाना के निलंबन पर प्रतिक्रिया देते हुए परगट सिंह ने कहा, “मैं इसे तानाशाही कहता हूं, यह सच्चा लोकतंत्र नहीं है। केजरीवाल मूल रूप से तानाशाह हैं, क्योंकि जो भी जमीनी हकीकत के बारे में बोलता है, वह उससे सहमत होने को तैयार नहीं होते।”&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">विधायक ने एक वीडियो में कहा था कि उन्होंने सरकार से कई बार स्कूलों में खाली पदों को भरने की मांग की, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।</span></p><p>मैसरखाना ने कहा था कि वह स्कूलों के खिलाफ नहीं, बल्कि उनके लिए लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन स्कूलों में सिर्फ उनके बच्चे नहीं, बल्कि पूरे समाज के बच्चे पढ़ते हैं और यह शिक्षा व्यवस्था तथा राज्य की मौजूदा स्थिति का सवाल है।</p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;&lt;a href="https://x.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#WATCH&lt;/a&gt; | Delhi | On AAP suspending MLA Sukhveer Singh Maiserkhana from the party&amp;#39;s primary membership, Punjab Congress President Pargat Singh says, &amp;quot;I call this a dictatorship; it is not true democracy. Kejriwal is essentially a dictator because he refuses to agree with anyone… &lt;a href="https://t.co/tCF9YvsC5I"&gt;pic.twitter.com/tCF9YvsC5I&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; ANI (@ANI) &lt;a href="https://x.com/ANI/status/2106609204777930811?ref_src=twsrc^tfw"&gt;October 4, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><h5 class=""><b>शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर AAP पर निशाना</b></h5><p>परगट सिंह ने AAP सरकार के ईमानदारी, देशभक्ति और शिक्षा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में बदलाव के दावों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने इन दावों को “दिखावा” बताते हुए कहा कि सरकार की ओर से किए जा रहे कई दावे वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाते। उन्होंने कहा कि राज्य की समस्याओं पर सवाल उठाने के बजाय सरकार को जमीनी हालात सुधारने पर ध्यान देना चाहिए।</p><h5 class=""><b>पंजाब की कानून-व्यवस्था पर भी उठाए सवाल</b></h5><p>परगट सिंह ने पंजाब में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर भी मुख्यमंत्री भगवंत मान पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राज्य में नेतृत्व की कमी है और पुलिस बल के भीतर भी नेतृत्व का अभाव दिखाई देता है।</p><p>उन्होंने दावा किया कि एक दिन पहले पंजाब में दो हत्याएं हुईं और कहा कि राज्य ने इससे पहले ऐसी परिस्थितियों का सामना नहीं किया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के सत्ता में लौटने पर पुलिस व्यवस्था में पेशेवर रवैया सुनिश्चित किया जाएगा।</p><h5 class=""><b>2027 चुनाव से पहले कांग्रेस ने बदला प्रदेश नेतृत्व</b></h5><p>परगट सिंह को 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उन्होंने अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की जगह यह जिम्मेदारी संभाली है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">पद संभालने के बाद परगट सिंह ने कहा था कि पंजाब को “सार्थक राजनीति, सकारात्मक राजनीति और एजेंडा आधारित राजनीति” की जरूरत है। उन्होंने कहा था कि पंजाबी हमेशा नफरत की राजनीति को नकारते रहे हैं और भविष्य में भी इसे स्वीकार नहीं करेंगे।</span></p><p>पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने भी नए प्रदेश नेतृत्व का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस एकजुट है और 2027 का विधानसभा चुनाव मिलकर लड़ेगी। बाजवा ने दावा किया कि कांग्रेस पूरी ताकत के साथ पंजाब में सरकार बनाने के लिए काम करेगी।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब में विधायक के निलंबन पर परगट सिंह का AAP पर हमला, बोले- ‘तानाशाही है, सच्चा लोकतंत्र नहीं’ ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/pargat-singh-aap-mla-maisarkhana-suspension-6769 ]]></guid><title><![CDATA[ "Dictatorship, not true democracy": Punjab Congress chief Pargat Singh slams AAP over MLA Maiserkhana's suspension ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/pargat-singh-aap-mla-maisarkhana-suspension-6769 ]]></link><pubDate><![CDATA[Sun, 04 Oct 2026 12:30:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ New Delhi, India: Newly appointed Punjab Congress president Pargat Singh on Sunday termed the Aam Aadmi Party’s suspension of MLA Sukhveer Singh Maiserkhana as “dictatorship”, alleging that the move r ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>New Delhi, India: </b>Newly appointed Punjab Congress president Pargat Singh on Sunday termed the Aam Aadmi Party’s suspension of MLA Sukhveer Singh Maiserkhana as “dictatorship”, alleging that the move reflected the ruling party’s unwillingness to accept criticism over ground realities in the state.</span></p><p>Reacting to the suspension of Maiserkhana from AAP’s primary membership for alleged anti-party activities, Pargat Singh said, “I call this a dictatorship; it is not a true democracy. Kejriwal is essentially a dictator because he refuses to agree with anyone who speaks about the ground reality.”</p><p>Maiserkhana was suspended after he publicly raised concerns over teacher vacancies and other basic issues in schools in his constituency. In a video, the MLA had said he had repeatedly urged the government to fill vacant posts so that students could study properly.&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">The AAP cited “anti-party activities and indiscipline” while announcing the suspension.</span></p><p>“I am not fighting against schools; I am fighting for them. It is not just my children studying there; children from all over. Children of other people study in these schools. It is a matter of our education system and the current state of affairs. I know what the situation is like in these schools; I could not tolerate it anymore. If I am wrong, I apologise, but I am speaking up today because of the situation we have reached, a situation that has become unbearable after so much patience,” Maiserkhana had said in the video.</p><p>Reacting to the development, Pargat Singh alleged that the AAP government’s claims of honesty, patriotism and reforms in education and healthcare were a “facade”.</p><p>“The fact is, it is all a facade, a facade of honesty, a facade of patriotism, and a facade of having brought about revolutions in education and healthcare,” he told ANI.</p><p>On the law and order situation in Punjab, Pargat Singh said, "The real issue is a lack of leadership; there is no leadership within the police force, nor is there any political leadership. Punjab CM Bhagwant Mann cannot shirk his responsibility."</p><p>He further said, "As for law and order, two murders took place just yesterday. I do not think Punjab ever faced such conditions before; when the Congress government returns to power, you will see professionalism in the police force."</p><p>Pargat Singh was appointed president of the Punjab Pradesh Congress Committee ahead of the 2027 Assembly elections, replacing Amarinder Singh Raja Warring.&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">Speaking after his appointment, Pargat Singh had said Punjab needed “meaningful politics, positive politics, and agenda-based politics”, with focus on issues concerning the state.</span></p><p>“Punjabis have always defeated the politics of hatred. And the politics of hatred happening across the country—Punjabis will never accept that,” he had said.&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">Leader of Opposition in the Punjab Assembly, Partap Singh Bajwa, has also backed the new state Congress leadership, saying the party is united and would contest the 2027 Assembly elections together.</span></p><p>Bajwa said Congress would work with full vigour to form the government in Punjab in 2027 and alleged that the people of the state would respond to the AAP government’s policies in the coming elections.</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ "Dictatorship, not true democracy": Punjab Congress chief Pargat Singh slams AAP over MLA Maiserkhana's suspension ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/raja-warring-resignation-punjab-congress-bjp-kewal-dhillon-6751 ]]></guid><title><![CDATA[ ‘सब मुख्यमंत्री की कुर्सी के पीछे भाग रहे हैं’, राजा वड़िंग के इस्तीफे पर पंजाब भाजपा अध्यक्ष का कांग्रेस पर हमला ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/raja-warring-resignation-punjab-congress-bjp-kewal-dhillon-6751 ]]></link><pubDate><![CDATA[Fri, 02 Oct 2026 18:00:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ पंचकूला, पंजाब: पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के इस्तीफे के बाद पंजाब की राजनीति गरमा गई है। भाजपा के पंजाब अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने कांग्रेस पर अंदरूनी कलह का आर ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>पंचकूला, पंजाब: </b>पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के इस्तीफे के बाद पंजाब की राजनीति गरमा गई है। भाजपा के पंजाब अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने कांग्रेस पर अंदरूनी कलह का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी के नेता मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए आपस में संघर्ष कर रहे हैं।</span></p><p>केवल सिंह ढिल्लों ने कहा कि कांग्रेस में एक नेता के इस्तीफे के बाद दूसरे नेता को निशाना बनाए जाने का सिलसिला आगे बढ़ सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर खींचतान चल रही है और नेताओं को पंजाब की चिंता नहीं है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने कहा, “वे सभी केवल मुख्यमंत्री की कुर्सी के पीछे भाग रहे हैं, उन्हें पंजाब की कोई चिंता नहीं है।”</span></p><h5 class=""><b>राजा वड़िंग ने पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद से दिया इस्तीफा</b></h5><p>ढिल्लों ने यह भी सवाल उठाया कि क्या राजा वड़िंग का इस्तीफा कांग्रेस के भीतर चल रहे घटनाक्रम को खत्म कर देगा। उन्होंने कहा कि मामला केवल एक इस्तीफे तक सीमित नहीं रहेगा और आने वाले समय में अंदरूनी विवाद और बढ़ सकता है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने शुक्रवार को पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट की भूमिका को लेकर भी अपनी बात रखी।</span></p><p>वड़िंग ने कहा कि जब सचिन पायलट को पंजाब का प्रभारी नियुक्त किया गया था, तब उन्होंने उनसे मुलाकात कर उन्हें बधाई दी थी। हालांकि, इसके बाद उनकी पायलट से कोई मुलाकात नहीं हुई।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">वड़िंग ने कहा कि अपने लंबे राजनीतिक अनुभव के आधार पर उन्हें लगता है कि शायद सचिन पायलट ने यह तय किया हो कि अब ‘राजा’ को पद से हटाने का समय आ गया है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके पास इस संबंध में कोई ठोस प्रमाण नहीं है।</span></p><h5 class=""><b>राहुल गांधी से बातचीत का किया जिक्र</b></h5><p>राजा वड़िंग ने बताया कि उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात कर पंजाब को लेकर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने उनसे पंजाब से जुड़े सवाल पूछे और उनकी बात सुनी।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">वड़िंग ने कहा कि राहुल गांधी ने मुलाकात के दौरान उनके प्रति काफी स्नेह दिखाया। इसके बाद वह अपनी पत्नी के साथ गुरुद्वारा बंगला साहिब पहुंचे और अरदास की।</span></p><p>उन्होंने अपने करीब साढ़े चार साल के कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि कार्यकाल छोटा हो या लंबा, उसे ऐसा होना चाहिए जिसे लोग याद रखें। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन्हें जो जिम्मेदारी दी, उसे उन्होंने स्वीकार किया और पूरी निष्ठा से निभाया।</p><h5 class=""><b>पंजाब की कानून-व्यवस्था पर भी भाजपा का हमला</b></h5><p>केवल सिंह ढिल्लों ने पंजाब की कानून-व्यवस्था को लेकर भी राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में स्थिति गंभीर है और दलितों के खिलाफ अपराध की घटनाएं हो रही हैं।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">भाजपा नेता ने दावा किया कि पंजाब में कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहद खराब हो गई है। ये आरोप भाजपा नेता द्वारा लगाए गए हैं।</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ ‘सब मुख्यमंत्री की कुर्सी के पीछे भाग रहे हैं’, राजा वड़िंग के इस्तीफे पर पंजाब भाजपा अध्यक्ष का कांग्रेस पर हमला ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-bjp-chief-raja-warring-resignation-6750 ]]></guid><title><![CDATA[ "They are all chasing CM’s chair": Punjab BJP chief on Raja Warring’s resignation ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-bjp-chief-raja-warring-resignation-6750 ]]></link><pubDate><![CDATA[Fri, 02 Oct 2026 17:30:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ Panchkula, Haryana: Punjab BJP president Kewal Singh Dhillon on Friday alleged infighting within the Congress following Amarinder Singh Raja Warring's resignation as Punjab Pradesh Congress Committee  ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b style="font-size: 1rem;">Panchkula, Haryana:</b><span style="font-size: 1rem;"> Punjab BJP president Kewal Singh Dhillon on Friday alleged infighting within the Congress following Amarinder Singh Raja Warring's resignation as Punjab Pradesh Congress Committee president, saying leaders in the party were "chasing the Chief Minister's chair".</span></p><p>"I have always said regarding the Congress that once they secure one person's resignation, they will go after another. There is infighting over the chair within their ranks. They are all merely chasing the Chief Minister's chair; they have no concern for Punjab," Dhillon said.</p><p>The BJP leader questioned whether Warring's resignation would bring an end to the developments within the Congress.&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">"Do you think this will end with just one resignation? It is only going to escalate further," he said.&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">Warring resigned as Punjab Congress president on Friday.</span></p><p>On the law and order situation in Punjab, Dhillon alleged that the situation in the state was "dire" and raised the issue of crimes against Dalits.&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">"The situation in Punjab is dire. In the Chief Minister's own district, crimes against Dalits are occurring daily. Today, there is virtually no law and order left in the entire state of Punjab," he said.</span></p><p>Earlier today, Amarinder Singh Raja Warring claimed that AICC state in-charge Sachin Pilot may have decided on the party's strategy for the state.&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">Speaking to ANI, Warring emphasised that he has already conveyed his thoughts to Rahul Gandhi.</span></p><p>"When he was appointed in charge, I went to formally congratulate him. I spoke with him for about 15 minutes that day. But I haven't met him since. Given my long journey in politics, I feel that Sachin Pilot must have decided it was time to remove 'Raja' from the post. I don't have concrete proof of this, but perhaps the General Secretary felt that Raja should be removed. Otherwise, there is no specific issue. I have conveyed what I had to say to Rahul Gandhi. There is no one left after Rahul Gandhi to whom I could explain what should or shouldn't happen," said Warring.</p><p>The outgoing PPCC president Warring emphasised that Congress leader Rahul Gandhi displayed great affection towards him during their meeting after he stepped down from his post.&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">Recalling his meeting with the Leader of Opposition in Lok Sabha, Warring mentioned that he answered questions regarding Punjab and shared his thoughts about the state.&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">He further expressed satisfaction over his tenure as state president, adding that whatever happens, happens for good.</span></p><p>"I met my leader, Rahul Gandhi. I answered the questions he asked about Punjab and shared my thoughts. He showed great affection. After that meeting, my wife and I came straight here to Gurudwara Bangla Sahib to offer 'Ardas' (prayer). A tenure can be long or short, but it should be one that people remember. My tenure as a minister was exactly that kind—memorable—and one should be grateful for what one receives. I am satisfied that, after a 4.5-year tenure as State President, whatever happens, happens for good... Whatever the party gave, I accepted it willingly and obeyed the command," added Warring.</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ "They are all chasing CM’s chair": Punjab BJP chief on Raja Warring’s resignation ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/tarun-chugh-punjab-drug-free-deadline-2029-6743 ]]></guid><title><![CDATA[ December 31, 2029 Deadline Announced Before Drug-Affected Families: BJP Will Make Punjab Drug-Free — Tarun Chugh ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/tarun-chugh-punjab-drug-free-deadline-2029-6743 ]]></link><pubDate><![CDATA[Fri, 02 Oct 2026 12:00:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ Chandigarh, Punjab: During a meeting with families affected by drugs, BJP National Headquarters In-Charge and Rajya Sabha MP Tarun Chugh said that December 31, 2029 has been set as the deadline to fre ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>Chandigarh, Punjab:</b> During a meeting with families affected by drugs, BJP National Headquarters In-Charge and Rajya Sabha MP Tarun Chugh said that December 31, 2029 has been set as the deadline to free Punjab from the Chitta trade. He said that a BJP government would take stringent and decisive action to dismantle the drug trade and ensure that those involved in drug trafficking are brought to justice and sent behind bars under the law.</span></p><p>Chugh said the pain of these families reflects the suffering that the drug menace has brought into homes across Punjab. Protecting Punjab’s youth from drugs is not merely a law-and-order issue but a question directly connected with the social and economic future of the state. The ‘Nasha Mukt Punjab Yatra’ brought the pain of Punjab’s families and concerns of its youth to the forefront. The yatra began in Pathankot and travelled around 4,000 kilometres across 117 Assembly constituencies over 13 days before concluding in Jalandhar.</p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="hi" dir="ltr"&gt;एक भी चिट्टा बेचने वाला बख्शा नहीं जाएगा।&lt;br&gt;31 दिसंबर 2029 तक पंजाब को नशा मुक्त कर देंगे।&lt;a href="https://x.com/hashtag/PunjabNashaMukt?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#PunjabNashaMukt&lt;/a&gt; &lt;a href="https://t.co/TsBOrOI0hb"&gt;pic.twitter.com/TsBOrOI0hb&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Tarun Chugh (@tarunchughbjp) &lt;a href="https://x.com/tarunchughbjp/status/2105651495832367386?ref_src=twsrc^tfw"&gt;October 1, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><p>Chugh said the BJP’s commitment goes beyond action against individual drug sellers. The entire supply chain, trafficking network and distribution system will have to be dismantled through a stringent and effective enforcement mechanism so that Chitta does not reach Punjab’s youth. He said a BJP government would take decisive action against the drug trade and free Punjab from its grip.</p><p>He said that the effective enforcement of existing laws and stronger coordination with central agencies are essential to the fight against drugs. Referring to action against more than 5,000 people across the country under the PIT-NDPS framework, he questioned the effective use of the law in Punjab. He said measures such as establishing an NCB office in Punjab must also be taken forward firmly as part of the fight against drugs.</p><p>&lt;blockquote class="instagram-media" data-instgrm-captioned data-instgrm-permalink="https://www.instagram.com/reel/Dd-sdfUCArz/?utm_source=ig_embed&amp;amp;utm_campaign=loading" data-instgrm-version="14" style=" background:#FFF; border:0; border-radius:3px; box-shadow:0 0 1px 0 rgba(0,0,0,0.5),0 1px 10px 0 rgba(0,0,0,0.15); margin: 1px; max-width:540px; min-width:326px; padding:0; width:99.375%; width:-webkit-calc(100% - 2px); width:calc(100% - 2px);"&gt;&lt;div style="padding:16px;"&gt; &lt;a href="https://www.instagram.com/reel/Dd-sdfUCArz/?utm_source=ig_embed&amp;amp;utm_campaign=loading" style=" background:#FFFFFF; line-height:0; padding:0 0; text-align:center; text-decoration:none; width:100%;" target="_blank"&gt; &lt;div style=" display: flex; flex-direction: row; align-items: center;"&gt; &lt;div style="background-color: #F4F4F4; border-radius: 50%; flex-grow: 0; height: 40px; margin-right: 14px; width: 40px;"&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="display: flex; flex-direction: column; flex-grow: 1; justify-content: center;"&gt; &lt;div style=" background-color: #F4F4F4; border-radius: 4px; flex-grow: 0; height: 14px; margin-bottom: 6px; width: 100px;"&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style=" background-color: #F4F4F4; border-radius: 4px; flex-grow: 0; height: 14px; width: 60px;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="padding: 19% 0;"&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="display:block; height:50px; margin:0 auto 12px; width:50px;"&gt;&lt;svg width="50px" height="50px" viewBox="0 0 60 60" version="1.1" xmlns="https://www.w3.org/2000/svg" xmlns:xlink="https://www.w3.org/1999/xlink"&gt;&lt;g stroke="none" stroke-width="1" fill="none" fill-rule="evenodd"&gt;&lt;g transform="translate(-511.000000, -20.000000)" fill="#000000"&gt;&lt;g&gt;&lt;path d="M556.869,30.41 C554.814,30.41 553.148,32.076 553.148,34.131 C553.148,36.186 554.814,37.852 556.869,37.852 C558.924,37.852 560.59,36.186 560.59,34.131 C560.59,32.076 558.924,30.41 556.869,30.41 M541,60.657 C535.114,60.657 530.342,55.887 530.342,50 C530.342,44.114 535.114,39.342 541,39.342 C546.887,39.342 551.658,44.114 551.658,50 C551.658,55.887 546.887,60.657 541,60.657 M541,33.886 C532.1,33.886 524.886,41.1 524.886,50 C524.886,58.899 532.1,66.113 541,66.113 C549.9,66.113 557.115,58.899 557.115,50 C557.115,41.1 549.9,33.886 541,33.886 M565.378,62.101 C565.244,65.022 564.756,66.606 564.346,67.663 C563.803,69.06 563.154,70.057 562.106,71.106 C561.058,72.155 560.06,72.803 558.662,73.347 C557.607,73.757 556.021,74.244 553.102,74.378 C549.944,74.521 548.997,74.552 541,74.552 C533.003,74.552 532.056,74.521 528.898,74.378 C525.979,74.244 524.393,73.757 523.338,73.347 C521.94,72.803 520.942,72.155 519.894,71.106 C518.846,70.057 518.197,69.06 517.654,67.663 C517.244,66.606 516.755,65.022 516.623,62.101 C516.479,58.943 516.448,57.996 516.448,50 C516.448,42.003 516.479,41.056 516.623,37.899 C516.755,34.978 517.244,33.391 517.654,32.338 C518.197,30.938 518.846,29.942 519.894,28.894 C520.942,27.846 521.94,27.196 523.338,26.654 C524.393,26.244 525.979,25.756 528.898,25.623 C532.057,25.479 533.004,25.448 541,25.448 C548.997,25.448 549.943,25.479 553.102,25.623 C556.021,25.756 557.607,26.244 558.662,26.654 C560.06,27.196 561.058,27.846 562.106,28.894 C563.154,29.942 563.803,30.938 564.346,32.338 C564.756,33.391 565.244,34.978 565.378,37.899 C565.522,41.056 565.552,42.003 565.552,50 C565.552,57.996 565.522,58.943 565.378,62.101 M570.82,37.631 C570.674,34.438 570.167,32.258 569.425,30.349 C568.659,28.377 567.633,26.702 565.965,25.035 C564.297,23.368 562.623,22.342 560.652,21.575 C558.743,20.834 556.562,20.326 553.369,20.18 C550.169,20.033 549.148,20 541,20 C532.853,20 531.831,20.033 528.631,20.18 C525.438,20.326 523.257,20.834 521.349,21.575 C519.376,22.342 517.703,23.368 516.035,25.035 C514.368,26.702 513.342,28.377 512.574,30.349 C511.834,32.258 511.326,34.438 511.181,37.631 C511.035,40.831 511,41.851 511,50 C511,58.147 511.035,59.17 511.181,62.369 C511.326,65.562 511.834,67.743 512.574,69.651 C513.342,71.625 514.368,73.296 516.035,74.965 C517.703,76.634 519.376,77.658 521.349,78.425 C523.257,79.167 525.438,79.673 528.631,79.82 C531.831,79.965 532.853,80.001 541,80.001 C549.148,80.001 550.169,79.965 553.369,79.82 C556.562,79.673 558.743,79.167 560.652,78.425 C562.623,77.658 564.297,76.634 565.965,74.965 C567.633,73.296 568.659,71.625 569.425,69.651 C570.167,67.743 570.674,65.562 570.82,62.369 C570.966,59.17 571,58.147 571,50 C571,41.851 570.966,40.831 570.82,37.631"&gt;&lt;/path&gt;&lt;/g&gt;&lt;/g&gt;&lt;/g&gt;&lt;/svg&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="padding-top: 8px;"&gt; &lt;div style=" color:#3897f0; font-family:Arial,sans-serif; font-size:14px; font-style:normal; font-weight:550; line-height:18px;"&gt;View this post on Instagram&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="padding: 12.5% 0;"&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="display: flex; flex-direction: row; margin-bottom: 14px; align-items: center;"&gt;&lt;div&gt; &lt;div style="background-color: #F4F4F4; border-radius: 50%; height: 12.5px; width: 12.5px; transform: translateX(0px) translateY(7px);"&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="background-color: #F4F4F4; height: 12.5px; transform: rotate(-45deg) translateX(3px) translateY(1px); width: 12.5px; flex-grow: 0; margin-right: 14px; margin-left: 2px;"&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="background-color: #F4F4F4; border-radius: 50%; height: 12.5px; width: 12.5px; transform: translateX(9px) translateY(-18px);"&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="margin-left: 8px;"&gt; &lt;div style=" background-color: #F4F4F4; border-radius: 50%; flex-grow: 0; height: 20px; width: 20px;"&gt;&lt;/div&gt; 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border-radius: 4px; flex-grow: 0; height: 14px; width: 144px;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;/a&gt;&lt;p style=" color:#c9c8cd; font-family:Arial,sans-serif; font-size:14px; line-height:17px; margin-bottom:0; margin-top:8px; overflow:hidden; padding:8px 0 7px; text-align:center; text-overflow:ellipsis; white-space:nowrap;"&gt;&lt;a href="https://www.instagram.com/reel/Dd-sdfUCArz/?utm_source=ig_embed&amp;amp;utm_campaign=loading" style=" color:#c9c8cd; font-family:Arial,sans-serif; font-size:14px; font-style:normal; font-weight:normal; line-height:17px; text-decoration:none;" target="_blank"&gt;A post shared by GTC News (@gtcnewsonline)&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&lt;/div&gt;&lt;/blockquote&gt;</p><p>&lt;script async src="//www.instagram.com/embed.js"&gt;&lt;/script&gt;</p><p>Tarun Chugh said that the fight for a drug-free Punjab must go hand in hand with employment opportunities for young people, resolution of farmers’ concerns, industrial development and improvement in the state’s financial position. He said Punjab’s development can gather momentum only when its youth are free from drugs and connected with opportunities in education, employment, sports and entrepreneurship.</p><p>Tarun Chugh said that December 31, 2029 is not merely a date but a clear commitment to free Punjab from the Chitta trade. He said the pain of drug-affected families is not merely something for the BJP to hear, but a call for decisive action. Standing with Punjab’s mothers, sisters and youth, the BJP will take the fight against drugs to its decisive conclusion and work to secure the future of Punjab’s younger generation.</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ December 31, 2029 Deadline Announced Before Drug-Affected Families: BJP Will Make Punjab Drug-Free — Tarun Chugh ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/tarun-chugh-drug-free-punjab-deadline-2029-6742 ]]></guid><title><![CDATA[ नशा मुक्त पंजाब के लिए 31 दिसंबर 2029 की डेडलाइन दोहराई, भाजपा निर्णायक कार्रवाई करेगी: तरुण चुग ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/tarun-chugh-drug-free-punjab-deadline-2029-6742 ]]></link><pubDate><![CDATA[Fri, 02 Oct 2026 11:34:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ चंडीगढ़, पंजाब: भाजपा के राष्ट्रीय मुख्यालय प्रभारी एवं सांसद तरुण चुग ने ड्रग्स पीड़ित परिवारों से मुलाकात के दौरान पंजाब को चिट्टे के कारोबार से मुक्त करने के लिए 31 दिसंबर 2029 की डेडलाइन दोहराई। उ ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>चंडीगढ़, पंजाब:</b> भाजपा के राष्ट्रीय मुख्यालय प्रभारी एवं सांसद तरुण चुग ने ड्रग्स पीड़ित परिवारों से मुलाकात के दौरान पंजाब को चिट्टे के कारोबार से मुक्त करने के लिए 31 दिसंबर 2029 की डेडलाइन दोहराई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की डबल इंजन सरकार बनने पर नशे के कारोबार को जड़ से खत्म करने के लिए सख्त और निर्णायक कार्रवाई की जाएगी।</span></p><p>तरुण चुग ने कहा कि नशा तस्करों को कानून के तहत जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाएगा और पंजाब में चिट्टे की सप्लाई चेन को तोड़ने के लिए प्रभावी तंत्र तैयार किया जाएगा।</p><h5 class=""><b>नशे ने घर-घर पहुंचाया पंजाब का दर्द</b></h5><p>चुग ने कहा कि ड्रग्स पीड़ित परिवारों की पीड़ा पंजाब में नशे के गंभीर प्रभाव को सामने लाती है। उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे से बचाना केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं है, बल्कि पंजाब के सामाजिक और आर्थिक भविष्य से जुड़ा विषय भी है।</p><p>उन्होंने कहा कि ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ के जरिए पंजाब के परिवारों और युवाओं की पीड़ा को पूरे प्रदेश के सामने रखा गया। उनके मुताबिक, पठानकोट से शुरू हुई यह यात्रा 13 दिनों में लगभग 4,000 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए 117 विधानसभा क्षेत्रों से होकर जालंधर पहुंची।</p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="hi" dir="ltr"&gt;एक भी चिट्टा बेचने वाला बख्शा नहीं जाएगा।&lt;br&gt;31 दिसंबर 2029 तक पंजाब को नशा मुक्त कर देंगे।&lt;a href="https://x.com/hashtag/PunjabNashaMukt?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#PunjabNashaMukt&lt;/a&gt; &lt;a href="https://t.co/TsBOrOI0hb"&gt;pic.twitter.com/TsBOrOI0hb&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Tarun Chugh (@tarunchughbjp) &lt;a href="https://x.com/tarunchughbjp/status/2105651495832367386?ref_src=twsrc^tfw"&gt;October 1, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><h5 class=""><b>पूरी सप्लाई चेन तोड़ने का दावा</b></h5><p>तरुण चुग ने कहा कि गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में भाजपा का संकल्प केवल नशा बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई तक सीमित नहीं है। नशे की पूरी सप्लाई चेन, तस्करी और वितरण व्यवस्था को तोड़ने के लिए कठोर और प्रभावी तंत्र तैयार किया जाएगा।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना होगा कि पंजाब के किसी भी युवा तक चिट्टा न पहुंचे और नशे के कारोबार पर निर्णायक प्रहार किया जाए।</span></p><h5 class=""><b>PIT-NDPS कानून के इस्तेमाल पर उठाया सवाल</b></h5><p>चुग ने नशे के खिलाफ लड़ाई में कानूनों के प्रभावी इस्तेमाल और केंद्रीय एजेंसियों के साथ बेहतर समन्वय को जरूरी बताया। उन्होंने PIT-NDPS कानून के तहत देशभर में 5,000 से अधिक लोगों के खिलाफ हुई कार्रवाई का उल्लेख करते हुए पंजाब में इस कानून के प्रभावी इस्तेमाल पर सवाल उठाया।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने पंजाब में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) का कार्यालय स्थापित करने जैसे कदमों को भी नशे के खिलाफ अभियान को मजबूत करने के लिए जरूरी बताया।</span></p><p>&lt;blockquote class="instagram-media" data-instgrm-captioned data-instgrm-permalink="https://www.instagram.com/reel/Dd-sdfUCArz/?utm_source=ig_embed&amp;amp;utm_campaign=loading" data-instgrm-version="14" style=" background:#FFF; border:0; border-radius:3px; box-shadow:0 0 1px 0 rgba(0,0,0,0.5),0 1px 10px 0 rgba(0,0,0,0.15); margin: 1px; max-width:540px; min-width:326px; padding:0; width:99.375%; width:-webkit-calc(100% - 2px); width:calc(100% - 2px);"&gt;&lt;div style="padding:16px;"&gt; &lt;a href="https://www.instagram.com/reel/Dd-sdfUCArz/?utm_source=ig_embed&amp;amp;utm_campaign=loading" style=" background:#FFFFFF; line-height:0; padding:0 0; text-align:center; text-decoration:none; width:100%;" target="_blank"&gt; &lt;div style=" display: flex; flex-direction: row; align-items: center;"&gt; &lt;div style="background-color: #F4F4F4; border-radius: 50%; flex-grow: 0; height: 40px; margin-right: 14px; width: 40px;"&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="display: flex; flex-direction: column; flex-grow: 1; justify-content: center;"&gt; &lt;div style=" background-color: #F4F4F4; border-radius: 4px; flex-grow: 0; height: 14px; margin-bottom: 6px; width: 100px;"&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style=" background-color: #F4F4F4; border-radius: 4px; flex-grow: 0; height: 14px; width: 60px;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="padding: 19% 0;"&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="display:block; height:50px; margin:0 auto 12px; width:50px;"&gt;&lt;svg width="50px" height="50px" viewBox="0 0 60 60" version="1.1" xmlns="https://www.w3.org/2000/svg" xmlns:xlink="https://www.w3.org/1999/xlink"&gt;&lt;g stroke="none" stroke-width="1" fill="none" fill-rule="evenodd"&gt;&lt;g transform="translate(-511.000000, -20.000000)" fill="#000000"&gt;&lt;g&gt;&lt;path d="M556.869,30.41 C554.814,30.41 553.148,32.076 553.148,34.131 C553.148,36.186 554.814,37.852 556.869,37.852 C558.924,37.852 560.59,36.186 560.59,34.131 C560.59,32.076 558.924,30.41 556.869,30.41 M541,60.657 C535.114,60.657 530.342,55.887 530.342,50 C530.342,44.114 535.114,39.342 541,39.342 C546.887,39.342 551.658,44.114 551.658,50 C551.658,55.887 546.887,60.657 541,60.657 M541,33.886 C532.1,33.886 524.886,41.1 524.886,50 C524.886,58.899 532.1,66.113 541,66.113 C549.9,66.113 557.115,58.899 557.115,50 C557.115,41.1 549.9,33.886 541,33.886 M565.378,62.101 C565.244,65.022 564.756,66.606 564.346,67.663 C563.803,69.06 563.154,70.057 562.106,71.106 C561.058,72.155 560.06,72.803 558.662,73.347 C557.607,73.757 556.021,74.244 553.102,74.378 C549.944,74.521 548.997,74.552 541,74.552 C533.003,74.552 532.056,74.521 528.898,74.378 C525.979,74.244 524.393,73.757 523.338,73.347 C521.94,72.803 520.942,72.155 519.894,71.106 C518.846,70.057 518.197,69.06 517.654,67.663 C517.244,66.606 516.755,65.022 516.623,62.101 C516.479,58.943 516.448,57.996 516.448,50 C516.448,42.003 516.479,41.056 516.623,37.899 C516.755,34.978 517.244,33.391 517.654,32.338 C518.197,30.938 518.846,29.942 519.894,28.894 C520.942,27.846 521.94,27.196 523.338,26.654 C524.393,26.244 525.979,25.756 528.898,25.623 C532.057,25.479 533.004,25.448 541,25.448 C548.997,25.448 549.943,25.479 553.102,25.623 C556.021,25.756 557.607,26.244 558.662,26.654 C560.06,27.196 561.058,27.846 562.106,28.894 C563.154,29.942 563.803,30.938 564.346,32.338 C564.756,33.391 565.244,34.978 565.378,37.899 C565.522,41.056 565.552,42.003 565.552,50 C565.552,57.996 565.522,58.943 565.378,62.101 M570.82,37.631 C570.674,34.438 570.167,32.258 569.425,30.349 C568.659,28.377 567.633,26.702 565.965,25.035 C564.297,23.368 562.623,22.342 560.652,21.575 C558.743,20.834 556.562,20.326 553.369,20.18 C550.169,20.033 549.148,20 541,20 C532.853,20 531.831,20.033 528.631,20.18 C525.438,20.326 523.257,20.834 521.349,21.575 C519.376,22.342 517.703,23.368 516.035,25.035 C514.368,26.702 513.342,28.377 512.574,30.349 C511.834,32.258 511.326,34.438 511.181,37.631 C511.035,40.831 511,41.851 511,50 C511,58.147 511.035,59.17 511.181,62.369 C511.326,65.562 511.834,67.743 512.574,69.651 C513.342,71.625 514.368,73.296 516.035,74.965 C517.703,76.634 519.376,77.658 521.349,78.425 C523.257,79.167 525.438,79.673 528.631,79.82 C531.831,79.965 532.853,80.001 541,80.001 C549.148,80.001 550.169,79.965 553.369,79.82 C556.562,79.673 558.743,79.167 560.652,78.425 C562.623,77.658 564.297,76.634 565.965,74.965 C567.633,73.296 568.659,71.625 569.425,69.651 C570.167,67.743 570.674,65.562 570.82,62.369 C570.966,59.17 571,58.147 571,50 C571,41.851 570.966,40.831 570.82,37.631"&gt;&lt;/path&gt;&lt;/g&gt;&lt;/g&gt;&lt;/g&gt;&lt;/svg&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="padding-top: 8px;"&gt; &lt;div style=" color:#3897f0; font-family:Arial,sans-serif; font-size:14px; font-style:normal; font-weight:550; line-height:18px;"&gt;View this post on Instagram&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="padding: 12.5% 0;"&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="display: flex; flex-direction: row; margin-bottom: 14px; align-items: center;"&gt;&lt;div&gt; &lt;div style="background-color: #F4F4F4; border-radius: 50%; height: 12.5px; width: 12.5px; transform: translateX(0px) translateY(7px);"&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="background-color: #F4F4F4; height: 12.5px; transform: rotate(-45deg) translateX(3px) translateY(1px); width: 12.5px; flex-grow: 0; margin-right: 14px; margin-left: 2px;"&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="background-color: #F4F4F4; border-radius: 50%; height: 12.5px; width: 12.5px; transform: translateX(9px) translateY(-18px);"&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="margin-left: 8px;"&gt; &lt;div style=" background-color: #F4F4F4; border-radius: 50%; flex-grow: 0; height: 20px; width: 20px;"&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style=" width: 0; height: 0; border-top: 2px solid transparent; border-left: 6px solid #f4f4f4; border-bottom: 2px solid transparent; transform: translateX(16px) translateY(-4px) rotate(30deg)"&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="margin-left: auto;"&gt; &lt;div style=" width: 0px; border-top: 8px solid #F4F4F4; border-right: 8px solid transparent; transform: translateY(16px);"&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style=" background-color: #F4F4F4; flex-grow: 0; height: 12px; width: 16px; transform: translateY(-4px);"&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style=" width: 0; height: 0; border-top: 8px solid #F4F4F4; border-left: 8px solid transparent; transform: translateY(-4px) translateX(8px);"&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="display: flex; flex-direction: column; flex-grow: 1; justify-content: center; margin-bottom: 24px;"&gt; &lt;div style=" background-color: #F4F4F4; border-radius: 4px; flex-grow: 0; height: 14px; margin-bottom: 6px; width: 224px;"&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style=" background-color: #F4F4F4; border-radius: 4px; flex-grow: 0; height: 14px; width: 144px;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;/a&gt;&lt;p style=" color:#c9c8cd; font-family:Arial,sans-serif; font-size:14px; line-height:17px; margin-bottom:0; margin-top:8px; overflow:hidden; padding:8px 0 7px; text-align:center; text-overflow:ellipsis; white-space:nowrap;"&gt;&lt;a href="https://www.instagram.com/reel/Dd-sdfUCArz/?utm_source=ig_embed&amp;amp;utm_campaign=loading" style=" color:#c9c8cd; font-family:Arial,sans-serif; font-size:14px; font-style:normal; font-weight:normal; line-height:17px; text-decoration:none;" target="_blank"&gt;A post shared by GTC News (@gtcnewsonline)&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&lt;/div&gt;&lt;/blockquote&gt;</p><p></p><p>&lt;script async src="//www.instagram.com/embed.js"&gt;&lt;/script&gt;</p><h5 class=""><b>रोजगार और औद्योगिक विकास पर भी जोर</b></h5><p>तरुण चुग ने कहा कि नशा मुक्त पंजाब के साथ युवाओं के लिए रोजगार, किसानों की समस्याओं का समाधान, औद्योगिक विकास और प्रदेश की वित्तीय स्थिति में सुधार भी भाजपा की प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने कहा कि पंजाब का विकास तभी गति पकड़ सकता है, जब प्रदेश का युवा नशे से मुक्त होकर शिक्षा, रोजगार, खेल और उद्यमिता के अवसरों से जुड़े।</span></p><h5 class=""><b>‘31 दिसंबर 2029 केवल तारीख नहीं, स्पष्ट संकल्प’</b></h5><p>तरुण चुग ने कहा कि 31 दिसंबर 2029 केवल एक तारीख नहीं, बल्कि पंजाब को चिट्टे के कारोबार से मुक्त करने का भाजपा का स्पष्ट संकल्प है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने कहा कि ड्रग्स पीड़ित परिवारों का दर्द भाजपा के लिए केवल सुनने का विषय नहीं, बल्कि कार्रवाई का संकल्प है। उन्होंने पंजाब की माताओं, बहनों और युवाओं के साथ मिलकर नशे के खिलाफ लड़ाई को निर्णायक मुकाम तक पहुंचाने और युवा पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित करने की बात कही।</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ नशा मुक्त पंजाब के लिए 31 दिसंबर 2029 की डेडलाइन दोहराई, भाजपा निर्णायक कार्रवाई करेगी: तरुण चुग ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/bjp-mp-ashok-kumar-mittal-on-unrest-at-lpu-6734 ]]></guid><title><![CDATA[ "Highly organised conspiracy orchestrated by malicious elements": BJP MP Ashok Kumar Mittal on unrest at LPU ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/bjp-mp-ashok-kumar-mittal-on-unrest-at-lpu-6734 ]]></link><pubDate><![CDATA[Thu, 01 Oct 2026 16:43:47 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ New Delhi: BJP MP and Lovely Professional University (LPU) Chancellor Ashok Kumar Mittal on Thursday claimed that the recent violent protests on the university campus were the result of a "highly orga ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>New Delhi:</b> BJP MP and Lovely Professional University (LPU) Chancellor Ashok Kumar Mittal on Thursday claimed that the recent violent protests on the university campus were the result of a "highly organised conspiracy" orchestrated by malicious elements to spread anarchy and destabilise Punjab.</p><p>Speaking with ANI, Mittal dismissed online claims that sparked mass student outrage, attributing the unrest to fabricated rumours circulated primarily via social media platform Reddit.</p><p>Refuting the allegations, Mittal stated that preliminary inquiries by law enforcement and institutional checks confirmed no such assault took place. He highlighted a sequential pattern of unrest across Punjab campuses, noting that a similar incident involving unverified rumours occurred at Chitkara University in Rajpura just 24 hours prior to the events at LPU.</p><p>"The rumour spread via the Reddit platform is completely false. Initial inquiries have confirmed that no such incident ever took place. It was done to destabilise LPU. Incidents occurred at Chitkara University in Rajpura one day, and then with me the very next day—within a span of 24 hours. This indicates a highly organised conspiracy orchestrated by malicious elements, whether from within the state, from outside the state, or even from abroad," said &nbsp;Ashok Kumar Mittal.</p><p>Expressing deep concern over the socio-political fallout in Punjab, Mittal said national security symbols on the campus were targeted during the unrest. He condemned videos showing people climbing and dancing on a decommissioned MiG-23 fighter jet gifted by the Indian Air Force and installed as a memorial near the university's main gate.</p><p>"Efforts are being made to drive a wedge between the Hindu and Sikh communities in Punjab. There is an attempt to spread anarchy across the state... There is a MiG-23—gifted to me by the Air Force—stationed at the main gate as a memorial. You may have seen videos where people climb onto it and dance. Attempts are being made to demoralise our armed forces, and national security is being compromised," said the founder of Lovely Professional University.</p><p>The controversy erupted following viral social media posts alleging a grave incident inside the girls' hostel campus. The posts claimed an outsider had sexually assaulted a female student, leading to intense agitation among students who gathered in large numbers to demand accountability, security overhauls, and action from university authorities.&nbsp;</p><p>The unrest escalated into acts of vandalism, damage to campus infrastructure, and clashes that spilt onto the New Delhi–Amritsar National Highway. To restore order and prevent further spread of misinformation, university authorities suspended physical classes for 10 days, postponed mid-term examinations, and local administration temporarily cut internet access around the campus radius.</p><p>Authorities and law enforcement agencies are tracing the origin of the digital posts and investigating potential cross-border or political links behind the coordinated disruption.</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ "Highly organised conspiracy orchestrated by malicious elements": BJP MP Ashok Kumar Mittal on unrest at LPU ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/harwinder-kumar-deported-from-uae-nia-arrest-vikas-prabhakar-case-6733 ]]></guid><title><![CDATA[ UAE से वांछित आरोपी हरविंदर कुमार भारत लाया गया, NIA ने किया गिरफ्तार ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/harwinder-kumar-deported-from-uae-nia-arrest-vikas-prabhakar-case-6733 ]]></link><pubDate><![CDATA[Thu, 01 Oct 2026 16:40:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ नई दिल्ली: भारत ने पंजाब के नंगल में 2024 में विश्व हिंदू परिषद (VHP) नेता विकास प्रभाकर की हत्या के मामले में वांछित आरोपी हरविंदर कुमार को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से भारत वापस लाने में सफलता हासिल  ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली: </b><span style="font-size: 1rem;">भारत ने पंजाब के नंगल में 2024 में विश्व हिंदू परिषद (VHP) नेता विकास प्रभाकर की हत्या के मामले में वांछित आरोपी हरविंदर कुमार को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से भारत वापस लाने में सफलता हासिल की है। गृह मंत्रालय (MHA) ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी।</span></p><p>UAE से निर्वासन के बाद हरविंदर कुमार उर्फ सोनू बरनाला को गुरुवार को इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने गिरफ्तार किया। इसके बाद उसे आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए विशेष NIAअदालत के समक्ष पेश किया गया।</p><h5 class=""><b>बब्बर खालसा इंटरनेशनल से जुड़ा हत्या का मामला</b></h5><p>गृह मंत्रालय के अनुसार, विकास प्रभाकर की गोली मारकर हत्या प्रतिबंधित आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) के सदस्यों ने कथित तौर पर की थी। जांच एजेंसियों के अनुसार, हत्या का उद्देश्य सांप्रदायिक तनाव पैदा करना था और इसके पीछे पाकिस्तान स्थित बीकेआई प्रमुख वधावा सिंह उर्फ बब्बर का कथित हाथ था।</p><p>हरविंदर कुमार के खिलाफ 17 अप्रैल 2026 को रेड कॉर्नर नोटिस (RCN) जारी किया गया था। गृह मंत्रालय ने बताया कि भारतीय एजेंसियों की ओर से 19 जून 2026 को अनुरोध किए जाने के बाद UAE अधिकारियों ने उसे भारत को सौंप दिया।</p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;Harwinder Kumar, the wanted BKI operative deported from the UAE. &lt;br&gt;&lt;br&gt;(Source: NIA website) &lt;a href="https://t.co/uxN3Eui1d1"&gt;pic.twitter.com/uxN3Eui1d1&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; ANI (@ANI) &lt;a href="https://x.com/ANI/status/2105582616221286862?ref_src=twsrc^tfw"&gt;October 1, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><h5 class=""><b>NIA ने हवाई अड्डे पर किया गिरफ्तार</b></h5><p>NIA के मुताबिक, हरविंदर कुमार हत्या की साजिश में शामिल आरोपियों को रसद संबंधी मदद और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने में कथित तौर पर शामिल था। एजेंसी के अनुसार, वह विदेश में मौजूद BKI के सदस्यों के निर्देश पर काम करता था।</p><p>NIA ने बताया कि हरविंदर कथित तौर पर भर्ती करने वाले और हैंडलर की भूमिका में था। उसने हत्या में इस्तेमाल होने वाले हथियारों की व्यवस्था की और उन्हें हमलावरों तक पहुंचाने में मदद की। इसके अलावा उसने कथित तौर पर आतंकी फंड हासिल किए और उन्हें आगे स्थानांतरित किया।</p><h5 class=""><b>जर्मनी में बैठे BKI सदस्यों पर साजिश रचने का आरोप</b></h5><p>NIAकी जांच के अनुसार, विकास प्रभाकर की हत्या की साजिश कथित तौर पर जर्मनी में रह रहे BKI के सदस्य हरजीत सिंह उर्फ लड्डी और कुलबीर सिंह उर्फ सिद्धू ने रची थी।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">जांच एजेंसी का आरोप है कि हरविंदर कुमार ने UAE में रहते हुए विदेश में मौजूद BKI के गुर्गों के लिए रसद और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का काम किया।</span></p><h5 class=""><b>मामले में अब तक तीन आरोपपत्र दाखिल</b></h5><p>विकास प्रभाकर की हत्या से जुड़ा मामला NIA ने 9 मई 2024 को दर्ज किया था। यह मामला आरसी-06/2024/एनआईए/डीएलआई के तहत दर्ज है। एजेंसी ने अब तक इस मामले में तीन आरोपपत्र दाखिल किए हैं।</p><p>हरविंदर कुमार की गिरफ्तारी से पहले 13 अगस्त 2026 को UAE में रह रहे एक अन्य आरोपी मनवीर राम को भी गिरफ्तार किया गया था। NIA के अनुसार, मनवीर राम पर हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियार उपलब्ध कराने का आरोप है। उसे अमृतसर हवाई अड्डे पर रोके जाने के बाद NIA ने गिरफ्तार किया था।</p><h5 class=""><b>आतंकियों की वापसी तेज करने के लिए ‘प्रहार’ पहल</b></h5><p>गृह मंत्रालय ने बताया कि आतंकवाद से जुड़े मामलों में वांछित आरोपियों को भारत वापस लाने की प्रक्रिया तेज करने के लिए ‘प्रहार’ पहल शुरू की गई है। मंत्रालय के अनुसार, इस पहल के तहत विदेशों में मौजूद आतंकवाद से जुड़े वांछित आरोपियों के निर्वासन में तेजी लाई जा रही है।</p><p>हरविंदर कुमार को UAE से भारत लाकर गिरफ्तार किया जाना आतंकवाद से जुड़े मामलों में वांछित आरोपियों को न्यायिक प्रक्रिया का सामना कराने की दिशा में एजेंसियों की कार्रवाई को दर्शाता है। गृह मंत्रालय के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया में विभिन्न भारतीय एजेंसियों के बीच समन्वय से आरोपी की भारत वापसी संभव हुई।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ UAE से वांछित आरोपी हरविंदर कुमार भारत लाया गया, NIA ने किया गिरफ्तार ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-congress-chief-raja-warring-responds-amid-leadership-change-speculations-6732 ]]></guid><title><![CDATA[ "Some matters are internal": Punjab Congress chief Raja Warring responds amid leadership change speculations ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-congress-chief-raja-warring-responds-amid-leadership-change-speculations-6732 ]]></link><pubDate><![CDATA[Thu, 01 Oct 2026 16:15:06 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ Chandigarh: Punjab Congress president Amrinder Singh Raja Warring on Thursday declined to comment on speculations of a possible change in the state party leadership, saying that “some matters are inte ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>Chandigarh:</b> Punjab Congress president Amrinder Singh Raja Warring on Thursday declined to comment on speculations of a possible change in the state party leadership, saying that “some matters are internal”.&nbsp;</p><p>When asked about speculation that he could resign as Punjab Congress president, Warring said, “I don't want to comment on anything. I will let you know when the time is right.”</p><p>On whether he would visit the Congress office in Delhi, Warring said, “Some matters are internal.”</p><p>His comments come amid mounting speculations that the Congress high command is considering replacing him as the state unit chief following weeks of internal differences within the Punjab Congress, ahead of the 2027 Punjab Assembly elections.</p><p>The developments come after the Congress recently appointed Sachin Pilot as the party's General Secretary incharge of Punjab, replacing former Chhattisgarh Chief Minister Bhupesh Baghel.</p><p>Congress has been grappling with internal differences in Punjab, with competing factions seeking greater prominence ahead of the next Assembly elections. Warring has previously faced criticism from sections of the party over its performance and leadership.</p><p>Earlier in August, Warring had defended himself against criticism over the Congress's electoral performance in Punjab and questioned attempts to hold his leadership responsible for the party's decline in the 2022 Assembly elections.</p><p>“The only mistake is that when the Congress Party had 80 seats, we came down from 80 to 18 seats. Is that my fault? Captain Amarinder Singh led the government twice. From 80 seats, we came down to 18 seats,” he had said.</p><p>Earlier, supporters of former Chief Minister Charanjit Singh Channi raised slogans demanding that he be projected as the party's chief ministerial face for the 2027 elections.</p><p>Warring had attempted to defuse the situation by inviting one of the supporters onto the stage and offering to connect him with Channi over the phone.</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ "Some matters are internal": Punjab Congress chief Raja Warring responds amid leadership change speculations ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/india-secures-deportation-of-wanted-accused-harwinder-kumar-from-uae-6731 ]]></guid><title><![CDATA[ India secures deportation of wanted accused Harwinder Kumar from UAE ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/india-secures-deportation-of-wanted-accused-harwinder-kumar-from-uae-6731 ]]></link><pubDate><![CDATA[Thu, 01 Oct 2026 16:12:38 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ New Delhi: India has secured the deportation of wanted accused Harwinder Kumar from the United Arab Emirates (UAE) in connection with the killing of Vishwa Hindu Parishad (VHP) leader Vikas Prabhakar  ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>New Delhi: </b>India has secured the deportation of wanted accused Harwinder Kumar from the United Arab Emirates (UAE) in connection with the killing of Vishwa Hindu Parishad (VHP) leader Vikas Prabhakar in Punjab’s Nangal in 2024, the Ministry of Home Affairs (MHA) said on Thursday.</p><p>The National Investigation Agency (NIA) arrested Harwinder alias Sonu Barnala soon after his deportation from the UAE at the Indira Gandhi International Airport on Thursday in connection with the targeted killing of Prabhakar. He was subsequently produced before the Special NIA Court for further legal proceedings.</p><p>According to the MHA, Prabhakar was shot dead by operatives of the terror organisation Babbar Khalsa International (BKI) in an alleged attempt to create communal unrest, at the behest of its Pakistan-based chief Wadhawa Singh, alias Babbar.</p><p>A Red Corner Notice (RCN) was issued against Harwinder, who was based in the UAE, on April 17, 2026. “Following a request from Indian agencies on June 19, 2026, the UAE authorities handed him over to India,” the MHA said in a statement.</p><p>The MHA also said it has launched the PRAHAAR initiative, under which the deportation of terrorists to India has been expedited.</p><p>The NIA said Harwinder was involved in providing logistical support and financing to the perpetrators and had been wanted by the anti-terror agency.</p><p>The case, registered as RC-06/2024/NIA/DLI, pertains to the targeted killing of Prabhakar by members of the proscribed terrorist organisation BKI. The NIA registered the case on May 9, 2024, and has so far filed three chargesheets in the matter.</p><p>The latest arrest follows the arrest of another UAE-based accused, Manveer Ram, on August 13, 2026. Ram was allegedly involved in supplying weapons used in the crime and was intercepted at Amritsar Airport before being arrested by the NIA.</p><p>According to the NIA investigation, the conspiracy to eliminate Prabhakar was allegedly hatched by Germany-based BKI operatives Harjit Singh, alias Laddi, and Kulbeer Singh, alias Sidhu.</p><p>The agency said Harwinder, while operating from the UAE, allegedly acted as a logistics provider and financier for BKI operatives based abroad.&nbsp;</p><p>Harwinder acted as a recruiter and handler, arranged weapons and facilitated their delivery to the shooters involved in the killing of Prabhakar. He also received and transferred terror funds in connection with the conspiracy, acting on the directions of Harjit Singh and Kulbeer Singh.</p><p>The deportation of Harwinder Kumar from the UAE and his subsequent arrest by the NIA demonstrate the agency’s resolve to pursue fugitives involved in terrorism cases and bring them back to India to face the due process of law. The development is also the result of coordinated efforts of the various agencies involved in facilitating the return of fugitives to India.</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ India secures deportation of wanted accused Harwinder Kumar from UAE ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/giani-harpreet-singh-letter-akal-takht-jathedar-sgpc-6722 ]]></guid><title><![CDATA[ ज्ञानी हरप्रीत सिंह का जत्थेदार को पत्र, बोले- ‘श्री अकाल तख्त साहिब का सेवक जत्थेदार हो सकता है, लेकिन खुद श्री अकाल तख्त साहिब नहीं’ ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/giani-harpreet-singh-letter-akal-takht-jathedar-sgpc-6722 ]]></link><pubDate><![CDATA[Thu, 01 Oct 2026 14:54:04 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ अमृतसर: तख्त श्री दमदमा साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज को पत्र लिखकर एसजीपीसी और तख्त साहिब से जुड़े हालिया फैसलों ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>अमृतसर:</b> तख्त श्री दमदमा साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज को पत्र लिखकर एसजीपीसी और तख्त साहिब से जुड़े हालिया फैसलों पर कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि श्री अकाल तख्त साहिब का जत्थेदार उसकी सेवा करने वाला हो सकता है, लेकिन वह स्वयं श्री अकाल तख्त साहिब नहीं होता।</span></p><p>ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने अपने पत्र में एसजीपीसी के दो सदस्यों भाई मिठ्ठू सिंह काहनेके और भाई जसवंत सिंह पुड़ैण के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सवाल उठाया। उनका कहना है कि किसी भी निर्वाचित सदस्य के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले उसका पक्ष सुना जाना चाहिए।</p><h5 class=""><b>एसजीपीसी सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई पर सवाल</b></h5><p>ज्ञानी हरप्रीत सिंह के अनुसार, दोनों सदस्य विपक्षी धड़े से जुड़े हैं और संगत द्वारा चुने गए प्रतिनिधि हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री से मुलाकात को आधार बनाकर उनके खिलाफ सीधे कार्रवाई करना उचित नहीं है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने अपने पत्र में सवाल किया कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ फैसला लेने से पहले उसे अपना पक्ष रखने का अवसर क्यों नहीं दिया गया। उनका कहना है कि ऐसी प्रक्रिया सिख मर्यादा और संस्थागत परंपराओं के अनुरूप होनी चाहिए।</span></p><p>उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि कार्यकारी जत्थेदार का पत्र एसजीपीसी की अंतरिम समिति की बैठक से पहले सचिव को भेजा गया और इसके बाद विपक्ष से जुड़े सदस्यों को बैठक में शामिल होने से रोक दिया गया। हालांकि, इस संबंध में पत्र में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।</p><p>&lt;iframe src="https://www.facebook.com/plugins/post.php?href=https://www.facebook.com/singhsahibgianiharpreetsingh/posts/pfbid0kZskn3Denj8zbNqvHHwVCPEz39Fnd1w8DUoHZRNtJRabx2hQXMSsUd4GsMqUqcgLl&amp;show_text=true&amp;width=500" width="500" height="750" style="border:none;overflow:hidden" scrolling="no" frameborder="0" allowfullscreen="true" allow="autoplay; clipboard-write; encrypted-media; picture-in-picture; web-share"&gt;&lt;/iframe&gt;</p><h5 class=""><b>एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी की भूमिका पर भी सवाल</b></h5><p>ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने श्री आनंदपुर साहिब की सराय से जुड़े एक मामले का हवाला देते हुए कुछ वित्तीय कार्रवाइयों पर सवाल किए।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">पत्र में उन्होंने एसजीपीसी की कार्यप्रणाली और फैसलों में पारदर्शिता की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पंथक संस्थाओं से जुड़े मामलों में संगत के सामने स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।</span></p><p>रिपोर्ट के अनुसार, आम आदमी पार्टी नेता बलतेज पन्नू ने भी इससे पहले इस मामले में एसजीपीसी अध्यक्ष से संगत के पैसों के इस्तेमाल को लेकर स्पष्टीकरण मांगा था। पन्नू ने दावा किया था कि जुलाई में एसजीपीसी सचिव के खाते से बहरीन की एक महिला के खाते में एक लाख रुपये ट्रांसफर किए गए। यह दावा पन्नू की ओर से किया गया था।</p><h5 class=""><b>2 दिसंबर 2024 के हुकमनामे का दिया हवाला</b></h5><p>ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने अपने पत्र में 2 दिसंबर 2024 को श्री अकाल तख्त साहिब से संबंधित हुकमनामे का भी उल्लेख किया। उन्होंने मौजूदा कार्रवाई में अलग-अलग मानदंड अपनाए जाने को लेकर सवाल उठाया।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उनका कहना है कि यदि किसी हुकमनामे को मानने या न मानने के मामले में अलग-अलग मापदंड अपनाए जाते हैं तो इससे सिख संस्थाओं की मर्यादा और फैसलों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं।</span></p><p>उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति या पक्ष के खिलाफ श्री अकाल तख्त साहिब से आदेश जारी करने से पहले गुरसिख विद्वानों और मर्यादा के जानकारों से विचार-विमर्श किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, पहले के जत्थेदार भी ऐसे मामलों में सलाह-मशवरे की प्रक्रिया को महत्व देते रहे हैं।</p><h5 class=""><b>तख्त श्री केसगढ़ साहिब से जुड़ी घटना पर भी जवाब मांगा</b></h5><p>ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने अपने पत्र में तख्त श्री केसगढ़ साहिब और श्री आनंदपुर साहिब से जुड़ी एक घटना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस घटना को लेकर सिख संगत के बीच कई सवाल उठे थे और उनका सार्वजनिक रूप से जवाब दिया जाना चाहिए।</p><p>उन्होंने सवाल किया कि यदि कार्यकारी जत्थेदार को घटना की पहले जानकारी नहीं थी तो इस संबंध में सार्वजनिक स्पष्टीकरण दिया जाना चाहिए। वहीं, यदि जानकारी थी तो तख्त साहिब की ओर से की गई कार्रवाई और उसकी समय-सीमा के बारे में संगत को जानकारी क्यों नहीं दी गई।</p><h5 class=""><b>विरसा सिंह वल्टोहा मामले का भी जिक्र</b></h5><p>अपने पत्र में ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने विरसा सिंह वल्टोहा से जुड़े पुराने मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति श्री अकाल तख्त साहिब के सामने क्षमा याचना करता है और उसके बाद उस पर लगी पाबंदियां हटाई जाती हैं तो यह जत्थेदार के अधिकार क्षेत्र से जुड़ा विषय है।</p><p>ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने अपने खिलाफ कथित चरित्र हनन और सम्मान को पहुंचे नुकसान का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सवाल किया कि इस मामले में उन्हें न्याय कब मिलेगा। उन्होंने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब के सम्मान को ध्यान में रखते हुए उन्होंने दुनियावी अदालत का रुख नहीं किया।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने दावा किया कि उनके खिलाफ कथित चरित्र हनन जानबूझकर किया गया या करवाया गया था। हालांकि, इस दावे के समर्थन में पत्र में किसी स्वतंत्र जांच रिपोर्ट का उल्लेख नहीं है।</span></p><h5 class=""><b>‘फैसलों में श्री अकाल तख्त साहिब की मर्यादा केंद्र में हो’</b></h5><p>पत्र के अंत में ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि कोई भी सिख श्री अकाल तख्त साहिब का सेवक जत्थेदार हो सकता है, लेकिन वह स्वयं श्री अकाल तख्त साहिब नहीं होता।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने कहा कि जत्थेदार को किसी व्यक्ति या संस्था विशेष को केंद्र में रखकर नहीं, बल्कि श्री अकाल तख्त साहिब की मर्यादा और पंथक हित को ध्यान में रखते हुए फैसले करने चाहिए।</span></p><p>ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कार्यकारी जत्थेदार से अपील की कि मौजूदा मामलों में पंथ के सवालों का सार्वजनिक रूप से जवाब दिया जाए और संबंधित पक्षों को सुनने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाए। उन्होंने अपने पत्र के अंत में खुद को श्री अकाल तख्त साहिब के प्रति समर्पित और पंथ का सेवक बताते हुए उसके सम्मान और न्याय की भावना को बनाए रखने की बात कही।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ ज्ञानी हरप्रीत सिंह का जत्थेदार को पत्र, बोले- ‘श्री अकाल तख्त साहिब का सेवक जत्थेदार हो सकता है, लेकिन खुद श्री अकाल तख्त साहिब नहीं’ ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/karnail-singh-peer-mohammad-ballot-paper-evm-election-demand-6716 ]]></guid><title><![CDATA[ EVM पर भरोसा खत्म, बैलेट पेपर से चुनाव हों: करनैल सिंह पीरमुहम्मद ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/karnail-singh-peer-mohammad-ballot-paper-evm-election-demand-6716 ]]></link><pubDate><![CDATA[Thu, 01 Oct 2026 11:13:50 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ चंडीगढ़, पंजाब: शिरोमणि अकाली दल (पुनर्जीवित) के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और मुख्य प्रवक्ता करनैल सिंह पीरमुहम्मद ने देश की चुनाव प्रक्रिया और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने भारतीय ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>चंडीगढ़, पंजाब:</b> शिरोमणि अकाली दल (पुनर्जीवित) के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और मुख्य प्रवक्ता करनैल सिंह पीरमुहम्मद ने देश की चुनाव प्रक्रिया और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने भारतीय निर्वाचन आयोग और केंद्र की भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग का समर्थन किया।</span></p><p>पीरमुहम्मद ने कहा कि इंडिया गठबंधन (INDIA Alliance) की ओर से बैलेट पेपर के जरिए चुनाव कराने की मांग उचित है। उनके अनुसार देश के लोगों का EVM प्रणाली से विश्वास उठ चुका है और निष्पक्ष एवं पारदर्शी लोकतंत्र के लिए मतदान प्रक्रिया में जनता का भरोसा जरूरी है।</p><h5 class=""><b>बैलेट पेपर से चुनाव की मांग का समर्थन</b></h5><p>करनैल सिंह पीरमुहम्मद ने कहा कि चुनाव बैलेट पेपर के माध्यम से कराए जाने चाहिए, ताकि प्रत्येक नागरिक को अपने मताधिकार के इस्तेमाल को लेकर पूरा भरोसा हो सके।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जिसमें पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर किसी तरह की आशंका न रहे।</span></p><h5 class=""><b>‘शिरोमणि अकाली दल वारिस पंजाब’ के पंजीकरण पर सवाल</b></h5><p>पीरमुहम्मद ने भारतीय निर्वाचन आयोग द्वारा ‘शिरोमणि अकाली दल वारिस पंजाब’ को राजनीतिक दल के तौर पर पंजीकृत नहीं करने के फैसले की भी आलोचना की।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने इस फैसले को पक्षपातपूर्ण बताते हुए इसे लोकतांत्रिक नियमों का उल्लंघन करार दिया। उन्होंने कहा कि सभी राजनीतिक समूहों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में समान अवसर मिलना चाहिए।</span></p><h5 class=""><b>भाजपा सरकार पर लगाया संस्थाओं के दुरुपयोग का आरोप</b></h5><p>शिरोमणि अकाली दल (पुनर्जीवित) के नेता ने केंद्र की भाजपा सरकार पर विपक्ष की आवाज दबाने के लिए संवैधानिक संस्थाओं के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने कहा कि उनके अनुसार देश की स्वतंत्रता, संविधान और राजनीतिक बहुलतावाद के सामने भाजपा की नीतियां सबसे बड़ी चुनौती हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नई राजनीतिक पार्टियों के पंजीकरण में बाधाएं खड़ी करना विपक्षी और अलग-अलग राजनीतिक आवाजों को कमजोर करने की कोशिश है।</span></p><h5 class=""><b>निर्वाचन आयोग से निष्पक्षता बहाल करने की मांग</b></h5><p>पीरमुहम्मद ने निर्वाचन आयोग से अपनी निष्पक्षता बहाल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि आयोग को बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने साथ ही सभी राजनीतिक समूहों को अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने के लिए समान अवसर देने की अपील की।</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ EVM पर भरोसा खत्म, बैलेट पेपर से चुनाव हों: करनैल सिंह पीरमुहम्मद ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-congress-new-chief-6715 ]]></guid><title><![CDATA[ पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन, राजा वड़िंग के बाद इन नेताओं के नाम चर्चा में ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-congress-new-chief-6715 ]]></link><pubDate><![CDATA[Thu, 01 Oct 2026 11:30:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ चंडीगढ़: पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के इस्तीफे के बाद अब पार्टी के सामने नए अध्यक्ष के चयन की चुनौती है। कांग्रेस  ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p>चंडीगढ़: पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के इस्तीफे के बाद अब पार्टी के सामने नए अध्यक्ष के चयन की चुनौती है। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक अगले 24 से 48 घंटे में नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम की घोषणा हो सकती है।</p><p>राजा वड़िंग ने अप्रैल 2022 में पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी की जिम्मेदारी संभाली थी। उनके कार्यकाल के दौरान संगठन के भीतर नेतृत्व और गुटबाजी को लेकर समय-समय पर चर्चा होती रही। अब विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले नेतृत्व में बदलाव की प्रक्रिया ने पंजाब कांग्रेस की राजनीति को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।</p><h5 class=""><b>किन नेताओं के नाम चर्चा में?</b></h5><p>नए प्रदेश अध्यक्ष के लिए कई वरिष्ठ नेताओं के नाम सामने आए हैं। इनमें पूर्व मंत्री विजय इंदर सिंगला, जालंधर कैंट से विधायक परगट सिंह और गुरदासपुर से सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा प्रमुख हैं। कुछ रिपोर्टों में अन्य नेताओं के नाम भी संभावित विकल्पों के तौर पर बताए गए हैं।</p><p>विजय इंदर सिंगला का नाम फिलहाल पार्टी के भीतर प्रमुख दावेदार के तौर पर सामने आया है। हालांकि, कांग्रेस की ओर से नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम की औपचारिक घोषणा होने तक इसे अंतिम निर्णय नहीं माना जा सकता।</p><p>परगट सिंह भी चर्चा में हैं। पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान और पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के रूप में उनकी संगठनात्मक भूमिका को लेकर पार्टी में चर्चा होती रही है। वहीं सुखजिंदर सिंह रंधावा का नाम भी संभावित विकल्पों में शामिल है।</p><h5 class=""><b>संगठन में बदलाव के पीछे क्या वजह?</b></h5><p>राजा वड़िंग के स्थान पर नए अध्यक्ष की तलाश ऐसे समय हो रही है जब पंजाब कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी कर रही है। रिपोर्टों के मुताबिक पंजाब कांग्रेस के नए प्रभारी सचिन पायलट ने हाल में पार्टी के नेताओं और पदाधिकारियों से बातचीत कर संगठन की स्थिति पर फीडबैक लिया था। इसके बाद नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चर्चा तेज हुई।</p><p>इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पायलट की ओर से संगठन से जुड़े फीडबैक के आधार पर हाईकमान ने नेतृत्व में बदलाव का फैसला किया। हालांकि, कांग्रेस की ओर से इस पूरे घटनाक्रम की विस्तृत आधिकारिक वजह सार्वजनिक रूप से नहीं बताई गई है।</p><h5 class=""><b>SIR को लेकर वड़िंग ने उठाए थे सवाल</b></h5><p>राजा वड़िंग के कार्यकाल के अंतिम दिनों में Special Intensive Revision यानी SIR भी पंजाब कांग्रेस के प्रमुख मुद्दों में रहा। वड़िंग ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि पंजाब में पहली बार मतदाता बनने की कोशिश कर रहे कुछ युवाओं को पुराने SIR से जुड़े पारिवारिक रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के लिए कहा गया।</p><p>उन्होंने सवाल उठाया था कि नए मतदाताओं को अपने माता-पिता या दादा-दादी के पुराने मतदाता रिकॉर्ड से संबंधित जानकारी देने की जरूरत क्यों पड़ रही है। यह मामला उस व्यापक राजनीतिक विवाद का हिस्सा रहा है जिसमें विपक्षी दल चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं।</p><h5 class=""><b>अब आगे क्या?</b></h5><p>राजा वड़िंग के इस्तीफे के बाद अब कांग्रेस हाईकमान को पंजाब संगठन के लिए नया नेतृत्व तय करना है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक फैसला जल्द लिया जा सकता है। संभावित नामों में विजय इंदर सिंगला, परगट सिंह और सुखजिंदर सिंह रंधावा के अलावा कुछ अन्य वरिष्ठ नेताओं पर भी विचार किए जाने की खबरें हैं।</p><p>नए अध्यक्ष के सामने संगठन को मजबूत करने, पार्टी नेताओं के बीच समन्वय बढ़ाने और आगामी विधानसभा चुनाव के लिए प्रदेश इकाई को तैयार करने जैसी जिम्मेदारियां होंगी। फिलहाल कांग्रेस की ओर से आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।</p><p>राजा वड़िंग के इस्तीफे के बाद पंजाब कांग्रेस में अगला अध्यक्ष कौन होगा, इस पर तस्वीर जल्द साफ होने की उम्मीद है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन, राजा वड़िंग के बाद इन नेताओं के नाम चर्चा में ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/amit-shah-chitta-free-punjab-6710 ]]></guid><title><![CDATA[ Amit Shah Jalandhar Rally: ‘31 दिसंबर 2029 तक खत्म होगा चिट्टे का कारोबार’, अमित शाह का बड़ा ऐलान ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/amit-shah-chitta-free-punjab-6710 ]]></link><pubDate><![CDATA[Wed, 30 Sep 2026 18:10:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ जालंधर: पंजाब में नशे के मुद्दे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को जालंधर के परागपुर में आयोजित बीजेपी की जनसभा को संबोधित किया। रैली में उन्होंने पंजाब के नशे  ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>जालंधर: </b>पंजाब में नशे के मुद्दे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को जालंधर के परागपुर में आयोजित बीजेपी की जनसभा को संबोधित किया। रैली में उन्होंने पंजाब के नशे के कारोबार, खासकर ‘चिट्टे’ के खिलाफ पार्टी की प्रस्तावित रणनीति को लेकर बड़ा दावा किया।</p><p>अमित शाह ने कहा कि अगर पंजाब की जनता आगामी विधानसभा चुनाव में बीजेपी को समर्थन देती है तो उनकी पार्टी 31 दिसंबर 2029 से पहले पंजाब को चिट्टे के अवैध कारोबार से मुक्त करने के लक्ष्य के साथ काम करेगी। उन्होंने अपने भाषण में पंजाब की माताओं और युवाओं का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए बीजेपी को मौका देने की अपील की।