<?xml version='1.0' encoding='UTF-8' ?><rss xmlns:content='http://purl.org/rss/1.0/modules/content/' xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/'  version='2.0'><channel><title>GTC Bharat</title><link>https://www.gtcbharat.com</link><lastBuildDate><![CDATA[Sun, 23 Aug 2026 17:58:29 +0530 ]]></lastBuildDate><language>en</language><image><title>GTC Bharat</title><url>https://media.gtcbharat.com/uploads/GTC-Bhart.svg</url><link>https://www.gtcbharat.com</link></image><description>GTC Bharat: Hindi News(हिंदी न्यूज़): Bharat की ताज़ा खबरें | Hindi News, हिंदी समाचार </description><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/utility-news/dot-sim-card-rules-2026-limit-mobile-connections-suspension-5938 ]]></guid><title><![CDATA[ DoT का SIM कार्ड पर बड़ा एक्शन! ज्यादा कनेक्शन रखने वालों के लिए नया नियम, जानें कब हो सकता है नंबर बंद ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/utility-news/dot-sim-card-rules-2026-limit-mobile-connections-suspension-5938 ]]></link><pubDate><![CDATA[Thu, 20 Aug 2026 12:51:35 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ अगर आपके नाम पर एक से ज्यादा SIM कार्ड हैं, तो अब आपको अपने मोबाइल कनेक्शनों को लेकर थोड़ा ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है। दूरसंचार विभाग यानी Department of Telecommunications (DoT) मोबाइल कनेक्शन जार ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p>अगर आपके नाम पर एक से ज्यादा <b>SIM </b>कार्ड हैं, तो अब आपको अपने मोबाइल कनेक्शनों को लेकर थोड़ा ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है। <b>दूरसंचार विभाग यानी Department of Telecommunications (DoT)</b> मोबाइल कनेक्शन जारी करने और उनकी निगरानी की प्रक्रिया को और सख्त करने जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य फर्जी SIM कार्ड, साइबर फ्रॉड और मोबाइल नंबरों के गलत इस्तेमाल पर रोक लगाना है।</p><p>दरअसल, देश में एक व्यक्ति के नाम पर मोबाइल कनेक्शन रखने की अधिकतम सीमा पहले से निर्धारित है। अब DoT इस व्यवस्था को और प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए टेलीकॉम कंपनियों के सिस्टम को डिजिटल निगरानी व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।</p><h5 class=""><b>एक व्यक्ति के नाम पर कितने SIM हो सकते हैं?</b></h5><p>मौजूदा नियमों के मुताबिक, सामान्य राज्यों में एक व्यक्ति अपने नाम पर अधिकतम 9 मोबाइल कनेक्शन रख सकता है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में यह सीमा अलग है।</p><p>असम, जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर राज्यों में एक व्यक्ति के नाम पर अधिकतम 6 मोबाइल कनेक्शन रखने की सीमा निर्धारित है।</p><p>इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति को 9 SIM रखना जरूरी है। यह केवल अधिकतम सीमा है। यदि किसी व्यक्ति के नाम पर पहले से तय संख्या में कनेक्शन मौजूद हैं, तो उसके नाम पर नया मोबाइल कनेक्शन जारी करने से पहले अतिरिक्त जांच की जरूरत होगी।</p><h5 class=""><b>नया सिस्टम कैसे करेगा काम?</b></h5><p>DoT इस निगरानी व्यवस्था के लिए Digital Intelligence Platform (DIP) का इस्तेमाल कर रहा है। इस प्लेटफॉर्म के जरिए अलग-अलग टेलीकॉम कंपनियों से मिलने वाले ग्राहक डेटा का विश्लेषण किया जाता है।</p><p>इससे यह पता लगाने में मदद मिलती है कि किसी व्यक्ति की पहचान पर देश में कितने मोबाइल नंबर सक्रिय हैं। अब इस सिस्टम को और मजबूत किया जा रहा है, ताकि तय सीमा तक पहुंच चुके ग्राहकों की पहचान नया SIM जारी करते समय आसानी से की जा सके।</p><p>इसके लिए प्लेटफॉर्म पर ऐसे ग्राहकों की प्रतिनिधि तस्वीर भी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। इससे नया कनेक्शन जारी करने से पहले ग्राहक की पहचान और उसके नाम पर पहले से मौजूद मोबाइल कनेक्शनों की संख्या की जांच करना आसान हो सकता है।</p><h5 class=""><b>लिमिट से ज्यादा SIM होने पर क्या होगा?</b></h5><p>सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि अगर किसी व्यक्ति के नाम पर निर्धारित सीमा से अधिक SIM हैं तो क्या होगा?</p><p>दिए गए नियमों के मुताबिक, यदि किसी ग्राहक की निर्धारित सीमा पहले ही पूरी हो चुकी है और इसके बावजूद नया मोबाइल कनेक्शन सक्रिय हो जाता है, तो उस अतिरिक्त कनेक्शन पर कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे कनेक्शन को सस्पेंड किया जा सकता है और अतिरिक्त SIM से जुड़े मामले का समाधान होने तक सेवा बंद रह सकती है।</p><p>इसलिए अगर किसी व्यक्ति के पास लंबे समय से इस्तेमाल न होने वाले पुराने नंबर हैं या उसके नाम पर ऐसे SIM सक्रिय हैं जिनका इस्तेमाल वह नहीं करता, तो अपने मोबाइल कनेक्शनों की जानकारी रखना महत्वपूर्ण होगा।</p><h5 class=""><b>30 नवंबर तक टेलीकॉम कंपनियों को करना होगा सिस्टम इंटीग्रेशन</b></h5><p>DoT ने टेलीकॉम कंपनियों को इस व्यवस्था को अपने Subscriber Enrollment और SIM Activation System से जोड़ने के लिए समयसीमा भी दी है।</p><p>दिए गए विवरण के अनुसार, कंपनियों को 30 नवंबर 2026 तक इस सिस्टम का इंटीग्रेशन पूरा करना होगा। इसके बाद नया SIM जारी करते समय ग्राहक के नाम पर मौजूद मोबाइल कनेक्शनों की जांच ज्यादा तेजी और प्रभावी तरीके से की जा सकेगी।</p><p>इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तय सीमा पूरी कर चुके व्यक्ति के नाम पर नया मोबाइल नंबर आसानी से एक्टिव न हो सके।</p><h5 class=""><b>फर्जी SIM और साइबर अपराध पर लगाम लगाने की कोशिश</b></h5><p>DoT की इस पहल के पीछे सबसे बड़ी वजह मोबाइल नंबरों के गलत इस्तेमाल को रोकना है। पिछले कुछ वर्षों में फर्जी SIM कार्ड का इस्तेमाल बैंकिंग फ्रॉड, साइबर ठगी, फर्जी कॉल और दूसरे ऑनलाइन अपराधों में किए जाने के मामले सामने आते रहे हैं।