</p><p>शाह ने नशे के मुद्दे को केवल चुनावी राजनीति का विषय नहीं बताते हुए इसे पंजाब के सामाजिक भविष्य से जुड़ा अभियान बताया। उन्होंने कहा कि राज्य से नशीले पदार्थों की बिक्री रोकने के साथ-साथ दूसरे राज्यों तक इनके पहुंचने पर भी रोक लगाने की दिशा में काम किया जाएगा।</p><h5 class=""><b>AAP सरकार पर शाह का निशाना</b></h5><p>जालंधर की सभा में अमित शाह ने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर नशे की समस्या को लेकर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में मौजूदा शासन के दौरान नशे की समस्या गंभीर बनी हुई है।</p><p>शाह ने कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दोनों का उल्लेख करते हुए जनता से बीजेपी को पांच साल का अवसर देने की अपील की। उन्होंने अपने भाषण में दिल्ली के कथित शराब घोटाले का भी संदर्भ दिया और AAP पर सवाल खड़े किए।</p><p>हालांकि, ये राजनीतिक आरोप हैं और इन्हें संबंधित दलों के बयानों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। पंजाब में नशे की समस्या को लेकर AAP और बीजेपी पहले भी एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहे हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान और AAP नेताओं ने बीजेपी के अभियान की आलोचना करते हुए उसके पुराने राजनीतिक रिकॉर्ड और नशे के मुद्दे पर किए गए दावों पर सवाल उठाए हैं।</p><h5 class=""><b>4,000 किलोमीटर की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’</b></h5><p>अमित शाह की जालंधर रैली बीजेपी की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ के समापन कार्यक्रम का हिस्सा थी। पार्टी ने 18 सितंबर से चार अलग-अलग मार्गों से यह अभियान शुरू किया था।</p><p>बीजेपी के मुताबिक, अभियान के तहत करीब 4,000 किलोमीटर की यात्रा की गई और पंजाब के सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंचने का प्रयास किया गया। चार यात्राओं की शुरुआत पठानकोट, फतेहगढ़ साहिब, फाजिल्का और तलवंडी साबो से हुई थी।</p><p>बीजेपी ने इस अभियान में नशे के अलावा कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को भी उठाया। पार्टी ने इसे सामाजिक जागरूकता अभियान बताया, जबकि राजनीतिक विरोधियों ने इसे आगामी विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा है।</p><h5 class=""><b>परिवारों से मिले अमित शाह</b></h5><p>रैली से पहले अमित शाह ने नशे की वजह से प्रभावित परिवारों के सदस्यों से भी मुलाकात की। इस दौरान नशे के कारण अपने परिजनों को खो चुके परिवारों ने अपनी परेशानियां साझा कीं।</p><p>अमित शाह ने अपने भाषण में ऐसी ही एक मां का उल्लेख किया, जिसने अपने दो बेटों को नशे के कारण खोने की बात कही थी। शाह ने इस प्रसंग के जरिए पंजाब में नशे से प्रभावित परिवारों की स्थिति का मुद्दा उठाया और अवैध ड्रग कारोबार के खिलाफ सख्त कार्रवाई का दावा किया।</p><h5 class=""><b>बीजेपी के लिए चुनावी मुद्दा बना नशा</b></h5><p>पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले नशे का मुद्दा राजनीतिक दलों के अभियान में प्रमुखता से दिखाई दे रहा है। बीजेपी ने अपनी यात्रा के जरिए इसे राज्यव्यापी राजनीतिक मुद्दे के रूप में सामने रखा है।</p><p>पार्टी की पंजाब इकाई ने यात्रा शुरू करते समय सत्ता में आने पर नशे की समस्या को दो साल के भीतर खत्म करने का लक्ष्य भी बताया था। अब जालंधर में अमित शाह ने इसे दिसंबर 2029 की समयसीमा के साथ जोड़ा है।</p><h5 class=""><b>अकाली दल के साथ गठबंधन की चर्चा</b></h5><p>इस बीच पंजाब चुनाव से पहले बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल के संभावित गठबंधन की चर्चाएं भी राजनीतिक हलकों में चल रही हैं। दोनों दल पहले लंबे समय तक सहयोगी रहे हैं, लेकिन कृषि कानूनों के मुद्दे पर 2020 में अकाली दल ने NDA से अलग होने का फैसला किया था।</p><p>हाल के राजनीतिक संपर्कों के बाद दोनों दलों के बीच संभावित समझौते की अटकलें फिर तेज हुई हैं। हालांकि, बीजेपी के कई नेताओं ने राज्य की सभी 117 सीटों पर चुनाव की तैयारी की बात कही है। इसलिए गठबंधन को लेकर अंतिम तस्वीर आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।</p><h5 class=""><b>नशे पर सियासत और आगे की चुनौती</b></h5><p>जालंधर रैली के साथ बीजेपी की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ समाप्त हो गई है। अब पार्टी इस अभियान को आगामी विधानसभा चुनाव के अपने प्रमुख मुद्दों में शामिल करने की तैयारी में है।</p><p>अमित शाह की घोषणा के मुताबिक, बीजेपी के लिए लक्ष्य केवल नशे के खिलाफ कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि 31 दिसंबर 2029 तक चिट्टे के अवैध कारोबार को खत्म करने का स्पष्ट समयबद्ध लक्ष्य भी सामने रखा गया है। इस दावे को लागू करने के लिए किस तरह की प्रशासनिक, पुलिसिंग, पुनर्वास और सीमा-पार तस्करी रोकने की रणनीति अपनाई जाएगी, इसका विस्तृत खाका आगे सामने आना बाकी है।</p><p>पंजाब में नशे का मुद्दा अब सामाजिक चिंता के साथ-साथ आगामी विधानसभा चुनाव की राजनीति का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। ऐसे में आने वाले महीनों में बीजेपी, AAP, कांग्रेस और अन्य दलों के बीच इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ Amit Shah Jalandhar Rally: ‘31 दिसंबर 2029 तक खत्म होगा चिट्टे का कारोबार’, अमित शाह का बड़ा ऐलान ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/bhagwant-mann-japan-visit-6705 ]]></guid><title><![CDATA[ Bhagwant Mann Japan Visit: CM को नहीं मिली मंजूरी, Asian Games में Hockey Match देखने का था प्लान ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/bhagwant-mann-japan-visit-6705 ]]></link><pubDate><![CDATA[Wed, 30 Sep 2026 14:02:04 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ चंडीगढ़: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की प्रस्तावित जापान यात्रा को केंद्र सरकार से राजनीतिक मंजूरी नहीं मिली है। मान को जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियन गेम्स में भारतीय पुरुष हॉकी टीम के सेमी ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>चंडीगढ़: </b>पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की प्रस्तावित जापान यात्रा को केंद्र सरकार से राजनीतिक मंजूरी नहीं मिली है। मान को जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियन गेम्स में भारतीय पुरुष हॉकी टीम के सेमीफाइनल मुकाबले को देखने के लिए जाना था। यात्रा का प्रस्तावित कार्यक्रम 1 अक्टूबर के मुकाबले के आसपास था। केंद्र के फैसले के बाद अब मान इस यात्रा पर नहीं जा सकेंगे।</p><p>मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पंजाब सरकार की ओर से यात्रा के लिए राजनीतिक मंजूरी मांगी गई थी। केंद्र की ओर से मंजूरी नहीं मिलने की वजह सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी बताई गई है। पंजाब सरकार के एक अधिकारी ने कहा कि इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन में मुख्यमंत्री जैसे VIP की सुरक्षा सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।</p><p>यह यात्रा केवल भारतीय हॉकी टीम का मुकाबला देखने तक सीमित नहीं थी। इसके पीछे पंजाब में होने वाले एक बड़े हॉकी टूर्नामेंट की तैयारियों से जुड़ा उद्देश्य भी बताया गया था।</p><h5 class=""><b>Asian Games Hockey देखने का था कार्यक्रम</b></h5><p>एशियन हॉकी फेडरेशन की ओर से भगवंत मान को आइची-नागोया एशियन गेम्स में हॉकी प्रतियोगिता के अंतिम चरण के मुकाबले देखने के लिए आमंत्रित किया गया था। निमंत्रण में 30 सितंबर और 1 अक्टूबर के सेमीफाइनल तथा 2 और 3 अक्टूबर के फाइनल मुकाबले शामिल थे।</p><p>भारतीय पुरुष हॉकी टीम के प्रदर्शन को देखते हुए यह यात्रा पंजाब के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही थी। भारतीय टीम के 20 सदस्यीय दल में पंजाब के आठ खिलाड़ी शामिल हैं। ऐसे में राज्य सरकार की ओर से इस दौरे को खिलाड़ियों का समर्थन करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हॉकी आयोजन को करीब से देखने के अवसर के तौर पर देखा जा रहा था।</p><h5 class=""><b>Punjab में होने वाली Hockey Championship की तैयारी</b></h5><p>मान के जापान जाने के प्रस्ताव का एक दूसरा पहलू पंजाब में होने वाला आगामी हॉकी टूर्नामेंट है। Men's Asian Champions Trophy का आयोजन 27 अक्टूबर से 5 नवंबर तक पंजाब के जालंधर और मोहाली में प्रस्तावित है।</p><p>एशियन हॉकी फेडरेशन के मुताबिक, जापान में किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट के आयोजन की व्यवस्थाओं को करीब से देखने से पंजाब के अधिकारियों को आगामी प्रतियोगिता की तैयारियों में मदद मिल सकती थी। स्टेडियम प्रबंधन, खिलाड़ियों की सुविधाएं, परिवहन और आयोजन से जुड़ी व्यवस्थाओं को समझने के लिए यह दौरा उपयोगी माना जा रहा था।</p><h5 class=""><b>पहले भी Paris Olympics की यात्रा को नहीं मिली थी मंजूरी</b></h5><p>भगवंत मान की विदेशी यात्रा को राजनीतिक मंजूरी नहीं मिलने का यह पहला मामला नहीं है। अगस्त 2024 में भी केंद्र ने उन्हें पेरिस ओलंपिक में भारतीय पुरुष हॉकी टीम का मुकाबला देखने के लिए फ्रांस जाने की राजनीतिक मंजूरी नहीं दी थी। मान को 3 से 9 अगस्त तक पेरिस में रहना था। उस समय यात्रा को लेकर सुरक्षा व्यवस्था का मुद्दा सामने आया था और इस फैसले के बाद पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार तथा केंद्र के बीच राजनीतिक विवाद भी हुआ था।</p><h5 class=""><b>UK और Israel दौरे को भी नहीं मिली थी मंजूरी</b></h5><p>जनवरी 2026 में मान के प्रस्तावित यूके और इजरायल दौरे को भी केंद्र से राजनीतिक मंजूरी नहीं मिली थी। यह यात्रा पंजाब में होने वाले Progressive Punjab Investors' Summit से पहले निवेशकों से संपर्क करने के उद्देश्य से प्रस्तावित थी। मान के साथ राज्य के उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा और अधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल भी जाने वाला था। यात्रा बाद में रद्द हो गई। उस समय उपलब्ध रिपोर्टों में केंद्र की ओर से मंजूरी नहीं दिए जाने का कारण सार्वजनिक तौर पर स्पष्ट नहीं किया गया था।</p><p>हालांकि, भगवंत मान इससे पहले दिसंबर 2025 में पंजाब के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ जापान और बाद में दक्षिण कोरिया की यात्रा कर चुके हैं। उन दौरों का उद्देश्य निवेश और कारोबारी संपर्क बढ़ाना था।</p><h5 class=""><b>Political Clearance क्यों जरूरी होती है?</b></h5><p>मुख्यमंत्री जैसे वरिष्ठ संवैधानिक पदाधिकारियों की विदेश यात्राओं के लिए केंद्र से राजनीतिक मंजूरी की प्रक्रिया होती है। इसमें यात्रा का उद्देश्य, आमंत्रण, कार्यक्रम और सुरक्षा समेत विभिन्न पहलुओं पर विचार किया जाता है। मौजूदा मामले में केंद्र की ओर से जापान यात्रा के लिए मंजूरी नहीं दिए जाने के पीछे सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बताई गई है।</p><p>इस फैसले के बाद भगवंत मान का प्रस्तावित जापान दौरा नहीं हो पाएगा। वहीं, पंजाब में अक्टूबर के अंत से शुरू होने वाले Men's Asian Champions Trophy की तैयारियां राज्य सरकार के लिए अब भी प्रमुख कार्यक्रम बनी रहेंगी।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ Bhagwant Mann Japan Visit: CM को नहीं मिली मंजूरी, Asian Games में Hockey Match देखने का था प्लान ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/rajoana-meeting-gadgaj-dhami-patiala-jail-6678 ]]></guid><title><![CDATA[ राजोआना से मिलने पटियाला जेल पहुंचे ज्ञानी गड़गज और हरजिंदर सिंह धामी ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/rajoana-meeting-gadgaj-dhami-patiala-jail-6678 ]]></link><pubDate><![CDATA[Tue, 29 Sep 2026 12:06:08 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ पटियाला, पंजाब: श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी मंगलवार को पटियाला केंद्रीय जेल पहुंचे। दोनो ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>पटियाला, पंजाब:</b> श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी मंगलवार को पटियाला केंद्रीय जेल पहुंचे। दोनों नेता पूर्व पंजाब मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए बलवंत सिंह राजोआना से मुलाकात करने पहुंचे हैं।</span></p><p>राजोआना इस मामले में मौत की सजा पाए हुए हैं और लंबे समय से पटियाला केंद्रीय जेल में बंद हैं। उनकी दया याचिका पर केंद्र सरकार का अंतिम फैसला अभी लंबित है।</p><h5 class=""><b>दया याचिका पर फैसले को लेकर फिर बढ़ी सक्रियता</b></h5><p>राजोआना ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अपनी लंबित दया याचिका पर जल्द फैसला लेने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि उनकी याचिका पिछले करीब 15 वर्षों से लंबित है और इस मामले में अब अंतिम निर्णय लिया जाना चाहिए।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">रिपोर्ट के अनुसार, राजोआना ने अपने पत्र में कहा था कि सरकार यदि उनकी सजा को बरकरार रखना चाहती है तो ऐसा फैसला ले सकती है, लेकिन मामले को अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रखा जाना चाहिए।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;Patiala, Punjab: Akal Takht Sahib Jathedar Giani Kuldeep Singh Garjgaj, along with SGPC president Harjinder Singh Dhami, arrives at the Patiala Central Jail to meet Bhai Balwant Singh Rajoana, who is convicted for the assassination of former CM Beant Singh &lt;a href="https://t.co/Rxx38BPQWk"&gt;pic.twitter.com/Rxx38BPQWk&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; IANS (@ians_india) &lt;a href="https://x.com/ians_india/status/2104800619878040015?ref_src=twsrc^tfw"&gt;September 29, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><h5 class=""><b>SGPC पहले भी कर चुकी है मुलाकात</b></h5><p>राजोआना की दया याचिका को लेकर एसजीपीसी लगातार केंद्र से फैसला लेने की मांग करती रही है। मई 2025 में हरजिंदर सिंह धामी के नेतृत्व में एसजीपीसी के प्रतिनिधिमंडल ने भी पटियाला केंद्रीय जेल में राजोआना से मुलाकात की थी। उस दौरान दया याचिका में हो रही देरी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया था।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">अक्टूबर 2025 में भी धामी के नेतृत्व में एसजीपीसी प्रतिनिधिमंडल ने राजोआना से मुलाकात की थी। उस बैठक में राजोआना और उनकी लंबित दया याचिका से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई थी।</span></p><h5 class=""><b>ज्ञानी गड़गज पहले भी राजोआना से कर चुके हैं मुलाकात</b></h5><p>ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज इससे पहले जून 2025 में भी पटियाला जेल में राजोआना से मुलाकात कर चुके हैं। उस मुलाकात के बाद गड़गज ने बताया था कि राजोआना ने अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता और उसके सम्मान को बनाए रखने का संदेश दिया था।</p><p>&lt;blockquote class="instagram-media" data-instgrm-captioned data-instgrm-permalink="https://www.instagram.com/reel/Dd3F5Ksk1y8/?utm_source=ig_embed&amp;amp;utm_campaign=loading" data-instgrm-version="14" style=" background:#FFF; border:0; border-radius:3px; box-shadow:0 0 1px 0 rgba(0,0,0,0.5),0 1px 10px 0 rgba(0,0,0,0.15); margin: 1px; max-width:540px; min-width:326px; padding:0; width:99.375%; width:-webkit-calc(100% - 2px); width:calc(100% - 2px);"&gt;&lt;div style="padding:16px;"&gt; &lt;a href="https://www.instagram.com/reel/Dd3F5Ksk1y8/?utm_source=ig_embed&amp;amp;utm_campaign=loading" style=" background:#FFFFFF; line-height:0; padding:0 0; text-align:center; text-decoration:none; width:100%;" target="_blank"&gt; &lt;div style=" display: flex; flex-direction: row; align-items: center;"&gt; &lt;div style="background-color: #F4F4F4; border-radius: 50%; flex-grow: 0; height: 40px; margin-right: 14px; width: 40px;"&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="display: flex; flex-direction: column; flex-grow: 1; justify-content: center;"&gt; &lt;div style=" background-color: #F4F4F4; border-radius: 4px; flex-grow: 0; height: 14px; margin-bottom: 6px; width: 100px;"&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style=" background-color: #F4F4F4; border-radius: 4px; flex-grow: 0; height: 14px; width: 60px;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="padding: 19% 0;"&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="display:block; height:50px; margin:0 auto 12px; width:50px;"&gt;&lt;svg width="50px" height="50px" viewBox="0 0 60 60" version="1.1" xmlns="https://www.w3.org/2000/svg" xmlns:xlink="https://www.w3.org/1999/xlink"&gt;&lt;g stroke="none" stroke-width="1" fill="none" fill-rule="evenodd"&gt;&lt;g transform="translate(-511.000000, -20.000000)" fill="#000000"&gt;&lt;g&gt;&lt;path d="M556.869,30.41 C554.814,30.41 553.148,32.076 553.148,34.131 C553.148,36.186 554.814,37.852 556.869,37.852 C558.924,37.852 560.59,36.186 560.59,34.131 C560.59,32.076 558.924,30.41 556.869,30.41 M541,60.657 C535.114,60.657 530.342,55.887 530.342,50 C530.342,44.114 535.114,39.342 541,39.342 C546.887,39.342 551.658,44.114 551.658,50 C551.658,55.887 546.887,60.657 541,60.657 M541,33.886 C532.1,33.886 524.886,41.1 524.886,50 C524.886,58.899 532.1,66.113 541,66.113 C549.9,66.113 557.115,58.899 557.115,50 C557.115,41.1 549.9,33.886 541,33.886 M565.378,62.101 C565.244,65.022 564.756,66.606 564.346,67.663 C563.803,69.06 563.154,70.057 562.106,71.106 C561.058,72.155 560.06,72.803 558.662,73.347 C557.607,73.757 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&lt;div style=" background-color: #F4F4F4; border-radius: 4px; flex-grow: 0; height: 14px; margin-bottom: 6px; width: 224px;"&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style=" background-color: #F4F4F4; border-radius: 4px; flex-grow: 0; height: 14px; width: 144px;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;/a&gt;&lt;p style=" color:#c9c8cd; font-family:Arial,sans-serif; font-size:14px; line-height:17px; margin-bottom:0; margin-top:8px; overflow:hidden; padding:8px 0 7px; text-align:center; text-overflow:ellipsis; white-space:nowrap;"&gt;&lt;a href="https://www.instagram.com/reel/Dd3F5Ksk1y8/?utm_source=ig_embed&amp;amp;utm_campaign=loading" style=" color:#c9c8cd; font-family:Arial,sans-serif; font-size:14px; font-style:normal; font-weight:normal; line-height:17px; text-decoration:none;" target="_blank"&gt;A post shared by GTC News (@gtcnewsonline)&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&lt;/div&gt;&lt;/blockquote&gt;</p><p>&lt;script async src="//www.instagram.com/embed.js"&gt;&lt;/script&gt;</p><h5 class=""><b>बेअंत सिंह हत्याकांड में मिली है मौत की सजा</b></h5><p>बलवंत सिंह राजोआना को 1995 में तत्कालीन पंजाब मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। 31 अगस्त 1995 को चंडीगढ़ में पंजाब सिविल सचिवालय के बाहर हुए विस्फोट में बेअंत सिंह समेत 17 लोगों की मौत हुई थी। विशेष अदालत ने जुलाई 2007 में राजोआना को मौत की सजा सुनाई थी। SGPC<span style="font-size: 1rem;">&nbsp;ने मार्च 2012 में राजोआना की ओर से राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दाखिल की थी। यह याचिका अब तक लंबित है।</span></p><h5 class=""><b>अब मुलाकात पर टिकी नजर</b></h5><p>राजोआना की प्रधानमंत्री को लिखी हालिया चिट्ठी और उनकी दया याचिका पर लंबे समय से लंबित निर्णय के बीच ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज और हरजिंदर सिंह धामी की पटियाला जेल में मुलाकात महत्वपूर्ण है। हालांकि, मुलाकात के बाद किन मुद्दों पर चर्चा हुई और क्या कोई औपचारिक निर्णय या मांग सामने आती है, इसकी जानकारी मुलाकात के बाद सामने आने की उम्मीद है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ राजोआना से मिलने पटियाला जेल पहुंचे ज्ञानी गड़गज और हरजिंदर सिंह धामी ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/lpu-violence-abhijeet-dipke-women-safety-student-protests-6636 ]]></guid><title><![CDATA[ LPU हिंसा पर CJP संस्थापक अभिजीत दीपके बोले- महिलाओं की सुरक्षा के लिए 2026 में भी क्यों करना पड़े संघर्ष? ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/lpu-violence-abhijeet-dipke-women-safety-student-protests-6636 ]]></link><pubDate><![CDATA[Mon, 28 Sep 2026 11:34:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ फगवाड़ा, पंजाब: पंजाब के फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में छात्र प्रदर्शन और हिंसा के बाद सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर विश्वविद्यालय परिसर में एक छात्रा के साथ कथि ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>फगवाड़ा, पंजाब: </b>पंजाब के फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में छात्र प्रदर्शन और हिंसा के बाद सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर विश्वविद्यालय परिसर में एक छात्रा के साथ कथित दुष्कर्म की खबरें सामने आने के बाद रविवार तड़के बड़े पैमाने पर छात्र प्रदर्शन हुए। इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी।</span></p><p>अभिजीत दीपके ने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित स्थानों में होना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर छात्राओं को हॉस्टल के अंदर भी सुरक्षा को लेकर चिंता हो रही है, तो यह गंभीर समस्या है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने कहा,<b><i> “यह 2026 है। महिलाओं को अपनी सुरक्षा जैसी बुनियादी जरूरत के लिए प्रदर्शन, गुहार या संघर्ष नहीं करना चाहिए।”</i></b></span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;A university campus should be one of the safest places for a woman. If women don’t feel safe even inside their hostels, we have a serious problem.&lt;br&gt;&lt;br&gt;It’s 2026. Women should not have to protest, plead or fight for something as basic as their safety. &lt;a href="https://t.co/52NZR814s1"&gt;pic.twitter.com/52NZR814s1&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Abhijeet Dipke (@abhijeet_dipke) &lt;a href="https://x.com/abhijeet_dipke/status/2104420733455839709?ref_src=twsrc^tfw"&gt;September 28, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><h5 class=""><b>LPU में प्रदर्शन के बाद बढ़ा तनाव</b></h5><p>सोशल मीडिया पर विश्वविद्यालय परिसर में छात्रा के साथ कथित दुष्कर्म की खबरें फैलने के बाद बड़ी संख्या में छात्र सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शन के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई और बाद में हिंसा की घटनाएं सामने आईं।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">परिसर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया। सामने आए दृश्यों में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था संभालते दिखाई दिए। कुछ छात्र विश्वविद्यालय से निकलकर अपने-अपने घरों की ओर जाते भी नजर आए।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">हालांकि, पुलिस ने अभी तक विश्वविद्यालय परिसर में छात्रा के साथ दुष्कर्म की घटना की पुष्टि नहीं की है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच जारी है और सोशल मीडिया पर सामने आए दावों की वास्तविकता का पता लगाया जा रहा है।</span></p><h5 class=""><b>अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर</b></h5><p class="blue-bg-white"><b><i>पुलिस ने मामले में कई अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। फिलहाल किसी आरोपी की पहचान की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में सोशल मीडिया पर प्रसारित दावों और आधिकारिक तौर पर पुष्टि की गई जानकारी के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है।</span></i></b></p><h5 class=""><b>LPU में 2 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात</b></h5><p>तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए पंजाब पुलिस ने विश्वविद्यालय परिसर में फ्लैग मार्च भी किया। एडीजीपी फैयाज फारूकी ने बताया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 2,000 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">जालंधर के पुलिस आयुक्त सतिंदर सिंह ने हॉस्टल में कथित हिंसा और अव्यवस्था से जुड़ी कुछ रिपोर्टों को अफवाह बताया। उन्होंने कहा कि सभी हॉस्टल की जांच की गई है और स्थिति सामान्य है।</span></p><h5 class=""><b>10 दिनों तक नियमित कक्षाएं स्थगित</b></h5><p class="grey-bg-red"><b><i>घटनाक्रम के बीच LPU ने 28 सितंबर से 10 दिनों के लिए नियमित कक्षाएं स्थगित करने की घोषणा की है। विश्वविद्यालय ने मध्यावधि परीक्षाओं को भी अगले आदेश तक स्थगित कर दिया है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">विश्वविद्यालय ने छात्रों को सलाह दी है कि जो छात्र घर जाना चाहते हैं, वे अपने माता-पिता या अभिभावकों से सलाह लेकर यात्रा करें।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">LPU प्रशासन ने छात्रों से शांति बनाए रखने, आधिकारिक निर्देशों का पालन करने और किसी भी तरह की अशांति से जुड़े गतिविधियों में शामिल होने से बचने की अपील की है।</span></i></b></p><h5 class=""><b>सुरक्षा को लेकर उठे गंभीर सवाल</b></h5><p>LPU में हुए घटनाक्रम ने एक बार फिर विश्वविद्यालय परिसरों में छात्राओं की सुरक्षा और संस्थानों की जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े किए हैं।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">अभिजीत दीपके ने इसी संदर्भ में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर अपनी चिंता जाहिर की। हालांकि, कथित दुष्कर्म की घटना की पुलिस जांच अभी जारी है और आधिकारिक तौर पर घटना की पुष्टि नहीं हुई है।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">फिलहाल पुलिस का फोकस पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने लाने, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सोशल मीडिया पर फैल रही जानकारी की जांच करने पर है।</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ LPU हिंसा पर CJP संस्थापक अभिजीत दीपके बोले- महिलाओं की सुरक्षा के लिए 2026 में भी क्यों करना पड़े संघर्ष? ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/tarun-chugh-bocw-fund-punjab-bhagwant-mann-government-6607 ]]></guid><title><![CDATA[ BOCW फंड को लेकर तरुण चुग का भगवंत मान सरकार पर हमला, बोले- मजदूरों के पैसे पर जवाब दें ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/tarun-chugh-bocw-fund-punjab-bhagwant-mann-government-6607 ]]></link><pubDate><![CDATA[Sat, 26 Sep 2026 17:30:11 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ चंडीगढ़,&nbsp;पंजाब: पंजाब में निर्माण श्रमिकों के कल्याण के लिए निर्धारित BOCW (Building and Other Construction Workers) वेलफेयर फंड को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। भाजपा के राष्ट्रीय मुख्यालय प्र ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b><span style="font-size: 1rem;">चंडीगढ़,&nbsp;</span>पंजाब</b><span style="font-size: 1rem;"><b>: </b>पंजाब में निर्माण श्रमिकों के कल्याण के लिए निर्धारित <b>BOCW (Building and Other Construction Workers)</b> वेलफेयर फंड को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। भाजपा के राष्ट्रीय मुख्यालय प्रभारी एवं सांसद तरुण चुग ने भगवंत मान सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि निर्माण मजदूरों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए निर्धारित धनराशि को दूसरी योजनाओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">चुग ने आरोप लगाया कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि निर्माण श्रमिकों के लिए निर्धारित फंड को दूसरी योजनाओं में इस्तेमाल करने की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल से इस मुद्दे पर जवाब देने की मांग की।</span></p><p><span style="font-size: 1rem;">तरुण चुग ने कहा कि BOCW फंड का उद्देश्य निर्माण श्रमिकों और उनके परिवारों के कल्याण से जुड़ी जरूरतों को पूरा करना है। उन्होंने कहा कि इस धनराशि का इस्तेमाल श्रमिकों की स्वास्थ्य सुविधाओं, बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा, पेंशन और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के लिए किया जाना चाहिए।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">भाजपा नेता ने दावा किया कि यह पंजाब सरकार के सामान्य बजट की राशि नहीं है, जिसे सरकार अपनी इच्छा के अनुसार किसी दूसरी योजना में खर्च कर सके। उनके मुताबिक, यह राशि विशेष रूप से निर्माण श्रमिकों के कल्याण के लिए निर्धारित है।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;&lt;a href="https://x.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#WATCH&lt;/a&gt; | Delhi: On issue of Punjab labour fund misuse, BJP MP Tarun Chugh says, &amp;quot;... BOCW fund is meant only for construction workers and their families, including healthcare and children’s education. The Punjab government is accused of diverting this money for other interests.… &lt;a href="https://t.co/pV9jCL2H60"&gt;pic.twitter.com/pV9jCL2H60&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; ANI (@ANI) &lt;a href="https://x.com/ANI/status/2103731991921484244?ref_src=twsrc^tfw"&gt;September 26, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><h5 class=""><b>दूसरी योजनाओं से जोड़ने पर उठाए सवाल</b></h5><p>चुग ने सवाल उठाया कि यदि पंजाब सरकार को अपनी योजनाएं लागू करनी हैं तो उनके लिए सामान्य बजट से धन का प्रावधान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि श्रमिकों के लिए निर्धारित फंड को दूसरी योजनाओं से जोड़ने का प्रयास गंभीर सवाल खड़े करता है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने आरोप लगाया कि जिस धनराशि का उद्देश्य निर्माण श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है, उस पर किसी अन्य योजना के लिए नजर डालना श्रमिकों के हितों के खिलाफ है।</span></p><p>तरुण चुग ने कहा कि इस मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के हस्तक्षेप और केंद्र सरकार की ओर से उठाई गई आपत्तियों ने विषय की गंभीरता बढ़ा दी है। उन्होंने कहा कि BOCW फंड की राशि को उसके निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप इस्तेमाल किया जाना चाहिए।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने पंजाब सरकार से पूरे मामले पर स्पष्ट जवाब देने और निर्माण श्रमिकों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।</span></p><h5 class=""><b>भगवंत मान और केजरीवाल से मांगा जवाब</b></h5><p>चुग ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल से सवाल करते हुए कहा कि पंजाब के निर्माण श्रमिकों के लिए निर्धारित धनराशि को दूसरी योजनाओं से जोड़ने की आवश्यकता क्यों महसूस हुई।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने आरोप लगाया कि श्रमिकों के कल्याण के लिए रखी गई राशि का इस्तेमाल राजनीतिक प्रचार के लिए नहीं किया जाना चाहिए। भाजपा नेता ने सरकार से फंड के इस्तेमाल को लेकर पारदर्शिता बरतने और श्रमिकों के सामने स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">उन्होंने कहा कि निर्माण श्रमिकों के हितों से जुड़े इस फंड की सुरक्षा और उसके निर्धारित उद्देश्य का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है।</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ BOCW फंड को लेकर तरुण चुग का भगवंत मान सरकार पर हमला, बोले- मजदूरों के पैसे पर जवाब दें ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/waris-punjab-de-strategy-6578 ]]></guid><title><![CDATA[ Punjab Politics: अमृतपाल के बाद ‘वारिस पंजाब दे’ का बदला संदेश, हिंदू-मुस्लिम उम्मीदवारों से लेकर ड्रग्स एजेंडे तक ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/waris-punjab-de-strategy-6578 ]]></link><pubDate><![CDATA[Fri, 25 Sep 2026 11:31:15 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ पंजाब की राजनीति में ‘वारिस पंजाब दे’ (WPD) की गतिविधियां आगामी विधानसभा चुनाव से पहले एक नए चरण में दिखाई दे रही हैं। संगठन से जुड़े हालिया बयानों और नई राजनीतिक एंट्री में नशे, भ्रष्टाचार, रोजगार, क ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p>पंजाब की राजनीति में ‘वारिस पंजाब दे’ (WPD) की गतिविधियां आगामी विधानसभा चुनाव से पहले एक नए चरण में दिखाई दे रही हैं। संगठन से जुड़े हालिया बयानों और नई राजनीतिक एंट्री में नशे, भ्रष्टाचार, रोजगार, कानून-व्यवस्था और संविधान के दायरे में राजनीति जैसे मुद्दों पर जोर दिखाई दे रहा है। पूर्व प्रवर्तन निदेशालय (ED) डिप्टी डायरेक्टर निरंजन सिंह और पूर्व पंजाब पुलिस DSP बलविंदर सिंह सेखों का संगठन से जुड़ना भी इसी बदलाव के संदर्भ में देखा जा रहा है।</p><p>वहीं, अकाली दल से जुड़े रहे विधायक मनप्रीत सिंह अयाली के WPD में आने के बाद पार्टी के राजनीतिक विस्तार को लेकर भी चर्चा तेज हुई है। अयाली ने कहा है कि संगठन सभी समुदायों के लोगों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में काम करेगा और हिंदू तथा मुस्लिम दोनों समुदायों से उम्मीदवार उतारने की बात कही है। उन्होंने यह भी कहा कि सत्ता में आने की स्थिति में एक हिंदू और एक दलित उपमुख्यमंत्री बनाने का प्रस्ताव हो सकता है। ये फिलहाल अयाली द्वारा व्यक्त राजनीतिक विचार हैं, किसी लागू सरकारी व्यवस्था का हिस्सा नहीं।</p><h5 class=""><b>निरंजन सिंह की एंट्री से क्या संकेत?</b></h5><p>पूर्व ED अधिकारी निरंजन सिंह ने 23 सितंबर को WPD में शामिल होने के बाद कहा कि पंजाब में नशे, भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर वह संगठन के साथ आए हैं। उनके मुताबिक, वह खुद को पारंपरिक अर्थों में राजनीतिक व्यक्ति नहीं मानते और उन्होंने चुनाव लड़ने का फैसला नहीं किया है।</p><p>निरंजन सिंह का नाम पंजाब के चर्चित ड्रग मामलों की जांच से जुड़ा रहा है। उन्होंने ED में रहते हुए जगदीश भोला ड्रग रैकेट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच की थी और इस दौरान वरिष्ठ नेताओं से पूछताछ भी की थी। वह 2021 में सेवानिवृत्त हुए।</p><p>WPD में शामिल होने के बाद निरंजन सिंह ने देश की एकता और संप्रभुता को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि संविधान सर्वोच्च होना चाहिए और कानून तोड़ने वाले किसी भी व्यक्ति के मामले का फैसला कानूनी प्रक्रिया के तहत होना चाहिए।</p><p>यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि संगठन के प्रमुख और खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह से जुड़े राजनीतिक विमर्श में पहले अलगाववादी नारों और खालिस्तान से जुड़े सवाल उठते रहे हैं। निरंजन सिंह ने इन सवालों के जवाब में देश की संप्रभुता से समझौता न करने की बात कही है।</p><h5 class=""><b>अयाली की एंट्री और SAD से दूरी</b></h5><p>मनप्रीत सिंह अयाली लंबे समय तक शिरोमणि अकाली दल (SAD) से जुड़े रहे हैं। उनके WPD में शामिल होने के बाद संगठन में पारंपरिक अकाली राजनीति से जुड़े चेहरे की मौजूदगी बढ़ी है। अयाली का कहना है कि उन्होंने WPD में शामिल होते समय यह स्पष्ट किया था कि संगठन को संविधान के दायरे में रहकर काम करना चाहिए।</p><p>अयाली ने SAD के कमजोर होने के कारणों पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी समय के साथ एक परिवार-केंद्रित संगठन में बदल गई और इससे युवाओं का उससे जुड़ाव कम हुआ। उन्होंने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को लेकर 2015 में लिए गए अकाली नेतृत्व के फैसले को भी पार्टी के राजनीतिक पतन से जोड़कर देखा। ये अयाली के राजनीतिक आकलन हैं, जिन्हें पार्टी के अन्य नेताओं और समर्थकों की राय से अलग समझना जरूरी है।</p><h5 class=""><b>हिंदू-मुस्लिम उम्मीदवारों पर क्या बोले अयाली?</b></h5><p>WPD की राजनीतिक पहुंच को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा अयाली के उस बयान से हुई है जिसमें उन्होंने कहा कि संगठन हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों से उम्मीदवार उतारेगा।</p><p>अयाली ने ‘सरबत दा भला’ के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि संगठन के मन में किसी समुदाय के प्रति भेदभाव नहीं है। उन्होंने सत्ता में आने की स्थिति में एक हिंदू और एक दलित उपमुख्यमंत्री बनाने की बात भी कही।</p><p>इस बयान को संगठन की राजनीतिक पहुंच बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि इसका चुनावी असर कितना होगा। आगामी चुनाव में उम्मीदवारों का चयन, स्थानीय समीकरण और मतदाताओं की प्रतिक्रिया इस रणनीति के व्यावहारिक प्रभाव को तय करेंगे।</p><h5 class=""><b>ड्रग्स बना रहा है मुख्य राजनीतिक मुद्दा</b></h5><p>WPD के हालिया बयानों में ड्रग्स का मुद्दा लगातार प्रमुखता से सामने आया है। निरंजन सिंह ने भी नशे के खिलाफ कार्रवाई को संगठन से जुड़ने की प्रमुख वजहों में बताया है। पूर्व DSP बलविंदर सिंह सेखों ने भी पार्टी में शामिल होने के बाद नशे के खिलाफ काम करने की बात कही।</p><p>पार्टी की ओर से पंजाब में ड्रग्स को लेकर एक White Paper लाने की बात भी कही गई है। इसका उद्देश्य नशे की समस्या, उससे जुड़े नेटवर्क और सरकारों की भूमिका पर राजनीतिक दस्तावेज पेश करना बताया गया है।</p><p>निरंजन सिंह ने इसके साथ भ्रष्टाचार, रोजगार और कानून-व्यवस्था को भी अपने चार प्रमुख मुद्दों में शामिल किया है। उन्होंने कहा कि वह चुनाव लड़ने के बजाय इन मुद्दों पर राजनीतिक भूमिका निभाना चाहते हैं।</p><h5 class=""><b>क्या WPD सभी समुदायों तक पहुंच बढ़ा रही है?</b></h5><p>हालिया घटनाक्रम से इतना जरूर दिखाई देता है कि संगठन के साथ जुड़ने वाले कुछ नए चेहरे अलग-अलग पेशेवर और राजनीतिक पृष्ठभूमि से हैं। पूर्व ED अधिकारी, पूर्व पुलिस अधिकारी और लंबे समय तक SAD से जुड़े रहे विधायक की मौजूदगी संगठन के सार्वजनिक राजनीतिक संदेश में बदलाव की चर्चा को बढ़ाती है।</p><p>हालांकि, राजनीतिक विश्लेषक प्रमोद कुमार ने इस बदलाव को लेकर अलग राय रखी है। उन्होंने संगठन के गैर-पंथिक चेहरों को शामिल करने को उसकी राजनीतिक पहचान में बदलाव की कोशिश बताया और इसकी सफलता पर सवाल उठाए। यह उनका विश्लेषण है, न कि किसी चुनावी नतीजे का स्थापित तथ्य।</p><p>आने वाले समय में WPD का विजन डॉक्यूमेंट, उम्मीदवारों की सूची, समुदायों के बीच प्रतिनिधित्व और ड्रग्स-केंद्रित एजेंडा यह स्पष्ट करेंगे कि संगठन अपने राजनीतिक विस्तार को किस तरह आगे बढ़ाता है। फिलहाल पंजाब की राजनीति में WPD की गतिविधियां 2027 विधानसभा चुनाव से पहले एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में सामने आई हैं।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ Punjab Politics: अमृतपाल के बाद ‘वारिस पंजाब दे’ का बदला संदेश, हिंदू-मुस्लिम उम्मीदवारों से लेकर ड्रग्स एजेंडे तक ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/rajjit-singh-arrest-patiala-drug-smuggling-extortion-case-6558 ]]></guid><title><![CDATA[ 6 साल से फरार बर्खास्त AIG राजजीत सिंह गिरफ्तार, ड्रग तस्करी और जबरन वसूली मामले में पुलिस की बड़ी कार्रवाई ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/rajjit-singh-arrest-patiala-drug-smuggling-extortion-case-6558 ]]></link><pubDate><![CDATA[Thu, 24 Sep 2026 13:30:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ पटियाला, पंजाब: पंजाब पुलिस के बर्खास्त AIG (Assistant Inspector General) राजजीत सिंह हुंदल को करीब छह साल तक फरार रहने के बाद पटियाला पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। राजजीत सिंह का नाम ड्रग तस्करी, जबर ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>पटियाला, पंजाब:</b> पंजाब पुलिस के बर्खास्त AIG (Assistant Inspector General) राजजीत सिंह हुंदल को करीब छह साल तक फरार रहने के बाद पटियाला पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। राजजीत सिंह का नाम ड्रग तस्करी, जबरन वसूली और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच में सामने आया था। लंबे समय से फरार चल रहे राजजीत सिंह ने पटियाला पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">राजजीत सिंह का नाम बर्खास्त पुलिस इंस्पेक्टर इंदरजीत सिंह से जुड़े ड्रग नेटवर्क मामले की जांच के दौरान सामने आया था।</span></p><p><span style="font-size: 1rem;">जांच एजेंसियों के अनुसार, राजजीत सिंह पर इंदरजीत सिंह के साथ कथित मिलीभगत कर ड्रग तस्करों को संरक्षण देने, निर्दोष लोगों को कथित तौर पर झूठे ड्रग मामलों में फंसाने और जबरन वसूली से जुड़े गंभीर आरोप लगे थे।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">इंदरजीत सिंह के खिलाफ 2018 में दर्ज मामले की जांच आगे बढ़ने पर राजजीत सिंह को भी सह-आरोपी बनाया गया था। उस समय राजजीत सिंह तरनतारन के SSP के पद पर तैनात रह चुके थे। जांच में उनकी भूमिका और इंदरजीत सिंह के साथ कथित संबंधों को लेकर सवाल उठाए गए थे।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;Punjab Police arrests dismissed AIG Rajjeet Singh in connection with cases registered under the NDPS Act, corruption, forgery, and various sections of the IPC. He was arrested by the ANTF team from Patiala this morning in Patiala&amp;#39;s Darshan Singh Nagar. The ANTF team to seek court…&lt;/p&gt;&amp;mdash; ANI (@ANI) &lt;a href="https://x.com/ANI/status/2102991836587630786?ref_src=twsrc^tfw"&gt;September 24, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><h5 class=""><b>SIT रिपोर्ट के बाद हुई थी बर्खास्तगी</b></h5><p>पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल यानी SIT का गठन किया गया था। SIT की रिपोर्ट के आधार पर पंजाब सरकार ने अप्रैल 2023 में राजजीत सिंह को पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया था। बर्खास्तगी से जुड़े आदेश में उन पर पद के कथित दुरुपयोग और ड्रग मामलों की जांच को प्रभावित करने जैसे आरोपों का उल्लेख किया गया था।</p><h5 class=""><b>आय से अधिक संपत्ति का भी मामला</b></h5><p class="blue-bg-white"><b><i>राजजीत सिंह के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला भी दर्ज किया गया था। विजिलेंस ब्यूरो की जांच में उनके और उनकी पत्नी के बैंक खातों से जुड़े कथित संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की भी जांच की गई। इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत भी कार्रवाई की गई थी।</i></b></p><h5 class=""><b>लंबे समय से पुलिस की पकड़ से बाहर थे</b></h5><p class="grey-bg-red"><b><i>मामलों में कार्रवाई के बाद राजजीत सिंह लंबे समय तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर रहे। उनके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया था और अदालत की कार्रवाई के दौरान उन्हें भगोड़ा घोषित किए जाने की बात भी सामने आई। अब पटियाला पुलिस के सामने आत्मसमर्पण के बाद उनकी गिरफ्तारी हो गई है।</i></b></p><h5 class=""><b>पुलिस करेगी पूछताछ</b></h5><p>गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियां राजजीत सिंह से ड्रग नेटवर्क, कथित जबरन वसूली, वित्तीय लेन-देन और उनसे जुड़े अन्य मामलों के संबंध में पूछताछ करेंगी। जानकारी के मुताबिक, एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) विभिन्न मामलों में पूछताछ के लिए अदालत से रिमांड की मांग कर सकती है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">राजजीत सिंह की गिरफ्तारी से इस लंबे समय से चल रहे मामले की जांच में आगे की कड़ियों और अन्य आरोपों से जुड़े तथ्यों को सामने लाने की संभावना है। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष अदालत की कार्यवाही के बाद ही तय होगा।</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ 6 साल से फरार बर्खास्त AIG राजजीत सिंह गिरफ्तार, ड्रग तस्करी और जबरन वसूली मामले में पुलिस की बड़ी कार्रवाई ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-ed-action-harpal-cheema-gmada-case-6553 ]]></guid><title><![CDATA[ Punjab ED Action: चुनाव से पहले ईडी की कार्रवाई पर हरपाल चीमा का केंद्र पर निशाना, GMADA मामले से गरमाई सियासत ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-ed-action-harpal-cheema-gmada-case-6553 ]]></link><pubDate><![CDATA[Thu, 24 Sep 2026 11:48:31 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ चंडीगढ़, पंजाब: पंजाब में विधानसभा चुनाव नजदीक आने के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई को लेकर राज्य की सियासत गरमा गई है। ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) से जुड़े मामले में पंजाब  ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>चंडीगढ़, पंजाब:</b> पंजाब में विधानसभा चुनाव नजदीक आने के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई को लेकर राज्य की सियासत गरमा गई है। ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) से जुड़े मामले में पंजाब और आसपास के कई इलाकों में ईडी की तलाशी और जांच के बीच पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा (Harpal Singh Cheema) ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है।</span></p><p>चीमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दावा किया कि चुनाव नजदीक आते ही पंजाब में ईडी की कार्रवाई तेज हो गई है और आम आदमी पार्टी (AAP) से जुड़े नेताओं, कार्यकर्ताओं तथा अधिकारियों के परिसरों पर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने इन कार्रवाइयों को केंद्रीय जांच एजेंसियों के कथित दुरुपयोग से जोड़ते हुए सवाल उठाए।</p><p>&lt;iframe src="https://www.facebook.com/plugins/video.php?height=314&amp;href=https://www.facebook.com/gtcnewsonline/videos/1087659923654499/&amp;show_text=false&amp;width=560&amp;t=0" width="560" height="314" style="border:none;overflow:hidden" scrolling="no" frameborder="0" allowfullscreen="true" allow="autoplay; clipboard-write; encrypted-media; picture-in-picture; web-share" allowFullScreen="true"&gt;&lt;/iframe&gt;</p><h5 class=""><b>हरपाल चीमा ने ED की कार्रवाई पर क्या कहा?</b></h5><p>हरपाल सिंह चीमा ने अपनी पोस्ट में आरोप लगाया कि पंजाब में चुनाव नजदीक आने के साथ ईडी की गतिविधियां बढ़ी हैं। उनके अनुसार, यह केवल छापेमारी का मामला नहीं है, बल्कि केंद्रीय जांच एजेंसियों के कथित इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल भी उठते हैं।</p><p>चीमा ने यह भी कहा कि पंजाब ने दबाव के आगे कभी सिर नहीं झुकाया और आगे भी नहीं झुकेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधते हुए ईडी की कार्रवाई को राजनीतिक दबाव से जोड़ने वाला आरोप लगाया। हालांकि, उनकी पोस्ट में किसी विशेष कार्रवाई को लेकर राजनीतिक दबाव का स्वतंत्र प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है।</p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;&lt;a href="https://x.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#WATCH&lt;/a&gt; | Chandigarh | Punjab minister Harpal Singh Cheema says, &amp;quot;Whenever Assembly elections are held in a state, the BJP first sends a flying squad there... They manipulate the voter rolls to delete the votes of the Opposition party&amp;#39;s supporters. Subsequently, the CBI, the ED,… &lt;a href="https://t.co/ezDRdGhyGO"&gt;pic.twitter.com/ezDRdGhyGO&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; ANI (@ANI) &lt;a href="https://x.com/ANI/status/2103002910624022923?ref_src=twsrc^tfw"&gt;September 24, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><h5 class=""><b>GMADA मामले में कई जगह ED की कार्रवाई</b></h5><p>यह पूरा विवाद GMADA से जुड़े एक मामले में ईडी की कार्रवाई के बाद तेज हुआ है। जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, एजेंसी ने दिल्ली, मोहाली, चंडीगढ़, पंचकूला और लुधियाना में कई ठिकानों पर तलाशी और सर्वे की कार्रवाई शुरू की है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">रिपोर्ट के मुताबिक, यह कार्रवाई धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की जा रही है। जांच के दायरे में रियल एस्टेट से जुड़ी कंपनियों के प्रमोटर और निदेशक समेत उनसे जुड़े लोगों के परिसरों तथा कुछ सरकारी कार्यालयों को भी शामिल किया गया है। ED की कार्रवाई का पंजाब में कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन हो रहा है।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="pa" dir="ltr"&gt;ਪੰਜਾਬ ਰਹੇਗਾ ਜ਼ਿੰਦਾਬਾਦ, ਨਰੇਂਦਰ ਮੋਦੀ ਮੁਰਦਾਬਾਦ!&lt;br&gt;&lt;br&gt;👉🏻 PM ਮੋਦੀ ਅਤੇ ਭਾਜਪਾ ਦੀ ਪੰਜਾਬ ਨਾਲ਼ ਨਫ਼ਰਤ ਵਿਰੁੱਧ ਡਟ ਖੜ੍ਹਾ ਹੋਇਆ ਪੰਜਾਬ&lt;br&gt;👉🏻 ਮੋਹਾਲੀ GMADA ਭਵਨ ਦੇ ਬਾਹਰ ਲੱਗ ਰਹੇ &amp;#39;ਮੋਦੀ ਮੁਰਦਾਬਾਦ&amp;#39; ਦੇ ਨਾਅਰੇ&lt;br&gt;👉🏻 ਪੰਜਾਬ ਦੀਆਂ ਬਹਾਦਰ ਔਰਤਾਂ ਨੇ ਵੀ ਖੋਲ੍ਹਿਆ ED ਦੀ ਦੁਰਵਰਤੋਂ ਵਿਰੁੱਧ ਮੋਰਚਾ &lt;a href="https://t.co/2lDsyRmRyM"&gt;pic.twitter.com/2lDsyRmRyM&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; AAP Punjab (@AAPPunjab) &lt;a href="https://x.com/AAPPunjab/status/2103005655120679105?ref_src=twsrc^tfw"&gt;September 24, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><h5 class=""><b>किस मामले की जांच कर रही है ED?</b></h5><p>मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, GMADA से जुड़े दस्तावेजों और कुछ वित्तीय गतिविधियों की जांच ईडी की कार्रवाई का हिस्सा है। द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, मोहाली स्थित GMADA कार्यालय में भूमि उपयोग में बदलाव, भूमि अधिग्रहण से जुड़े दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की जांच की जा रही थी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि हाल में 15,000 करोड़ रुपये का कर्ज जुटाने की प्रक्रिया से संबंधित रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में बताए गए हैं।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">हालांकि, किसी जांच में तलाशी या सर्वे की कार्रवाई अपने आप में आरोपों के अंतिम रूप से साबित होने का अर्थ नहीं है। जांच पूरी होने के बाद एजेंसी की ओर से सामने आने वाले दस्तावेज और निष्कर्ष ही मामले की आगे की स्थिति स्पष्ट करेंगे।</span></p><h5 class=""><b>AAP ने कार्रवाई को राजनीतिक दबाव से जोड़ा</b></h5><p>आम आदमी पार्टी के नेताओं ने ईडी की कार्रवाई के समय और तरीके पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि पंजाब में विधानसभा चुनाव नजदीक होने के कारण केंद्रीय एजेंसियों के जरिए राज्य सरकार और अधिकारियों पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।</p><p>जानकारी के मुताबिक, AAP ने GMADA कार्यालय में चल रही ईडी की कार्रवाई के विरोध में एजेंसी की टीमों का घेराव करने की घोषणा भी की है। पार्टी ने यह दावा किया कि लंबे समय तक चली कार्रवाई के बावजूद एजेंसी को अब तक कुछ ठोस नहीं मिला है। हालांकि, ईडी की जांच अभी समाप्त नहीं हुई थी और एजेंसी ने यह निष्कर्ष नहीं दिया था कि कोई आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई।</p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="hi" dir="ltr"&gt;पंजाब की सियासी ज़मीन पर ‘ज़ीरो’ हो चुके हैं BJP और अकाली दल (बादल)!&lt;br&gt;&lt;br&gt;👉 बेअदबी, गोलीकांड, नशे और अब बलात्कार तक, सबसे कलंकित इतिहास अकाली दल का रहा है।&lt;br&gt;👉 ED की छापेमारियों में कोई बरामदगी नहीं हुई, यह BJP की डर पैदा करने की साज़िश है।&lt;br&gt;👉 सत्ता के अहंकार में अंधी हुई बीजेपी को… &lt;a href="https://t.co/yxONg0mwFp"&gt;pic.twitter.com/yxONg0mwFp&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; AAP (@AamAadmiParty) &lt;a href="https://x.com/AamAadmiParty/status/2103004251987525809?ref_src=twsrc^tfw"&gt;September 24, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><h5 class=""><b>ईडी की कार्रवाई पर आगे क्या?</b></h5><p>GMADA मामले में ईडी की जांच जारी रहने के कारण आगे की तस्वीर एजेंसी की कार्रवाई और जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी। तलाशी के दौरान मिले दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड या अन्य सामग्री की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मामले में आगे किन लोगों या संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई होती है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">इस बीच, पंजाब में ईडी की कार्रवाई को लेकर आम आदमी पार्टी और केंद्र के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। एक तरफ AAP इसे चुनाव से पहले राजनीतिक दबाव का मामला बता रही है, जबकि ईडी की कार्रवाई आधिकारिक तौर पर संबंधित धनशोधन जांच के तहत की जा रही है।</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ Punjab ED Action: चुनाव से पहले ईडी की कार्रवाई पर हरपाल चीमा का केंद्र पर निशाना, GMADA मामले से गरमाई सियासत ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/ravinder-singh-brahmpura-joins-aap-cm-bhagwant-mann-6523 ]]></guid><title><![CDATA[ अकाली दल से निष्कासन के बाद रविंदर सिंह ब्रह्मपुरा AAP में शामिल, CM मान ने कराया पार्टी में स्वागत ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/ravinder-singh-brahmpura-joins-aap-cm-bhagwant-mann-6523 ]]></link><pubDate><![CDATA[Tue, 22 Sep 2026 15:46:30 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ चंडीगढ़, पंजाब: पंजाब की राजनीति में मंगलवार को बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया। शिरोमणि अकाली दल (SAD) के पूर्व नेता रविंदर सिंह ब्रह्मपुरा आम आदमी पार्टी (AAP) में शामिल हो गए। खबरवाले की रिपोर्ट क ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>चंडीगढ़, पंजाब:</b> पंजाब की राजनीति में मंगलवार को बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया। शिरोमणि अकाली दल (SAD) के पूर्व नेता रविंदर सिंह ब्रह्मपुरा आम आदमी पार्टी (AAP) में शामिल हो गए। खबरवाले की रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री भगवंत मान की मौजूदगी में ब्रह्मपुरा ने आम आदमी पार्टी का दामन थामा। उनके AAP में शामिल होने की तस्वीरें भी सामने आई हैं।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">ब्रह्मपुरा का यह कदम ऐसे समय आया है, जब कुछ ही दिन पहले शिरोमणि अकाली दल ने उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया था। ऐसे में उनका AAP में जाना पंजाब की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।</span></p><h5 class=""><b>अकाली दल ने क्यों किया था निष्कासित?</b></h5><p>शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने 15 सितंबर को रविंदर सिंह ब्रह्मपुरा को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित किया था। पार्टी की ओर से कहा गया था कि खडूर साहिब विधानसभा क्षेत्र के कार्यकर्ताओं से ब्रह्मपुरा के खिलाफ लिखित शिकायतें मिली थीं।<span style="font-size: 1rem;">पार्टी के अनुसार, 13 सितंबर को गोइंदवाल साहिब में आयोजित ‘पंजाब बचाओ रैली’ के दौरान भी स्थानीय नेतृत्व ने ब्रह्मपुरा की कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों को लेकर नेतृत्व को जानकारी दी थी। इसके बाद वरिष्ठ नेताओं से चर्चा के बाद उन्हें पार्टी से बाहर करने का फैसला लिया गया।</span></p><p>&lt;iframe src="https://www.facebook.com/plugins/post.php?href=https://www.facebook.com/AAPPunjab/posts/pfbid02JCGnXRprYBqebvwsv2gyTFEqM8mhwJYaM3PpK3BRx6zQnBfBuq1nwKq35SaPaThhl&amp;show_text=true&amp;width=500" width="500" height="812" style="border:none;overflow:hidden" scrolling="no" frameborder="0" allowfullscreen="true" allow="autoplay; clipboard-write; encrypted-media; picture-in-picture; web-share"&gt;&lt;/iframe&gt;</p><h5 class=""><b>AAP में शामिल होने से बदला राजनीतिक समीकरण</b></h5><p>अकाली दल से निष्कासन के कुछ ही दिनों बाद ब्रह्मपुरा का आम आदमी पार्टी में शामिल होना पंजाब की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, उनके AAP में शामिल होने के बाद पार्टी में उनकी आगामी भूमिका को लेकर अभी कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">ब्रह्मपुरा खडूर साहिब से पूर्व विधायक रहे हैं और वरिष्ठ अकाली नेता रहे दिवंगत रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा के बेटे हैं। हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, इस साल अप्रैल में अकाली दल ने खडूर साहिब के हलका इंचार्ज पद से रविंदर सिंह ब्रह्मपुरा को हटाकर रामनदीप कौर को जिम्मेदारी दी थी।</span></p><h5 class=""><b>निष्कासन के बाद ब्रह्मपुरा ने क्या कहा था?</b></h5><p class="grey-bg-red"><b><i>अकाली दल से निष्कासन के बाद रविंदर सिंह ब्रह्मपुरा ने पार्टी नेतृत्व पर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए थे। उन्होंने अपने निष्कासन को व्यक्तिगत सजा नहीं बल्कि पार्टी नेतृत्व के वैचारिक बदलाव का संकेत बताया था। उनके बयान में अकाली दल की मौजूदा नेतृत्व व्यवस्था और पार्टी की दिशा को लेकर असहमति जाहिर की गई थी।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">अब AAP में शामिल होने के बाद ब्रह्मपुरा की राजनीतिक भूमिका पर नजर रहेगी। खासतौर पर खडूर साहिब क्षेत्र में उनके राजनीतिक प्रभाव और आगामी विधानसभा चुनावों के संदर्भ में यह घटनाक्रम चर्चा में है।</span></i></b></p><h5 class=""><b>पंजाब की राजनीति में बढ़ी हलचल</b></h5><p>पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। इसी बीच विभिन्न दलों में नेताओं के आने-जाने और संगठनात्मक बदलाव का दौर भी जारी है। आम आदमी पार्टी ने हाल ही में अपने राष्ट्रीय स्तर के संगठन में भी बदलाव किए हैं और मुख्यमंत्री भगवंत मान को पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति में स्थायी सदस्य बनाया गया है।</p><p>रविंदर सिंह ब्रह्मपुरा के AAP में शामिल होने से शिरोमणि अकाली दल और आम आदमी पार्टी के बीच पंजाब की राजनीति में इस घटनाक्रम को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, इस कदम का आगे पार्टी संगठन और खडूर साहिब की राजनीति पर क्या असर पड़ता है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ अकाली दल से निष्कासन के बाद रविंदर सिंह ब्रह्मपुरा AAP में शामिल, CM मान ने कराया पार्टी में स्वागत ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-police-advisory-row-6516 ]]></guid><title><![CDATA[ Punjab Police Advisory Row: वर्दी न पहनने वाले कथित पत्र पर सियासी घमासान, पुलिस ने बताया फर्जी ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-police-advisory-row-6516 ]]></link><pubDate><![CDATA[Tue, 22 Sep 2026 14:00:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ चंडीगढ़: पंजाब में पुलिसकर्मियों की सुरक्षा को लेकर एक कथित एडवाइजरी सामने आने के बाद सियासी विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे पत्र में पुलिसकर्मियों को घर से ड्यूटी और ड्यूटी से घर लौ ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>चंडीगढ़:</b> पंजाब में पुलिसकर्मियों की सुरक्षा को लेकर एक कथित एडवाइजरी सामने आने के बाद सियासी विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे पत्र में पुलिसकर्मियों को घर से ड्यूटी और ड्यूटी से घर लौटते समय वर्दी नहीं पहनने तथा सादे कपड़ों में यात्रा करने की सलाह दिए जाने का दावा किया गया। कांग्रेस नेता अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने इसी दस्तावेज को साझा करते हुए पंजाब की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए। हालांकि, पंजाब पुलिस ने इस दस्तावेज को फर्जी बताया है।</p><h5 class=""><b>कथित पत्र में क्या था?</b></h5><p>सोशल मीडिया पर प्रसारित दस्तावेज को बॉर्डर रेंज, अमृतसर के आईजी की ओर से अमृतसर ग्रामीण, बटाला, गुरदासपुर और पठानकोट के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को भेजा गया बताया गया था। इसमें पुलिस कर्मचारियों की निजी आवाजाही के दौरान उनकी सुरक्षा को लेकर कई निर्देश होने का दावा किया गया।</p><p>कथित पत्र में पुलिसकर्मियों से ड्यूटी पर आते-जाते समय सादे कपड़े पहनने और सार्वजनिक स्थानों पर ऐसी कोई वस्तु प्रदर्शित नहीं करने की बात कही गई थी, जिससे उनकी पुलिस पहचान आसानी से जाहिर हो। इसमें बैज, पहचान पत्र और पुलिस उपकरणों को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित न करने की सलाह का भी उल्लेख था।</p><p>इसके अलावा पुलिसकर्मियों को अकेले यात्रा करने से बचने और ‘बडी पेयर सिस्टम’ के तहत साथी के साथ आवाजाही करने की सलाह दिए जाने का दावा किया गया। यात्रा शुरू करने और सुरक्षित गंतव्य तक पहुंचने की जानकारी संबंधित अधिकारी या कंट्रोल प्वाइंट को देने की बात भी कथित पत्र में थी।</p><h5 class=""><b>ASI हरजीत सिंह की हत्या के बाद सामने आया विवाद</b></h5><p>इस कथित एडवाइजरी को 18 सितंबर की तारीख से जोड़ा गया, यानी उसी अवधि में जब अमृतसर में ड्यूटी के दौरान ASI हरजीत सिंह की गोली मारकर हत्या की गई थी। पुलिस के अनुसार, हरजीत सिंह पर भकतांवाला अनाज मंडी के पास हमला हुआ था और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने जांच शुरू की थी।</p><p>इसी पृष्ठभूमि में पुलिसकर्मियों की व्यक्तिगत सुरक्षा को लेकर जारी बताए जा रहे इस पत्र ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया। कुछ रिपोर्टों में ऐसे निर्देशों को वास्तविक एडवाइजरी के रूप में भी प्रकाशित किया गया, जबकि बाद में पंजाब पुलिस ने आधिकारिक तौर पर इसकी प्रामाणिकता से इनकार किया।</p><h5 class=""><b>पंजाब पुलिस ने क्या कहा?</b></h5><p>विवाद बढ़ने के बाद पंजाब पुलिस ने सोशल मीडिया पर फैले संदेशों को “<b>False Advisory</b>” बताते हुए कहा कि पुलिस मुख्यालय या उसके अधीन किसी अन्य कार्यालय ने पुलिसकर्मियों को ड्यूटी पर जाते या लौटते समय वर्दी से बचने अथवा सादे कपड़ों में यात्रा करने का कोई ऐसा निर्देश जारी नहीं किया है। पुलिस ने लोगों और अपने कर्मचारियों से अपील की कि वे केवल आधिकारिक माध्यमों से मिलने वाली जानकारी पर भरोसा करें।</p><p>यानी फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक पुलिस स्पष्टीकरण के अनुसार, सोशल मीडिया पर वायरल दस्तावेज को वास्तविक सरकारी आदेश नहीं माना जा रहा है।</p><h5 class=""><b>विपक्ष ने उठाए कानून-व्यवस्था पर सवाल</b></h5><p>कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग और अकाली दल नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने कथित पत्र को सोशल मीडिया पर साझा किया। दोनों नेताओं ने इसे पंजाब में पुलिस और कानून-व्यवस्था की स्थिति से जोड़ते हुए राज्य सरकार पर सवाल उठाए।</p><p>वड़िंग ने पत्र के साथ एक कथित ऑडियो भी साझा किया और मुख्यमंत्री भगवंत मान पर निशाना साधा। वहीं मजीठिया ने पुलिसकर्मियों की सुरक्षा को लेकर स्पष्टीकरण की मांग की। विपक्षी नेताओं की ये टिप्पणियां राजनीतिक आरोप हैं और इन्हें पंजाब पुलिस की ओर से खारिज किए गए दस्तावेज के आधार पर किया गया है।</p><p>इससे पहले भाजपा नेता सुनील जाखड़ ने भी पुलिसकर्मियों की सुरक्षा को लेकर सामने आए दावों पर सवाल उठाए थे। उन्होंने पुलिस पर हमलों की घटनाओं के संदर्भ में कानून-व्यवस्था पर सरकार से जवाब मांगा था।</p><h5 class=""><b>अब असली सवाल क्या है?</b></h5><p>इस पूरे विवाद में दो अलग-अलग बातें सामने आ रही हैं। एक तरफ सोशल मीडिया पर ऐसा पत्र प्रसारित हुआ, जिसे कुछ नेताओं ने पुलिस सुरक्षा से जुड़ा आधिकारिक दस्तावेज बताया। दूसरी तरफ पंजाब पुलिस ने इसकी प्रामाणिकता से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया है।</p><p>ऐसे में फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यही है कि पंजाब पुलिस के आधिकारिक स्पष्टीकरण के मुताबिक ‘वर्दी न पहनने’ वाली एडवाइजरी जारी नहीं की गई थी। वहीं, पुलिसकर्मियों पर हालिया हमलों के कारण उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता वास्तविक बनी हुई है। इन दोनों मुद्दों को अलग-अलग देखना जरूरी है, ताकि किसी अप्रमाणित दस्तावेज के आधार पर गलत सूचना न फैले।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ Punjab Police Advisory Row: वर्दी न पहनने वाले कथित पत्र पर सियासी घमासान, पुलिस ने बताया फर्जी ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/akal-takht-amarjit-chawla-malkit-singh-expelled-6470 ]]></guid><title><![CDATA[ श्री अकाल तख्त साहिब का बड़ा फैसला: अमरजीत चावला और ज्ञानी मलकीत सिंह पंथ से खारिज ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/akal-takht-amarjit-chawla-malkit-singh-expelled-6470 ]]></link><pubDate><![CDATA[Sun, 20 Sep 2026 13:37:39 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ अमृतसर, पंजाब: श्री अकाल तख्त साहिब में रविवार को पांच सिंह साहिबान की बैठक में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के पूर्व सदस्य अमरजीत सिंह चावला और श्री अकाल तख्त साहिब के अतिरिक्त मुख्य ग्रंथ ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>अमृतसर, पंजाब:</b> श्री अकाल तख्त साहिब में रविवार को पांच सिंह साहिबान की बैठक में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के पूर्व सदस्य अमरजीत सिंह चावला और श्री अकाल तख्त साहिब के अतिरिक्त मुख्य ग्रंथी ज्ञानी मलकीत सिंह को खालसा पंथ से खारिज करने का फैसला सुनाया गया। यह कार्रवाई सिख मर्यादा और पंथक नियमों के कथित उल्लंघन से जुड़े मामले में की गई है।</span></p><p>रिपोर्टों के मुताबिक, श्री अकाल तख्त साहिब में हुई बैठक के बाद जथेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने दोनों के संबंध में फैसला सुनाया। निर्णय में अमरजीत सिंह चावला को पंथक नियमों और सिख मर्यादा के उल्लंघन से जुड़े आरोपों के आधार पर खारिज किए जाने की बात कही गई।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">फैसले के तहत सिख संगत से दोनों के साथ धार्मिक, सामाजिक या राजनीतिक स्तर पर किसी प्रकार की सांझ नहीं रखने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों पर भविष्य में किसी सिख संस्था, गुरुद्वारा प्रबंधन समिति या धार्मिक मंच पर सेवा करने की आजीवन रोक भी लगाई गई है।</span></p><p>&lt;iframe src="https://www.facebook.com/plugins/post.php?href=https://www.facebook.com/gtcnewsonline/posts/pfbid031mCET45KYdCDCmMb2RtPQPvyfeW8M53huoN8adkg47nBr8gR52nQEmm6bgwxtzGEl&amp;show_text=true&amp;width=500" width="500" height="635" style="border:none;overflow:hidden" scrolling="no" frameborder="0" allowfullscreen="true" allow="autoplay; clipboard-write; encrypted-media; picture-in-picture; web-share"&gt;&lt;/iframe&gt;</p><h5 class=""><b>तत्काल प्रभाव से सख़्ती से कार्रवाई की अपील</b></h5><p class="">इस मामले में सिख कौम के धार्मिक शख्सियतों से यह विनम्र अपील की गई थी कि कथित सिख अमरजीत चावला को तत्काल प्रभाव से सिख धर्म से निष्कासित किया जाए। अमरजीत चावला ने कथित तौर पर पराई स्त्री की इज्जत लूटने जैसा बज्र गुनाह किया है, जबकि वह उस समय धार्मिक पद पर थे।<br>इसलिए यह समय है कि SGPC और पावन श्री अकाल तख्त साहिब की मर्यादा को बचाया जाए। आशा है कि जल्द ही उन्हें हमेशा के लिए कौम से निष्कासित किया जाएगा। कृपया इस वीडियो में हुई बातचीत को सुना जाए और तत्काल प्रभाव से सख्ती से कार्रवाई की जाए।</p><p class=""><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="pa" dir="ltr"&gt;✍️&lt;a href="https://x.com/J_SriAkalTakht?ref_src=twsrc^tfw"&gt;@J_SriAkalTakht&lt;/a&gt; &lt;a href="https://x.com/SGPCPresident?ref_src=twsrc^tfw"&gt;@SGPCPresident&lt;/a&gt; &lt;br&gt;ਸਿੱਖ ਕੌਮ ਦੀਆਂ ਦੋਹਾਂ ਧਾਰਮਿਕ ਸਖਸ਼ੀਅਤਾਂ ਨੂੰ ਬੇਨਤੀ ਹੈ ਕਿ ਅਖੌਤੀ ਸਿੱਖ ਅਮਰਜੀਤ ਚਾਵਲਾ ਨੂੰ ਤੁਰੰਤ ਪ੍ਰਭਾਵ ਤੋਂ ਸਿੱਖ ਧਰਮ ਵਿਚੋਂ ਛੇਕਿਆ ਜਾਵੇ ਜੀ।&lt;br&gt;ਅਮਰਜੀਤ ਚਾਵਲਾ ਨੇ ਪਰ ਇਸਤਰੀ ਦੀ ਪੱਤ ਲੁਟਣ ਜਿਹਾ ਬੱਜਰ ਗੁਨਾਹ ਕੀਤਾ ਹੈ ਜਦੋਂ ਕਿ ਉਹ ਧਾਰਮਿਕ ਅਹੁਦੇ ਉਪਰ ਸਨ।&lt;br&gt; ਇਸ ਵਾਸਤੇ ਐਸਜੀਪੀਸੀ… &lt;a href="https://t.co/rGQjuJ2tER"&gt;pic.twitter.com/rGQjuJ2tER&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; GURDEEP SINGH MATHARU (@GurdeepSinghDau) &lt;a href="https://x.com/GurdeepSinghDau/status/2101462940344107147?ref_src=twsrc^tfw"&gt;September 20, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><h5 class=""></h5><h5 class=""><b>क्या है पूरा विवाद?</b></h5><p>यह मामला अमरजीत सिंह चावला के खिलाफ एक महिला की शिकायत पर दर्ज मामले के बाद सामने आया। आनंदपुर साहिब पुलिस ने <a href="https://www.tribuneindia.com/news/top-headlines/rape-case-registered-against-sad-leader-amarjit-singh-chawla-resigns-from-party-sgpc-posts/?utm_source=chatgpt.com" target="_blank">21 अगस्त को चावला के खिलाफ मामला दर्ज</a> किया था। शिकायत में महिला ने यौन शोषण, धमकी और दबाव सहित गंभीर आरोप लगाए थे। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64, 127(2) और 351(2) का उल्लेख किया गया था।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">रिपोर्ट के अनुसार, शिकायतकर्ता पंजाब के संगरूर जिले की रहने वाली है और वर्तमान में बहरीन में रहती है। महिला ने आनंदपुर साहिब की एक सराय में खुद को रोके जाने और दुष्कर्म का आरोप लगाया था। इन आरोपों की जांच पुलिस कर रही है।</span></p><h5 class=""><b>चावला ने आरोपों को बताया था झूठा</b></h5><p>अमरजीत सिंह चावला ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को खारिज किया था। उन्होंने इसे झूठा और साजिश बताते हुए कहा था कि वह अदालत के सामने अपनी बेगुनाही साबित करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने SGPC सदस्यता और शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद समेत अपने राजनीतिक और धार्मिक पदों से इस्तीफा दे दिया था।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">18 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, FIR दर्ज होने के लगभग एक महीने बाद भी चावला की गिरफ्तारी नहीं हुई थी और रोपड़ पुलिस ने कहा था कि जांच जारी है तथा सबूत जुटाए जा रहे हैं।</span></p><p><img src="https://media.gtcbharat.com/wp-content/uploads/2026/09/Rape-Case_6179831fe4c52f68e99fe8008d277c3f_1151X854.webp" style="width: 910.383px;"><span style="font-size: 1rem;"><br></span></p><h5 class=""><b>ज्ञानी मलकीत सिंह पर क्या कार्रवाई हुई थी?</b></h5><p>इस मामले में श्री अकाल तख्त साहिब के अतिरिक्त मुख्य ग्रंथी ज्ञानी मलकीत सिंह और तख्त श्री केसगढ़ साहिब में तैनात चालक मोहन सिंह के नाम भी शिकायत में सामने आए थे। <a href="https://www.hindustantimes.com/cities/chandigarh-news/rape-case-against-sad-leader-woman-held-captive-raped-at-anandpur-sahib-serai-says-fir-101789672414143.html?utm_source=chatgpt.com" target="_blank">हिन्दुस्तान टाइम्स के अनुसार,</a> शिकायतकर्ता ने दोनों पर अश्लील संदेश भेजने के आरोप लगाए थे, हालांकि उन्हें FIR में आरोपी के रूप में नामित नहीं किया गया था।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">इसके बाद SGPC ने 17 सितंबर को दोनों कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था और मामले की विस्तृत जांच SGPC के फ्लाइंग विभाग को सौंपी थी। SGPC के मुख्य सचिव कुलवंत सिंह मन्नन ने कहा था कि संस्था किसी ऐसे कर्मचारी को नहीं बख्शेगी जिसका नाम अनैतिक गतिविधियों से जुड़ा पाया जाए।</span></p><h5 class=""><b>अब अकाल तख्त के फैसले का असर</b></h5><p>20 सितंबर को सुनाए गए फैसले के बाद अमरजीत सिंह चावला और ज्ञानी मलकीत सिंह के संबंध में अकाल तख्त साहिब की ओर से धार्मिक और संस्थागत स्तर पर कड़ा निर्णय सामने आया है। हालांकि, चावला के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले में आरोपों की कानूनी जांच और न्यायिक प्रक्रिया अलग से जारी रहेगी। किसी व्यक्ति के खिलाफ FIR या धार्मिक कार्रवाई अपने आप में अदालत द्वारा दोष सिद्ध होने के समान नहीं है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ श्री अकाल तख्त साहिब का बड़ा फैसला: अमरजीत चावला और ज्ञानी मलकीत सिंह पंथ से खारिज ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/harmeet-singh-kalka-sgpc-serai-allegations-6463 ]]></guid><title><![CDATA[ SGPC पर हरमीत सिंह कालका के गंभीर आरोप, सराय में महिलाओं को रखने को लेकर उठाए सवाल ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/harmeet-singh-kalka-sgpc-serai-allegations-6463 ]]></link><pubDate><![CDATA[Sun, 20 Sep 2026 10:59:25 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ नई दिल्ली: दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) के प्रधान हरमीत सिंह कालका ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने SGPC के ऊंचे पदों पर बैठे लोगों की कथ ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली: </b><span style="font-size: 1rem;">दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) के प्रधान हरमीत सिंह कालका ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने SGPC के ऊंचे पदों पर बैठे लोगों की कथित चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि मौजूदा घटनाक्रम से पूरी सिख कौम का सिर शर्म से झुक गया है।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">कालका ने कहा कि SGPC में कथित तौर पर हुए <b>“कुकर्म” और “दुष्कर्म”</b> पर वह विस्तार से नहीं जाना चाहते, लेकिन सवाल यह है कि संस्था में जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग इन मामलों पर खामोश क्यों हैं।</span></p><p><span style="font-size: 1rem;">हरमीत सिंह कालका ने SGPC के साथ-साथ दिल्ली में बैठे <b>अकाली दल के नेताओं परमजीत सिंह सरना और मनजीत सिंह जीके की चुप्पी पर भी सवाल उठाया।</b>&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">उन्होंने कहा कि वह सरना साहब के पुराने बयान को याद करते हैं, जिसमें कथित तौर पर <b>SGPC के दफ्तरों में बेड लगाए जाने</b> की बात कही गई थी। कालका ने आरोप लगाया कि आज SGPC से जुड़ी कुछ सरायों में भी इसी तरह की गतिविधियां होने के आरोप सामने आ रहे हैं।</span></p><h5 class=""><b>गुरु साहिब के नाम पर बनी सराय को लेकर गंभीर आरोप</b></h5><p>कालका ने दावा किया कि गुरु गोविंद सिंह और गुरु अर्जन देव के नाम पर बनी सरायों का इस्तेमाल कथित तौर पर गलत गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां महिलाओं को लाकर रखा जाता है और उनके साथ गलत काम किए जाने की शिकायतें हैं।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने कहा कि यदि इस तरह की घटनाएं SGPC से जुड़े संस्थानों में होती हैं तो जिम्मेदार लोगों को गुरु के सामने जाने और जवाब देने की स्थिति पर विचार करना चाहिए।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस बयान से नहीं होती है। संबंधित SGPC पदाधिकारियों या अन्य पक्षों की प्रतिक्रिया सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।</span></p><p>&lt;iframe src="https://www.facebook.com/plugins/video.php?height=476&amp;href=https://www.facebook.com/reel/1072588648840753/&amp;show_text=false&amp;width=476&amp;t=0" width="476" height="476" style="border:none;overflow:hidden" scrolling="no" frameborder="0" allowfullscreen="true" allow="autoplay; clipboard-write; encrypted-media; picture-in-picture; web-share" allowFullScreen="true"&gt;&lt;/iframe&gt;</p><h5 class=""><b>‘उस महिला को एक महीने तक वहां क्यों रखा गया?’</b></h5><p>हरमीत सिंह कालका ने एक महिला को कथित तौर पर लंबे समय तक सराय में रखे जाने को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि जिस महिला को लेकर सवाल उठ रहे हैं, उसे कथित तौर पर एक महीने तक वहां क्यों रखा गया।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में SGPC के जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को सामने आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और यह बताना चाहिए कि संबंधित स्थान पर क्या हुआ था तथा वहां किसी महिला को इतने लंबे समय तक रखने की जरूरत क्यों पड़ी।</span></p><p>&lt;iframe src="https://www.facebook.com/plugins/video.php?height=476&amp;href=https://www.facebook.com/reel/29052465141014232/&amp;show_text=false&amp;width=267&amp;t=0" width="267" height="476" style="border:none;overflow:hidden" scrolling="no" frameborder="0" allowfullscreen="true" allow="autoplay; clipboard-write; encrypted-media; picture-in-picture; web-share" allowFullScreen="true"&gt;&lt;/iframe&gt;</p><h5 class=""><b>आरोपों पर SGPC की प्रतिक्रिया अहम</b></h5><p>कालका के बयान में SGPC की कार्यप्रणाली, सरायों के इस्तेमाल और कथित अनियमितताओं को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं। इन आरोपों की वास्तविक स्थिति <b>संबंधित जांच, दस्तावेजों और SGPC की आधिकारिक प्रतिक्रिया से ही स्पष्ट हो सकती है।</b>&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के मौजूदा अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका इससे पहले भी सिख संस्थाओं और दिल्ली की सिख राजनीति से जुड़े मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से अपनी राय रखते रहे हैं। हालिया रिपोर्टों में भी उन्हें DSGMC के अध्यक्ष के रूप में उद्धृत किया गया है।</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ SGPC पर हरमीत सिंह कालका के गंभीर आरोप, सराय में महिलाओं को रखने को लेकर उठाए सवाल ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/rekha-gupta-punjab-bjp-government-pm-modi-6458 ]]></guid><title><![CDATA[ पंजाब में BJP सरकार बनेगी, PM मोदी के नेतृत्व में लोगों को मिलेगा हक: रेखा गुप्ता ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/rekha-gupta-punjab-bjp-government-pm-modi-6458 ]]></link><pubDate><![CDATA[Sat, 19 Sep 2026 16:30:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ फतेहगढ़ साहिब, पंजाब: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शनिवार को पंजाब में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बनने का दावा किया। फतेहगढ़ साहिब में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>फतेहगढ़ साहिब, पंजाब:</b> दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शनिवार को पंजाब में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बनने का दावा किया। फतेहगढ़ साहिब में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य के लोगों को उनके अधिकार और सरकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित किया जाएगा।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">रेखा गुप्ता पंजाब बीजेपी की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ के फतेहगढ़ साहिब चरण के मौके पर बोल रही थीं। बीजेपी की यह 13 दिवसीय यात्रा राज्य के सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरने वाली है।</span></p><p>पत्रकारों से बातचीत में रेखा गुप्ता ने पंजाब की मौजूदा सरकार पर लोगों, किसानों, युवाओं और परिवारों के साथ अन्याय करने का आरोप लगाया।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने कहा, “जैसे-जैसे यह संघर्ष आगे बढ़ रहा है और पंजाब का हर शहर और परिवार इसमें शामिल हो रहा है, लोगों को लूटने वाली और किसानों, युवाओं, माताओं तथा परिवारों के साथ अन्याय करने वाली सरकार को निश्चित रूप से जाना होगा।”&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">उन्होंने आगे कहा कि पंजाब में बीजेपी की सरकार बनेगी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘डबल इंजन’ सरकार किसानों के सम्मान, युवाओं के रोजगार और महिलाओं की समृद्धि के लिए काम करेगी।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;&lt;a href="https://x.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#WATCH&lt;/a&gt; | Punjab: Delhi CM Rekha Gupta says, &amp;quot;As this struggle unfolds and every city and family in Punjab joins it, the government that is looting the people—and is guilty of wronging farmers, the youth, mothers, and families—will certainly have to go. A BJP government will be… &lt;a href="https://t.co/MffHnxu6F2"&gt;pic.twitter.com/MffHnxu6F2&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; ANI (@ANI) &lt;a href="https://x.com/ANI/status/2101223945710280720?ref_src=twsrc^tfw"&gt;September 19, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><h5 class=""><b>117 विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंचेगी बीजेपी की यात्रा</b></h5><p>बीजेपी ने पंजाब में नशे के मुद्दे को लेकर 13 दिवसीय ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ शुरू की है। पार्टी के अनुसार, चार अलग-अलग यात्राएं राज्य में करीब 4,000 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंचेंगी।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">फतेहगढ़ साहिब से शुरू होने वाली दूसरी यात्रा 24 विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरेगी। इसके बाद चारों यात्राएं 30 सितंबर को जालंधर में एक रैली के लिए जुटेंगी, जिसे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) संबोधित करने वाले हैं।</span></p><h5 class=""><b>रवनीत सिंह बिट्टू ने भी लगाए गंभीर आरोप</b></h5><p class="grey-bg-red"><b><i>रेखा गुप्ता की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब बीजेपी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने एक दिन पहले दावा किया था कि पंजाब में उनकी गाड़ी के काफिले को प्रदर्शनकारियों ने घेर लिया और वाहनों की खिड़कियों को नुकसान पहुंचाया गया।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">बिट्टू ने दावा किया था कि कुछ प्रदर्शनकारियों के पास हथियार भी थे। उन्होंने कहा कि वह नशे के खिलाफ यात्रा निकालने जा रहे थे और करीब 500 लोग वहां मौजूद थे। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सुरक्षा में करीब 100 सुरक्षाकर्मी थे।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, बिट्टू ने बटाला में कथित घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए और मामले की जांच की मांग की थी।</span></i></b></p><h5 class=""><b>पंजाब चुनाव से पहले नशे का मुद्दा केंद्र में</b></h5><p>बीजेपी की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच नशे का मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में है। पार्टी ने अपनी यात्रा को नशे के खिलाफ जनअभियान के रूप में पेश किया है, जबकि विपक्षी दल बीजेपी के अभियान के राजनीतिक उद्देश्य पर सवाल उठा रहे हैं।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, बीजेपी ने पंजाब के छह जिलों—अमृतसर, गुरदासपुर, तरनतारन, फिरोजपुर, फाजिल्का और लुधियाना—को नशे के मुद्दे से जुड़े ‘अल्ट्रासेंसिटिव’ जिलों के रूप में चिन्हित किए जाने का भी मुद्दा उठाया है।</span></p><p>बीजेपी के अभियान के बीच आम आदमी पार्टी ने इसे राजनीतिक अभियान बताते हुए आलोचना की है। AAP प्रवक्ता बलतेज पन्नू ने बीजेपी से पंजाब में नशे के मुद्दे पर उसके अपने पुराने राजनीतिक रिकॉर्ड को लेकर सवाल किए हैं।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब में BJP सरकार बनेगी, PM मोदी के नेतृत्व में लोगों को मिलेगा हक: रेखा गुप्ता ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/waris-punjab-de-bjp-alliance-6447 ]]></guid><title><![CDATA[ Punjab Election 2027: वारिस पंजाब दे ने BJP से गठबंधन की अटकलों पर लगाया ब्रेक, कहा- ‘सत्ता नहीं, संगत की आवाज प्राथमिकता’ ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/waris-punjab-de-bjp-alliance-6447 ]]></link><pubDate><![CDATA[Fri, 18 Sep 2026 19:50:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ चंडीगढ़: पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राज्य की सियासत में क्षेत्रीय और पंथिक राजनीति को लेकर हलचल तेज है। अमृतपाल सिंह के नेतृत्व वाले वारिस पंजाब दे से जुड़े नेता मनप्रीत सिंह अयाली ने आगामी चुन ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>चंडीगढ़:</b> पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राज्य की सियासत में क्षेत्रीय और पंथिक राजनीति को लेकर हलचल तेज है। अमृतपाल सिंह के नेतृत्व वाले वारिस पंजाब दे से जुड़े नेता मनप्रीत सिंह अयाली ने आगामी चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ गठबंधन की चर्चाओं पर फिलहाल विराम लगा दिया है। अयाली ने कहा कि पार्टी किसी भी मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टी के साथ गठबंधन को लेकर फैसला अभी नहीं कर रही है और भविष्य में ऐसा कोई निर्णय हुआ तो उसमें ‘संगत’ की राय अहम होगी।</p><p>मनप्रीत अयाली के मुताबिक, मौजूदा समय में BJP के साथ चुनावी समझौते का कोई सवाल नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि वारिस पंजाब दे का समर्थन आधार मुख्य रूप से ग्रामीण पंजाब और युवाओं में है और पार्टी ऐसे किसी फैसले से बचना चाहती है, जिससे उसके समर्थकों के बीच असहमति पैदा हो।</p><h5 class=""><b>BJP के साथ गठबंधन पर क्या बोले अयाली?</b></h5><p>अयाली ने कहा कि यदि वारिस पंजाब दे और BJP के बीच चुनावी समझौता होता है तो ग्रामीण इलाकों में पार्टी को राजनीतिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। उनके मुताबिक, ग्रामीण पंजाब में BJP को लेकर मतदाताओं के एक हिस्से में अभी भी असहमति है।</p><p>उन्होंने किसानों से जुड़े मुद्दों और सिख समुदाय से संबंधित विभिन्न विषयों का हवाला देते हुए कहा कि इन मुद्दों को लेकर BJP के प्रति ग्रामीण क्षेत्रों में भरोसे की समस्या बनी हुई है। ये अयाली के राजनीतिक आकलन और दावे हैं।</p><p>अयाली ने यह भी कहा कि पार्टी की राजनीतिक दिशा उसके समर्थक वर्ग और ‘संगत’ की भावनाओं को ध्यान में रखकर तय की जाएगी। उनका कहना है कि संगठन के लिए ग्रामीण युवा एक महत्वपूर्ण आधार हैं।</p><h5 class=""><b>‘पार्टी का मुख्य एजेंडा सत्ता हासिल करना नहीं’</b></h5><p>वारिस पंजाब दे की चुनावी रणनीति को लेकर अयाली ने एक महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी का मुख्य उद्देश्य केवल सत्ता हासिल करना नहीं है। उनके मुताबिक, संगठन सिख संगत की आवाज, उनकी भावनाओं और विचारधारा को राजनीतिक स्तर पर उठाने तथा पंजाब की तरक्की के लिए काम करने को प्राथमिकता देता है।</p><p>हालिया बयानों में भी अयाली ने कहा है कि संगठन का उद्देश्य किसी पद या सत्ता के लिए समझौता करना नहीं, बल्कि पंजाब और पंथ से जुड़े मुद्दों को केंद्र में रखना है। उन्होंने एक क्षेत्रीय राजनीतिक विकल्प खड़ा करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है।</p><p>जुलाई में दिए एक इंटरव्यू में अयाली ने 2027 के लिए पंथिक मुद्दों और हिंदू-सिख एकता को पार्टी के प्रमुख एजेंडे में बताया था। उन्होंने आर्थिक विकास और पंजाब को सभी समुदायों के लिए सुरक्षित बनाने की बात भी कही थी।</p><h5 class=""><b>गठबंधन का फैसला कौन करेगा?</b></h5><p>अयाली के बयान के मुताबिक, यदि चुनाव से पहले या चुनाव के बाद किसी मुख्यधारा की पार्टी के साथ गठबंधन की स्थिति बनती है, तो अंतिम फैसला पार्टी की ‘संगत’ की राय के आधार पर किया जाएगा।</p><p>इसका मतलब यह है कि वारिस पंजाब दे फिलहाल किसी बड़े राजनीतिक दल के साथ औपचारिक चुनावी समझौते की घोषणा करने की स्थिति में नहीं है। संगठन ने अपने राजनीतिक फैसलों में समर्थकों और पंथिक विचारधारा को प्राथमिक आधार बनाए रखने का संकेत दिया है।</p><p>वहीं BJP की ओर से पंजाब चुनाव को लेकर हालिया स्थिति अलग है। BJP के पंजाब प्रभारी सतीश पूनिया ने अगस्त में कहा था कि पार्टी 2027 विधानसभा चुनाव में सभी 117 सीटों पर अपने दम पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है और वारिस पंजाब दे समेत अन्य पंथिक समूहों के साथ गठबंधन से इनकार किया था।</p><h5 class=""><b>2027 के चुनाव में वारिस पंजाब दे की तैयारी</b></h5><p>वारिस पंजाब दे ने पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए अपनी राजनीतिक गतिविधियां बढ़ा दी हैं। अगस्त में पार्टी ने फरीदकोट में रैली के जरिए 2027 के लिए अभियान की शुरुआत की थी। संगठन की ओर से चुनावी मैदान में उम्मीदवार उतारने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।</p><p>जून 2026 में डाखा के विधायक मनप्रीत सिंह अयाली के संगठन से जुड़ने के बाद वारिस पंजाब दे को पंजाब की मुख्यधारा की चुनावी राजनीति में एक निर्वाचित विधायक का अनुभव भी मिला।</p><p>ऐसे में 2027 का चुनाव केवल बड़े दलों के बीच मुकाबले तक सीमित नहीं रहेगा। वारिस पंजाब दे जैसे क्षेत्रीय और पंथिक संगठनों की भूमिका भी चुनावी समीकरण का हिस्सा बन सकती है। हालांकि, पार्टी कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी, किन दलों से भविष्य में तालमेल करेगी और उसका अंतिम चुनावी एजेंडा क्या होगा, इस पर आगे के फैसले महत्वपूर्ण होंगे।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ Punjab Election 2027: वारिस पंजाब दे ने BJP से गठबंधन की अटकलों पर लगाया ब्रेक, कहा- ‘सत्ता नहीं, संगत की आवाज प्राथमिकता’ ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-da-hike-8-percent-6446 ]]></guid><title><![CDATA[ Punjab DA Hike: सरकारी कर्मचारियों के DA में 8% बढ़ोतरी पर बनी सहमति, अक्टूबर की सैलरी से मिल सकता है फायदा ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-da-hike-8-percent-6446 ]]></link><pubDate><![CDATA[Fri, 18 Sep 2026 18:59:37 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ चंडीगढ़: पंजाब के सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते यानी Dearness Allowance (DA) को लेकर बड़ी राहत की खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री भगवंत मान और कर्मचारी यूनियनों के प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक में D ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>चंडीगढ़:</b> पंजाब के सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते यानी Dearness Allowance (DA) को लेकर बड़ी राहत की खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री भगवंत मान और कर्मचारी यूनियनों के प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक में DA में कुल 8% बढ़ोतरी देने पर सहमति बनी है। बढ़ा हुआ DA कर्मचारियों को दो किस्तों में दिया जाएगा। प्रत्येक किस्त 4% की होगी।</p><p>बैठक के बाद सरकार और कर्मचारी यूनियनों के प्रतिनिधियों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें मंत्री अमन अरोड़ा ने बताया कि DA बढ़ाने के मुद्दे पर सहमति बन गई है। प्रस्ताव के मुताबिक कर्मचारियों को 8% की बढ़ोतरी दो चरणों में मिलेगी। इससे सरकारी कर्मचारियों के कुल DA में बढ़ोतरी होगी और उनके मासिक वेतन पर इसका असर पड़ेगा।</p><h5 class=""><b>अक्टूबर की Salary में मिल सकता है बढ़े DA का लाभ</b></h5><p>कर्मचारियों के लिए सबसे अहम बात यह है कि बढ़ा हुआ DA अक्टूबर से लागू किए जाने की बात कही गई है। ऐसे में अक्टूबर की सैलरी में कर्मचारियों को बढ़े हुए महंगाई भत्ते का लाभ मिलने की संभावना है।</p><p>सरकार के इस फैसले से पंजाब के सरकारी खजाने पर करीब 248 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ने का अनुमान है। DA में बढ़ोतरी लंबे समय से कर्मचारी संगठनों की प्रमुख मांगों में शामिल रही है।</p><p>अमन अरोड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने कर्मचारी संगठनों की मांगों को गंभीरता से सुना है। सरकार और कर्मचारियों के बीच बातचीत का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। करीब दो सप्ताह बाद मुख्यमंत्री के साथ दोबारा बैठक प्रस्तावित है।</p><h5 class=""><b>DA के साथ दूसरे मुद्दों पर भी हुई चर्चा</b></h5><p>बैठक में सिर्फ महंगाई भत्ते का मुद्दा ही नहीं उठा। कर्मचारी यूनियनों ने कई अन्य लंबित मांगों को भी सरकार के सामने रखा। सरकार की ओर से इन मामलों पर बातचीत और समीक्षा के जरिए समाधान तलाशने की बात कही गई।</p><p>कर्मचारी संगठनों ने 17 जुलाई 2020 के बाद केंद्रीय वेतनमान के आधार पर भर्ती किए गए कर्मचारियों को पंजाब सरकार का वेतनमान देने की मांग रखी। मुख्यमंत्री ने इस मामले की जांच कराने की बात कही।</p><p>इसके अलावा प्रोबेशन पीरियड के दौरान कर्मचारियों को मिलने वाले 17 हजार और 19 हजार रुपये के वेतन की व्यवस्था की समीक्षा का मुद्दा भी बैठक में उठा।</p><h5 class=""><b>Old Pension Scheme की मांग भी सामने आई</b></h5><p>बैठक में कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) लागू करने की मांग भी दोहराई। यूनियन नेताओं का कहना है कि सरकार की ओर से इस संबंध में पहले आश्वासन दिया गया था। सरकार ने बताया कि इस विषय पर विचार किया जा रहा है।</p><p>इसके साथ ही कर्मचारियों ने हर महीने काटे जाने वाले 200 रुपये के Professional Tax को खत्म करने की मांग भी रखी।</p><h5 class=""><b>कच्चे कर्मचारियों और कंप्यूटर शिक्षकों की मांग</b></h5><p>कर्मचारी संगठनों ने कच्चे कर्मचारियों के वेतन से जुड़ा मुद्दा भी उठाया। उनकी मांग है कि उन्हें सिर्फ बेसिक पे के आधार पर भुगतान करने के बजाय संबंधित भत्तों के साथ पूरा वेतन दिया जाए।</p><p>वहीं, नियमित किए जा चुके कंप्यूटर शिक्षकों को संबंधित विभाग में शामिल करने की मांग भी बैठक में रखी गई। इन मांगों पर सरकार ने विचार करने की बात कही है।</p><p>इसके अलावा मिड-डे मील वर्करों के वेतन का मुद्दा भी सामने आया। यूनियन नेताओं ने कहा कि 3,000 रुपये के मानदेय में काम करना मुश्किल है और इसमें संशोधन किया जाना चाहिए। सरकार की ओर से इस मामले में भी सकारात्मक रुख अपनाने की बात कही गई।</p><h5 class=""><b>अगली बैठक अक्टूबर के पहले सप्ताह में संभव</b></h5><p>सांझा मुलाजिम फ्रंट के कनवीनर सतीश राणा के मुताबिक DA का मामला अदालत में भी चल रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने 8% DA देने पर सहमति जताई है और सरकार की ओर से जो लाभ मिलेगा, कर्मचारी उसे स्वीकार करेंगे। बाकी मांगों और कानूनी मामलों को उनके स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा।</p><p>सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच अगली महत्वपूर्ण बैठक अक्टूबर के पहले सप्ताह में होने की संभावना बताई गई है। इससे पहले DA की बढ़ोतरी लागू होने के बाद कर्मचारियों की सैलरी में इसका वास्तविक असर दिखाई देगा।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ Punjab DA Hike: सरकारी कर्मचारियों के DA में 8% बढ़ोतरी पर बनी सहमति, अक्टूबर की सैलरी से मिल सकता है फायदा ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/ravneet-bittu-convoy-attack-6440 ]]></guid><title><![CDATA[ Punjab Politics: रवनीत बिट्टू के काफिले पर हमले का आरोप, बोले- ‘मुझे कुछ हुआ तो CM मान और DGP जिम्मेदार’ ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/ravneet-bittu-convoy-attack-6440 ]]></link><pubDate><![CDATA[Fri, 18 Sep 2026 13:20:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ पंजाब में भारतीय जनता पार्टी की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ शुरू होने से पहले राजनीतिक माहौल गरमा गया है। BJP नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने आरोप लगाया है कि पठानकोट जाते समय उनके काफ ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>पंजाब </b>में भारतीय जनता पार्टी की ‘<b>नशा मुक्त पंजाब यात्रा</b>’ शुरू होने से पहले राजनीतिक माहौल गरमा गया है। BJP नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने आरोप लगाया है कि पठानकोट जाते समय उनके काफिले को निशाना बनाया गया। बिट्टू के मुताबिक, कुछ लोगों ने उनके काफिले पर अंडे और टमाटर फेंके और उनके सुरक्षा दल ने तीन लोगों को पकड़ा, जिनका कथित तौर पर आम आदमी पार्टी से संबंध है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।</p><p>बिट्टू ने इस घटना के बाद एक वीडियो जारी कर पंजाब सरकार और पुलिस प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें कुछ होता है तो पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और DGP जिम्मेदार होंगे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे स्थानीय AAP विधायक शैरी कलसी का हाथ है। यह आरोप भी फिलहाल बिट्टू के बयान पर आधारित है।</p><h5 class=""><b>पठानकोट जाते समय क्या हुआ?</b></h5><p>मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, बिट्टू BJP की नशा मुक्त पंजाब यात्रा के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पठानकोट जा रहे थे। रास्ते में बटाला के पास घासीतपुर गांव के आसपास उनके काफिले को कथित तौर पर रोका गया और प्रदर्शन कर रहे लोगों की ओर से अंडे और टमाटर फेंके गए। कुछ रिपोर्टों में पत्थर फेंके जाने का भी दावा किया गया है।</p><p>बिट्टू के कार्यालय के अनुसार, उनके सुरक्षा दल ने तीन लोगों को पकड़ा। BJP नेता ने दावा किया कि इन लोगों के AAP से संबंध हैं और आरोप लगाया कि उन्हें उनकी यात्रा में शामिल होने से रोकने के लिए भेजा गया था। हालांकि, इन व्यक्तियों की राजनीतिक संबद्धता और घटना में उनकी भूमिका की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।</p><h5 class=""><b>‘मुझे कुछ हुआ तो CM और DGP जिम्मेदार’</b></h5><p>घटना के बाद बिट्टू ने वीडियो संदेश में पंजाब के मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक को अपनी सुरक्षा के लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि अभी तक कोई SSP या अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा है।</p><p>बिट्टू ने इस घटना को राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा और लोकतांत्रिक गतिविधियों से जोड़ते हुए तत्काल जांच की मांग की। उनके कार्यालय ने भी पंजाब सरकार से मामले की जांच कराने और राजनीतिक कार्यकर्ताओं व नेताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।</p><p>&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;BJP leader &amp;amp; former Union Minister Ravneet Singh Bittu was on his way to Pathankot to attend the BJP Yatra, which will be launched today by BJP National President Nitin Nabin, when his cavalcade was attacked, says Ravneet Bittu&amp;#39;s office. &lt;br&gt;&lt;br&gt;According to the former Union Minister&amp;#39;s…&lt;/p&gt;&amp;mdash; ANI (@ANI) &lt;a href="https://x.com/ANI/status/2100823515431887107?ref_src=twsrc^tfw"&gt;September 18, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</p><h5 class=""><b>BJP की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ पर विवाद</b></h5><p>यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब पंजाब BJP ने राज्यव्यापी ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ शुरू की है। पार्टी के मुताबिक, अभियान चार अलग-अलग मार्गों से चलेगा और करीब 4,000 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंचेगा। इसका समापन 30 सितंबर को जालंधर में प्रस्तावित है।</p><p>पहली यात्रा 18 सितंबर को पठानकोट से शुरू की गई। BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने इसका उद्घाटन किया। अगले चरणों में फतेहगढ़ साहिब, फाजिल्का और तलवंडी साबो से भी यात्राएं शुरू होनी हैं। पार्टी ने नशे के अलावा कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार को भी अभियान के प्रमुख मुद्दों में शामिल किया है।</p><p>दिलचस्प बात यह है कि यात्रा शुरू होने से पहले पंजाब BJP ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पंजाब पुलिस से संपर्क भी किया था। प्रदेश BJP नेतृत्व ने DGP से मुलाकात कर यात्रा के दौरान पर्याप्त सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन की मांग की थी।</p><h5 class=""><b>नशे के मुद्दे पर BJP का AAP पर हमला</b></h5><p>BJP इस यात्रा को नशे के खिलाफ जनजागरूकता अभियान के तौर पर पेश कर रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि पंजाब के युवाओं और नशे से प्रभावित परिवारों को इस अभियान से जोड़ा जाएगा।</p><p>BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने भी पंजाब में नशे की समस्या को लेकर राजनीतिक दलों पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ दलों ने सत्ता की राजनीति के लिए ड्रग्स के मुद्दे का इस्तेमाल किया और नशे के कारोबार को राजनीतिक संरक्षण मिलने की बात कही। ये BJP की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं।</p><p>इससे पहले चंडीगढ़ में BJP के ‘मावां मांगदियां जवाब’ कार्यक्रम में नशे से प्रभावित परिवारों ने अपनी आपबीती साझा की थी। पार्टी ने इन्हीं अनुभवों को यात्रा के अभियान से जोड़ने की बात कही है।</p><h5 class=""><b>घटना से पंजाब की राजनीति में बढ़ा तनाव</b></h5><p>रवनीत बिट्टू के काफिले को लेकर लगाए गए आरोपों ने BJP और AAP के बीच राजनीतिक टकराव को और बढ़ा दिया है। BJP की ओर से जहां घटना को राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा का गंभीर मुद्दा बताया जा रहा है, वहीं इस मामले में पुलिस जांच से यह स्पष्ट होना बाकी है कि वास्तव में घटना के दौरान क्या हुआ, कौन लोग इसमें शामिल थे और उनकी राजनीतिक संबद्धता क्या थी।</p><p>फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि बिट्टू के लगाए आरोपों की जांच में क्या सामने आता है। यदि पुलिस जांच में किसी साजिश या हमले की पुष्टि होती है, तो मामले की तस्वीर और स्पष्ट होगी। दूसरी ओर, नशा मुक्त पंजाब यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बनी हुई है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ Punjab Politics: रवनीत बिट्टू के काफिले पर हमले का आरोप, बोले- ‘मुझे कुछ हुआ तो CM मान और DGP जिम्मेदार’ ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-nasha-mukt-yatra-6439 ]]></guid><title><![CDATA[ Punjab BJP Nasha Mukt Yatra: ‘मुफ्त योजनाएं नहीं, चिट्टे से आजादी चाहिए’, 13 दिन की यात्रा से पहले छलका परिवारों का दर्द ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-nasha-mukt-yatra-6439 ]]></link><pubDate><![CDATA[Fri, 18 Sep 2026 13:00:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ पंजाब में नशे के मुद्दे को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने शुक्रवार से अपनी ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ शुरू कर दी है। 13 दिन तक चलने वाला यह अभियान राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों से होकर गुजरेगा। चार अलग-अल ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>पंजाब</b> में नशे के मुद्दे को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने शुक्रवार से अपनी ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ शुरू कर दी है। 13 दिन तक चलने वाला यह अभियान राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों से होकर गुजरेगा। चार अलग-अलग यात्राओं के जरिए करीब 4,000 किलोमीटर की दूरी तय करने की योजना है। यात्रा की शुरुआत से पहले चंडीगढ़ में आयोजित ‘मावां मांगदियां जवाब’ कार्यक्रम में नशे की समस्या से प्रभावित 50 से अधिक परिवारों ने अपने अनुभव साझा किए।</p><p>इस दौरान परिवारों ने नशे के कारण घरों पर पड़े आर्थिक और सामाजिक असर की बात रखी। एक प्रभावित मां ने कहा कि परिवारों को मुफ्त योजनाओं से ज्यादा जरूरत अपने बच्चों को नशे से बचाने की है। उनका कहना था, “हमें मुफ्त की योजनाएं नहीं चाहिए, हमें चिट्टे से आजादी चाहिए।”</p><h5 class=""><b>चार रास्तों से पूरे पंजाब तक पहुंचने की तैयारी</b></h5><p>BJP की योजना के मुताबिक चारों यात्राएं अलग-अलग हिस्सों से शुरू होकर राज्य के अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों को कवर करेंगी। पहली यात्रा 18 सितंबर को पठानकोट के माधोपुर सुजानपुर स्थित एकता स्थल से शुरू हुई, जिसे BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने हरी झंडी दिखाई।</p><p>दूसरी यात्रा 19 सितंबर को फतेहगढ़ साहिब, तीसरी 20 सितंबर को फाजिल्का और चौथी 21 सितंबर को तलवंडी साबो से शुरू होने वाली है। चारों यात्राएं मिलकर लगभग 4,000 किलोमीटर का सफर तय करेंगी और सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंचने का कार्यक्रम है।</p><p>यात्राओं का समापन 30 सितंबर को जालंधर में प्रस्तावित है। BJP ने बताया है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समापन कार्यक्रम में संबोधित कर सकते हैं।</p><h5 class=""><b>‘मावां मांगदियां जवाब’ में सामने आया परिवारों का दर्द</b></h5><p>यात्रा शुरू होने से पहले चंडीगढ़ में आयोजित कार्यक्रम में पंजाब के अलग-अलग हिस्सों से आए उन परिवारों ने अपनी बातें रखीं, जो नशे की लत या उससे हुई मौतों से प्रभावित रहे हैं।</p><p>कार्यक्रम का उद्देश्य नशे की समस्या से प्रभावित परिवारों को अपनी बात सार्वजनिक तौर पर रखने का मंच देना बताया गया। परिवारों के अनुभवों में इलाज का खर्च, परिवार की आर्थिक स्थिति पर असर और युवाओं के भविष्य को लेकर चिंता जैसे मुद्दे सामने आए।</p><p>BJP प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने कहा कि पार्टी इस मुद्दे को जन आंदोलन का रूप देना चाहती है। पार्टी नेताओं ने नशे की समस्या को केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं बल्कि परिवारों और समाज से जुड़ी चुनौती के रूप में पेश किया है।</p><h5 class=""><b>यात्रा में नशे के साथ कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार का मुद्दा भी</b></h5><p>BJP ने शुरुआत में यात्रा को नशे के खिलाफ अभियान के तौर पर पेश किया था, लेकिन पार्टी की घोषणा के मुताबिक इसके दौरान नशा, कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार तीन प्रमुख मुद्दे रहेंगे। पार्टी का कहना है कि इन मुद्दों पर अलग-अलग इलाकों में लोगों से संवाद किया जाएगा।</p><p>पंजाब BJP ने राज्य की AAP सरकार पर नशे की समस्या को लेकर सवाल उठाए हैं। प्रदेश अध्यक्ष के मुताबिक पार्टी का उद्देश्य युवाओं और परिवारों को नशे के खिलाफ अभियान से जोड़ना है। BJP ने इसे आगामी 2027 पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले बड़े जनसंपर्क अभियान के तौर पर भी आगे बढ़ाया है।</p><p>हालांकि BJP इस अभियान को जन आंदोलन बताती है, वहीं चुनावी संदर्भ में इसका राजनीतिक महत्व भी है। पार्टी ने 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए राज्य की सभी 117 सीटों पर अपनी गतिविधियां बढ़ाने की बात कही है।</p><h5 class=""><b>BJP नेताओं ने AAP सरकार पर लगाए आरोप</b></h5><p>कार्यक्रम और यात्रा को लेकर BJP नेताओं ने पंजाब की मौजूदा सरकार पर भी निशाना साधा। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने नशा तस्करी और जेल व्यवस्था को लेकर आरोप लगाए। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर गैंगस्टरों से जुड़े लोगों को राजनीतिक संरक्षण मिलने के आरोप भी लगाए।</p><p>ये BJP नेताओं के राजनीतिक आरोप हैं। इन दावों को लेकर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया और अलग-अलग मामलों की आधिकारिक जांच के निष्कर्ष अलग विषय हैं। समाचार रिपोर्टिंग में इन आरोपों को उसी रूप में देखना जरूरी है।</p><p>BJP प्रदेश अध्यक्ष ने इससे पहले भी राज्य सरकार पर नशे के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए थे। पार्टी का कहना है कि नशे से प्रभावित परिवारों की आवाज को राजनीतिक बहस के केंद्र में लाना इस अभियान का प्रमुख उद्देश्य है।</p><h5 class=""><b>100 से ज्यादा वाहनों के काफिले से होगा प्रचार</b></h5><p>यात्रा के दौरान पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के वाहनों के काफिले भी अलग-अलग मार्गों पर चलेंगे। पंजाब BJP के मुताबिक मुख्य नेता रथ में रहेंगे और संबंधित जिलों के वाहन उनके पीछे चलेंगे।</p><p>यात्रा का रूट पंजाब के माझा, दोआबा और मालवा क्षेत्रों को कवर करने के लिए तैयार किया गया है। पठानकोट से शुरू होने वाला पहला मार्ग अमृतसर, तरनतारन, फिरोजपुर और कपूरथला होते हुए जालंधर क्षेत्र तक पहुंचेगा। अन्य तीन यात्राएं भी राज्य के अलग-अलग हिस्सों से गुजरेंगी।</p><p>BJP ने यात्रा के दौरान सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था के लिए पुलिस प्रशासन से भी सहयोग मांगा था। पार्टी प्रतिनिधिमंडल ने पंजाब के DGP से मुलाकात कर यात्रा मार्गों पर पर्याप्त सुरक्षा और यातायात प्रबंधन की मांग की थी।</p><h5 class=""><b>2027 चुनाव से पहले BJP का बड़ा राज्यव्यापी अभियान</b></h5><p>पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं। ऐसे में 117 सीटों और करीब 4,000 किलोमीटर के रूट वाली यह यात्रा BJP के लिए राज्यव्यापी जनसंपर्क का बड़ा कार्यक्रम है।</p><p>नशे का मुद्दा पंजाब की राजनीति में लंबे समय से प्रमुख रहा है। BJP इसे परिवारों की चिंताओं और कानून-व्यवस्था के मुद्दों से जोड़कर जनता के बीच ले जा रही है। दूसरी ओर, सत्तारूढ़ AAP और अन्य दलों की ओर से नशे की समस्या से निपटने को लेकर अलग-अलग नीतियां और राजनीतिक दावे सामने आते रहे हैं।</p><p>फिलहाल इस यात्रा के जरिए BJP का फोकस एक तरफ नशे से प्रभावित परिवारों की आवाज उठाने और दूसरी तरफ अपने संगठनात्मक अभियान को राज्य के सभी विधानसभा क्षेत्रों तक ले जाने पर है। 30 सितंबर को जालंधर में होने वाला समापन कार्यक्रम इस अभियान का अगला बड़ा राजनीतिक पड़ाव होगा।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ Punjab BJP Nasha Mukt Yatra: ‘मुफ्त योजनाएं नहीं, चिट्टे से आजादी चाहिए’, 13 दिन की यात्रा से पहले छलका परिवारों का दर्द ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/tth-shahzad-bhatti-network-6438 ]]></guid><title><![CDATA[ Amritsar ASI Murder: कौन है ‘तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान’, शहजाद भट्टी से क्या है कनेक्शन? ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/tth-shahzad-bhatti-network-6438 ]]></link><pubDate><![CDATA[Fri, 18 Sep 2026 12:03:58 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ पंजाब के अमृतसर में ड्यूटी के दौरान ASI हरजीत सिंह की गोली मारकर हत्या के बाद ‘तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान’ (TTH) नाम एक बार फिर चर्चा में है। इस हमले की जिम्मेदारी TTH के नाम से एक संगठन ने लेने का दा ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p>पंजाब के अमृतसर में ड्यूटी के दौरान ASI हरजीत सिंह की गोली मारकर हत्या के बाद ‘<b>तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान’ (TTH)</b> नाम एक बार फिर चर्चा में है। इस हमले की जिम्मेदारी TTH के नाम से एक संगठन ने लेने का दावा किया है। हालांकि किसी भी ऐसे दावे को जांच पूरी होने से पहले हमले का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता।</p><p>इस पूरे मामले की अहम कड़ी शहजाद भट्टी नेटवर्क से जुड़ती है। भारत सरकार ने 16 सितंबर 2026 को शहजाद भट्टी नेटवर्क (SBN) को UAPA के तहत आतंकवादी संगठन घोषित किया है। गृह मंत्रालय के मुताबिक, इस नेटवर्क पर सीमापार हथियार, विस्फोटक और नशीले पदार्थों की तस्करी, युवाओं और स्थानीय अपराधियों को आतंकवादी गतिविधियों के लिए उकसाने तथा डिजिटल माध्यमों से प्रचार करने के आरोप हैं।</p><h5 class=""><b>अमृतसर में ASI हरजीत सिंह की हत्या के बाद TTH का नाम</b></h5><p>अमृतसर में ASI हरजीत सिंह की हत्या के बाद सोशल मीडिया पर TTH के नाम से जिम्मेदारी लेने का दावा सामने आया। इससे सुरक्षा एजेंसियों की नजर इस नाम से जुड़े नेटवर्क पर फिर गई है।</p><p>इससे पहले भी TTH के नाम से पंजाब में पुलिसकर्मियों पर हमलों की जिम्मेदारी लेने वाले पोस्टर और दावे सामने आ चुके हैं। मई 2026 में अमृतसर के मजीठा इलाके में ASI जोगा सिंह की हत्या के बाद भी TTH के नाम से एक पोस्टर जारी हुआ था। उस समय पुलिस ने पोस्टर की प्रामाणिकता की जांच की बात कही थी।</p><p>सितंबर में अजनाला इलाके में ASI जसवंत सिंह पर गोली चलाए जाने के बाद भी TTH के नाम से जिम्मेदारी का दावा सामने आया था। रिपोर्टों के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियां इस बात की जांच कर रही थीं कि यह वास्तव में कोई स्वतंत्र नया संगठन है या किसी बड़े नेटवर्क के लिए इस्तेमाल किया जा रहा नाम।</p><h5 class=""><b>क्या है Tehreek-e-Taliban Hindustan?</b></h5><p>TTH के नाम का इस्तेमाल हाल के महीनों में पंजाब और उत्तर भारत में कथित आतंकी गतिविधियों तथा प्रचार के संदर्भ में सामने आया है। उपलब्ध जांच रिपोर्टों के मुताबिक, इसे शहजाद भट्टी से जुड़े नेटवर्क के प्रचार और ऑपरेशनल गतिविधियों से जोड़ा गया है।</p><p>हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। भारत सरकार ने UAPA के तहत ‘Shahzad Bhatti Network’ को आतंकवादी संगठन घोषित किया है; सरकारी अधिसूचना में अलग से ‘Tehreek-e-Taliban Hindustan’ को उसी नाम से सूचीबद्ध नहीं किया गया है। गृह मंत्रालय की अधिसूचना में SBN को First Schedule में शामिल किया गया है।</p><p>यानी TTH नाम से सामने आने वाले दावों और SBN के बीच संबंध की जांच को अलग-अलग स्तर पर समझना जरूरी है।</p><h5 class=""><b>शहजाद भट्टी से कैसे जुड़ता है नाम?</b></h5><p>भारतीय जांच एजेंसियों और पुलिस की जांच में पाकिस्तान स्थित शहजाद भट्टी को TTH से जुड़े नेटवर्क का प्रमुख संचालक बताया गया है। मई 2026 में सामने आई जांच रिपोर्टों में एजेंसियों ने भट्टी को TTH के प्रचार और ऑपरेशनल नेटवर्क का कथित मास्टरमाइंड बताया था।</p><p>दिल्ली पुलिस की जांच में भी शहजाद भट्टी से जुड़े एक बहु-राज्यीय नेटवर्क का पता चलने और कई लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई थी। पुलिस के अनुसार, आरोपियों को पुलिसकर्मियों को निशाना बनाने, TTH के नाम से पोस्टर लगाने और कथित आतंकी प्रचार फैलाने जैसे काम सौंपे गए थे।</p><p>जांच एजेंसियों के अनुसार, इस नेटवर्क में सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म के जरिए भारत में लोगों से संपर्क किए जाने और उन्हें अलग-अलग गतिविधियों के लिए तैयार किए जाने के आरोप हैं।</p><h5 class=""><b>‘Al-Burak Squad’ का भी सामने आया नाम</b></h5><p>TTH से जुड़े पुराने मामलों में ‘Al-Burak Squad’ नाम भी सोशल मीडिया पोस्ट और दावों के जरिए सामने आया है। मई 2026 में ASI जोगा सिंह की हत्या के बाद सामने आए पोस्टर में इसी नाम का उल्लेख किया गया था। हालांकि ऐसे ऑनलाइन दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी होती है और जांच एजेंसियां इनकी तकनीकी जांच करती हैं।</p><p>इस तरह सोशल मीडिया पर किसी संगठन के नाम से जारी पोस्ट, वीडियो या जिम्मेदारी के दावे को सीधे घटना का निर्णायक सबूत नहीं माना जा सकता। सुरक्षा एजेंसियों को उसकी डिजिटल उत्पत्ति, संपर्क और अन्य साक्ष्यों से पुष्टि करनी होती है।</p><h5 class=""><b>भारत सरकार ने शहजाद भट्टी नेटवर्क पर क्यों लगाया UAPA?</b></h5><p>16 सितंबर को गृह मंत्रालय ने शहजाद भट्टी नेटवर्क को UAPA के तहत आतंकवादी संगठन घोषित किया। सरकारी अधिसूचना के अनुसार, नेटवर्क पर सीमापार से हथियार, विस्फोटक और मादक पदार्थों की तस्करी तथा युवाओं और स्थानीय अपराधियों को आतंकवादी गतिविधियों में शामिल करने के आरोप हैं। मंत्रालय ने यह भी कहा कि नेटवर्क डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए उकसाने वाली सामग्री का इस्तेमाल करता रहा है।</p><p>यह फैसला उस कार्रवाई के बाद आया है जिसमें सुरक्षा एजेंसियों ने भट्टी से जुड़े कथित नेटवर्क के खिलाफ देश के कई राज्यों में कार्रवाई की थी। जांच में भर्ती, प्रचार और पुलिसकर्मियों को निशाना बनाने से जुड़े आरोप भी सामने आए हैं।</p><h5 class=""><b>पंजाब में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क</b></h5><p>अमृतसर में ASI हरजीत सिंह की हत्या के बाद पंजाब में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ाई गई है। खासकर सीमावर्ती इलाकों में पुलिस और खुफिया एजेंसियां ऐसे नेटवर्क और उनके स्थानीय संपर्कों की जानकारी जुटा रही हैं।</p><p>हरजीत सिंह की हत्या की जांच में अब यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि हमले के पीछे वास्तव में कौन लोग थे, हमलावरों का स्थानीय नेटवर्क क्या था और TTH के नाम से सामने आए दावे की पुष्टि किस स्तर तक होती है।</p><h5 class=""><b>TTH, SBN और शहजाद भट्टी को ऐसे समझें</b></h5><p>मौजूदा जानकारी को सरल तरीके से देखें तो TTH नाम हालिया हमलों और ऑनलाइन जिम्मेदारी के दावों में सामने आया है, जबकि शहजाद भट्टी नेटवर्क को भारत सरकार ने 16 सितंबर को UAPA के तहत आतंकवादी संगठन घोषित किया है। जांच एजेंसियां TTH से जुड़े दावों और भट्टी नेटवर्क के बीच संबंधों की पड़ताल कर रही हैं।</p><p>इसलिए अमृतसर ASI हत्याकांड में TTH के दावे को जांच के निष्कर्ष के रूप में पेश करने के बजाय इसे एक कथित जिम्मेदारी दावा मानना अधिक सटीक है। हमले की वास्तविक साजिश, हमलावरों और नेटवर्क की भूमिका जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ Amritsar ASI Murder: कौन है ‘तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान’, शहजाद भट्टी से क्या है कनेक्शन? ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/amritsar-asi-harjit-singh-murder-6436 ]]></guid><title><![CDATA[ Amritsar ASI Murder: ड्यूटी के दौरान ASI हरजीत सिंह की गोली मारकर हत्या, संगठन के दावे से बढ़ा विवाद ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/amritsar-asi-harjit-singh-murder-6436 ]]></link><pubDate><![CDATA[Fri, 18 Sep 2026 11:14:44 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ अमृतसर:&nbsp;पंजाब के अमृतसर में ड्यूटी पर तैनात पंजाब पुलिस के असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) हरजीत सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना के बाद एक संगठन ने हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया है,  ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>अमृतसर:&nbsp;</b>पंजाब के अमृतसर में ड्यूटी पर तैनात पंजाब पुलिस के <b>असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) हरजीत सिंह </b>की गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना के बाद एक संगठन ने हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया है, हालांकि पुलिस ने फिलहाल इसे आतंकी हमला मानने की बात से इनकार किया है। घटना के बाद पंजाब में कानून-व्यवस्था और पुलिसकर्मियों की सुरक्षा को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।</p><h5 class=""><b>अमृतसर में ड्यूटी के दौरान ASI को मारी गई गोली</b></h5><p>जानकारी के मुताबिक, हरजीत सिंह अमृतसर के थाना गेट हकीमा के तहत आने वाले इलाके में पुलिस कमिश्नरेट की PCR ड्यूटी पर तैनात थे। वह भगतांवाला अनाज मंडी के पास ड्यूटी कर रहे थे, तभी मोटरसाइकिल पर आए दो युवकों ने कथित तौर पर उन पर गोलियां चला दीं।</p><p>हमले में हरजीत सिंह को तीन गोलियां लगीं। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। हरजीत सिंह मूल रूप से तरनतारन के रहने वाले थे।</p><p>पुलिस ने घटना के बाद इलाके में लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है। हमलावरों की पहचान और हत्या के पीछे की वजह का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है।</p><p>&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;Our brave police officer, ASI Harjit Singh of district &lt;a href="https://x.com/hashtag/Amritsar?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#Amritsar&lt;/a&gt;, has laid down his life in the line of duty.&lt;a href="https://x.com/PunjabPoliceInd?ref_src=twsrc^tfw"&gt;@PunjabPoliceInd&lt;/a&gt; stands firmly with the bereaved family in their hour of grief. Hon’ble Chief Minister has announced an ex-gratia amount of ₹1 crore for his family,… &lt;a href="https://t.co/Or6bnpNun4"&gt;pic.twitter.com/Or6bnpNun4&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; DGP Punjab Police (@DGPPunjabPolice) &lt;a href="https://x.com/DGPPunjabPolice/status/2100797014619640171?ref_src=twsrc^tfw"&gt;September 18, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</p><h5 class=""><b>Tehreek-e-Taliban Hindustan के दावे से बढ़ा मामला</b></h5><p>हत्याकांड के बाद Tehreek-e-Taliban Hindustan (TTH) नाम के संगठन ने कथित तौर पर हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया। इसी संगठन का नाम इससे पहले अमृतसर के अजनाला इलाके में एक पुलिस अधिकारी पर हुए हमले के बाद भी सामने आया था। हालांकि इस संगठन की वास्तविक प्रकृति और दावे की विश्वसनीयता को लेकर जांच एजेंसियां पड़ताल कर रही हैं।</p><p>हरजीत सिंह की हत्या के मामले में पुलिस ने फिलहाल आतंकी हमले के एंगल को स्वीकार नहीं किया है। ऐसे में संगठन के दावे और पुलिस जांच के निष्कर्षों के बीच अंतर को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है। हत्या के पीछे वास्तविक कारण और हमलावरों की पहचान जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।</p><h5 class=""><b>CM भगवंत मान ने परिवार के लिए मुआवजे का ऐलान किया</b></h5><p>पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने ASI हरजीत सिंह की मौत पर शोक व्यक्त किया है। सरकार की ओर से परिवार के लिए ₹1 करोड़ की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की गई है। इसके अलावा HDFC बैंक की ओर से परिवार को ₹1 करोड़ का बीमा भुगतान मिलने की जानकारी सामने आई है।</p><p>पंजाब पुलिस ने भी हरजीत सिंह के बलिदान पर शोक जताते हुए कहा कि विभाग इस मुश्किल समय में उनके परिवार के साथ खड़ा है। उन्हें पूरे पुलिस सम्मान के साथ अंतिम विदाई देने की बात कही गई है।</p><h5 class=""><b>BJP और अकाली दल ने सरकार से पूछे सवाल</b></h5><p>घटना के बाद पंजाब की राजनीति में भी कानून-व्यवस्था का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया। भाजपा नेता तरुण चुघ ने ASI की हत्या पर दुख जताते हुए पंजाब में पुलिसकर्मियों और पुलिस प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए।</p><p>चुघ ने दावा किया कि राज्य में पुलिस थानों और अन्य पुलिस प्रतिष्ठानों को पहले भी निशाना बनाया गया है। उन्होंने कहा कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर हमले की घटनाएं सरकार के सामने सुरक्षा को लेकर गंभीर चुनौती रखती हैं।</p><p>भाजपा नेता ने पंजाब में नशा, रंगदारी और गैंगस्टर गतिविधियों का भी मुद्दा उठाया और आम आदमी पार्टी सरकार पर कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल किए। ये राजनीतिक आरोप हैं और सरकार की ओर से इन दावों पर अलग-अलग मामलों में जवाब दिए जाते रहे हैं।</p><p>वहीं, अकाली दल नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने भी पुलिसकर्मियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि राज्य में कई ASI पर हमले हुए हैं और पूछा कि यदि पुलिसकर्मी ड्यूटी के दौरान सुरक्षित नहीं हैं तो आम लोगों की सुरक्षा को लेकर क्या स्थिति होगी।</p><p>&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;👉 Guru Nagri Sri Amritsar bleeds under Guru Dokhi &lt;a href="https://x.com/BhagwantMann?ref_src=twsrc^tfw"&gt;@BhagwantMann&lt;/a&gt; and the incompetent DGP &lt;a href="https://x.com/DGPPunjabPolice?ref_src=twsrc^tfw"&gt;@DGPPunjabPolice&lt;/a&gt; !&lt;br&gt;&lt;br&gt;👉 Three ASIs have been murdered so far. Two killings were reported in Amritsar last night, including ASI Harjit Singh, shot dead while on duty at Bhagtanwala Grain… &lt;a href="https://t.co/IXWFoQrv6W"&gt;pic.twitter.com/IXWFoQrv6W&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Bikram Singh Majithia (@bsmajithia) &lt;a href="https://x.com/bsmajithia/status/2100789824399774100?ref_src=twsrc^tfw"&gt;September 18, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</p><h5 class=""><b>अमृतसर में पुलिसकर्मियों पर हमलों की घटनाएं</b></h5><p>हरजीत सिंह की हत्या ऐसे समय हुई है जब अमृतसर में हाल के दिनों में पुलिसकर्मियों को निशाना बनाने की अन्य घटनाएं भी सामने आई हैं।</p><ul><li>30 अगस्त: ड्यूटी के दौरान ASI पवन कुमार शर्मा दोपहिया वाहन की टक्कर में गंभीर रूप से घायल हुए थे। इलाज के दौरान करीब 12 दिन बाद उनकी मौत हो गई।</li><li>11 सितंबर: अजनाला इलाके में ASI जसवंत सिंह पर कथित तौर पर मोटरसाइकिल सवार युवकों ने गोली चलाई थी। गोली उनके सिर को छूकर निकल गई थी और उन्हें मामूली चोट आई थी।</li><li>17-18 सितंबर: भगतांवाला अनाज मंडी के पास ड्यूटी पर तैनात ASI हरजीत सिंह को गोली मार दी गई। उनकी मौत हो गई।</li></ul><p>इन घटनाओं के बाद पंजाब में पुलिसकर्मियों की सुरक्षा और अपराध पर नियंत्रण को लेकर बहस तेज हो गई है।</p><h5 class=""><b>जांच के बाद साफ होगी हत्या की वजह</b></h5><p>हरजीत सिंह की हत्या के मामले में फिलहाल सबसे अहम सवाल यही है कि हमले के पीछे वास्तविक वजह क्या थी और इसमें कौन लोग शामिल थे। संगठन द्वारा जिम्मेदारी लेने का दावा सामने आया है, लेकिन पुलिस ने इसे आतंकी घटना के तौर पर स्वीकार नहीं किया है।</p><p>CCTV फुटेज, घटनास्थल से मिले सबूत और अन्य तकनीकी जांच के आधार पर पुलिस हमलावरों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। जब तक जांच पूरी नहीं होती, हत्या को लेकर सामने आ रहे अलग-अलग दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ Amritsar ASI Murder: ड्यूटी के दौरान ASI हरजीत सिंह की गोली मारकर हत्या, संगठन के दावे से बढ़ा विवाद ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/bhupinder-dhillon-bjp-6397 ]]></guid><title><![CDATA[ Punjab Politics: प्रकाश सिंह बादल के करीबी रहे मेजर भूपिंदर सिंह ढिल्लों BJP में शामिल, जानिए कौन हैं ‘मेजर भूप’ ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/bhupinder-dhillon-bjp-6397 ]]></link><pubDate><![CDATA[Wed, 16 Sep 2026 12:01:35 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ पंजाब की राजनीति में प्रकाश सिंह बादल का नाम लंबे समय तक शिरोमणि अकाली दल की राजनीति के केंद्र में रहा। अब उनके परिवार से जुड़े एक पुराने और भरोसेमंद चेहरे ने अपनी राजनीतिक दिशा बदल ली है। 78 वर्षीय म ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>पंजाब</b> की राजनीति में प्रकाश सिंह बादल का नाम लंबे समय तक शिरोमणि अकाली दल की राजनीति के केंद्र में रहा। अब उनके परिवार से जुड़े एक पुराने और भरोसेमंद चेहरे ने अपनी राजनीतिक दिशा बदल ली है। 78 वर्षीय मेजर भूपिंदर सिंह ढिल्लों, जिन्हें लंबी विधानसभा क्षेत्र के बादल गांव में ‘मेजर भूप’ के नाम से जाना जाता है, भाजपा में शामिल हो गए हैं। उनके साथ उनके बेटे अमरवीर सिंह बादल ने भी पार्टी की सदस्यता ली। चंडीगढ़ में हुए इस कार्यक्रम में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों मौजूद रहे।</p><p>ढिल्लों का भाजपा में जाना इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि वह केवल बादल परिवार के रिश्तेदार नहीं रहे, बल्कि लंबे समय तक प्रकाश सिंह बादल के राजनीतिक सहयोगी भी रहे। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने बादल के साथ करीब 25 वर्षों तक राजनीतिक सलाहकार और सहयोगी की भूमिका निभाई तथा 1997 से 2002 के दौरान बादल सरकार में राजनीतिक सचिव के तौर पर भी काम किया।</p><h5 class=""><b>कौन हैं मेजर भूपिंदर सिंह ढिल्लों?</b></h5><p>मेजर भूपिंदर सिंह ढिल्लों का जन्म 1948 में हुआ था। उन्होंने द लॉरेंस स्कूल, सनावर से पढ़ाई करने के बाद राष्ट्रीय रक्षा अकादमी का रुख किया। इसके बाद भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून से प्रशिक्षण लेकर दिसंबर 1969 में सेना में सेकंड लेफ्टिनेंट के तौर पर कमीशन हासिल किया।</p><p>उन्होंने आर्टिलरी रेजिमेंट में लंबे समय तक सेवा की। सैन्य करियर के दौरान वह पंजाब के तत्कालीन राज्यपाल जय सुख लाल हाथी के एड-डी-कैंप यानी ADC भी रहे। सेना से सेवानिवृत्ति के बाद उनका जुड़ाव परिवार के कृषि और कारोबार से रहा, लेकिन राजनीतिक गतिविधियों से उनका संपर्क बना रहा।</p><p>बादल परिवार के साथ उनका रिश्ता भी केवल राजनीति तक सीमित नहीं था। वह प्रकाश सिंह बादल के चचेरे भाई थे और दोनों परिवारों का लंबे समय तक पारिवारिक संपर्क रहा। ढिल्लों के पिता गुर राज सिंह भी राजनीति में रहे और 1950 के दशक में राज्यसभा के सदस्य थे।</p><h5 class=""><b>चुनावी राजनीति में पर्दे के पीछे निभाई अहम भूमिका</b></h5><p>मेजर भूप की पहचान कभी ऐसे नेता के रूप में नहीं रही जो चुनावी मंचों पर लगातार नजर आए हों। इसके बजाय उनकी भूमिका संगठन और चुनाव प्रबंधन के पीछे काम करने वाले व्यक्ति की रही।</p><p>उनके बारे में बताया जाता है कि प्रकाश सिंह बादल के चुनाव अभियानों के दौरान उन्हें अलग-अलग क्षेत्रों और वार्डों की जिम्मेदारी दी जाती थी। पार्टी के नाराज कार्यकर्ताओं या असंतुष्ट नेताओं से बातचीत करना और उन्हें संगठन के साथ बनाए रखने की कोशिश करना भी उनकी भूमिका का हिस्सा था।</p><p>यही वजह है कि लंबी और बादल गांव की राजनीति को समझने वाले लोगों के बीच उनका नाम लंबे समय से जाना-पहचाना रहा है। उन्होंने खुद भी कहा है कि उन्हें सार्वजनिक राजनीति और सुर्खियों में रहने की तुलना में पर्दे के पीछे काम करना ज्यादा पसंद रहा।</p><h5 class=""><b>2022 का चुनाव बना राजनीतिक बदलाव का मोड़</b></h5><p>2022 का पंजाब विधानसभा चुनाव भी ढिल्लों के राजनीतिक सफर में एक महत्वपूर्ण मोड़ रहा। उस चुनाव में शिरोमणि अकाली दल का प्रदर्शन काफी सीमित रहा और पार्टी विधानसभा में तीन सीटों तक सिमट गई। प्रकाश सिंह बादल भी लंबी सीट से चुनाव हार गए थे।</p><p>इसके बाद प्रकाश सिंह बादल के निधन के बाद ढिल्लों ने कुछ समय तक सार्वजनिक राजनीतिक गतिविधियों से दूरी बनाए रखी। अब उन्होंने भाजपा में शामिल होने का फैसला किया है। अपने फैसले की वजह बताते हुए ढिल्लों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काम और भाजपा की विचारधारा के प्रति अपनी निकटता का उल्लेख किया है।</p><h5 class=""><b>BJP में शामिल होने के बावजूद बादल परिवार से रिश्ता कायम</b></h5><p>भाजपा में शामिल होने के बाद भी ढिल्लों ने साफ किया है कि उनका बादल परिवार से व्यक्तिगत रिश्ता खत्म नहीं हुआ है। सुखबीर सिंह बादल उनके भतीजे हैं और उन्होंने कहा है कि राजनीतिक विचार अलग हो सकते हैं, लेकिन पारिवारिक संबंध अपनी जगह बने रहेंगे।</p><p>उन्होंने यह भी कहा कि उनके मन में शिरोमणि अकाली दल या सुखबीर बादल के प्रति कोई कड़वाहट नहीं है।</p><h5 class=""><b>क्या चुनाव लड़ेंगे मेजर भूप?</b></h5><p>मेजर भूपिंदर सिंह ढिल्लों ने अब तक खुद कोई विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा है। भाजपा में शामिल होने के बाद भी उन्होंने किसी संभावित टिकट को लेकर कोई दावा नहीं किया। उनका कहना है कि पार्टी जो भी जिम्मेदारी देगी, वह उसे निभाएंगे।</p><p>ऐसे में उनकी अगली भूमिका क्या होगी, यह भाजपा के संगठनात्मक और चुनावी फैसलों पर निर्भर करेगा। फिलहाल उनका भाजपा में शामिल होना पंजाब की 2027 की राजनीति में इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वह बादल परिवार के पुराने राजनीतिक नेटवर्क से जुड़े रहे हैं और अब उसी राजनीतिक पृष्ठभूमि के एक हिस्से के साथ भाजपा में नई भूमिका शुरू कर रहे हैं।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ Punjab Politics: प्रकाश सिंह बादल के करीबी रहे मेजर भूपिंदर सिंह ढिल्लों BJP में शामिल, जानिए कौन हैं ‘मेजर भूप’ ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-drugs-kejriwal-bjp-ruled-states-6370 ]]></guid><title><![CDATA[ पंजाब में नशे की सप्लाई को लेकर केजरीवाल का बड़ा दावा, बोले- 80% ड्रग्स BJP शासित राज्यों से आ रही ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-drugs-kejriwal-bjp-ruled-states-6370 ]]></link><pubDate><![CDATA[Tue, 15 Sep 2026 13:30:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ नई दिल्ली: पंजाब में नशे की समस्या को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधते हुए बड़ा दावा किया है। केजरीवाल ने कहा कि पंजाब में आने  ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>नई दिल्ली: </b>पंजाब में नशे की समस्या को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधते हुए बड़ा दावा किया है। केजरीवाल ने कहा कि पंजाब में आने वाली ड्रग्स की सप्लाई का बड़ा हिस्सा अब पाकिस्तान के बजाय भाजपा शासित राज्यों से हो रहा है। उनके मुताबिक, करीब 80 प्रतिशत ड्रग्स गुजरात, राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से पंजाब पहुंच रही है।</span></p><p><span style="font-size: 1rem;">अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि जब 2022 में पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बनी थी, तब राज्य में आने वाली ड्रग्स का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा पाकिस्तान से आने का दावा किया जाता था। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ने पाकिस्तान से होने वाली ड्रग्स की तस्करी रोकने के लिए एंटी-ड्रोन सिस्टम लगाया।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">केजरीवाल के मुताबिक, अब पाकिस्तान से आने वाली ड्रग्स की हिस्सेदारी करीब 20 प्रतिशत रह गई है, जबकि 80 प्रतिशत सप्लाई भाजपा शासित राज्यों से पंजाब पहुंच रही है।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="hi" dir="ltr"&gt;2022 में जब हमारी सरकार बनी थी तो 80% ड्रग्स पाकिस्तान से आती थी। “आप” सरकार ने एंटी ड्रोन सिस्टम लगाकर पाकिस्तान से आने वाली ड्रग्स पर काबू किया। आज केवल 20% ड्रग्स पाकिस्तान से आती हैं। आज 80% ड्रग्स बीजेपी शासित राज्यों से आ रही हैं - गुजरात, राजस्थान, हरियाणा, यूपी, दिल्ली।… &lt;a href="https://t.co/IllELZym91"&gt;pic.twitter.com/IllELZym91&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) &lt;a href="https://x.com/ArvindKejriwal/status/2099708901205631032?ref_src=twsrc^tfw"&gt;September 15, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><h5 class=""><b>गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और UP का किया जिक्र</b></h5><p>केजरीवाल ने अपने बयान में गुजरात, राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली का विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने भाजपा पर सवाल उठाते हुए पूछा कि अगर इन राज्यों से ड्रग्स पंजाब पहुंच रही है तो वहां की सरकारें नशे के कारोबार को रोकने में सफल क्यों नहीं हो पा रही हैं।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने गुजरात का जिक्र करते हुए कहा कि वहां भाजपा करीब 30 वर्षों से सत्ता में है और इसके बावजूद राज्य में ड्रग्स का कारोबार एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है।</span></p><h5 class=""><b>मुंद्रा पोर्ट का भी उठाया मुद्दा</b></h5><p class="blue-bg-white"><b><i>AAP नेता ने दावा किया कि ड्रग्स भारत में गुजरात के मुंद्रा पोर्ट के रास्ते भी पहुंचती है। उन्होंने कहा कि देश में नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकना केंद्र की भाजपा सरकार की जिम्मेदारी है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">केजरीवाल ने भाजपा से पंजाब से सीख लेने और अपने शासन वाले राज्यों में भी नशे के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने की अपील की।</span></i></b></p><h5 class=""><b>पंजाब में नशे का मुद्दा बना बड़ा राजनीतिक विषय</b></h5><p>पंजाब में ड्रग्स का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक बहस के केंद्र में रहा है। हाल के दिनों में नशे से जुड़े कई वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद राज्य सरकार को विपक्ष की आलोचना का सामना करना पड़ा है। ऐसे में केजरीवाल का ताजा बयान इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव को और बढ़ा सकता है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">हालांकि, भाजपा शासित राज्यों से पंजाब में आने वाली ड्रग्स के 80 प्रतिशत हिस्से से जुड़ा आंकड़ा केजरीवाल का दावा है। इसे स्वतंत्र रूप से प्रमाणित आंकड़े के रूप में नहीं, बल्कि उनके राजनीतिक बयान के तौर पर देखा जाना चाहिए।</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब में नशे की सप्लाई को लेकर केजरीवाल का बड़ा दावा, बोले- 80% ड्रग्स BJP शासित राज्यों से आ रही ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/karamveer-singh-deported-canada-agtf-punjab-lawrence-bishnoi-6369 ]]></guid><title><![CDATA[ कनाडा से निर्वासन के बाद लॉरेंस बिश्नोई गैंग के करीबी करमवीर सिंह को AGTF ने पकड़ा ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/karamveer-singh-deported-canada-agtf-punjab-lawrence-bishnoi-6369 ]]></link><pubDate><![CDATA[Tue, 15 Sep 2026 13:00:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ चंडीगढ़, पंजाब: पंजाब पुलिस की एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) ने गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के करीबी सहयोगी बताए जा रहे करमवीर सिंह को कनाडा से निर्वासन के बाद नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय ह ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>चंडीगढ़, पंजाब: </b>पंजाब पुलिस की एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) ने गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के करीबी सहयोगी बताए जा रहे करमवीर सिंह को कनाडा से निर्वासन के बाद नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे (IGI) से हिरासत में लिया है। पंजाब पुलिस ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी।</span></p><p>पंजाब पुलिस के मुताबिक, कनाडा से निर्वासित किए जाने के बाद करमवीर सिंह को दिल्ली एयरपोर्ट पर AGTF ने अपनी हिरासत में लिया। उसके खिलाफ एसएएस नगर स्थित स्टेट क्राइम पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता (IPC), आर्म्स एक्ट और पासपोर्ट एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">पुलिस ने बताया कि करमवीर सिंह के खिलाफ 3 सितंबर 2026 को AGTF पंजाब ने लुकआउट सर्कुलर (LOC) जारी किया था।</span></p><h5 class=""><b>अनमोल बिश्नोई को लॉजिस्टिक मदद देने का आरोप</b></h5><p>पंजाब पुलिस के अनुसार, करमवीर सिंह पर अमेरिका में लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े एक अन्य आरोपी अनमोल बिश्नोई को कथित तौर पर लॉजिस्टिक सहायता और ठिकाना उपलब्ध कराने का आरोप है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">पुलिस ने बताया कि करमवीर सिंह का आपराधिक इतिहास भी रहा है। उसके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, जबरन वसूली, आर्म्स एक्ट से जुड़े मामलों के अलावा अन्य आपराधिक गतिविधियों से संबंधित मामले दर्ज होने की बात कही गई है।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">पंजाब पुलिस अब उसकी कथित गतिविधियों और व्यापक आपराधिक नेटवर्क के बारे में आगे की जांच कर रही है।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;Crackdown on Transnational Gangster Network: Lawrence Bishnoi’s Close Associate Deported from Canada&lt;br&gt;&lt;br&gt;In a major breakthrough against transnational organised crime, Punjab Police’s Anti-Gangster Task Force (&lt;a href="https://x.com/hashtag/AGTF?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#AGTF&lt;/a&gt;) has taken Karamveer Singh, a close associate of Gangster Lawrence… &lt;a href="https://t.co/wZ8zIfhEFK"&gt;pic.twitter.com/wZ8zIfhEFK&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; DGP Punjab Police (@DGPPunjabPolice) &lt;a href="https://x.com/DGPPunjabPolice/status/2099738275896541298?ref_src=twsrc^tfw"&gt;September 15, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><h5 class=""><b>पंजाब पुलिस ने कहा- सीमा पार सक्रिय नेटवर्क पर कार्रवाई जारी</b></h5><p>पंजाब पुलिस ने कहा कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय संगठित अपराध और गैंगस्टर नेटवर्क को खत्म करने के लिए लगातार कार्रवाई कर रही है। पुलिस का कहना है कि विदेशों से संचालित होने वाले वांछित अपराधियों को कानून के दायरे में लाना उसकी प्राथमिकता है।</p><h5 class=""><b>हरिद्वार जेल अधिकारी को भी मिली थी धमकी</b></h5><p class="grey-bg-red"><b><i>इस बीच, उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में रोशनाबाद जिला जेल के वरिष्ठ अधीक्षक को भी व्हाट्सऐप के जरिए कथित तौर पर जान से मारने की धमकी मिलने का मामला सामने आया है। धमकी देने वाले ने कथित तौर पर डराने के लिए ‘लॉरेंस ग्रुप’ का नाम लिया।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">हरिद्वार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर के अनुसार, जेल अधीक्षक को व्हाट्सऐप पर एक कॉल आई, जिसमें धमकी दी गई। इसके बाद उन्हें कई संदेश भी मिले। शिकायत के आधार पर सिडकुल थाने में एफआईआर दर्ज की गई है।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">मामले की जांच के लिए एसओजी की तकनीकी टीम और साइबर टीम को लगाया गया है। पुलिस अब धमकी देने वाले की पहचान और गिरफ्तारी की कोशिश कर रही है।</span></i></b></p><h5 class=""><b>गैंग के नाम के इस्तेमाल की भी जांच</b></h5><p>पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, चूंकि शिकायत एक वरिष्ठ अधिकारी से जुड़ी है और धमकी में एक गैंगस्टर का नाम इस्तेमाल किया गया है, इसलिए मामले की जांच के लिए विशेष टीमों को लगाया गया है। फिलहाल यह जांच का विषय है कि धमकी वास्तव में संबंधित गिरोह से जुड़ी थी या किसी व्यक्ति ने गैंग के नाम का इस्तेमाल कर अधिकारी को डराने की कोशिश की।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ कनाडा से निर्वासन के बाद लॉरेंस बिश्नोई गैंग के करीबी करमवीर सिंह को AGTF ने पकड़ा ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-bjp-3c-sad-alliance-6343 ]]></guid><title><![CDATA[ Punjab Election 2027: BJP का ‘3C’ फॉर्मूला, जातीय समीकरण और SAD से गठबंधन पर नजर; AAP-कांग्रेस की बढ़ेगी चुनौती? ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-bjp-3c-sad-alliance-6343 ]]></link><pubDate><![CDATA[Mon, 14 Sep 2026 13:45:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ Punjab Polls 2027: पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने अपनी चुनावी रणनीति को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी की योजना राज्य में अपराध, भ्रष्टाचार और नशे को प्रमुख मुद्दा बनाने की ह ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>Punjab Polls 2027: </b>पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने अपनी चुनावी रणनीति को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी की योजना राज्य में अपराध, भ्रष्टाचार और नशे को प्रमुख मुद्दा बनाने की है। इसके साथ ही बीजेपी अनुसूचित जाति (SC) मतदाताओं तक पहुंच बढ़ाने और युवाओं से जुड़े सवालों को अभियान के केंद्र में रखने की तैयारी में है।</p><p>पार्टी की रणनीति को मोटे तौर पर <b>‘3C’ यानी Crime, Corruption और Chitta</b> के इर्द-गिर्द देखा जा रहा है। इसके साथ जातीय समीकरण को भी महत्व दिया जा रहा है। पंजाब में 30 फीसदी से ज्यादा SC आबादी होने के कारण बीजेपी इसे चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा मान रही है।</p><h5 class=""><b>‘3C’ के साथ जातीय समीकरण पर बीजेपी का फोकस</b></h5><p>बीजेपी से जुड़े एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, पंजाब में चुनावी अभियान के दौरान अपराध, भ्रष्टाचार और चिट्टा यानी ड्रग्स के मुद्दे प्रमुख रहेंगे। पार्टी का मानना है कि इन मुद्दों को उठाकर वह सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के साथ कांग्रेस को भी घेर सकती है।</p><p>पार्टी का तर्क है कि पंजाब में नशे की समस्या केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर युवाओं और परिवारों पर पड़ता है। इसी तरह भ्रष्टाचार और अपराध को लेकर भी बीजेपी सरकार पर सवाल खड़े करने की तैयारी में है।</p><p>लेकिन इस बार बीजेपी अपने अभियान को केवल इन मुद्दों तक सीमित नहीं रखना चाहती। राज्य की सामाजिक संरचना को देखते हुए पार्टी जाति के मुद्दे पर भी ज्यादा ध्यान दे सकती है। SC समुदाय पंजाब के कुल मतदाताओं का बड़ा हिस्सा है और ऐसे में बीजेपी इस वर्ग के बीच अपना आधार मजबूत करने की कोशिश कर रही है।</p><h5 class=""><b>युवाओं को अभियान के केंद्र में लाने की तैयारी</b></h5><p>पंजाब की राजनीति में युवा मतदाता बीजेपी की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकते हैं। पार्टी नशे के साथ बेरोजगारी और रोजगार के सीमित अवसरों को भी चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में है।</p><p>इसके अलावा कानून-व्यवस्था को लेकर भी बीजेपी सरकार पर निशाना साध सकती है। पार्टी से जुड़े सूत्रों के अनुसार, जबरन वसूली की कथित घटनाओं को भी अभियान में प्रमुखता दी जा सकती है।</p><p>बीजेपी का प्रयास यह संदेश देने का है कि नशे और अपराध की समस्या का असर पंजाब के सामाजिक और आर्थिक भविष्य पर पड़ रहा है। हालांकि, इन मुद्दों पर पार्टी द्वारा लगाए जाने वाले आरोपों को चुनावी राजनीतिक दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।</p><h5 class=""><b>संत रविदास की विरासत के जरिए दलित संपर्क</b></h5><p>बीजेपी पंजाब में अनुसूचित जाति समुदाय तक पहुंच बनाने के लिए संत रविदास की विरासत को भी अपने जनसंपर्क अभियान से जोड़ने की तैयारी में है।</p><p>पार्टी नेताओं के अनुसार, संत रविदास से जुड़ा राष्ट्रीय स्तर का जनसंपर्क अभियान पंजाब की चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है। बीजेपी का प्रयास सामाजिक और धार्मिक प्रतीकों के जरिए अलग-अलग समुदायों तक अपनी राजनीतिक पहुंच बढ़ाने का है।</p><p>पार्टी को उम्मीद है कि नशे, भ्रष्टाचार और रोजगार जैसे मुद्दों के साथ सामाजिक प्रतिनिधित्व का सवाल जोड़कर वह अपने चुनावी आधार का विस्तार कर सकती है।</p><h5 class=""><b>1984 के सिख विरोधी दंगों का मुद्दा फिर उठाने की तैयारी</b></h5><p>पंजाब चुनाव में बीजेपी कांग्रेस के खिलाफ 1984 के सिख विरोधी दंगों का मुद्दा भी फिर से उठा सकती है। पार्टी के नेताओं का कहना है कि इस मुद्दे से जुड़े पुराने सवालों को चुनावी बहस में लाया जाएगा।</p><p>बीजेपी विशेष रूप से कांग्रेस के पूर्व नेता सज्जन कुमार से जुड़े राजनीतिक संदर्भों का इस्तेमाल कांग्रेस को घेरने के लिए कर सकती है। पार्टी का मानना है कि 1984 के दंगों से जुड़ा मुद्दा पंजाब की राजनीति में अब भी संवेदनशील है और इसके जरिए कांग्रेस पर दबाव बनाया जा सकता है।</p><h5 class=""><b>AAP और खालिस्तान के मुद्दे पर हमला</b></h5><p>बीजेपी पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार को खालिस्तान समर्थक तत्वों से कथित संबंध और कानून-व्यवस्था के सवाल पर भी घेरने की तैयारी में है।</p><p>बीजेपी के नेताओं का आरोप है कि AAP सरकार को खालिस्तान समर्थक गतिविधियों को लेकर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। इसके साथ ही राज्य में जबरन वसूली और अपराध की कथित घटनाओं को लेकर भी पार्टी सरकार पर निशाना साध सकती है।</p><p>इन आरोपों के जवाब में AAP की ओर से क्या रणनीति अपनाई जाएगी, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल बीजेपी अपने संभावित चुनावी मुद्दों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है।</p><h5 class=""><b>दिवाली के आसपास शुरू हो सकता है औपचारिक अभियान</b></h5><p>पार्टी सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी का औपचारिक पंजाब चुनाव अभियान दिवाली के आसपास शुरू किए जाने की संभावना है। इससे पहले पार्टी राज्य में अलग-अलग मुद्दों पर जनसंपर्क और संगठनात्मक गतिविधियों को बढ़ाने की तैयारी कर रही है।</p><p>इसके साथ केंद्र सरकार के ‘नशा मुक्त भारत’ अभियान से जुड़े राज्यव्यापी कार्यक्रमों को भी पंजाब की राजनीतिक रणनीति से जोड़ा जा सकता है। 18 से 30 सितंबर के बीच प्रस्तावित कार्यक्रमों में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।</p><p>इस तरह बीजेपी नशे के मुद्दे को सिर्फ चुनावी भाषणों तक सीमित रखने के बजाय उसे व्यापक जनसंपर्क अभियान का रूप देने की कोशिश कर रही है।</p><h5 class=""><b>पंजाब में बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती</b></h5><p>बीजेपी की रणनीति जितनी आक्रामक नजर आ रही है, राज्य में पार्टी का मौजूदा चुनावी आधार उतना मजबूत नहीं है। 2022 के विधानसभा चुनाव में AAP ने 117 में से 92 सीटों पर जीत दर्ज की थी। कांग्रेस को 18 सीटें मिली थीं, जबकि SAD के खाते में तीन और बीजेपी के खाते में सिर्फ दो सीटें आई थीं।</p><p>2017 में कांग्रेस ने 77 सीटों के साथ सरकार बनाई थी। उस चुनाव में AAP को 20, SAD को 15 और बीजेपी को तीन सीटें मिली थीं।</p><p>इस लिहाज से बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने मौजूदा सीमित विधानसभा आधार को बढ़ाना है। पार्टी को इसके लिए नए सामाजिक समूहों और क्षेत्रीय मतदाताओं तक पहुंच बनानी होगी।</p><h5 class=""><b>SAD के साथ गठबंधन पर टिकी नजर</b></h5><p>बीजेपी की चुनावी रणनीति का सबसे दिलचस्प पहलू शिरोमणि अकाली दल के साथ संभावित गठबंधन है। 2022 में दोनों दल अलग-अलग चुनाव मैदान में उतरे थे। इससे पहले 2020 में कृषि कानूनों को लेकर SAD ने NDA से नाता तोड़ लिया था। बाद में केंद्र ने तीनों कृषि कानून वापस ले लिए थे।</p><p>अब दोनों पुराने सहयोगियों के बीच दोबारा नजदीकी की अटकलें तेज हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और SAD अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की मुलाकात के बाद गठबंधन की चर्चा को और बल मिला है।</p><p>बीजेपी सूत्रों के मुताबिक, पार्टी अपनी चुनावी रणनीति तैयार करते समय SAD के साथ संभावित गठबंधन को भी ध्यान में रख रही है। सूत्रों का दावा है कि गठबंधन को लेकर तस्वीर सितंबर के अंत तक स्पष्ट हो सकती है।</p><h5 class=""><b>SAD के साथ गठबंधन में क्या है बीजेपी का गणित?</b></h5><p>पंजाब में SAD का पारंपरिक आधार बीजेपी के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। अकाली दल को पंथिक मतदाताओं के एक हिस्से का समर्थन मिलता रहा है। ऐसे में बीजेपी के लिए SAD के साथ गठबंधन का मतलब उन मतदाताओं तक पहुंच आसान होना हो सकता है, जहां पार्टी का अपना संगठनात्मक आधार सीमित है।</p><p>दूसरी तरफ, बीजेपी को गठबंधन की स्थिति में अपनी राजनीतिक पहचान और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट रुख बनाए रखना होगा। पार्टी के भीतर यह चिंता भी बताई जा रही है कि खालिस्तान समर्थक विचारधारा के प्रति किसी भी तरह की सहानुभूति की धारणा और अमृतपाल सिंह की पार्टी अकाली दल वारिस पंजाब दे की बढ़ती लोकप्रियता के बीच संतुलन बनाना जरूरी होगा।</p><p>यानी बीजेपी के सामने दोहरी चुनौती है—एक तरफ उसे पंजाब में अपना आधार बढ़ाना है और दूसरी तरफ संभावित सहयोगी SAD के पारंपरिक वोट बैंक को अपने व्यापक चुनावी गठजोड़ में जोड़ना है।</p><h5 class=""><b>2027 के चुनाव के लिए बड़ी राजनीतिक लड़ाई</b></h5><p>पंजाब में 2027 का विधानसभा चुनाव AAP सरकार के प्रदर्शन के साथ-साथ कांग्रेस, बीजेपी और SAD की रणनीतियों की भी परीक्षा होगा। बीजेपी ने फिलहाल अपराध, भ्रष्टाचार और ड्रग्स को अपने अभियान का आधार बनाने के संकेत दिए हैं। जातीय समीकरण, युवा मतदाता और संत रविदास की विरासत के जरिए सामाजिक पहुंच बढ़ाने की कोशिश भी इसी रणनीति का हिस्सा है।</p><p>अगर SAD के साथ गठबंधन पर सहमति बनती है तो बीजेपी की चुनावी रणनीति का स्वरूप और बदल सकता है। ऐसे में सीट बंटवारे से लेकर पंथिक वोटों और शहरी मतदाताओं के बीच संतुलन तक कई सवाल महत्वपूर्ण होंगे।</p><p>फिलहाल बीजेपी जिस तरह अपने मुद्दों को तैयार कर रही है, उससे संकेत मिलता है कि पंजाब में 2027 का चुनाव केवल सत्ता के प्रदर्शन पर नहीं, बल्कि नशा, कानून-व्यवस्था, सामाजिक समीकरण और गठबंधन की राजनीति पर भी लड़ा जाएगा।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ Punjab Election 2027: BJP का ‘3C’ फॉर्मूला, जातीय समीकरण और SAD से गठबंधन पर नजर; AAP-कांग्रेस की बढ़ेगी चुनौती? ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/kejriwal-aap-rajya-sabha-6338 ]]></guid><title><![CDATA[ AAP में बगावत से केजरीवाल का बड़ा सबक, बोले- राज्यसभा भेजने से पहले 100 बार ठोक-बजाकर देखेंगे ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/kejriwal-aap-rajya-sabha-6338 ]]></link><pubDate><![CDATA[Mon, 14 Sep 2026 11:50:15 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों के बीजेपी में जाने पर पहली बार भविष्य की रणनीति को लेकर बड़ा संकेत दिया है। गो ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>आम आदमी पार्टी (AAP)</b> के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व <b>मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल</b> ने पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों के बीजेपी में जाने पर पहली बार भविष्य की रणनीति को लेकर बड़ा संकेत दिया है। गोवा में एक कार्यक्रम के दौरान केजरीवाल ने कहा कि राज्यसभा के लिए उम्मीदवार चुनते समय अब पार्टी पहले से कहीं ज्यादा सावधानी बरतेगी। उन्होंने कहा कि भविष्य में किसी व्यक्ति को राज्यसभा भेजने से पहले उसकी राजनीतिक प्रतिबद्धता को “<b>100 बार ठोक-बजाकर</b>” परखा जाएगा।</p><p>केजरीवाल ने राघव चड्ढा समेत सात राज्यसभा सांसदों के पार्टी छोड़ने को AAP के लिए दुखद घटना बताया। हालांकि, उन्होंने साथ ही यह भी दावा किया कि पार्टी के दूसरे चुने हुए प्रतिनिधियों ने अब तक जनता का भरोसा नहीं तोड़ा है।</p><h5 class=""><b>‘राज्यसभा में हमारे लिए सीख है’</b></h5><p>अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आम आदमी पार्टी के गठन के बाद से पार्टी ने कई राजनीतिक चुनौतियों का सामना किया है। उन्होंने दिल्ली का उदाहरण देते हुए कहा कि शुरुआती दौर में बीजेपी के पास सरकार बनाने के लिए कुछ और विधायकों की जरूरत थी, लेकिन AAP के विधायक नहीं टूटे।</p><p>उन्होंने गोवा का भी जिक्र किया। केजरीवाल के मुताबिक, 2022 के विधानसभा चुनाव में गोवा की जनता ने AAP को दो विधायक दिए थे और दोनों को पार्टी से अलग करने की कोशिशों के बावजूद वे साथ बने रहे। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के AAP विधायक का भी उल्लेख करते हुए कहा कि वहां भी पार्टी के एकमात्र विधायक को तोड़ने की कोशिश सफल नहीं हुई।</p><p>गुजरात का उदाहरण देते हुए केजरीवाल ने कहा कि वहां पार्टी के पांच विधायक थे, जिनमें से एक ने इस्तीफा दिया और उसके बाद हुए उपचुनाव में AAP ने बीजेपी को हरा दिया।</p><p>केजरीवाल का दावा था कि पार्टी के अधिकांश निर्वाचित प्रतिनिधियों ने जनता के साथ विश्वासघात नहीं किया है।</p><h5 class=""><b>सात सांसदों के जाने से AAP को बड़ा झटका</b></h5><p>इस साल अप्रैल में <b>राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, राजिंदर गुप्ता और विक्रम साहनी</b> ने AAP छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया था। इन सात सांसदों के जाने के बाद राज्यसभा में AAP की संख्या घटकर तीन रह गई।</p><p>इन सात सांसदों का पार्टी छोड़ना इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि वे राज्यसभा में AAP के 10 सदस्यीय दल के दो-तिहाई से अधिक हिस्से का प्रतिनिधित्व करते थे। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इसी वजह से वे दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता से बच गए।</p><p>इस घटनाक्रम ने AAP के सामने राज्यसभा में अपने प्रतिनिधित्व और पार्टी के भीतर नेतृत्व एवं उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए।</p><h5 class=""><b>‘उन्होंने पार्टी को धोखा दिया’</b></h5><p>केजरीवाल ने पार्टी छोड़ने वाले सांसदों पर सीधा हमला करते हुए कहा कि उन्हें राज्यसभा भेजने का फैसला पार्टी ने किया था, जनता ने सीधे तौर पर उन्हें नहीं चुना था। उन्होंने इसे AAP के लिए बेहद दुखद घटना बताया।</p><p>हालांकि, केजरीवाल ने यह भी कहा कि पार्टी ने अपने किसी नेता के साथ धोखा नहीं किया है। उनके मुताबिक, राज्यसभा में हुए घटनाक्रम से AAP को भविष्य के लिए सबक लेना चाहिए।</p><p>उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि आगे से राज्यसभा के उम्मीदवारों का चयन करते समय पार्टी व्यक्ति की राजनीतिक निष्ठा और विश्वसनीयता को ज्यादा गंभीरता से परखेगी।</p><h5 class=""><b>उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया पर फोकस</b></h5><p>केजरीवाल के बयान से संकेत मिलता है कि AAP अब राज्यसभा उम्मीदवारों को लेकर अपनी रणनीति में बदलाव कर सकती है। पार्टी के लिए यह अनुभव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्यसभा के सदस्य लंबे समय तक उच्च सदन में पार्टी का प्रतिनिधित्व करते हैं और कई महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दों पर पार्टी की आवाज बनते हैं।</p><p>सात सांसदों के एक साथ बीजेपी में जाने के बाद पार्टी को न सिर्फ संख्यात्मक नुकसान हुआ, बल्कि उसके राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर भी असर पड़ा। ऐसे में केजरीवाल का “100 बार ठोक-बजाकर” उम्मीदवार चुनने वाला बयान भविष्य में राज्यसभा टिकट वितरण में ज्यादा कड़े मानदंड अपनाने की ओर इशारा करता है।</p><h5 class=""><b>क्या बदल सकती है AAP की रणनीति?</b></h5><p>केजरीवाल के बयान को AAP के लिए संगठनात्मक आत्ममंथन के संकेत के तौर पर भी देखा जा सकता है। पार्टी ने जहां अपने पुराने निर्वाचित प्रतिनिधियों की निष्ठा को उदाहरण के तौर पर सामने रखा, वहीं राज्यसभा सांसदों के पार्टी छोड़ने को चयन प्रक्रिया से जुड़ी कमजोरी के रूप में स्वीकार किया।</p><p>अब देखने वाली बात होगी कि आने वाले समय में AAP राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन के लिए कौन से मानदंड तय करती है और क्या पार्टी के भीतर जिम्मेदारियां देने से पहले नेताओं की राजनीतिक पृष्ठभूमि, विचारधारा और संगठन के प्रति प्रतिबद्धता को लेकर नई व्यवस्था बनाई जाती है।</p><p>फिलहाल केजरीवाल का संदेश साफ है—राज्यसभा में दोबारा ऐसा झटका न लगे, इसके लिए उम्मीदवार चुनने में पार्टी पहले से ज्यादा सतर्क रहेगी।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ AAP में बगावत से केजरीवाल का बड़ा सबक, बोले- राज्यसभा भेजने से पहले 100 बार ठोक-बजाकर देखेंगे ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-bjp-yatra-2027-6294 ]]></guid><title><![CDATA[ Punjab BJP Plan: 4 यात्राएं, 4000 KM का सफर और 117 सीटों पर फोकस, 18 सितंबर से AAP के खिलाफ सियासी अभियान ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-bjp-yatra-2027-6294 ]]></link><pubDate><![CDATA[Fri, 11 Sep 2026 20:30:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ Punjab News: पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी के बीच भारतीय जनता पार्टी ने राज्य में अपना चुनावी अभियान तेज करने की रणनीति तैयार की है। पार्टी सभी 117 विधानसभा सीटों तक पहुंच बनाने के लिए चार अलग-अ ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>Punjab News: </b>पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी के बीच भारतीय जनता पार्टी ने राज्य में अपना चुनावी अभियान तेज करने की रणनीति तैयार की है। पार्टी सभी 117 विधानसभा सीटों तक पहुंच बनाने के लिए चार अलग-अलग<b> ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ </b>निकालेगी। इन यात्राओं के जरिए बीजेपी राज्य के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचने के साथ ड्रग्स, भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों को चुनावी बहस के केंद्र में लाने की कोशिश करेगी।</p><p>चारों यात्राओं का आगाज 18 से 21 सितंबर के बीच होगा और इनके जरिए करीब 4,000 किलोमीटर की दूरी तय की जाएगी। अभियान के समापन के बाद 30 सितंबर को जालंधर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की जनसभा प्रस्तावित है। इस कार्यक्रम को बीजेपी के बड़े राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है।</p><h5 class=""><b>18 सितंबर को पहली यात्रा का आगाज</b></h5><p>बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन 18 सितंबर को पठानकोट जिले के माधोपुर सुजानपुर स्थित एकता स्थल से पहली यात्रा को रवाना करेंगे। यह स्थान भारतीय जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी के स्मारक के पास स्थित है।</p><p>पार्टी की योजना सिर्फ एक इलाके तक सीमित रहने की नहीं है। चारों यात्राओं को इस तरह तैयार किया गया है कि पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों को अभियान से जोड़ा जा सके। बीजेपी का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और लोगों के बीच अपने मुद्दों को लेकर सीधा संवाद स्थापित करना है।</p><h5 class=""><b>ड्रग्स के साथ भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था भी मुद्दा</b></h5><p>बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों के मुताबिक, यात्राओं का फोकस सिर्फ नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान तक सीमित नहीं रहेगा। पार्टी पंजाब की तीन प्रमुख समस्याओं—ड्रग्स, भ्रष्टाचार और बिगड़ती कानून-व्यवस्था—को प्रमुखता से उठाएगी।</p><p>बीजेपी का आरोप है कि भ्रष्टाचार और प्रशासनिक समस्याएं निचले स्तर से लेकर सत्ता के शीर्ष तक फैली हुई हैं। पार्टी इन मुद्दों के जरिए आम आदमी पार्टी सरकार को घेरने की तैयारी में है।</p><p>ढिल्लों ने भगवंत मान सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि जो लोग ड्रग्स के खिलाफ सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाते हैं, उन्हें परेशान किया जा रहा है। उनका कहना है कि लोकतंत्र में सरकार से सवाल पूछना नागरिकों का अधिकार है और आलोचना का जवाब कार्रवाई के बजाय जवाबदेही के साथ दिया जाना चाहिए।