</p><p>कई मामलों में अपराधी बड़ी संख्या में मोबाइल कनेक्शन हासिल करके उनका इस्तेमाल अलग-अलग गतिविधियों में करते हैं। ऐसे नंबरों की पहचान करना जांच एजेंसियों के लिए चुनौती बन सकता है।</p><p>सरकार की कोशिश है कि किसी व्यक्ति की पहचान पर सक्रिय मोबाइल कनेक्शनों की संख्या की बेहतर निगरानी की जाए। इससे जरूरत पड़ने पर संदिग्ध कनेक्शनों की पहचान और कार्रवाई में मदद मिल सकती है।</p><h5 class=""><b>आपके लिए क्या जरूरी है?</b></h5><p>अगर आपके पास दो-तीन या उससे ज्यादा SIM हैं, तो केवल संख्या देखकर घबराने की जरूरत नहीं है। सामान्य राज्यों में निर्धारित अधिकतम सीमा 9 कनेक्शन है। लेकिन यह जरूर जांच लें कि आपके नाम पर कोई ऐसा मोबाइल नंबर तो सक्रिय नहीं है, जिसका इस्तेमाल आप नहीं करते।</p><p>खास तौर पर पुराने नंबर, बंद हो चुके कनेक्शन या ऐसे SIM जिनकी जानकारी आपको नहीं है, उनके बारे में जानकारी रखना जरूरी है। क्योंकि आने वाले समय में SIM जारी करने और एक्टिवेशन की प्रक्रिया में डिजिटल स्तर पर ज्यादा कड़ी जांच होने वाली है।</p><p>DoT का यह कदम मोबाइल कनेक्शनों को व्यक्ति की वास्तविक पहचान से जोड़ने और फर्जी SIM के इस्तेमाल को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले महीनों में टेलीकॉम कंपनियों के सिस्टम में इस व्यवस्था के पूरी तरह लागू होने के बाद नया SIM लेने की प्रक्रिया में ग्राहक की पहचान और उसके मौजूदा कनेक्शनों की जांच पहले से ज्यादा अहम हो जाएगी।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ DoT का SIM कार्ड पर बड़ा एक्शन! ज्यादा कनेक्शन रखने वालों के लिए नया नियम, जानें कब हो सकता है नंबर बंद ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/utility-news/duplicate-birth-certificate-online-process-india-5774 ]]></guid><title><![CDATA[ बर्थ सर्टिफिकेट खो गया? जानिए डुप्लीकेट कॉपी बनवाने का आसान तरीका और पूरी प्रक्रिया ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/utility-news/duplicate-birth-certificate-online-process-india-5774 ]]></link><pubDate><![CDATA[Fri, 07 Aug 2026 18:00:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate) उसकी पहचान से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों में से एक है। स्कूल में प्रवेश, आधार कार्ड, पासपोर्ट, बैंक खाते, सरकारी योजनाओं और भविष्य में कई अन्य सरकार ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p>बच्चे का <b>जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate)</b> उसकी पहचान से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों में से एक है। स्कूल में प्रवेश, आधार कार्ड, पासपोर्ट, बैंक खाते, सरकारी योजनाओं और भविष्य में कई अन्य सरकारी व निजी प्रक्रियाओं में इसकी जरूरत पड़ती है। ऐसे में यदि यह दस्तावेज खो जाए तो कई जरूरी काम रुक सकते हैं।</p><p>हालांकि राहत की बात यह है कि जन्म प्रमाण पत्र खो जाने पर उसकी डुप्लीकेट कॉपी दोबारा प्राप्त की जा सकती है। इसके लिए सरकार ने ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं।</p><h5 class=""><b>घबराने की नहीं, प्रक्रिया जानने की जरूरत</b></h5><p>अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि जन्म प्रमाण पत्र खो जाने के बाद नया प्रमाण पत्र बनवाना बहुत मुश्किल होगा। जबकि वास्तविकता यह है कि यदि जन्म का रिकॉर्ड सरकारी रजिस्टर में दर्ज है, तो डुप्लीकेट कॉपी प्राप्त करना अपेक्षाकृत आसान प्रक्रिया है।</p><p>जरूरी यह है कि सही कार्यालय में आवेदन किया जाए और आवश्यक दस्तावेज पूरे हों।</p><h5 class=""><b>ऑनलाइन कैसे प्राप्त करें डुप्लीकेट बर्थ सर्टिफिकेट?</b></h5><p>यदि आपके बच्चे का जन्म सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है, तो आप ऑनलाइन भी डुप्लीकेट बर्थ सर्टिफिकेट प्राप्त कर सकते हैं।</p><p>इसके लिए <b>सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS)</b> पोर्टल पर जाकर आवेदन किया जा सकता है। यदि आपके पास पुराने जन्म प्रमाण पत्र का रजिस्ट्रेशन नंबर या संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध है, तो पोर्टल के माध्यम से प्रमाण पत्र की डिजिटल कॉपी डाउनलोड करना भी संभव हो सकता है।</p><p>ऑनलाइन प्रक्रिया अपनाने से समय की बचत होती है और कई मामलों में कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता भी नहीं पड़ती।</p><h5 class=""><b>ऑफलाइन कहां करें आवेदन?</b></h5><p>यदि ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध न हो या रिकॉर्ड डिजिटल रूप में न मिले, तो ऑफलाइन आवेदन भी किया जा सकता है।</p><p><b>इसके लिए संबंधित क्षेत्र के निम्न कार्यालयों में संपर्क किया जा सकता है—</b></p><ul><li>नगर निगम<br></li><li>नगर पालिका<br></li><li>ग्राम पंचायत कार्यालय<br></li><li>जिला अस्पताल<br></li><li>जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण कार्यालय<br></li><li>जन सेवा केंद्र (CSC)</li></ul><p>इन कार्यालयों में निर्धारित आवेदन पत्र भरकर आवश्यक दस्तावेज जमा करने होते हैं।</p><h5 class=""><b>किन दस्तावेजों की होगी जरूरत?</b></h5><p>डुप्लीकेट बर्थ सर्टिफिकेट बनवाने के लिए कुछ जरूरी दस्तावेज जमा करने पड़ सकते हैं।<b> इनमें सामान्यतः शामिल हैं—</b></p><ul><li>अस्पताल द्वारा जारी जन्म रिकॉर्ड या डिस्चार्ज स्लिप<br></li><li>माता-पिता का पहचान पत्र<br></li><li>पुराने जन्म प्रमाण पत्र की कॉपी या उसका रजिस्ट्रेशन नंबर (यदि उपलब्ध हो)<br></li><li>जन्म प्रमाण पत्र खोने की पुलिस रिपोर्ट (जहां आवश्यक हो)<br></li><li>शपथ पत्र (Affidavit) या स्वयं की घोषणा<br></li><li>आवेदन पत्र</li></ul><p>दस्तावेजों की सूची राज्य और स्थानीय प्रशासन के नियमों के अनुसार कुछ अलग हो सकती है।</p><h5 class=""><b>क्या पुलिस रिपोर्ट जरूरी होती है?</b></h5><p>कई राज्यों और स्थानीय निकायों में डुप्लीकेट प्रमाण पत्र जारी करने से पहले खोए हुए दस्तावेज की पुलिस रिपोर्ट या शिकायत मांगी जाती है। इसका उद्देश्य रिकॉर्ड की सत्यता सुनिश्चित करना होता है।