</p><p>हालांकि, सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई पक्ष इस उपलब्ध सामग्री में शामिल नहीं है। इसलिए बीजेपी के आरोपों को पार्टी के राजनीतिक दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।</p><h5 class=""><b>पंजाब की युवा पीढ़ी को लेकर बीजेपी का फोकस</b></h5><p>बीजेपी ने नशे की समस्या को पंजाब की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान से जोड़ते हुए इसे गंभीर चुनौती बताया है। पार्टी का कहना है कि नशे की वजह से परिवारों पर सबसे अधिक असर पड़ रहा है और युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है।</p><p>यात्राओं के जरिए बीजेपी नशामुक्ति और युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता देने की कोशिश करेगी। पार्टी का तर्क है कि पंजाब के युवाओं की पहचान सेना, खेल और देशसेवा से रही है, लेकिन नशे की समस्या इस तस्वीर को बदल रही है।</p><p>यानी बीजेपी का यह अभियान सिर्फ राजनीतिक रैलियों तक सीमित रखने के बजाय सामाजिक मुद्दे के रूप में भी पेश करने की कोशिश की जा रही है।</p><h5 class=""><b>पहली यात्रा का रूट काफी लंबा</b></h5><p>18 सितंबर से शुरू होने वाली पहली यात्रा <b>सुजानपुर</b> से आगे बढ़ेगी। इसका रास्ता <b>पठानकोट, भोआ, दीनानगर, गुरदासपुर, कादियां, श्री हरगोबिंदपुर, बटाला, फतेहगढ़ चूड़ियां और डेरा बाबा नानक से होकर अजनाला, राजा सांसी, अटारी और अमृतसर</b> तक जाएगा।</p><p>इसके बाद यात्रा <b>मजीठा, जंडियाला, बाबा बकाला, तरनतारन, खडूर साहिब, खेमकरण और पट्टी होते हुए फिरोजपुर</b> क्षेत्र में पहुंचेगी। फिर <b>गुरु हर सहाय, फिरोजपुर ग्रामीण, जीरा, सुल्तानपुर लोधी, भोलाथ, कपूरथला, नकोदर और शाहकोट</b> से होते हुए <b>जालंधर कैंट</b> में इसका समापन होगा।</p><p>इस रूट के जरिए बीजेपी पंजाब के माझा, दोआबा और मालवा क्षेत्रों के बड़े हिस्से को अभियान से जोड़ने की कोशिश करेगी।</p><h5 class=""><b>दूसरी यात्रा में दोआबा और मालवा के कई क्षेत्र</b></h5><p>19 सितंबर को दूसरी यात्रा गुरुद्वारा श्री फतेहगढ़ साहिब से शुरू होगी। यह <b>समराला, पायल, खन्ना, अमलोह, फतेहगढ़ साहिब</b> और <b>बस्सी पठाना</b> से आगे बढ़ते हुए <b>डेराबस्सी, मोहाली, खरड़ और चमकौर साहिब </b>पहुंचेगी।</p><p>इसके बाद <b>रोपड़, आनंदपुर साहिब, गढ़शंकर, चब्बेवाल </b>और <b>होशियारपुर</b> के रास्ते शाम <b>चौरासी, दसूया, मुकेरियां, उर्मर</b> और <b>आदमपुर</b> को कवर किया जाएगा। यात्रा <b>बलाचौर, नवांशहर, बंगा</b> और<b> फगवाड़ा</b> से होते हुए <b>जालंधर</b> में समाप्त होगी।</p><h5 class=""><b>तीसरी यात्रा मालवा क्षेत्र पर केंद्रित</b></h5><p>20 सितंबर को तीसरी यात्रा फाजिल्का के सादीकी बॉर्डर स्थित आसफवाला 1971 युद्ध स्मारक से शुरू होगी। इसका रूट <b>फाजिल्का, बल्लुआना</b> और <b>अबोहर</b> से होते हुए <b>जलालाबाद और श्री मुक्तसर साहिब </b>तक जाएगा।</p><p>इसके बाद यात्रा<b> मलोट, गिद्दड़बाहा, जैतो, कोटकपूरा, फरीदकोट, बाघा पुराना, निहाल सिंह वाला, धर्मकोट और मोगा</b> पहुंचेगी। आगे <b>जगराओं, रायकोट, दाखा, मलेरकोटला, अमरगढ़, गिल </b>और <b>साहनेवाल</b> से होते हुए इसका समापन <b>लुधियाना अर्बन</b> में होगा।</p><p>यह रूट खास तौर पर पंजाब के मालवा क्षेत्र में बीजेपी की पहुंच बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।</p><h5 class=""><b>चौथी यात्रा में बठिंडा से पटियाला तक फोकस</b></h5><p>21 सितंबर को चौथी यात्रा तलवंडी साबो स्थित गुरुद्वारा <b>श्री दमदमा साहिब</b> से शुरू होगी। यात्रा <b>मौर, रामपुरा फूल, भूच्चो मंडी, बठिंडा ग्रामीण और बठिंडा शहरी</b> से आगे बढ़ेगी।</p><p>इसके बाद <b>मानसा, सरदूलगढ़, बुढलाडा, भदौड़, बरनाला, महल कलां, धूरी, संगरूर, सुनाम, दिरबा </b>और <b>लहरा </b>को कवर किया जाएगा। आगे <b>शुतराना, नाभा, पटियाला ग्रामीण, पटियाला शहरी, सनौर और राजपुरा</b> से होते हुए यात्रा <b>जालंधर </b>में समाप्त होगी।</p><p>इस तरह चारों यात्राओं के जरिए बीजेपी पंजाब के लगभग हर प्रमुख राजनीतिक क्षेत्र में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की योजना पर काम कर रही है।</p><h5 class=""><b>30 सितंबर को अमित शाह की जनसभा</b></h5><p>चारों यात्राओं के बाद 30 सितंबर को जालंधर में गृह मंत्री अमित शाह की जनसभा प्रस्तावित है। इससे बीजेपी के अभियान को राष्ट्रीय स्तर का राजनीतिक चेहरा भी मिलेगा।</p><p>पार्टी की रणनीति को देखें तो यात्राओं के जरिए स्थानीय स्तर पर संपर्क, संगठन को सक्रिय करने और सरकार के खिलाफ मुद्दों को जमीन तक पहुंचाने की कोशिश होगी, जबकि अमित शाह की जनसभा के जरिए अभियान का बड़ा समापन कार्यक्रम तैयार किया गया है।</p><h5 class=""><b>AAP के लिए क्यों बढ़ सकती है चुनौती?</b></h5><p>पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है और बीजेपी अब विधानसभा चुनाव से काफी पहले राज्य में अपना संगठनात्मक और राजनीतिक अभियान तेज कर रही है। चार यात्राओं का 4,000 किलोमीटर का प्रस्तावित सफर पार्टी को बड़ी संख्या में विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंचने का अवसर देगा।</p><p>ड्रग्स का मुद्दा पंजाब की राजनीति में पहले से संवेदनशील रहा है। ऐसे में बीजेपी इसे भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था के साथ जोड़कर सरकार के खिलाफ व्यापक राजनीतिक नैरेटिव बनाने की कोशिश कर रही है।</p><p>हालांकि, इस अभियान का वास्तविक चुनावी असर कितना होगा, यह आने वाले महीनों में पार्टी की जमीनी सक्रियता, स्थानीय उम्मीदवारों और विपक्षी दलों की रणनीति पर निर्भर करेगा। फिलहाल बीजेपी ने साफ संकेत दिया है कि 2027 के चुनाव को लेकर वह राज्य में अपनी तैयारियां तेज करने जा रही है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ Punjab BJP Plan: 4 यात्राएं, 4000 KM का सफर और 117 सीटों पर फोकस, 18 सितंबर से AAP के खिलाफ सियासी अभियान ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/sukhbir-badal-sit-6280 ]]></guid><title><![CDATA[ Sukhbir Badal SIT: सुखबीर बादल SIT के सामने नहीं हुए पेश, मेडिकल और पारिवारिक व्यस्तताओं का दिया हवाला ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/sukhbir-badal-sit-6280 ]]></link><pubDate><![CDATA[Fri, 11 Sep 2026 12:38:54 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ पंजाब: शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल तय समय के अनुसार विशेष जांच टीम (SIT) के सामने पेश नहीं हुए। उन्होंने अपनी गैरहाजिरी को लेकर SIT को ईमेल के जरिए लिखित जवाब भेजा है। इसमें उन्होंने  ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>पंजाब: शिरोमणि अकाली दल</b> के <b>अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल </b>तय समय के अनुसार विशेष जांच टीम (SIT) के सामने पेश नहीं हुए। उन्होंने अपनी गैरहाजिरी को लेकर SIT को ईमेल के जरिए लिखित जवाब भेजा है। इसमें उन्होंने पेश न हो पाने के पीछे मेडिकल जांच, राजनीतिक रैलियों और पारिवारिक कार्यक्रमों में व्यस्तता का हवाला दिया है।</p><h5 class=""><b>SIT को ईमेल के जरिए भेजा जवाब</b></h5><p>सुखबीर सिंह बादल ने SIT को भेजे अपने जवाब में अपनी व्यस्तताओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मेडिकल चेकअप के साथ-साथ पहले से निर्धारित रैलियों और पारिवारिक कार्यक्रमों के चलते वह तय समय पर जांच टीम के सामने उपस्थित नहीं हो सके।</p><p>हालांकि, उन्होंने जांच में शामिल होने से इनकार नहीं किया है। अपने लिखित जवाब में उन्होंने स्पष्ट किया कि आगे SIT की ओर से जब भी उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा, वह जांच टीम के समक्ष उपस्थित होंगे।</p><h5 class=""><b>30 तारीख के बाद पेश होने की बात</b></h5><p>सुखबीर बादल ने अपने जवाब में कहा है कि 30 तारीख के बाद SIT जब भी उन्हें बुलाएगी, वह उसके सामने जरूर पेश होंगे। इससे संकेत मिलता है कि उनकी मौजूदा गैरहाजिरी को स्थायी तौर पर जांच से दूरी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।</p><p>अब SIT की ओर से आगे की तारीख तय किए जाने का इंतजार है। अगली तारीख पर सुखबीर बादल की पेशी इस मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।</p><h5 class=""><b>राजनीतिक तौर पर भी अहम मामला</b></h5><p>सुखबीर बादल की SIT के सामने प्रस्तावित पेशी पंजाब की राजनीति के लिहाज से भी चर्चा में है। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष होने के कारण इस मामले में उनकी पूछताछ पर राजनीतिक दलों की भी नजर है।</p><p>फिलहाल उन्होंने अपनी अनुपस्थिति के कारणों की जानकारी SIT को लिखित रूप में दे दी है और अगली तारीख मिलने पर जांच में शामिल होने की बात कही है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ Sukhbir Badal SIT: सुखबीर बादल SIT के सामने नहीं हुए पेश, मेडिकल और पारिवारिक व्यस्तताओं का दिया हवाला ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/aap-national-team-punjab-6274 ]]></guid><title><![CDATA[ AAP की नई National Team में पंजाब के सिर्फ 3 चेहरे, भगवंत मान-हरपाल चीमा को PAC में जगह; क्या है संदेश? ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/aap-national-team-punjab-6274 ]]></link><pubDate><![CDATA[Fri, 11 Sep 2026 11:05:33 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ चंडीगढ़: आम आदमी पार्टी ने अपनी नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान कर दिया है। 15वीं राष्ट्रीय परिषद की बैठक में अरविंद केजरीवाल को एक बार फिर पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक चुना गया। इसके साथ ही 23 सदस्यीय राष्ट्र ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>चंडीगढ़:</b> आम आदमी पार्टी ने अपनी नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान कर दिया है। 15वीं राष्ट्रीय परिषद की बैठक में <b>अरविंद केजरीवाल</b> को एक बार फिर पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक चुना गया। इसके साथ ही 23 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी और 11 सदस्यीय पॉलिटिकल अफेयर्स कमिटी (PAC) का नया ढांचा भी सामने आया है। खास बात यह है कि पंजाब में सरकार चला रही AAP की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में राज्य से केवल तीन नेताओं को जगह मिली है।</p><p>इनमें <b>मुख्यमंत्री भगवंत मान, वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा और मुख्यमंत्री के OSD राजबीर सिंह घुमन</b> शामिल हैं। मान और चीमा को पार्टी की सबसे महत्वपूर्ण निर्णय लेने वाली संस्था PAC में भी जगह मिली है। वहीं, पंजाब AAP के प्रदेश अध्यक्ष और वरिष्ठ मंत्री अमन अरोड़ा को राष्ट्रीय कार्यकारिणी और PAC दोनों से बाहर रखा गया है। इसी फैसले ने पंजाब की राजनीति में नई चर्चा को जन्म दिया है।</p><h5 class=""><b>पंजाब से तीन नाम, लेकिन संदेश बड़ा</b></h5><p>AAP के लिए पंजाब इस समय बेहद अहम है, क्योंकि दिल्ली में फरवरी 2025 के विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद पार्टी की सरकार अब सिर्फ पंजाब में है। ऐसे में यह उम्मीद स्वाभाविक थी कि राष्ट्रीय संगठन में पंजाब को अपेक्षाकृत ज्यादा प्रतिनिधित्व मिलेगा।</p><p>लेकिन नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी में राज्य से तीन ही नाम शामिल किए गए हैं। इनमें सबसे प्रमुख भगवंत मान हैं। मुख्यमंत्री के साथ-साथ वह पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व से बाहर AAP के सबसे बड़े राजनीतिक चेहरों में भी गिने जाते हैं।</p><p>हरपाल चीमा को PAC में जगह मिलना भी महत्वपूर्ण है। वह पंजाब सरकार में वित्त मंत्री हैं और विधानसभा में सरकार के प्रमुख राजनीतिक बचावकर्ताओं में शामिल रहे हैं।</p><h5 class=""><b>राजबीर घुमन की एंट्री ने खींचा ध्यान</b></h5><p>नई टीम में सबसे ज्यादा चर्चा राजबीर सिंह घुमन को लेकर हो रही है। वह न तो मंत्री हैं और न ही निर्वाचित प्रतिनिधि। इसके बावजूद उन्हें राष्ट्रीय कार्यकारिणी में जगह मिली है।</p><p>उनकी राजनीतिक अहमियत को मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ उनकी नजदीकी और संगठनात्मक कामकाज में भूमिका से जोड़कर देखा जा रहा है। इस नियुक्ति को पंजाब में मान के बढ़ते प्रभाव के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है।</p><p>हालांकि घुमन का नाम हाल के दिनों में एक कारोबारी सहयोगी से जुड़े ED मामले को लेकर भी चर्चा में रहा है। घुमन ने अपने संबंधों का बचाव करते हुए जांच को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया था। हालांकि किसी भी जांच में लगे आरोपों का अंतिम निष्कर्ष संबंधित कानूनी प्रक्रिया से ही तय होगा।</p><h5 class=""><b>अमन अरोड़ा को दोनों अहम पैनल से बाहर रखा</b><br></h5><p>पंजाब AAP के अध्यक्ष अमन अरोड़ा को नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी और PAC दोनों में जगह नहीं मिली है। इस फैसले ने पार्टी के भीतर शक्ति संतुलन को लेकर सवाल खड़े किए हैं।</p><p>हालांकि AAP के एक नेता ने इसे ज्यादा महत्व नहीं देने की बात कही। उनका तर्क था कि पार्टी में अलग-अलग नेताओं को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी जाती हैं और हर पद के लिए किसी व्यक्ति का किसी खास पैनल में शामिल होना जरूरी नहीं है।</p><p>अमन अरोड़ा की ओर से इस फैसले पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।</p><h5 class=""><b>हरपाल चीमा को मिला नेतृत्व का भरोसा?</b></h5><p>हरपाल चीमा को PAC में जगह ऐसे समय मिली है जब पंजाब की राजनीति में उनके खिलाफ विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। उनके विधानसभा क्षेत्र दिरबा से जुड़े गुलजार सिंह की मौत के मामले को लेकर विपक्ष ने उन्हें निशाना बनाया है। इस मामले में गिरफ्तारियां भी हुई हैं, जबकि घटनाक्रम की जांच और आरोपों पर कानूनी प्रक्रिया जारी है।</p><p>चीमा ने राष्ट्रीय टीम में जगह मिलने पर पार्टी नेतृत्व का आभार जताया और कहा कि वह एक वफादार कार्यकर्ता की तरह पार्टी के लिए मेहनत करेंगे। उनकी नई जिम्मेदारी को पार्टी नेतृत्व के भरोसे के तौर पर देखा जा रहा है।</p><h5 class=""><b>विपक्ष ने बताया Power Struggle का संकेत</b></h5><p>AAP की नई टीम को लेकर विपक्ष ने भी निशाना साधा है। शिरोमणि अकाली दल के प्रवक्ता परमबंस सिंह रोमाना ने राजबीर घुमन की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए इसे भगवंत मान के करीबियों के बढ़ते प्रभाव से जोड़ा।</p><p>वहीं पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने दावा किया कि AAP में दो अलग-अलग शक्ति केंद्र उभरते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने अमन अरोड़ा को दोनों प्रमुख राष्ट्रीय निकायों से बाहर रखे जाने और मुख्यमंत्री के OSD को राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल किए जाने को इसी संदर्भ में देखने की बात कही।</p><p>हालांकि ये विपक्षी नेताओं के राजनीतिक आरोप हैं और इन्हें पार्टी के भीतर वास्तविक शक्ति संघर्ष का स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।</p><h5 class=""><b>केजरीवाल फिर राष्ट्रीय संयोजक</b></h5><p>नई टीम में सबसे महत्वपूर्ण फैसला अरविंद केजरीवाल को फिर से राष्ट्रीय संयोजक चुना जाना है। पार्टी गठन के समय से ही वह इस पद पर रहे हैं। नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी में उनके करीबी सहयोगी विभव कुमार समेत आतिशी, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, गोपाल राय, दुर्गेश पाठक और कई अन्य नेताओं को जगह मिली है।</p><p>पांच विशेष आमंत्रित सदस्यों में <b>अजय दत्त, चैतर वसावा, इमरान हुसैन, मेहराज मलिक </b>और <b>वेंज़ी विएगास</b> शामिल हैं।</p><p>AAP के प्रवक्ता <b>मलविंदर सिंह कांग</b> ने नियुक्तियों को अनुभव और योग्यता पर आधारित बताया। उनके मुताबिक नई टीम में पार्टी के अलग-अलग हिस्सों का प्रतिनिधित्व है और इसका उद्देश्य संगठन को मजबूत करना है।</p><p>कुल मिलाकर, नई राष्ट्रीय टीम में पंजाब से सीमित प्रतिनिधित्व के बावजूद भगवंत मान और हरपाल चीमा को PAC में जगह मिलना महत्वपूर्ण है। वहीं राजबीर घुमन की एंट्री और अमन अरोड़ा की गैरमौजूदगी ने पंजाब AAP के भीतर संगठनात्मक प्राथमिकताओं और नेतृत्व के समीकरणों पर चर्चा जरूर तेज कर दी है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ AAP की नई National Team में पंजाब के सिर्फ 3 चेहरे, भगवंत मान-हरपाल चीमा को PAC में जगह; क्या है संदेश? ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/lakha-sidhana-maur-punjab-election-6263 ]]></guid><title><![CDATA[ Punjab Election: अमृतपाल की पार्टी ने लक्खा सिढाना को मौड़ से उतारा, 25 मामलों के कारण फिर चर्चा में ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/lakha-sidhana-maur-punjab-election-6263 ]]></link><pubDate><![CDATA[Thu, 10 Sep 2026 13:54:33 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ चंडीगढ़: पंजाब की राजनीति में अकाली दल (वारिस पंजाब दे) ने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर दो और उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया है। जेल में बंद अमृतपाल सिंह से जुड़ी इस पार्टी ने लखबीर सिंह सिढाना उर्फ  ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>चंडीगढ़:</b> पंजाब की राजनीति में <b>अकाली दल (वारिस पंजाब दे)</b> ने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर दो और उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया है। जेल में बंद <b>अमृतपाल सिंह</b> से जुड़ी इस पार्टी ने लखबीर सिंह सिढाना उर्फ लक्खा सिढाना को मौड़ विधानसभा सीट से प्रत्याशी बनाया है। वहीं, तलवंडी साबो सीट से दिवंगत पंजाबी अभिनेता और नेता दीप सिद्धू के भाई <b>मनदीप सिंह सिद्धू</b> को मैदान में उतारने का फैसला किया गया है।</p><p>दोनों नामों की घोषणा अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह ने की। मौड़ सीट से टिकट को लेकर लखबीर सिढाना और मनदीप सिंह सिद्धू के बीच दावेदारी की चर्चा पहले से थी। आखिरकार पार्टी ने <b>लखबीर सिढाना</b> को मौड़ से और<b> मनदीप सिंह सिद्धू </b>को तलवंडी साबो से चुनाव लड़ाने का निर्णय लिया।</p><h5 class=""><b>कौन हैं लखबीर सिंह सिढाना?</b></h5><p>लखबीर सिंह सिढाना बठिंडा जिले के सिढाना गांव के रहने वाले हैं। राजनीति में आने से पहले भी वह पंजाब में विभिन्न सामाजिक और किसान मुद्दों को लेकर सक्रिय रहे हैं। उन्होंने पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला से ग्रेजुएशन किया है।</p><p>मौड़ विधानसभा सीट से यह उनका पहला चुनाव नहीं होगा। 2022 में वह निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मौड़ से विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं, हालांकि उन्हें जीत नहीं मिली थी। इसके बाद भी वह क्षेत्र में अपनी राजनीतिक सक्रियता बनाए रखने का दावा करते रहे हैं।</p><p>अब अकाली दल (WPD) ने उन्हें आधिकारिक उम्मीदवार बनाकर इस सीट पर दोबारा चुनावी मैदान में उतारा है।</p><h5 class=""><b>आपराधिक मामलों को लेकर भी चर्चा</b></h5><p>लखबीर सिढाना का नाम लंबे समय से विवादों में भी रहा है। 2024 के बठिंडा लोकसभा चुनाव के दौरान दाखिल उनके चुनावी हलफनामे में 14 आपराधिक मामलों का उल्लेख था। वहीं, उपलब्ध रिपोर्ट में पुलिस के हवाले से उनके खिलाफ मौजूदा समय में करीब 25 मामले दर्ज होने की जानकारी दी गई है।</p><p>बताए गए मामलों में हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण और आर्म्स एक्ट समेत कई गंभीर धाराओं से जुड़े मामले शामिल हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज होना अपने आप में उसे दोषी साबित नहीं करता। इन मामलों में आरोपों का अंतिम निर्धारण संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के जरिए ही होगा।</p><h5 class=""><b>किसान आंदोलन के दौरान भी आए थे चर्चा में</b></h5><p>2021 में केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ चले किसान आंदोलन के दौरान भी लक्खा सिढाना सुर्खियों में आए थे। उन पर लाल किले के पास हुई हिंसा के लिए प्रदर्शनकारियों को उकसाने के आरोप लगे थे। हालांकि, सिढाना इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं।</p><p>उनका कहना है कि उन्होंने अपराध की दुनिया से दूरी बना ली है और अब सामाजिक गतिविधियों पर ध्यान दे रहे हैं। वह गरीब परिवारों की बेटियों के सामूहिक विवाह जैसे सामाजिक कार्यों से जुड़ने का दावा भी करते हैं।</p><p>2017 में अंग्रेजी में लगे साइनबोर्ड के खिलाफ अभियान को लेकर भी उनका नाम चर्चा में आया था। उस समय उन्हें गिरफ्तार कर फरीदकोट मॉडर्न जेल भेजे जाने की जानकारी सामने आई थी। जेल से उन्होंने फेसबुक लाइव के जरिए किसानों से धान की पराली नहीं जलाने की अपील भी की थी।</p><h5 class=""><b>पहले People's Party of Punjab से जुड़े थे</b></h5><p>लखबीर सिढाना ने 2011 में People's Party of Punjab का रुख किया था। हालांकि, करीब दो साल बाद उन्होंने पार्टी से दूरी बना ली। इसके बाद उनकी सक्रियता मुख्य रूप से सामाजिक और जन मुद्दों से जुड़ी रही।</p><p>2024 के लोकसभा चुनाव में अमृतपाल सिंह के परिवार द्वारा सिढाना को समर्थन दिए जाने की बात भी सामने आई थी। अब उसी राजनीतिक समीकरण के बीच उन्हें मौड़ से विधानसभा चुनाव का टिकट दिया गया है।</p><h5 class=""><b>मनदीप सिद्धू को तलवंडी साबो से टिकट</b></h5><p>पार्टी ने तलवंडी साबो से मनदीप सिंह सिद्धू को उम्मीदवार बनाया है। वह दिवंगत अभिनेता और नेता दीप सिद्धू के भाई हैं और पेशे से वकील बताए जाते हैं।</p><p>इससे पहले उनके नाम की चर्चा 2024 में गिद्दड़बाहा विधानसभा उपचुनाव के दौरान भी हुई थी। हालांकि, पंथिक वोटों के बंटवारे से बचने के लिए उन्होंने अपनी दावेदारी वापस ले ली थी।</p><p>मनदीप का राजनीतिक सफर अमृतपाल के साथ मतभेदों के कारण भी चर्चा में रहा है। दीप सिद्धू की मौत के बाद जब अमृतपाल सिंह ने 'वारिस पंजाब दे' की कमान संभाली, तब मनदीप ने सार्वजनिक रूप से उससे दूरी जताई थी। उन्होंने कहा था कि उनके भाई ने संगठन की स्थापना अलग सोच के साथ की थी और वह अमृतपाल की विचारधारा से सहमत नहीं थे।</p><p>अब उसी संगठन से चुनावी टिकट मिलना पंजाब की राजनीति में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है।</p><h5 class=""><b>अमृतपाल के चुनाव लड़ने की अटकलों पर विराम</b></h5><p>मनदीप सिंह सिद्धू को तलवंडी साबो से उम्मीदवार बनाए जाने के बाद उन अटकलों पर भी विराम लगता दिखाई दे रहा है कि अमृतपाल सिंह खुद इस सीट से विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं।</p><p>पार्टी इससे पहले पपलप्रीत सिंह को मजीठा और सतवंत सिंह को बस्सी पठाना से उम्मीदवार घोषित कर चुकी है। इस तरह अकाली दल (WPD) धीरे-धीरे अपने विधानसभा चुनावी समीकरण को स्पष्ट कर रहा है।</p><p>अब मौड़ में लक्खा सिढाना की उम्मीदवारी और तलवंडी साबो में मनदीप सिद्धू की एंट्री से पंजाब चुनाव की राजनीति में मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ Punjab Election: अमृतपाल की पार्टी ने लक्खा सिढाना को मौड़ से उतारा, 25 मामलों के कारण फिर चर्चा में ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/raghav-chadha-voter-list-row-6256 ]]></guid><title><![CDATA[ राघव चड्ढा के Voter ID विवाद पर चुनाव आयोग का जवाब, कहा- 26 अगस्त को Form 6 दाखिल, 2 सितंबर को मिली मंजूरी ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/raghav-chadha-voter-list-row-6256 ]]></link><pubDate><![CDATA[Thu, 10 Sep 2026 11:54:10 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ नई दिल्ली: बीजेपी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के दिल्ली की मतदाता सूची में नाम शामिल होने को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) और चुनाव अधिकारियों के बीच विवाद बढ़ गया है। AAP ने आरोप लगाया है कि चड्ढा का ना ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>नई दिल्ली: </b>बीजेपी के राज्यसभा सांसद <b>राघव चड्ढा</b> के दिल्ली की मतदाता सूची में नाम शामिल होने को लेकर <b>आम आदमी पार्टी (AAP)</b> और चुनाव अधिकारियों के बीच विवाद बढ़ गया है। AAP ने आरोप लगाया है कि चड्ढा का नाम <b>“पिछले दरवाजे से” </b>राजिंदर नगर की वोटर लिस्ट में जोड़ा गया। वहीं, दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय ने इन आरोपों पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि चड्ढा ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत 26 अगस्त को Form 6 के जरिए आवेदन किया था और जरूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसे 2 सितंबर को मंजूरी दी गई।</p><h5 class=""><b>26 अगस्त को दाखिल हुआ था Form 6</b></h5><p>दिल्ली CEO कार्यालय के मुताबिक उपलब्ध रिकॉर्ड में राघव चड्ढा का नाम AC-39 यानी राजिंदर नगर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए 26 अगस्त को Form 6 के जरिए आवेदन दर्ज है।</p><p>Form 6 का इस्तेमाल किसी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल कराने या नया मतदाता पंजीकरण कराने के लिए किया जाता है। कार्यालय ने आवेदन का नंबर U05039D6N2608261200000 भी बताया है।</p><p>निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार, आवेदन पर तय प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की गई। अनिवार्य सात दिन की नोटिस अवधि पूरी होने के बाद निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) ने आवेदन को मंजूरी दी।</p><h5 class=""><b>AAP ने उठाए सवाल</b></h5><p>चड्ढा के दिल्ली में मतदाता के रूप में पंजीकरण को लेकर AAP ने कई सवाल खड़े किए हैं। पार्टी का कहना है कि राघव चड्ढा पहले पंजाब में मतदाता के तौर पर पंजीकृत थे। अप्रैल में बीजेपी में शामिल होने के लिए AAP छोड़ने के बाद पंजाब की Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया के दौरान उनका नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटा दिया गया था।</p><p>AAP के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने आरोप लगाया कि इसके बाद दिल्ली में चड्ढा का नाम “पिछले दरवाजे से” जोड़ा गया। उन्होंने मांग की कि उनका Form 6 सार्वजनिक किया जाए और आम नागरिकों की तरह लोगों को उस पर आपत्ति दर्ज कराने का अवसर मिले।</p><p>ढांडा ने यह भी सवाल उठाया कि 1 से 7 सितंबर के बीच राजिंदर नगर में मिले Form 6 में चड्ढा का नाम नहीं था, फिर ड्राफ्ट सूची में उनका नाम 747वें क्रम पर कैसे दिखाई देने लगा।</p><h5 class=""><b>CEO कार्यालय ने बताई पूरी प्रक्रिया</b></h5><p>AAP के सवालों के जवाब में दिल्ली CEO कार्यालय ने कहा कि नियमों के तहत कोई भी पात्र व्यक्ति, जिसका नाम मतदाता सूची में नहीं है, आवश्यक दस्तावेजों के साथ Form 6 दाखिल कर सकता है।</p><p>कार्यालय ने यह भी स्पष्ट किया कि SIR के दौरान किसी नए नाम को मंजूरी मिलने के बाद उसे ड्राफ्ट सूची में पहले से मौजूद आखिरी क्रम संख्या के बाद जोड़ा जा सकता है। इसलिए डेटाबेस में नाम दिखाई देने और अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने की प्रक्रिया को अलग-अलग चरणों के तौर पर समझना होगा।</p><p>CEO कार्यालय के मुताबिक अंतिम मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया पूरी होने, सभी दावों और आपत्तियों का निपटारा होने के बाद प्रकाशित की जाती है।</p><h5 class=""><b>Punjab SIR में क्यों हटाया गया था नाम?</b></h5><p>राघव चड्ढा उन करोड़ों नामों में शामिल बताए गए हैं जिन्हें पंजाब में SIR के तहत तैयार की गई ड्राफ्ट मतदाता सूची से बाहर किया गया। पंजाब की ड्राफ्ट सूची 13 अगस्त को प्रकाशित हुई थी।</p><p>उपलब्ध विवरण के अनुसार, हटाए गए नामों की श्रेणियों में अनुपस्थित मतदाता, दूसरी जगह स्थानांतरित हो चुके मतदाता, मृत मतदाता और डुप्लिकेट प्रविष्टियां शामिल थीं। चड्ढा का नाम भी हटाए गए नामों की सूची में शामिल था।</p><p>अब दिल्ली में उनके नए पंजीकरण को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। एक तरफ AAP प्रक्रिया पर सवाल उठा रही है, वहीं दिल्ली CEO कार्यालय का कहना है कि आवेदन निर्धारित नियमों के तहत दाखिल और मंजूर हुआ।</p><p>फिलहाल विवाद का केंद्र यह है कि चड्ढा का Form 6 किस आधार पर स्वीकार किया गया और उनकी दिल्ली की मतदाता सूची में प्रविष्टि किस प्रक्रिया के तहत हुई। चुनाव अधिकारी इसे तय प्रक्रिया के अनुरूप बता रहे हैं, जबकि AAP दस्तावेज सार्वजनिक करने और आपत्ति का अवसर देने की मांग कर रही है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ राघव चड्ढा के Voter ID विवाद पर चुनाव आयोग का जवाब, कहा- 26 अगस्त को Form 6 दाखिल, 2 सितंबर को मिली मंजूरी ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/rajesh-kumar-gehriwal-chirag-paswan-punjab-issues-6255 ]]></guid><title><![CDATA[ बठिंडा के नेता राजेश कुमार गेहरीवाल ने केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान से की मुलाकात, पंजाब के मुद्दों पर सौंपा ज्ञापन ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/rajesh-kumar-gehriwal-chirag-paswan-punjab-issues-6255 ]]></link><pubDate><![CDATA[Thu, 10 Sep 2026 12:00:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ बठिंडा: बठिंडा के नेता राजेश कुमार गेहरीवाल ने केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान से मुलाकात की और पंजाब से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर उन्हें एक ज्ञापन सौंपा। मुलाकात के दौरान पंजाब के हितों औ ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>बठिंडा:</b> बठिंडा के नेता राजेश कुमार गेहरीवाल ने केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान से मुलाकात की और पंजाब से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर उन्हें एक ज्ञापन सौंपा। मुलाकात के दौरान पंजाब के हितों और प्रदेश से जुड़े प्रमुख विषयों पर चर्चा की गई।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">राजेश कुमार गेहरीवाल ने केंद्रीय मंत्री के सामने पंजाब से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से रखा और इन मामलों में केंद्र सरकार के स्तर पर आवश्यक कार्रवाई की मांग की। उन्होंने पंजाब के लोगों से जुड़े विषयों पर केंद्र का ध्यान आकर्षित करने का आग्रह किया।</span></p><p>मुलाकात के दौरान पंजाब के विकास, राज्य के हितों और जनता से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर चर्चा हुई। गेहरीवाल ने ज्ञापन के माध्यम से अपनी मांगों और सुझावों को केंद्रीय मंत्री के समक्ष रखा।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब पंजाब से जुड़े कई मुद्दे केंद्र और राज्य के बीच राजनीतिक चर्चा का विषय बने हुए हैं। हाल के दिनों में अंतरराज्यीय जल समझौतों और पंजाब के अधिकारों को लेकर भी राज्य में राजनीतिक गतिविधियां तेज हुई हैं।</span></p><p><img src="https://media.gtcbharat.com/wp-content/uploads/2026/09/Screenshot-2026-09-10-114837_7377ca0f8aab85b955a30410efe9638c_681X392.webp" style="width: 680.98px;"><span style="font-size: 1rem;"><br></span></p><h5 class=""><b>केंद्र के सामने पंजाब की आवाज रखने पर जोर</b></h5><p>राजेश कुमार गेहरीवाल ने कहा कि पंजाब से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों को केंद्र सरकार के समक्ष मजबूती से उठाया जाना जरूरी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ज्ञापन में उठाए गए मुद्दों पर सकारात्मक रूप से विचार करेंगे।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">मुलाकात को बठिंडा और पंजाब से जुड़े विषयों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखा जा रहा है।</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ बठिंडा के नेता राजेश कुमार गेहरीवाल ने केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान से की मुलाकात, पंजाब के मुद्दों पर सौंपा ज्ञापन ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/bhagat-chunni-lal-death-punjab-half-day-holiday-6251 ]]></guid><title><![CDATA[ AAP मंत्री मोहिंदर भगत के पिता भगत चुन्नी लाल का निधन, पंजाब में आधे दिन की छुट्टी ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/bhagat-chunni-lal-death-punjab-half-day-holiday-6251 ]]></link><pubDate><![CDATA[Thu, 10 Sep 2026 11:21:17 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ जालंधर, पंजाब: पंजाब के पूर्व कैबिनेट मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता रहे भगत चुन्नी लाल का गुरुवार सुबह निधन हो गया। वह 93 वर्ष के थे। उन्होंने जालंधर के बस्ती क्षेत्र स्थित अपने आव ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>जालंधर, पंजाब:</b> पंजाब के पूर्व कैबिनेट मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता रहे भगत चुन्नी लाल का गुरुवार सुबह निधन हो गया। वह 93 वर्ष के थे। उन्होंने जालंधर के बस्ती क्षेत्र स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन की पुष्टि उनके बेटे और पंजाब सरकार में कैबिनेट मंत्री मोहिंदर भगत (Mohinder Bhagat) ने की।</span></p><p>भगत चुन्नी लाल के निधन के बाद पंजाब की राजनीति में शोक की लहर है। उनके सम्मान में पंजाब सरकार ने गुरुवार को सरकारी कार्यालयों में आधे दिन की छुट्टी घोषित की है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">भगत चुन्नी लाल का जन्म 1 दिसंबर 1932 को सियालकोट में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है। भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद उनका परिवार जालंधर आकर बस गया। राजनीति के अलावा उनका खेलों का सामान निर्यात करने का कारोबार भी था। उनके परिवार में चार बेटे और चार बेटियां हैं।</span></p><h5 class=""><b>1997 में पहली बार बने विधायक</b></h5><p>भगत चुन्नी लाल ने वर्ष 1985 में जालंधर दक्षिण विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था, हालांकि उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके बाद भाजपा के टिकट पर उन्होंने 1997 में जालंधर दक्षिण से चुनाव जीता और पहली बार पंजाब विधानसभा पहुंचे। <span style="font-size: 1rem;">इसके बाद उन्होंने 2007 और 2012 में भी विधानसभा चुनाव जीते। वर्ष 2011 में वह पंजाब विधानसभा के उपाध्यक्ष बने। 2012 में परिसीमन के बाद उन्होंने जालंधर पश्चिम सीट से चुनाव जीता।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="pa" dir="ltr"&gt;ਮੇਰੇ ਪਿਤਾ ਜੀ ਸਤਿਕਾਰਯੋਗ ਸਾਬਕਾ ਕੈਬਨਿਟ ਮੰਤਰੀ ਸ. ਚੁੰਨੀ ਲਾਲ ਭਗਤ ਜੀ ਹੁਣ ਸਾਡੇ ਵਿਚਕਾਰ ਨਹੀਂ ਰਹੇ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਅਕਾਲ ਚਲਾਣੇ ਨਾਲ ਸਾਨੂੰ ਡੂੰਘਾ ਦੁੱਖ ਪਹੁੰਚਿਆ ਹੈ। &lt;br&gt;&lt;br&gt;ਉਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਅੰਤਿਮ ਸੰਸਕਾਰ ਮਿਤੀ 10 ਸਤੰਬਰ 2026 ਨੂੰ ਸ਼ਾਮ 5:00 ਵਜੇ&lt;br&gt;ਮਾਡਲ ਹਾਊਸ ਰੋਡ ਸ਼ਮਸ਼ਾਨ ਘਾਟ, ਬਸਤੀ ਸ਼ੇਖ ਵਿਖੇ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇਗਾ। &lt;a href="https://t.co/yaGsHDhTMq"&gt;pic.twitter.com/yaGsHDhTMq&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Mohinder Bhagat (@mohinderbhagat_) &lt;a href="https://x.com/mohinderbhagat_/status/2097916995278889039?ref_src=twsrc^tfw"&gt;September 10, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><h5 class=""><b>बादल सरकार में संभाले अहम मंत्रालय</b></h5><p>वर्ष 2012 से 2017 के दौरान प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्व वाली अकाली-भाजपा सरकार में भगत चुन्नी लाल कैबिनेट मंत्री रहे। उन्होंने स्थानीय निकाय और चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान समेत कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली। वह पंजाब विधानसभा में भाजपा विधायक दल के नेता भी रहे।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने वर्ष 2017 में सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली थी। उनके निधन से पंजाब के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर है।</span></p><h5 class=""><b>आज शाम होगा अंतिम संस्कार</b></h5><p>भगत चुन्नी लाल का अंतिम संस्कार 10 सितंबर 2026 को शाम 5 बजे जालंधर के मॉडल हाउस रोड स्थित श्मशान घाट, बस्ती शेख में किया जाएगा।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा (Sukhjinder Singh Randhawa) ने भी उनके निधन पर दुख जताया। उन्होंने भगत चुन्नी लाल को पंजाब की राजनीति का वरिष्ठ नेता बताते हुए उनके निधन को परिवार के साथ-साथ प्रदेश की राजनीति के लिए बड़ी क्षति बताया।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="pa" dir="ltr"&gt;ਪੰਜਾਬ ਦੀ ਸਿਆਸਤ ਦੇ ਸੀਨੀਅਰ ਲੀਡਰ ਅਤੇ ਸਾਬਕਾ ਕੈਬਨਿਟ ਮੰਤਰੀ ਭਗਤ ਚੁੰਨੀ ਲਾਲ ਜੀ ਦੇ ਦਿਹਾਂਤ ਦੀ ਦੁਖਦਾਈ ਖ਼ਬਰ ਨਾਲ ਮਨ ਨੂੰ ਡੂੰਘਾ ਦੁੱਖ ਪਹੁੰਚਿਆ ਹੈ।&lt;br&gt;&lt;br&gt;ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਆਪਣੇ ਜੀਵਨ ਦੌਰਾਨ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਲੋਕਾਂ ਦੀ ਸੇਵਾ ਵਿੱਚ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਯੋਗਦਾਨ ਪਾਇਆ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਵਿਛੋੜਾ ਪਰਿਵਾਰ ਦੇ ਨਾਲ-ਨਾਲ ਪੰਜਾਬ ਦੀ ਸਿਆਸਤ ਲਈ ਵੀ ਇੱਕ ਵੱਡਾ ਘਾਟਾ ਹੈ।… &lt;a href="https://t.co/joDRoSHvef"&gt;pic.twitter.com/joDRoSHvef&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Sukhjinder Singh Randhawa (@Sukhjinder_INC) &lt;a href="https://x.com/Sukhjinder_INC/status/2097889360805019698?ref_src=twsrc^tfw"&gt;September 10, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ AAP मंत्री मोहिंदर भगत के पिता भगत चुन्नी लाल का निधन, पंजाब में आधे दिन की छुट्टी ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-drug-politics-kejriwal-6243 ]]></guid><title><![CDATA[ Punjab Politics: नशे के मुद्दे पर राहुल गांधी और केजरीवाल आमने-सामने, गुलजार सिंह की मौत को लेकर तेज हुई सियासत ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-drug-politics-kejriwal-6243 ]]></link><pubDate><![CDATA[Wed, 09 Sep 2026 15:11:12 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ चंडीगढ़: पंजाब में नशे के मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पंजाब सरकार पर नशे के खिलाफ कार ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>चंडीगढ़</b>: पंजाब में नशे के मुद्दे को लेकर <b>आम आदमी पार्टी (AAP)</b> और <b>कांग्रेस </b>के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पंजाब सरकार पर नशे के खिलाफ कार्रवाई में नाकामी और आलोचना करने वालों के साथ कथित तौर पर दबाव और प्रताड़ना का आरोप लगाया। इसके जवाब में<b> AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल</b> ने <b>राहुल गांधी </b>पर <b>गुलजार सिंह</b> की मौत के मामले में राजनीति करने का आरोप लगाते हुए उनके दावों को गलत बताया है।</p><p>केजरीवाल ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए राहुल गांधी को संबंधित गांव का दौरा करने और वहां के लोगों से सीधे बात करने की चुनौती भी दी।</p><h5 class=""><b>राहुल गांधी ने पंजाब सरकार पर लगाए गंभीर आरोप</b></h5><p>राहुल गांधी ने बुधवार को सोशल मीडिया पर पंजाब की भगवंत मान सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने वाले लोगों को कथित तौर पर धमकियों और प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है।</p><p>राहुल गांधी ने गुलजार सिंह का जिक्र करते हुए दावा किया कि वह दलित समुदाय से आते थे और उनका बेटा नशे का शिकार था। राहुल के मुताबिक, गुलजार सिंह ने पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा से सरकार की ओर से ड्रग्स के कारोबार को रोकने में कथित नाकामी पर सवाल किया था।</p><p>राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इसके बाद गुलजार सिंह पर माफी मांगने के लिए दबाव बनाया गया और उन्हें कथित तौर पर प्रताड़ित किया गया। उनके अनुसार, गुलजार सिंह ने जहर खा लिया और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।</p><p>राहुल गांधी ने इस मामले में पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने उनके खिलाफ नामजद FIR दर्ज करने की मांग भी उठाई।</p><p>हालांकि, राहुल गांधी की ओर से लगाए गए इन आरोपों पर पंजाब सरकार या संबंधित मंत्री का पक्ष इस सामग्री में विस्तार से उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन दावों को आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।</p><h5 class=""><b>केजरीवाल ने कहा- ‘लाशों के ऊपर गंदी राजनीति’</b></h5><p>राहुल गांधी के आरोपों पर अरविंद केजरीवाल ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार नशे के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ रही है। केजरीवाल ने दावा किया कि पंजाब में नशे की समस्या के लिए पिछली कांग्रेस सरकार के साथ-साथ अकाली दल और भाजपा की सरकारें भी जिम्मेदार रही हैं।</p><p>AAP संयोजक ने कहा कि मौजूदा सरकार उन समस्याओं को खत्म करने की कोशिश कर रही है जो उनके अनुसार पिछली सरकारों के दौर में बढ़ीं।</p><p>गुलजार सिंह की मौत को लेकर केजरीवाल ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें इस घटना पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी की ओर से बताए गए घटनाक्रम और गांव की वास्तविक स्थिति में अंतर है।</p><p>केजरीवाल ने यह भी दावा किया कि जब कांग्रेस के कुछ विधायक संबंधित गांव पहुंचे तो स्थानीय लोगों ने उनका विरोध किया और उन्हें वहां से जाने के लिए कहा।</p><h5 class=""><b>राहुल गांधी को गांव आने की चुनौती</b></h5><p>केजरीवाल ने राहुल गांधी से सीधे तौर पर संबंधित गांव का दौरा करने को कहा। उनका कहना है कि राहुल को वहां के लोगों से खुद बातचीत करके वास्तविक स्थिति समझनी चाहिए।</p><p>उन्होंने दावा किया कि गुलजार सिंह की मौत से पंजाब सरकार के किसी मंत्री या विधायक का कोई संबंध नहीं है। इसी आधार पर उन्होंने राहुल गांधी से इस मामले में राजनीति नहीं करने की अपील की।</p><p>इस तरह गुलजार सिंह की मौत का मामला अब पंजाब में नशे की समस्या से आगे बढ़कर कांग्रेस और AAP के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का मुद्दा बन गया है।</p><h5 class=""><b>नशे के मुद्दे पर आमने-सामने कांग्रेस-AAP</b></h5><p>पंजाब में ड्रग्स लंबे समय से राजनीतिक बहस का प्रमुख मुद्दा रहा है। विधानसभा चुनावों में भी अलग-अलग राजनीतिक दल नशे की समस्या को लेकर एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहे हैं।</p><p>AAP सरकार जहां नशे के खिलाफ कार्रवाई को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल बताती है, वहीं कांग्रेस लगातार सरकार की कार्रवाई और उसके नतीजों पर सवाल उठाती रही है।</p><p>गुलजार सिंह की मौत को लेकर राहुल गांधी के आरोप और केजरीवाल के पलटवार ने इसी राजनीतिक बहस को फिर तेज कर दिया है। एक तरफ कांग्रेस सरकार से जवाबदेही और कार्रवाई की मांग कर रही है, तो दूसरी ओर AAP इसे विपक्ष की राजनीतिक कोशिश बता रही है।</p><h5 class=""><b>मोहनजीत सिंह का भी राहुल ने किया जिक्र</b></h5><p>राहुल गांधी ने अपने बयान में एक अन्य मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले सप्ताह उन्होंने मोहनजीत सिंह नाम के एक युवा से बातचीत की थी, जिसे उनके अनुसार मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ प्रदर्शन करने के बाद कथित तौर पर प्रताड़ित किया गया।</p><p>राहुल ने इन घटनाओं को पंजाब में सरकार की आलोचना करने वालों के साथ कथित व्यवहार के पैटर्न से जोड़ने की कोशिश की।</p><p>हालांकि, मोहनजीत सिंह से जुड़े आरोपों का विस्तृत विवरण इस सामग्री में उपलब्ध नहीं है। इसलिए इस मामले में भी अंतिम निष्कर्ष जांच या आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही निकाला जा सकता है।</p><h5 class=""><b>2027 से पहले बढ़ सकती है सियासी गर्मी</b></h5><p>पंजाब में विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं। ऐसे में नशे का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होता जा रहा है। कांग्रेस AAP सरकार को उसके शासन और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर घेरने की कोशिश कर रही है, जबकि AAP कांग्रेस के पुराने शासन को नशे की समस्या के लिए जिम्मेदार बताकर जवाब दे रही है।</p><p>गुलजार सिंह की मौत को लेकर दोनों पक्षों के दावे फिलहाल एक-दूसरे के बिल्कुल विपरीत हैं। ऐसे में मामले की निष्पक्ष जांच और उपलब्ध तथ्यों से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं।</p><p>फिलहाल इतना साफ है कि पंजाब में ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का बड़ा मुद्दा बन चुकी है और 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के साथ यह बहस और तेज होने की संभावना है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ Punjab Politics: नशे के मुद्दे पर राहुल गांधी और केजरीवाल आमने-सामने, गुलजार सिंह की मौत को लेकर तेज हुई सियासत ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/sachin-pilot-punjab-6227 ]]></guid><title><![CDATA[ Punjab Congress: सचिन पायलट की एंट्री से बदले समीकरण, चन्नी खेमा उत्साहित; क्या राजा वड़िंग की कुर्सी पर भी खतरा? ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/sachin-pilot-punjab-6227 ]]></link><pubDate><![CDATA[Tue, 08 Sep 2026 11:29:08 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ नई दिल्ली: पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चली आ रही गुटबाजी के बीच पार्टी हाईकमान ने बड़ा संगठनात्मक बदलाव किया है। कांग्रेस ने सचिन पायलट को पंजाब कांग्रेस का नया AICC महासचिव और प्रभारी नियुक्त किया ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>नई दिल्ली:</b> <b>पंजाब कांग्रेस</b> में लंबे समय से चली आ रही गुटबाजी के बीच पार्टी हाईकमान ने बड़ा संगठनात्मक बदलाव किया है। कांग्रेस ने <b>सचिन पायलट</b> को पंजाब कांग्रेस का नया <b>AICC महासचिव </b>और<b> प्रभारी नियुक्त</b> किया है। पायलट ने छत्तीसगढ़ के<b> पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल</b> की जगह ली है। इस बदलाव के बाद पंजाब कांग्रेस में एक बार फिर नेतृत्व को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।</p><p>पायलट की नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब प्रदेश कांग्रेस में <b>चरणजीत सिंह चन्नी</b> और प्रदेश अध्यक्ष <b>अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग</b> के खेमों के बीच मतभेद लंबे समय से चर्चा में हैं। ऐसे में सवाल यह है कि क्या पायलट सिर्फ संगठन के बीच तालमेल बनाने की कोशिश करेंगे या उनके आने के बाद पंजाब कांग्रेस के नेतृत्व में भी आगे कोई बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा?</p><h5 class=""><b>पायलट की नियुक्ति से क्यों बदले राजनीतिक समीकरण?</b></h5><p>5 सितंबर को कांग्रेस हाईकमान ने सचिन पायलट को पंजाब का प्रभारी नियुक्त किया। यह फैसला पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की उस कवायद का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें पंजाब इकाई की अंदरूनी खींचतान को कम करने और 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने पर जोर है।</p><p>पायलट को कांग्रेस में सक्रिय और अपेक्षाकृत संतुलित नेता के तौर पर देखा जाता है। राजस्थान में संगठन को मजबूत करने का उनका अनुभव रहा है। इसके अलावा वह दूसरे राज्यों में भी पार्टी की चुनावी जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं।</p><p>यही वजह है कि पंजाब में उनकी नियुक्ति को केवल एक प्रशासनिक बदलाव के तौर पर नहीं देखा जा रहा। पार्टी के भीतर इसे दोनों गुटों के बीच संवाद का नया रास्ता खोलने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।</p><h5 class=""><b>चन्नी खेमे में खुशी, वड़िंग समर्थकों की बढ़ी चिंता</b></h5><p>पायलट की नियुक्ति का सबसे स्पष्ट असर पंजाब कांग्रेस के अंदर दिखाई दे रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थक इस बदलाव को सकारात्मक संकेत मान रहे हैं। चन्नी खेमे के नेताओं ने पहले भी प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग को हटाने की मांग उठाई थी।</p><p>चन्नी खेमे की चिंता मुख्य रूप से यह रही है कि पार्टी संगठन में नेतृत्व और टिकट वितरण जैसे महत्वपूर्ण मामलों में किसी एक गुट का प्रभाव ज्यादा न हो। भूपेश बघेल के कार्यकाल में भी दोनों पक्षों के बीच मतभेद खत्म नहीं हो सके।</p><p>अब पायलट के आने से चन्नी समर्थकों को उम्मीद है कि उनकी बात हाईकमान तक नए तरीके से पहुंचेगी। हालांकि, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि पायलट की नियुक्ति का मतलब चन्नी खेमे की राजनीतिक स्थिति मजबूत होना है।</p><p>दूसरी ओर, राजा वड़िंग खेमे ने सार्वजनिक रूप से पायलट का स्वागत किया है, लेकिन पार्टी के भीतर यह आशंका जरूर बनी हुई है कि प्रभारी बदलने के बाद अगला बदलाव प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के स्तर पर भी हो सकता है।</p><h5 class=""><b>क्या राजा वड़िंग की भी होगी विदाई?</b></h5><p>यही सवाल इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक पहलू बन गया है। फिलहाल अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग पंजाब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बने हुए हैं। कांग्रेस ने पायलट की नियुक्ति के साथ प्रदेश अध्यक्ष को हटाने का कोई ऐलान नहीं किया है।</p><p>हालांकि, जुलाई 2026 में कांग्रेस ने वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष पद पर बनाए रखने का फैसला किया था, जबकि चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव अभियान समिति की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बाद दोनों खेमों के बीच मतभेदों की खबरें सामने आती रहीं।</p><p>ऐसे में अगर पायलट संगठन में गुटबाजी कम करने में सफल नहीं होते हैं तो आने वाले समय में प्रदेश नेतृत्व में बदलाव की मांग फिर जोर पकड़ सकती है। लेकिन अभी यह केवल राजनीतिक अटकल है। पायलट की नियुक्ति से वड़िंग की तत्काल विदाई का कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया गया है।</p><h5 class=""><b>बघेल के कार्यकाल में क्यों नहीं खत्म हुआ विवाद?</b></h5><p>भूपेश बघेल को फरवरी 2025 में पंजाब कांग्रेस का प्रभारी बनाया गया था। उस समय उनसे प्रदेश संगठन में एकजुटता लाने और पार्टी को राजनीतिक चुनौतियों के लिए तैयार करने की उम्मीद थी।</p><p>लेकिन समय के साथ पंजाब कांग्रेस में आंतरिक मतभेद खत्म होने के बजाय और खुलकर सामने आने लगे। चन्नी खेमे के नेताओं ने बघेल पर वड़िंग के पक्ष में रहने का आरोप लगाया था।</p><p>पार्टी कार्यक्रमों में दोनों गुटों के समर्थकों के बीच नारेबाजी और विवाद की घटनाएं भी सामने आईं। कुछ मौकों पर नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच टकराव की स्थिति बनी। बघेल के पंजाब दौरे के दौरान कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं के कार्यक्रमों से दूरी बनाने की बात भी सामने आई।</p><p>यानी प्रभारी बदलने का फैसला उस पृष्ठभूमि में हुआ है, जहां हाईकमान के लिए सबसे बड़ी चुनौती केवल चुनावी रणनीति नहीं बल्कि संगठन के भीतर आपसी भरोसा बहाल करना भी है।</p><h5 class=""><b>चन्नी खेमे में कौन-कौन से बड़े चेहरे?</b></h5><p>चरणजीत सिंह चन्नी के खेमे में गुरदासपुर के सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा और फिरोजपुर के सांसद शेर सिंह घुबाया जैसे नेताओं के नाम लिए जाते हैं। इस समूह की ओर से वड़िंग के नेतृत्व को लेकर पहले सवाल उठाए जाते रहे हैं।</p><p>दिलचस्प बात यह है कि रंधावा इस समय राजस्थान कांग्रेस के प्रभारी हैं, जबकि राजस्थान से आने वाले सचिन पायलट को पंजाब की जिम्मेदारी दी गई है। कांग्रेस संगठन में यह जिम्मेदारियों का बदलाव भी चर्चा का विषय बना हुआ है।</p><p>पायलट के सामने अब पंजाब में दोनों गुटों के बीच संतुलन बनाने के साथ-साथ नेताओं की व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को भी संभालने की चुनौती होगी।</p><h5 class=""><b>वड़िंग ने भी पायलट से की मुलाकात</b></h5><p>पायलट की नियुक्ति के बाद पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष राजा वड़िंग ने दिल्ली में उनसे मुलाकात की। बैठक के बाद वड़िंग ने पायलट के साथ काम करने को लेकर उत्साह जताया।</p><p>उन्होंने पायलट की युवाओं और बुजुर्गों के बीच पकड़ की तारीफ की। वड़िंग ने अपने पूर्व प्रभारी भूपेश बघेल के काम की भी प्रशंसा की।</p><p>दूसरी तरफ चन्नी ने पायलट की नियुक्ति को महत्वपूर्ण फैसला बताते हुए हाईकमान का आभार जताया। सुखजिंदर सिंह रंधावा ने भी पायलट के नेतृत्व और जनता से उनके जुड़ाव की सराहना की।</p><p>इससे फिलहाल यह संकेत मिलता है कि दोनों गुट सार्वजनिक तौर पर नए प्रभारी के साथ काम करने की इच्छा जता रहे हैं। लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब संगठन में टिकट वितरण, चुनावी रणनीति और उम्मीदवारों के चयन जैसे संवेदनशील मुद्दे सामने आएंगे।</p><h5 class=""><b>पायलट के सामने राजस्थान का अनुभव भी चुनौती</b></h5><p>सचिन पायलट खुद राजस्थान में कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी का सामना कर चुके हैं। 2020 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ उनके मतभेद खुलकर सामने आए थे। उस समय पार्टी के भीतर सत्ता और नेतृत्व को लेकर बड़ा राजनीतिक संकट पैदा हुआ था।</p><p>अब पंजाब में उन्हें दूसरे नेताओं की महत्वाकांक्षाओं और गुटीय राजनीति के बीच रास्ता निकालना होगा। उनके लिए यह अनुभव एक चुनौती भी है और राजनीतिक पूंजी भी।</p><p>अगर पायलट पंजाब कांग्रेस के दोनों गुटों को एक मंच पर लाने में सफल रहते हैं तो पार्टी 2027 के चुनाव की तैयारी अधिक व्यवस्थित तरीके से कर सकती है। लेकिन यदि संगठन के भीतर पुराने मतभेद बने रहे तो सिर्फ प्रभारी बदलने से समस्या का समाधान मुश्किल होगा।</p><h5 class=""><b>2027 से पहले कांग्रेस के लिए बड़ी परीक्षा</b></h5><p>पंजाब में अगला विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण है। पार्टी के सामने सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी को चुनौती देने के साथ-साथ अपने संगठन को मजबूत करने की जरूरत है।</p><p>पायलट की नियुक्ति से कांग्रेस को एक नई शुरुआत का अवसर जरूर मिला है। लेकिन पार्टी के सामने असली चुनौती यह है कि क्या वह अपने नेताओं को एक साथ लेकर चुनाव मैदान में उतर पाएगी।</p><p>फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सचिन पायलट पंजाब कांग्रेस के चन्नी-वड़िंग विवाद को सुलझा पाएंगे और क्या उनके कार्यकाल में प्रदेश संगठन के नेतृत्व को लेकर कोई बड़ा फैसला होगा?</p><p>इतना जरूर है कि भूपेश बघेल की जगह पायलट को जिम्मेदारी देना कांग्रेस हाईकमान के लिए पंजाब में संगठनात्मक रणनीति को नए सिरे से परखने का संकेत है। अब पायलट की शुरुआती बैठकों और संगठन में उनके फैसलों से यह साफ होगा कि वह दोनों खेमों के बीच कितना भरोसा कायम कर पाते हैं।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ Punjab Congress: सचिन पायलट की एंट्री से बदले समीकरण, चन्नी खेमा उत्साहित; क्या राजा वड़िंग की कुर्सी पर भी खतरा? ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/amritsar-airport-drone-fir-flights-diverted-6221 ]]></guid><title><![CDATA[ अमृतसर एयरपोर्ट के पास ड्रोन गतिविधि पर FIR, अज्ञात लोगों के खिलाफ केस; 7 उड़ानें हुईं डायवर्ट ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/amritsar-airport-drone-fir-flights-diverted-6221 ]]></link><pubDate><![CDATA[Mon, 07 Sep 2026 17:00:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ अमृतसर, पंजाब: अमृतसर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास रविवार रात ड्रोन गतिविधि की सूचना के बाद पंजाब पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। एयरपोर्ट अथॉरिटी की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने आसपास  ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>अमृतसर, पंजाब:</b> अमृतसर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास रविवार रात ड्रोन गतिविधि की सूचना के बाद पंजाब पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। एयरपोर्ट अथॉरिटी की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने आसपास के इलाकों में तलाशी अभियान शुरू कर दिया है।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">अमृतसर ग्रामीण के एसएसपी (SSP) कंवलप्रीत सिंह चहल ने बताया कि सोमवार सुबह एयरपोर्ट अथॉरिटी की ओर से औपचारिक शिकायत दी गई, जिसके बाद अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया।</span></p><p>एसएसपी ने बताया कि पुलिस ने आसपास के गांवों में टीमें तैनात की हैं और तलाशी अभियान जारी है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि पास के एक गांव में कबड्डी टूर्नामेंट चल रहा था। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि कहीं ड्रोन गतिविधि का संबंध इसी आयोजन से तो नहीं था।</p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;&lt;a href="https://x.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#WATCH&lt;/a&gt; | Amritsar, Punjab: Kanwalpreet Singh Chahal, SSP, Amritsar Rural, says, &amp;quot;The police were alerted to an incident last night, and the Airport Authority lodged a formal complaint this morning. Consequently, an FIR has been registered against an unknown person under the… &lt;a href="https://t.co/T95LQX90XL"&gt;https://t.co/T95LQX90XL&lt;/a&gt; &lt;a href="https://t.co/vqCgHNhUYR"&gt;pic.twitter.com/vqCgHNhUYR&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; ANI (@ANI) &lt;a href="https://x.com/ANI/status/2096894980539474190?ref_src=twsrc^tfw"&gt;September 7, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><h5 class=""><b>ड्रोन गतिविधि से करीब डेढ़ घंटे बंद रहा एयरपोर्ट</b></h5><p>रविवार रात एयरपोर्ट के परिचालन क्षेत्र में ड्रोन देखे जाने के बाद उड़ान संचालन करीब डेढ़ घंटे तक निलंबित रहा। भारतीय वायुसेना की ओर से रात करीब 9:45 बजे एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को एयरफील्ड में ड्रोन देखे जाने की सूचना दी गई थी।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">इसके बाद एयरपोर्ट के मानक संचालन प्रोटोकॉल (SOP) के तहत ज्वाइंट एक्शन कमेटी को सक्रिय किया गया। कमेटी ने स्थिति का आकलन करने के बाद संभावित जोखिम को देखते हुए रात करीब 9:50 बजे एयरफील्ड बंद करने का फैसला लिया।</span></p><h5 class=""><b>सात उड़ानों को किया गया डायवर्ट</b></h5><p class="grey-bg-red"><b><i>एयरपोर्ट डायरेक्टर अनिरुद्ध कुमार शर्मा के मुताबिक, उस समय कई विमान अमृतसर में उतरने के लिए आसमान में चक्कर लगा रहे थे। ड्रोन गतिविधि के कारण सात उड़ानों को दूसरे एयरपोर्ट पर भेजना पड़ा। इनमें दो उड़ानें चंडीगढ़ और पांच उड़ानें दिल्ली डायवर्ट की गईं।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">रात करीब 11 बजे स्थिति की दोबारा समीक्षा की गई। जब इसके बाद किसी नई ड्रोन गतिविधि की सूचना नहीं मिली तो रात 11:15 बजे एयरपोर्ट पर परिचालन फिर से शुरू कर दिया गया। सात डायवर्ट की गई उड़ानों में से पांच बाद में अमृतसर लौट आईं। एक एयर इंडिया उड़ान रद्द कर दी गई, जबकि मलेशिया की उड़ान के अगले दिन पहुंचने की जानकारी दी गई।</span></i></b></p><h5 class=""><b>25 किलोमीटर के दायरे में ड्रोन उड़ाने पर रोक</b></h5><p>एसएसपी कंवलप्रीत सिंह चहल ने लोगों से एयरपोर्ट के आसपास बिना अनुमति ड्रोन नहीं उड़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह संवेदनशील और उच्च सुरक्षा वाला क्षेत्र है तथा एयरपोर्ट के 25 किलोमीटर के दायरे में ड्रोन गतिविधि प्रतिबंधित है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">पुलिस ने कहा कि इस तरह की गतिविधि से यात्रियों को परेशानी हुई और कई उड़ानों का संचालन प्रभावित हुआ। मामले की जांच जारी है।</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ अमृतसर एयरपोर्ट के पास ड्रोन गतिविधि पर FIR, अज्ञात लोगों के खिलाफ केस; 7 उड़ानें हुईं डायवर्ट ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/jalandhar-congress-supporters-join-aap-6216 ]]></guid><title><![CDATA[ जालंधर में कांग्रेस को बड़ा झटका, 100 से ज्यादा समर्थक AAP में शामिल; मंत्री महिंदर भगत ने किया स्वागत ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/jalandhar-congress-supporters-join-aap-6216 ]]></link><pubDate><![CDATA[Mon, 07 Sep 2026 15:00:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ जालंधर,&nbsp;पंजाब: पंजाब के जालंधर में कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। वार्ड नंबर 51 में कांग्रेस से जुड़े 100 से अधिक समर्थकों ने आम आदमी पार्टी (AAP) का दामन थाम लिया। इस मौके पर पंजाब के कै ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b><span style="font-size: 1rem;">जालंधर,&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">पंजाब</span></b><span style="font-size: 1rem;"><b>: </b>पंजाब के जालंधर में कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। वार्ड नंबर 51 में कांग्रेस से जुड़े 100 से अधिक समर्थकों ने आम आदमी पार्टी (AAP) का दामन थाम लिया। इस मौके पर पंजाब के कैबिनेट मंत्री महिंदर भगत (Mohinder Bhagat) और पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।</span></p><p><span style="font-size: 1rem;">रिपोर्ट के मुताबिक, आम आदमी पार्टी में शामिल होने वालों में क्षेत्र के कई प्रमुख नागरिक और उनके परिवारों के सदस्य शामिल हैं। इनमें राकेश कुमार, राज कुमार, गुरचरण कुमार और मुकेश समेत कई लोग शामिल बताए गए हैं। इस राजनीतिक बदलाव से जालंधर पश्चिम में AAP के संगठन को मजबूती मिलने का दावा किया गया है।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">युवाओं के साथ उनके परिवारों के वरिष्ठ सदस्य भी इस दौरान AAP में शामिल हुए। पार्टी नेताओं ने इसे वार्ड नंबर 51 में संगठन के विस्तार के तौर पर पेश किया।</span></p><h5 class=""><b>महिंदर भगत ने नए सदस्यों का किया स्वागत</b></h5><p>कैबिनेट मंत्री महिंदर भगत ने नए सदस्यों का स्वागत करते हुए कहा कि उनके पार्टी में शामिल होने से जालंधर शहर, खासकर जालंधर पश्चिम में AAP का आधार और मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि पार्टी समाज के सभी वर्गों के विकास और जनसेवा के लिए काम कर रही है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">इस मौके पर कमल लोहिया, सुभाष गोरीया, डॉ. मनीष, एडवोकेट सन्नी वर्मा और हरसिमरनजीत सिंह बंटी समेत कई AAP नेता भी मौजूद रहे।</span></p><p>&lt;iframe src="https://www.facebook.com/plugins/post.php?href=https://www.facebook.com/mohinderbhagatji/posts/pfbid076gzRdH8JFGPHTzvpBHhpetPUkDtGDGu6fnjMb1E3cB48dttXgm5T6BFHxgFrSywl&amp;show_text=true&amp;width=500" width="500" height="793" style="border:none;overflow:hidden" scrolling="no" frameborder="0" allowfullscreen="true" allow="autoplay; clipboard-write; encrypted-media; picture-in-picture; web-share"&gt;&lt;/iframe&gt;</p><h5 class=""><b>विपक्ष पर भी साधा निशाना</b></h5><p>महिंदर भगत ने कांग्रेस, बीजेपी और अकाली दल पर भी निशाना साधा। उन्होंने विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विरोधी दल आरोप लगाते रहें, लेकिन AAP सरकार जनता की सेवा पर अपना ध्यान केंद्रित रखेगी।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब सरकार व्यापारियों, किसानों, मजदूरों और समाज के अन्य वर्गों के हितों के लिए काम कर रही है।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;Jalandhar, Punjab: Congress staged a protest against the BJP in Jalandhar, condemning the ‘purification’ of the stage following Kharge’s speech in Haldwani and terming the act casteist &lt;a href="https://t.co/5Ycok3RSF3"&gt;pic.twitter.com/5Ycok3RSF3&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; IANS (@ians_india) &lt;a href="https://x.com/ians_india/status/2096889239208440137?ref_src=twsrc^tfw"&gt;September 7, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><h5 class=""><b>पंजाब की राजनीति में बढ़ रही हलचल</b></h5><p>पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। जालंधर में अलग-अलग दलों से नेताओं और समर्थकों का AAP में शामिल होना राज्य की स्थानीय राजनीति में संगठनात्मक ताकत बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। हाल के दिनों में पंजाब कांग्रेस में भी संगठनात्मक स्तर पर बदलाव और राजनीतिक गतिविधियां तेज हुई हैं।</p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="hi" dir="ltr"&gt;जालंधर, पंजाब: कांग्रेस सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा, &amp;quot;हाल ही में मनीष सिसोदिया ने बयान दिया था कि वे &amp;#39;साम, दाम, दंड, भेद&amp;#39; अपनाकर सरकार बनाएंगे। उसी रणनीति के तहत अब वे गैंगस्टरों को अपनी पार्टी में शामिल कर रहे हैं। आम आदमी पार्टी पंजाब के नौजवानों को… &lt;a href="https://t.co/ntUaNSMH1F"&gt;pic.twitter.com/ntUaNSMH1F&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; IANS Hindi (@IANSKhabar) &lt;a href="https://x.com/IANSKhabar/status/2096890220893684093?ref_src=twsrc^tfw"&gt;September 7, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ जालंधर में कांग्रेस को बड़ा झटका, 100 से ज्यादा समर्थक AAP में शामिल; मंत्री महिंदर भगत ने किया स्वागत ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/ashwini-mishra-controversy-6209 ]]></guid><title><![CDATA[ कौन हैं जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा, जिन्हें पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस बनाया गया? नियुक्ति पर क्यों नाराज है मान सरकार? ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/ashwini-mishra-controversy-6209 ]]></link><pubDate><![CDATA[Mon, 07 Sep 2026 13:20:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पद पर जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा की नियुक्ति को लेकर पंजाब की भगवंत मान सरकार और केंद्र के बीच विवाद खड़ा हो गया है। पंजाब कैबिनेट ने उनकी नियुक्ति पर आप ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट</b> के मुख्य न्यायाधीश पद पर <b>जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा</b> की नियुक्ति को लेकर पंजाब की <b>भगवंत मान </b>सरकार और केंद्र के बीच विवाद खड़ा हो गया है। पंजाब कैबिनेट ने उनकी नियुक्ति पर आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया है कि राज्य सरकार की राय का इंतजार किए बिना नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। राज्य सरकार ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और पंजाब के राज्यपाल से इस प्रक्रिया को रोकने और पहले पंजाब का पक्ष लेने की मांग भी की थी।</p><h5 class=""><b>कौन हैं जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा?</b></h5><p>जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा का न्यायिक करियर तीन दशक से अधिक लंबा है। उन्होंने 8 मई 1993 को अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण कराया था। वर्ष 2013 में उन्हें सीनियर एडवोकेट का दर्जा मिला।</p><p>इसके बाद 3 फरवरी 2014 को इलाहाबाद हाई कोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में उनकी नियुक्ति हुई। करीब दो साल बाद, 1 फरवरी 2016 को उन्हें इलाहाबाद हाई कोर्ट का स्थायी न्यायाधीश बनाया गया।</p><p>बाद में उनका तबादला पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट किया गया। उन्होंने 21 जुलाई 2025 को चंडीगढ़ स्थित हाई कोर्ट में कार्यभार संभाला। जस्टिस शील नागू के सुप्रीम कोर्ट जाने के बाद जस्टिस मिश्रा यहां कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की भूमिका भी निभा रहे थे।</p><p>अब सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के बाद उन्हें इसी हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ी है।</p><h5 class=""><b>पंजाब सरकार ने जताई थी आपत्ति</b></h5><p>जस्टिस मिश्रा की नियुक्ति को लेकर पंजाब सरकार की मुख्य आपत्ति प्रक्रिया को लेकर है। मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में हुई पंजाब कैबिनेट की बैठक में नियुक्ति के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया गया।</p><p>राज्य सरकार का दावा है कि <b>Memorandum of Procedure (MoP)</b> के तहत पंजाब सरकार के विचार लिए जाने चाहिए थे। सरकार का आरोप है कि उसकी प्रतिक्रिया का इंतजार किए बिना केंद्र ने नियुक्ति की अधिसूचना जारी कर दी।</p><p>पंजाब कैबिनेट ने मांग की कि राज्य की राय लेने और उस पर विचार करने तक नियुक्ति और शपथ ग्रहण की प्रक्रिया को रोका जाए।</p><h5 class=""><b>आखिर न्यायिक नियुक्तियों पर विवाद क्या है?</b></h5><p>यह विवाद सिर्फ जस्टिस मिश्रा की नियुक्ति तक सीमित नहीं है। असल सवाल यह है कि हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति में राज्य सरकार की भूमिका कितनी है और उसकी राय का क्या महत्व है?</p><p>पंजाब सरकार का कहना है कि MoP के तहत संबंधित राज्य सरकार के विचार लिए जाने की प्रक्रिया का पालन होना चाहिए था। इसी आधार पर मान सरकार ने इसे राज्य के संवैधानिक अधिकारों और संघीय ढांचे से जोड़ते हुए विरोध दर्ज कराया है।</p><p>हालांकि, इस मुद्दे पर कानूनी विशेषज्ञों की व्याख्या अलग है। कुछ विशेषज्ञों के मुताबिक राज्य सरकार से राय लेना प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन राज्य की सहमति को नियुक्ति पर वीटो के तौर पर नहीं देखा जाता। यानी पंजाब सरकार की आपत्ति और नियुक्ति को रोकने की उसकी मांग—दोनों अलग-अलग कानूनी सवाल हैं।</p><h5 class=""><b>मान सरकार ने केंद्र पर और क्या आरोप लगाए?</b></h5><p>पंजाब सरकार ने इस विवाद को केंद्र और राज्य के बीच पहले से चले आ रहे कई मुद्दों से भी जोड़ा है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने ग्रामीण विकास फंड, बाढ़ राहत राशि और भाखड़ा-ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए केंद्र पर पंजाब के अधिकारों की अनदेखी का आरोप लगाया है। हालांकि, ये अलग-अलग राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दे हैं और इन्हें जस्टिस मिश्रा की नियुक्ति की कानूनी प्रक्रिया से अलग समझना जरूरी है।</p><h5 class=""><b>अब विवाद का केंद्र क्या है?</b></h5><p>फिलहाल पूरे मामले में दो बातें सबसे अहम हैं। पहली, जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा को पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाने की सिफारिश और नियुक्ति प्रक्रिया। दूसरी, पंजाब सरकार का यह दावा कि उसकी राय लिए बिना प्रक्रिया पूरी की गई।</p><p>यानी विवाद जस्टिस मिश्रा के न्यायिक अनुभव या योग्यता पर नहीं, बल्कि नियुक्ति की प्रक्रिया और राज्य सरकार की भूमिका पर केंद्रित है। यही वजह है कि यह मामला पंजाब सरकार और केंद्र के बीच संवैधानिक अधिकारों तथा संघीय ढांचे को लेकर नई बहस का कारण बन गया है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ कौन हैं जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा, जिन्हें पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस बनाया गया? नियुक्ति पर क्यों नाराज है मान सरकार? ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/ashwani-mishra-chief-justice-ph-hc-6208 ]]></guid><title><![CDATA[ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पद की ली शपथ ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/ashwani-mishra-chief-justice-ph-hc-6208 ]]></link><pubDate><![CDATA[Mon, 07 Sep 2026 12:10:53 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ चंडीगढ़, पंजाब: जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा ने सोमवार, 7 सितंबर 2026 को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने पं ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>चंडीगढ़, पंजाब:</b> जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा ने सोमवार, 7 सितंबर 2026 को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने पंजाब लोक भवन में उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा जून 2026 से पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे थे। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 6 अगस्त को उन्हें मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की थी। केंद्र सरकार ने 5 सितंबर को उनकी नियुक्ति को अधिसूचित किया।</span></p><p>जस्टिस मिश्रा ने 1993 में अधिवक्ता के रूप में अपना करियर शुरू किया था। उन्हें 2013 में वरिष्ठ अधिवक्ता नामित किया गया। उन्होंने फरवरी 2014 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में शपथ ली और फरवरी 2016 में स्थायी न्यायाधीश बने। जुलाई 2025 में उनका तबादला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में हुआ।</p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;&lt;a href="https://x.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#WATCH&lt;/a&gt; | Justice Ashwani Kumar Mishra sworn in as Chief Justice of the Punjab and Haryana High Court. The oath was administered by the Governor of Punjab and Administrator, Gulab Chand Kataria. Haryana Governor Prof. Asim Kumar Ghosh and Chief Minister Nayab Singh Saini were… &lt;a href="https://t.co/IDuuBvqVLn"&gt;pic.twitter.com/IDuuBvqVLn&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; ANI (@ANI) &lt;a href="https://x.com/ANI/status/2096830062360502574?ref_src=twsrc^tfw"&gt;September 7, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><h5 class=""><b>पंजाब सरकार ने नियुक्ति पर जताई थी आपत्ति</b></h5><p>जस्टिस मिश्रा की नियुक्ति को लेकर पंजाब सरकार और केंद्र के बीच विवाद भी सामने आया। पंजाब मंत्रिमंडल ने रविवार को आपात बैठक कर नियुक्ति और शपथ समारोह को रोकने की मांग की थी। राज्य सरकार का कहना था कि नियुक्ति से पहले उसकी राय का इंतजार नहीं किया गया।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस मुद्दे पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया को पत्र भी भेजे। हालांकि, पंजाब सरकार की आपत्ति के बावजूद सोमवार को जस्टिस मिश्रा ने मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ ले ली।</span></p><p><img src="https://media.gtcbharat.com/wp-content/uploads/2026/09/Punjab-Pic-1280x720_2922c570ed27bca316dbad9c0c44402d_1280X720.webp" style="width: 910.383px;"><span style="font-size: 1rem;"><br></span></p><h5 class=""><img src="https://media.gtcbharat.com/wp-content/uploads/2026/09/Punjab-Pic-3-1280x720_682c042e0df3a7908396be22d71d5558_1280X720.webp" style="width: 910.383px;"><b><br></b></h5><h5 class=""><b>समारोह में कई वरिष्ठ नेता रहे शामिल</b></h5><p>शपथ ग्रहण समारोह में हरियाणा के राज्यपाल प्रो. अशिम कुमार घोष, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविंदर कल्याण, शिरोमणि अकाली दल की विधायक गनीव कौर मजिठिया और पंजाब के मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा मौजूद रहे। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान समारोह में शामिल नहीं हुए।</p><p><img src="https://media.gtcbharat.com/wp-content/uploads/2026/09/Punjab-Pic-2-1280x720_1fca73626dc081c371797786f7125599_1280X720.webp" style="width: 910.383px;"><br></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पद की ली शपथ ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/amritsar-airport-drone-flight-diversion-6207 ]]></guid><title><![CDATA[ अमृतसर एयरपोर्ट पर ड्रोन दिखने के बाद हड़कंप, 7 उड़ानें डायवर्ट; करीब 90 मिनट बंद रहा संचालन ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/amritsar-airport-drone-flight-diversion-6207 ]]></link><pubDate><![CDATA[Mon, 07 Sep 2026 11:45:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ अमृतसर,&nbsp;पंजाब: पंजाब के अमृतसर स्थित श्री गुरु रामदास जी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर रविवार देर रात ड्रोन देखे जाने के बाद करीब डेढ़ घंटे तक उड़ान संचालन रोकना पड़ा। इस दौरान अमृतसर आने वाली सात  ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b><span style="font-size: 1rem;">अमृतसर,&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">पंजाब</span></b><span style="font-size: 1rem;"><b>: </b>पंजाब के अमृतसर स्थित श्री गुरु रामदास जी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर रविवार देर रात ड्रोन देखे जाने के बाद करीब डेढ़ घंटे तक उड़ान संचालन रोकना पड़ा। इस दौरान अमृतसर आने वाली सात उड़ानों को दिल्ली और चंडीगढ़ की ओर डायवर्ट किया गया।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">एयरपोर्ट निदेशक अनिरुद्ध कुमार शर्मा के अनुसार, रात करीब 9:45 बजे एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को भारतीय वायुसेना से सूचना मिली कि एयरफील्ड के आसपास ड्रोन देखे गए हैं। उस समय अमृतसर में उतरने वाली कई उड़ानें आसमान में चक्कर लगा रही थीं।</span></p><p>ड्रोन संबंधी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत एयरपोर्ट के कंट्रोल टावर में संयुक्त कार्रवाई समिति (Joint Action Committee) की बैठक हुई। समिति ने आकलन किया कि ड्रोन गतिविधि के कारण विमानों की लैंडिंग प्रभावित हो सकती है। इसके बाद रात करीब 9:50 बजे एयरफील्ड को अस्थायी रूप से बंद करने का फैसला लिया गया।</p><h5 class=""><b>7 उड़ानों को दिल्ली और चंडीगढ़ भेजा गया</b></h5><p>एयरपोर्ट निदेशक के मुताबिक, उस समय करीब सात विमान अमृतसर के ऊपर होल्डिंग पैटर्न में थे। इनमें से दो उड़ानों को चंडीगढ़ और पांच को दिल्ली डायवर्ट किया गया।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, संदिग्ध उड़ती वस्तुएं रनवे और एयरपोर्ट के संवेदनशील परिचालन क्षेत्रों के आसपास देखी गई थीं। हालांकि, शुरुआती रिपोर्टों में इन्हें ड्रोन जैसा बताया गया है और इनके स्रोत या संचालक की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;&lt;a href="https://x.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#WATCH&lt;/a&gt; | Amritsar, Punjab: Airport Director Anirudh Kumar Sharma says, &amp;quot;Airport operations were suspended from around 9:50 PM to 11:15 PM after drones were spotted across the airfield.&amp;quot;&lt;br&gt;&lt;br&gt;He says, &amp;quot;At approximately 9:45 PM, the Air Traffic Control (ATC) unit received a report from… &lt;a href="https://t.co/JkXzH0se4n"&gt;pic.twitter.com/JkXzH0se4n&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; ANI (@ANI) &lt;a href="https://x.com/ANI/status/2096822815899136286?ref_src=twsrc^tfw"&gt;September 7, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><h5 class=""><b>रात 11:15 बजे सामान्य हुआ संचालन</b></h5><p>करीब रात 11 बजे संयुक्त कार्रवाई समिति ने स्थिति की समीक्षा की। उस समय किसी नई ड्रोन गतिविधि की सूचना नहीं मिलने के बाद एयरपोर्ट संचालन दोबारा शुरू करने का निर्णय लिया गया।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">एयरपोर्ट को करीब 11:15 बजे सामान्य परिचालन के लिए खोल दिया गया। इसके बाद डायवर्ट की गई उड़ानों की वापसी शुरू हुई। एयरपोर्ट निदेशक के मुताबिक, सात डायवर्ट उड़ानों में से पांच वापस अमृतसर लौट आईं। एक एयर इंडिया उड़ान, जिसे दिल्ली भेजा गया था, रद्द कर दी गई, जबकि मलेशिया एयरलाइंस की उड़ान के बाद में पहुंचने की उम्मीद जताई गई।</span></p><h5 class=""><b>सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट, पुलिस कर रही जांच</b></h5><p>घटना के बाद सीआईएसएफ, पंजाब पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट किया गया। अमृतसर एयरपोर्ट भारत-पाकिस्तान सीमा के करीब स्थित होने के कारण सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि एयरपोर्ट के आसपास दिखाई दी संदिग्ध उड़ती वस्तुएं वास्तव में ड्रोन थीं या कोई अन्य मानवरहित हवाई वस्तु।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">फिलहाल एयरपोर्ट प्रशासन ने बताया है कि स्थिति सामान्य है और उड़ान संचालन बहाल हो चुका है।</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ अमृतसर एयरपोर्ट पर ड्रोन दिखने के बाद हड़कंप, 7 उड़ानें डायवर्ट; करीब 90 मिनट बंद रहा संचालन ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-farmers-protest-6170 ]]></guid><title><![CDATA[ Explained: किसानों ने घेरा चंडीगढ़ बॉर्डर, US ट्रेड डील बनी सबसे बड़ी चिंता! जानें क्या हैं मांगें ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-farmers-protest-6170 ]]></link><pubDate><![CDATA[Thu, 03 Sep 2026 21:30:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ चंडीगढ़/मोहाली: पंजाब की धरती एक बार फिर संघर्ष की गवाह बन रही है। चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर हजारों किसान अपने ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ डेरा जमाए बैठे हैं। एक सितंबर से शुरू हुआ ये पक्का मोर्चा सात सि ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>चंडीगढ़/मोहाली: </b>पंजाब की धरती एक बार फिर संघर्ष की गवाह बन रही है। चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर हजारों किसान अपने ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ डेरा जमाए बैठे हैं। एक सितंबर से शुरू हुआ ये पक्का मोर्चा सात सितंबर तक चलेगा।<b> संयुक्त किसान मोर्चा (SKM)</b> के बैनर तले पंजाब के 32 किसान संगठनों की साझा ताकत एक बार फिर मैदान में उतर आई है। मांगें कई हैं, MSP की कानूनी गारंटी, कर्ज माफी, पंजाब का पानी, गन्ने का सही दाम, लेकिन इस बार आंदोलन के केंद्र में एक और बड़ा मुद्दा है, जो पहले से कहीं ज्यादा तीखा है: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता, जिसे किसान अपनी खेती के लिए सीधा खतरा मान रहे हैं।</p><p>तीन दिन बीत चुके हैं, और आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा। हर गुजरते दिन के साथ किसानों की तादाद बढ़ती जा रही है, चंडीगढ़ और मोहाली को जोड़ने वाली सड़कों पर ट्रैफिक जाम जैसे हालात बन रहे हैं, और सरकार की तरफ से अब तक खामोशी बनी हुई है।</p><h5 class=""><b>कैसे शुरू हुआ पक्का मोर्चा</b></h5><p>एक सितंबर की सुबह पंजाब के अलग-अलग जिलों से ट्रैक्टर-ट्रॉलियां निकलीं। किसान अपने साथ सिर्फ नारे और झंडे लेकर नहीं आए, बल्कि हफ्तों तक धरने पर टिके रहने की पूरी तैयारी के साथ पहुंचे। ट्रॉलियों में सूखा राशन, बिस्तर, कुर्सियां, गद्दे, चूल्हे, गैस सिलेंडर और जरूरत का हर सामान लदा था। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक कई किसान परिवार तो करीब दो महीने तक चलने लायक राशन साथ लेकर आए हैं। सोमवार शाम से ही किसान फेज-11 और आईसर चौक के आसपास जुटने लगे थे, और मंगलवार सुबह तक ये जमावड़ा एक स्थायी बस्ती जैसा आकार ले चुका था, मंच लग चुका था, लंगर की व्यवस्था हो चुकी थी और ट्रॉलियों की कतारें दूर तक फैली हुई थीं।</p><p>सेक्टर-48 के पास ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की तादाद इतनी बढ़ गई कि पार्किंग की जगह तक कम पड़ गई। किसान नेताओं के मुताबिक दूसरे दिन तक ही मोर्चे में करीब 5500 कार्यकर्ता पहुंच चुके थे, जिनके साथ लगभग 700 ट्रैक्टर, पिकअप वाहन, बसें और ट्रक मौजूद थे, साथ ही करीब 50 पानी के टैंकर भी धरनास्थल पर लगाए गए। कुछ किसान नेताओं ने दावा किया कि तीसरे दिन तक मोर्चे में बीस हजार से ज्यादा लोग पहुंच चुके हैं। किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने इसे चंडीगढ़ बॉर्डर पर SKM का अब तक का पहला इतना बड़ा आयोजन बताया।</p><h5 class=""><b>SKM के झंडे तले कौन-कौन शामिल, कौन बाहर</b></h5><p>इस पूरे आंदोलन की अगुवाई संयुक्त किसान मोर्चा यानी SKM कर रहा है, जिसमें पंजाब के 32 किसान संगठन शामिल हैं। इनमें भारतीय किसान यूनियन राजेवाल, भारतीय किसान यूनियन डकोंदा, कीर्ति किसान यूनियन, भारतीय किसान यूनियन शादिपुर और पंजाब किसान यूनियन जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। मंच से बलबीर सिंह राजेवाल, हरिंदर सिंह लखोवाल, बूटा सिंह बुर्जगिल, हरमीत सिंह कादियां और कई दूसरे किसान नेता लगातार किसानों को संबोधित कर रहे हैं। लंगर सेवा की जिम्मेदारी मुख्य रूप से भारतीय किसान यूनियन राजेवाल के कार्यकर्ताओं ने संभाली है।</p><p>हालांकि एक बात साफ करनी जरूरी है,&nbsp; भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां SKM का सहयोगी सदस्य (associate member) जरूर है, लेकिन वो इस मोहाली-चंडीगढ़ धरने का हिस्सा नहीं है। संगठन ने इससे अलग हटकर डिप्टी कमिश्नरों के दफ्तरों के बाहर अपना प्रदर्शन करने का फैसला किया है। इसके अलावा जम्हूरी किसान सभा ने SKM के इस सात दिवसीय मोर्चे में शामिल होने का ऐलान किया है, वहीं BKU एकता उगराहां ने चार सितंबर को सरकारी कर्मचारियों के चल रहे संघर्ष को समर्थन देने की बात कही है। यानी अलग-अलग मुद्दों पर चल रहे आंदोलन इस वक्त एक-दूसरे के साथ खड़े होने की कोशिश कर रहे हैं।</p><h5 class=""><b>मोर्चे को मिल रहा सामाजिक समर्थन</b></h5><p>सिर्फ किसान संगठन ही नहीं, इस आंदोलन को अब सामाजिक और सांस्कृतिक समर्थन भी मिलने लगा है। पंजाबी गायक रेशम सिंह अनमोल खुद मोर्चे पर पहुंचे और लंगर सेवा में हाथ बंटाया। उन्होंने लंगर बना रही महिलाओं के पैर तक दबाए। मोर्चे पर रोज लंगर लग रहा है, किसान खुद खाना बना रहे हैं, कपड़े धो रहे हैं, सड़क किनारे आराम कर रहे हैं,&nbsp; पूरा धरनास्थल एक अस्थायी बस्ती की शक्ल ले चुका है। मोहाली के कुछ गुरुद्वारों की तरफ से भी किसानों के लिए लंगर और पानी की अतिरिक्त व्यवस्था की जा रही है, ताकि दिन-रात यहां डटे किसानों को खाने-पीने की दिक्कत न हो।</p><h5 class=""><b>ट्रैफिक अस्तव्यस्त, 4000 पुलिसकर्मी तैनात</b></h5><p>इतने बड़े जमावड़े का सीधा असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है। चंडीगढ़ और मोहाली को जोड़ने वाली मुख्य सड़क के एक हिस्से पर किसानों का डेरा है, जबकि दूसरी तरफ से ट्रैफिक निकाला जा रहा है। आईसर चौक से बेस्टेक मॉल और आगे जगतपुरा की तरफ जाने वाला रास्ता बुरी तरह प्रभावित है।&nbsp;<br></p><p>फैदां बैरियर से पूर्व मार्ग की तरफ ट्रैफिक डायवर्ट कर दिया गया है, सेक्टर-48 लाइट पॉइंट से सेक्टर 48-49 की आंतरिक सड़कों की तरफ आवाजाही पर पाबंदी है, और सेक्टर 49-50 से चंडीगढ़ जाने वाला रास्ता भी नियंत्रित किया जा रहा है। एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को अतिरिक्त समय लेकर निकलने की सलाह दी गई है, क्योंकि प्रदर्शन वाला इलाका एयरपोर्ट रोड के करीब ही पड़ता है।</p><p>बुधवार को बॉर्डर और आसपास के इलाकों में कई जगह जाम जैसे हालात भी देखने को मिले, क्योंकि एक तरफ लगातार नए किसान मोर्चे पर पहुंच रहे थे, दूसरी तरफ रोजाना इस रास्ते से गुजरने वाले लोगों की आवाजाही भी सामान्य रूप से जारी थी।&nbsp;</p><p>मोहाली डीएसपी हरसिमरन बल के मुताबिक, किसानों के जुटते ही पुलिस बल तैनात कर दिया गया था, ताकि स्थिति और ट्रैफिक व्यवस्था को नियंत्रण में रखा जा सके। प्रशासन की कोशिश है कि सड़क का कम से कम एक हिस्सा हमेशा खुला रहे, ताकि दोनों शहरों के बीच संपर्क पूरी तरह न कटे। सुरक्षा के लिहाज से चंडीगढ़ बॉर्डर पर करीब चार हजार पुलिसकर्मी और रैपिड एक्शन फोर्स के जवान तैनात किए गए हैं, और लगभग सभी बॉर्डर पॉइंट्स पर बैरिकेडिंग की गई है।</p><p>किसान नेताओं ने साफ किया है कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा। उनका कहना है कि वो सरकार से बातचीत के लिए हमेशा तैयार हैं, लेकिन उन्हें सिर्फ आश्वासन नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए।</p><h5 class=""><b>Indo-US डील, जिसने आंदोलन को नई धार दी है</b></h5><p>इस पूरे आंदोलन का सबसे तीखा पहलू है, भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता। आसान भाषा में समझें तो दोनों देश आपसी कारोबार बढ़ाने के लिए कई वस्तुओं पर आयात शुल्क और दूसरी व्यापारिक पाबंदियां घटाने को लेकर बातचीत कर रहे हैं, ताकि अमेरिकी सामान भारत में आसानी से और सस्ते दाम पर आ सके, और भारतीय सामान को भी अमेरिकी बाजार में ज्यादा पहुंच मिले। लेकिन असली विवाद कृषि क्षेत्र को लेकर खड़ा हुआ है।</p><p>किसान संगठनों की सबसे बड़ी चिंता ये है कि अगर अमेरिकी कृषि उत्पादों पर भारत में आयात शुल्क घटा, तो अमेरिकी सामान भारतीय बाजार में सस्ता पड़ सकता है। अमेरिका में खेती बड़े पैमाने पर, ज्यादा मशीनीकरण और भारी सरकारी सब्सिडी के साथ होती है, जबकि भारत में बड़ी संख्या में किसान छोटी जोत पर निर्भर हैं। ऐसे में किसान संगठनों को डर है कि दोनों देशों के किसानों के बीच बराबरी का मुकाबला मुमकिन ही नहीं है।</p><p>मक्का, सोयाबीन और दूसरी कृषि उपज को लेकर खास चिंता जताई जा रही है- किसानों का कहना है कि अगर अमेरिकी उत्पाद सस्ते दाम पर भारतीय बाजार में उतरने लगे, तो घरेलू फसलों की कीमत पर सीधा दबाव पड़ेगा। लेकिन सिर्फ फसलें ही नहीं, चिंता डेयरी क्षेत्र को लेकर भी उतनी ही गहरी है। पंजाब में बड़ी संख्या में छोटे किसान खेती के साथ-साथ पशुपालन भी करते हैं, और दूध से होने वाली कमाई उनकी अतिरिक्त आमदनी का बड़ा जरिया है। किसान नेताओं को डर है कि अगर अमेरिकी डेयरी उत्पादों को भारतीय बाजार में ज्यादा पहुंच मिली, तो सस्ते विदेशी उत्पाद घरेलू दूध कारोबार पर दबाव बना सकते हैं।</p><p>यही वजह है कि किसान संगठन मांग कर रहे हैं कि कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को इस समझौते से पूरी तरह बाहर रखा जाए। किसानों का ये भी सवाल है कि अगर बातचीत चल रही है, तो इसकी शर्तें आम किसानों के सामने पूरी तरह पारदर्शी क्यों नहीं हैं। उनकी मांग है कि किसी भी अंतिम फैसले से पहले किसानों और दूसरे संबंधित पक्षों से बातचीत हो, और उन्हें भरोसा दिलाया जाए कि उनकी आजीविका पर कोई खतरा नहीं आएगा।</p><h5 class=""><b>सरकार का पक्ष: “किसानों के हितों से समझौता नहीं होगा”</b></h5><p>केंद्र सरकार लगातार कहती रही है कि भारत अपने किसानों के हितों की कीमत पर कोई व्यापार समझौता नहीं करेगा। कृषि को बातचीत में "संवेदनशील क्षेत्र" बताया गया है, और सरकार का कहना है कि कोई भी समझौता तभी होगा जब वो भारत के हित में हो। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल पहले ही कह चुके हैं कि समझौता संतुलित होना चाहिए और किसानों, कामगारों, कारोबारियों तथा उपभोक्ताओं, सभी के लिए फायदेमंद होना चाहिए। फरवरी में सरकार की तरफ से जारी जानकारी में भी कहा गया था कि डेयरी, मांस, पोल्ट्री और कई अनाज जैसे संवेदनशील कृषि क्षेत्रों को सुरक्षा दी गई है।</p><p>लेकिन किसान संगठन इस भरोसे से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि खेती करोड़ों लोगों की रोजी-रोटी है, इसलिए फैसला सिर्फ व्यापार बढ़ाने के नजरिए से नहीं, बल्कि किसान की लागत, फसल की कीमत, MSP और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर को ध्यान में रखकर लिया जाना चाहिए। किसानों का सीधा सवाल है- अगर व्यापार भी बढ़ेगा और किसान भी सुरक्षित रहेगा, तो इसकी गारंटी क्या है? यही सवाल अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते को इस आंदोलन का सबसे बड़ा मुद्दा बना चुका है, और किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि अगर सरकार ने किसानों के हितों को नजरअंदाज करके अमेरिका के साथ कोई समझौता किया, तो पूरे देश में चक्का जाम किया जाएगा और रेल यातायात भी रोका जाएगा।</p><h5 class=""><b>मांगों की पूरी फेहरिस्त - US डील अकेला मुद्दा नहीं</b></h5><p>अमेरिका के साथ प्रस्तावित ट्रेड डील के अलावा भी किसानों की मांगों की एक लंबी सूची है। कुछ मांगें सीधे केंद्र सरकार से जुड़ी हैं, तो कुछ का सीधा संबंध पंजाब सरकार और राज्य के अधिकारों से है।</p><p><b>सबसे बड़ी मांग है -&nbsp; 22 फसलों के लिए MSP की कानूनी गारंटी।</b> SKM चाहता है कि MSP सिर्फ सरकार की तरफ से घोषित कीमत भर न रहे, बल्कि किसानों को इसका कानूनी अधिकार मिले। संगठन डॉ. स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक C2 प्लस 50 प्रतिशत के फॉर्मूले पर MSP तय करने की मांग कर रहे हैं- यानी खेती की पूरी लागत पर 50 प्रतिशत मुनाफा जोड़कर कीमत तय हो। इसके साथ किसानों और खेत मजदूरों की पूरी कर्जमाफी और एक बेहतर फसल बीमा व्यवस्था की मांग भी उठाई जा रही है।</p><p><b>दूसरा बड़ा मुद्दा है पंजाब का पानी।</b> SKM चाहता है कि पंजाब के नदी जल से जुड़े पुराने समझौतों की दोबारा समीक्षा हो, और पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर इस पर प्रस्ताव पास किया जाए। साथ ही पंजाब पुनर्गठन कानून की संबंधित धाराओं को हटाने और भाखड़ा-ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) में पंजाब का प्रतिनिधित्व बहाल करने की मांग भी है। यानी पानी का मुद्दा सिर्फ सिंचाई तक नहीं, बल्कि राज्य के संसाधनों और अधिकारों तक फैला हुआ है। इसकी पृष्ठभूमि में केंद्रीय जल आयोग की वो रिपोर्ट भी है, जिसके मुताबिक पंजाब के 153 में से 133 ब्लॉक भूजल के मामले में अति-दोहित या गंभीर स्थिति में पहुंच चुके हैं।</p><p>गन्ना किसानों के लिए मांग है कि दाम 500 रुपये प्रति क्विंटल तय हो, और निजी चीनी मिलों में भुगतान भी एक तय व्यवस्था के तहत हो, ताकि किसानों को बकाया राशि के लिए अलग-अलग जगह भटकना न पड़े। इसके साथ किसानों और ग्रामीण मजदूरों, ग्रामीण कारीगरों समेत, के लिए 10 हजार रुपये मासिक सामाजिक सुरक्षा पेंशन की मांग भी रखी गई है।</p><p>इसके अलावा किसान<b> Electricity Bill 2025 और Seed Bill 2025 </b>को वापस लेने की मांग कर रहे हैं, क्योंकि इनका सीधा असर खेती की लागत और किसान की रोजमर्रा की जरूरतों पर पड़ता है। <b>Dam Safety Act और Disaster Management Act 2024 </b>को वापस लेने की मांग भी आंदोलन का हिस्सा है। और फिर है अमेरिका के साथ-साथ यूरोपीय देशों के साथ प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौतों का विरोध, किसानों को डर है कि इनसे विदेशी कृषि उत्पादों की भारतीय बाजार में एंट्री आसान हो जाएगी, जिससे घरेलू फसलों की कीमत पर दबाव बढ़ेगा।</p><h5 class=""><b>चार सितंबर की अहम बैठक</b></h5><p>किसान नेताओं का कहना है कि उन्होंने <b>राज्यपाल, मुख्यमंत्री, SDM और DC</b> समेत कई अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे हैं, लेकिन साढ़े चार साल से उनकी कई मांगें लंबित पड़ी हैं। तीन सितंबर को आंदोलन के तीसरे दिन भी किसान नेताओं ने साफ कहा कि सरकार की तरफ से अब तक कोई ठोस प्रतिक्रिया या बयान सामने नहीं आया है। दूसरे दिन ही मोर्चे के मंच से नेताओं ने केंद्र और पंजाब सरकार की "पूरी खामोशी" पर कड़ी नाराजगी जताई थी।</p><p>यही वजह है कि अब सबकी नजरें चार सितंबर पर टिकी हैं, जब SKM की वरिष्ठ नेतृत्व टीम एक अहम बैठक करेगी। इस बैठक में सरकार के अब तक के रवैये की समीक्षा की जाएगी और आंदोलन की आगे की रणनीति तय होगी। किसान नेताओं ने पहले ही चेतावनी दे दी है कि अगर सरकार ने ध्यान नहीं दिया, तो आंदोलन को और बड़ा किया जा सकता है।</p><h5 class=""><b>अब आगे क्या&nbsp;</b></h5><p>फिलहाल सात सितंबर तक मोहाली-चंडीगढ़ बॉर्डर पर पक्का मोर्चा जारी रहेगा। लेकिन असली सवाल यही है कि क्या ये आंदोलन तय समयसीमा में सिमट जाएगा, या इसका दायरा और बड़ा होगा। किसानों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस बातचीत और समाधान नहीं होता, संघर्ष जारी रहेगा।</p><p>सवाल सिर्फ एक ट्रेड डील का नहीं है। सवाल ये है कि क्या इस बार भी बात 2020-21 के दिल्ली मोर्चे जैसी लंबी खिंचेगी, या सरकार समय रहते बातचीत की मेज सजाकर एक बड़े टकराव को टाल लेगी। सवाल ये भी है कि बदलती वैश्विक व्यापार व्यवस्था के बीच भारतीय किसान का हित आखिर कैसे सुरक्षित रहेगा। फिलहाल किसान मोर्चे पर डटे हैं, और सरकार के जवाब का इंतजार जारी है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ Explained: किसानों ने घेरा चंडीगढ़ बॉर्डर, US ट्रेड डील बनी सबसे बड़ी चिंता! जानें क्या हैं मांगें ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/bsp-sad-alliance-break-6138 ]]></guid><title><![CDATA[ पंजाब में बसपा ने अकाली दल से तोड़ा गठबंधन, 2027 चुनाव में किसे होगा फायदा और किसका बिगड़ेगा खेल? ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/bsp-sad-alliance-break-6138 ]]></link><pubDate><![CDATA[Wed, 02 Sep 2026 11:00:58 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ पंजाब की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन का गणित तेजी से बदल रहा है। शिरोमणि अकाली दल को पहले बीजेपी के साथ पुराने रिश्ते बहाल करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है और अब उसकी सहय ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>पंजाब </b>की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन का गणित तेजी से बदल रहा है। <b>शिरोमणि अकाली दल</b> को पहले बीजेपी के साथ पुराने रिश्ते बहाल करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है और अब उसकी सहयोगी रही <b>बहुजन समाज पार्टी</b> ने भी अलग राह चुन ली है।</p><p><b>बसपा सुप्रीमो मायावती </b>ने पार्टी नेताओं के साथ बैठक के बाद साफ किया है कि उनकी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव अपने दम पर लड़ेगी। मायावती के मुताबिक, पिछले चुनावों में गठबंधन की राजनीति से बसपा को सीटों और वोट प्रतिशत के लिहाज से अपेक्षित फायदा नहीं मिला। पार्टी का मानना है कि अकेले चुनाव लड़ने से संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने का बेहतर मौका मिलेगा।</p><p>हालांकि, पंजाब में बसपा के अलग चुनाव लड़ने का सीधा असर कितना बड़ा होगा, यह उसके मौजूदा जनाधार और क्षेत्रीय प्रभाव पर निर्भर करेगा।</p><h5 class=""><b>2022 में SAD के साथ मैदान में थी BSP</b></h5><p>शिरोमणि अकाली दल और बसपा ने 2022 का पंजाब विधानसभा चुनाव गठबंधन के तहत लड़ा था। राज्य की 117 विधानसभा सीटों में से बसपा को 20 सीटें मिली थीं। इनमें दोआबा की आठ, मालवा की सात और माझा क्षेत्र की पांच सीटें शामिल थीं। लेकिन पार्टी इन 20 सीटों में सिर्फ नवांशहर सीट जीत सकी।</p><p>इस प्रदर्शन के बाद गठबंधन से बसपा को बड़ा राजनीतिक विस्तार नहीं मिल पाया। अब मायावती का अकेले चुनाव लड़ने का फैसला इसी अनुभव की पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है।</p><p>अकाली दल के लिए यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बसपा के पास पंजाब के दलित मतदाताओं के बीच कुछ खास इलाकों में प्रभाव रहा है। खासकर दोआबा क्षेत्र को पार्टी का पारंपरिक मजबूत इलाका माना जाता है।</p><p><img style="width: 780.067px;" src="https://media.gtcbharat.com/wp-content/uploads/2026/09/mayawati-sukhbir1_0596389813bfac7e52961f57f1649e33_1280X720.webp"><br></p><p><br></p><h5 class=""><b>क्या अकाली दल का दलित वोट बैंक कमजोर होगा?</b></h5><p>पंजाब देश के उन राज्यों में है जहां अनुसूचित जाति की आबादी का अनुपात काफी अधिक है। 2011 की जनगणना के मुताबिक राज्य की कुल आबादी में अनुसूचित जातियों की हिस्सेदारी करीब 31.94 फीसदी थी।</p><p>लेकिन इतनी बड़ी आबादी का वोट किसी एक राजनीतिक दल के साथ स्थायी रूप से नहीं रहा है। दलित समुदाय के भीतर भी अलग-अलग सामाजिक समूह हैं और उनका राजनीतिक झुकाव क्षेत्र तथा परिस्थितियों के हिसाब से बदलता रहा है।</p><p>बसपा का पंजाब में प्रभाव विशेष रूप से रविदासिया और आदि-धर्मी समुदायों के बीच दोआबा क्षेत्र में देखने को मिला है। वहीं मजहबी सिख और वाल्मीकि समुदाय समेत दूसरे दलित समूहों का समर्थन अलग-अलग पार्टियों की ओर जाता रहा है।</p><p>यही वजह है कि बसपा के अलग होने का मतलब यह नहीं है कि पूरा दलित वोट अकाली दल से छिटक जाएगा। इसका असर मुख्य रूप से उन विधानसभा सीटों पर पड़ सकता है जहां बसपा का अपना संगठन और वोट आधार मौजूद है।</p><h5 class=""><b>बसपा का सबसे मजबूत दौर कब था?</b></h5><p>पंजाब में बसपा का सबसे प्रभावशाली प्रदर्शन 1992 के विधानसभा चुनाव में देखने को मिला था। उस चुनाव में पार्टी ने नौ सीटों पर जीत हासिल की थी और उसका वोट शेयर 16 फीसदी से अधिक रहा था।</p><p>इसके बाद पार्टी का जनाधार धीरे-धीरे कमजोर होता गया। 2017 के विधानसभा चुनाव में उसका वोट शेयर करीब 1.52 फीसदी रहा। 2022 में यह बढ़कर लगभग 1.77 फीसदी हुआ, लेकिन पार्टी सिर्फ एक सीट जीत पाई।</p><p>यानी आज की स्थिति में बसपा पंजाब में 1990 के दशक वाली ताकत नहीं है। यही कारण है कि राजनीतिक विश्लेषण में उसके गठबंधन से अलग होने को पूरे राज्य में बड़े वोट ट्रांसफर के बजाय सीमित लेकिन रणनीतिक असर के तौर पर देखा जा रहा है।</p><h5 class=""><b>1996 में SAD-BSP गठबंधन ने किया था कमाल</b></h5><p>अकाली दल और बसपा के रिश्ते नए नहीं हैं। दोनों दलों का एक महत्वपूर्ण गठबंधन 1996 के लोकसभा चुनाव में हुआ था। उस समय पंजाब की 13 लोकसभा सीटों में से गठबंधन ने 11 सीटों पर जीत हासिल की थी।</p><p>बसपा ने तीन सीटें जीती थीं, जिनमें पार्टी संस्थापक कांशीराम की होशियारपुर से जीत भी शामिल थी।</p><p>लेकिन यह राजनीतिक साझेदारी लंबे समय तक कायम नहीं रही। 1997 के विधानसभा चुनाव तक अकाली दल ने बीजेपी के साथ गठबंधन कर लिया और बसपा का प्रदर्शन भी तेजी से कमजोर हुआ।</p><p>कई साल बाद जून 2021 में अकाली दल और बसपा फिर साथ आए। इसका मकसद पंजाब के सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए एक वैकल्पिक गठबंधन तैयार करना था। लेकिन 2022 के नतीजों के बाद यह साझेदारी अपेक्षित राजनीतिक ताकत हासिल नहीं कर सकी।</p><h5 class=""><b>पंजाब में बसपा कमजोर क्यों हुई?</b></h5><p>पंजाब में बसपा के कमजोर होने के पीछे कई कारण बताए जाते हैं। सबसे बड़ा कारण दलित वोटों का एकजुट न होना है। अलग-अलग समुदायों का समर्थन कांग्रेस, अकाली दल, आम आदमी पार्टी और अन्य दलों के बीच बंटा रहा है।</p><p>दूसरी चुनौती मजबूत स्थानीय नेतृत्व की कमी रही है। कांशीराम के दौर के बाद पंजाब में पार्टी वैसा प्रभावशाली स्थानीय नेतृत्व विकसित नहीं कर सकी, जो लंबे समय तक संगठन को विस्तार दे सके।</p><p>तीसरी वजह यह मानी जाती है कि बड़े राजनीतिक दलों ने कल्याणकारी योजनाओं, सामाजिक संगठनों और स्थानीय प्रभावशाली चेहरों के जरिए दलित मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ बढ़ाई है।</p><p>इन परिस्थितियों में बसपा का अकेले चुनाव लड़ना उसके लिए दोधारी रणनीति हो सकती है। इससे पार्टी को अपनी पहचान और संगठन मजबूत करने का मौका मिलेगा, लेकिन गठबंधन का सहारा हटने से सीट जीतने की चुनौती भी बढ़ सकती है।</p><h5 class=""><b>दोआबा में बसपा बिगाड़ सकती है अकाली दल का गणित</b></h5><p>बसपा के फैसले का सबसे अधिक असर दोआबा क्षेत्र में देखने को मिल सकता है। यहां पार्टी का ऐतिहासिक आधार अपेक्षाकृत मजबूत रहा है।</p><p>बहुकोणीय मुकाबले में किसी पार्टी का छोटा वोट शेयर भी चुनावी नतीजे को प्रभावित कर सकता है। अगर बसपा उन सीटों पर अपने पारंपरिक वोट को बनाए रखने में सफल रहती है जहां अकाली दल भी मुकाबले में है, तो दोनों दलों के बीच वोटों का बंटवारा हो सकता है।</p><p>हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अकाली दल को पंजाबभर में बड़ा नुकसान होना तय है। बसपा का मौजूदा वोट शेयर करीब 1.77 फीसदी रहने की वजह से उसका असर सीट-दर-सीट अलग-अलग हो सकता है।</p><h5 class=""><b>अकाली दल के सामने अब बड़ी चुनौती क्या?</b></h5><p>अकाली दल के लिए बसपा का अलग होना ऐसे समय आया है जब पार्टी पहले से ही अपने राजनीतिक आधार को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। बीजेपी के साथ उसका पुराना गठबंधन 2020 में कृषि कानूनों के मुद्दे पर टूट गया था और दोनों पार्टियों ने 2022 विधानसभा तथा 2024 लोकसभा चुनाव अलग-अलग लड़े।</p><p>ऐसे में अकाली दल के सामने दोहरी चुनौती है। उसे एक तरफ अपना पारंपरिक पंथिक और ग्रामीण आधार मजबूत करना है, वहीं दूसरी ओर दलित मतदाताओं तक अपनी पहुंच भी बनाए रखनी होगी।</p><p>दूसरी तरफ बीजेपी के साथ संभावित गठबंधन को लेकर भी पंजाब की राजनीति में चर्चा जारी है। अगर बीजेपी और अकाली दल फिर साथ आते हैं, तो बसपा का अकेले चुनाव लड़ना गठबंधन के सामने अलग तरह का चुनावी समीकरण खड़ा कर सकता है।</p><h5 class=""><b>बसपा के लिए भी आसान नहीं होगी राह</b></h5><p>मायावती का अकेले चुनाव लड़ने का फैसला पार्टी को अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाने का मौका देता है। लेकिन पंजाब में सीमित वोट शेयर और मजबूत स्थानीय नेतृत्व की कमी उसके सामने बड़ी चुनौती है।</p><p>अकेले चुनाव लड़ने पर बसपा को अपने पारंपरिक वोट को बचाने के साथ-साथ नए मतदाताओं तक पहुंच बनानी होगी। खासतौर पर दोआबा से बाहर पार्टी का विस्तार करना उसके लिए महत्वपूर्ण होगा।</p><p>इसलिए 2027 के चुनाव में बसपा कितनी सीटों पर प्रभाव डाल पाती है, यह सिर्फ उसके वोट प्रतिशत से तय नहीं होगा। कुछ सीटों पर उसका प्रदर्शन अकाली दल, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और संभावित बीजेपी-अकाली समीकरण के नतीजों को प्रभावित कर सकता है।</p><p>फिलहाल इतना जरूर है कि पंजाब में गठबंधन की राजनीति का एक और अध्याय बदल गया है। बसपा ने अकाली दल से दूरी बनाकर अकेले चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया है। अब देखना होगा कि यह फैसला मायावती की पार्टी को फिर से मजबूत करता है या बहुकोणीय मुकाबले में उसका प्रभाव और सीमित हो जाता है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब में बसपा ने अकाली दल से तोड़ा गठबंधन, 2027 चुनाव में किसे होगा फायदा और किसका बिगड़ेगा खेल? ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/raja-warring-arrest-case-6126 ]]></guid><title><![CDATA[ अमरिंदर राजा वड़िंग पर गिरफ्तारी का संकट? SC आयोग ने 5 दिन में कार्रवाई के दिए निर्देश, पंजाब सरकार बोली- जरूरत पड़ी तो होगा एक्शन ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/raja-warring-arrest-case-6126 ]]></link><pubDate><![CDATA[Tue, 01 Sep 2026 12:24:40 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर राजा वड़िंग एक पुराने विवाद को लेकर एक बार फिर चर्चा में हैं। मामला पूर्व केंद्रीय मंत्री बूटा सिंह को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़ा है। यह टिप्पणी तरनतारन  ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p>पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष <b>अमरिंदर राजा वड़िंग </b>एक पुराने विवाद को लेकर एक बार फिर चर्चा में हैं। मामला पूर्व केंद्रीय मंत्री <b>बूटा सिंह</b> को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़ा है। यह टिप्पणी तरनतारन में चुनाव प्रचार के दौरान किए जाने का आरोप है।</p><p>मामले में बूटा सिंह के बेटे <b>सरबजोत सिंह</b> की शिकायत के बाद कार्रवाई की मांग लंबे समय से चल रही है। अब अनुसूचित जाति आयोग ने सुनवाई के दौरान जांच और कार्रवाई में देरी पर गंभीर चिंता जताई है।</p><p>आयोग के रुख के बाद पंजाब की राजनीति में भी हलचल बढ़ गई है। राज्य सरकार के मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा है कि आयोग ने गिरफ्तारी की सिफारिश की है और यदि कानूनी प्रक्रिया के तहत जरूरत हुई तो गिरफ्तारी भी की जाएगी।</p><p>हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक आयोग की ओर से कार्रवाई को लेकर निर्देश दिए गए हैं, जबकि वड़िंग की गिरफ्तारी वास्तव में हुई है या नहीं, इसकी पुष्टि इस जानकारी में नहीं है।</p><h5 class=""><b>SC आयोग ने क्यों जताई नाराजगी?</b></h5><p>अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष <b>किशोर मकवाना </b>की अध्यक्षता में मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई में बूटा सिंह के बेटे सरबजोत सिंह भी मौजूद रहे। आयोग ने दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद जांच में देरी, कथित आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई में देरी और आयोग के सामने कार्रवाई रिपोर्ट पेश नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई।</p><p>आयोग ने अधिकारियों से मामले में जल्द कदम उठाने को कहा है और पांच दिन की समय-सीमा दी गई है।</p><p>इससे पहले<b> 5 मई 2026</b> को हुई सुनवाई में भी आयोग ने मामले की जांच तय समय में पूरी करने का निर्देश दिया था। आयोग ने शिकायतकर्ता <b>सरबजोत सिंह</b> की ओर से कथित धमकी भरे फोन कॉल मिलने की शिकायत को भी गंभीरता से लिया था।</p><p>आयोग ने शिकायतकर्ता और उनके आश्रितों को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 15A के तहत आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। इसके साथ ही 30 दिन के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट आयोग को देने को कहा गया था।</p><h5 class=""><b>पंजाब सरकार ने क्या कहा?</b></h5><p>मामले पर पंजाब सरकार की ओर से मंत्री <b>हरपाल सिंह चीमा </b>ने स्पष्ट किया कि सरकार आयोग के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो गिरफ्तारी भी की जाएगी।</p><p>सरकार के इस बयान के बाद मामला राजनीतिक रूप से और महत्वपूर्ण हो गया है। पंजाब में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच पहले से ही कई मुद्दों पर राजनीतिक टकराव देखने को मिलता रहा है। ऐसे में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष से जुड़ा यह मामला दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप को और तेज कर सकता है।</p><p>मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि इसमें दलित समुदाय से जुड़े एक पूर्व केंद्रीय मंत्री के खिलाफ कथित टिप्पणी का आरोप है। ऐसे में राजनीतिक दल इस मुद्दे को सामाजिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर उठा सकते हैं।</p><h5 class=""><b>बूटा सिंह के बेटे ने फैसले का किया स्वागत</b></h5><p><b>सरबजोत सिंह</b> ने अनुसूचित जाति आयोग की ओर से दिए गए निर्देशों का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि आयोग द्वारा तय की गई पांच दिन की समय-सीमा महत्वपूर्ण है और अब आगे की कानूनी कार्रवाई संबंधित अधिकारियों को करनी है।</p><p>सरबजोत सिंह ने उम्मीद जताई कि आयोग की सिफारिश और निर्देशों के बाद मामले में जल्द और उचित कार्रवाई होगी। उनका कहना है कि वह अब अधिकारियों की ओर से उठाए जाने वाले अगले कदम का इंतजार करेंगे।</p><h5 class=""><b>अब आगे क्या होगा?</b></h5><p>फिलहाल पूरे मामले की नजर पांच दिन की समय-सीमा पर है। आयोग के निर्देश के बाद संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट करनी होगी और आयोग के सामने रिपोर्ट पेश करनी होगी।</p><p>राजनीतिक स्तर पर भी यह मामला आने वाले दिनों में गर्म रहने की संभावना है। एक तरफ कांग्रेस की ओर से इस कार्रवाई को लेकर प्रतिक्रिया सामने आ सकती है, वहीं पंजाब सरकार अपने रुख को कानूनी प्रक्रिया से जोड़कर देख रही है।</p><p>सबसे अहम सवाल यही है कि आयोग के निर्देशों के बाद पुलिस और संबंधित जांच एजेंसियां क्या कदम उठाती हैं और क्या इस मामले में अमरिंदर राजा वड़िंग के खिलाफ गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई होती है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में इतना स्पष्ट है कि अनुसूचित जाति आयोग ने देरी पर कड़ा रुख अपनाया है और पांच दिन में कार्रवाई की दिशा में कदम उठाने को कहा है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ अमरिंदर राजा वड़िंग पर गिरफ्तारी का संकट? SC आयोग ने 5 दिन में कार्रवाई के दिए निर्देश, पंजाब सरकार बोली- जरूरत पड़ी तो होगा एक्शन ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/amritsar-aap-protest-tarun-chugh-6124 ]]></guid><title><![CDATA[ सज्जन कुमार के निधन के बाद पंजाब में सियासी संग्राम, AAP ने तरुण चुघ के घर के बाहर किया प्रदर्शन ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/amritsar-aap-protest-tarun-chugh-6124 ]]></link><pubDate><![CDATA[Tue, 01 Sep 2026 11:32:27 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ अमृतसर, पंजाब: 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में दोषी ठहराए गए पूर्व कांग्रेस नेता सज्जन कुमार के निधन के बाद उनके घर पहुंचकर कथित तौर पर शोक व्यक्त करने वाले भाजपा नेताओं के खिलाफ आम आदमी पार्टी  ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>अमृतसर, पंजाब:</b> 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में दोषी ठहराए गए पूर्व कांग्रेस नेता सज्जन कुमार के निधन के बाद उनके घर पहुंचकर कथित तौर पर शोक व्यक्त करने वाले भाजपा नेताओं के खिलाफ आम आदमी पार्टी (AAP) ने मंगलवार को अमृतसर में विरोध प्रदर्शन किया।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">AAP कार्यकर्ताओं ने भाजपा के राज्यसभा सांसद तरुण चुघ के आवास के बाहर प्रदर्शन किया। पार्टी ने भाजपा नेताओं के सज्जन कुमार के आवास पर पहुंचने को लेकर सवाल उठाते हुए इसे सिख समुदाय की भावनाओं के प्रति असंवेदनशीलता बताया।</span></p><p>प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे AAP विधायक अजय गुप्ता ने भाजपा पर निशाना साधते हुए 1984 के दंगा पीड़ितों को लेकर पार्टी के रुख पर स्पष्टीकरण मांगा।<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं का सज्जन कुमार के आवास पर जाना गंभीर सवाल खड़े करता है। गुप्ता ने आरोप लगाया कि भाजपा धर्म और वोट बैंक की राजनीति करती है और पंजाब के साथ अन्यायपूर्ण व्यवहार कर रही है।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">उन्होंने कहा कि AAP पूरे पंजाब में भाजपा का कथित “असली चेहरा” जनता के सामने लाएगी और यह सवाल उठाएगी कि भाजपा सिख समुदाय के साथ खड़ी है या 1984 के दंगों में दोषी ठहराए गए लोगों के साथ।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;&lt;a href="https://x.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#WATCH&lt;/a&gt; | Amritsar, Punjab: Aam Aadmi Party workers hold a protest outside the residence of Rajya Sabha MP Tarun Chugh over the BJP&amp;#39;s leaders visiting the residence of anti-Sikh riot convict Sajjan Kumar, who died Aug 20, to pay their condolences.&lt;br&gt;&lt;br&gt;Heavy security has been deployed… &lt;a href="https://t.co/L1iIFWiqrE"&gt;pic.twitter.com/L1iIFWiqrE&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; ANI (@ANI) &lt;a href="https://x.com/ANI/status/2094653890465841306?ref_src=twsrc^tfw"&gt;September 1, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><h5 class=""><b>20 अगस्त को हुआ था सज्जन कुमार का निधन</b></h5><p>सज्जन कुमार का 20 अगस्त को निधन हुआ था। वह 1984 के सिख विरोधी दंगा मामले में दोषी ठहराए गए थे। उनके निधन के बाद कुछ भाजपा नेताओं के उनके आवास पर पहुंचने को लेकर पंजाब में राजनीतिक विवाद शुरू हो गया।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">AAP ने इसी मुद्दे को लेकर भाजपा पर हमला तेज किया और अमृतसर में प्रदर्शन किया।</span></p><h5 class=""><b>तरुण चुघ के आवास पर सुरक्षा बढ़ाई गई</b></h5><p class="grey-bg-red"><b><i>प्रदर्शन को देखते हुए पंजाब पुलिस ने भाजपा सांसद तरुण चुघ के आवास के बाहर भारी सुरक्षा बल तैनात किया।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">ADCP हरपाल सिंह ने बताया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस पूरी तरह सतर्क है और किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">पुलिस के अनुसार, सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी DCP (Law and Order) के स्तर पर की जा रही थी। इसके अलावा तीन SP, तीन ADCP, चार ACP और करीब 100 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी।</span></i></b></p><h5 class=""><b>हिंसा की स्थिति में कार्रवाई की चेतावनी</b></h5><p>ADCP हरपाल सिंह ने कहा कि यदि कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश की गई तो पुलिस कार्रवाई करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति को कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">प्रदर्शन के कारण तरुण चुघ के आवास के आसपास सुरक्षा बढ़ाई गई और पुलिस ने स्थिति पर नजर बनाए रखी।</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ सज्जन कुमार के निधन के बाद पंजाब में सियासी संग्राम, AAP ने तरुण चुघ के घर के बाहर किया प्रदर्शन ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/amritsar-aap-protest-tarun-chugh-sajjan-kumar-6123 ]]></guid><title><![CDATA[ Sajjan Kumar Row: AAP Stages Protest Outside Tarun Chugh’s Amritsar Residence ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/amritsar-aap-protest-tarun-chugh-sajjan-kumar-6123 ]]></link><pubDate><![CDATA[Tue, 01 Sep 2026 11:26:04 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ Amritsar, Punjab: Aam Aadmi Party (AAP) workers on Tuesday staged a massive protest outside the residence of BJP Rajya Sabha MP Tarun Chugh in Amritsar, following reports of BJP leaders visiting the r ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>Amritsar, Punjab: </b>Aam Aadmi Party (AAP) workers on Tuesday staged a massive protest outside the residence of BJP Rajya Sabha MP Tarun Chugh in Amritsar, following reports of BJP leaders visiting the residence of the late Sajjan Kumar--a convict in the 1984 anti-Sikh riots--to offer their condolences.</span></p><p>Sajjan Kumar passed away on August 20. The AAP has slammed the BJP for the move, accusing the saffron party of disrespecting the Sikh community by associating with those convicted of the 1984 massacre.&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">Leading the protest, AAP MLA Ajay Gupta questioned the BJP's integrity and demanded a clarification on their stance regarding the 1984 victims.</span></p><p>"We are heading to the residence of Tarun Chugh, a BJP MP, to stage this protest. The reason for this protest is that BJP members go to the residences of individuals found guilty in the 1984 anti-Sikh riots. This clearly demonstrates that the BJP engages solely in the politics of religion and vote banks. I want to ask them to clarify their stance: do they stand with the Sikhs, or with those found guilty of massacring them?" Gupta said.</p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;&lt;a href="https://x.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#WATCH&lt;/a&gt; | Amritsar, Punjab: Aam Aadmi Party workers hold a protest outside the residence of Rajya Sabha MP Tarun Chugh over the BJP&amp;#39;s leaders visiting the residence of anti-Sikh riot convict Sajjan Kumar, who died Aug 20, to pay their condolences.&lt;br&gt;&lt;br&gt;Heavy security has been deployed… &lt;a href="https://t.co/L1iIFWiqrE"&gt;pic.twitter.com/L1iIFWiqrE&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; ANI (@ANI) &lt;a href="https://x.com/ANI/status/2094653890465841306?ref_src=twsrc^tfw"&gt;September 1, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><p>He further added, "As the Aam Aadmi Party, we intend to expose the true face of the BJP across Punjab--a party that harbors an anti-Sikh attitude, treats Punjab unfairly, and believes in instigating riots to further its vote-bank politics. We will march to his residence and demand to know his position regarding the Sikh community--whether he stands with them or against them."</p><p>In view of the protest, the Punjab Police deployed a heavy security contingent outside MP Tarun Chugh's residence to prevent any escalation of the situation.&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">ADCP Harpal Singh stated that the police are on high alert to ensure that law and order are maintained.</span></p><p>"We have deployed force here--specifically near the residence of senior BJP leader Tarun Chugh--because members of the Aam Aadmi Party have gathered to protest against the BJP's leaders reaching Sajjan Kumar's residence. To maintain law and order, we have deployed a significant force: the operation is being supervised by the DCP (Law and Order), assisted by three SPs, three ADCPs, four ACPs, and approximately 100 personnel," ADCP Singh said.</p><p>Warning against any violence, the ADCP added, "If the law and order situation deteriorates, action will certainly be taken; no one will be permitted to take the law into their own hands. As for the duration, the event is scheduled to begin around 10:00 or 10:30 AM; we will assess the situation after that."</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ Sajjan Kumar Row: AAP Stages Protest Outside Tarun Chugh’s Amritsar Residence ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-university-election-abvp-ankit-bidhan-6122 ]]></guid><title><![CDATA[ पंजाब यूनिवर्सिटी चुनाव में ABVP की बड़ी जीत, अंकित बिढान बने अध्यक्ष; SOI के समर्थन का भी मिला फायदा ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-university-election-abvp-ankit-bidhan-6122 ]]></link><pubDate><![CDATA[Mon, 31 Aug 2026 19:00:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ चंडीगढ़,&nbsp;पंजाब: पंजाब यूनिवर्सिटी कैंपस स्टूडेंट्स काउंसिल (PUCSC) चुनाव 2026 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने बड़ी जीत दर्ज की है। ABVP के उम्मीदवार अंकित बिढान ने अध्यक्ष पद पर जीत हा ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b><span style="font-size: 1rem;">चंडीगढ़,&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">पंजाब</span></b><span style="font-size: 1rem;"><b>: </b>पंजाब यूनिवर्सिटी कैंपस स्टूडेंट्स काउंसिल (PUCSC) चुनाव 2026 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने बड़ी जीत दर्ज की है। ABVP के उम्मीदवार अंकित बिढान ने अध्यक्ष पद पर जीत हासिल कर छात्र राजनीति में संगठन का दबदबा बरकरार रखा। यह जीत ऐसे समय में हुई है, जब विश्वविद्यालय चुनाव में राजनीतिक दलों से जुड़े छात्र संगठनों के बीच मुकाबला काफी दिलचस्प बना हुआ था।</span></p><p>PUCSC चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए चार उम्मीदवार मैदान में थे। इनमें कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI के गुरमन सिंह सिद्धू, AAP समर्थित ASAP के आदिल बीर सिंह, ABVP के अंकित बिढान और दर्शप्रीत सिंह शामिल थे। मतदान के बाद हुई मतगणना में अंकित बिढान ने अपने प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ते हुए अध्यक्ष पद अपने नाम किया।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">अंकित बिढान की जीत को ABVP के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है। चुनाव के दौरान विभिन्न छात्र संगठनों ने राष्ट्रीय और स्थानीय राजनीतिक मुद्दों को भी जोर-शोर से उठाया था।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;The Verdict is in! &lt;br&gt;&lt;br&gt;Panjab University chooses ABVP yet again!&lt;br&gt;Another mandate. Another massive victory.&lt;br&gt;&lt;br&gt;Thank you, PU. ❤️ &lt;a href="https://t.co/rXBRLcFGNK"&gt;pic.twitter.com/rXBRLcFGNK&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; ABVP (@ABVPVoice) &lt;a href="https://x.com/ABVPVoice/status/2094408686844411987?ref_src=twsrc^tfw"&gt;August 31, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><h5 class=""><b>16,500 से ज्यादा छात्रों ने किया मतदान</b></h5><p>इस साल PUCSC चुनाव में करीब 16,500 छात्र मतदाता अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करने के लिए पात्र थे। अध्यक्ष के अलावा उपाध्यक्ष, सचिव, संयुक्त सचिव और विभागीय प्रतिनिधियों के पदों के लिए भी चुनाव हुआ।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">कुल 16 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे, जिनमें चार उम्मीदवार अध्यक्ष पद के लिए मुकाबले में थे। मतदान सुबह 9:30 बजे शुरू हुआ और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कराया गया। मतगणना दोपहर से शुरू हुई।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;Panjab University, it’s time to make it official! When you step into the booth today, look for number two.&lt;br&gt;&lt;br&gt;Stamp firmly in front of Ballot No. 2, Ankit Bidhan, and elect him as President of the PUCSC. Fold it, drop it in the box, and lock in the win.&lt;br&gt;&lt;br&gt;Ankit Bidhan I Ballot No.… &lt;a href="https://t.co/XhpsUGnxmn"&gt;pic.twitter.com/XhpsUGnxmn&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; ABVP Punjab (@ABVPPunjab) &lt;a href="https://x.com/ABVPPunjab/status/2094258010701103155?ref_src=twsrc^tfw"&gt;August 31, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><h5 class=""><b>SOI ने दिया था ABVP को समर्थन</b></h5><p>चुनाव से ठीक पहले इस मुकाबले में एक बड़ा राजनीतिक मोड़ आया था। शिरोमणि अकाली दल (SAD) के छात्र संगठन Student Organisation of India (SOI) ने ABVP के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार अंकित बिढान को समर्थन देने का ऐलान किया था।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">SOI के अपने उम्मीदवार का नामांकन खारिज होने के बाद संगठन ने ABVP उम्मीदवार के समर्थन का फैसला किया। इस घटनाक्रम ने चुनावी मुकाबले को और महत्वपूर्ण बना दिया था।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;&lt;a href="https://x.com/hashtag/LATESTUPDATE?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#LATESTUPDATE&lt;/a&gt;&lt;br&gt;&lt;br&gt;ALL POST - Panjab University Election Result&lt;br&gt;&lt;br&gt;PRESIDENT &lt;br&gt;Total = After UIET (59th Department)&lt;br&gt;&lt;br&gt;ABVP - ANKIT BIDHAN: 2879 (Lead:  556 over Aadil)&lt;br&gt;ASAP - AADIL BRAR: 2323&lt;br&gt;NSUI - GURMAN SINGH SIDHU: 2034&lt;br&gt;SATH - DARSHPREET SINGH: 1208&lt;br&gt;&lt;br&gt;(ABVP is now very close to…&lt;/p&gt;&amp;mdash; Rishu Raj Singh (@rishuraj_chd) &lt;a href="https://x.com/rishuraj_chd/status/2094400337943920790?ref_src=twsrc^tfw"&gt;August 31, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><h5 class=""><b>पिछले साल भी ABVP ने जीता था अध्यक्ष पद</b></h5><p>ABVP के लिए यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि संगठन ने पिछले साल भी PUCSC के अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की थी। चुनाव से पहले ABVP ने अंकित बिढान को अपना उम्मीदवार घोषित करते हुए कहा था कि संगठन छात्र हितों और अधिकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता देगा।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">अंकित बिढान 2021 से ABVP से जुड़े हैं। उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी के विधि विभाग से कानून की पढ़ाई की और बाद में Centre for the Study of Social Inclusion में शोधार्थी के रूप में दाखिला लिया।</span></p><h5 class=""><b>चुनाव से पहले आरोप-प्रत्यारोप भी रहे चर्चा में</b></h5><p class="grey-bg-red"><b><i>PUCSC चुनाव से पहले छात्र संगठनों के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी देखने को मिले। AAP समर्थित ASAP ने कथित धमकी और राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप लगाए थे, जबकि ABVP ने इन आरोपों को खारिज किया था।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">इससे पहले नामांकन प्रक्रिया के दौरान भी विवाद सामने आया था। SOI के उम्मीदवार का नामांकन खारिज होने के बाद संगठन ने विरोध जताया था। वहीं, अंकित बिढान के नामांकन पर भी आपत्ति उठाई गई थी।</span></i></b></p><h5 class=""><b>विश्वविद्यालय ने चुनाव को लेकर जारी की थी एडवाइजरी</b></h5><p>पंजाब यूनिवर्सिटी ने चुनाव से पहले छात्रों के लिए आधिकारिक एडवाइजरी भी जारी की थी। विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों और छात्रावासों की आधिकारिक नोटिस बोर्ड पर PUCSC चुनाव 2026 से संबंधित सूचनाएं और दिशा-निर्देश प्रकाशित किए गए थे।</p><h5 class=""><b>छात्र राजनीति में अहम माना जा रहा परिणाम</b></h5><p>पंजाब यूनिवर्सिटी का छात्र संघ चुनाव केवल कैंपस राजनीति तक सीमित नहीं माना जाता। यहां सक्रिय छात्र संगठन अक्सर राष्ट्रीय और राज्य की राजनीति से भी जुड़े रहते हैं। ऐसे में ABVP की लगातार दूसरी बार अध्यक्ष पद पर जीत को संगठन के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">हालांकि, चुनाव परिणामों को सीधे आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव का जनादेश मानना उचित नहीं होगा। लेकिन छात्र राजनीति में विभिन्न संगठनों के बीच बने समीकरण आने वाले समय में राजनीतिक चर्चाओं का विषय जरूर रहेंगे।</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब यूनिवर्सिटी चुनाव में ABVP की बड़ी जीत, अंकित बिढान बने अध्यक्ष; SOI के समर्थन का भी मिला फायदा ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/ravneet-bittu-punjab-6118 ]]></guid><title><![CDATA[ ‘हमने ही अपनी जान देने का ठेका लिया हुआ है’, रवनीत बिट्टू का तीखा हमला, बोले- पंजाब में फिर दिख रहा काला दौर ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/ravneet-bittu-punjab-6118 ]]></link><pubDate><![CDATA[Mon, 31 Aug 2026 16:18:55 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की पुण्यतिथि पर उनके पोते और बीजेपी नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने राज्य के मौजूदा राजनीतिक माहौल को लेकर कई तीखी टिप्पणियां कीं। उन्होंने अपने दादा को याद करते हुए कह ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p>पंजाब के पूर्व <b>मुख्यमंत्री बेअंत सिंह</b> की पुण्यतिथि पर उनके पोते और <b>बीजेपी नेता रवनीत सिंह बिट्टू</b> ने राज्य के मौजूदा राजनीतिक माहौल को लेकर कई तीखी टिप्पणियां कीं। उन्होंने अपने दादा को याद करते हुए कहा कि पंजाब में शांति और सद्भाव के लिए बेअंत सिंह का बलिदान हमेशा प्रेरणा देता रहेगा।<br></p><p>इस मौके पर बिट्टू ने पंजाब को नशामुक्त बनाने का संकल्प भी दोहराया। हालांकि, मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने<b> ‘बंदी सिखों’ </b>की पैरोल और रिहाई से लेकर आतंकवाद से जुड़े पुराने मामलों तक कई मुद्दों पर विपक्षी दलों और राज्य की राजनीति पर निशाना साधा।</p><p>बिट्टू ने कहा कि अक्सर लोग किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी निंदा या प्रशंसा करते हैं, लेकिन जिन लोगों ने आतंकवाद के दौर में कानून-व्यवस्था संभालने में भूमिका निभाई, उनके साथ ऐसा व्यवहार नहीं हुआ। उन्होंने पूर्व पुलिस अधिकारी केपीएस गिल का उदाहरण देते हुए सवाल उठाया कि उनके कार्यकाल के बाद भी उन्हें किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाया गया।</p><h5 class=""><b>‘कमजोर को डराया जाता है’</b></h5><p>बीजेपी नेता ने पंजाब के पुराने आतंकवाद के दौर का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय कई पुलिस अधिकारियों और नेताओं ने अपनी जिम्मेदारी निभाई थी। उन्होंने दावा किया कि शांति और सद्भाव की बात करने वाले कमजोर नेताओं को निशाना बनाए जाने का खतरा हमेशा बना रहता है।</p><p>बिट्टू ने कहा कि उन्होंने पंजाब में ऐसे हालात देखे हैं और वह किसी भी परिस्थिति का सामना करने के लिए तैयार हैं। उनकी टिप्पणियां ऐसे समय आई हैं जब पंजाब में ‘बंदी सिखों’ की रिहाई और पैरोल को लेकर राजनीतिक बहस जारी है।</p><p>उन्होंने कहा कि कानून के तहत जिन्हें सजा मिली है, उनके मामलों का फैसला न्यायिक प्रक्रिया के जरिए होना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को अपनी सजा या मामले में राहत चाहिए तो उसे अदालत का रास्ता अपनाना चाहिए।</p><p>&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;&lt;a href="https://x.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#WATCH&lt;/a&gt; | Chandigarh: On former Punjab Chief Minister Beant Singh&amp;#39;s death anniversary, BJP leader and his grandson, Ravneet Singh Bittu, says, &amp;quot;...People speak up only after someone has died; they offer condemnation only then. Sardar Beant Singh is not here today; they talk about… &lt;a href="https://t.co/nWVizP4sci"&gt;pic.twitter.com/nWVizP4sci&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; ANI (@ANI) &lt;a href="https://x.com/ANI/status/2094337720642609306?ref_src=twsrc^tfw"&gt;August 31, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</p><h5 class=""><b>हवारा और अन्य मामलों का भी किया जिक्र</b></h5><p>बिट्टू ने बातचीत के दौरान जगतार सिंह हवारा और पंजाब से जुड़े पुराने आतंकी मामलों का उल्लेख किया। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन लोगों पर गंभीर अपराधों के आरोप या सजा है, उनकी रिहाई की मांग करने से पहले उन मामलों में हुई हिंसा और जानमाल के नुकसान पर भी चर्चा होनी चाहिए।</p><p>उन्होंने परमजीत सिंह भ्यौरा और जगतार सिंह तारा समेत अन्य आरोपियों का भी जिक्र किया और कहा कि अलग-अलग मामलों में दोष और सजा की स्थिति अलग हो सकती है। उनका कहना था कि किसी भी मामले में अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होना चाहिए।</p><p>बिट्टू ने इस दौरान कांग्रेस समेत उन राजनीतिक दलों पर भी निशाना साधा, जो बंदी सिखों की रिहाई या अमृतपाल सिंह की रिहाई का मुद्दा उठाते हैं। उन्होंने सवाल किया कि यदि राजनीतिक दल ऐसे मुद्दों पर लगातार आवाज उठा रहे हैं, तो फिर पंजाब की सुरक्षा और उन लोगों के हितों की चिंता कौन करेगा जिन्होंने आतंकवाद का दौर झेला है।</p><h5 class=""><b>‘हमने अपनी जान देने का ठेका लिया हुआ है’</b></h5><p>अपनी बात रखते हुए रवनीत बिट्टू ने कहा कि अगर सभी राजनीतिक दल एक दिशा में खड़े हो जाएं और कोई भी शांति-सुरक्षा के सवाल पर बोलने को तैयार न हो, तो यह चिंता का विषय है।</p><p>उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात पर भी सवाल उठता है कि आखिर उनके जैसे लोग ही क्यों लगातार ऐसे मुद्दों पर अपनी बात रखें। इसी संदर्भ में उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, “हमने ही अपनी जान देने का ठेका लिया हुआ है।”</p><p>बिट्टू की यह टिप्पणी उनके दादा बेअंत सिंह की पुण्यतिथि के मौके पर सामने आई है। उन्होंने बेअंत सिंह के बलिदान को पंजाब में शांति और सामाजिक सद्भाव से जोड़ते हुए कहा कि राज्य को दोबारा हिंसा और कट्टरता के दौर में जाने से रोकना जरूरी है।</p><h5 class=""><b>नशामुक्त पंजाब का भी लिया संकल्प</b></h5><p>बिट्टू ने इस मौके पर पंजाब में बढ़ती नशे की समस्या को लेकर भी बात की। उन्होंने राज्य को नशामुक्त बनाने की दिशा में काम करने की प्रतिबद्धता जताई।</p><p>पंजाब की राजनीति में नशा, कानून-व्यवस्था, बंदी सिखों की रिहाई और अमृतपाल सिंह जैसे मुद्दे लगातार राजनीतिक बहस का हिस्सा बने हुए हैं। ऐसे में बेअंत सिंह की पुण्यतिथि पर बिट्टू की टिप्पणियों ने इन मुद्दों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।</p><p>हालांकि, उनके बयानों में लगाए गए राजनीतिक आरोपों और दावों को संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया के साथ ही पूरी तस्वीर में देखा जाना चाहिए। फिलहाल बिट्टू ने साफ संकेत दिया है कि वह पंजाब में सुरक्षा, आतंकवाद के पुराने दौर और नशे जैसे मुद्दों पर अपनी पार्टी की तरफ से मुखर रुख जारी रखेंगे।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ ‘हमने ही अपनी जान देने का ठेका लिया हुआ है’, रवनीत बिट्टू का तीखा हमला, बोले- पंजाब में फिर दिख रहा काला दौर ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/sher-e-punjab-t20-mohali-kings-amritsar-soormas-6105 ]]></guid><title><![CDATA[ शेर-ए-पंजाब टी-20 लीग का धमाकेदार आगाज, पहले मैच में बने 520 रन; मोहाली किंग्स ने मारी बाजी ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/sher-e-punjab-t20-mohali-kings-amritsar-soormas-6105 ]]></link><pubDate><![CDATA[Mon, 31 Aug 2026 12:05:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ चंडीगढ़,&nbsp;पंजाब: पंजाब की पहली शेर-ए-पंजाब टी-20 लीग (Sher-E-Punjab T20 League) का धमाकेदार आगाज हुआ। टूर्नामेंट के पहले मुकाबले में मोहाली किंग्स और अमृतसर सूमर्स के बीच जबरदस्त मुकाबला देखने को  ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b><span style="font-size: 1rem;">चंडीगढ़,&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">पंजाब</span></b><span style="font-size: 1rem;"><b>:</b> पंजाब की पहली शेर-ए-पंजाब टी-20 लीग <b>(Sher-E-Punjab T20 League)</b> का धमाकेदार आगाज हुआ। टूर्नामेंट के पहले मुकाबले में मोहाली किंग्स और अमृतसर सूमर्स के बीच जबरदस्त मुकाबला देखने को मिला। हाई-स्कोरिंग मैच में दोनों टीमों ने मिलकर 520 रन बनाए और आखिरकार मोहाली किंग्स ने तीन गेंद शेष रहते पांच विकेट से मुकाबला अपने नाम कर लिया।</span></p><p><span style="font-size: 1rem;">मोहाली किंग्स की जीत के सबसे बड़े नायक अनमोलप्रीत सिंह रहे। उन्होंने महज 39 गेंदों में अपना शतक पूरा किया। अनमोलप्रीत ने 51 गेंदों का सामना करते हुए 12 छक्कों और 10 चौकों की मदद से 133 रन बनाए।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">उनकी विस्फोटक बल्लेबाजी ने अमृतसर सूमर्स के गेंदबाजों की मुश्किलें बढ़ा दीं। कप्तान रमनदीप सिंह ने भी शानदार बल्लेबाजी करते हुए 40 गेंदों में नाबाद 69 रन बनाए। उनकी पारी में नौ चौके और एक छक्का शामिल रहा। इसके अलावा गुरमेहर सारा ने 26 और हरप्रीत बराड़ ने 23 रन का योगदान दिया।</span></p><p>&lt;blockquote class="instagram-media" data-instgrm-captioned data-instgrm-permalink="https://www.instagram.com/reel/DcrAhKzvrTx/?utm_source=ig_embed&amp;amp;utm_campaign=loading" data-instgrm-version="14" style=" background:#FFF; border:0; border-radius:3px; box-shadow:0 0 1px 0 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shared by Sher-E-Punjab T20 League (@sherepunjabt20)&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&lt;/div&gt;&lt;/blockquote&gt;</p><p></p><p>&lt;script async src="//www.instagram.com/embed.js"&gt;&lt;/script&gt;</p><h5 class=""><b>अमृतसर ने खड़ा किया 258 रन का विशाल स्कोर</b></h5><p>इससे पहले टॉस हारकर बल्लेबाजी करने उतरी अमृतसर सूमर्स ने 19.5 ओवर में 258 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। टीम की शुरुआत बेहद आक्रामक रही।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">कप्तान अभिषेक शर्मा ने सिर्फ 26 गेंदों में 77 रन की तूफानी पारी खेली। उन्होंने सात छक्के और छह चौके लगाए। अभिषेक ने सहज धवन के साथ मिलकर केवल 31 गेंदों में 100 रन की साझेदारी की। सहज धवन ने 18 गेंदों में 45 रन बनाए, जिसमें सात चौके और दो छक्के शामिल थे।</span></p><h5 class=""><b>नमन धीर ने भी बरसाए छक्के</b></h5><p>अमृतसर की ओर से तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे नमन धीर ने भी तेजतर्रार पारी खेली। उन्होंने 22 गेंदों में पांच छक्कों और एक चौके की मदद से 47 रन बनाए।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">इसके अलावा राहुल कुमार ने 23 और अभय चौधरी ने 18 रन बनाए। मोहाली किंग्स की गेंदबाजी में तेजप्रीत सिंह सबसे सफल रहे और उन्होंने तीन विकेट अपने नाम किए। हरप्रीत बराड़ और तनमय धारनी को दो-दो विकेट मिले।</span></p><p>&lt;blockquote class="instagram-media" data-instgrm-captioned data-instgrm-permalink="https://www.instagram.com/reel/DcrAlljvGBP/?utm_source=ig_embed&amp;amp;utm_campaign=loading" data-instgrm-version="14" style=" background:#FFF; border:0; border-radius:3px; box-shadow:0 0 1px 0 rgba(0,0,0,0.5),0 1px 10px 0 rgba(0,0,0,0.15); margin: 1px; max-width:540px; min-width:326px; padding:0; width:99.375%; width:-webkit-calc(100% - 2px); width:calc(100% - 2px);"&gt;&lt;div style="padding:16px;"&gt; &lt;a href="https://www.instagram.com/reel/DcrAlljvGBP/?utm_source=ig_embed&amp;amp;utm_campaign=loading" style=" background:#FFFFFF; line-height:0; padding:0 0; text-align:center; text-decoration:none; width:100%;" target="_blank"&gt; &lt;div style=" display: flex; flex-direction: row; align-items: center;"&gt; &lt;div style="background-color: #F4F4F4; border-radius: 50%; flex-grow: 0; height: 40px; margin-right: 14px; width: 40px;"&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="display: flex; flex-direction: column; flex-grow: 1; justify-content: center;"&gt; &lt;div style=" background-color: #F4F4F4; border-radius: 4px; flex-grow: 0; height: 14px; margin-bottom: 6px; width: 100px;"&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style=" background-color: #F4F4F4; border-radius: 4px; flex-grow: 0; height: 14px; width: 60px;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="padding: 19% 0;"&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="display:block; height:50px; margin:0 auto 12px; width:50px;"&gt;&lt;svg width="50px" height="50px" viewBox="0 0 60 60" version="1.1" xmlns="https://www.w3.org/2000/svg" xmlns:xlink="https://www.w3.org/1999/xlink"&gt;&lt;g stroke="none" stroke-width="1" fill="none" fill-rule="evenodd"&gt;&lt;g transform="translate(-511.000000, -20.000000)" fill="#000000"&gt;&lt;g&gt;&lt;path d="M556.869,30.41 C554.814,30.41 553.148,32.076 553.148,34.131 C553.148,36.186 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flex; flex-direction: row; margin-bottom: 14px; align-items: center;"&gt;&lt;div&gt; &lt;div style="background-color: #F4F4F4; border-radius: 50%; height: 12.5px; width: 12.5px; transform: translateX(0px) translateY(7px);"&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="background-color: #F4F4F4; height: 12.5px; transform: rotate(-45deg) translateX(3px) translateY(1px); width: 12.5px; flex-grow: 0; margin-right: 14px; margin-left: 2px;"&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="background-color: #F4F4F4; border-radius: 50%; height: 12.5px; width: 12.5px; transform: translateX(9px) translateY(-18px);"&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="margin-left: 8px;"&gt; &lt;div style=" background-color: #F4F4F4; border-radius: 50%; flex-grow: 0; height: 20px; width: 20px;"&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style=" width: 0; height: 0; border-top: 2px solid transparent; border-left: 6px solid #f4f4f4; border-bottom: 2px solid transparent; transform: translateX(16px) translateY(-4px) 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font-family:Arial,sans-serif; font-size:14px; line-height:17px; margin-bottom:0; margin-top:8px; overflow:hidden; padding:8px 0 7px; text-align:center; text-overflow:ellipsis; white-space:nowrap;"&gt;&lt;a href="https://www.instagram.com/reel/DcrAlljvGBP/?utm_source=ig_embed&amp;amp;utm_campaign=loading" style=" color:#c9c8cd; font-family:Arial,sans-serif; font-size:14px; font-style:normal; font-weight:normal; line-height:17px; text-decoration:none;" target="_blank"&gt;A post shared by Sher-E-Punjab T20 League (@sherepunjabt20)&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&lt;/div&gt;&lt;/blockquote&gt;</p><p></p><p>&lt;script async src="//www.instagram.com/embed.js"&gt;&lt;/script&gt;</p><h5 class=""><b>पहले ही मैच में बना 520 रन का रिकॉर्ड</b></h5><p>शेर-ए-पंजाब टी-20 लीग के शुरुआती मुकाबले में ही बल्लेबाजों ने जमकर रन बरसाए। अमृतसर सूमर्स के 258 रन के जवाब में मोहाली किंग्स ने 19.3 ओवर में पांच विकेट खोकर 262 रन बना लिए।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">इस तरह दोनों टीमों के स्कोर को मिलाकर कुल 520 रन बने। लीग के पहले ही मुकाबले में बना यह हाई-स्कोरिंग रिकॉर्ड टूर्नामेंट के लिए शानदार शुरुआत माना जा रहा है।</span></p><p>&lt;blockquote class="instagram-media" data-instgrm-captioned data-instgrm-permalink="https://www.instagram.com/reel/DcrY2jQTQOG/?utm_source=ig_embed&amp;amp;utm_campaign=loading" data-instgrm-version="14" style=" background:#FFF; border:0; border-radius:3px; box-shadow:0 0 1px 0 rgba(0,0,0,0.5),0 1px 10px 0 rgba(0,0,0,0.15); margin: 1px; max-width:540px; min-width:326px; padding:0; width:99.375%; width:-webkit-calc(100% - 2px); width:calc(100% - 2px);"&gt;&lt;div style="padding:16px;"&gt; &lt;a href="https://www.instagram.com/reel/DcrY2jQTQOG/?utm_source=ig_embed&amp;amp;utm_campaign=loading" style=" background:#FFFFFF; line-height:0; padding:0 0; text-align:center; text-decoration:none; width:100%;" target="_blank"&gt; &lt;div style=" display: flex; flex-direction: row; align-items: center;"&gt; &lt;div style="background-color: #F4F4F4; border-radius: 50%; flex-grow: 0; height: 40px; margin-right: 14px; width: 40px;"&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="display: flex; flex-direction: column; flex-grow: 1; justify-content: center;"&gt; &lt;div style=" background-color: #F4F4F4; border-radius: 4px; flex-grow: 0; height: 14px; margin-bottom: 6px; width: 100px;"&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style=" background-color: #F4F4F4; border-radius: 4px; flex-grow: 0; height: 14px; width: 60px;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="padding: 19% 0;"&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="display:block; height:50px; margin:0 auto 12px; width:50px;"&gt;&lt;svg width="50px" height="50px" viewBox="0 0 60 60" version="1.1" xmlns="https://www.w3.org/2000/svg" xmlns:xlink="https://www.w3.org/1999/xlink"&gt;&lt;g stroke="none" stroke-width="1" fill="none" fill-rule="evenodd"&gt;&lt;g transform="translate(-511.000000, -20.000000)" fill="#000000"&gt;&lt;g&gt;&lt;path d="M556.869,30.41 C554.814,30.41 553.148,32.076 553.148,34.131 C553.148,36.186 554.814,37.852 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flex-direction: row; margin-bottom: 14px; align-items: center;"&gt;&lt;div&gt; &lt;div style="background-color: #F4F4F4; border-radius: 50%; height: 12.5px; width: 12.5px; transform: translateX(0px) translateY(7px);"&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="background-color: #F4F4F4; height: 12.5px; transform: rotate(-45deg) translateX(3px) translateY(1px); width: 12.5px; flex-grow: 0; margin-right: 14px; margin-left: 2px;"&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="background-color: #F4F4F4; border-radius: 50%; height: 12.5px; width: 12.5px; transform: translateX(9px) translateY(-18px);"&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="margin-left: 8px;"&gt; &lt;div style=" background-color: #F4F4F4; border-radius: 50%; flex-grow: 0; height: 20px; width: 20px;"&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style=" width: 0; height: 0; border-top: 2px solid transparent; border-left: 6px solid #f4f4f4; border-bottom: 2px solid transparent; transform: translateX(16px) translateY(-4px) rotate(30deg)"&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="margin-left: auto;"&gt; &lt;div style=" width: 0px; border-top: 8px solid #F4F4F4; border-right: 8px solid transparent; transform: translateY(16px);"&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style=" background-color: #F4F4F4; flex-grow: 0; height: 12px; width: 16px; transform: translateY(-4px);"&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style=" width: 0; height: 0; border-top: 8px solid #F4F4F4; border-left: 8px solid transparent; transform: translateY(-4px) translateX(8px);"&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="display: flex; flex-direction: column; flex-grow: 1; justify-content: center; margin-bottom: 24px;"&gt; &lt;div style=" background-color: #F4F4F4; border-radius: 4px; flex-grow: 0; height: 14px; margin-bottom: 6px; width: 224px;"&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style=" background-color: #F4F4F4; border-radius: 4px; flex-grow: 0; height: 14px; width: 144px;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;/a&gt;&lt;p style=" color:#c9c8cd; font-family:Arial,sans-serif; font-size:14px; line-height:17px; margin-bottom:0; margin-top:8px; overflow:hidden; padding:8px 0 7px; text-align:center; text-overflow:ellipsis; white-space:nowrap;"&gt;&lt;a href="https://www.instagram.com/reel/DcrY2jQTQOG/?utm_source=ig_embed&amp;amp;utm_campaign=loading" style=" color:#c9c8cd; font-family:Arial,sans-serif; font-size:14px; font-style:normal; font-weight:normal; line-height:17px; text-decoration:none;" target="_blank"&gt;A post shared by Sher-E-Punjab T20 League (@sherepunjabt20)&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&lt;/div&gt;&lt;/blockquote&gt;</p><p></p><p>&lt;script async src="//www.instagram.com/embed.js"&gt;&lt;/script&gt;</p><h5 class=""><b>मुख्यमंत्री भगवंत मान ने किया लीग का उद्घाटन</b></h5><p>पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने पंजाब की पहली शेर-ए-पंजाब टी-20 क्रिकेट लीग का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि यह लीग पंजाब की क्रिकेट प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने और युवा खिलाड़ियों को अपनी क्षमता दिखाने का मंच प्रदान करेगी।</p><p>&lt;blockquote class="instagram-media" data-instgrm-captioned data-instgrm-permalink="https://www.instagram.com/reel/Dcq6zRiPz6j/?utm_source=ig_embed&amp;amp;utm_campaign=loading" data-instgrm-version="14" style=" background:#FFF; border:0; border-radius:3px; box-shadow:0 0 1px 0 rgba(0,0,0,0.5),0 1px 10px 0 rgba(0,0,0,0.15); margin: 1px; max-width:540px; min-width:326px; padding:0; width:99.375%; width:-webkit-calc(100% - 2px); width:calc(100% - 2px);"&gt;&lt;div style="padding:16px;"&gt; &lt;a href="https://www.instagram.com/reel/Dcq6zRiPz6j/?utm_source=ig_embed&amp;amp;utm_campaign=loading" style=" background:#FFFFFF; line-height:0; padding:0 0; text-align:center; text-decoration:none; width:100%;" target="_blank"&gt; &lt;div style=" display: flex; flex-direction: row; align-items: center;"&gt; &lt;div style="background-color: #F4F4F4; border-radius: 50%; flex-grow: 0; height: 40px; margin-right: 14px; width: 40px;"&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="display: flex; flex-direction: column; flex-grow: 1; justify-content: center;"&gt; &lt;div style=" background-color: #F4F4F4; border-radius: 4px; flex-grow: 0; height: 14px; margin-bottom: 6px; width: 100px;"&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style=" background-color: #F4F4F4; border-radius: 4px; flex-grow: 0; height: 14px; width: 60px;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="padding: 19% 0;"&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="display:block; height:50px; margin:0 auto 12px; width:50px;"&gt;&lt;svg width="50px" height="50px" viewBox="0 0 60 60" version="1.1" xmlns="https://www.w3.org/2000/svg" xmlns:xlink="https://www.w3.org/1999/xlink"&gt;&lt;g stroke="none" stroke-width="1" fill="none" fill-rule="evenodd"&gt;&lt;g transform="translate(-511.000000, -20.000000)" fill="#000000"&gt;&lt;g&gt;&lt;path d="M556.869,30.41 C554.814,30.41 553.148,32.076 553.148,34.131 C553.148,36.186 554.814,37.852 556.869,37.852 C558.924,37.852 560.59,36.186 560.59,34.131 C560.59,32.076 558.924,30.41 556.869,30.41 M541,60.657 C535.114,60.657 530.342,55.887 530.342,50 C530.342,44.114 535.114,39.342 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href="https://www.instagram.com/reel/Dcq6zRiPz6j/?utm_source=ig_embed&amp;amp;utm_campaign=loading" style=" color:#c9c8cd; font-family:Arial,sans-serif; font-size:14px; font-style:normal; font-weight:normal; line-height:17px; text-decoration:none;" target="_blank"&gt;A post shared by Sher-E-Punjab T20 League (@sherepunjabt20)&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&lt;/div&gt;&lt;/blockquote&gt;</p><p>&lt;script async src="//www.instagram.com/embed.js"&gt;&lt;/script&gt;</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ शेर-ए-पंजाब टी-20 लीग का धमाकेदार आगाज, पहले मैच में बने 520 रन; मोहाली किंग्स ने मारी बाजी ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/kejriwal-punjab-government-schools-video-6075 ]]></guid><title><![CDATA[ ‘प्राइवेट स्कूल भी फेल हैं इनके सामने’, केजरीवाल ने साझा किया पंजाब के 3 सरकारी स्कूलों का वीडियो ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/kejriwal-punjab-government-schools-video-6075 ]]></link><pubDate><![CDATA[Sat, 29 Aug 2026 14:00:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पंजाब के सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया है। वीडियो के जरिए उन्होंने पंजाब में सरकारी स्कूलों में ह ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>नई दिल्ली: </b>आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पंजाब के सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया है। वीडियो के जरिए उन्होंने पंजाब में सरकारी स्कूलों में हुए बदलाव और बेहतर होती शैक्षणिक सुविधाओं को सामने रखा।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">केजरीवाल ने वीडियो के साथ दावा किया कि पंजाब के कुछ सरकारी स्कूलों की सुविधाएं ऐसी हैं कि उनके सामने निजी स्कूल भी पीछे नजर आते हैं।</span></p><p>यह पोस्ट ऐसे समय सामने आई है जब पंजाब की शिक्षा व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। हाल ही में केजरीवाल ने भाजपा को पंजाब और गुजरात के 1,000-1,000 सरकारी स्कूलों का संयुक्त निरीक्षण कराने की चुनौती भी दी थी।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">केजरीवाल लगातार पंजाब के सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढांचे और सुविधाओं में सुधार को अपनी पार्टी के प्रमुख कामों में गिना रहे हैं।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="hi" dir="ltr"&gt;प्राइवेट स्कूल भी फेल हैं इनके सामने। देखिए पंजाब के ये 3 सरकारी स्कूल, जो बदल रहे हैं पंजाब में शिक्षा की तस्वीर.. &lt;a href="https://t.co/OzoML8lKNr"&gt;pic.twitter.com/OzoML8lKNr&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) &lt;a href="https://x.com/ArvindKejriwal/status/2093586784517239077?ref_src=twsrc^tfw"&gt;August 29, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><h5 class=""><b>19,200 स्कूलों में बदलाव का दावा</b></h5><p>इससे पहले केजरीवाल ने पंजाब के मानसा जिले के भैणी भागा स्थित सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल की नई सुसज्जित लाइब्रेरी का वीडियो साझा किया था और कहा था कि सरकारी स्कूल भी बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करा सकते हैं। <span style="font-size: 1rem;">अब तीन सरकारी स्कूलों का वीडियो साझा करते हुए केजरीवाल ने इसी शिक्षा मॉडल को जनता के सामने रखने की कोशिश की है।</span></p><p>25 अगस्त को केजरीवाल ने पंजाब के स्कूलों को लेकर भाजपा को चुनौती देते हुए दावा किया था कि राज्य के करीब 19,700 सरकारी स्कूलों में से 19,200 स्कूलों की तस्वीर बदली जा चुकी है, जबकि बाकी करीब 500 स्कूलों में भी सुधार का काम जारी है। उन्होंने कहा था कि इन स्कूलों को भी अगले डेढ़ से दो वर्षों में बेहतर बनाने का लक्ष्य है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">केजरीवाल ने यह भी दावा किया था कि पंजाब की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में AAP सरकार के सत्ता में आने के बाद बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने इस बदलाव का श्रेय केवल सरकार को नहीं, बल्कि शिक्षकों, प्रधानाचार्यों, अभिभावकों और विद्यार्थियों को भी दिया।</span></p><h5 class=""><b>शिक्षा मॉडल पर लगातार जोर दे रही AAP</b></h5><p>पंजाब में सरकारी स्कूलों का आधुनिकीकरण, नई सुविधाएं और स्कूल लाइब्रेरी जैसे विषय AAP के शिक्षा मॉडल के प्रमुख हिस्से रहे हैं। केजरीवाल इससे पहले भी पंजाब के सरकारी स्कूलों की तस्वीरों और वीडियो को सोशल मीडिया पर साझा कर चुके हैं।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">हालांकि, सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता को लेकर राजनीतिक दावों के बीच विपक्षी दलों की ओर से भी सवाल उठाए जाते रहे हैं। ऐसे में केजरीवाल द्वारा तीन स्कूलों का वीडियो साझा करना पंजाब के शिक्षा मॉडल को लेकर चल रही राजनीतिक बहस का हिस्सा माना जा रहा है।</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ ‘प्राइवेट स्कूल भी फेल हैं इनके सामने’, केजरीवाल ने साझा किया पंजाब के 3 सरकारी स्कूलों का वीडियो ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-horticulture-employees-da-mass-leave-6072 ]]></guid><title><![CDATA[ DA भुगतान को लेकर कर्मचारियों की सामूहिक छुट्टी, पंजाब हॉर्टिकल्चर विभाग में सभी कर्मचारी मिले उपस्थित ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-horticulture-employees-da-mass-leave-6072 ]]></link><pubDate><![CDATA[Sat, 29 Aug 2026 12:15:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ चंडीगढ़, पंजाब: पंजाब के बागवानी विभाग में हालिया उपस्थिति जांच के दौरान किसी भी कर्मचारी को बिना अनुमति ड्यूटी से अनुपस्थित नहीं पाया गया। विभाग ने इस संबंध में अपनी रिपोर्ट पंजाब सरकार के बागवानी वि ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>चंडीगढ़, पंजाब: </b>पंजाब के बागवानी विभाग में हालिया उपस्थिति जांच के दौरान किसी भी कर्मचारी को बिना अनुमति ड्यूटी से अनुपस्थित नहीं पाया गया। विभाग ने इस संबंध में अपनी रिपोर्ट पंजाब सरकार के बागवानी विभाग के निदेशक को सौंप दी है।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">यह उपस्थिति सत्यापन 27 अगस्त 2026 को जारी पंजाब सरकार के विभागीय निर्देश के तहत किया गया था।</span></p><p><span style="font-size: 1rem;">बागवानी निदेशालय की रिपोर्ट में कहा गया है कि विभाग के सभी कर्मचारियों की उपस्थिति की जांच की गई। जांच के दौरान सभी कर्मचारी उपस्थिति रजिस्टर के अनुसार ड्यूटी पर मौजूद पाए गए।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है जब पंजाब में सरकारी कर्मचारी लंबे समय से लंबित महंगाई भत्ता (DA) की किस्तों के भुगतान की मांग को लेकर सामूहिक अवकाश और विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।</span></p><h5 class=""><b>सरकार ने मांगी अनधिकृत अनुपस्थित कर्मचारियों की सूची</b></h5><p>कर्मचारियों के सामूहिक अवकाश के बीच पंजाब सरकार ने सभी प्रशासनिक सचिवों और विभागाध्यक्षों को अपने-अपने विभागों में बिना अनुमति अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों की जानकारी जुटाने के निर्देश दिए हैं।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">कार्मिक विभाग (Department of Personnel) की ओर से गुरुवार को जारी आधिकारिक संचार में कहा गया कि विभिन्न माध्यमों से शिकायतें मिली हैं कि सरकारी कार्यालयों में अधिकारियों और कर्मचारियों के मौजूद नहीं रहने के कारण आम लोगों को सरकारी सेवाएं हासिल करने में परेशानी हो रही है।</span></p><p>इसके बाद सभी प्रशासनिक सचिवों और विभागाध्यक्षों से कहा गया है कि वे अनधिकृत रूप से अनुपस्थित कर्मचारियों की सूची तैयार कर सामान्य प्रशासन विभाग (Department of General Administration) को निर्धारित समय सीमा में उपलब्ध कराएं।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ लागू सेवा नियमों के तहत आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है।</span></p><h5 class=""><b>सचिवालय में पूरी तरह ठप रहा कामकाज</b></h5><p class="grey-bg-red"><b><i>यह घटनाक्रम ऐसे समय आया है जब चंडीगढ़ स्थित पंजाब राज्य सचिवालय में गुरुवार को कर्मचारियों के सामूहिक अवकाश के कारण कामकाज प्रभावित रहा।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">सरकारी कर्मचारियों का यह आंदोलन लंबे समय से लंबित महंगाई भत्ते (DA) के भुगतान की मांग को लेकर है। कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि उनकी कई DA किस्तें बकाया हैं और सरकार उनकी मांग पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं कर रही है।</span></i></b></p><h5 class=""><b>सरकार और कर्मचारियों के बीच बढ़ा गतिरोध</b></h5><p>कर्मचारियों के सामूहिक अवकाश ने पंजाब में सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच गतिरोध को और बढ़ा दिया है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">विपक्षी कांग्रेस ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के रुख की आलोचना करते हुए इसे कर्मचारियों के प्रति सरकार का कठोर रवैया बताया है।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">वहीं, मुख्यमंत्री भगवंत मान का कहना है कि सरकार कर्मचारियों से बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन बातचीत तभी आगे बढ़ेगी जब कर्मचारी हड़ताल या सामूहिक अवकाश समाप्त करेंगे।