</p><p>कुछ मामलों में केवल शपथ पत्र के आधार पर भी प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। इसलिए आवेदन से पहले संबंधित कार्यालय से जानकारी लेना बेहतर रहेगा।</p><h5 class=""><b>कितनी लगती है फीस?</b></h5><p>डुप्लीकेट बर्थ सर्टिफिकेट जारी करने के लिए निर्धारित शुल्क देना पड़ सकता है। यह शुल्क प्रत्येक राज्य या स्थानीय निकाय के नियमों के अनुसार अलग-अलग होता है।</p><p>कुछ राज्यों में ऑनलाइन भुगतान की सुविधा उपलब्ध है, जबकि ऑफलाइन आवेदन के दौरान नकद या निर्धारित माध्यम से फीस जमा करनी होती है।</p><h5 class=""><b>आवेदन के बाद कितना समय लगता है?</b></h5><p>यदि सभी दस्तावेज सही पाए जाते हैं और रिकॉर्ड उपलब्ध होता है, तो निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद डुप्लीकेट जन्म प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाता है।</p><p>ऑनलाइन आवेदन की स्थिति संबंधित पोर्टल पर ट्रैक की जा सकती है, जबकि ऑफलाइन आवेदन करने वाले आवेदक संबंधित कार्यालय से इसकी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।</p><h5 class=""><b>महत्वपूर्ण सलाह</b></h5><p>बर्थ सर्टिफिकेट मिलने के बाद उसकी कई फोटोकॉपी सुरक्षित रखें और स्कैन करके डिजिटल कॉपी भी अपने ईमेल या क्लाउड स्टोरेज में सेव कर लें। इससे भविष्य में दस्तावेज खो जाने की स्थिति में परेशानी काफी कम हो सकती है।</p><p>इसके अलावा, यदि आपके बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र अभी तक नहीं बना है, तो जन्म के तुरंत बाद उसका पंजीकरण कराना सबसे बेहतर विकल्प है ताकि भविष्य में किसी सरकारी प्रक्रिया में दिक्कत न आए।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ बर्थ सर्टिफिकेट खो गया? जानिए डुप्लीकेट कॉपी बनवाने का आसान तरीका और पूरी प्रक्रिया ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/utility-news/delhi-laxmi-yojana-2500-monthly-scheme-eligibility-apply-process-5717 ]]></guid><title><![CDATA[ Delhi Laxmi Yojana: महिलाओं को हर महीने ₹2500, जानिए कौन कर सकता है आवेदन और क्या हैं नियम ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/utility-news/delhi-laxmi-yojana-2500-monthly-scheme-eligibility-apply-process-5717 ]]></link><pubDate><![CDATA[Mon, 03 Aug 2026 11:44:38 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ नई दिल्ली: दिल्ली सरकार ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए दिल्ली लक्ष्मी योजना की शुरुआत कर दी है। इस योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की पात्र महिलाओं को हर  ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>नई दिल्ली:</b> दिल्ली सरकार ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए <b>दिल्ली लक्ष्मी योजना</b> की शुरुआत कर दी है। इस योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की पात्र महिलाओं को हर महीने <b>2,500 रुपये</b> की वित्तीय सहायता दी जाएगी। <b>मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता</b> ने योजना के लिए बनाए गए ऑनलाइन पोर्टल का शुभारंभ करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और घरेलू खर्च में आर्थिक सहयोग देना है।</p><p>पोर्टल शुरू होने के साथ ही आवेदन प्रक्रिया भी ऑनलाइन शुरू हो गई है। सरकार का लक्ष्य करीब 17 लाख पात्र महिलाओं तक इस योजना का लाभ पहुंचाना है।</p><h5 class=""><b>क्या है दिल्ली लक्ष्मी योजना?</b></h5><p>दिल्ली लक्ष्मी योजना राज्य सरकार की एक सामाजिक कल्याण योजना है, जिसके माध्यम से पात्र महिलाओं को प्रतिमाह 2,500 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे महिलाओं की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी और वे अपनी जरूरतों को अधिक आत्मनिर्भर तरीके से पूरा कर सकेंगी।</p><p>योजना की पहली किस्त रक्षाबंधन के अवसर पर लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजने की तैयारी की गई है।</p><h5 class=""><b>किन महिलाओं को मिलेगा लाभ?</b></h5><p>योजना का लाभ केवल उन्हीं महिलाओं को मिलेगा जो सरकार द्वारा निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करती हों।</p><p><b>मुख्य पात्रता शर्तें इस प्रकार हैं—</b></p><ol><li>महिला की आयु 21 से 60 वर्ष के बीच हो।<br></li><li>महिला या उसका परिवार कम से कम 10 वर्षों से दिल्ली का स्थायी निवासी हो।<br></li><li>परिवार की वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से अधिक न हो।<br></li><li>परिवार की पात्र महिला योजना के नियमों के अनुरूप चयनित हो।</li></ol><p>सरकार का कहना है कि योजना का उद्देश्य वास्तव में जरूरतमंद महिलाओं तक आर्थिक सहायता पहुंचाना है।</p><h5 class=""><b>किन्हें नहीं मिलेगा योजना का लाभ?</b></h5><p>सरकार ने कुछ श्रेणियों को योजना से बाहर रखा है ताकि सहायता केवल पात्र परिवारों तक पहुंचे।</p><p><b>इन परिस्थितियों में आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा—</b></p><ul><li>परिवार में तीन से अधिक बच्चे होने पर।<br></li><li>परिवार के पास चार पहिया निजी वाहन होने पर।<br></li><li>यदि सालाना बिजली की खपत 2400 यूनिट से अधिक हो।<br></li><li>परिवार का कोई सदस्य जीएसटी करदाता हो।<br></li><li>परिवार में सरकारी कर्मचारी होने की स्थिति में भी योजना का लाभ नहीं मिलेगा।</li></ul><h5 class=""><b>हर महीने कैसे मिलेंगे 2,500 रुपये?</b></h5><p>योजना के तहत आर्थिक सहायता देने के लिए सरकार ने दो विकल्प प्रस्तावित किए हैं।</p><ol><li>पहले विकल्प में लाभार्थी महिला के लिए हर महीने 1,500 रुपये की आरडी (Recurring Deposit) या एफडी (Fixed Deposit) कराई जाएगी, जबकि शेष 1,000 रुपये डिजिटल वॉलेट के माध्यम से उपलब्ध कराए जाएंगे।</li><li>दूसरे विकल्प में पूरी 2,500 रुपये की राशि बचत योजना (आरडी/एफडी) में जमा कराने का विकल्प भी उपलब्ध रहेगा।</li></ol><p>सरकार का उद्देश्य महिलाओं में बचत की आदत को बढ़ावा देना और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है।</p><h5 class=""><b>कैसे करें ऑनलाइन आवेदन?