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">ऐसे में बागवानी विभाग की उपस्थिति रिपोर्ट ने कम से कम इस विभाग में अनधिकृत अनुपस्थिति को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। दूसरी ओर, सरकार द्वारा विभिन्न विभागों से अनुपस्थित कर्मचारियों का विवरण मांगे जाने के बाद आने वाले दिनों में कार्रवाई को लेकर तस्वीर और साफ हो सकती है।</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ DA भुगतान को लेकर कर्मचारियों की सामूहिक छुट्टी, पंजाब हॉर्टिकल्चर विभाग में सभी कर्मचारी मिले उपस्थित ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/bjp-sad-alliance-punjab-6067 ]]></guid><title><![CDATA[ Explained: Punjab Politics: BJP-SAD गठबंधन में देरी क्यों? CM Face और Seat Sharing पर अटका पेंच ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/bjp-sad-alliance-punjab-6067 ]]></link><pubDate><![CDATA[Thu, 27 Aug 2026 17:38:28 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ चंडीगढ़: पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के संभावित गठबंधन को लेकर सियासी हलचल तेज है। दोनों दलों के नेताओं की ओर से फिलहाल आधिकारिक तौर पर गठबंधन  ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>चंडीगढ़</b>: पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले <b>भारतीय जनता पार्टी (BJP) </b>और <b>शिरोमणि अकाली दल (SAD) </b>के संभावित गठबंधन को लेकर सियासी हलचल तेज है। दोनों दलों के नेताओं की ओर से फिलहाल आधिकारिक तौर पर गठबंधन का ऐलान नहीं किया गया है, लेकिन राजनीतिक गतिविधियों और नेताओं के बयानों के बीच साथ आने की चर्चाएं लगातार मजबूत हो रही हैं।</p><p>दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ बीजेपी सार्वजनिक रूप से पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी की बात कर रही है, तो दूसरी तरफ पार्टी के भीतर SAD के साथ संभावित समझौते को लेकर बातचीत जारी होने की खबरें हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि अगर दोनों दलों के बीच गठबंधन की संभावना इतनी मजबूत है, तो फिर औपचारिक घोषणा में देरी क्यों हो रही है?</p><h5 class=""><b>117 सीटों पर तैयारी, फिर गठबंधन की चर्चा क्यों?</b></h5><p>बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव संगठन<b> बीएल संतोष </b>के पंजाब दौरे के दौरान पार्टी ने स्पष्ट संकेत दिया कि वह विधानसभा चुनाव को लेकर संगठनात्मक स्तर पर पूरी तैयारी कर रही है। बीजेपी का फोकस बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने और राज्य में अपना जनाधार बढ़ाने पर है।</p><p>पार्टी की पंजाब इकाई भी लगातार यह संदेश देती रही है कि वह सभी 117 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। हालांकि, इसके बावजूद अकाली दल के साथ संभावित गठबंधन की बातचीत की खबरों ने राजनीतिक समीकरणों को दिलचस्प बना दिया है।</p><p>दरअसल, दोनों दलों के लिए पंजाब की मौजूदा राजनीति में एक-दूसरे की जरूरत अलग-अलग कारणों से महसूस की जा रही है। अकाली दल को अपने पुराने राजनीतिक आधार को मजबूत करने की चुनौती है, जबकि बीजेपी राज्य में अपने संगठन और वोट शेयर का विस्तार करने की कोशिश कर रही है।</p><h5 class=""><b>पहला बड़ा सवाल- गठबंधन का CM Face कौन?</b></h5><p>संभावित गठबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती मुख्यमंत्री पद के चेहरे को लेकर बताई जा रही है।</p><p>बीजेपी और अकाली दल लंबे समय तक पंजाब में सहयोगी रहे हैं। जब दोनों दलों की गठबंधन सरकार बनी, तब मुख्यमंत्री का पद अकाली दल के पास रहा। सुखबीर सिंह बादल इस पुराने राजनीतिक समीकरण के सबसे प्रमुख चेहरों में रहे हैं।</p><p>लेकिन 2020 में कृषि कानूनों के मुद्दे पर दोनों पार्टियों के रास्ते अलग हो गए। इसके बाद पंजाब की राजनीति में बीजेपी की स्थिति पहले की तुलना में बदली है। पार्टी अब खुद को पहले की तरह केवल सहयोगी की भूमिका में सीमित रखना नहीं चाहती।</p><p>ऐसे में सबसे अहम सवाल यह है कि अगर गठबंधन होता है तो क्या बीजेपी सुखबीर सिंह बादल को मुख्यमंत्री पद के चेहरे के तौर पर स्वीकार करेगी?</p><p>अगर इस मुद्दे पर सहमति नहीं बनती है, तो दोनों दल बिना किसी घोषित मुख्यमंत्री चेहरे के चुनाव लड़ सकते हैं। हालांकि, पंजाब जैसे राज्य में चुनाव से पहले मुख्यमंत्री का चेहरा गठबंधन की रणनीति और मतदाताओं के संदेश के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है।</p><h5 class=""><b>Seat Sharing भी आसान नहीं</b></h5><p>दूसरा बड़ा पेंच विधानसभा सीटों के बंटवारे को लेकर है।</p><p>पिछले गठबंधन में बीजेपी अपेक्षाकृत कम सीटों पर चुनाव लड़ती थी, जबकि अकाली दल ज्यादा सीटों पर मैदान में उतरता था। लेकिन इस बार बीजेपी का दावा है कि पंजाब में उसका राजनीतिक आधार पहले की तुलना में मजबूत हुआ है।</p><p>2024 के लोकसभा चुनाव के विधानसभा क्षेत्रवार आंकड़ों को देखें तो बीजेपी कई सीटों पर मजबूत स्थिति में रही थी। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक पार्टी 23 विधानसभा क्षेत्रों में पहले स्थान पर रही, जबकि कई अन्य सीटों पर भी उसने अच्छा प्रदर्शन किया।</p><p>दूसरी तरफ अकाली दल का पारंपरिक आधार अब भी पंजाब की राजनीति में महत्वपूर्ण है, खासकर ग्रामीण और पंथिक राजनीति के लिहाज से। यही वजह है कि सीट बंटवारे को लेकर दोनों दलों के लिए पुराना फार्मूला स्वीकार करना आसान नहीं होगा। बीजेपी ज्यादा सीटों की मांग कर सकती है, जबकि अकाली दल के लिए अपने मजबूत क्षेत्रों को छोड़ना राजनीतिक रूप से नुकसानदायक हो सकता है।</p><h5 class=""><b>बीजेपी खुद को 'बड़ा भाई' मान रही है</b></h5><p>गठबंधन की बातचीत में सबसे अहम बदलाव बीजेपी की बदली हुई भूमिका है। पुराने समीकरण में अकाली दल पंजाब में प्रमुख पार्टी थी और बीजेपी सहयोगी की भूमिका में चुनाव लड़ती थी।</p><p>अब बीजेपी पंजाब में अपने विस्तार को लेकर ज्यादा आक्रामक है। पार्टी संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने, नए मतदाताओं तक पहुंचने और ग्रामीण क्षेत्रों में अपना प्रभाव बढ़ाने पर जोर दे रही है।</p><p>यही कारण है कि संभावित गठबंधन में बीजेपी पहले की तुलना में ज्यादा सीटों की मांग कर सकती है। अगर पार्टी खुद को 'बड़े भाई' की भूमिका में रखना चाहती है, तो अकाली दल के लिए इस नए समीकरण को स्वीकार करना एक महत्वपूर्ण राजनीतिक फैसला होगा।</p><h5 class=""><b>2024 के नतीजों ने बदली बातचीत की दिशा</b></h5><p>लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन ने भी दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे की बातचीत को प्रभावित किया है।</p><p>दिए गए आंकड़ों के अनुसार 2024 में पंजाब में बीजेपी का वोट शेयर 18.56 फीसदी रहा, जबकि अकाली दल को 13.42 फीसदी वोट मिले। यह आंकड़ा बीजेपी को पहले की तुलना में ज्यादा मजबूत दावा पेश करने का आधार देता है।</p><p>हालांकि विधानसभा चुनाव लोकसभा चुनाव से अलग होते हैं और स्थानीय उम्मीदवार, क्षेत्रीय मुद्दे तथा जातीय-सामाजिक समीकरणों का प्रभाव काफी ज्यादा होता है। इसलिए केवल लोकसभा के आंकड़ों के आधार पर विधानसभा सीटों का बंटवारा करना दोनों दलों के लिए पर्याप्त नहीं होगा।</p><h5 class=""><b>गठबंधन दोनों के लिए क्यों जरूरी दिख रहा है?</b></h5><p>अकाली दल के सामने अपने पारंपरिक वोट बैंक को बचाने और राजनीतिक प्रभाव को दोबारा मजबूत करने की चुनौती है। दूसरी ओर बीजेपी पंजाब में अपने दम पर विस्तार करना चाहती है, लेकिन पार्टी यह भी समझती है कि राज्य की ग्रामीण और पंथिक राजनीति में अकाली दल की जमीनी मौजूदगी अब भी महत्वपूर्ण हो सकती है।</p><p>यही वजह है कि गठबंधन के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं दिखते। दोनों दलों के नेताओं के बीच बातचीत की खबरें इसी संभावित जरूरत की ओर इशारा करती हैं।</p><p>हालांकि, गठबंधन सिर्फ चुनावी गणित से तय नहीं होगा। मुख्यमंत्री का चेहरा, सीटों का बंटवारा और दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल जैसे मुद्दे भी अंतिम फैसले में बड़ी भूमिका निभाएंगे।</p><h5 class=""><b>2020 के बाद फिर साथ आने की कोशिश?</b></h5><p>बीजेपी और अकाली दल का रिश्ता करीब ढाई दशक पुराना रहा है। दोनों पार्टियां लंबे समय तक एनडीए का हिस्सा रहीं और पंजाब में गठबंधन सरकार भी चलाती रहीं। लेकिन सितंबर 2020 में कृषि कानूनों के विरोध के बीच अकाली दल ने बीजेपी से दूरी बना ली।</p><p>इसके बाद 2022 विधानसभा चुनाव और 2024 लोकसभा चुनाव दोनों दलों ने अलग-अलग लड़े। दोनों चुनावों में उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली।</p><p>अब 2027 का चुनाव दोनों पार्टियों के लिए अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने का बड़ा मौका है। ऐसे में पुराने सहयोगी फिर साथ आते हैं या नहीं, इस पर पंजाब की राजनीति की दिशा काफी हद तक निर्भर कर सकती है।</p><p>फिलहाल तस्वीर यह है कि बीजेपी चुनावी तैयारी में अकेले आगे बढ़ रही है, लेकिन गठबंधन की संभावना को पूरी तरह खारिज भी नहीं कर रही। अंतिम फैसला मुख्यमंत्री के चेहरे और सीटों के बंटवारे पर सहमति बनने के बाद ही संभव दिखाई देता है। इसलिए गठबंधन की घोषणा में देरी का सबसे बड़ा कारण यही दो मुद्दे माने जा रहे हैं।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ Explained: Punjab Politics: BJP-SAD गठबंधन में देरी क्यों? CM Face और Seat Sharing पर अटका पेंच ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-govt-employees-strike-opd-services-6056 ]]></guid><title><![CDATA[ पंजाब में सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल, अस्पतालों में OPD सेवाएं प्रभावित; लंबित मांगों को लेकर प्रदर्शन ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-govt-employees-strike-opd-services-6056 ]]></link><pubDate><![CDATA[Thu, 27 Aug 2026 12:15:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ अमृतसर, पंजाब: पंजाब में सरकारी कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर बुधवार को राज्यव्यापी हड़ताल शुरू कर दी, जिसका असर सरकारी अस्पतालों समेत कई विभागों की सेवाओं पर पड़ा। हड़ताल के कारण कई सरकारी ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>अमृतसर, पंजाब:</b> पंजाब में सरकारी कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर बुधवार को राज्यव्यापी हड़ताल शुरू कर दी, जिसका असर सरकारी अस्पतालों समेत कई विभागों की सेवाओं पर पड़ा। हड़ताल के कारण कई सरकारी अस्पतालों में बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) सेवाएं प्रभावित रहीं, जबकि आपातकालीन सेवाएं जारी रखी गईं।</span></p><p>गुरु नानक देव अस्पताल, सरकारी मेडिकल कॉलेज अमृतसर के अध्यक्ष और पंजाब पैरा-मेडिकल एवं स्वास्थ्य कर्मचारी समन्वय समिति के जिला अध्यक्ष नरेंद्र सिंह ने बताया कि कर्मचारी पिछले साढ़े चार वर्षों से भगवंत मान सरकार के खिलाफ अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।</p><h5 class=""><b>कर्मचारियों की प्रमुख मांगें क्या हैं?</b></h5><p>कर्मचारियों की मांगों में सभी संविदा कर्मचारियों को नियमित करना, विभिन्न श्रेणियों में नियुक्त कर्मचारियों को पेंशन लाभ देना और महंगाई भत्ते (डीए) की लंबित किस्तों का भुगतान शामिल है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">इसके अलावा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं, मध्याह्न भोजन कर्मियों और अन्य अस्थायी या संविदा कर्मचारियों को नियमित करने की मांग भी प्रमुख मुद्दों में शामिल है।</span></p><p>नरेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से कर्मचारियों को कई बार बैठक की तारीख दी गई, लेकिन मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ बैठक नहीं हो सकी और बैठकों को बार-बार टाल दिया गया।</p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;&lt;a href="https://x.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#WATCH&lt;/a&gt; | Amritsar, Punjab | OPD services in hospitals are impacted as doctors stage a protest over their long-pending demands. &lt;a href="https://t.co/Pbt3vvMbhQ"&gt;pic.twitter.com/Pbt3vvMbhQ&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; ANI (@ANI) &lt;a href="https://x.com/ANI/status/2092851357145575751?ref_src=twsrc^tfw"&gt;August 27, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><h5 class=""><b>7 अगस्त की रैली के बाद राज्यव्यापी हड़ताल</b></h5><p>कर्मचारी नेताओं के अनुसार, 7 अगस्त को चंडीगढ़ में आयोजित रैली में तीन लाख से अधिक कर्मचारियों ने भाग लिया था। इसके बाद 27 अगस्त को पंजाब भर के सरकारी कर्मचारियों ने पूर्ण हड़ताल करते हुए ब्लॉक, जिला और मुख्यालय स्तर पर प्रदर्शन किया।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">हड़ताल में अस्पतालों और औषधालयों के अलावा सरकारी कार्यालय, स्कूल, बिजली विभाग, पशुपालन विभाग और कृषि विभाग के कर्मचारी भी शामिल हुए।</span></p><h5 class=""><b>गुरु नानक देव अस्पताल में OPD और सामान्य ऑपरेशन थिएटर बंद</b></h5><p>अमृतसर के गुरु नानक देव अस्पताल में हड़ताल का सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर देखने को मिला। नरेंद्र सिंह ने बताया कि अस्पताल की ओपीडी सेवाएं और सामान्य ऑपरेशन थिएटर बंद रहे, जबकि आपातकालीन सेवाएं चालू रखी गईं।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने कहा कि आम लोगों को पहले ही सूचना दे दी गई थी कि वे केवल आपात स्थिति में ही अस्पताल आएं।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;Bathinda, Punjab: Government employees across Punjab observe a one-day strike over DA and other pending demands. At Bathinda Civil Hospital, only emergency services are operational while other services remain shut. &lt;a href="https://t.co/E8FIhC2p7v"&gt;pic.twitter.com/E8FIhC2p7v&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; IANS (@ians_india) &lt;a href="https://x.com/ians_india/status/2092828889156571274?ref_src=twsrc^tfw"&gt;August 27, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><h5 class=""><b>250 से अधिक संगठन और फेडरेशन समर्थन में</b></h5><p>कर्मचारी नेताओं का दावा है कि 250 से अधिक संगठन और फेडरेशन इस आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं। नरेंद्र सिंह ने कहा कि बढ़ती महंगाई के बीच कर्मचारियों में सरकार के प्रति नाराजगी लगातार बढ़ रही है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले साढ़े चार वर्षों के दौरान सरकार ने महंगाई भत्ते की एक भी लंबित किस्त जारी नहीं की है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि डीए सरकारी कर्मचारियों का अधिकार है और इस मुद्दे पर किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।</span></p><p>कर्मचारी नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो वे आगामी विधानसभा चुनाव में सरकार का बहिष्कार करेंगे और उसके खिलाफ अभियान चलाएंगे।</p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;Punjab govt employees strike: OPD services disrupted across hospitals over pending demands&lt;br&gt;&lt;br&gt;Read &lt;a href="https://x.com/ANI?ref_src=twsrc^tfw"&gt;@ANI&lt;/a&gt; Story |&lt;a href="https://t.co/m4MgDCLcNy"&gt;https://t.co/m4MgDCLcNy&lt;/a&gt; &lt;a href="https://x.com/hashtag/Punjab?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#Punjab&lt;/a&gt; &lt;a href="https://x.com/hashtag/GovtEmployeesStrike?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#GovtEmployeesStrike&lt;/a&gt; &lt;a href="https://x.com/hashtag/OPDServices?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#OPDServices&lt;/a&gt; &lt;a href="https://x.com/hashtag/hospitals?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#hospitals&lt;/a&gt; &lt;a href="https://x.com/hashtag/pendingdemands?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#pendingdemands&lt;/a&gt; &lt;a href="https://t.co/7ZCAv1CKvV"&gt;pic.twitter.com/7ZCAv1CKvV&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; ANI Digital (@ani_digital) &lt;a href="https://x.com/ani_digital/status/2092858400631836809?ref_src=twsrc^tfw"&gt;August 27, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब में सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल, अस्पतालों में OPD सेवाएं प्रभावित; लंबित मांगों को लेकर प्रदर्शन ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-employees-strike-2026-6049 ]]></guid><title><![CDATA[ पंजाब में 7 लाख कर्मचारी-पेंशनर कल हड़ताल पर, DA से पुरानी पेंशन तक ये हैं बड़ी मांगें ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-employees-strike-2026-6049 ]]></link><pubDate><![CDATA[Wed, 26 Aug 2026 15:44:38 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ चंडीगढ़: पंजाब में विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले भगवंत मान सरकार के सामने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों की नाराजगी बड़ी चुनौती बनती नजर आ रही है। साझा मुलाजिम मोर्चा ने 27 अगस्त को प्रदेशव्यापी हड ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>चंडीगढ़: </b>पंजाब में विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले <b>भगवंत मान</b> सरकार के सामने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों की नाराजगी बड़ी चुनौती बनती नजर आ रही है। साझा मुलाजिम मोर्चा ने 27 अगस्त को प्रदेशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। कर्मचारी संगठनों का दावा है कि करीब 7 लाख कर्मचारी और पेंशनर उनकी मांगों से जुड़े हुए हैं।</p><p>कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सरकार ने ठोस फैसला नहीं लिया तो इसका असर आगामी विधानसभा चुनाव में भी दिखाई दे सकता है। वहीं, पंजाब सरकार ने कर्मचारी नेताओं से बातचीत की पेशकश की है।</p><h5 class=""><b>27 अगस्त को क्या-क्या रहेगा बंद?</b></h5><p>साझा मुलाजिम मोर्चा के आह्वान पर 27 अगस्त को पंजाब में कई सरकारी सेवाएं प्रभावित होने की संभावना है। कर्मचारी संगठनों के मुताबिक सिविल सचिवालय, सरकारी अस्पतालों की ओपीडी, स्वास्थ्य केंद्र और सरकारी परिवहन सेवाएं हड़ताल से प्रभावित रहेंगी। हालांकि आपातकालीन सेवाओं को हड़ताल से बाहर रखा गया है।</p><p>कर्मचारी नेताओं का कहना है कि सरकार लंबे समय से उनकी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं कर रही है। उनका आरोप है कि कई मामलों में कर्मचारियों को अपने अधिकारों के लिए अदालत का रुख करना पड़ा है।</p><h5 class=""><b>पुरानी पेंशन और DA सबसे बड़ा मुद्दा</b></h5><p>साझा मुलाजिम मोर्चा के संयोजक सुखचैन खैरा के मुताबिक कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में पुरानी पेंशन योजना की बहाली और लंबित महंगाई भत्ते का भुगतान शामिल है। कर्मचारियों का दावा है कि 18 फीसदी DA की किश्तें अभी लंबित हैं।</p><p>इसके अलावा कर्मचारी एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन स्कीम (4-9-14) को लागू करने, वेतन विसंगतियां दूर करने और पहले हटाए गए भत्तों को बहाल करने की मांग कर रहे हैं।</p><p>ठेके, आउटसोर्स और अस्थायी व्यवस्था के तहत काम कर रहे कर्मचारियों को नियमित करने की मांग भी आंदोलन के प्रमुख मुद्दों में शामिल है।</p><h5 class=""><b>सरकार ने बातचीत की पेशकश की</b></h5><p>हड़ताल के ऐलान के बाद पंजाब सरकार भी सक्रिय हुई है। सरकार की ओर से कर्मचारी नेताओं को बातचीत के लिए बुलाने की पेशकश की गई है। कर्मचारी नेता सुखचैन खैरा ने बताया कि 7 अगस्त को मुख्यमंत्री के ओएसडी के साथ उनकी बातचीत हुई थी।</p><p>उनके मुताबिक सरकार की ओर से 27 अगस्त की तारीख तय की गई थी, जबकि कर्मचारी संगठन इससे पहले बातचीत चाहते थे। कर्मचारी नेताओं ने संकेत दिया है कि अगर मांगों पर समाधान नहीं निकला तो आंदोलन आगे भी जारी रह सकता है।</p><h5 class=""><b>विपक्षी दलों का कर्मचारियों को समर्थन</b></h5><p>कर्मचारियों की प्रस्तावित हड़ताल को पंजाब में विपक्षी दलों का भी समर्थन मिल रहा है। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने कहा है कि कांग्रेस कर्मचारियों के साथ खड़ी है और विरोध प्रदर्शन में शामिल होगी।</p><p>उन्होंने कांग्रेस के जिला अध्यक्षों को कर्मचारियों के समर्थन में डिप्टी कमिश्नरों को ज्ञापन सौंपने के निर्देश देने की बात कही। वड़िंग ने पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग करते हुए सरकार पर अपने वादे पूरे नहीं करने का आरोप लगाया।<br></p><p>वारिस पंजाब दे की ओर से भी हड़ताल और बंद के आह्वान को समर्थन देने की बात कही गई है। वहीं पंजाब बीजेपी ने लंबित DA के भुगतान को लेकर कर्मचारियों और पेंशनरों के आंदोलन का समर्थन किया है।</p><p>बीजेपी की ओर से दावा किया गया है कि लंबित DA को लेकर अदालत पहले ही आदेश दे चुकी है और सरकार को कर्मचारियों का बकाया भुगतान करना चाहिए।</p><h5 class=""><b>मान सरकार का क्या कहना है?</b></h5><p>पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने सरकार के कर्मचारी हितैषी कदमों का बचाव किया। उन्होंने दावा किया कि पंजाब सरकार ने ठेकेदारी व्यवस्था को खत्म करने के लिए विधानसभा में कानून बनाया है।</p><p>सौंद के मुताबिक आवश्यक श्रेणी के कर्मचारियों को आउटसोर्सिंग से कॉन्ट्रैक्चुअल व्यवस्था में लाने की प्रक्रिया भी की जा रही है। हालांकि, पुरानी पेंशन, लंबित DA, 4-9-14 स्कीम और अन्य मांगों पर सरकार की ओर से फिलहाल कोई व्यापक समाधान सामने नहीं आया है।</p><h5 class=""><b>चुनाव से पहले सरकार के लिए बढ़ी चुनौती</b></h5><p>पंजाब में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे समय में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों का बड़ा आंदोलन सरकार के लिए राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p><p>कर्मचारी संगठनों ने साफ संकेत दिया है कि अगर उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ तो वे चुनाव में अपना रुख तय कर सकते हैं। दूसरी तरफ कांग्रेस, बीजेपी और वारिस पंजाब दे के समर्थन से यह मुद्दा राजनीतिक रूप से और बड़ा हो गया है।</p><p>अब नजर इस बात पर है कि 27 अगस्त की हड़ताल के बाद सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत किस दिशा में जाती है और क्या मान सरकार लंबित मांगों पर कोई ठोस फैसला लेती है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब में 7 लाख कर्मचारी-पेंशनर कल हड़ताल पर, DA से पुरानी पेंशन तक ये हैं बड़ी मांगें ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/bjp-sad-punjab-election-6045 ]]></guid><title><![CDATA[ पंजाब में BJP का ‘Solo Plan’ या SAD के साथ वापसी? 2027 से पहले गठबंधन को लेकर क्यों फंसा पेंच ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/bjp-sad-punjab-election-6045 ]]></link><pubDate><![CDATA[Wed, 26 Aug 2026 11:47:40 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ चंडीगढ़: पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने भले ही सार्वजनिक तौर पर सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू कर दी है, लेकिन शिरोमणि अकाली दल के साथ संभावित गठबंधन की चर् ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>चंडीगढ़:</b> <b>पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 </b>को लेकर <b>भारतीय जनता पार्टी </b>ने भले ही सार्वजनिक तौर पर सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू कर दी है, लेकिन<b> शिरोमणि अकाली दल </b>के साथ संभावित गठबंधन की चर्चाओं ने राज्य की सियासत को दिलचस्प बना दिया है। बीजेपी का संगठन बूथ स्तर तक मजबूत करने पर जोर दे रहा है, वहीं पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक <b>SAD</b> के साथ अलग-अलग स्तरों पर बातचीत का सिलसिला अभी जारी है।</p><p>दिलचस्प बात यह है कि बीजेपी के<b> राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष </b>ने पंजाब दौरे के दौरान कार्यकर्ताओं को साफ तौर पर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी करने का संदेश दिया। इसके बावजूद पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने माना कि गठबंधन के विकल्प को पूरी तरह बंद नहीं किया गया है। उनका कहना है कि दोनों दलों के बीच बातचीत चल रही है, लेकिन अभी तक शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर कोई औपचारिक चर्चा नहीं हुई है।</p><h5 class=""><b>BJP ने शुरू किया 117 सीटों के लिए संगठन मजबूत करने का अभियान</b></h5><p>पंजाब में 2027 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं। बीजेपी ने चुनाव से काफी पहले ही अपना संगठनात्मक अभियान तेज कर दिया है। बीएल संतोष ने लुधियाना में पार्टी की जोनल बैठक में नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ चुनावी रणनीति पर चर्चा की।</p><p>इस बैठक में लुधियाना, खन्ना, जगरांव, मोगा, रोपड़ और मलेरकोटला से जुड़े पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए। संतोष ने आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि दिल्ली में चुनाव हार चुके नेता अब पंजाब चला रहे हैं और इसका असर राज्य के विकास पर पड़ रहा है।</p><p>उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से पंजाब में AAP को सत्ता से बाहर करने के लक्ष्य के साथ काम करने को कहा। बीजेपी का जोर खास तौर पर बूथ स्तर पर संगठन खड़ा करने पर है।</p><p>पार्टी के मुताबिक, 15 हजार से अधिक बूथों पर कमेटियां बनाई जा चुकी हैं। बाकी करीब 10 हजार बूथों पर भी संगठन तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। कार्यकर्ताओं से कहा गया है कि वे हर बूथ के परिवारों तक पहुंचें और केंद्र सरकार की योजनाओं तथा उपलब्धियों की जानकारी लोगों तक पहुंचाएं</p><h5 class=""><b>फिर भी SAD के साथ बातचीत क्यों?</b></h5><p>बीजेपी की आधिकारिक तैयारी फिलहाल अकेले चुनाव लड़ने की है, लेकिन पार्टी के अंदर गठबंधन की संभावनाओं पर चर्चा जारी है। एक वरिष्ठ बीजेपी नेता के मुताबिक दोनों दलों के बीच विभिन्न स्तरों पर बातचीत हो रही है। हालांकि अभी बड़े नेताओं के बीच औपचारिक बातचीत नहीं हुई है।</p><p>बीजेपी और SAD के सामने अलग-अलग राजनीतिक चुनौतियां हैं। अकाली दल लंबे समय से अपने पारंपरिक जनाधार को वापस मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। पार्टी को अंदरूनी असंतोष और बदलते राजनीतिक समीकरणों का भी सामना करना पड़ रहा है।</p><p>दूसरी तरफ बीजेपी ने पंजाब में पिछले कुछ वर्षों में अपना संगठन और वोट आधार बढ़ाने की कोशिश की है। पार्टी के भीतर एक वर्ग मानता है कि अगर बीजेपी अकेले चुनाव लड़ती है तो वह अपने दम पर अधिक सीटें हासिल करने की स्थिति में पहुंच सकती है। इसी वजह से गठबंधन को लेकर पार्टी में एक राय नहीं है।</p><h5 class=""><b>अमृतपाल सिंह का उभार भी बना चुनौती</b></h5><p>बीजेपी के अंदरूनी आकलन में अकाली दल के लिए एक और चुनौती अमृतपाल सिंह का बढ़ता राजनीतिक प्रभाव है। खडूर साहिब से सांसद और अकाली दल (वारिस पंजाब दे) के प्रमुख अमृतपाल सिंह फिलहाल असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद हैं।</p><p>बीजेपी सूत्रों के मुताबिक, पंथिक वोटों का एक हिस्सा अमृतपाल सिंह की तरफ जा सकता है। ऐसे में SAD के लिए अपने पारंपरिक समर्थन आधार को बचाए रखना अहम चुनौती है। यही वजह है कि बीजेपी के साथ गठबंधन को लेकर अकाली दल के भीतर भी दिलचस्पी मानी जा रही है।</p><h5 class=""><b>2020 में अलग हुए थे दोनों दल</b></h5><p>बीजेपी और अकाली दल पंजाब की राजनीति में लंबे समय तक सहयोगी रहे हैं। दोनों दलों ने कई चुनाव साथ लड़े और सरकार भी बनाई। लेकिन सितंबर 2020 में कृषि कानूनों के मुद्दे पर SAD ने NDA और मोदी सरकार से अलग होने का फैसला किया।</p><p>इसके बाद दोनों पार्टियों ने 2022 का पंजाब विधानसभा चुनाव और 2024 का लोकसभा चुनाव अलग-अलग लड़ा। दोनों चुनावों में उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली। अब 2027 के चुनाव से पहले पुराने गठबंधन की संभावित वापसी को लेकर राजनीतिक चर्चा फिर तेज हो गई है।</p><p>इस महीने की शुरुआत में सुखबीर सिंह बादल की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद भी गठबंधन की अटकलों को हवा मिली थी।</p><h5 class=""><b>BJP के भीतर भी गठबंधन को लेकर मतभेद</b></h5><p>बीजेपी सूत्रों के मुताबिक पार्टी में एक धड़ा मानता है कि SAD के साथ गठबंधन करने से बीजेपी को बहुत बड़ा फायदा नहीं होगा। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि अकाली वोटों का बीजेपी के पक्ष में पूरी तरह ट्रांसफर होना निश्चित नहीं है।</p><p>कुछ नेताओं को यह आशंका भी है कि गठबंधन होने की स्थिति में अकाली दल के कुछ नेता उन सीटों पर दूसरे पंथिक राजनीतिक विकल्पों की तरफ जा सकते हैं, जिन्हें सीट बंटवारे में बीजेपी के हिस्से में दिया जाएगा।</p><p>इसके उलट दूसरा पक्ष मानता है कि पंजाब जैसे सीमावर्ती राज्य में मजबूत स्थानीय सहयोगी के साथ चुनाव लड़ने से बीजेपी को फायदा हो सकता है। यही विरोधाभासी आकलन गठबंधन के फैसले को मुश्किल बना रहा है।</p><h5 class=""><b>हरसिमरत कौर बादल का समर्थन भी अहम</b><br></h5><p>SAD की लोकसभा में मौजूदगी फिलहाल सीमित है, लेकिन बीजेपी के लिए हरसिमरत कौर बादल का समर्थन महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, संसद में सरकार के कुछ महत्वपूर्ण विधायी प्रयासों के लिए सहयोगी दलों का समर्थन अहम हो सकता है।</p><p>हरसिमरत कौर बादल ने अब तक सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों से एक निश्चित दूरी बनाए रखी है। ऐसे में उनका रुख भी आने वाले समय में राजनीतिक समीकरणों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।</p><h5 class=""><b>BJP का फोकस बूथ, डेटा और सरकारी योजनाओं पर</b></h5><p>बीजेपी ने चुनावी तैयारी को केवल संगठन तक सीमित नहीं रखा है। पार्टी नेताओं को डेटा के आधार पर रणनीति बनाने और बीजेपी शासित राज्यों तथा पंजाब की तुलना जनता के सामने रखने को कहा गया है।</p><p>पूर्व केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के मुताबिक, बूथ को मजबूत करना चुनाव जीतने का आधार है। पार्टी ने नवंबर तक के लिए संगठनात्मक कार्यक्रम तैयार किया है।</p><p>बीजेपी प्रधानमंत्री आवास योजना, पीएम किसान और आयुष्मान भारत जैसी केंद्रीय योजनाओं को भी अपने प्रचार अभियान का हिस्सा बनाने की तैयारी में है। पार्टी की चुनावी रैलियां 15 सितंबर से शुरू करने की योजना है। इसके बाद पूरे पंजाब में नशा मुक्ति यात्रा निकालने की तैयारी है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के भी इस यात्रा में शामिल होने की संभावना है।</p><h5 class=""><b>गठबंधन के दरवाजे खुले, लेकिन तैयारी Solo की</b></h5><p>पंजाब बीजेपी के एक नेता ने साफ किया कि गठबंधन के विकल्प को बंद नहीं किया गया है, लेकिन पार्टी फिलहाल अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। इसका मतलब साफ है कि बीजेपी एक तरफ SAD के साथ संभावित समझौते की जमीन तलाश रही है, वहीं दूसरी तरफ किसी भी स्थिति के लिए अपना संगठन तैयार कर रही है।</p><p>2027 के चुनाव से पहले पंजाब की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि बीजेपी अपनी मजबूत होती संगठनात्मक स्थिति के भरोसे अकेले मैदान में उतरती है या पुराने सहयोगी SAD के साथ फिर राजनीतिक साझेदारी करती है। फिलहाल दोनों विकल्प खुले हैं और अंतिम फैसला बदलते राजनीतिक समीकरणों पर निर्भर करेगा।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब में BJP का ‘Solo Plan’ या SAD के साथ वापसी? 2027 से पहले गठबंधन को लेकर क्यों फंसा पेंच ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-election-2027-6041 ]]></guid><title><![CDATA[ पंजाब में बदले सियासी समीकरण: अमृतपाल अकेले लड़ेंगे चुनाव, BSP भी उतरेगी मैदान में; SAD-BJP गठबंधन पर सस्पेंस ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-election-2027-6041 ]]></link><pubDate><![CDATA[Wed, 26 Aug 2026 10:00:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ चंडीगढ़: पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति में कई अहम संकेत सामने आए हैं। एक तरफ खडूर साहिब से सांसद और जेल में बंद अमृतपाल सिंह के परिवार ने साफ किया है कि उनके अलावा परिवार का कोई दूसरा  ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>चंडीगढ़:</b> पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति में कई अहम संकेत सामने आए हैं। एक तरफ <b>खडूर साहिब</b> से सांसद और जेल में बंद <b>अमृतपाल सिंह</b> के परिवार ने साफ किया है कि उनके अलावा परिवार का कोई दूसरा सदस्य चुनाव नहीं लड़ेगा। दूसरी ओर <b>बहुजन समाज पार्टी </b>ने पंजाब में किसी भी दल के साथ गठबंधन से इनकार करते हुए अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है।</p><p>इसी बीच <b>शिरोमणि अकाली दल</b> और <b>भारतीय जनता पार्टी</b> के बीच संभावित गठबंधन को लेकर अटकलें जारी हैं। <b>आम आदमी पार्टी </b>ने दोनों दलों के संभावित साथ आने पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। वहीं <b>अरविंद केजरीवाल</b> ने पंजाब और गुजरात के सरकारी स्कूलों की तुलना को लेकर बीजेपी को खुली चुनौती दी है।</p><h5 class=""><b>अमृतपाल के परिवार ने साफ किया अपना रुख</b></h5><p><b>अमृतपाल सिंह</b> के पिता <b>तरसेम सिंह</b> ने मंगलवार को कहा कि उनके परिवार से विधानसभा चुनाव में सिर्फ अमृतपाल सिंह ही उम्मीदवार होंगे। परिवार का कोई दूसरा सदस्य चुनाव नहीं लड़ेगा।</p><p>तरसेम सिंह ने इस फैसले को परिवारवाद से दूर रहने की नीति से जोड़ा। उनका कहना है कि परिवार की राजनीति को आगे बढ़ाने के बजाय जमीन पर काम करने वाले युवाओं को नेतृत्व का अवसर मिलना चाहिए।</p><p><b>तरसेम सिंह अकाल दल (वारिस पंजाब दे)</b> के कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने कहा कि परिवार का उद्देश्य पंजाब और पंथ से जुड़े मुद्दों पर काम करना है और युवाओं को राजनीतिक भूमिका में आगे लाना है।</p><p>अमृतपाल सिंह फिलहाल असम की जेल में बंद हैं। ऐसे में उनका चुनाव लड़ना और चुनाव प्रचार किस तरह होगा, यह आने वाले समय में महत्वपूर्ण राजनीतिक सवाल रहेगा। हालांकि, उनके पिता ने परिवार की ओर से उम्मीदवारों को लेकर तस्वीर साफ करने की कोशिश की है।</p><h5 class=""><b>BSP ने भी गठबंधन से बनाई दूरी</b></h5><p>पंजाब की चुनावी तस्वीर में दूसरा बड़ा बदलाव <b>मायावती</b> की <b>बहुजन समाज पार्टी</b> के फैसले से आया है। BSP ने ऐलान किया है कि वह पंजाब विधानसभा चुनाव अपने दम पर लड़ेगी।</p><p>पार्टी ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की तरह पंजाब में भी किसी दल के साथ गठबंधन नहीं करने का फैसला किया है। मायावती का तर्क है कि गठबंधन की राजनीति से सीटों और वोट प्रतिशत पर असर पड़ सकता है और इसका प्रभाव पार्टी कार्यकर्ताओं के मनोबल पर भी पड़ता है।</p><p>BSP के इस फैसले से पंजाब में चुनावी मुकाबला और बहुकोणीय होने की संभावना बढ़ सकती है। पार्टी अब अपने संगठन और पारंपरिक सामाजिक आधार को मजबूत करने पर जोर देगी।</p><h5 class=""><b>SAD-BJP गठबंधन पर अभी भी सस्पेंस</b></h5><p>पंजाब की राजनीति में सबसे ज्यादा चर्चा <b>शिरोमणि अकाली दल</b> और <b>बीजेपी </b>के संभावित गठबंधन को लेकर है। दोनों दल लंबे समय तक सहयोगी रहे हैं, लेकिन कृषि कानूनों के मुद्दे पर 2020 में उनके रास्ते अलग हो गए थे।</p><p>अब दोनों दलों के बीच दोबारा राजनीतिक नजदीकी की अटकलें हैं। हालांकि, अभी तक गठबंधन को लेकर कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है।</p><p><b>अकाली दल</b> के वरिष्ठ नेता <b>दलजीत सिंह चीमा</b> ने कहा कि बीजेपी अपनी तैयारी कर रही है और अकाली दल अपनी। यदि बीजेपी की ओर से कोई प्रस्ताव आता है तो पार्टी हाईकमान उस पर विचार करेगा।</p><p>अकाली दल के उपाध्यक्ष <b>संजीव तलवार</b> ने भी कहा कि गठबंधन का अंतिम फैसला <b>सुखबीर सिंह बादल</b> के नेतृत्व में पार्टी करेगी। हालांकि, उन्होंने अपनी व्यक्तिगत राय रखते हुए दावा किया कि पंजाब के लोग मौजूदा सरकार को हटाने के लिए दोनों दलों को साथ देखना चाहते हैं।</p><p>उन्होंने यह भी कहा कि अगर गठबंधन होता है तो वह मुद्दों के आधार पर होगा और इसमें ‘बड़े भाई’ या ‘छोटे भाई’ जैसी स्थिति नहीं होगी।</p><h5 class=""><b>AAP ने गठबंधन की संभावनाओं पर साधा निशाना</b></h5><p><b>SAD</b> और <b>BJP</b> के संभावित गठबंधन को लेकर आम आदमी पार्टी ने दोनों दलों पर हमला बोला है। <b>AAP</b> नेता <b>बलतेज पन्नू </b>ने कहा कि राजनीति में बड़ा या छोटा भाई कौन होगा, इसका फैसला पार्टियां नहीं बल्कि जनता करती है।</p><p>उन्होंने अकाली दल के मौजूदा राजनीतिक प्रभाव पर भी सवाल उठाया और 2017 तथा 2022 के विधानसभा चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन का हवाला दिया।</p><p>AAP नेताओं ने कृषि कानूनों के मुद्दे को भी बीजेपी और अकाली दल के पुराने रिश्ते से जोड़कर हमला किया। उनका सवाल है कि जिस मुद्दे पर अकाली दल ने बीजेपी से संबंध तोड़े थे, अब अगर दोनों दल फिर साथ आते हैं तो उसके पीछे क्या राजनीतिक आधार होगा?</p><p><b>पंजाब सरकार के मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंड</b> ने भी बीजेपी पर हमला करते हुए दावा किया कि पार्टी चाहे <b>117</b> सीटों पर चुनाव लड़े या सीमित सीटों पर, उसे राज्य में कोई सफलता नहीं मिलेगी। उन्होंने किसान आंदोलन के दौरान बीजेपी के रवैये को लेकर भी निशाना साधा।</p><h5 class=""><b>केजरीवाल ने बीजेपी को दिया स्कूलों पर चैलेंज</b></h5><p>इसी राजनीतिक बहस के बीच आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने शिक्षा के मुद्दे पर बीजेपी को खुली चुनौती दी है।</p><p>केजरीवाल ने कहा कि बीजेपी पंजाब के सरकारी स्कूलों को बदनाम करने के लिए छेड़छाड़ किए गए और AI से तैयार वीडियो का इस्तेमाल कर रही है। इसके जवाब में उन्होंने गुजरात और पंजाब के सरकारी स्कूलों की तुलना करने की पेशकश की।</p><p>केजरीवाल ने बीजेपी को चुनौती देते हुए कहा कि गुजरात में पार्टी लंबे समय से सत्ता में है, जबकि पंजाब में AAP सरकार को कुछ ही वर्ष हुए हैं। उन्होंने दोनों राज्यों के 1,000-1,000 सरकारी स्कूलों का संयुक्त निरीक्षण करने का प्रस्ताव रखा।</p><p>उनका कहना है कि पंजाब और गुजरात के स्कूलों को एक साथ देखकर यह तय किया जा सकता है कि किस राज्य की सरकारी शिक्षा व्यवस्था बेहतर है।</p><h5 class=""><b>चुनाव से पहले बढ़ रही राजनीतिक हलचल</b></h5><p>पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले अलग-अलग दलों की रणनीतियां अब धीरे-धीरे सामने आने लगी हैं। अमृतपाल सिंह के परिवार ने परिवारवाद से दूरी का संदेश दिया है, जबकि <b>BSP</b> ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है।</p><p>दूसरी ओर <b>SAD</b> और <b>BJP</b> के बीच संभावित गठबंधन का सवाल अभी खुला है। अगर दोनों दल फिर साथ आते हैं तो पंजाब के राजनीतिक समीकरणों पर इसका असर पड़ना तय माना जाएगा।</p><p>AAP पहले से ही इस संभावित गठबंधन को निशाना बना रही है और शिक्षा, किसान तथा पंजाब के मुद्दों पर बीजेपी और अकाली दल को घेरने की कोशिश कर रही है।</p><p>ऐसे में आने वाले दिनों में उम्मीदवारों की घोषणा, गठबंधन की तस्वीर और अलग-अलग दलों की चुनावी रणनीति पंजाब की सियासत को और दिलचस्प बना सकती है। फिलहाल तीन बड़े सवाल बने हुए हैं—<b>क्या अमृतपाल चुनाव मैदान में उतर पाएंगे, क्या SAD-BJP फिर साथ आएंगे और क्या BSP का अकेले लड़ने का फैसला उसके लिए फायदेमंद साबित होगा?</b></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब में बदले सियासी समीकरण: अमृतपाल अकेले लड़ेंगे चुनाव, BSP भी उतरेगी मैदान में; SAD-BJP गठबंधन पर सस्पेंस ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/kejriwal-punjab-school-library-ett-teachers-protest-5981 ]]></guid><title><![CDATA[ पंजाब के सरकारी स्कूल की लाइब्रेरी देखकर अरविंद केजरीवाल बोले- 'सब कुछ नीयत का मामला है' ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/kejriwal-punjab-school-library-ett-teachers-protest-5981 ]]></link><pubDate><![CDATA[Sat, 22 Aug 2026 15:00:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पंजाब में सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे में हो रहे बदलाव की तारीफ की है। उन्होंने पंजाब के मानसा जिले के एक सरकारी स्कूल में त ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>नई दिल्ली: </b>आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पंजाब में सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे में हो रहे बदलाव की तारीफ की है। उन्होंने पंजाब के मानसा जिले के एक सरकारी स्कूल में तैयार की गई नई लाइब्रेरी का वीडियो साझा करते हुए कहा कि सरकारी स्कूल भी बेहतर हो सकते हैं और इसके लिए सबसे जरूरी चीज 'नीयत' है।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस द्वारा साझा किया गया वीडियो रिपोस्ट किया।</span></p><p><span style="font-size: 1rem;">वीडियो में मानसा के भैणी भागा स्थित सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल की नई और आधुनिक लाइब्रेरी दिखाई गई है।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">केजरीवाल ने लिखा, "यह पंजाब के एक सरकारी स्कूल की लाइब्रेरी है। अगली बार जब कोई आपसे कहे कि सरकारी स्कूल अच्छे नहीं हो सकते, तो उसे यह वीडियो दिखाइए। यह सब नीयत का मामला है।"&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">इससे पहले शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने लाइब्रेरी की तस्वीरें और वीडियो साझा करते हुए कहा था कि यह छात्रों के लिए पढ़ने, सीखने और बड़े सपने देखने के लिए एक बेहतर और सुविधाजनक स्थान है।</span></p><h5 class=""><b>180 ETT शिक्षकों का वित्त मंत्री के आवास के बाहर प्रदर्शन</b></h5><p>वहीं, पंजाब में सरकारी शिक्षा व्यवस्था को लेकर राजनीतिक चर्चा के बीच 180 से अधिक Elementary Teacher Training (ETT) शिक्षक अपने परिवारों के साथ शनिवार को चंडीगढ़ में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के आवास के बाहर धरने पर बैठ गए।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने भर्ती प्रक्रिया में कथित बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और शिक्षा विभाग के कर्मचारियों द्वारा कथित मनमानी का आरोप लगाया।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;This is a library at a government school in Punjab. The next time someone tells you that government schools can’t be good, show them this video. It is all about &amp;quot;neeyat&amp;quot;. &lt;a href="https://t.co/LLagBLQFUx"&gt;https://t.co/LLagBLQFUx&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) &lt;a href="https://x.com/ArvindKejriwal/status/2091058697384645083?ref_src=twsrc^tfw"&gt;August 22, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><h5 class=""><b>'क्लर्क को निलंबित किया जाए'</b></h5><p>एक प्रदर्शनकारी शिक्षक ने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग के एक क्लर्क ने अपने लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए भर्ती प्रक्रिया में कथित घोटाला किया।<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने कहा, "हम उस शिक्षा विभाग के क्लर्क के निलंबन की मांग कर रहे हैं, जिसने अपने लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए इतना बड़ा घोटाला किया। हम अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं।"&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">प्रदर्शनकारी के मुताबिक, शिक्षा मंत्री और वित्त मंत्री का कहना है कि उनके पास क्लर्क को निलंबित करने का अधिकार नहीं है और मुख्यमंत्री के साथ बैठक कराने का आश्वासन दिया गया है। उनका आरोप है कि कई बैठकों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।</span></p><h5 class=""><b>2016 की भर्ती, फिर बर्खास्तगी और कोर्ट से बहाली</b></h5><p class="grey-bg-red"><b><i>एक अन्य प्रदर्शनकारी ने बताया कि 180 ETT शिक्षकों की भर्ती वर्ष 2016 में हुई थी, लेकिन बाद में भर्ती प्रक्रिया में खामियों का हवाला देते हुए उन्हें बर्खास्त कर दिया गया था।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">शिक्षकों के मुताबिक, बाद में अदालत के आदेश के बाद उन्हें दोबारा बहाल किया गया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि बहाली के दौरान विभागीय क्लर्क को कथित तौर पर बचाया गया।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">एक शिक्षक ने दावा किया कि एक IAS अधिकारी की रिपोर्ट में भी समस्या के लिए क्लर्क की गलती की ओर इशारा किया गया और 180 शिक्षकों को जिम्मेदार नहीं माना गया। इसके बावजूद उन्हें अब तक न्याय नहीं मिला है।</span></i></b></p><h5 class=""><b>पंजाब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाया</b></h5><p>प्रदर्शन के बाद पंजाब पुलिस ने वित्त मंत्री के आवास के आसपास से प्रदर्शनकारियों को हटाया। शिक्षकों का कहना है कि वे लंबे समय से अपने अधिकारों और न्याय की मांग कर रहे हैं।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">इस पूरे घटनाक्रम में एक ओर पंजाब सरकार के सरकारी स्कूलों में आधुनिक सुविधाएं विकसित करने के प्रयासों की चर्चा है, तो दूसरी ओर शिक्षक भर्ती से जुड़े पुराने विवाद और प्रदर्शन सरकार के सामने चुनौती बने हुए हैं।</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब के सरकारी स्कूल की लाइब्रेरी देखकर अरविंद केजरीवाल बोले- 'सब कुछ नीयत का मामला है' ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/sad-bjp-alliance-punjab-harsimrat-kaur-badal-bikram-majithia-5968 ]]></guid><title><![CDATA[ पंजाब में SAD-BJP गठबंधन की फिर आहट? हरसिमरत के संकेत से गरमाई सियासत, मजीठिया ने भी खोले पत्ते ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/sad-bjp-alliance-punjab-harsimrat-kaur-badal-bikram-majithia-5968 ]]></link><pubDate><![CDATA[Fri, 21 Aug 2026 19:00:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ पंजाब की सियासत में शिरोमणि अकाली दल (SAD) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच संभावित गठबंधन को लेकर एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अकाली दल की वरिष्ठ नेता और बठिंडा सांसद हरसिमरत कौर बादल के एक बय ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>पंजाब</b> की सियासत में <b>शिरोमणि अकाली दल (SAD) </b>और <b>भारतीय जनता पार्टी (BJP) </b>के बीच संभावित गठबंधन को लेकर एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अकाली दल की वरिष्ठ नेता और बठिंडा सांसद हरसिमरत कौर बादल के एक बयान ने इन अटकलों को नया आधार दिया है। वहीं <b>अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया</b> ने भी कहा है कि दोनों दल पहले लंबे समय तक साथ काम कर चुके हैं और पंजाब में मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए लोगों के बीच फिर साथ आने की मांग है।</p><p>हालांकि, अभी तक न तो अकाली दल और न ही भाजपा ने गठबंधन को लेकर कोई औपचारिक घोषणा की है। खास बात यह है कि भाजपा के कई नेता पंजाब में अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी की बात पहले ही कह चुके हैं। ऐसे में सवाल यह है कि क्या दोनों दल वास्तव में पुराने रिश्ते को फिर से जोड़ने की दिशा में बढ़ रहे हैं या फिलहाल यह सिर्फ राजनीतिक संकेतों और अटकलों तक सीमित है?</p><h5 class=""><b>हरसिमरत कौर के बयान ने बढ़ाई हलचल</b></h5><p>संत हरचंद सिंह लोंगोवाल की 41वीं पुण्यतिथि पर आयोजित एक रैली में <b>हरसिमरत कौर बादल </b>ने केंद्र के साथ राजनीतिक समझ और सहयोग की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पंजाब को पहले भी ऐसे समझौतों से विकास और प्रगति का फायदा मिला है।</p><p><b>हरसिमरत</b> ने कहा कि वह अभी अपनी बात खुलकर नहीं कह सकतीं और लोगों को खुद आगे होने वाली चीजों का पता चल जाएगा। उन्होंने दिल्ली से ऐसे समझौतों की उम्मीद जताई, जिनसे पंजाब में विकास और प्रगति को बढ़ावा मिल सके।</p><p>उन्होंने भाजपा का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया, लेकिन उनके बयान को SAD-BJP रिश्तों के संदर्भ में देखा जा रहा है। यही वजह है कि पंजाब के राजनीतिक गलियारों में पुराने गठबंधन की वापसी को लेकर चर्चा अचानक तेज हो गई है।</p><h5 class=""><b>SAD और BJP का रिश्ता पुराना, लेकिन 2020 में टूट गया था</b></h5><p>SAD और BJP का पंजाब में गठबंधन कई दशकों तक चला। दोनों पार्टियों ने एक साथ चुनाव लड़े और राज्य में सरकार भी बनाई। यह गठबंधन पंजाब की राजनीति में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रयोग माना जाता था, जिसमें अकाली दल का ग्रामीण और सिख आधार तथा भाजपा का शहरी समर्थन एक-दूसरे के पूरक रहे।</p><p>लेकिन 2020 में कृषि कानूनों के मुद्दे पर दोनों दलों के रास्ते अलग हो गए। किसान आंदोलन के बीच अकाली दल ने NDA से बाहर निकलने का फैसला किया। इसके बाद भाजपा ने पंजाब में अपने संगठन को स्वतंत्र रूप से मजबूत करने की रणनीति अपनाई।</p><p>तब से दोनों पार्टियां अलग-अलग चुनाव मैदान में उतरी हैं। इस दौरान भाजपा ने राज्य में अपने संगठन और राजनीतिक आधार को बढ़ाने पर जोर दिया, जबकि अकाली दल अपने पारंपरिक वोट बैंक को दोबारा मजबूत करने की कोशिश करता रहा।</p><h5 class=""><b>मजीठिया बोले- साथ आने की लोगों में मांग</b></h5><p>SAD नेता <b>बिक्रम सिंह मजीठिया</b> ने गठबंधन की संभावनाओं पर बात करते हुए पुराने रिश्ते का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अकाली दल और भाजपा पहले लंबे समय तक गठबंधन में काम कर चुके हैं।</p><p>मजीठिया के मुताबिक, <b>अटल बिहारी वाजपेयी और प्रकाश सिंह बादल</b> के दौर में गठबंधन मजबूती से चला और बाद में <b>नरेंद्र मोदी </b>के दौर में भी दोनों दलों ने साथ काम किया। उन्होंने कहा कि कृषि कानूनों के कारण दोनों दल अलग हुए थे।</p><p>उन्होंने पंजाब की मौजूदा स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य एक बॉर्डर स्टेट है और यहां सामाजिक ताने-बाने तथा सांप्रदायिक सद्भाव को बनाए रखना महत्वपूर्ण है। मजीठिया ने कहा कि लोगों के बीच दोनों दलों के फिर साथ आने की मांग है, लेकिन गठबंधन होगा या नहीं, इसका फैसला भाजपा और अकाली दल का केंद्रीय नेतृत्व करेगा।</p><p>यह बयान महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि इससे पहली बार अकाली दल की ओर से संभावित गठबंधन को लेकर अपेक्षाकृत खुला राजनीतिक संकेत सामने आया है। हालांकि, इसे गठबंधन की औपचारिक पुष्टि नहीं माना जा सकता।</p><p>&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;&lt;a href="https://x.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#WATCH&lt;/a&gt; | Chandigarh: On speculations of SAD-BJP alliance ahead of Punjab polls, Shiromani Akali Dal leader Bikram Singh Majithia says, &amp;quot;... We should understand that the Shiromani Akali Dal and BJP have worked together. Vajpayee ji and Badal ji strengthened this alliance, and it… &lt;a href="https://t.co/gSKnHc2KoN"&gt;pic.twitter.com/gSKnHc2KoN&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; ANI (@ANI) &lt;a href="https://x.com/ANI/status/2090693007242874905?ref_src=twsrc^tfw"&gt;August 21, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</p><h5 class=""><b>भाजपा की राह अभी अलग दिख रही है</b></h5><p>दूसरी तरफ भाजपा की तरफ से पंजाब में अकेले चुनाव लड़ने की रणनीति के संकेत लगातार मिलते रहे हैं। पंजाब बीजेपी के कई नेता पहले ही कह चुके हैं कि पार्टी राज्य की सभी <b>117</b> विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है।</p><p>हरियाणा के <b>मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी</b> ने भी 10 अगस्त को भाजपा और अकाली दल के बीच संभावित गठबंधन की संभावना से इनकार किया था। उन्होंने कहा था कि भाजपा का गठबंधन पंजाब की जनता के साथ है।</p><p>इसके अलावा मार्च में मोगा में आयोजित एक कार्यक्रम में <b>केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह </b>ने भी कहा था कि भाजपा पंजाब में अपने दम पर सरकार बनाएगी। ऐसे बयानों से साफ है कि पार्टी संगठनात्मक रूप से अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है।</p><p>इसलिए अगर भविष्य में SAD-BJP गठबंधन की कोई पहल होती है, तो यह भाजपा की मौजूदा रणनीति में बड़ा बदलाव माना जाएगा।</p><h5 class=""><b>दोनों पार्टियों के लिए गठबंधन क्यों महत्वपूर्ण हो सकता है?</b></h5><p>पंजाब की राजनीति पिछले कुछ वर्षों में काफी बदल चुकी है। आम आदमी पार्टी सत्ता में है, कांग्रेस भी राज्य में अपना आधार बनाए रखने की कोशिश कर रही है और अकाली दल के सामने अपने पुराने राजनीतिक प्रभाव को वापस हासिल करने की चुनौती है।</p><p>भाजपा ने भी पंजाब में अपना आधार बढ़ाने की कोशिश की है। अगर SAD और BJP फिर साथ आते हैं तो अकाली दल को भाजपा के शहरी और राष्ट्रीय स्तर के राजनीतिक नेटवर्क का फायदा मिल सकता है। वहीं भाजपा को अकाली दल के ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद संगठन और पारंपरिक वोट आधार से लाभ मिलने की संभावना होगी।</p><p>लेकिन इसके साथ चुनौतियां भी कम नहीं हैं। दोनों पार्टियों के बीच 2020 में कृषि कानूनों को लेकर जो राजनीतिक दूरी बनी थी, वह पूरी तरह खत्म हुई है या नहीं, यह बड़ा सवाल है। इसके अलावा भाजपा अब पहले की तुलना में पंजाब में अपना स्वतंत्र संगठन काफी मजबूत कर चुकी है। ऐसे में पुराने सीट-बंटवारे के फॉर्मूले पर लौटना दोनों पक्षों के लिए आसान नहीं होगा।</p><h5 class=""><b>सीट शेयरिंग से लेकर वोट बैंक तक बड़ी चुनौती</b></h5><p>अगर गठबंधन की दिशा में बातचीत आगे बढ़ती है तो सबसे बड़ा सवाल सीटों के बंटवारे का होगा। पुराने गठबंधन में दोनों पार्टियों की अपनी-अपनी भूमिका और सीटों का एक स्थापित फॉर्मूला था। अब बदले राजनीतिक समीकरण में भाजपा अपने बढ़े हुए संगठनात्मक आधार को देखते हुए अधिक सीटों की मांग कर सकती है।</p><p>दूसरी तरफ अकाली दल के लिए अपने पारंपरिक समर्थकों के बीच यह संदेश देना जरूरी होगा कि भाजपा के साथ किसी भी नए समझौते से पंजाब के हित और उसकी राजनीतिक पहचान प्रभावित नहीं होगी।</p><p>इसके अलावा दोनों दलों को आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के खिलाफ साझा रणनीति भी तैयार करनी होगी। पंजाब में सत्ता विरोधी माहौल, किसान मुद्दे, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, बेरोजगारी और राज्य-केंद्र संबंध जैसे मुद्दे चुनावी राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं।</p><h5 class=""><b>क्या पुराने साथी फिर एक मंच पर आएंगे?</b></h5><p>हरसिमरत कौर बादल का बयान और मजीठिया की टिप्पणी निश्चित रूप से SAD-BJP गठबंधन की संभावनाओं को लेकर राजनीतिक चर्चा बढ़ाने वाली है। लेकिन अभी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है।</p><p>एक तरफ अकाली दल की ओर से साथ आने की जरूरत और लोगों की मांग का जिक्र किया जा रहा है, तो दूसरी तरफ भाजपा के नेता लगातार अपने दम पर चुनाव लड़ने की तैयारी की बात कर रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व के बीच बातचीत सबसे महत्वपूर्ण होगी।</p><p>फिलहाल इतना जरूर है कि पंजाब की राजनीति में <b>SAD-BJP</b> गठबंधन का मुद्दा फिर से चर्चा के केंद्र में आ गया है। क्या यह सिर्फ चुनावी माहौल में पैदा हुई सियासी गर्मी है या फिर पुराने साथी वास्तव में एक बार फिर हाथ मिलाने जा रहे हैं, इसका जवाब आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम से ही मिलेगा।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब में SAD-BJP गठबंधन की फिर आहट? हरसिमरत के संकेत से गरमाई सियासत, मजीठिया ने भी खोले पत्ते ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-bandh-qaumi-insaaf-morcha-5959 ]]></guid><title><![CDATA[ पंजाब बंद: कौमी इंसाफ मोर्चा के आह्वान पर अमृतसर में बाजार बंद, मोहाली में यातायात प्रभावित; सुरक्षा कड़ी ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-bandh-qaumi-insaaf-morcha-5959 ]]></link><pubDate><![CDATA[Fri, 21 Aug 2026 13:02:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ चंडीगढ़, पंजाब: सिख बंदियों की रिहाई की मांग को लेकर कौमी इंसाफ मोर्चा (Qaumi Insaaf Morcha) की ओर से शुक्रवार को बुलाए गए पंजाब बंद का असर राज्य के कई हिस्सों में देखने को मिला। बंद का समय सुबह 7 बजे ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>चंडीगढ़, पंजाब: </b>सिख बंदियों की रिहाई की मांग को लेकर कौमी इंसाफ मोर्चा (Qaumi Insaaf Morcha) की ओर से शुक्रवार को बुलाए गए पंजाब बंद का असर राज्य के कई हिस्सों में देखने को मिला। बंद का समय सुबह 7 बजे से दोपहर 2 बजे तक रखा गया था। अमृतसर समेत कई शहरों में बाजार बंद रहे, जबकि मोहाली में कुछ समर्थकों ने यातायात रोकने का प्रयास किया। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रमुख शहरों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया।</span></p><p><span style="font-size: 1rem;">अमृतसर में बंद का व्यापक असर दिखाई दिया। पुलिस ने शहर के अलग-अलग इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था संभाली। एडीसीपी हरपाल सिंह ने मीडिया से बातचीत में बताया कि शहर के सभी बाजार बंद हैं और सभी प्रमुख इलाकों में पुलिस तैनात है। उन्होंने कहा कि फिलहाल स्थिति शांतिपूर्ण है और विभिन्न जत्थेबंदियों ने बंद का समर्थन किया है।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;&lt;a href="https://x.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#WATCH&lt;/a&gt; | Mohali, Punjab | The impact of the &amp;#39;bandh&amp;#39; called by Qaumi Insaaf Morcha over their demand for the release of Sikh prisoners is seen at a city traffic intersection in Phase 7, where a few Sikhs supporting the shutdown attempted to block the flow of traffic and stopped… &lt;a href="https://t.co/1JHXwO1GZM"&gt;pic.twitter.com/1JHXwO1GZM&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; ANI (@ANI) &lt;a href="https://x.com/ANI/status/2090661862170067254?ref_src=twsrc^tfw"&gt;August 21, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><h5 class=""><b>मोहाली में सड़क पर उतरे समर्थक, वाहनों को रोका</b></h5><p>मोहाली के फेज-7 स्थित एक चौराहे पर बंद समर्थकों ने यातायात बाधित करने का प्रयास किया। कुछ समर्थकों ने वाहनों को आगे बढ़ने से रोक दिया, जिससे कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित हुआ। पुलिस की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी गई।</p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;Mohali, Punjab: On the impact of the Punjab bandh called by the Qaumi Insaaf Morcha, ASI Harminder Singh says, &amp;quot;All doctors, medical staff, and emergency personnel are being allowed through...&amp;quot; &lt;a href="https://t.co/sZAv2rHNPe"&gt;pic.twitter.com/sZAv2rHNPe&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; IANS (@ians_india) &lt;a href="https://x.com/ians_india/status/2090661796705431746?ref_src=twsrc^tfw"&gt;August 21, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><h5 class=""><b>मोगा में भारी पुलिस बल तैनात</b></h5><p>मोगा में भी पुलिस ने सुबह से ही व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए। सिटी-1 थाने के एसएचओ इंस्पेक्टर गुरविंदर सिंह भुल्लर ने बताया कि एसएसपी के निर्देश पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने लोगों से शांत रहने की अपील करते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की किसी भी कोशिश को अनुमति नहीं दी जाएगी। पुलिस अधिकारी के मुताबिक, आवश्यक सेवाएं और आपातकालीन गतिविधियां जारी हैं।</span></p><p>भुल्लर ने कहा कि बारिश के कारण मोगा में बंद समर्थकों की मौजूदगी फिलहाल कम रही। उन्होंने लोगों से अपील की कि घबराने की जरूरत नहीं है और जरूरी काम से निकलने वाले लोग अपना काम कर सकते हैं।</p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;&lt;a href="https://x.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#WATCH&lt;/a&gt; | Moga, Punjab: On Punjab Bandh called by the Qaumi Insaaf Morcha, Inspector Gurwinder Singh Bhullar (SHO City 1 Moga) says, &amp;quot;Since this morning, the Moga police, acting under the instructions of our SSP, have deployed a heavy police force here. I want to assure the public… &lt;a href="https://t.co/bDQ3HatjYU"&gt;pic.twitter.com/bDQ3HatjYU&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; ANI (@ANI) &lt;a href="https://x.com/ANI/status/2090638767434699238?ref_src=twsrc^tfw"&gt;August 21, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;Moga, Punjab: The Punjab bandh called over the release of Bandi Singhs is being observed. Markets in Moga are completely shut. Intensive security arrangements are made across the district &lt;a href="https://t.co/dDqru4IHV2"&gt;pic.twitter.com/dDqru4IHV2&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; IANS (@ians_india) &lt;a href="https://x.com/ians_india/status/2090694711443079198?ref_src=twsrc^tfw"&gt;August 21, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><h5 class=""><b>15 अगस्त को चंडीगढ़ में हुआ था टकराव</b></h5><p>कौमी इंसाफ मोर्चा के प्रदर्शन को लेकर 15 अगस्त को चंडीगढ़ में भी तनाव की स्थिति बनी थी। सिख बंदियों की रिहाई की मांग को लेकर प्रदर्शनकारी पंजाब के राज्यपाल के आवास की ओर मार्च करने का प्रयास कर रहे थे। पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया था।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">प्रदर्शनकारियों में से कुछ ने बैरिकेड और कंटीले तार हटाने का प्रयास किया था। कुछ प्रदर्शनकारियों ने ट्रैक्टर की मदद से बैरिकेड हटाने की कोशिश भी की थी।</span></p><h5 class=""><b>जंगतार सिंह हवारा समेत बंदियों की रिहाई की मांग</b></h5><p>मोर्चा की प्रमुख मांगों में सिख बंदियों की रिहाई शामिल है। इनमें जगतार सिंह हवारा का नाम भी शामिल है, जो 1995 में तत्कालीन पंजाब मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">जगतार सिंह हवारा के पिता बापू गुरचरण सिंह ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतंत्र में मौलिक अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार प्रदर्शनकारियों के शांतिपूर्ण आंदोलन में बाधा डाल रही है।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी पुलिस के साथ सहयोग करने के लिए तैयार हैं, लेकिन अनावश्यक बैरिकेडिंग से तनाव पैदा हो रहा है। उन्होंने सिख बंदियों की रिहाई के अलावा एक बंदी को अपनी गंभीर रूप से बीमार मां से मिलने के लिए 10 दिन की पैरोल देने की मांग भी दोहराई।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;VIDEO | Chandigarh: Members of Qaumi Insaf Morcha make announcement regarding Punjab Bandh called by their organisation, stop buses from plying.&lt;br&gt;&lt;br&gt;(Full video available on PTI Videos - &lt;a href="https://t.co/d8jp61yd2p"&gt;https://t.co/d8jp61yd2p&lt;/a&gt;) &lt;a href="https://t.co/ObJRypu67X"&gt;pic.twitter.com/ObJRypu67X&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Press Trust of India (@PTI_News) &lt;a href="https://x.com/PTI_News/status/2090632186886291948?ref_src=twsrc^tfw"&gt;August 21, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;Mohali, Punjab: Qaumi Insaaf Morcha member Sarbjit Singh says, &amp;quot;The Qaumi Insaaf Morcha has been protesting for nearly three-and-a-half years for the release of Bandi Singhs. The call given by the Morcha has resulted in a complete Punjab bandh today. Except for emergency… &lt;a href="https://t.co/sGhadyP4iE"&gt;pic.twitter.com/sGhadyP4iE&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; IANS (@ians_india) &lt;a href="https://x.com/ians_india/status/2090646353970094409?ref_src=twsrc^tfw"&gt;August 21, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><h5 class=""><b>चंडीगढ़ पुलिस ने लगाया बैरिकेड तोड़ने का आरोप</b></h5><p>वहीं, चंडीगढ़ की एसएसपी कंवरदीप कौर ने प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों पर बैरिकेड तोड़ने और पुलिसकर्मियों पर हमला करने का प्रयास करने का आरोप लगाया।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">एसएसपी के मुताबिक, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से लगातार शांतिपूर्ण तरीके से मार्च करने की अपील की थी। हालांकि, कुछ प्रदर्शनकारी आगे बढ़े और बैरिकेड तोड़ने की कोशिश करने लगे। पुलिस का दावा है कि कुछ लोगों के पास धारदार हथियार भी थे और उन्होंने पुलिस पर हमला करने का प्रयास किया।</span></p><h5 class=""><b>पुलिस ने वाटर कैनन और आंसू गैस का किया इस्तेमाल</b></h5><p class="grey-bg-red"><b><i>चंडीगढ़ पुलिस के अनुसार, स्थिति को नियंत्रित करने के लिए गैर-घातक बल का इस्तेमाल किया गया, जिसमें वाटर कैनन और आंसू गैस के गोले शामिल थे। पुलिस ने यह भी दावा किया कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव किया, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">पुलिस के मुताबिक, कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है और उनके खिलाफ आवश्यक कानूनी प्रक्रिया जारी है।</span></i></b></p><h5 class=""><b>प्रशासन की अपील—शांति बनाए रखें</b></h5><p>पंजाब बंद के दौरान पुलिस और प्रशासन की ओर से लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की गई है। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए प्रमुख शहरों में पुलिस बल तैनात है। अधिकारियों ने कहा है कि आवश्यक सेवाओं और आपातकालीन गतिविधियों को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा तथा कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश पर कार्रवाई की जाएगी।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब बंद: कौमी इंसाफ मोर्चा के आह्वान पर अमृतसर में बाजार बंद, मोहाली में यातायात प्रभावित; सुरक्षा कड़ी ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-bandh-amritsar-mohali-traffic-5958 ]]></guid><title><![CDATA[ Punjab Bandh: Markets Shut in Amritsar, Traffic Disrupted in Mohali Amid Tight Security ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-bandh-amritsar-mohali-traffic-5958 ]]></link><pubDate><![CDATA[Fri, 21 Aug 2026 12:34:21 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ Chandigarh, Punjab: The impact of the 'bandh' called by Qaumi Insaaf Morcha demanding the release of Sikh prisoners was seen in parts of Punjab on Friday, with police deployed across major cities to m ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>Chandigarh, Punjab: </b>The impact of the 'bandh' called by Qaumi Insaaf Morcha demanding the release of Sikh prisoners was seen in parts of Punjab on Friday, with police deployed across major cities to maintain law and order.&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">In Mohali, a few supporters of the shutdown attempted to block the flow of traffic at a city intersection in Phase 7 and stopped several vehicles from proceeding further.</span></p><p>In Amritsar, Police personnel have been deployed across the city as the Qaumi Insaaf Morcha called for a 'bandh' from 7 am to 2 pm across Punjab. The shutdown has been supported by various Sikh organisations.&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">While speaking to ANI, ADCP Harpal Singh said, "All markets here are closed. Police are deployed in all areas of Amritsar. The situation is peaceful in the city. All 'jathebandis' have supported this bandh."</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;&lt;a href="https://x.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#WATCH&lt;/a&gt; | Mohali, Punjab | The impact of the &amp;#39;bandh&amp;#39; called by Qaumi Insaaf Morcha over their demand for the release of Sikh prisoners is seen at a city traffic intersection in Phase 7, where a few Sikhs supporting the shutdown attempted to block the flow of traffic and stopped… &lt;a href="https://t.co/1JHXwO1GZM"&gt;pic.twitter.com/1JHXwO1GZM&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; ANI (@ANI) &lt;a href="https://x.com/ANI/status/2090661862170067254?ref_src=twsrc^tfw"&gt;August 21, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p>In Moga, Inspector Gurwinder Singh Bhullar, SHO City 1, said the police had made extensive arrangements since morning.&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">"Since this morning, the Moga police, acting under the instructions of our SSP, have deployed a heavy police force here. I want to assure the public that no one will be allowed to disrupt law and order... Protestors should protest peacefully," he told media.</span></p><p>Bhullar said essential services and emergency operations remain functional.&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">"As you can see, people are moving about and heading to work... The protest was supposed to run from 7:00 AM to 2:00 PM. However, as you can see, it is raining heavily, so no protesters have arrived here yet," he added.</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;Moga, Punjab: The Punjab bandh called over the release of Bandi Singhs is being observed. Markets in Moga are completely shut. Intensive security arrangements are made across the district &lt;a href="https://t.co/dDqru4IHV2"&gt;pic.twitter.com/dDqru4IHV2&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; IANS (@ians_india) &lt;a href="https://x.com/ians_india/status/2090694711443079198?ref_src=twsrc^tfw"&gt;August 21, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p>The officer urged citizens not to panic. "There is no need to fear; anyone with urgent business should go about their work, as the police force is fully deployed. We will not allow any disruptive elements to raise their heads," Bhullar said.&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">Earlier, on August 15, protesters belonging to the Qaumi Insaaf Morcha were dispersed by police using tear gas and water cannons in Chandigarh as they attempted to march towards the Punjab Governor's residence, demanding the release of Sikh prisoners, including Jagtar Singh Hawara, who is serving a life sentence for the killing of then Punjab chief minister Beant Singh in 1995.</span></p><p>Some protesters attempted to remove barricades and barbed wire, and some others tried to pull them down using a tractor as they attempted to proceed towards the residence of the Punjab Governor Gulab Chand Kataria in Chandigarh.&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">Speaking about the protest and police action, Bapu Gurcharan Singh, father of Jagtar Singh Hawara, said that peaceful protest was a fundamental right in a democracy and alleged that the government was disrupting their demonstration.</span></p><p>"Peaceful protest is our fundamental right in a democracy. We have been sitting here peacefully for over three years, but the government has not been willing to give us justice. That is why, on Independence Day, we organised a peaceful march and protest carrying black flags. Our mission is completely peaceful, but we feel the government is disrupting that peaceful protest. We have never broken barricades," Singh said.</p><p>He further said that the protesters were willing to cooperate with the police, but alleged that unnecessary barricading was creating tension. He reiterated that the main demand of the Morcha was the release of detained Sikhs and also sought parole for one of them to meet his ailing mother.</p><p>He said, "We are ready to cooperate with the police, but unnecessary barricading is creating tension and forcing us into a situation we do not want. Our main demand is the release of detained Sikhs. At present, we are also demanding 10 days of parole for one of them so that he can meet his mother, who has been seriously ill and bedridden for a long time."</p><p>However, Chandigarh SSP Kanwardeep Kaur said the protesters had been repeatedly asked to keep the march peaceful and alleged that some demonstrators attempted to break through the barricades and attack police personnel.</p><p>"Qaumi Insaaf Morcha has called for a march towards the Punjab Governor's House... The appeal was made to them that the gathering should be peaceful... Chandigarh Police will cooperate fully. Today, when the demonstration started, some people came forward and joined from the front. They first came and stood at the barricade for a long time, but some people came forward and tried to break the barricade. We gave them warnings multiple times... Some more aggressive people that have sharp weapons came forward, broke the barricade, and tried to attack the police," SSP said.</p><p>Police said some personnel were injured during the confrontation and that some protesters had been detained. Legal formalities are being carried out in connection with the incident.</p><p>"Taking action lawfully, by using non-lethal force, water cannon, tear gas shelling, etc, we dispersed them... Some protesters resorted to stone pelting at the police... some of our personnel sustained injuries; they have been admitted to the hospital, and we will provide you with the exact figures... some people are currently detained, and we are proceeding with the necessary legal formalities," SSP added.</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ Punjab Bandh: Markets Shut in Amritsar, Traffic Disrupted in Mohali Amid Tight Security ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/charanjit-channi-cwc-meeting-ma-exam-punjab-congress-politics-raja-warring-5939 ]]></guid><title><![CDATA[ CWC की बैठक से चन्नी क्यों रहे गैरहाजिर? परीक्षा, पंजाब कांग्रेस की गुटबाजी और CM फेस की मांग से जुड़ी पूरी कहानी ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/charanjit-channi-cwc-meeting-ma-exam-punjab-congress-politics-raja-warring-5939 ]]></link><pubDate><![CDATA[Thu, 20 Aug 2026 14:00:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ नई दिल्ली में बुधवार को कांग्रेस वर्किंग कमेटी यानी CWC की महत्वपूर्ण बैठक हुई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत पार्टी के कई बड़े नेता इस बैठक में मौजूद ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>नई दिल्ली </b>में बुधवार को <b>कांग्रेस वर्किंग कमेटी</b> यानी <b>CWC</b> की महत्वपूर्ण बैठक हुई। कांग्रेस अध्यक्ष <b>मल्लिकार्जुन खड़गे</b>, लोकसभा में विपक्ष के नेता <b>राहुल गांधी</b> समेत पार्टी के कई बड़े नेता इस बैठक में मौजूद रहे। लेकिन पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर से सांसद <b>चरणजीत सिंह चन्नी</b> बैठक में शामिल नहीं हुए।</p><p><b>चन्नी</b> की गैरमौजूदगी सामान्य राजनीतिक घटनाक्रम से अलग इसलिए दिखाई दी क्योंकि पंजाब कांग्रेस पहले से ही अंदरूनी गुटबाजी और नेतृत्व को लेकर खींचतान से जूझ रही है। पार्टी नेतृत्व राज्य संगठन के भीतर असंतोष को कम करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे समय में CWC की बैठक से पंजाब के एक प्रमुख नेता की गैरहाजिरी ने कई सवाल खड़े कर दिए।</p><p>हालांकि, चन्नी ने खुद इन अटकलों को ज्यादा तवज्जो नहीं दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि बैठक में शामिल न होने के पीछे कोई राजनीतिक नाराजगी नहीं, बल्कि उनकी परीक्षा है।</p><h5 class=""><b>चन्नी ने बताई परीक्षा की वजह</b></h5><p><b>चरणजीत सिंह चन्नी</b> पंजाब यूनिवर्सिटी से पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में MA कर रहे हैं। गुरुवार को उनकी परीक्षा का आखिरी पेपर था। चन्नी ने कहा कि वह फिलहाल पढ़ाई पर ध्यान दे रहे हैं और उनकी गैरमौजूदगी को लेकर जो राजनीतिक बातें की जा रही हैं, वे बेवजह हैं।</p><p>उन्होंने यह भी बताया कि भविष्य में वह एक और <b>PhD</b> करने की योजना बना रहे हैं। इस बार उनकी रुचि पब्लिक पॉलिसी रिफॉर्म्स के क्षेत्र में है और वह पंजाब यूनिवर्सिटी से यह पढ़ाई करने की योजना बना रहे हैं।</p><p>जब <b>चन्नी</b> के <b>CWC</b> बैठक में शामिल नहीं होने की खबर सामने आई, तो कुछ ही समय बाद सोशल मीडिया पर उनका MA परीक्षा का एडमिट कार्ड भी सामने आया। इससे उनकी बताई गई वजह को लेकर चर्चा और तेज हो गई।</p><p>चन्नी ने अपनी गैरमौजूदगी को लेकर कहा कि कुछ लोग जानबूझकर नकारात्मक बातें फैला रहे हैं। उनके मुताबिक, परीक्षा पहले से तय थी और इसी कारण वह बैठक में शामिल नहीं हो सके।</p><h5 class=""><b>पढ़ाई और राजनीति साथ-साथ चलती रही</b></h5><p>चरणजीत सिंह चन्नी का राजनीतिक जीवन और शिक्षा का सफर लंबे समय से साथ-साथ चलता रहा है। वह वकील हैं और उनके पास बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन तथा पॉलिटिकल साइंस में पोस्टग्रेजुएट डिग्रियां हैं। वह पॉलिटिकल साइंस में<b> PhD</b> भी कर चुके हैं।</p><p>चन्नी खुद को कई मौकों पर ऐसा व्यक्ति बताते रहे हैं जो जीवनभर छात्र बने रहना चाहता है। राजनीति में सक्रिय रहते हुए भी उन्होंने पढ़ाई को जारी रखा।</p><p>जब वह पार्षद थे, तब उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई पूरी की। पहली बार चमकौर साहिब से विधायक चुने जाने के बाद भी उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी से MBA किया।</p><p>2016 में जब वह कांग्रेस विधायक दल के नेता थे, तब उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस में MA किया। अब वह पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में भी उच्च शिक्षा हासिल कर रहे हैं।</p><h5 class=""><b>2017 में भी परीक्षा को दी थी प्राथमिकता</b></h5><p>चन्नी की पढ़ाई को लेकर कांग्रेस में एक पुराना उदाहरण भी चर्चा में आता है। 2017 में भी उन्हें MA की परीक्षा देनी थी। उस समय उनके पढ़ाई के प्रति समर्पण से राहुल गांधी प्रभावित हुए थे।</p><p>बताया जाता है कि चन्नी परीक्षा देने के लिए दिल्ली से चंडीगढ़ गए थे। परीक्षा पूरी करने के बाद वह कांग्रेस की एक महत्वपूर्ण बैठक में शामिल होने के लिए वापस दिल्ली पहुंचे थे। इस दौरान राहुल गांधी ने उन्हें अपने चुनावी विमान की सुविधा दी थी।</p><p>इस पुराने घटनाक्रम का जिक्र इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मौजूदा समय में भी चन्नी की राजनीतिक बैठक से गैरमौजूदगी की वजह उनकी परीक्षा ही बताई जा रही है।</p><h5 class=""><b>लेकिन पंजाब कांग्रेस में चल रही है अलग सियासी कहानी</b></h5><p>चन्नी की परीक्षा वाली वजह के बावजूद पंजाब कांग्रेस के भीतर चल रही राजनीतिक गतिविधियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पार्टी में संगठन और नेतृत्व को लेकर असंतोष की खबरें लगातार सामने आ रही हैं।</p><p><b>चरणजीत सिंह चन्नी </b>और उनके करीबी नेताओं तथा समर्थकों की ओर से कांग्रेस नेतृत्व पर दबाव बनाए जाने की चर्चा है। उनकी मांग बताई जा रही है कि <b>अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग</b> को पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष के पद से हटाया जाए।</p><p>इसके साथ ही चन्नी को पंजाब में कांग्रेस के मुख्यमंत्री चेहरे के तौर पर घोषित करने की मांग भी उनके समर्थकों की ओर से उठाई गई है।</p><p><b>पंजाब कांग्रेस </b>के प्रभारी <b>भूपेश बघेल</b> जब राज्य के दौरे पर पहुंचे थे, तब चन्नी समर्थकों ने उनके सामने भी इन मांगों को जोर-शोर से रखा था। इससे साफ है कि पंजाब कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर सवाल सिर्फ संगठनात्मक स्तर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पार्टी के अगले चुनावी चेहरे को लेकर भी चर्चा चल रही है।</p><h5 class=""><b>राहुल गांधी के संभावित पंजाब दौरे पर भी नजर</b></h5><p>इस बीच ऐसी खबरें भी हैं कि राहुल गांधी जल्द ही पंजाब का एक दिन का दौरा कर सकते हैं। संभावित दौरे के दौरान वह पंजाब कांग्रेस के नेताओं से बातचीत कर सकते हैं और पार्टी के भीतर चल रहे असंतोष को समझने की कोशिश कर सकते हैं।