</b></h5><p>इच्छुक महिलाएं दिल्ली सरकार के आधिकारिक पोर्टल&nbsp;<b>dly.delhi.gov.in</b> पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकती हैं।</p><p><b>आवेदन के दौरान निम्न दस्तावेजों की आवश्यकता होगी—</b></p><ul><li>आधार कार्ड<br></li><li>वोटर आईडी<br></li><li>आय प्रमाण पत्र<br></li><li>निवास प्रमाण पत्र<br></li><li>बैंक खाते का विवरण</li></ul><p>सभी दस्तावेज अपलोड करने के बाद आवेदन ऑनलाइन जमा किया जा सकेगा। इसी पोर्टल के माध्यम से आवेदन की स्थिति (Application Status) भी ट्रैक की जा सकती है।</p><h5 class=""><b>सरकार का उद्देश्य क्या है?</b></h5><p>राज्य सरकार का कहना है कि योजना का मकसद केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि महिलाओं को वित्तीय रूप से अधिक सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाना भी है।</p><p>सरकार का मानना है कि नियमित आर्थिक सहायता से महिलाओं को घरेलू जरूरतों, बचत और भविष्य की योजनाओं में मदद मिलेगी। साथ ही डिजिटल भुगतान और बैंकिंग व्यवस्था से अधिक महिलाओं को जोड़ने का प्रयास भी किया जाएगा।</p><p><b>1 अगस्त से शुरू हुआ पंजीकरण</b></p><p>दिल्ली लक्ष्मी योजना के लिए ऑनलाइन पंजीकरण 1 अगस्त 2026 से शुरू हो चुका है। सरकार ने पात्र महिलाओं से समय रहते आवेदन करने की अपील की है ताकि पहली किस्त जारी होने से पहले सत्यापन प्रक्रिया पूरी की जा सके।</p><p>योजना के लागू होने के बाद लाखों महिलाओं को सीधा आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि आवेदन प्रक्रिया कितनी तेजी से पूरी होती है और लाभार्थियों तक पहली किस्त कब तक पहुंचती है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ Delhi Laxmi Yojana: महिलाओं को हर महीने ₹2500, जानिए कौन कर सकता है आवेदन और क्या हैं नियम ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/utility-news/puc-rule-update-bs6-car-puc-validity-3-years-proposal-5655 ]]></guid><title><![CDATA[ BS-VI कार मालिकों को मिल सकती है बड़ी राहत, PUC की वैधता बढ़ाने की तैयारी ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/utility-news/puc-rule-update-bs6-car-puc-validity-3-years-proposal-5655 ]]></link><pubDate><![CDATA[Tue, 28 Jul 2026 13:37:22 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ नई दिल्ली: देश में प्रदूषण नियंत्रण के साथ-साथ वाहन मालिकों को राहत देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार एक बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने एक मसौदा अधिसूचना  ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p></p><p></p><p></p><p></p><p><b>नई दिल्ली</b>: देश में प्रदूषण नियंत्रण के साथ-साथ वाहन मालिकों को राहत देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार एक बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। <b>सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH)</b> ने एक मसौदा अधिसूचना जारी की है, जिसमें BS-VI मानकों वाली निजी कारों के लिए<b> पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) सर्टिफिकेट </b>की वैधता बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो छह वर्ष तक पुराने <b>BS-VI </b>वाहनों के मालिकों को हर साल <b>PUC </b>बनवाने की आवश्यकता नहीं होगी।</p><p>सरकार का मानना है कि नई तकनीक से लैस <b>BS-VI</b> वाहन अपेक्षाकृत कम प्रदूषण फैलाते हैं। ऐसे में इन वाहनों के लिए <b>PUC प्रमाणपत्र</b> की अवधि बढ़ाने से आम लोगों पर अनावश्यक बोझ कम होगा, जबकि पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर निगरानी और सख्त की जाएगी।</p><h5 class=""><b>क्या है नया प्रस्ताव?</b></h5><p>मसौदा नियमों के अनुसार, छह वर्ष तक पुराने BS-VI निजी वाहनों के लिए PUC प्रमाणपत्र की वैधता मौजूदा एक वर्ष से बढ़ाकर तीन वर्ष करने का प्रस्ताव है। इसका सीधा फायदा उन लाखों वाहन मालिकों को मिलेगा, जिन्हें हर साल प्रदूषण जांच करवाकर नया प्रमाणपत्र बनवाना पड़ता है।</p><p>हालांकि यह बदलाव अभी प्रस्ताव के स्तर पर है। अंतिम नियम लागू होने के बाद ही नई व्यवस्था प्रभावी होगी।</p><h5 class=""><b>पुराने वाहनों के लिए बढ़ेगी सख्ती</b></h5><p>जहां नए BS-VI वाहनों को राहत देने की तैयारी है, वहीं अधिक पुराने वाहनों के लिए नियम पहले से अधिक सख्त किए जा सकते हैं।</p><b>प्रस्ताव के अनुसार—</b><p></p><ul><li>6 से 10 वर्ष पुराने BS-VI वाहन: PUC का नवीनीकरण हर वर्ष कराना होगा।</li><li>10 वर्ष से अधिक पुराने BS-VI वाहन: हर छह महीने में PUC जांच करानी होगी।</li><li>BS-IV वाहन: हर छह महीने में PUC नवीनीकरण अनिवार्य रहेगा।</li><li>BS-I, BS-II और BS-III वाहन: हर तीन महीने में प्रदूषण जांच करानी होगी।</li></ul>सरकार का उद्देश्य अधिक प्रदूषण फैलाने वाले पुराने वाहनों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करना है<p></p><h5 class=""><b>क्या होता है PUC सर्टिफिकेट?</b></h5><p>PUC (Pollution Under Control) सर्टिफिकेट यह प्रमाणित करता है कि किसी वाहन से निकलने वाला धुआं निर्धारित उत्सर्जन मानकों के भीतर है। वाहन की जांच के बाद यह प्रमाणपत्र जारी किया जाता है।</p><p>यदि वाहन तय सीमा से अधिक प्रदूषण फैलाता है, तो उसे आवश्यक मरम्मत कराने के बाद दोबारा जांच करानी पड़ती है। कई राज्यों में बिना वैध PUC प्रमाणपत्र के वाहन चलाने पर चालान और जुर्माने का भी प्रावधान है।</p><h5 class=""><b>BS-VI तकनीक क्यों मानी जाती है बेहतर?</b></h5><p>भारत स्टेज (BS) उत्सर्जन मानक वाहनों से निकलने वाले प्रदूषकों की सीमा तय करते हैं। इनमें कार्बन मोनोऑक्साइड (CO), नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx), हाइड्रोकार्बन (HC) और पार्टिकुलेट मैटर (PM) जैसे तत्व शामिल हैं।</p><p>अप्रैल 2020 से देशभर में BS-VI मानक लागू किए गए थे। इन वाहनों में आधुनिक इंजन तकनीक और कम सल्फर वाले ईंधन का उपयोग होता है, जिससे प्रदूषण का स्तर पहले की तुलना में काफी कम रहता है।</p><p>भारत ने प्रदूषण नियंत्रण को गति देने के लिए BS-V चरण को छोड़कर सीधे BS-VI मानक लागू किए थे, जिसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम माना गया।</p><h5 class=""><b>आम वाहन मालिकों को क्या होगा फायदा?</b></h5><p>यदि प्रस्ताव लागू होता है तो BS-VI निजी कार मालिकों को बार-बार PUC बनवाने के लिए सेंटर नहीं जाना पड़ेगा। इससे समय और खर्च दोनों की बचत होगी। दूसरी ओर, सरकार पुराने वाहनों की नियमित जांच के जरिए प्रदूषण पर नियंत्रण रखने की कोशिश करेगी।</p><p>विशेषज्ञों का मानना है कि नई और कम प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियों को राहत देने तथा अधिक उत्सर्जन करने वाले वाहनों की निगरानी बढ़ाने से पर्यावरण संरक्षण और प्रशासनिक सुविधा—दोनों उद्देश्यों को एक साथ पूरा किया जा सकेगा।</p><p>फिलहाल यह प्रस्ताव सार्वजनिक सुझावों के लिए जारी किया गया है। सुझावों पर विचार के बाद अंतिम अधिसूचना जारी की जाएगी। ऐसे में आने वाले समय में देशभर के करोड़ों वाहन मालिकों के लिए PUC नियमों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ BS-VI कार मालिकों को मिल सकती है बड़ी राहत, PUC की वैधता बढ़ाने की तैयारी ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/utility-news/ro-water-tds-level-service-guide-filter-change-5566 ]]></guid><title><![CDATA[ RO का पानी कितना होना चाहिए शुद्ध? जानिए सही TDS लेवल और कब करानी चाहिए सर्विस ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/utility-news/ro-water-tds-level-service-guide-filter-change-5566 ]]></link><pubDate><![CDATA[Wed, 22 Jul 2026 11:39:12 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ आज के समय में लगभग हर घर में RO (Reverse Osmosis) वॉटर प्यूरीफायर का इस्तेमाल किया जाता है। लोग मानते हैं कि RO से निकलने वाला पानी पूरी तरह सुरक्षित और शुद्ध होता है, लेकिन सिर्फ RO लगवा लेना ही पर्य ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p>आज के समय में लगभग हर घर में <b>RO (Reverse Osmosis)</b> <b>वॉटर प्यूरीफायर </b>का इस्तेमाल किया जाता है। लोग मानते हैं कि RO से निकलने वाला पानी पूरी तरह सुरक्षित और शुद्ध होता है, लेकिन सिर्फ RO लगवा लेना ही पर्याप्त नहीं है। अगर मशीन की नियमित सर्विस नहीं कराई जाए या पानी का <b>TDS (Total Dissolved Solids)</b> सही स्तर पर न हो, तो यही पानी सेहत के लिए नुकसानदायक भी बन सकता है।</p><p>विशेषज्ञों का कहना है कि पीने का पानी केवल साफ दिखाई देना ही जरूरी नहीं है, बल्कि उसमें शरीर के लिए आवश्यक मिनरल्स का संतुलन भी बना रहना चाहिए। इसलिए RO का सही रखरखाव और समय-समय पर उसकी जांच बेहद जरूरी है।</p><h5 class=""><b>क्या होता है TDS और क्यों है जरूरी?</b></h5><p>TDS यानी Total Dissolved Solids पानी में घुले हुए प्राकृतिक खनिजों और लवणों की मात्रा को दर्शाता है। इसमें मुख्य रूप से कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम और अन्य आवश्यक मिनरल्स शामिल होते हैं। ये तत्व शरीर की हड्डियों, मांसपेशियों और कई शारीरिक प्रक्रियाओं के लिए जरूरी माने जाते हैं।</p><p>यदि पानी का TDS बहुत कम हो जाए तो उसमें मौजूद जरूरी मिनरल्स भी खत्म हो सकते हैं। वहीं, बहुत अधिक TDS होने पर पानी का स्वाद खराब हो सकता है और उसमें अशुद्धियां भी अधिक हो सकती हैं।</p><h5 class=""><b>RO के पानी का सही TDS कितना होना चाहिए?</b></h5><p>स्वास्थ्य विशेषज्ञों और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार, पीने के पानी का TDS लगभग 50 से 150 ppm (Parts Per Million) के बीच होना बेहतर माना जाता है।</p><p>यदि आपका RO पानी का TDS 50 ppm से कम है, तो यह संकेत हो सकता है कि मशीन ने लगभग सभी मिनरल्स निकाल दिए हैं। लंबे समय तक ऐसा पानी पीने से शरीर को जरूरी खनिज पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाते, जिससे हड्डियों की मजबूती, मांसपेशियों के स्वास्थ्य और सामान्य ऊर्जा स्तर पर असर पड़ सकता है।</p><p>दूसरी ओर, यदि पानी का TDS 300 ppm से अधिक हो जाता है, तो पानी का स्वाद भारी या खारा महसूस हो सकता है। ऐसे में मशीन की जांच करवाना और TDS को संतुलित स्तर पर सेट कराना बेहतर रहता है।</p><h5 class=""><b>घर पर कैसे करें TDS की जांच?</b></h5><p>आज बाजार और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कम कीमत में डिजिटल TDS मीटर उपलब्ध हैं। इसकी मदद से कुछ ही सेकंड में पानी का TDS मापा जा सकता है।</p><p>यदि TDS सामान्य सीमा से बाहर दिखाई दे, तो किसी अधिकृत RO सर्विस तकनीशियन से मशीन की जांच करानी चाहिए। कई आधुनिक RO मशीनों में TDS कंट्रोलर की सुविधा भी होती है, जिससे जरूरत के अनुसार पानी का TDS संतुलित किया जा सकता है।</p><h5 class=""><b>RO की सर्विस कब करानी चाहिए?</b></h5><p>अधिकांश लोग RO की सर्विस तभी कराते हैं जब मशीन पानी देना बंद कर देती है या उसमें कोई खराबी दिखाई देती है। जबकि नियमित मेंटेनेंस मशीन की कार्यक्षमता बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है।</p><p><b>सामान्य तौर पर:</b></p><ul><li>प्री-फिल्टर (Sediment Filter) को हर 3 से 4 महीने में बदलना चाहिए।<br></li><li>कार्बन और अन्य फिल्टर को लगभग 6 से 8 महीने में बदलना उचित माना जाता है।<br></li><li>RO मेम्ब्रेन की लाइफ आमतौर पर 1 से 2 वर्ष होती है, हालांकि यह पानी की गुणवत्ता और उपयोग पर निर्भर करती है।<br></li><li>साल में कम से कम एक या दो बार पूरी मशीन की सर्विस कराना बेहतर माना जाता है।</li></ul><p>यदि आपके इलाके में पानी अधिक गंदा या हार्ड है, तो फिल्टर और मेम्ब्रेन जल्दी बदलने की आवश्यकता पड़ सकती है।</p><h5 class=""><b>किन संकेतों से समझें कि अब सर्विस जरूरी है?</b></h5><p><b>RO मशीन कई बार पहले से संकेत देने लगती है कि उसे सर्विस की जरूरत है। यदि आपको इनमें से कोई भी समस्या दिखाई दे, तो मशीन की जांच करानी चाहिए—</b></p><ul><li>पानी भरने की गति पहले से काफी धीमी हो गई हो।<br></li><li>पानी का स्वाद अचानक बदल गया हो।<br></li><li>मशीन से लगातार तेज आवाज आने लगे।