</p><p>ऐसे में राहुल गांधी की पंजाब यात्रा को पार्टी के लिए महत्वपूर्ण माना जा सकता है। अगर नेतृत्व राज्य में संगठनात्मक गुटबाजी को खत्म करने की कोशिश करता है तो चन्नी समेत दूसरे नेताओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी।</p><h5 class=""><b>राहुल गांधी के कार्यक्रमों से चन्नी की दूरी पर भी चर्चा</b></h5><p>CWC बैठक से चन्नी की गैरमौजूदगी के साथ एक और तथ्य चर्चा में रहा। पिछले कुछ हफ्तों में यह दूसरी बार है जब वह ऐसे कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए, जिसमें राहुल गांधी मौजूद थे।</p><p>29 जुलाई को लोकसभा में राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर हमला बोला था। उस दौरान भी चन्नी सदन में मौजूद नहीं थे। वह पंजाब के फरीदकोट में कांग्रेस की एक बैठक में शामिल होने के लिए राज्य में ही रुके थे।</p><p>हालांकि, दोनों मौकों पर चन्नी की अनुपस्थिति की अलग वजह बताई गई है। मौजूदा मामले में उन्होंने परीक्षा को कारण बताया है। इसलिए सिर्फ इन घटनाओं के आधार पर किसी राजनीतिक मतभेद का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।</p><h5 class=""><b>CWC में पंजाब से दूसरे नेता रहे मौजूद</b></h5><p>चन्नी की गैरमौजूदगी के बीच पंजाब कांग्रेस के सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा और राज्य सरकार के पूर्व मंत्री विजय इंदर सिंगला CWC बैठक में शामिल हुए।</p><p>बैठक में देश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर चर्चा हुई। इसके अलावा छात्रों से जुड़े मुद्दों और राम मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी के मामले को लेकर केंद्र सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति पर भी बातचीत हुई।</p><p>जब सुखजिंदर सिंह रंधावा से पूछा गया कि चन्नी ने CWC बैठक की जगह MA की परीक्षा को क्यों चुना, तो उन्होंने चन्नी को शुभकामनाएं दीं और कहा कि वह डॉक्टर बनने जा रहे हैं।</p><h5 class=""><b>मुख्यमंत्री बनना या कुलपति?</b></h5><p>चन्नी की शिक्षा को लेकर कांग्रेस के भीतर हल्के-फुल्के अंदाज में भी चर्चा होती रही है। पार्टी के एक नेता ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर कहा कि चन्नी अपनी डिग्रियों और रिजल्ट को लेकर काफी उत्साहित रहते हैं।</p><p>नेता के मुताबिक, पार्टी में कभी-कभी मजाक में यह सवाल भी किया जाता है कि चन्नी पंजाब के मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं या किसी विश्वविद्यालय के कुलपति।</p><p>यह टिप्पणी चन्नी के राजनीतिक और शैक्षणिक दोनों पक्षों को सामने लाती है। एक ओर वह पंजाब की राजनीति में सक्रिय हैं और मुख्यमंत्री की भूमिका निभा चुके हैं, वहीं दूसरी ओर वह लगातार अपनी शिक्षा को आगे बढ़ाने में भी जुटे हैं।</p><p>फिलहाल CWC बैठक से उनकी गैरमौजूदगी की वजह चन्नी ने स्पष्ट कर दी है। लेकिन पंजाब कांग्रेस में राजा वड़िंग को लेकर असंतोष, चन्नी को मुख्यमंत्री चेहरे के तौर पर आगे बढ़ाने की मांग और राहुल गांधी के संभावित पंजाब दौरे ने इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक रूप से अहम बना दिया है।</p><p>अब नजर इस बात पर रहेगी कि कांग्रेस नेतृत्व पंजाब में संगठनात्मक विवाद को किस तरह सुलझाता है और आने वाले समय में चन्नी की पार्टी के भीतर भूमिका क्या रहती है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ CWC की बैठक से चन्नी क्यों रहे गैरहाजिर? परीक्षा, पंजाब कांग्रेस की गुटबाजी और CM फेस की मांग से जुड़ी पूरी कहानी ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-bandh-august-21-2026-5937 ]]></guid><title><![CDATA[ 21 अगस्त को पंजाब बंद का आह्वान, लुधियाना में मिला-जुला समर्थन; बसें रहेंगी बंद, जानें क्या खुलेगा और क्या रहेगा बंद... ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-bandh-august-21-2026-5937 ]]></link><pubDate><![CDATA[Thu, 20 Aug 2026 13:05:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ चंडीगढ़, लुधियाना: कौमी इंसाफ मोर्चा (Qaumi Insaaf Morcha) ने सिख बंदियों की रिहाई समेत विभिन्न मांगों को लेकर 21 अगस्त को पंजाब बंद का आह्वान किया है। बंद को लेकर राज्य में राजनीतिक और सामाजिक संगठनो ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>चंडीगढ़, लुधियाना: </b>कौमी इंसाफ मोर्चा<b> (Qaumi Insaaf Morcha)</b> ने सिख बंदियों की रिहाई समेत विभिन्न मांगों को लेकर 21 अगस्त को पंजाब बंद का आह्वान किया है। बंद को लेकर राज्य में राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रिया अलग-अलग है। लुधियाना में शिरोमणि अकाली दल (SAD) और वारिस पंजाब दे ने बंद का समर्थन किया है, जबकि कांग्रेस ने राज्य नेतृत्व के फैसले का इंतजार करने की बात कही है।</span></p><p><span style="font-size: 1rem;">मोर्चा से जुड़े संगठनों के अनुसार, 21 अगस्त को सुबह 7 बजे से दोपहर 2 बजे तक बंद का आह्वान किया गया है। समर्थकों ने बाजार और सार्वजनिक परिवहन बंद रखने तथा सड़क यातायात प्रभावित करने की बात कही है। हालांकि, अलग-अलग इलाकों में बंद का असर स्थानीय स्तर पर अलग हो सकता है।</span></p><h5 class=""><b>लुधियाना में करीब 800 बसें नहीं चलेंगी</b></h5><p>लुधियाना में बस ऑपरेटरों ने बंद को समर्थन देने का ऐलान किया है। स्मॉल स्केल डिस्ट्रिक्ट बस ऑपरेटर वेलफेयर एसोसिएशन के पंजाब महासचिव जसविंदर सिंह ग्रेवाल के मुताबिक, 21 अगस्त को सुबह 7 बजे से दोपहर 2 बजे तक करीब 800 बसें सड़कों पर नहीं चलेंगी। इससे यात्रियों को सार्वजनिक परिवहन के स्तर पर परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।</p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;VIDEO | Mohali, Punjab: Qaumi Insaaf Morcha calls for a bandh on August 21 from 7 am to 2 pm; markets, roads, railway services and schools to remain closed. &lt;a href="https://t.co/U0RJ8OOjLw"&gt;pic.twitter.com/U0RJ8OOjLw&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Press Trust of India (@PTI_News) &lt;a href="https://x.com/PTI_News/status/2090037833566495157?ref_src=twsrc^tfw"&gt;August 19, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><h5 class=""><b>SAD और वारिस पंजाब दे ने किया समर्थन</b></h5><p>वारिस पंजाब दे के मनप्रीत सिंह अयाली ने बंद को समर्थन देते हुए इसे जायज मांग बताया। वहीं, वरिष्ठ अकाली नेता महेशिंदर सिंह ग्रेवाल ने भी बंद के समर्थन की बात कही और केंद्र सरकार से लंबे समय से जेल में बंद सिख कैदियों के मामलों पर निर्णय लेने की मांग की।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">दूसरी ओर, लुधियाना जिला कांग्रेस अध्यक्ष संजय तलवार ने कहा कि वह फिलहाल बंद का समर्थन या विरोध करने की स्थिति में नहीं हैं, क्योंकि इस संबंध में फैसला राज्य स्तर पर लिया जाना है। जम्हूरी किसान सभा पंजाब ने भी न तो बंद का समर्थन किया है और न ही विरोध।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="pa" dir="ltr"&gt;ਕੌਮੀ ਇਨਸਾਫ ਮੋਰਚੇ ਵੱਲੋਂ ਕੀਤੇ ਜਾ ਰਹੇ 21 ਅਗਸਤ ਦੇ ਪੰਜਾਬ ਬੰਦ ਦਾ ਸਮਰਥਨ ਕਰਦੇ ਹਾਂ - ਅਕਾਲੀ ਦਲ ਪੁਨਰ ਸੁਰਜੀਤ।&lt;br&gt;&lt;br&gt;ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ-: 19 ਅਗਸਤ () ਸ਼੍ਰੋਮਣੀ ਅਕਾਲੀ ਦਲ ਪੁਨਰ-ਸੁਰਜੀਤ ਦੇ ਸਕੱਤਰ ਜਨਰਲ ਸ ਗੁਰਪ੍ਰਤਾਪ ਸਿੰਘ ਵਡਾਲਾ, ਸੀਨੀਅਰ ਮੀਤ ਪ੍ਰਧਾਨ ਸ ਸੁੱਚਾ ਸਿੰਘ ਛੋਟੇਪੁਰ, ਸ ਪ੍ਰੇਮ ਸਿੰਘ ਚੰਦੂਮਾਜਰਾ ਅਤੇ ਯੂਥ ਵਿੰਗ ਦੇ ਪ੍ਰਧਾਨ ਸ… &lt;a href="https://t.co/hZTrxPigio"&gt;pic.twitter.com/hZTrxPigio&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Shiromani Akali Dal (ਪੁਨਰ ਸੁਰਜੀਤ) (@Akalidal_PS) &lt;a href="https://x.com/Akalidal_PS/status/2090067443754639612?ref_src=twsrc^tfw"&gt;August 19, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><h5 class=""><b>क्यों बुलाया गया है पंजाब बंद?</b></h5><p>कौमी इंसाफ मोर्चा और उससे जुड़े संगठनों का कहना है कि कई सिख कैदी अपनी सजा पूरी करने के बावजूद जेलों में बंद हैं। मोर्चा ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई और दर्ज किए गए मामलों का भी विरोध किया है। संगठन इन मुद्दों को लेकर सरकार पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">हाल के दिनों में कौमी इंसाफ मोर्चा के प्रदर्शन के दौरान चंडीगढ़-मोहाली सीमा पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव भी देखने को मिला था। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने आंसू गैस और पानी की बौछार का इस्तेमाल किया था।</span></p><h5 class=""><b>क्या खुलेगा और क्या रहेगा बंद?</b></h5><p class="grey-bg-red"><b><i>बंद के दौरान बाजार, दुकानें और सार्वजनिक परिवहन प्रभावित रहने की संभावना है। स्कूल-कॉलेजों पर भी असर पड़ सकता है। मोर्चा समर्थकों ने सड़क यातायात रोकने की बात कही है, इसलिए 21 अगस्त को यात्रा करने वालों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">वहीं, अस्पताल और मेडिकल स्टोर खुले रहने की बात कही गई है। एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों, परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों और शादी समारोहों में शामिल होने वाले लोगों को यात्रा की अनुमति देने की बात भी सामने आई है।</span></i></b></p><h5 class=""><b>SGPC ने भी बंद का समर्थन किया</b></h5><p>शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (SGPC) ने भी 21 अगस्त के पंजाब बंद के आह्वान का समर्थन किया है। इसके चलते बंद को लेकर राज्य में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">21 अगस्त को पंजाब में यात्रा करने वाले लोग घर से निकलने से पहले स्थानीय परिवहन और बाजारों की स्थिति की जानकारी जरूर लें। बस सेवाएं प्रभावित होने की स्थिति में वैकल्पिक परिवहन की व्यवस्था रखें। परीक्षा, अस्पताल, एयरपोर्ट या अन्य जरूरी काम से निकलने वाले लोगों को अतिरिक्त समय लेकर चलना बेहतर रहेगा।</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ 21 अगस्त को पंजाब बंद का आह्वान, लुधियाना में मिला-जुला समर्थन; बसें रहेंगी बंद, जानें क्या खुलेगा और क्या रहेगा बंद... ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/prakash-singh-badal-story-government-job-to-five-time-punjab-cm-5927 ]]></guid><title><![CDATA[ Explained: सरकारी नौकरी से पंजाब के मुख्यमंत्री तक: प्रकाश सिंह बादल की वो कहानी, जिसने बदल दी पंजाब की राजनीति ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/prakash-singh-badal-story-government-job-to-five-time-punjab-cm-5927 ]]></link><pubDate><![CDATA[Wed, 19 Aug 2026 17:11:15 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ पंजाब की राजनीति में प्रकाश सिंह बादल का नाम एक ऐसे नेता के तौर पर दर्ज है, जिन्होंने करीब सात दशक तक राज्य की सियासत को प्रभावित किया। पांच बार पंजाब के मुख्यमंत्री रहे बादल ने राजनीति की शुरुआत गांव ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>पंजाब </b>की राजनीति में <b>प्रकाश सिंह बादल</b> का नाम एक ऐसे नेता के तौर पर दर्ज है, जिन्होंने करीब सात दशक तक राज्य की सियासत को प्रभावित किया। पांच बार पंजाब के मुख्यमंत्री रहे बादल ने राजनीति की शुरुआत गांव की राजनीति से की थी। दिलचस्प बात यह है कि राजनीति में आने से पहले वह सरकारी नौकरी करना चाहते थे और उन्हें तहसीलदार की नौकरी भी मिली थी। लेकिन एक रिश्तेदार ने उनका नियुक्ति पत्र फाड़ दिया और उनसे कहा कि उन्हें ऐसा व्यक्ति बनना चाहिए जो दूसरों को नौकरी दे।</p><p>इसके बाद बादल ने राजनीति को अपना रास्ता बनाया। 1947 में महज 20 साल की उम्र में सरपंच बनने से शुरू हुआ उनका सफर विधानसभा, केंद्र सरकार में मंत्री पद और पंजाब के मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचा। उनका राजनीतिक जीवन उपलब्धियों, जनसंपर्क, किसान राजनीति, गठबंधन की रणनीति और कई विवादों से भरा रहा।</p><h5 class=""><b>20 साल की उम्र में बने सरपंच</b></h5><p>प्रकाश सिंह बादल का राजनीतिक सफर भारत की आजादी के साथ ही शुरू हो गया था। 1947 में वह सिर्फ 20 साल के थे, जब उन्हें गांव का सरपंच चुना गया। इसके बाद उन्होंने स्थानीय राजनीति से आगे बढ़ते हुए पंजाब की विधानसभा में जगह बनाई।</p><p>सिर्फ 25 साल की उम्र में विधायक बनने के बाद उनकी पहचान तेजी से मजबूत हुई। आगे चलकर वह पंजाब के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल हुए और पांच अलग-अलग मौकों पर राज्य के मुख्यमंत्री बने।</p><p>उनकी राजनीति का एक महत्वपूर्ण आधार आम लोगों से सीधा संपर्क रहा। वह सत्ता में रहते हुए भी गांवों और कस्बों में जाकर लोगों से मिलते थे और उनकी समस्याएं सुनते थे।</p><h5 class=""><b>सरकारी नौकरी छोड़कर क्यों चुनी राजनीति?</b></h5><p>प्रकाश सिंह बादल की जिंदगी का एक दिलचस्प किस्सा उनकी सरकारी नौकरी से जुड़ा है। राजनीति में आने से पहले वह तहसीलदार की नौकरी करना चाहते थे और उन्हें नियुक्ति भी मिल गई थी।</p><p>लेकिन उनके एक रिश्तेदार, जो खुद मंत्री थे, ने उनका नियुक्ति पत्र फाड़ दिया। उन्होंने बादल से कहा कि उन्हें ऐसी भूमिका चुननी चाहिए जिसमें वह दूसरों को रोजगार और अवसर देने की स्थिति में हों।</p><p>इसके बाद बादल ने नौकरी के बजाय सार्वजनिक जीवन का रास्ता चुना। यही फैसला आगे चलकर उन्हें पंजाब की सत्ता के सबसे ऊंचे पद तक ले गया।</p><h5 class=""><b>जनता के बीच रहने को बनाया राजनीति का आधार</b></h5><p>प्रकाश सिंह बादल की राजनीतिक शैली का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा उनका जनसंपर्क था। उन्होंने ‘संगत दर्शन’ जैसे कार्यक्रमों के जरिए लोगों के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुनीं।</p><p>वह राज्य के अलग-अलग इलाकों में लगातार दौरे करते थे। कई बार लंबी दूरी तय करके सुबह-सुबह दूरदराज के गांवों में पहुंच जाते और स्थानीय लोगों से बातचीत करते थे।</p><p>उनकी कार्यशैली में अधिकारियों से सीधे जवाब मांगना भी शामिल था। अखबारों में किसी गांव, सड़क, किसान या आम नागरिक की समस्या सामने आने पर वह संबंधित अधिकारियों से उस पर कार्रवाई करने को कहते थे।</p><p>राज्य का दौरा करते समय वह हमेशा बड़े होटलों या सरकारी गेस्ट हाउसों पर निर्भर रहने के बजाय पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों के साथ रहना पसंद करते थे। यही वजह थी कि ग्रामीण पंजाब में उनकी मजबूत पकड़ बनी रही।</p><h5 class=""><b>हिंदू-सिख भाईचारे और ‘पंजाबियत’ पर जोर</b></h5><p>प्रकाश सिंह बादल की राजनीति में पंजाब की सामाजिक एकता एक महत्वपूर्ण विषय रही। वह हिंदू-सिख रिश्ते को बेहद मजबूत मानते थे और इसे नाखून और मांस के रिश्ते जैसा बताते थे।</p><p>1996 में मोगा में अकाली दल के चुनावी घोषणा पत्र के दौरान उन्होंने ‘<b>पंजाब, पंजाबी और पंजाबियत</b>’ का नारा दिया। इसके बाद अकाली दल की राजनीति को व्यापक पंजाबी पहचान से जोड़ने की कोशिश हुई।</p><p>इसी रणनीति के तहत पार्टी ने कई हिंदू नेताओं को भी चुनावी राजनीति में आगे बढ़ाया। बाद में अकाली दल और भाजपा के बीच मजबूत राजनीतिक गठबंधन बना, जिसने लंबे समय तक पंजाब की सत्ता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।</p><h5 class=""><b>मोरारजी देसाई सरकार में भी रहे मंत्री</b></h5><p>प्रकाश सिंह बादल की राजनीति सिर्फ पंजाब तक सीमित नहीं रही। 1977 में वह मोरारजी देसाई के नेतृत्व वाली जनता पार्टी सरकार में मंत्री बने।</p><p>1997 में अकाली दल और भाजपा के बीच गठबंधन ने पंजाब की राजनीति में नया अध्याय शुरू किया। दोनों दल करीब ढाई दशक तक सहयोगी रहे। 2007 और 2012 के विधानसभा चुनावों में गठबंधन ने लगातार दो बार सरकार बनाई और प्रकाश सिंह बादल मुख्यमंत्री बने।</p><p>यह दौर उनके राजनीतिक जीवन के सबसे मजबूत चरणों में गिना जाता है।</p><p>हालांकि, 2021 में कृषि कानूनों के मुद्दे पर अकाली दल और भाजपा का लंबा गठबंधन टूट गया। इसके बाद पंजाब की राजनीति में दोनों दल अलग-अलग रास्तों पर चले गए।</p><h5 class=""><b>किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर फोकस</b></h5><p>प्रकाश सिंह बादल की राजनीति का बड़ा हिस्सा ग्रामीण पंजाब और किसानों के आसपास रहा। उनके कार्यकाल में किसानों के लिए मुफ्त बिजली और पानी जैसी योजनाओं को प्रमुखता मिली।</p><p>इसके अलावा कमजोर और गरीब वर्गों के लिए मुफ्त आटा-दाल तथा लड़कियों के लिए शगुन जैसी योजनाएं भी शुरू की गईं।</p><p>इन योजनाओं ने ग्रामीण और कमजोर तबकों के बीच अकाली दल के आधार को मजबूत करने में भूमिका निभाई। बादल खुद भी खेती में गहरी दिलचस्पी रखते थे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पंजाब की राजनीति का महत्वपूर्ण आधार मानते थे।</p><h5 class=""><b>बादल परिवार की राजनीति का दौर</b></h5><p>प्रकाश सिंह बादल ने अपने बेटे सुखबीर सिंह बादल को पंजाब की राजनीति में आगे बढ़ाया और उन्हें अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी बनाया।</p><p>समय के साथ बादल परिवार के कई सदस्य पंजाब और केंद्र की राजनीति में महत्वपूर्ण पदों पर पहुंचे। सुखबीर सिंह बादल उपमुख्यमंत्री रहे, जबकि हरसिमरत कौर बादल केंद्र सरकार में मंत्री बनीं। परिवार के अन्य सदस्यों ने भी पंजाब की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं।</p><p>इससे अकाली दल के भीतर परिवारवाद को लेकर आलोचना भी हुई। जो पार्टी कभी मजबूत कार्यकर्ता आधारित संगठन के तौर पर जानी जाती थी, उस पर बाद के वर्षों में बादल परिवार के इर्द-गिर्द केंद्रित होने के आरोप लगने लगे।</p><h5 class=""><b>बेअदबी और कोटकापुरा फायरिंग ने बढ़ाई मुश्किलें</b></h5><p>प्रकाश सिंह बादल के राजनीतिक जीवन का सबसे विवादित दौर 2015 की गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की घटनाओं के बाद आया।</p><p>बेअदबी की घटनाओं के बाद पंजाब में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। पुलिस फायरिंग में दो लोगों की मौत ने स्थिति को और गंभीर बना दिया। विपक्षी दलों ने इन घटनाओं को लेकर तत्कालीन बादल सरकार पर तीखे सवाल उठाए।</p><p>बाद में कोटकापुरा फायरिंग मामले को लेकर भी प्रकाश सिंह बादल पर कार्रवाई हुई। मार्च 2023 में उन्हें मामले में आरोपी बनाया गया था।</p><p>अपने जीवन के अंतिम दौर में बादल ने पंजाबियों के नाम एक खुला पत्र लिखा था। उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि उन्होंने हर धर्म और आस्था का सम्मान करने और पंजाब में शांति तथा सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने की कोशिश की।</p><p>उन्होंने अपने जीवन को ‘<b>खुली किताब’</b> बताया था।</p><h5 class=""><b>94 साल की उम्र में लड़ा आखिरी चुनाव</b></h5><p>प्रकाश सिंह बादल की राजनीतिक सक्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने 2022 में 94 साल की उम्र में विधानसभा चुनाव लड़ा।</p><p>इस चुनाव के साथ उन्होंने भारतीय चुनावी राजनीति में उम्र से जुड़ा एक अलग रिकॉर्ड भी बनाया। हालांकि, उन्हें अपने राजनीतिक जीवन के आखिरी चुनाव में हार का सामना करना पड़ा।</p><p>लेकिन हार के बाद भी उनका व्यवहार चर्चा में रहा। उन्होंने चुनावी नतीजे को विनम्रता से स्वीकार किया और हाथ जोड़कर लोगों का अभिवादन किया।</p><h5 class=""><b>सादगी के लिए भी याद किए गए</b></h5><p>करीब 19 साल तक पंजाब के मुख्यमंत्री रहने के बावजूद प्रकाश सिंह बादल की व्यक्तिगत जीवनशैली काफी सादगी भरी रही। बताया जाता है कि वह हाथ में घड़ी नहीं पहनते थे और अपनी जेब में पेन भी नहीं रखते थे। इसके बावजूद समय की पाबंदी उनकी खासियत थी।</p><p>उनकी राजनीतिक शैली आक्रामक भाषणों के बजाय लोगों से मिलने, संगठन को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर संपर्क बनाए रखने पर आधारित रही।</p><p>वह जूनियर और सीनियर अधिकारियों के साथ भी सहज तरीके से बातचीत करते थे। यही सहजता उन्हें आम लोगों के बीच एक अलग पहचान देती थी।</p><h5 class=""><b>पांच बार मुख्यमंत्री बनने की कहानी</b></h5><p>प्रकाश सिंह बादल का राजनीतिक सफर एक ऐसे युवक से शुरू हुआ, जो सरकारी नौकरी करना चाहता था, लेकिन परिस्थितियों ने उसे राजनीति की ओर मोड़ दिया। 20 साल की उम्र में सरपंच बनने के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।</p><p>विधायक से लेकर केंद्र में मंत्री और फिर पांच बार पंजाब के मुख्यमंत्री बनने तक उन्होंने राज्य की राजनीति में लंबी पारी खेली।</p><p>उनके राजनीतिक जीवन में किसान कल्याण और पंजाबियत की राजनीति जैसी उपलब्धियां रहीं, तो बेअदबी, पुलिस फायरिंग और परिवारवाद जैसे विवाद भी जुड़े।</p><p>फिर भी पंजाब की राजनीति में उनका प्रभाव कई दशकों तक बना रहा। उनकी सबसे बड़ी ताकत आम लोगों के बीच उनकी मौजूदगी और ग्रामीण पंजाब से उनका सीधा जुड़ाव रहा।</p><p><b>प्रकाश सिंह बादल</b> की विरासत इसलिए सिर्फ उनके मुख्यमंत्री पदों या चुनावी जीतों तक सीमित नहीं है। वह उस दौर के राजनेता थे जिन्होंने गांव की राजनीति से शुरुआत कर पंजाब की सत्ता के शीर्ष तक पहुंचने का सफर तय किया और दशकों तक राज्य की सियासत के केंद्र में बने रहे।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ Explained: सरकारी नौकरी से पंजाब के मुख्यमंत्री तक: प्रकाश सिंह बादल की वो कहानी, जिसने बदल दी पंजाब की राजनीति ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/bijendra-singh-nara-bbmb-independence-day-water-conservation-5883 ]]></guid><title><![CDATA[ 80वें स्वतंत्रता दिवस पर बीबीएमबी के मुख्य अभियंता बिजेंद्र सिंह नारा का राष्ट्र निर्माण और जल-संरक्षण पर जोर ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/bijendra-singh-nara-bbmb-independence-day-water-conservation-5883 ]]></link><pubDate><![CDATA[Sat, 15 Aug 2026 16:46:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ सुंदरनगर,चंडीगढ़: 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सुंदरनगर में आयोजित समारोह में भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) के मुख्य अभियंता, बीएसएल परियोजना सुंदरनगर एवं सदस्य (सिंचाई) बिजेंद्र सिंह नारा ने  ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>सुंदरनगर,चंडीगढ़:</b></span><span style="font-size: 1rem;"> 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सुंदरनगर में आयोजित समारोह में भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) के मुख्य अभियंता, बीएसएल परियोजना सुंदरनगर एवं सदस्य (सिंचाई) बिजेंद्र सिंह नारा ने ध्वजारोहण कर अधिकारियों, कर्मचारियों, युवाओं, बच्चों और क्षेत्रवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने राष्ट्र निर्माण के साथ जल संसाधनों के संरक्षण और कुशल उपयोग को देश के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया।</span></p><p><span style="font-size: 1rem;">अपने संबोधन की शुरुआत में उन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए की। </span><span style="font-size: 1rem;">उन्होंने महात्मा गांधी, भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, चंद्रशेखर आजाद, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, रानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे, राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान, खुदीराम बोस और लाला लाजपत राय सहित देश के अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों को नमन किया। </span><span style="font-size: 1rem;">उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता असंख्य वीर-वीरांगनाओं के त्याग और बलिदान से मिली है और उनके सपनों के भारत का निर्माण करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।</span></p><h5 class=""><b>स्वतंत्रता दिवस अधिकारों के साथ कर्तव्यों का भी अवसर</b></h5><p><span style="font-size: 1rem;">मुख्य अभियंता</span> नारा ने कहा कि 15 अगस्त केवल राष्ट्रीय पर्व नहीं है, बल्कि अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों के प्रति संकल्प लेने का अवसर भी है। <span style="font-size: 1rem;">उन्होंने नागरिकों से अनुशासन, निष्ठा, स्वच्छता और प्रकृति संरक्षण जैसे छोटे-छोटे प्रयासों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। </span><span style="font-size: 1rem;">उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय विद्युत एवं आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल के मार्गदर्शन में राष्ट्र निर्माण को नई गति मिली है। </span><span style="font-size: 1rem;">उन्होंने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) को राष्ट्र निर्माण की महत्वपूर्ण मिसाल बताते हुए कहा कि भाखड़ा-ब्यास प्रणाली देश की जल सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और कृषि विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।</span></p><p><img src="https://media.gtcbharat.com/wp-content/uploads/2026/08/WhatsApp-Image-2026-08-15-at-41754-PM_7c2b34e157869d1132271369c2aa5de3_1280X853.webp" style="width: 910.383px;"><span style="font-size: 1rem;"><br></span></p><h5 class=""><b>बीएसएल परियोजना से सिंचाई, पेयजल और ऊर्जा को मजबूती</b></h5><p><span style="font-size: 1rem;">मुख्य अभियंता </span><span style="font-size: 1rem;">बिजेंद्र सिंह नारा ने</span><span style="font-size: 1rem;"> कहा कि बीएसएल परियोजना, सुंदरनगर व्यास नदी के जल को सतलुज प्रणाली से जोड़कर सिंचाई, पेयजल और जलविद्युत उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। </span><span style="font-size: 1rem;">पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के लाखों किसानों तक पानी पहुंचाने तथा देश की ऊर्जा आवश्यकताओं में योगदान देना बीबीएमबी की महत्वपूर्ण राष्ट्रसेवा है।</span></p><p><span style="font-size: 1rem;">उन्होंने जल संसाधनों के कुशल प्रबंधन, सिल्ट प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल पर विशेष जोर दिया। इसके आगे </span><span style="font-size: 1rem;">उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में बीबीएमबी का लक्ष्य जल का अधिकतम और कुशल उपयोग, स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन बढ़ाना तथा भागीदार राज्यों की आवश्यकताओं को समय पर पूरा करना होना चाहिए। </span><span style="font-size: 1rem;">उन्होंने बीबीएमबी के अध्यक्ष इंजी. मनोज त्रिपाठी के नेतृत्व में बोर्ड द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की और कहा कि बीबीएमबी परिवार जल संसाधन प्रबंधन, ऊर्जा उत्पादन, पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक तकनीक के माध्यम से देश की सेवा में लगातार योगदान दे रहा है।</span></p><h5 class=""><b>कर्मचारियों की मेहनत और टीम भावना की सराहना</b></h5><p>मुख्य अभियंता ने बीबीएमबी के अधिकारियों और कर्मचारियों की मेहनत, तकनीकी दक्षता और समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं का सफल संचालन कर्मचारियों की प्रतिबद्धता और टीम भावना का परिणाम है। <span style="font-size: 1rem;">उन्होंने जल संसाधनों के संरक्षण और परियोजनाओं के बेहतर संचालन के लिए निरंतर तकनीकी सुधार की आवश्यकता पर भी जोर दिया।</span></p><p><span style="font-size: 1rem;">उन्होंने युवाओं को राष्ट्र निर्माण का कर्णधार बताते हुए कहा कि स्वतंत्रता को सुरक्षित और मजबूत बनाए रखना नई पीढ़ी की जिम्मेदारी है। </span><span style="font-size: 1rem;">उन्होंने युवाओं से ज्ञान, नवाचार और तकनीकी दक्षता के माध्यम से देश के विकास में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका निर्णायक होगी।</span></p><p><img src="https://media.gtcbharat.com/wp-content/uploads/2026/08/WhatsApp-Image-2026-08-15-at-41754-PM-1_12e4afbf43957f37cb8f03fb55c440f1_1280X853.webp" style="width: 910.383px;"><span style="font-size: 1rem;"><br></span></p><h5 class=""><b>जल, ऊर्जा और कृषि सुरक्षा को मजबूत करने का संकल्प</b></h5><p><span style="font-size: 1rem;">मुख्य अभियंता बिजेंद्र सिंह नारा ने</span> कहा कि बीबीएमबी की परियोजनाएं देश की जल, ऊर्जा और कृषि सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने में बोर्ड का योगदान आगे भी जारी रहेगा। <span style="font-size: 1rem;">अपने संबोधन के अंत में उन्होंने सभी से भारत को समृद्ध, सुरक्षित, स्वच्छ और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने में योगदान देने का संकल्प लेने का आह्वान किया। </span><span style="font-size: 1rem;">उन्होंने अधिकारियों, कर्मचारियों, युवाओं, बच्चों और क्षेत्रवासियों को 80वें स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए “वंदे मातरम्, जय हिंद और जय भारत” के साथ अपना संबोधन समाप्त किया।</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ 80वें स्वतंत्रता दिवस पर बीबीएमबी के मुख्य अभियंता बिजेंद्र सिंह नारा का राष्ट्र निर्माण और जल-संरक्षण पर जोर ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-politics-ambala-protest-aap-hindu-vote-congress-akali-dal-5872 ]]></guid><title><![CDATA[ अंबाला के बवाल से पंजाब की सियासत तक, हिंदू वोटों पर AAP की नजर; कांग्रेस में हलचल ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-politics-ambala-protest-aap-hindu-vote-congress-akali-dal-5872 ]]></link><pubDate><![CDATA[Fri, 14 Aug 2026 15:54:27 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ चंडीगढ़: पंजाब की सियासत में इस समय कई घटनाक्रम एक साथ चर्चा में हैं। एक तरफ आम आदमी पार्टी आगामी राजनीतिक चुनौतियों को देखते हुए हिंदू मतदाताओं तक अपनी पहुंच मजबूत करने की कोशिश करती नजर आ रही है, तो ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>चंडीगढ़:</b> पंजाब की सियासत में इस समय कई घटनाक्रम एक साथ चर्चा में हैं। एक तरफ <b>आम आदमी पार्टी</b> आगामी राजनीतिक चुनौतियों को देखते हुए हिंदू मतदाताओं तक अपनी पहुंच मजबूत करने की कोशिश करती नजर आ रही है, तो दूसरी तरफ <b>कांग्रेस</b> के सामने अंदरूनी गुटबाजी को संभालने की चुनौती बनी हुई है। वहीं, <b>शिरोमणि अकाली दल </b>के नेताओं का दूसरी राजनीतिक ताकतों की ओर जाना भी पार्टी के लिए चिंता का विषय बन रहा है।</p><p>इन सबके बीच हरियाणा के अंबाला में हुए सिख प्रदर्शन की घटना की गूंज पंजाब में भी सुनाई दे रही है। इसके अलावा नांदेड़ के एक गुरुद्वारे में <b>सुखबीर सिंह बादल</b> पर हुए हमले के बाद उनकी सुरक्षा और पंजाब के माहौल को लेकर <b>अकाली दल</b> की ओर से बयानबाजी जारी है।</p><h5 class=""><b>सुखबीर बादल पर हमले के बाद हरसिमरत ने पुलिसकर्मी को कहा धन्यवाद</b></h5><p><b>सुखबीर सिंह बादल</b> पर नांदेड़ में हुए हमले के दौरान उनकी सुरक्षा करने वाले महाराष्ट्र पुलिस के इंस्पेक्टर संतोष वैजनाथ की अकाली दल नेता <b>हरसिमरत कौर बादल</b> ने सराहना की है।</p><p>हरसिमरत कौर ने सोशल मीडिया पोस्ट में पुलिस अधिकारी के साहस को याद करते हुए कहा कि उन्होंने हमलावर और सुखबीर बादल के बीच खड़े होकर उनकी सुरक्षा की। उन्होंने इसे ड्यूटी और साहस की मिसाल बताया तथा उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की।</p><p>अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद सुखबीर बादल ने भी इस घटना को लेकर कहा कि कुछ लोग पंजाब के हालात पर नियंत्रण करने और शांति भंग करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अकाली दल के अध्यक्ष के तौर पर वह पंजाब की शांति को प्रभावित नहीं होने देंगे।</p><p>&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;I salute Inspector Santosh Vaijnath Kendre of the Maharashtra Police’s Special Protection Unit for showing heroic courage in saving Sukhbir Singh Badal ji’s life during the attack in Nanded.&lt;br&gt;&lt;br&gt;Santosh, you stood like a human shield between Sukhbir ji and the attacker, putting your… &lt;a href="https://t.co/LGSinoyJz8"&gt;pic.twitter.com/LGSinoyJz8&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Harsimrat Kaur Badal (@HarsimratBadal_) &lt;a href="https://x.com/HarsimratBadal_/status/2088116765700338110?ref_src=twsrc^tfw"&gt;August 14, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;&nbsp;</p><h5 class=""><b>अंबाला के प्रदर्शन की पंजाब में क्यों हो रही चर्चा?</b></h5><p>हरियाणा के अंबाला में <b>पंजोखरा साहिब गुरुद्वारे</b> से जुड़े विवाद के बाद प्रदर्शन ने बड़ा रूप ले लिया। प्रदर्शनकारियों की मांग गिरफ्तार किए गए दो लोगों की रिहाई से जुड़ी थी।</p><p>प्रदर्शन के दौरान दिल्ली-अमृतसर नेशनल हाईवे पर बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। इससे यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ और करीब 20 किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतार लग गई। कई घंटे तक यात्री जाम में फंसे रहे।</p><p>स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हुआ। पुलिस के मुताबिक, पथराव और धारदार हथियारों से हमले की घटनाएं हुईं। जवाब में पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया और हल्का बल प्रयोग किया।</p><p>घटना में डीएसपी वीरेंद्र शर्मा समेत छह पुलिसकर्मियों के घायल होने की बात सामने आई। डीएसपी पर धारदार हथियार से हमला किए जाने की भी जानकारी दी गई। घटना हरियाणा में हुई, लेकिन पंजाब से जुड़े धार्मिक और राजनीतिक संदर्भों के कारण इसे पंजाब की सियासत में भी चर्चा का विषय माना जा रहा है।</p><h5 class=""><b>AAP का हिंदू वोटों पर फोकस कितना अहम?</b></h5><p>पंजाब में आम आदमी पार्टी की राजनीति का एक महत्वपूर्ण पहलू हिंदू मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करना भी माना जा रहा है। इसी क्रम में फगवाड़ा में भगवान शिव को समर्पित एक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें AAP के संयोजक अरविंद केजरीवाल भी शामिल हुए।</p><p>कार्यक्रम के दौरान केजरीवाल ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की तुलना आधुनिक युग के श्रवण कुमार से की। इस तरह के धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए पार्टी अलग-अलग सामाजिक समूहों तक अपनी राजनीतिक पहुंच बनाने का प्रयास कर रही है।</p><p>इसके साथ ही पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना भी चर्चा में है। योजना के तहत श्रद्धालुओं को अलग-अलग धार्मिक स्थलों की यात्रा कराई जा रही है। हाल में खाटू श्याम, सालासर बालाजी, मथुरा-वृंदावन और हरिद्वार-ऋषिकेश जैसे स्थानों को भी योजना में शामिल किया गया है।</p><p>ऐसे में सवाल यह है कि क्या AAP की यह रणनीति पंजाब के हिंदू मतदाताओं के बीच पार्टी की पकड़ को और मजबूत कर पाएगी। इसका वास्तविक असर चुनावी राजनीति में ही सामने आएगा।</p><h5 class=""><b>राहुल गांधी के दौरे से कांग्रेस को क्या उम्मीद?</b></h5><p>दूसरी तरफ पंजाब कांग्रेस अपने अंदर चल रही गुटबाजी से जूझ रही है। पार्टी में अलग-अलग नेताओं और गुटों के बीच मतभेद की खबरों के बीच राहुल गांधी के अगस्त के अंत में पंजाब दौरे की चर्चा है।</p><p>मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनके दौरे की तैयारी की जा रही है। कांग्रेस नेता चाहते हैं कि राहुल गांधी की मौजूदगी में पंजाब कांग्रेस एकजुट नजर आए। इसके लिए बस यात्रा जैसे कार्यक्रम की योजना पर भी चर्चा होने की बात सामने आई है।</p><p>पार्टी के लिए यह दौरा इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि लंबे समय से जारी अंदरूनी खींचतान का असर संगठन और चुनावी तैयारियों पर पड़ सकता है। राहुल गांधी का दौरा अगर होता है तो उनके सामने पार्टी नेताओं को एक मंच पर लाने और संगठन में बेहतर तालमेल बनाने की चुनौती होगी।</p><h5 class=""><b>अकाली दल को एक और झटका</b></h5><p>पंजाब की सियासत में एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम तब हुआ जब पूर्व विधायक इकबाल सिंह झुंदन ने अकाली दल (वारिस पंजाब दे) का दामन थाम लिया।</p><p>झुंदन शिरोमणि अकाली दल के टिकट पर दो बार विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। उन्होंने 2007 में धुरी और 2012 में अमरगढ़ विधानसभा सीट से जीत दर्ज की थी। कुछ समय पहले उन्होंने शिरोमणि अकाली दल से अलग होने का फैसला किया था।</p><p>अब वह अमृतपाल सिंह की पार्टी अकाली दल (वारिस पंजाब दे) में शामिल हो गए हैं। उनके शामिल होने के दौरान अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह भी मौजूद रहे।</p><p>झुंदन के इस कदम को पंजाब की बदलती सियासी तस्वीर में अहम घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है। एक तरफ AAP अपने सामाजिक आधार को विस्तार देने की कोशिश कर रही है, दूसरी तरफ कांग्रेस संगठनात्मक चुनौती से जूझ रही है और अकाली दल से नेताओं का दूसरी तरफ जाना उसके लिए नई चुनौती पैदा कर रहा है।</p><p>फिलहाल पंजाब की राजनीति में धार्मिक मुद्दों, वोट बैंक, पार्टी के अंदरूनी समीकरण और नए राजनीतिक गठजोड़ों को लेकर गतिविधियां तेज हैं। आने वाले महीनों में इन घटनाक्रमों का असर राज्य की चुनावी रणनीतियों पर कितना पड़ता है, यह देखने वाली बात होगी।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ अंबाला के बवाल से पंजाब की सियासत तक, हिंदू वोटों पर AAP की नजर; कांग्रेस में हलचल ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/delhi-high-court-on-gurbani-broadcast-on-gtc-punjabi-will-not-stop-5869 ]]></guid><title><![CDATA[ श्री हरमंदिर साहिब से गुरबानी प्रसारण रहेगा जारी...दिल्ली हाईकोर्ट का SGPC और PTC चैनल को स्टे देने से इनकार ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/delhi-high-court-on-gurbani-broadcast-on-gtc-punjabi-will-not-stop-5869 ]]></link><pubDate><![CDATA[Fri, 14 Aug 2026 12:24:54 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ पंजाब: दिल्ली हाईकोर्ट ने GTC पंजाबी पर गुरबानी प्रसारण पर रोक लगाने से&nbsp;दिल्ली हाईकोर्ट ने&nbsp;किया इनकार। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि GTC पंजाबी पर गुरबानी प्रसारण अपने समयानुसार जारी रहेगा। दर्शक ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>पंजाब:</b> दिल्ली हाईकोर्ट ने GTC पंजाबी पर गुरबानी प्रसारण पर रोक लगाने से&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">दिल्ली हाईकोर्ट ने</span><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;किया इनकार। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि GTC पंजाबी पर गुरबानी प्रसारण अपने समयानुसार जारी रहेगा। दर्शकों के लिए यह एक अहम जानकारी है।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">दिल्ली हाईकोर्ट ने स्टे देने से इनकार कर दिया है, जिसके कारण संगतों के लिए राहत भरी खबर है कि GTC पंजाबी (GTC Punjabi) पर गुरबानी का प्रसारण जारी रहेगा और यह रुकेगा नहीं।</span></p><p>प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिरोमणि कमेटी (SGPC) और PTC नेटवर्क की ओर से इस मामले को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। सुनवाई के दौरान GTC नेटवर्क की ओर से वरिष्ठ वकील पी.एस. पटवालिया और पवनजीत बिंद्रा अदालत में पेश हुए।&nbsp;अगली सुनवाई 23 सितंबर को: कोर्ट ने SGPC की याचिका पर नोटिस जारी किया है और दोनों पक्षों को जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया है।</p><h5 class=""><b>GTC पंजाबी पर गुरबाणी का प्रसारण निर्बाध जारी रहेगा—MD रबींद्र नारायण</b></h5><p>इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए GTC नेटवर्क के फाउंडर, मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) और प्रेसिडेंट रबींद्र नारायण जी ने बयान दिया कि "यह जजमेंट गुरु ने सुनाई है।" बता दें कि GTC पंजाबी की ओर से बीते 6 अगस्त से लगातार गुरबानी का प्रसारण किया जा रहा है और अदालत के इस फैसले से गुरबानी का प्रसारण निर्बाध जारी रहने का रास्ता साफ हो गया है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">बता दें कि GTC पंजाबी श्री हरमंदिर साहिब से आने वाली गुरबानी को DD Free Dish प्लेटफॉर्म के जरिए घर-घर तक पहुंचा रहा है, जहां यह पहले उपलब्ध नहीं थी। यह संगतों के लिए खुशी की खबर है।</span></p><p>&lt;iframe src="https://www.facebook.com/plugins/video.php?height=314&amp;href=https://www.facebook.com/reel/28195765940113783/&amp;show_text=true&amp;width=560&amp;t=0" width="560" height="429" style="border:none;overflow:hidden" scrolling="no" frameborder="0" allowfullscreen="true" allow="autoplay; clipboard-write; encrypted-media; picture-in-picture; web-share" allowFullScreen="true"&gt;&lt;/iframe&gt;</p><h5 class=""><b>तीन बड़ी बातें</b></h5><p><b>अंतरिम रोक से कोर्ट का इनकार:</b> दिल्ली हाई कोर्ट ने फिलहाल Galactic Television and Communications Pvt Ltd के खिलाफ Gurbani broadcast को लेकर कोई अस्थायी रोक नहीं लगाई। <span style="font-size: 1rem;">कानूनी दलीलों में प्रथम दृष्टया दम: कोर्ट ने कहा कि बिना शुल्क वाले प्रसारण और धार्मिक समारोह से जुड़े Copyright Act के प्रावधानों को लेकर चैनल की दलीलों में प्रथम दृष्टया मेरिट दिखाई देती है।</span></p><p>&lt;iframe width="560" height="315" src="https://www.youtube.com/embed/qoOoyQ_M9EQ?si=rmFdthw6f7ZMqjvo" title="YouTube video player" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture; web-share" referrerpolicy="strict-origin-when-cross-origin" allowfullscreen&gt;&lt;/iframe&gt;</p><h5 class=""><b>क्या है पूरी खबर ?</b></h5><p>श्री हरमंदिर साहिब, अमृतसर से होने वाले लाइव गुरबानी प्रसारण को लेकर चल रहे कॉपीराइट विवाद में<b> Galactic Television and Communications Pvt Ltd&nbsp;(GTC Network)</b> को दिल्ली हाई कोर्ट से फिलहाल राहत मिली है। हाई कोर्ट ने SGPC की ओर से दायर मुकदमे पर सुनवाई करते हुए चैनल को गुरबानी फीड के पुनः प्रसारण से रोकने वाला कोई अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार कर दिया।</p><p>मामले की सुनवाई जस्टिस अनूप जयराम भंभानी की अदालत में हुई। कोर्ट ने प्रारंभिक स्तर पर माना कि चैनल की ओर से पेश की गई कुछ कानूनी दलीलों में प्रथम दृष्टया दम है। खास तौर पर अदालत ने इस सवाल पर गौर किया कि जब प्रसारण दर्शकों को देखने के लिए किसी भुगतान से जुड़ा नहीं है, तो क्या SGPC जिस <b>Broadcast Reproduction Right</b> का दावा कर रही है, वह इस मामले में लागू होता है।</p><h5 class=""><b>SGPC की ओर से किए गए मुकदमे के बाद यह मामला सामने आया</b></h5><p>यह विवाद SGPC की ओर से दाखिल कॉपीराइट मुकदमे के बाद सामने आया। SGPC का आरोप है कि <b>GTC Network </b>और अन्य पक्ष बिना लाइसेंस के श्री हरमंदिर साहिब से आने वाली गुरबानी की लाइव फीड को अपने टीवी चैनल पर <b>deferred-live format </b>में प्रसारित कर रहे हैं।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">SGPC की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता चंदर एम. लाल ने अदालत में<b> Copyright Act, 1957 की Section 37</b> का हवाला देते हुए दलील दी कि <b>Broadcast Reproduction Right </b>एक स्वतंत्र अधिकार है। उनके मुताबिक यह अधिकार मूल साहित्यिक, संगीत, साउंड रिकॉर्डिंग या सिनेमैटोग्राफ फिल्म से जुड़े कॉपीराइट से अलग है।</span></p><p>SGPC ने यह भी तर्क दिया कि लाइव गुरबानी प्रसारण किसी रिकॉर्डिंग माध्यम पर स्थायी रूप से दर्ज नहीं किया गया था, इसलिए इस मामले में सीधे <b>Broadcast Reproduction Right</b> का सवाल उठता है। SGPC की ओर से यह भी कहा गया कि <b>Copyright Act की Section 52 </b>में दिए गए अपवादों को <b>Broadcast Reproduction Right</b> पर लागू नहीं किया जा सकता।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">सुनवाई के दौरान अदालत के सवाल पर SGPC की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि फिलहाल वह किसी भी पक्ष को गुरबानी प्रसारण का लाइसेंस नहीं देती है। यह स्थिति भुगतान के बदले या बिना भुगतान वाले लाइसेंस, दोनों पर लागू है।</span></p><h5 class=""><b>GTC Network की ओर से क्या दलील दी गई?</b></h5><p><b>GTC Network</b> की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पी.एस. पटवालिया ने SGPC के दावों का विरोध किया। उन्होंने मुख्य रूप से <b>Copyright Act की Section 37(3)(b) और Section 52 के प्रावधानों का हवाला दिया।</b>&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उनकी दलील थी कि <b>Section 37(3)(b)</b> में सार्वजनिक रूप से प्रसारण को सुनने या देखने के लिए भुगतान किए जाने की स्थिति का उल्लेख है। चूंकि संबंधित चैनल दर्शकों से इस प्रसारण को देखने के लिए कोई शुल्क नहीं लेता, इसलिए यह प्रावधान मौजूदा मामले में लागू नहीं होना चाहिए।</span></p><p>उन्होंने धार्मिक समारोह से जुड़े<b> Copyright Act के अपवाद</b> का भी उल्लेख किया।<b> Section 52(1)(ZA) के तहत bona fide religious ceremony</b> के हिस्से के रूप में किसी साहित्यिक, नाटकीय या संगीत कृति अथवा साउंड रिकॉर्डिंग को जनता तक पहुंचाने से संबंधित प्रावधानों का हवाला दिया गया। इसके अलावा <b>Section 52(1)(L) पर भी भरोसा</b> किया गया।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">चैनल की ओर से यह भी अदालत के सामने रखा गया कि SGPC ने पहले की कुछ कानूनी कार्यवाहियों में यह रुख अपनाया था कि उसका उद्देश्य दुनिया भर में अधिक से अधिक लोगों तक गुरबानी उपलब्ध कराना है।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;Delhi High Court Refuses To Stop TV Channel From Airing SGPC&amp;#39;s Live Gurbani Broadcast. Read more: &lt;a href="https://t.co/ufufdWyFon"&gt;https://t.co/ufufdWyFon&lt;/a&gt; &lt;a href="https://t.co/vc9EM6WHcV"&gt;pic.twitter.com/vc9EM6WHcV&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; LiveLaw Biz (@LivelawBiz) &lt;a href="https://x.com/LivelawBiz/status/2088164853802578122?ref_src=twsrc^tfw"&gt;August 14, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><h5 class=""><b>कोर्ट ने क्या कहा?</b></h5><p>अदालत ने अपने संक्षिप्त आदेश में चैनल की ओर से <b>Section 37(3)(b), Section 52(1)(ZA) और Section 52(1)(L)</b> के आधार पर दी गई दलीलों को रिकॉर्ड किया। कोर्ट ने प्रारंभिक तौर पर माना कि इन दलीलों में मेरिट है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">इसी आधार पर दिल्ली हाई कोर्ट ने इस चरण पर कोई ad interim order जारी करने से इनकार कर दिया। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि मामले का अंतिम फैसला Galactic Television के पक्ष में हो गया है।</span></p><p>अदालत ने SGPC के मुकदमे पर नोटिस जारी करते हुए आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रखने का निर्देश दिया है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">अदालत ने प्रतिवादियों को तीन सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने को कहा है। इसके बाद SGPC को जवाब देने के लिए दो सप्ताह का समय मिलेगा।</span></p><h5 class=""><b>मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर को होगी</b></h5><p><span style="font-size: 1rem;">मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के क्षेत्राधिकार को लेकर भी आपत्ति उठाई गई है। चैनल की ओर से कहा गया कि SGPC और संबंधित प्रतिवादी दिल्ली से बाहर स्थित हैं।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">वहीं SGPC की ओर से बताया गया कि उसका कॉरपोरेट कार्यालय दिल्ली में है। अदालत ने इस आपत्ति को भी फिलहाल खुला रखा है।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">अब इस मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर को होगी। उस सुनवाई में दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलों और दस्तावेजों के आधार पर विवाद आगे बढ़ेगा।</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ श्री हरमंदिर साहिब से गुरबानी प्रसारण रहेगा जारी...दिल्ली हाईकोर्ट का SGPC और PTC चैनल को स्टे देने से इनकार ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/sukhbir-singh-badal-attacked-nanded-5857 ]]></guid><title><![CDATA[ महाराष्ट्र: नांदेड़ में सुखबीर सिंह बादल पर हमला, हाथ में लगी चोट; अस्पताल में कराया गया भर्ती ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/sukhbir-singh-badal-attacked-nanded-5857 ]]></link><pubDate><![CDATA[Thu, 13 Aug 2026 14:54:20 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ नांदेड़,&nbsp;महाराष्ट्र:&nbsp;शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष और पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल पर महाराष्ट्र के नांदेड़ में हमला किए जाने की खबर सामने आई है। घटना के बाद उन्हें इलाज ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b><span style="font-size: 1rem;">नांदेड़,&nbsp;</span>महाराष्ट्र:</b><span style="font-size: 1rem;"><b>&nbsp;</b>शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष और पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल पर महाराष्ट्र के नांदेड़ में हमला किए जाने की खबर सामने आई है। घटना के बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, हमले में उनके हाथ पर चोट लगी है।</span><span style="font-size: 1rem;">जानकारी के अनुसार, सुखबीर सिंह बादल नांदेड़ शहर के पास स्थित माता साहेब गुरुद्वारा परिसर में माथा टेकने पहुंचे थे। इसी दौरान उन पर हमला किया गया। घटना के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया।</span></p><p>हमले के कारणों को लेकर फिलहाल पुलिस की जांच जारी है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">शुरुआती रिपोर्टों में बताया गया है कि सुखबीर सिंह बादल के हाथ में चोट आई है। उन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। सामने आए विजुअल्स में उन्हें अपने पैरों पर चलते हुए भी देखा गया है।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">फिलहाल उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर विस्तृत आधिकारिक मेडिकल बुलेटिन का इंतजार है।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;VIDEO | Maharashtra: Shiromani Akali Dal president Sukhbir Singh Badal has been taken to a hospital after he was reportedly attacked inside a Gurudwara in Nanded. More details awaited.&lt;br&gt;&lt;br&gt;(Source: Third Party)&lt;br&gt;&lt;br&gt;(Full video available on PTI Videos - &lt;a href="https://t.co/d8jp61yd2p"&gt;https://t.co/d8jp61yd2p&lt;/a&gt;) &lt;a href="https://t.co/RvZkrc0nNv"&gt;pic.twitter.com/RvZkrc0nNv&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Press Trust of India (@PTI_News) &lt;a href="https://x.com/PTI_News/status/2087830614099837305?ref_src=twsrc^tfw"&gt;August 13, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><h5 class=""><b>हमले के पीछे वजह क्या?</b></h5><p>इस हमले के पीछे की वजह अभी स्पष्ट नहीं है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्यों किया गया?&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">घटना को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं, लेकिन जांच पूरी होने से पहले इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए हमले की वजह को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।</span></p><h5 class=""><b>आरोपी जसपाल सिंह को गिरफ़्तार कर लिया गया</b></h5><p></p><p>शुरुआती जानकारी के मुताबिक, यह हमला तब हुआ जब बादल प्रार्थना करने के बाद सीढ़ियों से नीचे उतर रहे थे। बीच-बचाव करने की कोशिश करने वाले इंस्पेक्टर संतोष केंद्रे भी इस घटना में घायल हो गए। बादल और केंद्रे, दोनों के हाथों में चोटें आईं और उन्हें यशो साईं अस्पताल में भर्ती कराया गया। बताया जा रहा है कि उनकी हालत स्थिर है। आरोपी जसपाल सिंह को गिरफ़्तार कर लिया गया है; बताया जाता है कि वह निहंग है और पिछले दो साल से गुरुद्वारे में काम कर रहा था। मामले की आगे की जांच चल रही है।<span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;Former Punjab Deputy Chief Minister and Shiromani Akali Dal (SAD) leader Sukhbir Singh Badal was allegedly attacked by a servitor, identified as Jaspal Singh, at the Mata Sahib Gurdwara, Nanded, Maharashtra.&lt;br&gt;&lt;br&gt;According to preliminary information, the attack took place as Badal… &lt;a href="https://t.co/1gUQ3SkbOm"&gt;https://t.co/1gUQ3SkbOm&lt;/a&gt; &lt;a href="https://t.co/FbetyGiFQv"&gt;pic.twitter.com/FbetyGiFQv&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Hate Detector 🔍 (@HateDetectors) &lt;a href="https://x.com/HateDetectors/status/2087856065895633133?ref_src=twsrc^tfw"&gt;August 13, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><h5 class=""><b></b></h5><h5 class=""><b>पहले भी हो चुका है सुखबीर बादल पर हमला</b></h5><p class="blue-bg-white"><b><i>सुखबीर सिंह बादल पर इससे पहले दिसंबर 2024 में अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर परिसर में भी फायरिंग की कोशिश हुई थी। उस समय सुरक्षाकर्मी ने हमलावर का हाथ मोड़ दिया था, जिससे गोली बादल को नहीं लगी और वह बाल-बाल बच गए थे।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">नांदेड़ की ताजा घटना के बाद एक बार फिर उनकी सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।</span></i></b></p><h5 class=""><b>पुलिस जांच में सामने आएगी पूरी तस्वीर</b></h5><p>फिलहाल सबसे अहम यह है कि पुलिस जांच में हमले की पूरी परिस्थितियां सामने आएं। हमलावर का मकसद क्या था और सुरक्षा व्यवस्था में कोई चूक हुई या नहीं—इन सभी सवालों के जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">सुखबीर सिंह बादल की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति और मामले में पुलिस की आगे की कार्रवाई पर अपडेट का इंतजार है।</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ महाराष्ट्र: नांदेड़ में सुखबीर सिंह बादल पर हमला, हाथ में लगी चोट; अस्पताल में कराया गया भर्ती ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/tarun-chugh-kerala-keralam-bill-5849 ]]></guid><title><![CDATA[ 'गुलामी की निशानियों को माथे पर लगाकर घूमना नए भारत को स्वीकार नहीं' : तरुण चुग ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/tarun-chugh-kerala-keralam-bill-5849 ]]></link><pubDate><![CDATA[Wed, 12 Aug 2026 21:54:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय महामंत्री और राज्यसभा सांसद तरुण चुग ने राज्यसभा में ‘केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026’ पर चर्चा के दौरान विधेयक का समर्थन किया।&nbsp;उन्होंने सदन से इ ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>नई दिल्ली:</b> भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय महामंत्री और राज्यसभा सांसद तरुण चुग ने राज्यसभा में ‘केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026’ पर चर्चा के दौरान विधेयक का समर्थन किया।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">उन्होंने सदन से इसे सर्वसम्मति से पारित करने का आग्रह करते हुए कहा कि यह केवल किसी राज्य का नाम बदलने का विषय नहीं है, बल्कि भारत को औपनिवेशिक विरासत और गुलामी की निशानियों से मुक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।</span></p><p>तरुण चुग ने कहा कि जिन शक्तियों ने भारत पर शासन किया और देश को गुलाम बनाया, उनके द्वारा छोड़ी गई पहचान और प्रतीकों को स्वतंत्र भारत की स्थायी पहचान मानकर चलते रहना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक स्वतंत्रता के साथ मानसिक और सांस्कृतिक स्वतंत्रता भी जरूरी है। उनके मुताबिक, गुलामी के कलंक को मिटाना और भारत को उसकी ऐतिहासिक पहचान लौटाना इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण उद्देश्य होना चाहिए।</p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="hi" dir="ltr"&gt;केरल से &amp;#39;केरलम&amp;#39; तक कि यह यात्रा अपनी जड़ों से शक्ति लेकर आगे बढ़ने का का प्रयास है। &lt;a href="https://t.co/xIrHSzV9tE"&gt;pic.twitter.com/xIrHSzV9tE&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Tarun Chugh (@tarunchughbjp) &lt;a href="https://x.com/tarunchughbjp/status/2087532150057058620?ref_src=twsrc^tfw"&gt;August 12, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><h5 class=""><b>‘यह इतिहास बदलने का प्रयास नहीं’</b></h5><p>चुग ने स्पष्ट किया कि केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने का प्रस्ताव इतिहास बदलने का प्रयास नहीं है। उन्होंने इसे औपनिवेशिक शासन के दौरान बदली या प्रचलित की गई पहचान से बाहर निकलकर मूल पहचान को पुनर्स्थापित करने की कोशिश बताया।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने कहा कि आज भारत एक स्वतंत्र और आत्मविश्वासी राष्ट्र है। ऐसे में देश की संवैधानिक पहचान ऐसी होनी चाहिए जो उसकी सभ्यता, भाषा, संस्कृति और इतिहास पर गर्व को दर्शाए।</span></p><h5 class=""><b>‘नाम में क्या रखा है’ के सवाल पर दिया जवाब</b></h5><p>विपक्षी सांसदों की ओर से उठाए गए ‘नाम में क्या रखा है’ वाले सवाल पर तरुण चुग ने कहा कि सवाल यह नहीं है कि नाम में क्या रखा है, बल्कि यह है कि नाम में क्या-क्या रखा है। उन्होंने कहा कि किसी देश या समाज का नाम केवल अक्षरों का समूह नहीं होता। उसके साथ ऐतिहासिक स्मृति, सांस्कृतिक चेतना और सभ्यतागत पहचान जुड़ी होती है।</p><p>चुग के मुताबिक, यदि किसी गुलाम देश की पहचान को शासकों ने अपनी सुविधा के अनुसार बदला या प्रचलित किया था, तो स्वतंत्रता के बाद उस पहचान की समीक्षा करना औपनिवेशिक मानसिकता से बाहर निकलने की स्वाभाविक प्रक्रिया है।</p><h5 class=""><b>‘केरलम’ को मूल पहचान की संवैधानिक स्वीकृति बताया</b></h5><p>तरुण चुग ने कहा कि ‘केरलम’ नाम केरल की भाषा और सांस्कृतिक स्मृति में लंबे समय से मौजूद रहा है। इसलिए इसे किसी नई पहचान को थोपने की कोशिश नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह उस पहचान को संवैधानिक दस्तावेजों में उचित स्थान देने की प्रक्रिया है, जो स्थानीय भाषा और संस्कृति में पहले से मौजूद है।</p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="hi" dir="ltr"&gt;केरलम नाम में क्या-क्या नहीं रखा है..... &lt;br&gt;&lt;br&gt;केरलम नाम में हमारी हजारों वर्षों की गौरवशाली इतिहास, भाषा की समृद्ध विरासत और हमारी संस्कृति की गहरी जड़ें समाहित हैं। केरलम नाम में भारत की माटी की खुशबू आती है। &lt;a href="https://t.co/kzvkelZkuN"&gt;pic.twitter.com/kzvkelZkuN&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Tarun Chugh (@tarunchughbjp) &lt;a href="https://x.com/tarunchughbjp/status/2087529687467901120?ref_src=twsrc^tfw"&gt;August 12, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><h5 class=""><b>आदि शंकराचार्य की भूमि का किया उल्लेख</b></h5><p>राज्यसभा में चर्चा के दौरान चुग ने केरल की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि केरल आदि शंकराचार्य की जन्मभूमि है, जिन्होंने भारत की आध्यात्मिक एकता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।</p><p>उन्होंने कहा कि कालडी से निकलकर आदि शंकराचार्य ने देश के चारों दिशाओं में भारत की एकात्म चेतना को स्थापित किया। चुग के अनुसार, भारत की यह सभ्यतागत पहचान किसी औपनिवेशिक शक्ति की देन नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की परंपरा का परिणाम है।</p><h5 class=""><b>‘गुलामी की निशानियां केवल नामों में नहीं, मानसिकता में भी’</b></h5><p class="grey-bg-red"><b><i>तरुण चुग ने कहा कि औपनिवेशिक विरासत केवल इमारतों, सड़कों या स्थानों के नामों में दिखाई नहीं देती, बल्कि मानसिकता में भी मौजूद हो सकती है। उन्होंने कहा कि यदि स्वतंत्र भारत अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान की जगह औपनिवेशिक दौर से चली आ रही पहचान को ही अंतिम सत्य मान लेता है, तो राजनीतिक स्वतंत्रता के बावजूद मानसिक गुलामी बनी रह सकती है।</i></b></p><h5 class=""><b>विकास के मुद्दे पर विपक्ष को दिया जवाब</b></h5><p>विपक्ष की ओर से नाम परिवर्तन को विकास से जोड़कर उठाए गए सवालों पर चुग ने कहा कि विकास और राष्ट्रीय पहचान एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। उन्होंने सदन में केंद्र सरकार की ओर से केरल को दी गई वित्तीय सहायता का उल्लेख करते हुए दावा किया कि 2004 से 2014 के बीच यूपीए सरकार के दौरान केरल को कर हस्तांतरण के रूप में करीब 46,300 करोड़ रुपये मिले, जबकि 2014 से 2024 के बीच यह राशि बढ़कर करीब 1.57 लाख करोड़ रुपये हो गई।</p><p>उन्होंने सहायता अनुदान का भी जिक्र किया और दावा किया कि यूपीए के दशक में दिए गए करीब 25,630 करोड़ रुपये की तुलना में मोदी सरकार के कार्यकाल में करीब 1,56,214 करोड़ रुपये दिए गए।</p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="hi" dir="ltr"&gt;UPA सरकार ने 2004–2014: ₹46,300 करोड़ केरल को दिए, वहीं मोदी सरकार ने 2014–2024: ₹1,57,017 करोड़ रुपये दिए&lt;br&gt;&lt;br&gt;मोदी सरकार ने पहले की तुलना में 3 गुना से अधिक राशि केरल को दी।&lt;br&gt;&lt;br&gt;केरलम’ हमारी आस्था है और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प का सशक्त प्रतीक है। &lt;a href="https://t.co/35oE9hotsQ"&gt;pic.twitter.com/35oE9hotsQ&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Tarun Chugh (@tarunchughbjp) &lt;a href="https://x.com/tarunchughbjp/status/2087530547463782788?ref_src=twsrc^tfw"&gt;August 12, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><h5 class=""><b>‘विकसित भारत’ में आर्थिक विकास, सांस्कृतिक आत्मविश्वास भी जरूरी</b></h5><p>चुग ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ का संकल्प केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार विकसित भारत वह होगा जो आर्थिक रूप से मजबूत होने के साथ मानसिक रूप से स्वतंत्र और अपनी सभ्यतागत पहचान के प्रति आत्मविश्वासी भी हो।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने कहा कि भारत आर्थिक क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ औपनिवेशिक मानसिकता की बची हुई परतों को पीछे छोड़ना भी जरूरी है।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="hi" dir="ltr"&gt;भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से आगे बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है।&lt;br&gt;&lt;br&gt;लेकिन हमारा लक्ष्य केवल GDP और आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है। प्रधानमंत्री श्री &lt;a href="https://x.com/narendramodi?ref_src=twsrc^tfw"&gt;@NarendraModi&lt;/a&gt; जी ऐसे भारत का लक्ष्य रखते हैं, जो आत्मविश्वासी हो और अपनी भाषा, अपनी संस्कृति एवं परंपराओं पर गर्व करने वाला हो।&lt;br&gt;&lt;br&gt;‘केरल’… &lt;a href="https://t.co/fcVuJKPFsp"&gt;pic.twitter.com/fcVuJKPFsp&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Tarun Chugh (@tarunchughbjp) &lt;a href="https://x.com/tarunchughbjp/status/2087531240950055054?ref_src=twsrc^tfw"&gt;August 12, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><h5 class=""><b>‘केरल से केरलम’ को बताया व्यापक राष्ट्रीय भावना का हिस्सा</b></h5><p>तरुण चुग ने कहा कि ‘केरल’ से ‘केरलम’ की यात्रा व्यापक राष्ट्रीय भावना का हिस्सा है। उनके मुताबिक यह केवल नाम बदलने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि अपनी मूल पहचान को संवैधानिक रूप से स्वीकार करने की दिशा में कदम है।</p><p>उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह को ऐसे कदमों के लिए बधाई देते हुए कहा कि भारत को उन प्रतीकों और पहचानों को अनिवार्य रूप से ढोने की जरूरत नहीं है, जो औपनिवेशिक शासन की देन हैं।</p><h5 class=""><b>‘आजादी का अर्थ अपनी पहचान खुद तय करना भी है’</b></h5><p>तरुण चुग ने कहा कि आजादी का अर्थ केवल अंग्रेजों के भारत से चले जाने तक सीमित नहीं है। स्वतंत्रता का अर्थ यह भी है कि भारत अपनी पहचान स्वयं तय करे, अपने इतिहास का सम्मान करे और अपनी सभ्यता को औपनिवेशिक नजरिए से देखने के लिए बाध्य न हो।</p><p>उन्होंने कहा कि गुलामी की निशानियों को माथे पर लगाकर घूमना आजाद भारत की नियति नहीं हो सकती। गुलामी के कलंक को मिटाना, औपनिवेशिक मानसिकता को पीछे छोड़ना और भारत का आत्मसम्मान लौटाना ही स्वतंत्रता का सच्चा सम्मान है।</p><h5 class=""><b>दलगत राजनीति से ऊपर उठकर समर्थन की अपील</b></h5><p class="blue-bg-white"><b><i>चुग ने राज्यसभा के सभी सदस्यों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर विधेयक का समर्थन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि ‘केरल’ से ‘केरलम’ केवल नाम की यात्रा नहीं है, बल्कि औपनिवेशिक मानसिकता से आत्मसम्मान की ओर और पराधीनता की स्मृतियों से आत्मविश्वासी भारत की ओर बढ़ने का प्रतीक है।</i></b></p><h5 class=""><b>मुख्य बिंदु</b></h5><ul><li>तरुण चुग ने राज्यसभा में ‘केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026’ का समर्थन किया।</li><li>उन्होंने इसे केवल नाम परिवर्तन के बजाय औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति का प्रतीक बताया।</li><li>चुग ने ‘केरलम’ को स्थानीय भाषा और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा नाम बताया।</li><li>उन्होंने विकास और राष्ट्रीय पहचान को एक-दूसरे का विरोधी नहीं माना।</li><li>उन्होंने विधेयक को सर्वसम्मति से पारित करने की अपील की।</li></ul> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ 'गुलामी की निशानियों को माथे पर लगाकर घूमना नए भारत को स्वीकार नहीं' : तरुण चुग ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-politics-bajwa-rahul-bjp-election-5844 ]]></guid><title><![CDATA[ चन्नी-वड़िंग की गुटबाजी के बीच बाजवा की राहुल से मुलाकात की कोशिश, पंजाब में BJP का बड़ा ऐलान ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-politics-bajwa-rahul-bjp-election-5844 ]]></link><pubDate><![CDATA[Wed, 12 Aug 2026 12:37:50 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज होती दिखाई दे रही हैं। एक तरफ कांग्रेस के भीतर वरिष्ठ नेताओं और प्रदेश नेतृत्व के बीच मतभेद की चर्चा है, तो दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने राज् ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p>पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज होती दिखाई दे रही हैं। एक तरफ <b>कांग्रेस </b>के भीतर वरिष्ठ नेताओं और प्रदेश नेतृत्व के बीच मतभेद की चर्चा है, तो दूसरी ओर <b>भारतीय जनता पार्टी </b>ने राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर राजनीतिक समीकरणों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। इसी बीच <b>अकाली दल</b> के एक पूर्व विधायक का BJP में शामिल होना और अमृतपाल सिंह की पार्टी की ओर से अपने पहले उम्मीदवार के नाम का ऐलान भी चर्चा में है।</p><h5 class=""><b>राहुल गांधी से मिलना चाहते हैं कांग्रेस विधायक</b></h5><p>पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता <b>प्रताप सिंह बाजवा </b>ने पार्टी के विधायकों के साथ बैठक की है। इसके बाद कांग्रेस विधायकों की ओर से <b>राहुल गांधी </b>से मुलाकात के लिए पत्र भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि पत्र में किन मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया है।</p><p>मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, विधायक पंजाब कांग्रेस के मौजूदा राजनीतिक हालात पर <b>राहुल गांधी</b> से चर्चा करना चाहते हैं। खासतौर पर <b>पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी</b> और <b>प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग </b>के समर्थक खेमों के बीच चल रही खींचतान को लेकर पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी बात रखने की कोशिश बताई जा रही है।</p><p><b>प्रताप सिंह बाजवा </b>के दिल्ली पहुंचने की भी जानकारी सामने आई है। हालांकि, संसद के मॉनसून सत्र के चलते राहुल गांधी से मुलाकात के लिए अभी पार्टी आलाकमान की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं आया है।</p><p>दूसरी तरफ, <b>वड़िंग </b>खेमे की ओर से यह तर्क दिया जा रहा है कि ऐसी बैठक से फिलहाल कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा, क्योंकि पार्टी नेतृत्व पहले ही <b>अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग</b> पर भरोसा जता चुका है।</p><h5 class=""><b>BJP का अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान</b></h5><p>पंजाब की चुनावी राजनीति में BJP ने भी अपनी रणनीति स्पष्ट करने की कोशिश की है। पार्टी के<b> प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों</b> ने मंगलवार को चंडीगढ़ में कहा कि BJP राज्य की सभी<b> 117 </b>विधानसभा सीटों पर अपने दम पर चुनाव लड़ेगी।</p><p>यह बयान इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि हाल ही में<b> प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल </b>के बीच मुलाकात हुई थी। इस मुलाकात के बाद BJP और अकाली दल के बीच संभावित गठबंधन को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हुई थीं।</p><p>ऐसे में BJP की ओर से सभी सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा ने गठबंधन की संभावनाओं पर फिलहाल सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में पार्टी अपने उम्मीदवारों और चुनावी रणनीति को लेकर क्या रुख अपनाती है, इस पर भी नजर रहेगी।</p><h5 class=""><b>अकाली दल के पूर्व विधायक BJP में शामिल</b></h5><p>इसी राजनीतिक हलचल के बीच अकाली दल के पूर्व विधायक <b>दर्शन सिंह कोटफट्टा </b>ने BJP का दामन थाम लिया। पंजाब BJP अध्यक्ष <b>केवल सिंह ढिल्लों</b> ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। इस मौके पर भटिंडा से BJP के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ चुकीं <b>परमपाल कौर</b> भी मौजूद थीं।</p><p><b>दर्शन सिंह कोटफट्टा </b>का BJP में जाना पंजाब की क्षेत्रीय राजनीति में पार्टी के विस्तार की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।</p><h5 class=""><b>अमृतपाल की पार्टी ने घोषित किया पहला उम्मीदवार</b></h5><p>पंजाब की राजनीति में सबसे ज्यादा चर्चा <b>अमृतपाल सिंह</b> से जुड़ी पार्टी अकाली दल (वारिस पंजाब दे) के उम्मीदवार के ऐलान को लेकर है। पार्टी ने बस्सी पठाना विधानसभा सीट से सतवंत सिंह को उम्मीदवार बनाया है।</p><p><b>सतवंत सिंह</b> पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए केहर सिंह के बेटे हैं। उम्मीदवार के नाम का ऐलान अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह ने किया।</p><p><b>तरसेम सिंह</b> ने उम्मीदवार घोषित करने के दौरान पार्टी की राजनीतिक सोच का जिक्र करते हुए कहा कि संगठन की राजनीति केवल सत्ता हासिल करने तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक, पार्टी पंजाब के अधिकारों, पंथक सिद्धांतों और सिख समुदाय के लिए बलिदान देने वाले परिवारों के सम्मान जैसे मुद्दों को भी अपनी राजनीति का हिस्सा मानती है।</p><h5 class=""><b>चुनाव से पहले कई मोर्चों पर मुकाबला</b></h5><p>पंजाब की मौजूदा राजनीतिक तस्वीर में कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान, BJP की विस्तारवादी रणनीति, अकाली दल से जुड़े नेताओं का दल-बदल और वारिस पंजाब दे की चुनावी सक्रियता अलग-अलग राजनीतिक संकेत दे रही है।</p><p>आने वाले चुनाव में इन घटनाक्रमों का कितना असर पड़ेगा, यह अभी कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन इतना साफ है कि चुनावी तैयारी के साथ-साथ पार्टियों के भीतर और उनके बीच राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ चन्नी-वड़िंग की गुटबाजी के बीच बाजवा की राहुल से मुलाकात की कोशिश, पंजाब में BJP का बड़ा ऐलान ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/gtc-president-rabindra-narayan-on-gurbani-broadcast-ptc-sgpc-5840 ]]></guid><title><![CDATA[ गुरबानी, विज्ञापन और प्रसारण की गरिमा... GTC Network के President रबींद्र नारायण ने SGPC के सामने रखे सवाल... ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/gtc-president-rabindra-narayan-on-gurbani-broadcast-ptc-sgpc-5840 ]]></link><pubDate><![CDATA[Tue, 11 Aug 2026 18:50:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ चंडीगढ़, पंजाब: गुरबानी के प्रसारण की मर्यादा और इसे लेकर लागू नियमों पर एक बार फिर सवाल उठे हैं। GTC Network के Founder, MD &amp; President रबींद्र नारायण (Rabindra Narayan) जी ने&nbsp;फेसबुक&nbsp;पर ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>चंडीगढ़, पंजाब:</b> गुरबानी के प्रसारण की मर्यादा और इसे लेकर लागू नियमों पर एक बार फिर सवाल उठे हैं। <b>GTC Network के Founder, MD &amp; President रबींद्र नारायण (Rabindra Narayan) जी</b> ने&nbsp;</span>फेसबुक<span style="font-size: 1rem;">&nbsp;पर एक पोस्ट साझा कर गुरबानी के प्रसारण को लेकर PTC और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (SGPC) से कई अहम सवाल पूछे हैं। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">उन्होंने</span><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;अपनी पोस्ट में सवाल उठाया कि गुरबानी के प्रसारण की गरिमा और सम्मान क्या सभी प्रसारणकर्ताओं के लिए एक समान है या फिर PTC के लिए अलग मानदंड लागू किए जा रहे हैं? आपको बता दें कि इससे पहले भी श्री रबींद्र नारायण जी ने फेसबुक पर गुरबानी के प्रसारण को लेकर अपने विचार साझा किए हैं, जिनमें उन्होंने यह स्पष्ट किया था कि उनका लक्ष्य <b>गुरबानी को घर-घर तक पहुंचाना</b> है।</span></p><h5 class=""><b>‘सवाल GTC पंजाबी का नहीं, समान नियमों का है’</b></h5><p>श्री रबींद्र नारायण जी ने अपनी फेसबुक&nbsp;पोस्ट में यह स्पष्ट किया कि मौजूदा सवाल सिर्फ GTC पंजाबी का नहीं है बल्कि असली सवाल यह है कि गुरबानी के प्रसारण के लिए सम्मान और नियम सभी के लिए समान हैं या नहीं?&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार और SGPC अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी की ओर से गुरबानी प्रसारण की गरिमा को लेकर बार-बार दिए गए बयानों का उल्लेख करते हुए कहा कि GTC पंजाबी ने इस गरिमा का हमेशा सम्मान किया है।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">उनका कहना है कि GTC पंजाबी गुरबानी के प्रसारण के दौरान विज्ञापन नहीं चलाता, क्योंकि संस्था पवित्र गुरबानी को कमाई का माध्यम नहीं बनाना चाहती।</span></p><p>&lt;iframe src="https://www.facebook.com/plugins/video.php?height=314&amp;href=https://www.facebook.com/reel/1609807730790927/&amp;show_text=false&amp;width=560&amp;t=0" width="560" height="314" style="border:none;overflow:hidden" scrolling="no" frameborder="0" allowfullscreen="true" allow="autoplay; clipboard-write; encrypted-media; picture-in-picture; web-share" allowFullScreen="true"&gt;&lt;/iframe&gt;</p><h5 class=""><b>PTC के डिजिटल प्रसारण को लेकर सवाल</b></h5><p>श्री रबींद्र नारायण जी ने अपनी पोस्ट में PTC के गुरबानी प्रसारण को लेकर एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया है। उन्होंने पूछा कि यदि PTC को सैटेलाइट टेलीविजन पर गुरबानी प्रसारण की व्यवस्था दी गई थी, तो PTC के YouTube, Facebook और वेबसाइट जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर गुरबानी का प्रसारण किस आधार पर किया जा रहा है?</p><p>उन्होंने यह भी सवाल किया कि यदि इन डिजिटल प्लेटफॉर्म पर गुरबानी प्रसारण के दौरान विज्ञापन चलते हैं और उनसे राजस्व उत्पन्न होता है, तो क्या इसे भी गुरबानी प्रसारण की उसी गरिमा के अनुरूप माना जाता है, जिसकी बात SGPC और श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से की जाती रही है?</p><h5 class=""><b>GTC पंजाबी पर हुई कार्रवाई का भी किया जिक्र</b></h5><p class="grey-bg-red"><b><i>श्री रबींद्र नारायण जी ने अपनी पोस्ट में दावा किया कि GTC पंजाबी के खिलाफ गुरबानी प्रसारण को लेकर पुलिस में शिकायतें की गई थीं।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">इसी संदर्भ में उन्होंने अब SGPC के सामने सवाल रखा है कि यदि यही नियम PTC पर भी लागू होते हैं, तो क्या उसके डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होने वाले प्रसारण को लेकर भी इसी तरह की कार्रवाई की जाएगी?</span></i></b></p><h5 class=""><b>‘क्या PTC को भी नोटिस मिलेगा?’</b></h5><p>श्री रबींद्र नारायण जी ने अपनी फेसबुक पोस्ट में कई सीधे सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि अगर PTC को केवल सैटेलाइट प्रसारण की अनुमति दी गई थी, तो उसके डिजिटल प्लेटफॉर्म पर गुरबानी प्रसारण को कौन अधिकृत कर रहा है? इसके अलावा,&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने यह भी सवाल किया कि अगर गुरबानी के साथ चलने वाले विज्ञापनों से आय उत्पन्न हो रही है, तो क्या SGPC इसे गुरबानी की गरिमा का उल्लंघन मानती है या नहीं?</span></p><p><span style="font-size: 1rem;">श्री रबींद्र नारायण जी ने&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">PTC के YouTube और Facebook का उस पेज को भी दिखाया जहां गुरबानी के प्रसारण के दौरान ही निरंतर विज्ञापन प्रसारित किए जा रहे थे, इस पर उन्होंने पूछा है कि क्या इस पर भी कोई कार्रवाई होगी?</span></p><h5 class=""><b>'यदि गुरबानी प्रसारण के नियम समान हैं, तो कार्रवाई का तरीका भी समान हो'</b></h5><p class="blue-bg-white"><b><i><span style="font-size: 1rem;">दरअसल, श्री रबींद्र नारायण जी के पोस्ट का सबसे अहम सवाल यही है कि यदि PTC और GTC पंजाबी के लिए गुरबानी प्रसारण के नियम समान हैं, तो कार्रवाई का तरीका भी समान होना चाहिए।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">उन्होंने एक तरफ GTC पंजाबी का उदाहरण देते हुए कहा कि चैनल गुरबानी का प्रसारण बिना विज्ञापनों के करता है, जबकि दूसरी तरफ PTC के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रसारण के दौरान विज्ञापनों और संभावित राजस्व का सवाल उठ रहा है।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">ऐसे में उन्होंने SGPC से पूछा कि आखिर कार्रवाई किस आधार पर की जा रही है और क्या दोनों के लिए एक समान मानदंड लागू किए जा रहे हैं?</span></i></b></p><h5 class="" style="font-family: &quot;Source Sans Pro&quot;, -apple-system, BlinkMacSystemFont, &quot;Segoe UI&quot;, Roboto, &quot;Helvetica Neue&quot;, Arial, sans-serif, &quot;Apple Color Emoji&quot;, &quot;Segoe UI Emoji&quot;, &quot;Segoe UI Symbol&quot;; color: rgb(33, 37, 41);"><span style="font-weight: bolder;">श्री रबींद्र नारायण की फेसबुक पोस्ट से उठे प्रमुख सवाल:</span></h5><ul><li>PTC के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर गुरबानी प्रसारण किस अनुमति के तहत हो रहा है?</li><li>क्या डिजिटल प्रसारण में विज्ञापनों से होने वाली आय की अनुमति है?</li><li>क्या गुरबानी के साथ विज्ञापन चलाना प्रसारण की गरिमा के अनुरूप है?</li><li>क्या GTC पंजाबी और PTC के लिए समान नियम लागू हैं?</li><li>यदि नियम समान हैं, तो कार्रवाई भी समान क्यों नहीं?</li><li>क्या SGPC इस मामले में PTC को नोटिस जारी करेगी?</li></ul><h5 class=""><b>‘SGPC से टकराव नहीं, निष्पक्षता की मांग’</b></h5><p>श्री रबींद्र नारायण जी ने अपनी पोस्ट में यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य SGPC के साथ टकराव करना नहीं है। उन्होंने SGPC को अपना सम्मानित संगठन बताते हुए कहा कि इसी वजह से इस मामले में कथित असमानता उन्हें और अधिक पीड़ा देती है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने SGPC से निष्पक्षता की मांग करते हुए सवाल किया कि GTC पंजाबी के लिए जो मान्यता और नियम हैं, क्या वही PTC के लिए भी लागू हैं?</span></p><p>उनका कहना है कि अगर दोनों के लिए नियम समान हैं, तो कार्रवाई भी समान होनी चाहिए। श्री&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">रबींद्र नारायण जी ने अपनी पोस्ट के अंत में गुरबानी की पवित्रता और समानता पर जोर देते हुए कहा कि गुरबानी गुरु की है, इसलिए उसका सम्मान भी समान होना चाहिए और न्याय भी समान होना चाहिए। इस तरह </span>अंत में उन्होंने <strong>“वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतेह”</strong> के साथ अपनी बात समाप्त की।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ गुरबानी, विज्ञापन और प्रसारण की गरिमा... GTC Network के President रबींद्र नारायण ने SGPC के सामने रखे सवाल... ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/arvind-kejriwal-zombie-drug-video-punjab-5828 ]]></guid><title><![CDATA[ पंजाब का नहीं राजस्थान का था 'Zombie Drug' वीडियो, केजरीवाल ने पूछा, 'क्या PMO से आया था आदेश?' ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/arvind-kejriwal-zombie-drug-video-punjab-5828 ]]></link><pubDate><![CDATA[Tue, 11 Aug 2026 11:30:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ नई दिल्ली, 11 अगस्त 2026: आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पंजाब से जोड़कर वायरल किए गए कथित ‘Zombie Drug’ वीडियो को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधा है। केजरीवा ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>नई दिल्ली, 11 अगस्त 2026: </b>आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पंजाब से जोड़कर वायरल किए गए कथित ‘Zombie Drug’ वीडियो को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधा है। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि BJP के कई नेताओं ने एक ही दिन में इस वीडियो को पंजाब का बताकर “झूठ” फैलाया। उन्होंने सवाल किया कि क्या ऐसा करने का निर्देश प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से आया था।</span></p><p>इस पूरे विवाद में सबसे अहम तथ्य यह है कि पंजाब पुलिस के अनुसार वायरल वीडियो पंजाब का नहीं, बल्कि राजस्थान के श्रीगंगानगर का है। <span style="font-size: 1rem;">ऐसे में वीडियो को पंजाब की घटना बताकर साझा किए जाने पर सवाल उठे हैं। वहीं, केजरीवाल ने इस मुद्दे को BJP और PMO से जोड़ते हुए राजनीतिक सवाल खड़े किए हैं।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, बीजेपी के कई लोगों ने कल ये झूठ एक साथ फैलाया। क्या आदेश PMO से आया था? क्या PMO देश में झूठ फैलाता है?</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="hi" dir="ltr"&gt;बीजेपी के कई लोगों ने कल ये झूठ एक साथ फैलाया। क्या आदेश PMO से आया था? क्या PMO देश में झूठ फैलाता है? &lt;a href="https://t.co/am7NBkGPQf"&gt;https://t.co/am7NBkGPQf&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) &lt;a href="https://x.com/ArvindKejriwal/status/2087000724962222200?ref_src=twsrc^tfw"&gt;August 11, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><h5 class=""><b>BJP सांसद हरभजन सिंह ने शेयर किया था वीडियो</b></h5><p>यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब BJP सांसद हरभजन सिंह ने एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया। उन्होंने वीडियो को पंजाब से जोड़ते हुए राज्य में नशे की समस्या और युवाओं की स्थिति पर चिंता जताई।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">हरभजन सिंह ने पोस्ट में पंजाब के युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने की अपील करते हुए कहा कि पंजाब कभी अपनी तरक्की, साहस और बहादुरी के लिए जाना जाता था, लेकिन आज वहां के युवा नशे की समस्या से जूझ रहे हैं।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">उन्होंने पंजाब को बचाने और युवाओं को नशे से दूर करने की अपील भी की।</span></p><h5 class=""><b>पंजाब पुलिस ने किया वीडियो का फैक्ट चेक</b></h5><p>वीडियो को लेकर पंजाब पुलिस ने फैक्ट चेक जारी करते हुए स्पष्ट किया कि वायरल वीडियो पंजाब का नहीं, बल्कि राजस्थान के श्रीगंगानगर (Sri Ganganagar) का है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">पंजाब पुलिस ने कहा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित किया जा रहा वीडियो श्रीगंगानगर का है और इसका पंजाब पुलिस से कोई संबंध नहीं है।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि वीडियो में पंजाबी ऑडियो होने का मतलब यह नहीं है कि घटना पंजाब की ही है। पुलिस ने सोशल मीडिया यूजर्स से किसी भी वीडियो को शेयर करने से पहले उसकी जगह और तथ्यों की पुष्टि करने की अपील की।</span></p><h5 class=""><b>अरविंद केजरीवाल ने पूछा सवाल</b></h5><p class="grey-bg-red"><b><i>पंजाब पुलिस के फैक्ट चेक के बाद अरविंद केजरीवाल ने BJP पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कई BJP नेताओं ने एक साथ इस वीडियो को पंजाब से जोड़कर पेश किया।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">केजरीवाल ने सवाल उठाया कि क्या इस तरह की पोस्ट करने का निर्देश प्रधानमंत्री कार्यालय से आया था और क्या PMO देश में झूठ फैलाता है।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">यह बयान ऐसे समय आया है जब पंजाब में नशे की समस्या को लेकर BJP और AAP के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप लगातार तेज हो रहे हैं।</span></i></b></p><h5 class=""><b>E20 फ्यूल पॉलिसी को लेकर भी केजरीवाल ने सरकार पर साधा निशाना</b></h5><p>इससे पहले रविवार को अरविंद केजरीवाल ने E20 Fuel Policy को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला था। केजरीवाल इस मुद्दे पर AAP के अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">एक वीडियो संदेश में उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार E20 नीति की आलोचना करने वाली सोशल मीडिया सामग्री को हटाने की कोशिश कर रही है।</span></p><p>केजरीवाल ने दावा किया कि E20 नीति पर सवाल उठाने वाले लोगों के पेज हटाए जा रहे हैं, वीडियो डिलीट किए जा रहे हैं और उनके खिलाफ FIR तक दर्ज की जा रही हैं।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">हालांकि, ये आरोप केजरीवाल और AAP की ओर से लगाए गए हैं। सरकार की ओर से इन आरोपों पर प्रतिक्रिया इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।</span></p><h5 class=""><b>AAP की E20 Fuel पर क्या मांग है?</b></h5><p>AAP लंबे समय से ethanol-blended fuel यानी E20 पेट्रोल को लेकर सवाल उठा रही है। पार्टी का कहना है कि ईंधन की गुणवत्ता और वाहनों के साथ उसकी compatibility से जुड़े अध्ययन और findings सार्वजनिक किए जाने चाहिए।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">AAP ने यह भी मांग की है कि पेट्रोल पंपों पर लोगों को ईंधन का विकल्प उपलब्ध कराया जाए, जिसमें conventional petrol लेने का विकल्प भी शामिल हो।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">फिलहाल विवाद का केंद्र वायरल वीडियो की गलत लोकेशन और इसे लेकर BJP-AAP के बीच शुरू हुआ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप है।</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब का नहीं राजस्थान का था 'Zombie Drug' वीडियो, केजरीवाल ने पूछा, 'क्या PMO से आया था आदेश?' ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/tarun-chugh-punjab-drug-crisis-ndps-court-anti-drone-5820 ]]></guid><title><![CDATA[ ‘नशे और अपराध की आग में झोंका पंजाब’, राज्यसभा में तरुण चुग का AAP सरकार पर हमला... ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/tarun-chugh-punjab-drug-crisis-ndps-court-anti-drone-5820 ]]></link><pubDate><![CDATA[Mon, 10 Aug 2026 14:00:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ चंडीगढ़, पंजाब: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय महामंत्री और राज्यसभा सांसद तरुण चुग (Tarun Chugh) ने सोमवार को राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान पंजाब में कथित रूप से बिगड़ती कानून व्यवस्था और बढ़ ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>चंडीगढ़, पंजाब:</b> भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय महामंत्री और राज्यसभा सांसद तरुण चुग (Tarun Chugh) ने सोमवार को राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान पंजाब में कथित रूप से बिगड़ती कानून व्यवस्था और बढ़ते नशे के संकट का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पंजाब में नशा तस्करी, गैंगस्टर गतिविधियों और सीमा पार से आने वाले खतरों ने राज्य की सुरक्षा और युवाओं के भविष्य के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है।</span></p><p>चुग ने केंद्र सरकार से पंजाब के नशा प्रभावित जिलों में विशेष NDPS न्यायालय, 553 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर एंटी-ड्रोन सिस्टम और सीमावर्ती इलाकों के युवाओं के लिए पुनर्वास व रोजगार से जुड़ा विशेष पैकेज तैयार करने की मांग की।</p><h5 class=""><b>NCRB के आंकड़ों का हवाला देकर पंजाब सरकार पर निशाना</b></h5><p>तरुण चुग ने गृह मंत्रालय के National Crime Records Bureau (NCRB) की Crime in India 2024 रिपोर्ट का हवाला देते हुए पंजाब में नशे और अपराध से जुड़े आंकड़े सदन के सामने रखे।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने दावा किया कि मादक पदार्थ रखने से जुड़े 6,060 मामलों के साथ पंजाब देश में सबसे ऊपर है। उनके मुताबिक, नशे की ओवरडोज से होने वाली मौतों की संख्या 2023 में 89 से बढ़कर 2024 में 106 हो गई।</span></p><p>चुग ने यह भी कहा कि पंजाब में 1,356 स्नैचिंग, 1,079 हत्याएं और एक वर्ष में जेल से फरार होने के 48 मामले दर्ज किए गए। उन्होंने कहा कि ये राजनीतिक आरोप नहीं, बल्कि सरकारी आंकड़े हैं, जो राज्य की स्थिति की गंभीरता को दिखाते हैं।</p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="hi" dir="ltr"&gt;आज पंजाब में व्याप्त नशे की गंभीर समस्या और चरमराती कानून-व्यवस्था के मुद्दे को सदन के पटल पर रखा। &lt;a href="https://t.co/QkcjSodBLT"&gt;pic.twitter.com/QkcjSodBLT&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Tarun Chugh (@tarunchughbjp) &lt;a href="https://x.com/tarunchughbjp/status/2086700413060067413?ref_src=twsrc^tfw"&gt;August 10, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><h5 class=""><b>सीमा पार से ड्रोन के जरिए नशे और हथियार आने का दावा</b></h5><p>तरुण चुग ने पंजाब में बढ़ते नशे और अपराध को राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जोड़ते हुए कहा कि सीमा पार से ड्रोन के जरिए मादक पदार्थों के साथ हथियार और विस्फोटक भेजे जाने का खतरा बढ़ा है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने BSF के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि पंजाब सीमा पर पकड़े या रोके गए ड्रोन की संख्या 2022 में 21 से बढ़कर 2024 में 294 हो गई।</span></p><p>चुग के मुताबिक, इन ड्रोन के जरिए हेरोइन के अलावा हथियार, हैंड ग्रेनेड और RDX जैसे विस्फोटक भेजे जाने की घटनाएं सामने आई हैं।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने यह भी दावा किया कि सितंबर 2024 से पंजाब में 21 से अधिक ग्रेनेड और विस्फोट के हमले हुए हैं, जिनमें सीमावर्ती जिलों के पुलिस प्रतिष्ठानों को भी निशाना बनाया गया।</span></p><h5 class=""><b>‘करीब 60 हजार NDPS मामले लंबित’</b></h5><p>तरुण चुग ने कहा कि पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने नवंबर 2025 में राज्य में नशे की स्थिति को गंभीर संकट बताया था। उन्होंने गृह मंत्रालय की हालिया समीक्षा का हवाला देते हुए दावा किया कि पंजाब में करीब 60 हजार NDPS मामले लंबित हैं।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने सवाल उठाया कि इतने बड़े लंबित मामलों के बावजूद राज्य में एक भी विशेष NDPS न्यायालय कार्यरत नहीं है।</span></p><p>चुग ने कहा कि नशे के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के लिए केवल पुलिस कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। इसके लिए तेज न्यायिक प्रक्रिया, प्रभावी जांच और नशे की गिरफ्त में आए युवाओं के पुनर्वास की भी जरूरत है।</p><h5 class=""><b>‘AAP सरकार नशे और अपराध पर रोक लगाने में विफल’</b></h5><p>तरुण चुग ने पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने सत्ता में आने से पहले नशे के खिलाफ बड़े वादे किए थे, लेकिन मौजूदा स्थिति उन दावों पर सवाल खड़े करती है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">चुग ने कहा कि पंजाब को नशे और अपराध की स्थिति में धकेलने के लिए अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) और मुख्यमंत्री भगवंत मान (Bhagwant Mann) को जवाब देना चाहिए।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का मुद्दा नहीं है, बल्कि पंजाब की एक पूरी पीढ़ी के भविष्य और देश की सुरक्षा से जुड़ा प्रश्न है।</span></p><h5 class=""><b>तरुण चुग ने रखीं तीन प्रमुख मांगें</b></h5><p>राज्यसभा में अपने संबोधन के दौरान तरुण चुग ने केंद्र सरकार से तीन प्रमुख कदम उठाने की मांग की—</p><ul><li>नशा प्रभावित जिलों में विशेष NDPS न्यायालयों की स्थापना।</li><li>पंजाब की 553 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर एंटी-ड्रोन सिस्टम की तैनाती को सर्वोच्च प्राथमिकता।</li><li>सीमावर्ती जिलों के युवाओं के लिए पुनर्वास और रोजगार का विशेष पैकेज।</li></ul><p><span style="font-size: 1rem;">तरुण चुग ने</span>&nbsp;कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखना राज्य सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है, लेकिन पंजाब की अंतरराष्ट्रीय सीमा को देखते हुए नशा तस्करी और ड्रोन गतिविधियां राष्ट्रीय सुरक्षा से भी सीधे जुड़ी हुई हैं।</p><h5 class=""><b>पंजाब में नशे के खिलाफ बहस फिर तेज</b></h5><p>राज्यसभा में उठाए गए इस मुद्दे के बाद पंजाब में नशे की समस्या, लंबित NDPS मामलों, सीमा पार से ड्रोन गतिविधियों और कानून व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस फिर तेज होने की संभावना है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">हालांकि, चुग द्वारा सदन में रखे गए आंकड़ों और आरोपों के संदर्भ में संबंधित सरकारी रिकॉर्ड और जांच एजेंसियों की आधिकारिक रिपोर्ट अंतिम तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण होंगी।</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ ‘नशे और अपराध की आग में झोंका पंजाब’, राज्यसभा में तरुण चुग का AAP सरकार पर हमला... ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/gtc-gurbani-broadcast-sgpc-affidavit-2008-5813 ]]></guid><title><![CDATA[ गुरबाणी प्रसारण: GTC Network के MD & President रबींद्र नारायण ने साझा किया 2008 का SGPC शपथपत्र ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/gtc-gurbani-broadcast-sgpc-affidavit-2008-5813 ]]></link><pubDate><![CDATA[Sun, 09 Aug 2026 19:50:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ चंडीगढ़, पंजाब: गुरबाणी कीर्तन को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने और विभिन्न प्लेटफॉर्म पर इसके प्रसारण को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच GTC Network के Founder, Managing Director (MD) एवं ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>चंडीगढ़, पंजाब: </b>गुरबाणी कीर्तन को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने और विभिन्न प्लेटफॉर्म पर इसके प्रसारण को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच GTC Network के Founder, Managing Director (MD) एवं President&nbsp;</span>श्री रबींद्र नारायण जी<span style="font-size: 1rem;">&nbsp;ने अपने Facebook पोस्ट के जरिए वर्ष 2008 में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में दाखिल SGPC के एक शपथपत्र (affidavit) को सार्वजनिक चर्चा में लाया है।</span></p><p><span style="font-size: 1rem;">श्री रबींद्र नारायण जी</span>&nbsp;ने अपने पोस्ट में C.W.P. No. 16097 of 2007 से जुड़े दस्तावेज की तस्वीर साझा करते हुए SGPC की ओर से अदालत में दाखिल affidavit के एक महत्वपूर्ण अंश का उल्लेख किया है। पोस्ट के अनुसार, यह affidavit 10 मार्च 2008 को दाखिल किया गया था।</p><h5 class=""><b>‘सभी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हो गुरबाणी कीर्तन’</b></h5><p><span style="font-size: 1rem;">श्री रबींद्र नारायण जी</span>&nbsp;द्वारा साझा किए गए दस्तावेज के मुताबिक, affidavit के पैराग्राफ 3 में SGPC की ओर से कहा गया था कि उसका प्रयास है कि श्री हरमंदिर साहिब, अमृतसर से प्रसारित होने वाला गुरबाणी कीर्तन सभी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हो, ताकि दुनिया भर में अधिक से अधिक दर्शक, सिख और गैर-सिख, इसका लाभ उठा सकें।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">इस शपथपत्र में गुरबाणी कीर्तन को व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराने और अधिकतम लोगों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया था।</span></p><p><img src="https://media.gtcbharat.com/wp-content/uploads/2026/08/FBIMG1786280605197jpg_cbd5650ec771e96e0b093fb44e02a7b2_1400X1190.webp" style="width: 599.438px;"><span style="font-size: 1rem;"><br></span></p><h5 class=""><b>GTC Punjabi के प्रसारण प्रयास का भी किया उल्लेख</b></h5><p>अपने Facebook पोस्ट में GTC Network के Founder, MD एवं President श्री रबींद्र नारायण जी&nbsp;ने इस पुराने शपथपत्र को वर्तमान समय में गुरबाणी प्रसारण से जोड़ते हुए GTC Punjabi के प्रयासों का उल्लेख किया।&nbsp;</p><p>पोस्ट के मुताबिक, GTC Punjabi श्री हरमंदिर साहिब से आने वाली गुरबाणी फीड को DD Free Dish सहित उन प्लेटफॉर्म और घरों तक पहुंचा रहा है,&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">जहां यह पहले उपलब्ध नहीं थी।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">पोस्ट में दावा किया गया है कि यह प्रसारण बिना किसी विज्ञापन और व्यावसायिक राजस्व के उद्देश्य के किया जा रहा है।</span></p><p>&lt;iframe src="https://www.facebook.com/plugins/post.php?href=https://www.facebook.com/RabindraNarayanGTC/posts/pfbid0eShGsjgcoTm1JTrXMDAdgBLQBzHK4tkpdUma1yiChfZpHLRbYfHosrDsL4bSqF28l&amp;show_text=true&amp;width=500" width="500" height="651" style="border:none;overflow:hidden" scrolling="no" frameborder="0" allowfullscreen="true" allow="autoplay; clipboard-write; encrypted-media; picture-in-picture; web-share"&gt;&lt;/iframe&gt;</p><h5 class=""><b>‘हम SGPC की कही बात का उल्लंघन नहीं, पालन कर रहे हैं’</b></h5><p>श्री रबींद्र नारायण जी ने अपने पोस्ट में SGPC के 2008 के affidavit का हवाला देते हुए कहा कि यदि SGPC ने अदालत के समक्ष गुरबाणी कीर्तन को सभी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने और अधिक से अधिक दर्शकों तक पहुंचाने की बात कही थी, तो आज संगत तक गुरबाणी पहुंचाने के प्रयास को उसी भावना के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">पोस्ट में उनका कहना है कि GTC Punjabi SGPC की उस समय अदालत में दर्ज कराई गई स्थिति का उल्लंघन नहीं कर रहा, बल्कि उसे पूरा कर रहा है।</span></p><p>&lt;iframe src="https://www.facebook.com/plugins/video.php?height=314&amp;href=https://www.facebook.com/reel/1034018379492646/&amp;show_text=false&amp;width=560&amp;t=0" width="560" height="314" style="border:none;overflow:hidden" scrolling="no" frameborder="0" allowfullscreen="true" allow="autoplay; clipboard-write; encrypted-media; picture-in-picture; web-share" allowFullScreen="true"&gt;&lt;/iframe&gt;</p><h5 class=""><b>‘गुरबाणी संगत की है’</b></h5><p><span style="font-size: 1rem;">श्री रबींद्र नारायण जी</span>&nbsp;ने अपने Facebook पोस्ट में गुरबाणी के व्यापक प्रसारण को संगत के हित से जोड़ते हुए लिखा कि<b> “Gurbani belongs to the sangat. SGPC said so. On oath.”</b>&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उनके द्वारा साझा किए गए दस्तावेज ने गुरबाणी प्रसारण को लेकर पहुंच, प्लेटफॉर्म की उपलब्धता और अधिक से अधिक संगत तक पवित्र गुरबाणी पहुंचाने के मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है।</span></p><p>वर्ष 2008 के इस affidavit के संदर्भ में अब यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है कि उस समय अदालत के समक्ष व्यक्त की गई SGPC की स्थिति को वर्तमान डिजिटल और टेलीविजन प्रसारण व्यवस्था में किस तरह देखा जाता है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ गुरबाणी प्रसारण: GTC Network के MD & President रबींद्र नारायण ने साझा किया 2008 का SGPC शपथपत्र ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/gtc-punjabi-gurbani-dd-free-dish-5796 ]]></guid><title><![CDATA[ DD Free Dish पर घर-घर पहुंचेगी गुरबाणी, GTC पंजाबी की पहल का अकाली दल नेताओं ने किया स्वागत... ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/gtc-punjabi-gurbani-dd-free-dish-5796 ]]></link><pubDate><![CDATA[Sat, 08 Aug 2026 19:07:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ चंडीगढ़, पंजाब: GTC पंजाबी द्वारा DD Free Dish के जरिए श्री दरबार साहिब से लाइव गुरबाणी के प्रसारण की सुविधा उपलब्ध कराने के फैसले की शिरोमणि अकाली दल (पुनर्सुरजीत) के प्रमुख नेताओं ने सराहना की है। प ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>चंडीगढ़, पंजाब: </b>GTC पंजाबी द्वारा DD Free Dish के जरिए श्री दरबार साहिब से लाइव गुरबाणी के प्रसारण की सुविधा उपलब्ध कराने के फैसले की शिरोमणि अकाली दल (पुनर्सुरजीत) के प्रमुख नेताओं ने सराहना की है। पार्टी नेताओं ने इसे संगत के लिए ऐतिहासिक और लंबे समय से प्रतीक्षित सेवा बताया है।</span></p><p>पार्टी के मुख्य प्रवक्ता एवं वरिष्ठ उपाध्यक्ष सरदार करनैल सिंह पीर मोहम्मद, महासचिव सरदार दविंदर सिंह सोढ़ी, महासचिव सरदार जग रूप सिंह चीमा, उपाध्यक्ष सरदार गुरमुख सिंह संधू, उपाध्यक्ष डॉ. कारज सिंह धर्म सिंह वाला और मीडिया सचिव सरदार तेजिंदर सिंह पन्नू ने संयुक्त बयान जारी कर GTC पंजाबी के इस फैसले का स्वागत किया।</p><h5 class=""><b>DD Free Dish पर सुबह-शाम गुरबाणी का प्रसारण</b></h5><p>अकाली नेताओं के मुताबिक, GTC पंजाबी ने DD Free Dish दर्शकों के लिए श्री दरबार साहिब से सुबह की गुरबाणी के साथ-साथ शाम की गुरबाणी और रहिरास साहिब के पाठ को भी उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि इससे उन परिवारों को विशेष लाभ मिलेगा, जो पेड DTH या केबल सेवाओं की जगह मुफ्त DD Free Dish पर निर्भर हैं।</p><p>नेताओं ने कहा कि DD Free Dish देश के बड़े मुफ्त टेलीविजन प्लेटफॉर्म में शामिल है और इसकी पहुंच गांवों, कस्बों और आम परिवारों तक है। उनके अनुसार, इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से गुरबाणी को अधिक से अधिक घरों तक पहुंचाने से संगत को धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से जुड़ने का अवसर मिलेगा।</p><h5 class=""><b>'सालों में जो नहीं हुआ, GTC पंजाबी ने कर दिखाया'</b></h5><p>शिरोमणि अकाली दल (पुनर्सुरजीत) के नेताओं ने दावा किया कि जो काम शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) और PTC वर्षों में नहीं कर सके, वह GTC पंजाबी ने DD Free Dish के माध्यम से करने की पहल की है। उन्होंने कहा कि अब दर्शक सुबह अमृत वेले की गुरबाणी से जुड़ने के साथ शाम को रहिरास साहिब और गुरबाणी का आनंद भी ले सकेंगे।</p><p>नेताओं ने इस पहल को विशेष रूप से ग्रामीण और छोटे कस्बों में रहने वाले परिवारों के लिए महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना है कि ऐसे कई परिवार हैं, जो भुगतान वाली केबल या DTH सेवाओं की बजाय मुफ्त DD Free Dish का इस्तेमाल करते हैं।</p><h5 class=""><b>'गुरबाणी तक हर परिवार की पहुंच होनी चाहिए'</b></h5><p>अकाली नेताओं ने कहा कि पवित्र गुरबाणी को किसी एक व्यावसायिक मंच या प्रसारक तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि जिस भी घर तक गुरबाणी पहुंच सकती है, वहां तक इसे पहुंचाने का प्रयास होना चाहिए और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को भी गुरबाणी सुनने का समान अधिकार मिलना चाहिए।</p><p>उन्होंने SGPC से भी अपील की कि गुरबाणी के प्रसार को सीमित करने के बजाय इसे अधिक से अधिक माध्यमों और प्लेटफॉर्म तक पहुंचाने की दिशा में काम किया जाए।</p><h5 class=""><b>'तकनीक संगत और गुरु घर के बीच पुल बन सकती है'</b></h5><p>नेताओं ने कहा कि GTC पंजाबी की यह पहल दिखाती है कि यदि तकनीक का इस्तेमाल सेवा की भावना से किया जाए तो वह संगत और गुरु घर के बीच दूरी कम करने का माध्यम बन सकती है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने कहा कि यह किसी एक चैनल की जीत नहीं बल्कि पूरी संगत की जीत है। उनके मुताबिक, किसी गांव के सामान्य परिवार के घर में शाम के समय रहिरास साहिब की आवाज पहुंचना ही इस पहल की सबसे बड़ी सफलता होगी।</span></p><p class="grey-bg-red"><b><i>नोट: प्रसार भारती की अप्रैल 2026 की आधिकारिक DD Free Dish चैनल सूची में GTC Punjabi को भी शामिल किया गया है।</i></b></p><p><img src="https://media.gtcbharat.com/wp-content/uploads/2026/08/GTC-Punjabi_9a01b1fe9792324a93eb690ae592939f_1225X795.webp" style="width: 599.438px;"><b><i><br></i></b></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ DD Free Dish पर घर-घर पहुंचेगी गुरबाणी, GTC पंजाबी की पहल का अकाली दल नेताओं ने किया स्वागत... ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/pm-modi-sukhbir-singh-badal-meeting-bjp-akali-alliance-punjab-5779 ]]></guid><title><![CDATA[ पीएम मोदी से सुखबीर बादल की मुलाकात, पंजाब में BJP-अकाली दल गठबंधन की अटकलें तेज ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/pm-modi-sukhbir-singh-badal-meeting-bjp-akali-alliance-punjab-5779 ]]></link><pubDate><![CDATA[Fri, 07 Aug 2026 15:10:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ नई दिल्ली: पंजाब की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की, जिसके बाद राज्य में भारतीय जनता पार्टी (BJP ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>नई दिल्ली:</b> पंजाब की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की, जिसके बाद राज्य में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और अकाली दल के बीच संभावित गठबंधन को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि, दोनों दलों की ओर से मुलाकात को लेकर गठबंधन पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।</span></p><p>सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री आवास पर हुई इस मुलाकात में पंजाब के राजनीतिक हालात, किसानों से जुड़े मुद्दों और राज्य के विकास सहित कई विषयों पर चर्चा हुई। हालांकि बैठक के एजेंडे की आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">सुखबीर सिंह बादल और भाजपा के बीच संबंध वर्ष 2020 में कृषि कानूनों के मुद्दे पर टूट गए थे, जब शिरोमणि अकाली दल ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) से अलग होने का फैसला किया था। इसके बाद दोनों दल अलग-अलग चुनाव लड़ते रहे हैं।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;STORY | Shiromani Akali Dal chief Sukhbir Singh Badal meets PM Modi&lt;br&gt;&lt;br&gt;Shiromani Akali Dal (SAD) president Sukhbir Singh Badal on Friday met Prime Minister Narendra Modi, igniting speculation about the possibility of the Punjab-based party joining hands with the BJP again ahead of… &lt;a href="https://t.co/wN4f2l9nK8"&gt;pic.twitter.com/wN4f2l9nK8&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Press Trust of India (@PTI_News) &lt;a href="https://x.com/PTI_News/status/2085647850705477982?ref_src=twsrc^tfw"&gt;August 7, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><h5 class=""><b>चुनाव से पहले इस मुलाक़ात के हैं कई मायने</b></h5><p>पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले इस मुलाकात को राजनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि दोनों दलों के बीच बातचीत आगे बढ़ती है तो राज्य की सियासत में नए समीकरण बन सकते हैं। हालांकि फिलहाल गठबंधन को लेकर किसी भी पक्ष ने औपचारिक पुष्टि नहीं की है।</p><h5 class=""><b>फिलहाल, कोई आधिकारिक बयान नहीं आया</b></h5><p>गौरतलब है कि हाल के दिनों में प्रधानमंत्री मोदी ने पंजाब में अपने सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान भाजपा को राज्य में मजबूत विकल्प के रूप में पेश किया था। ऐसे में सुखबीर बादल की यह मुलाकात आगामी राजनीतिक रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। फिलहाल सभी की नजर दोनों दलों की ओर से आने वाले आधिकारिक बयान पर टिकी है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ पीएम मोदी से सुखबीर बादल की मुलाकात, पंजाब में BJP-अकाली दल गठबंधन की अटकलें तेज ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-congress-crisis-warring-vs-channi-explained-5745 ]]></guid><title><![CDATA[ Punjab Congress Crisis Explained: पोस्टर वॉर से ‘Go Back Baghel’ तक, आखिर क्यों बंटी कांग्रेस? ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-congress-crisis-warring-vs-channi-explained-5745 ]]></link><pubDate><![CDATA[Tue, 04 Aug 2026 19:47:04 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ नई दिल्ली: पंजाब में विधानसभा चुनाव अभी कुछ महीने दूर हैं, लेकिन कांग्रेस के भीतर चुनाव अभी से शुरू हो चुका है, और यह चुनाव सीटों का नहीं, चेहरे का है। पार्टी अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size: 11pt; font-family: Arial, sans-serif; color: rgb(0, 0, 0); background-color: transparent; font-style: normal; font-variant: normal; text-decoration: none; vertical-align: baseline; white-space: pre-wrap;"><b>नई दिल्ली:</b></span><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;"> पंजाब में विधानसभा चुनाव अभी कुछ महीने दूर हैं, लेकिन कांग्रेस के भीतर चुनाव अभी से शुरू हो चुका है, और यह चुनाव सीटों का नहीं, चेहरे का है। पार्टी अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के बीच शुरू हुई खींचतान अब पोस्टर वॉर, मंच से नारेबाज़ी और सार्वजनिक बयानबाज़ी तक पहुंच चुकी है। हैरानी की बात यह है कि इस विवाद का दायरा अब सिर्फ दो प्रदेश नेताओं तक सीमित नहीं रहा,&nbsp; पार्टी प्रभारी भूपेश बघेल के खिलाफ भी “गो बैक बघेल” के पोस्टर लग चुके हैं, जो सीधे हाईकमान को चुनौती देने जैसा माना जा रहा है।</span></p><p><b style="font-weight:normal;" id="docs-internal-guid-e2bafd33-7fff-59d8-6974-ec5fa9ea6179"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">मौजूदा विवाद की जड़ें 2022 विधानसभा चुनाव की हार से जुड़ी मानी जाती हैं। उस चुनाव में कांग्रेस बुरी तरह हारी थी और सीटें 80 से घटकर 18 पर आ गई थीं। हार के बाद पार्टी ने संगठन में बड़े बदलाव किए और राजा वड़िंग को पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया। 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने पंजाब की 13 में से 7 सीटें जीतकर कुछ हद तक वापसी के संकेत भी दिए। लेकिन जैसे-जैसे 2027 विधानसभा चुनाव करीब आने लगा, पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर मतभेद खुलकर सामने आने लगे।</span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">इसी दौर में पार्टी ने पूरे पंजाब में “हर बूथ कांग्रेस मजबूत” अभियान शुरू किया, जिसका मकसद बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करना और कार्यकर्ताओं को चुनाव के लिए तैयार करना था। लेकिन कई जिलों में यही अभियान संगठन की ताकत दिखाने की बजाय अंदरूनी टकराव की तस्वीर बनकर सामने आया।</span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size: 11pt; font-family: Arial, sans-serif; color: rgb(0, 0, 0); background-color: transparent; font-style: normal; font-variant: normal; text-decoration: none; vertical-align: baseline; white-space: pre-wrap;"><b>बठिंडा की बैठक जहां सब कुछ खुलकर सामने आया</b></span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">सबसे ज्यादा चर्चा बठिंडा की बैठक की हुई। हर बूथ कांग्रेस मजबूत मुहिम के तहत हुई इस मीटिंग में जैसे ही राजा वड़िंग बोलना शुरू करते हैं, चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थक “चन्नी जिंदाबाद” और “राजा वड़िंग हटाओ, कांग्रेस बचाओ” के नारे लगाते हुए बाहर निकल जाते हैं। राजा वड़िंग उन्हें बार-बार बैठने की अपील करते रहे, लेकिन विरोध जारी रहा।</span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">इससे पहले मानसा, संगरूर, बरनाला और पटियाला में भी कांग्रेस के कार्यक्रमों में इसी तरह की नारेबाज़ी की तस्वीरें सामने आ चुकी हैं। संगरूर की घटना में शामिल कुछ लोगों को कांग्रेस के मौजूदा नगर पार्षद और ज़िला परिषद सदस्य बताया गया।</span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size: 11pt; font-family: Arial, sans-serif; color: rgb(0, 0, 0); background-color: transparent; font-style: normal; font-variant: normal; text-decoration: none; vertical-align: baseline; white-space: pre-wrap;"><b>एक फोन कॉल जो नहीं उठाई गई</b></span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">बठिंडा कार्यक्रम के दौरान जब कुछ कार्यकर्ताओं ने ‘चन्नी जिंदाबाद’ के नारे लगाए, तो राजा वड़िंग ने नारे लगाने वाले एक युवक को खुद मंच पर बुला लिया और वहीं से चरणजीत सिंह चन्नी को फोन लगाने के लिए कहा। युवक ने फोन मिलाया, लेकिन चन्नी ने कॉल रिसीव नहीं की। इसके बाद राजा वड़िंग ने मंच से तंज कसते हुए कहा - “अपना नंबर रख लो... जब चन्नी साहब फोन करेंगे, तब मैं उठा लूंगा।” इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हुआ।</span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">इस घटना के बाद उस युवक को लेकर भी कई दावे सामने आए। पुलिस के हवाले से कुछ रिपोर्टों में कहा गया कि मई 2025 में उस पर 506 ग्राम हेरोइन के साथ गिरफ़्तार होने का आरोप है और वह फिलहाल ज़मानत पर बाहर है। यह मामला जांच का विषय है और अदालत में सिद्ध नहीं हुआ है, इसलिए इसे अंतिम तथ्य के तौर पर नहीं देखा जा सकता। चरणजीत सिंह चन्नी के करीबियों ने कहा है कि वे इस युवक को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते।</span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">इसके बाद राजा वड़िंग अपने गृह ज़िले मुक्तसर साहिब पहुंचे, जहां वे सार्वजनिक तौर पर भावुक हो गए। उन्होंने कहा - “आज मुझे यहां आकर शांति मिली है, क्योंकि मैं अपने घर आ गया हूं... कुछ अपने भी बेगाने हो गए... मेरा कसूर सिर्फ इतना है कि जब कोई प्रधान नहीं बन रहा था, तब मुझे बना दिया गया।”:उन्होंने यह भी साफ किया कि वे प्रधान पद से इस्तीफा नहीं देंगे, क्योंकि हाईकमान ने उन्हें ऐसा कोई संकेत नहीं दिया है। वहीं चन्नी के साथ रिश्तों पर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा - “चन्नी साहब मेरे बड़े भाई हैं... अगर कोई नाराज़गी है, तो वही बता सकते हैं।”</span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size: 11pt; font-family: Arial, sans-serif; color: rgb(0, 0, 0); background-color: transparent; font-style: normal; font-variant: normal; text-decoration: none; vertical-align: baseline; white-space: pre-wrap;"><b>पोस्टर वॉर: जब दीवारों पर लड़ाई लड़ी जाने लगी</b></span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">बठिंडा की घटना अकेली नहीं थी। पंजाब के अलग-अलग जिलों में पोस्टर वॉर भी खुलकर सामने आने लगी। जहां चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थन में पोस्टर लगते, वहां राजा वड़िंग की तस्वीर गायब मिलती। और जहां वड़िंग के हक़ में पोस्टर लगते, वहां चन्नी का चेहरा नदारद रहता।</span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">मुक्तसर साहिब में - जो राजा वड़िंग का अपना गृह ज़िला है - पार्टी प्रभारी भूपेश बघेल के खिलाफ पोस्टर लगे। भूपेश बघेल को अंग्रेज़ी हुकूमत के अफसर साइमन के रूप में दिखाया गया और नीचे लिखा गया “गो बैक बघेल”। कुछ जगहों पर “राजा-बघेल हटाओ, पंजाब बचाओ” जैसे पोस्टर भी सामने आए। माना जा रहा है कि यह पोस्टर चन्नी समर्थकों ने लगाए, हालांकि किसी पोस्टर पर यह स्पष्ट नहीं लिखा कि इसे किसने छपवाया या लगवाया।</span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">उधर फिरोज़पुर में चन्नी के समर्थन और विरोध, दोनों तरह के पोस्टर सामने आए। एक तरफ फिरोज़पुर के एक कार्यक्रम के पोस्टर में राजा वड़िंग की तस्वीर गायब मिली, तो दूसरी तरफ फिरोज़पुर कैंट में विवादित पोस्टर लगे जिनमें चन्नी को आरएसएस की वर्दी में दिखाया गया - नीचे लिखा गया "चन्नी भगाओ, कांग्रेस बचाओ" और "राहुल गांधी जी सुनो कांग्रेसियों की पुकार, चन्नी को करो कांग्रेस से बाहर।" इन पोस्टरों पर भी यह साफ नहीं है कि इन्हें किसने लगवाया।</span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size: 11pt; font-family: Arial, sans-serif; color: rgb(0, 0, 0); background-color: transparent; font-style: normal; font-variant: normal; text-decoration: none; vertical-align: baseline; white-space: pre-wrap;"><b>हाईकमान का नुमाइंदा भी निशाने पर</b></span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">“गो बैक बघेल” के पोस्टर लगने के साथ ही यह विवाद एक नया मोड़ ले चुका है। भूपेश बघेल कोई प्रदेश स्तर के नेता नहीं हैं - वे हाईकमान की तरफ से भेजे गए पार्टी प्रभारी हैं। ऐसे में जब उनके खिलाफ ही नारे लगें और उनकी तस्वीर पर सवाल उठें, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या पंजाब के कार्यकर्ता अब सिर्फ आपस में नहीं लड़ रहे, बल्कि सीधे दिल्ली की कमान को भी चुनौती दे रहे हैं।</span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">भूपेश बघेल लगातार यह कहते रहे कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और कार्यकर्ताओं के बीच जो मतभेद दिखाई दे रहे हैं, उन्हें बातचीत से सुलझा लिया जाएगा। लेकिन ज़मीनी तस्वीर कुछ और ही कहानी कह रही है। पोस्टर, नारे, मंचों से खुले बयान - और अब हाईकमान के प्रतिनिधि तक पहुंचा विरोध - यह साफ संकेत देते हैं कि यह विवाद सिर्फ संगठनात्मक मतभेद नहीं, बल्कि पार्टी अनुशासन की भी बड़ी परीक्षा बन चुका है।</span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">विवाद बढ़ने के बीच कांग्रेस हाईकमान ने सार्वजनिक तौर पर संगठनात्मक अनुशासन पर ज़ोर देना शुरू कर दिया है। पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल ने हालिया बैठकों में कार्यकर्ताओं को चेतावनी दी कि पार्टी के भीतर अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है। उन्होंने यह भी दोहराया कि पंजाब कांग्रेस में मुख्यमंत्री का चेहरा चुनाव से पहले नहीं, बल्कि चुनाव के बाद विधायक दल और हाईकमान के निर्णय से तय होगा।</span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size: 11pt; font-family: Arial, sans-serif; color: rgb(0, 0, 0); background-color: transparent; font-style: normal; font-variant: normal; text-decoration: none; vertical-align: baseline; white-space: pre-wrap;"><b>संगठन बनाम चेहरा: असली विवाद किस बात का है</b></span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">पंजाब कांग्रेस के भीतर अब दो अलग-अलग राजनीतिक सोच आमने-सामने हैं। राजा वड़िंग और उनके समर्थकों का कहना है कि पार्टी की पहली प्राथमिकता संगठन को मजबूत करना है - पहले बूथ स्तर पर तैयारी, फिर चुनाव, और उसके बाद विधायक दल व हाईकमान मिलकर तय करेंगे कि मुख्यमंत्री का चेहरा कौन होगा। उनका तर्क है कि चेहरा तय करने की जल्दबाज़ी चुनाव से पहले संगठन को कमज़ोर कर सकती है।</span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">दूसरी तरफ, चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थकों का मानना है कि पंजाब में कांग्रेस का सबसे लोकप्रिय चेहरा चन्नी ही हैं, और 2027 में सत्ता में वापसी करनी है तो मुख्यमंत्री का चेहरा अभी से घोषित कर देना चाहिए। बठिंडा समेत कई बैठकों में कार्यकर्ताओं ने खुलकर यह मांग दोहराई है।</span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">इस पूरे विवाद के बीच एक बात लगभग साफ दिखाई दे रही है। हाईकमान फिलहाल राजा वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखने के फैसले पर कायम है। भूपेश बघेल पहले भी सार्वजनिक तौर पर कह चुके हैं कि प्रदेश अध्यक्ष बदलना "गुड़्डा-गुड़्डी का खेल नहीं" है। वहीं चन्नी समर्थक लगातार अपनी आपत्तियां हाईकमान के सामने रखते रहे हैं, लेकिन अब तक संगठन में किसी बड़े बदलाव का संकेत नहीं मिला है। ऐसे में माना जा रहा है कि कांग्रेस फिलहाल नेतृत्व परिवर्तन की बजाय संगठन को चुनाव तक स्थिर रखने की रणनीति पर काम कर रही है।&nbsp;</span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">यानी बहस अब सिर्फ राजा वड़िंग और चरणजीत सिंह चन्नी के बीच की नहीं रही - यह संगठन बनाम चेहरा, और रणनीति बनाम लोकप्रियता की बहस बन चुकी है।</span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size: 11pt; font-family: Arial, sans-serif; color: rgb(0, 0, 0); background-color: transparent; font-style: normal; font-variant: normal; text-decoration: none; vertical-align: baseline; white-space: pre-wrap;"><b>पहले भी दोहरा चुकी है कांग्रेस यह गलती</b></span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">पंजाब कांग्रेस की यह खींचतान अकेली नहीं है - यह कांग्रेस के लिए एक दोहराया जाने वाला पैटर्न बन चुका है। राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच लंबे समय तक टकराव चला। हरियाणा में भूपेंद्र सिंह हुड्डा और कुमारी सैलजा के मतभेद खुलकर सामने आए। मध्य प्रदेश में कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया की खींचतान आखिरकार पार्टी के टूटने तक पहुंच गई। और खुद पंजाब में 2021 में कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के विवाद ने कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक नुकसान पहुंचाया था।</span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से पहले किसी भी पार्टी की सबसे बड़ी ताकत उसका एकजुट संगठन होता है। लेकिन अगर कार्यकर्ता ही अलग-अलग गुटों में बंट जाएं, तो चुनावी तैयारी कमज़ोर पड़ जाती है, क्योंकि जनता सिर्फ नेताओं के बयान नहीं देखती, बल्कि यह भी देखती है कि पार्टी खुद कितनी एकजुट है।</span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size: 11pt; font-family: Arial, sans-serif; color: rgb(0, 0, 0); background-color: transparent; font-style: normal; font-variant: normal; text-decoration: none; vertical-align: baseline; white-space: pre-wrap;"><b>विपक्ष की प्रतिक्रिया</b></span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">इस पूरे विवाद पर आम आदमी पार्टी लगातार कह रही है कि यह कांग्रेस की अपनी आंतरिक लड़ाई है और उसका इससे कोई लेना-देना नहीं। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कटाक्ष करते हुए कहा - "हमें कांग्रेस की तरफ ध्यान देने की ज़रूरत नहीं, वे तो अपनी बेड़ी आप ही डुबा रहे हैं।"</span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">वहीं भाजपा की तरफ से यह कहा गया कि कांग्रेस के नेता कुर्सी की लड़ाई में उलझे हैं और पार्टी के पास पंजाब के लिए कोई ठोस विज़न नहीं बचा। दोनों ही पक्षों ने एक-दूसरे पर इस गुटबाज़ी को हवा देने के आरोप भी लगाए हैं, हालांकि इन आरोपों के समर्थन में अब तक कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है।</span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">आगे क्या</span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">अब निगाहें सिर्फ पंजाब कांग्रेस पर नहीं... बल्कि कांग्रेस हाईकमान के अगले कदम पर भी टिकी हैं। हाल के घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि मतभेद अब बंद कमरों तक सीमित नहीं रहे। नारेबाज़ी, पोस्टर वॉर और सार्वजनिक बयानबाज़ी ने पार्टी के भीतर की खाई को खुलकर सामने ला दिया है।&nbsp;</span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या हाईकमान अनुशासन के जरिए इस विवाद को थामेगी... या फिर चुनाव से पहले किसी बड़े राजनीतिक फैसले का रास्ता चुनेगी? आने वाले दिनों में यही तय करेगा कि पंजाब कांग्रेस 2027 की तैयारी एकजुट होकर करेगी... या फिर अंदरूनी कलह उसके लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी रहेगी।</span></p><p><br></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ Punjab Congress Crisis Explained: पोस्टर वॉर से ‘Go Back Baghel’ तक, आखिर क्यों बंटी कांग्रेस? ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-high-court-da-dr-arrears-6-lakh-employees-pensioners-payment-5720 ]]></guid><title><![CDATA[ Punjab High Court का बड़ा फैसला, 6 लाख कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिलेगा बकाया DA-DR एरियर ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-high-court-da-dr-arrears-6-lakh-employees-pensioners-payment-5720 ]]></link><pubDate><![CDATA[Mon, 03 Aug 2026 13:22:52 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ पंजाब के करीब छह लाख सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने बकाया महंगाई भत्ता (Dearness Allowance-DA) और महंगाई राहत (Dearness Relief-DR) स ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p>पंजाब के करीब छह लाख स<b>रकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स </b>के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने बकाया <b>महंगाई भत्ता (Dearness Allowance-DA)</b> और <b>महंगाई राहत (Dearness Relief-DR) </b>से जुड़े मामले में राज्य सरकार की अपील को खारिज करते हुए कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकार को बकाया राशि का भुगतान करना होगा और इसके साथ 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।</p><p>यह फैसला उन कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए अहम माना जा रहा है, जो पिछले कई वर्षों से अपने लंबित डीए और डीआर एरियर की मांग कर रहे थे। अदालत के इस आदेश के बाद अब सरकार पर भुगतान की प्रक्रिया जल्द शुरू करने का दबाव बढ़ गया है।</p><h5 class=""><b>सरकार की अपील नहीं हुई स्वीकार</b></h5><p>राज्य सरकार ने पहले सिंगल बेंच के फैसले को चुनौती देते हुए लेटर्स पेटेंट अपील (LPA) दायर की थी। सरकार का पक्ष था कि वित्तीय बोझ और अन्य प्रशासनिक कारणों को देखते हुए भुगतान टालना उचित था। हालांकि, हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने सरकार के तर्कों को स्वीकार नहीं किया और सिंगल बेंच के आदेश को बरकरार रखा।</p><p>अदालत ने कहा कि कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को मिलने वाला डीए और डीआर उनका वैधानिक अधिकार है। इसलिए इसका भुगतान अनिश्चितकाल तक रोका नहीं जा सकता।</p><h5 class=""><b>6% ब्याज के साथ मिलेगा भुगतान</b></h5><p>हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि राज्य सरकार को बकाया डीए और डीआर का भुगतान केवल मूल राशि तक सीमित नहीं रखना होगा, बल्कि उस पर 6 प्रतिशत ब्याज भी देना होगा। इससे कर्मचारियों और पेंशनर्स को आर्थिक रूप से अतिरिक्त राहत मिलने की उम्मीद है।<br></p><p>विशेषज्ञों का मानना है कि ब्याज के साथ भुगतान का निर्देश भविष्य में ऐसे मामलों में सरकारों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश होगा कि कर्मचारियों के वैधानिक वित्तीय अधिकारों में अनावश्यक देरी उचित नहीं मानी जाएगी।</p><h5 class=""><b>लंबे समय से चल रही थी मांग</b></h5><p>पंजाब के कर्मचारी संगठन और पेंशनर्स एसोसिएशन पिछले काफी समय से बकाया डीए और डीआर के भुगतान की मांग कर रहे थे। उनका कहना था कि महंगाई लगातार बढ़ रही है, लेकिन कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को समय पर उनका वैधानिक लाभ नहीं मिल पा रहा है।<br></p><p>राज्य सरकार ने वर्ष 2025 में घोषणा की थी कि 1 जुलाई 2021 से 31 मार्च 2024 के बीच की अवधि का बढ़ा हुआ डीए और डीआर एरियर फिलहाल जारी नहीं किया जाएगा। इसके बाद विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने अदालत का रुख किया था।<br></p><h5 class=""><b>पहले भी अदालत दे चुकी थी टिप्पणी</b></h5><p>इससे पहले मार्च में भी पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा था कि डीए और डीआर कर्मचारियों तथा पेंशनभोगियों का कानूनी अधिकार है। अदालत ने संकेत दिया था कि सरकार वित्तीय कारणों का हवाला देकर इस भुगतान को अनिश्चितकाल तक नहीं रोक सकती।</p><p>अब डिवीजन बेंच के फैसले ने उस कानूनी स्थिति को और मजबूत कर दिया है, जिससे कर्मचारियों की उम्मीदें बढ़ गई हैं।</p><h5 class=""><b>सरकार के सामने बढ़ेगी वित्तीय चुनौती</b></h5><p>हाई कोर्ट के आदेश के बाद पंजाब सरकार पर हजारों करोड़ रुपये के संभावित वित्तीय बोझ की चर्चा भी शुरू हो गई है। हालांकि सरकार की ओर से अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि भुगतान किस समयसीमा में किया जाएगा और इसके लिए अलग से बजट की व्यवस्था कैसे होगी।<br></p><p>वित्त विभाग अब अदालत के आदेश का अध्ययन करने के बाद भुगतान की प्रक्रिया और वित्तीय प्रबंधन को लेकर रणनीति तैयार कर सकता है। कर्मचारी संगठनों ने उम्मीद जताई है कि सरकार जल्द आदेश का पालन करेगी ताकि लंबे समय से लंबित भुगतान कर्मचारियों और पेंशनर्स तक पहुंच सके।</p><h5 class=""><b>कर्मचारियों में खुशी का माहौल</b></h5><p>अदालत का फैसला सामने आने के बाद विभिन्न कर्मचारी संगठनों और पेंशनर्स एसोसिएशन ने इसे न्याय की जीत बताया है। उनका कहना है कि लंबे इंतजार के बाद कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को उनका वैधानिक अधिकार मिलने का रास्ता साफ हुआ है।</p><p>यदि सरकार अदालत के आदेश के अनुसार भुगतान करती है, तो राज्य के लाखों परिवारों को आर्थिक राहत मिलेगी और वर्षों से लंबित डीए-डीआर एरियर का इंतजार भी खत्म हो सकेगा।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ Punjab High Court का बड़ा फैसला, 6 लाख कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिलेगा बकाया DA-DR एरियर ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-politics-2027-aap-bjp-dalit-vote-bank-ravidasia-community-5685 ]]></guid><title><![CDATA[ Punjab Politics: दलित वोट बैंक पर AAP-BJP की नजर, रविदासिया समुदाय को साधने की तेज हुई सियासी कवायद ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-politics-2027-aap-bjp-dalit-vote-bank-ravidasia-community-5685 ]]></link><pubDate><![CDATA[Fri, 31 Jul 2026 16:22:44 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ चंडीगढ़: पंजाब में विधानसभा चुनाव भले ही अगले साल होने हों, लेकिन राजनीतिक दलों ने अभी से चुनावी जमीन तैयार करनी शुरू कर दी है। राज्य की राजनीति में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा दलित वोट बैंक को लेकर हो र ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>चंडीगढ़:</b> पंजाब में विधानसभा चुनाव भले ही अगले साल होने हों, लेकिन राजनीतिक दलों ने अभी से चुनावी जमीन तैयार करनी शुरू कर दी है। राज्य की राजनीति में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा दलित वोट बैंक को लेकर हो रही है। पंजाब देश का ऐसा राज्य है, जहां अनुसूचित जाति (दलित) समुदाय की आबादी सबसे अधिक है। ऐसे में <b>2027 विधानसभा चुनाव</b> से पहले प्रमुख राजनीतिक दल इस वर्ग का भरोसा जीतने के लिए अलग-अलग रणनीतियों पर काम कर रहे हैं।</p><p>खास तौर पर रविदासिया समुदाय को लेकर <b>आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) </b>ने अपने अभियान तेज कर दिए हैं। दोनों दल धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक आयोजनों के जरिए इस प्रभावशाली समुदाय के बीच अपनी मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।<br></p><h5 class=""><b>AAP का फोकस सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों पर</b></h5><p>पंजाब की भगवंत मान सरकार ने <b>संत गुरु रविदास की 650वीं जयंती </b>को व्यापक स्तर पर मनाने की योजना बनाई है। इसके लिए पूरे वर्ष का कार्यक्रम कैलेंडर तैयार किया गया है, जिसमें धार्मिक आयोजनों के साथ सामाजिक और शैक्षणिक गतिविधियों को भी शामिल किया गया है।</p><p>सरकार की योजना के तहत जिला स्तर पर कीर्तन दरबार, शोभा यात्राएं, सेमिनार, व्याख्यान और विभिन्न शिक्षण संस्थानों में कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। स्कूलों और कॉलेजों में निबंध लेखन, चित्रकला, भाषण और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताओं के जरिए भी युवाओं को गुरु रविदास के विचारों से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।</p><h5 class=""><b>गांव-गांव पहुंच रही डॉक्यूमेंट्री</b></h5><p>राज्य सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच बनाने के लिए विशेष अभियान भी शुरू किया है। मोबाइल एलईडी वैन के माध्यम से संत गुरु रविदास के जीवन और उनके संदेश पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री गांवों में दिखाई जा रही है।</p><p>सरकारी अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान का उद्देश्य हजारों गांवों तक पहुंचकर समाज के विभिन्न वर्गों को गुरु रविदास के जीवन, समानता और सामाजिक न्याय के संदेश से जोड़ना है।</p><p>इसके अलावा ड्रोन शो, मैराथन, साइकिल रैली, रक्तदान शिविर और अन्य जनभागीदारी कार्यक्रम भी प्रस्तावित किए गए हैं। साथ ही डेरा सचखंड बल्लां के निकट गुरु रविदास बानी अनुसंधान केंद्र के निर्माण पर भी काम चल रहा है।</p><h5 class=""><b>बीजेपी भी चला रही विशेष अभियान</b></h5><p>दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी भी रविदासिया समुदाय के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए लगातार सक्रिय है।</p><p>हाल के महीनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरु रविदास से जुड़े कार्यक्रमों में भाग लिया और श्रद्धालुओं से संवाद किया। इसके अलावा गुरु रविदास से जुड़े धार्मिक स्थलों और यात्रा सुविधाओं को लेकर भी कई पहल की गई हैं।</p><p>बीजेपी अब संत गुरु रविदास की जन्मस्थली से पवित्र मिट्टी लेकर पंजाब के विभिन्न धार्मिक स्थलों तक पहुंचाने के लिए विशेष 'कलश यात्रा' निकालने की तैयारी कर रही है। पार्टी का मानना है कि इस अभियान से समाज के साथ उसका संवाद और मजबूत होगा।</p><h5 class=""><b>क्यों अहम है रविदासिया समुदाय?</b></h5><p>पंजाब की राजनीति में रविदासिया समुदाय का विशेष महत्व माना जाता है। राज्य के दोआबा क्षेत्र—जालंधर, होशियारपुर, कपूरथला और शहीद भगत सिंह नगर—में इस समुदाय का प्रभाव काफी मजबूत है।</p><p>डेरा सचखंड बल्लां को रविदासिया समाज की प्रमुख धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं में गिना जाता है। देश और विदेश में इसके बड़ी संख्या में अनुयायी हैं, जिससे इस क्षेत्र का राजनीतिक महत्व और बढ़ जाता है।</p><p>इसी कारण चुनावी रणनीति बनाते समय लगभग सभी दल इस समुदाय तक अपनी पहुंच मजबूत करने की कोशिश करते हैं।</p><h5 class=""><b>दलित वोट बैंक बना चुनावी समीकरण का केंद्र</b></h5><p>2011 की जनगणना के अनुसार पंजाब में अनुसूचित जाति समुदाय की आबादी करीब 32 प्रतिशत है, जो देश में सबसे अधिक मानी जाती है। यही वजह है कि राज्य के चुनावी समीकरणों में दलित मतदाताओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रहती है।</p><p>राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी बड़े दल के लिए इस वोट बैंक का समर्थन चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकता है, खासकर दोआबा जैसे क्षेत्रों में।</p><h5 class=""><b>कांग्रेस और अकाली दल की रणनीति पर नजर</b></h5><p>फिलहाल कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल की ओर से गुरु रविदास की 650वीं जयंती को लेकर किसी बड़े अभियान की घोषणा नहीं की गई है। हालांकि दोनों दलों के नेता समय-समय पर रविदासिया समाज के धार्मिक आयोजनों में शामिल होते रहे हैं।</p><p>राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आएंगे, अन्य दल भी इस समुदाय के बीच अपनी सक्रियता बढ़ा सकते हैं।</p><h5 class=""><b>चुनाव से पहले तेज होगी सियासी गतिविधियां</b></h5><p>हाल के महीनों में सामाजिक और राजनीतिक घटनाओं ने दलित समाज से जुड़े मुद्दों को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है। ऐसे में यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि 2027 के चुनाव से पहले पंजाब में दलित वोट बैंक और रविदासिया समुदाय को लेकर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होंगी।</p><p>अब देखना दिलचस्प होगा कि धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों के जरिए शुरू हुई यह राजनीतिक कवायद चुनावी समर्थन में कितनी बदलती है और इसका असर पंजाब के आगामी विधानसभा चुनाव पर कितना पड़ता है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ Punjab Politics: दलित वोट बैंक पर AAP-BJP की नजर, रविदासिया समुदाय को साधने की तेज हुई सियासी कवायद ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/tarun-chugh-home-affairs-committee-5628 ]]></guid><title><![CDATA[ तरुण चुग की नई जिम्मेदारी से पंजाब बीजेपी में खुशी, गृह मंत्रालय की समिति में हुए शामिल ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/tarun-chugh-home-affairs-committee-5628 ]]></link><pubDate><![CDATA[Sun, 26 Jul 2026 18:00:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ नई दिल्ली:&nbsp;भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय महामंत्री और राज्यसभा सांसद तरुण चुग को राज्यसभा की महत्वपूर्ण विभाग-संबंधित संसदीय स्थायी समितियों में से एक गृह मंत्रालय संबंधी स्थायी समिति (St ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>नई दिल्ली:&nbsp;</b></span><span style="font-size: 1rem;">भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय महामंत्री और राज्यसभा सांसद तरुण चुग को राज्यसभा की महत्वपूर्ण विभाग-संबंधित संसदीय स्थायी समितियों में से एक गृह मंत्रालय संबंधी स्थायी समिति (Standing Committee on Home Affairs) का सदस्य मनोनीत किया गया है।</span></p><p>राज्यसभा के सभापति की ओर से 23 जुलाई 2026 को जारी संसदीय बुलेटिन-II (क्रमांक 66700) के अनुसार, तरुण चुग को गृह मंत्रालय संबंधी संसदीय स्थायी समिति में सदस्य के रूप में मनोनीत किया गया है।</p><h5 class=""><b>तरुण चुग का इस समिति में शामिल होना महत्वपूर्ण संकेत</b></h5><p>गृह मंत्रालय से जुड़ी यह समिति आंतरिक सुरक्षा, सीमा प्रबंधन, पुलिस सुधार, कानून-व्यवस्था और आपदा प्रबंधन जैसे बेहद महत्वपूर्ण विषयों से संबंधित मामलों की समीक्षा करती है। ऐसे में सीमा क्षेत्र अमृतसर, पंजाब से आने वाले और जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख जैसे महत्वपूर्ण सीमावर्ती क्षेत्रों में लंबे समय तक संगठनात्मक और राजनीतिक स्तर पर काम कर चुके तरुण चुग का इस समिति में शामिल होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;BJP National General Secretary and Rajya Sabha MP Tarun Chugh has been nominated as a member of Parliamentary Standing Committee on Home Affairs and the Consultative Committee for the Ministry of Defence.&lt;br&gt;The nomination to the two important committees comes just days after he… &lt;a href="https://t.co/82rVdvHKDF"&gt;pic.twitter.com/82rVdvHKDF&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Man Aman Singh Chhina (@manaman_chhina) &lt;a href="https://x.com/manaman_chhina/status/2081351611205763300?ref_src=twsrc^tfw"&gt;July 26, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><h5 class=""><b>बीजेपी पार्टी में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं तरुण चुग</b></h5><p>तरुण चुग लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी के सक्रिय और समर्पित कार्यकर्ता रहे हैं। वह आरएसएस से जुड़े परिवार से आते हैं और वर्तमान में बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री के रूप में संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। इसके अलावा, विभिन्न राज्यों में पार्टी संगठन से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों में भी उनकी भूमिका रही है।</p><p>गृह मंत्रालय संबंधी स्थायी समिति में उनके मनोनयन से आंतरिक सुरक्षा, सीमा प्रबंधन, पुलिस सुधार और आपदा प्रबंधन जैसे विषयों पर नीति-निर्माण प्रक्रिया में उनके अनुभव का लाभ मिलने की उम्मीद है।</p><h5 class=""><b>पंजाब के कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर</b></h5><p>तरुण चुग के मनोनयन पर अमृतसर और पंजाब के बीजेपी कार्यकर्ताओं ने खुशी जताई है। पार्टी कार्यकर्ताओं ने उन्हें बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि नई जिम्मेदारी के जरिए वह पंजाब सहित पूरे देश की आंतरिक सुरक्षा और शासन व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ तरुण चुग की नई जिम्मेदारी से पंजाब बीजेपी में खुशी, गृह मंत्रालय की समिति में हुए शामिल ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/farmers-march-delhi-india-us-trade-deal-5562 ]]></guid><title><![CDATA[ किसानों का दिल्ली मार्च: फतेहगढ़ साहिब से रवाना हुए प्रदर्शनकारी, शंभू बॉर्डर पर बढ़ा तनाव ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/farmers-march-delhi-india-us-trade-deal-5562 ]]></link><pubDate><![CDATA[Tue, 21 Jul 2026 15:30:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ फतेहगढ़ साहिब, पंजाब: प्रस्तावित भारत-अमरीका व्यापार समझौते के विरोध में 'देश बचाओ मोर्चा' के बैनर तले किसानों ने मंगलवार को दिल्ली की ओर अपना मार्च शुरू कर दिया। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर के नेतृत्व ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>फतेहगढ़ साहिब, पंजाब: </b>प्रस्तावित भारत-अमरीका व्यापार समझौते के विरोध में 'देश बचाओ मोर्चा' के बैनर तले किसानों ने मंगलवार को दिल्ली की ओर अपना मार्च शुरू कर दिया। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर के नेतृत्व में किसान फतेहगढ़ साहिब स्थित गुरुद्वारा श्री फतेहगढ़ साहिब से रवाना हुए।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">किसानों का कहना है कि उनकी प्रमुख मांग प्रस्तावित भारत-</span>अमरीका<span style="font-size: 1rem;">&nbsp;ट्रेड डील को रद्द करना है।</span></p><p>किसान दिल्ली पहुंचकर किसान घाट पर शांतिपूर्ण धरना और चार घंटे की रैली आयोजित करना चाहते हैं।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">किसानों का आंदोलन प्रस्तावित भारत-अ</span>मरीका<span style="font-size: 1rem;">&nbsp;द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर लगातार तेज हो रहा है। प्रदर्शनकारी आशंका जता रहे हैं कि कृषि और डेयरी क्षेत्र को समझौते में शामिल किए जाने से घरेलू किसानों की आय और आजीविका प्रभावित हो सकती है।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;Watch | Punjab: A large number of farmers from Punjab, who were heading to Delhi to participate in a Kisan Mahapanchayat at Kisan Ghat, were stopped at the Shambhu border between Punjab and Haryana. &lt;br&gt;&lt;br&gt;Haryana Police put up barricades to prevent the farmers from moving ahead as… &lt;a href="https://t.co/1yJOBG6ywj"&gt;pic.twitter.com/1yJOBG6ywj&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; United News of India (@uniindianews) &lt;a href="https://x.com/uniindianews/status/2079441851451576576?ref_src=twsrc^tfw"&gt;July 21, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p><b>गुरुद्वारे में माथा टेकने के बाद शुरू हुआ मार्च</b></p><p>सरवन सिंह पंधेर के नेतृत्व में किसान सुबह करीब 6 बजे बसों, जीप, मिनी बसों और निजी वाहनों से दिल्ली के लिए रवाना हुए। मार्च शुरू करने से पहले किसानों ने गुरुद्वारा श्री फतेहगढ़ साहिब में माथा टेका।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">पंधेर ने कहा, “यह पूरी दुनिया के लिए एक ऐतिहासिक स्थान है, जहां छोटे साहिबजादों ने शहादत दी। यहां रुकने के बाद और गुरुद्वारे में माथा टेकने के बाद अब हम शंभू बॉर्डर की ओर जा रहे हैं। हमारा मुख्य मुद्दा है कि भारत-US ट्रेड डील रद्द की जाए।”</span></p><p><b>शंभू बॉर्डर बंद होने पर जताई नाराजगी</b></p><p>किसान नेता ने कहा कि उन्हें शंभू बॉर्डर बंद किए जाने की जानकारी मिली है। उन्होंने कहा कि किसानों से बातचीत कर समस्या का समाधान करने के बजाय सरकार टकराव और दमन का रास्ता अपना रही है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">पंधेर ने कहा, “देश के युवाओं, किसानों और मजदूरों की आवाज नहीं सुनी जा रही है। हम यह बात देश के सामने रखेंगे और जनता इसका जवाब देगी।”&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन ने किसानों को शंभू बॉर्डर पर रोक दिया तो वे सड़क पर शांतिपूर्ण धरना देंगे और शाम 4 बजे तक वहीं बैठेंगे।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;Fatehgarh Sahib, Punjab: On a Rally against the India-US Agricultural Trade Deal, Kisan Leader Sarwan Singh Pandher says, &amp;quot;I think we want to put this issue in front of 140 crore people all over the country. Is Punjab not considered a part of the country. We should also have the… &lt;a href="https://t.co/5xx56T7jSy"&gt;pic.twitter.com/5xx56T7jSy&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; IANS (@ians_india) &lt;a href="https://x.com/ians_india/status/2079388863076901073?ref_src=twsrc^tfw"&gt;July 21, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p><b>कृषि और डेयरी सेक्टर को लेकर किसानों की चिंता</b></p><p>किसानों का मुख्य विरोध प्रस्तावित व्यापार समझौते में कृषि और डेयरी क्षेत्र को शामिल किए जाने को लेकर है। किसानों को आशंका है कि अमरीका से सस्ते मक्का, सोयाबीन, कपास और डेयरी उत्पादों का आयात बढ़ने से घरेलू फसलों की कीमतों पर दबाव पड़ेगा।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">किसानों का मानना है कि इससे विशेष रूप से पंजाब और हरियाणा के किसानों को आर्थिक नुकसान हो सकता है।</span></p><p>सरवन सिंह पंधेर ने भारत में जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) फसलों और कृषि उत्पादों के संभावित प्रवेश को लेकर भी चिंता जताई। इसके साथ ही उन्होंने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी की पुरानी मांग दोहराई।</p><p><b>पंधेर का पीयूष गोयल पर निशाना</b></p><p class="blue-bg-white"><b><i>केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के बयानों का जिक्र करते हुए पंधेर ने कहा कि सरकार कृषि और डेयरी क्षेत्र में कोई समझौता नहीं होने की बात कह रही है, लेकिन किसानों को लगता है कि समझौता पहले ही हो चुका है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने आरोप लगाया कि अमरीका की ओर से जारी जानकारी में कपास, सोयाबीन, मक्का, सूखे मेवे, सेब, नाशपाती और अन्य कृषि उत्पादों का जिक्र है। पंधेर ने कहा कि “वाइड रेंज ट्रेड एग्रीमेंट” में व्यापक स्तर पर कृषि उत्पाद शामिल हो सकते हैं।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">हालांकि, ये आरोप किसान नेता के दावे हैं और प्रस्तावित व्यापार समझौते की अंतिम शर्तों को लेकर आधिकारिक रूप से विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।</span></i></b></p><p><b>टकराव नहीं, शांतिपूर्ण प्रदर्शन का दावा</b></p><p>पंधेर ने कहा कि किसान अपनी ओर से किसी तरह का टकराव शुरू नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि दिल्ली पहुंचने के बाद किसान नेता बैठक कर आगे की रणनीति तय करेंगे।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने पंजाब और देशभर के सांसदों से संसद के मॉनसून सत्र के दौरान किसानों और मजदूरों की आवाज उठाने की अपील की।</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ किसानों का दिल्ली मार्च: फतेहगढ़ साहिब से रवाना हुए प्रदर्शनकारी, शंभू बॉर्डर पर बढ़ा तनाव ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-property-registration-35-urdu-words-changed-5541 ]]></guid><title><![CDATA[ पंजाब में जमीन के दस्तावेजों से हटेंगे मुश्किल उर्दू-फारसी शब्द, सरकार ने जारी की नई सूची... ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/punjab-property-registration-35-urdu-words-changed-5541 ]]></link><pubDate><![CDATA[Mon, 20 Jul 2026 15:00:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ चंडीगढ़, पंजाब: पंजाब सरकार ने आम लोगों के लिए जमीन की रजिस्ट्री और राजस्व रिकॉर्ड की भाषा को आसान बनाने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। पंजाब राजस्व एवं पुनर्वास विभाग ने जमीन की खरीद-बिक्री और राजस् ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>चंडीगढ़, पंजाब: </b>पंजाब सरकार ने आम लोगों के लिए जमीन की रजिस्ट्री और राजस्व रिकॉर्ड की भाषा को आसान बनाने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। पंजाब राजस्व एवं पुनर्वास विभाग ने जमीन की खरीद-बिक्री और राजस्व रिकॉर्ड में इस्तेमाल होने वाले 35 जटिल उर्दू-फारसी शब्दों को सरल शब्दों से बदलने के निर्देश जारी किए हैं।</span></p><p>सरकार का मानना है कि इन बदलावों से आम नागरिक अपने जमीन से जुड़े दस्तावेजों और रजिस्ट्री को आसानी से समझ सकेंगे। इसके अलावा लोगों की जानकारी के लिए डीड राइटर, वकील या बिचौलियों पर निर्भरता भी कम होगी।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">सरकार के अनुसार, जटिल शब्दों के कारण रजिस्ट्री और म्यूटेशन यानी इंतकाल की प्रक्रिया के दौरान क्लेरिकल गलतियों की संभावना बनी रहती थी। सरल भाषा लागू होने से राजस्व व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ने और दस्तावेजी गलतियों में कमी आने की उम्मीद है।</span></p><p><b>'फौत' की जगह 'मृत्यु', 'फर्द' की जगह 'नकल जमाबंदी'</b></p><p>नई व्यवस्था के तहत किसी व्यक्ति की मृत्यु के लिए इस्तेमाल होने वाले <b>'फौत' शब्द की जगह अब 'मृत्यु' या 'मृतक'</b> जैसे सरल शब्दों का इस्तेमाल किया जाएगा।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">इसी तरह जमीन के मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज <b>'फर्द' को अब आधिकारिक तौर पर 'नकल जमाबंदी'</b> कहा जाएगा।</span></p><p>जमीन की बिक्री से जुड़े प्रमुख कानूनी दस्तावेज <b>'बैनामा' की जगह अब 'विक्रय नामा' या 'विक्रय पत्र' </b>जैसे सरल शब्द इस्तेमाल किए जाएंगे। वहीं, भूमि या भूखंड के लिए इस्तेमाल होने वाले <b>'अराजी' शब्द की जगह अब सीधे 'जमीन' </b>लिखा जाएगा।</p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="pa" dir="ltr"&gt;&lt;a href="https://x.com/PbGovtIndia?ref_src=twsrc^tfw"&gt;@PbGovtIndia&lt;/a&gt; to make 35 &lt;a href="https://x.com/hashtag/property?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#property&lt;/a&gt; &lt;a href="https://x.com/hashtag/registration?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#registration&lt;/a&gt; &lt;a href="https://x.com/hashtag/language?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#language&lt;/a&gt; words easier for &lt;a href="https://x.com/hashtag/commonpeople?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#commonpeople&lt;/a&gt; .&lt;br&gt;&lt;br&gt;Read below 👇🏻&lt;a href="https://x.com/PbGovtIndia?ref_src=twsrc^tfw"&gt;@PbGovtIndia&lt;/a&gt; ਵੱਲੋਂ &lt;a href="https://x.com/hashtag/ਜਾਇਦਾਦ?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#ਜਾਇਦਾਦ&lt;/a&gt; &lt;a href="https://x.com/hashtag/ਰਜਿਸਟ੍ਰੇਸ਼ਨ?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#ਰਜਿਸਟ੍ਰੇਸ਼ਨ&lt;/a&gt; ਦੀ ਭਾਸ਼ਾ ਸੰਬੰਧੀ 35 ਸ਼ਬਦਾਂ ਨੂੰ ਆਮ ਲੋਕਾਂ ਲਈ ਸੌਖਾ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇਗਾ ।&lt;a href="https://x.com/BhagwantMann?ref_src=twsrc^tfw"&gt;@BhagwantMann&lt;/a&gt;&lt;a href="https://x.com/hashtag/PunjabRevenueDepartment?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#PunjabRevenueDepartment&lt;/a&gt; &lt;a href="https://x.com/hashtag/RevenueWords?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#RevenueWords&lt;/a&gt;&lt;a href="https://x.com/PunjabDIPR?ref_src=twsrc^tfw"&gt;@PunjabDIPR&lt;/a&gt; &lt;a href="https://t.co/8Xj4EnUs4n"&gt;pic.twitter.com/8Xj4EnUs4n&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Regional News Unit (RNU) Akashvani, Jalandhar (@AIRRNUJalandhar) &lt;a href="https://x.com/AIRRNUJalandhar/status/2079102924471537884?ref_src=twsrc^tfw"&gt;July 20, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><p><b>'फरीक अव्वल' और 'फरीक दोम' भी होंगे आसान</b></p><p>कानूनी दस्तावेजों में इस्तेमाल होने वाले 'फरीक अव्वल' और 'फरीक दोम' शब्दों को भी सरल बनाया गया है। अब इनके स्थान पर क्रमशः <b>'पहली पार्टी' या 'प्रथम पक्ष' और 'दूसरी पार्टी' या 'द्वितीय पक्ष'</b> लिखा जाएगा।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">किसी व्यक्ति के निवास या पते के लिए इस्तेमाल होने वाले 'साकिन देह' शब्द की जगह अब 'गांव का निवासी' लिखा जाएगा।</span></p><p>इसी तरह<b> 'हिबा' </b>जैसे कानूनी शब्द को सरल भाषा में<b> 'दान' </b>किया जाएगा। अदालत या कानूनी खर्चों के लिए इस्तेमाल होने वाले <b>'तलवाना' </b>शब्द की जगह अब सीधे<b> 'खर्चा' </b>लिखा जाएगा।</p><p><b>जमीन गिरवी रखने से जुड़े शब्द भी होंगे आसान</b></p><p class="grey-bg-red"><b><i>जमीन को गिरवी रखने और उसे छुड़ाने से जुड़े जटिल शब्दों को भी सरल किया गया है। 'मुरतहिन' की जगह अब 'जमीन गिरवी लेने वाला' जैसे आसान शब्दों का इस्तेमाल किया जाएगा।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">वहीं, 'फक-उल-रहन' की जगह 'गिरवी रखी संपत्ति छुड़ाना' जैसे स्पष्ट शब्दों का प्रयोग किया जाएगा।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">खरीदार को सावधान करने वाले शब्द 'मुश्तरी होशियारबाश' को बदलकर अब साफ तौर पर 'खरीदार सावधान रहे' लिखा जाएगा।</span></i></b></p><p><b>आम लोगों के लिए समझना था मुश्किल</b></p><p>पंजाब के राजस्व रिकॉर्ड में इस्तेमाल होने वाले कई शब्द सदियों पुराने <b>उर्दू और फारसी </b>से जुड़े हैं। आज की पीढ़ी और आम नागरिक रोजमर्रा की भाषा में इन शब्दों का इस्तेमाल नहीं करते। ऐसे में लोगों के लिए अपनी ही जमीन के दस्तावेजों को पढ़ना और समझना मुश्किल हो जाता था।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">सरकार का मानना है कि भाषा को सरल बनाने से आम लोगों को अपने दस्तावेजों की जानकारी आसानी से मिल सकेगी और वे जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़े मामलों को बेहतर तरीके से समझ पाएंगे।</span></p><p><b>बिचौलियों पर निर्भरता कम करने की कोशिश</b></p><p class="blue-bg-white"><b><i>कठिन शब्दावली के कारण जमीन की खरीद-बिक्री के दौरान आम लोग अक्सर डीड राइटर, वकील और बिचौलियों पर निर्भर हो जाते थे। सरकार का दावा है कि सरल भाषा के इस्तेमाल से लोग दस्तावेजों को खुद समझ सकेंगे और धोखाधड़ी की आशंका भी कम होगी।</i></b></p><p><b>डिजिटल रिकॉर्ड में भी मिलेगी मदद</b></p><p>वर्तमान समय में जमीन के रिकॉर्ड का बड़े पैमाने पर डिजिटलीकरण किया जा रहा है। ऐसे में पुराने और जटिल शब्दों को डिजिटल सॉफ्टवेयर और डेटाबेस में दर्ज करने में तकनीकी दिक्कतें आती थीं।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">सरल और स्पष्ट शब्दों के इस्तेमाल से डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने और उन्हें आम लोगों के लिए सुलभ बनाने में मदद मिलेगी।</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ पंजाब में जमीन के दस्तावेजों से हटेंगे मुश्किल उर्दू-फारसी शब्द, सरकार ने जारी की नई सूची... ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/pm-modi-viksit-bharat-hydrogen-train-healthcare-5493 ]]></guid><title><![CDATA[ पहली हाइड्रोजन ट्रेन के शुभारंभ पर बोले पीएम मोदी- भविष्य की तकनीक ही विकसित भारत की नींव... ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/punjab-news/pm-modi-viksit-bharat-hydrogen-train-healthcare-5493 ]]></link><pubDate><![CDATA[Fri, 17 Jul 2026 17:11:56 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ चंडीगढ़, पंजाब: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि विकसित भारत (Viksit Bharat) के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश को भविष्य की तकनीकों, नवाचार (Innovation) और स्वास्थ्य सेवाओं (Healthcare ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>चंडीगढ़, पंजाब:</b> प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि विकसित भारत (Viksit Bharat) के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश को भविष्य की तकनीकों, नवाचार (Innovation) और स्वास्थ्य सेवाओं (Healthcare) पर भरोसा करना होगा। उन्होंने हरियाणा के जींद-सोनीपत रेल मार्ग पर भारत की पहली हाइड्रोजन संचालित ट्रेन के शुभारंभ को देश की बड़ी उपलब्धि बताया।</span></p><p>चंडीगढ़ में एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार को ऐसे फैसले लेने चाहिए जो वर्तमान के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के हित में भी हों।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने कहा, "आज हरियाणा के जींद-सोनीपत मार्ग पर भारत की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन का उद्घाटन किया गया है। यह देश के लिए बड़ी उपलब्धि है क्योंकि यह स्वच्छ ईंधन पर चलेगी। विकसित भारत की यात्रा में हमें भविष्य की तकनीकों, नवाचार और हेल्थकेयर पर भरोसा करना होगा। हमें ऐसे निर्णय लेने होंगे जो वर्तमान और भविष्य, दोनों पीढ़ियों के लिए लाभकारी हों। भाजपा-एनडीए सरकार इसी दिशा में काम कर रही है।"</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;Punjab deserves faster development, better opportunities and good governance. Only the BJP can fulfil these aspirations. Speaking at a massive rally in Jalandhar.&lt;a href="https://x.com/BJP4Punjab?ref_src=twsrc^tfw"&gt;@BJP4Punjab&lt;/a&gt;&lt;br&gt; &lt;a href="https://t.co/IXVkTlo4K4"&gt;https://t.co/IXVkTlo4K4&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Narendra Modi (@narendramodi) &lt;a href="https://x.com/narendramodi/status/2078082573029535925?ref_src=twsrc^tfw"&gt;July 17, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><p><b>हाइड्रोजन तकनीक के इस्तेमाल में भारत का नाम शामिल</b></p><p>यह हाइड्रोजन ट्रेन 89 किलोमीटर लंबे जींद-सोनीपत रेलखंड पर चलेगी। यह जींद जंक्शन, गोहाना जंक्शन और सोनीपत को जोड़ते हुए बीच के स्टेशनों पर भी रुकेगी। इसके साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है, जहां रेल परिवहन में हाइड्रोजन तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।</p><p>प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि केंद्र सरकार ने औपनिवेशिक दौर की दंड संहिता की जगह भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita) लागू की है, जो देश की आपराधिक न्याय व्यवस्था में बड़े सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने कहा, "हमने पुराने पीनल कोड की जगह भारतीय न्याय संहिता लागू की है।"</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="hi" dir="ltr"&gt;जींद के विकास कार्यक्रम में हरियाणा के अपने परिवारजनों का उत्साह नई ऊर्जा से भर गया। &lt;a href="https://t.co/rEYJaiXs2k"&gt;pic.twitter.com/rEYJaiXs2k&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Narendra Modi (@narendramodi) &lt;a href="https://x.com/narendramodi/status/2078055045971750929?ref_src=twsrc^tfw"&gt;July 17, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p><b>एनडीए सरकार ने शहर के आधुनिकरण को हमेशा दी है प्राथमिकता</b></p><p>चंडीगढ़ के विकास का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि एनडीए सरकार ने शहर के आधुनिकीकरण को हमेशा प्राथमिकता दी है। पिछले कुछ वर्षों में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट, स्मार्ट पार्किंग और डिजिटल गवर्नेंस जैसी कई परियोजनाओं पर काम किया गया है, जिससे चंडीगढ़ को हाई-टेक शहर बनाया जा रहा है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">स्वास्थ्य क्षेत्र पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि PGIMER चंडीगढ़ में आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है।</span></p><p><img src="https://media.gtcbharat.com/wp-content/uploads/2026/07/Jind_5e302dab4a2056b60a350dc8ca1ce9f2_824X541.webp" style="width: 823.977px;"><span style="font-size: 1rem;"><br></span></p><p><span style="font-size: 1rem;"><br></span></p><p><b>'देश के चिकित्सा ढांचे को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है सरकार'</b><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p><span style="font-size: 1rem;">प्रधानमंत्री ने&nbsp;</span>कहा, "आज पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ में अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। एडवांस्ड न्यूरोसाइंस सेंटर, एडवांस्ड मदर एंड चाइल्ड सेंटर और क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल ब्लॉक जैसी परियोजनाएं लाखों लोगों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराएंगी।" उन्होंने <span style="font-size: 1rem;">कहा कि इन अत्याधुनिक स्वास्थ्य परियोजनाओं का विस्तार सरकार की सुलभ, किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने तथा देश के चिकित्सा ढांचे को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ पहली हाइड्रोजन ट्रेन के शुभारंभ पर बोले पीएम मोदी- भविष्य की तकनीक ही विकसित भारत की नींव... ]]></media:description></item></channel></rss>