<br></li><li>पानी में बदबू महसूस हो।<br></li><li>फिल्टर बदलने के बाद भी पानी की गुणवत्ता में सुधार न हो।<br></li><li>TDS सामान्य सीमा से बाहर आ रहा हो।</li></ul><p>इन संकेतों को नजरअंदाज करने से मशीन की कार्यक्षमता कम हो सकती है और पानी की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है।</p><h5 class=""><b>सिर्फ RO पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं</b></h5><p>विशेषज्ञों का मानना है कि RO तभी प्रभावी होता है जब उसकी नियमित देखभाल की जाए। समय पर फिल्टर बदलना, TDS की जांच करना और अधिकृत तकनीशियन से सर्विस कराना न केवल मशीन की उम्र बढ़ाता है, बल्कि परिवार को सुरक्षित और संतुलित गुणवत्ता वाला पीने का पानी भी उपलब्ध कराता है।</p><p>यदि आपने लंबे समय से अपने RO की सर्विस नहीं कराई है, तो एक बार उसका TDS जरूर जांचें और जरूरत पड़ने पर मशीन की सर्विस कराएं। साफ और संतुलित पानी ही बेहतर स्वास्थ्य की सबसे मजबूत नींव है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ RO का पानी कितना होना चाहिए शुद्ध? जानिए सही TDS लेवल और कब करानी चाहिए सर्विस ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/utility-news/rent-agreement-hidden-clauses-security-deposit-5476 ]]></guid><title><![CDATA[ Rent Agreement की इन 3 शर्तों को नजरअंदाज किया, तो बाद में पछताना पड़ सकता है ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/utility-news/rent-agreement-hidden-clauses-security-deposit-5476 ]]></link><pubDate><![CDATA[Thu, 16 Jul 2026 21:00:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ Rent Agreement: बड़े शहरों में किराए का घर मिलना जितना चुनौतीपूर्ण होता है, उससे कहीं अधिक जरूरी होता है सही और स्पष्ट रेंट एग्रीमेंट तैयार करना। अक्सर लोग घर पसंद आते ही जल्दबाजी में एग्रीमेंट पर हस् ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>Rent Agreement:</b> बड़े शहरों में किराए का घर मिलना जितना चुनौतीपूर्ण होता है, उससे कहीं अधिक जरूरी होता है सही और स्पष्ट रेंट एग्रीमेंट तैयार करना। अक्सर लोग घर पसंद आते ही जल्दबाजी में एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर कर देते हैं और बाद में सिक्योरिटी डिपॉजिट, लॉक-इन पीरियड या मेंटेनेंस चार्ज जैसे मामलों में विवाद का सामना करते हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि रेंट एग्रीमेंट केवल औपचारिक दस्तावेज नहीं, बल्कि मकान मालिक और किरायेदार दोनों के अधिकारों और जिम्मेदारियों को तय करने वाला कानूनी समझौता होता है।</p><p>यदि एग्रीमेंट की शर्तों को ध्यान से नहीं पढ़ा गया, तो बाद में आर्थिक नुकसान के साथ कानूनी परेशानी भी झेलनी पड़ सकती है। इसलिए नया घर किराए पर लेने से पहले इन तीन महत्वपूर्ण क्लॉज को अच्छी तरह समझना बेहद जरूरी है।</p><h5 class=""><b>1. सिक्योरिटी डिपॉजिट की वापसी और कटौती का नियम</b></h5><p>रेंट एग्रीमेंट में सबसे ज्यादा विवाद सिक्योरिटी डिपॉजिट को लेकर होता है। कई शहरों में मकान मालिक दो से छह महीने तक का एडवांस डिपॉजिट लेते हैं। ऐसे में यह स्पष्ट होना चाहिए कि घर खाली करने के कितने दिनों के भीतर यह राशि वापस की जाएगी।</p><p>साथ ही एग्रीमेंट में यह भी लिखा होना चाहिए कि किन परिस्थितियों में डिपॉजिट से कटौती की जा सकती है। सामान्य इस्तेमाल से होने वाली मामूली टूट-फूट और वास्तविक नुकसान में स्पष्ट अंतर होना चाहिए। यदि यह बात लिखित रूप में दर्ज नहीं है, तो मकान मालिक अपनी ओर से मनमानी कटौती कर सकता है।</p><h5 class=""><b>2. लॉक-इन पीरियड और एग्जिट क्लॉज को समझें</b></h5><p>नौकरी बदलना, ट्रांसफर होना या किसी व्यक्तिगत कारण से शहर बदलना किसी भी समय संभव है। ऐसे में रेंट एग्रीमेंट का लॉक-इन पीरियड आपके लिए परेशानी बन सकता है।</p><p>यदि एग्रीमेंट में छह महीने या एक साल का लॉक-इन पीरियड है और आप उससे पहले घर छोड़ते हैं, तो कई मामलों में अतिरिक्त किराया या पेनल्टी देनी पड़ सकती है।</p><p>इसी तरह एग्जिट क्लॉज में यह स्पष्ट होना चाहिए कि घर खाली करने से पहले कितने दिनों या महीनों का नोटिस देना अनिवार्य है। इसके अलावा अंतिम निरीक्षण, चाबी सौंपने की प्रक्रिया और डिपॉजिट रिफंड की समय-सीमा भी लिखित रूप में दर्ज होनी चाहिए।</p><h5 class=""><b>3. मेंटेनेंस चार्ज कौन देगा?</b></h5><p>आजकल अधिकांश अपार्टमेंट और गेटेड सोसायटी में मासिक मेंटेनेंस चार्ज अलग से लिया जाता है। कई बार किरायेदार यह मान लेते हैं कि यह खर्च मकान मालिक देगा, जबकि मकान मालिक इसकी जिम्मेदारी किरायेदार पर डाल देता है।</p><p>इसलिए एग्रीमेंट में साफ लिखा होना चाहिए कि सोसायटी मेंटेनेंस, पार्किंग शुल्क, क्लब हाउस, जिम, स्विमिंग पूल या अन्य सुविधाओं का खर्च कौन वहन करेगा।</p><p>यदि यह क्लॉज स्पष्ट नहीं है, तो हर महीने अनावश्यक विवाद की स्थिति बन सकती है।</p><h5 class=""><b>केवल मौखिक वादों पर भरोसा न करें</b></h5><p>घर दिखाते समय कई मकान मालिक पेंट कराने, नई फिटिंग लगाने, पार्किंग देने या किराया न बढ़ाने जैसे कई वादे करते हैं। लेकिन यदि ये बातें रेंट एग्रीमेंट में दर्ज नहीं हैं, तो भविष्य में उनका कोई कानूनी महत्व नहीं होता।</p><p>कानूनी विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि जो भी सुविधा, शर्त या वादा तय हो, उसे लिखित रूप में एग्रीमेंट का हिस्सा जरूर बनाया जाए। इससे भविष्य में किसी भी तरह के विवाद से बचा जा सकता है।</p><h5 class=""><b>दस्तावेज़ पढ़ना भी है उतना ही जरूरी</b><br></h5><p>रेंट एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर करने से पहले पूरी शर्तों को ध्यान से पढ़ें। यदि किसी क्लॉज की भाषा समझ में न आए, तो मकान मालिक या कानूनी सलाहकार से उसकी स्पष्ट जानकारी लें। जल्दबाजी में किया गया एक हस्ताक्षर बाद में आर्थिक और कानूनी दोनों तरह की परेशानी का कारण बन सकता है।</p><p>किराए का घर चुनते समय सिर्फ लोकेशन, किराया और सुविधाएं ही महत्वपूर्ण नहीं होतीं, बल्कि रेंट एग्रीमेंट की हर शर्त भी उतनी ही अहम होती है। सिक्योरिटी डिपॉजिट, लॉक-इन पीरियड और मेंटेनेंस चार्ज जैसे क्लॉज को समझकर ही दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करें। थोड़ी सी सावधानी आपको भविष्य में बड़े विवाद और अनावश्यक खर्च से बचा सकती है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ Rent Agreement की इन 3 शर्तों को नजरअंदाज किया, तो बाद में पछताना पड़ सकता है ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/utility-news/10kg-commercial-lpg-cylinder-launch-india-small-business-benefits-5426 ]]></guid><title><![CDATA[ LPG यूजर्स को मिलेगी बड़ी राहत! जल्द आ सकता है 10 किलो का नया कमर्शियल गैस सिलेंडर ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/utility-news/10kg-commercial-lpg-cylinder-launch-india-small-business-benefits-5426 ]]></link><pubDate><![CDATA[Tue, 14 Jul 2026 19:00:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ देशभर के लाखों छोटे कारोबारियों, फूड स्टॉल संचालकों और कमर्शियल एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए जल्द एक बड़ी सुविधा शुरू हो सकती है। सरकारी तेल कंपनियां इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p>देशभर के लाखों छोटे कारोबारियों, फूड स्टॉल संचालकों और कमर्शियल एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए जल्द एक बड़ी सुविधा शुरू हो सकती है। सरकारी तेल कंपनियां <b>इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) </b>मिलकर<b> 10 किलो</b> के<b> नए कमर्शियल LPG सिलेंडर</b> को बाजार में उतारने की तैयारी कर रही हैं। यदि इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिलती है, तो यह सिलेंडर मौजूदा 19 किलो वाले भारी कमर्शियल सिलेंडर का हल्का और सुविधाजनक विकल्प बन सकता है।</p><p>इस नई पहल का उद्देश्य ऐसे ग्राहकों को राहत देना है, जिन्हें बड़े सिलेंडर को उठाने, रखने और इस्तेमाल करने में दिक्कत होती है। खासतौर पर छोटे व्यवसायियों और किराए पर रहने वाले लोगों के लिए यह बदलाव काफी उपयोगी माना जा रहा है।</p><h5 class=""><b>क्या है नया प्रस्ताव?</b></h5><p>सूत्रों के अनुसार, सरकारी तेल कंपनियां 10 किलो क्षमता वाले कंपोजिट कमर्शियल LPG सिलेंडर बाजार में उतारने पर विचार कर रही हैं। ये सिलेंडर वजन में हल्के होंगे और इन्हें गैस एजेंसियों के अलावा चुनिंदा रिटेल आउटलेट्स के माध्यम से भी उपलब्ध कराया जा सकता है।</p><p>इनकी बिक्री कमर्शियल LPG की मौजूदा दरों के अनुसार होगी। हालांकि अंतिम कीमत और लॉन्च की तारीख मंजूरी मिलने के बाद ही तय की जाएगी।</p><h5 class=""><b>किन लोगों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?</b></h5><p>अगर यह योजना लागू होती है, तो इसका सबसे अधिक लाभ निम्न वर्गों को मिलेगा—</p><ul><li>चाय और नाश्ते की दुकान चलाने वाले<br></li><li>ढाबा और छोटे रेस्टोरेंट संचालक<br></li><li>कैफे और फूड कियोस्क मालिक<br></li><li>स्ट्रीट फूड विक्रेता<br></li><li>किराए के मकान में रहने वाले लोग<br></li><li>दूसरे शहरों में रहने वाले छात्र<br></li><li>प्रवासी मजदूर और छोटे व्यापारी</li></ul><p>इन उपभोक्ताओं को अक्सर 19 किलो का सिलेंडर भारी और असुविधाजनक लगता है। नया 10 किलो सिलेंडर उनके लिए अधिक आसान और व्यावहारिक विकल्प साबित हो सकता है।</p><h5 class=""><b>क्यों महसूस हुई नए सिलेंडर की जरूरत?</b></h5><p>फिलहाल कमर्शियल ग्राहकों के लिए 19 किलो, 5 किलो और 2 किलो के LPG सिलेंडर उपलब्ध हैं।</p><p>काफी समय से छोटे कारोबारियों की मांग थी कि 5 किलो और 19 किलो के बीच भी एक ऐसा विकल्प उपलब्ध कराया जाए, जो क्षमता और वजन दोनों के लिहाज से संतुलित हो। 10 किलो का नया सिलेंडर इसी जरूरत को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</p><h5 class=""><b>मिडिल ईस्ट संकट के बाद बदला गैस बाजार</b></h5><p>हाल के वर्षों में पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव के दौरान भारत के LPG बाजार में कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले।</p><p>इस दौरान सरकार ने PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) नेटवर्क का विस्तार तेज किया, जिससे बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं ने LPG के बजाय PNG को अपनाया। साथ ही घरेलू LPG उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।</p><p>सरकारी आंकड़ों के अनुसार, घरेलू LPG उत्पादन लगभग 32 TMT से बढ़कर 52 TMT से अधिक हो गया, जो करीब 60 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।</p><p>इसी अवधि में 5 किलो वाले 'छोटू' सिलेंडर की मांग भी तेजी से बढ़ी, जिसके बाद अब 10 किलो वाले सिलेंडर की तैयारी को बाजार की नई जरूरतों के अनुरूप कदम माना जा रहा है।</p><h5 class=""><b>कितनी हो सकती है कीमत?</b><br></h5><p>फिलहाल 10 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत तय नहीं की गई है।</p><p><b>वर्तमान में दिल्ली में—</b></p><ul><li>14.2 किलो घरेलू LPG सिलेंडर: ₹942<br></li><li>19 किलो कमर्शियल सिलेंडर: ₹2,930<br></li><li>5 किलो कमर्शियल सिलेंडर: ₹808.50</li></ul><p>उपलब्ध है। नई दरों की घोषणा प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद की जाएगी।</p><h5 class=""><b>फिलहाल गैस सप्लाई को लेकर चिंता नहीं</b></h5><p>हालांकि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव बना हुआ है, लेकिन सरकार का कहना है कि फिलहाल देश में LPG या कच्चे तेल की उपलब्धता को लेकर कोई तत्काल संकट नहीं है।</p><p>सरकार के अनुसार भारत के पास पर्याप्त रणनीतिक भंडार मौजूद है। पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक देश के पास लगभग 60 दिन का कच्चा तेल, 60 दिन का LNG और 45 दिन का LPG स्टॉक उपलब्ध है।</p><p>हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि अंतरराष्ट्रीय तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो भविष्य में आयात लागत बढ़ने का असर LPG की कीमतों पर भी पड़ सकता है।</p><h5 class=""><b>छोटे कारोबारियों के लिए राहत भरा कदम</b></h5><p>अगर 10 किलो का कमर्शियल LPG सिलेंडर बाजार में आता है, तो यह छोटे व्यापारियों और मोबाइल फूड बिजनेस से जुड़े लोगों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है। हल्का वजन, आसान परिवहन और कम जगह में रखने की सुविधा इसे मौजूदा विकल्पों की तुलना में अधिक उपयोगी बना सकती है। इससे छोटे व्यवसायों की परिचालन लागत और कामकाज दोनों अधिक सुविधाजनक होने की उम्मीद है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ LPG यूजर्स को मिलेगी बड़ी राहत! जल्द आ सकता है 10 किलो का नया कमर्शियल गैस सिलेंडर ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/utility-news/unclaimed-investment-udgam-bima-bharosa-mitra-iepf-money-claim-guide-5403 ]]></guid><title><![CDATA[ भूल गए पुराना निवेश? इन 4 सरकारी पोर्टल्स से घर बैठे वापस पा सकते हैं अपना पैसा ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/utility-news/unclaimed-investment-udgam-bima-bharosa-mitra-iepf-money-claim-guide-5403 ]]></link><pubDate><![CDATA[Mon, 13 Jul 2026 13:19:48 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ अक्सर लोग वर्षों पहले बैंक में एफडी कराते हैं, इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदते हैं, म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं या शेयर खरीदकर भूल जाते हैं। कई बार नौकरी बदलने, पता बदलने, दस्तावेज खो जाने या परिवार को ज ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p>अक्सर लोग वर्षों पहले बैंक में एफडी कराते हैं, इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदते हैं, म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं या शेयर खरीदकर भूल जाते हैं। कई बार नौकरी बदलने, पता बदलने, दस्तावेज खो जाने या परिवार को जानकारी न होने की वजह से करोड़ों रुपये अनक्लेम्ड (Unclaimed) रह जाते हैं।</p><p>अगर आपको भी लगता है कि आपका या आपके परिवार का कोई पुराना निवेश कहीं फंसा हुआ है, तो अब उसे ढूंढना पहले से काफी आसान हो गया है। सरकार और विभिन्न वित्तीय नियामकों ने ऐसे कई ऑनलाइन पोर्टल शुरू किए हैं, जहां कुछ आसान जानकारी भरकर आप अपने निवेश का पता लगा सकते हैं और उसे वापस पाने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।</p><h5 class=""><b>1. बैंक डिपॉजिट के लिए UDGAM पोर्टल</b></h5><p>अगर आपने किसी बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), सेविंग अकाउंट या अन्य जमा राशि छोड़ी थी और लंबे समय से उसका उपयोग नहीं किया है, तो सबसे पहले UDGAM Portal पर जानकारी खोज सकते हैं।</p><p>यह पोर्टल भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की पहल है, जहां विभिन्न बैंकों में मौजूद अनक्लेम्ड डिपॉजिट की जानकारी एक ही जगह मिल सकती है।</p><p>अगर आपके नाम पर कोई राशि मिलती है, तो संबंधित बैंक में जरूरी दस्तावेज जमा करके उसे क्लेम किया जा सकता है।</p><h5 class=""><b>2. इंश्योरेंस का पैसा ऐसे खोजें</b></h5><p>अगर आपको संदेह है कि आपके नाम या परिवार के किसी सदस्य के नाम पर कोई पुरानी बीमा पॉलिसी है, तो BIMA Bharosa पोर्टल आपकी मदद कर सकता है।</p><p>यहां पॉलिसी से जुड़ी जानकारी मिलने के बाद यदि किसी प्रकार की समस्या आती है या क्लेम नहीं मिल रहा हो, तो इसी प्लेटफॉर्म के माध्यम से शिकायत भी दर्ज की जा सकती है।</p><p>इससे पुराने और अनक्लेम्ड इंश्योरेंस क्लेम तक पहुंचना आसान हो जाता है।</p><h5 class=""><b>3. म्यूचुअल फंड निवेश के लिए MITRA पोर्टल</b></h5><p>कई निवेशक अलग-अलग एएमसी (AMC) में निवेश करने के बाद उसका रिकॉर्ड खो देते हैं। ऐसे मामलों में MITRA पोर्टल उपयोगी साबित हो सकता है।</p><p>यह प्लेटफॉर्म निवेशकों को विभिन्न म्यूचुअल फंड निवेशों की जानकारी खोजने में सहायता करता है।</p><p>अगर आपके नाम पर कोई निवेश मिलता है, तो संबंधित एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) से संपर्क कर KYC अपडेट और आवश्यक दस्तावेज जमा करके निवेश को दोबारा सक्रिय या रिडीम कराया जा सकता है।</p><h5 class=""><b>4. शेयर और डिविडेंड के लिए IEPF Portal</b></h5><p>अगर आपने वर्षों पहले शेयर खरीदे थे या किसी कंपनी का डिविडेंड क्लेम नहीं किया था, तो वह राशि Investor Education and Protection Fund (IEPF) में ट्रांसफर हो सकती है।</p><p>ऐसी स्थिति में सबसे पहले IEPF पोर्टल पर जाकर अपने शेयर और अनक्लेम्ड डिविडेंड की जानकारी जांचें।</p><p>यदि आपका दावा सही पाया जाता है, तो IEPF-5 Form भरकर शेयर और डिविडेंड वापस पाने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।</p><h5 class=""><b>दस्तावेज रखें तैयार</b></h5><p><b>इन सभी पोर्टल्स पर क्लेम करते समय आमतौर पर कुछ जरूरी दस्तावेजों की आवश्यकता पड़ सकती है, जैसे—</b></p><ul><li>आधार कार्ड<br></li><li>पैन कार्ड<br></li><li>बैंक खाता विवरण<br></li><li>मोबाइल नंबर<br></li><li>निवेश से जुड़े पुराने दस्तावेज (यदि उपलब्ध हों)<br></li><li>KYC दस्तावेज</li></ul><h5 class=""><b>क्यों जरूरी है समय-समय पर निवेश की समीक्षा?</b></h5><p>वित्तीय विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि हर साल अपने सभी निवेशों की समीक्षा जरूर करनी चाहिए। साथ ही परिवार के सदस्यों को भी अपने निवेश की जानकारी देनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई राशि अनक्लेम्ड न रह जाए।</p><p>डिजिटल प्लेटफॉर्म आने के बाद पुराने निवेशों की जानकारी प्राप्त करना पहले की तुलना में काफी आसान हो गया है। यदि आपने कभी बैंक, बीमा, म्यूचुअल फंड या शेयर बाजार में निवेश किया है, तो एक बार इन पोर्टल्स पर जानकारी जरूर जांचें। संभव है कि वर्षों पुराना भूला हुआ निवेश आज आपके लिए बड़ी राहत साबित हो जाए।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ भूल गए पुराना निवेश? इन 4 सरकारी पोर्टल्स से घर बैठे वापस पा सकते हैं अपना पैसा ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/utility-news/irctc-new-website-ticket-booking-4-major-changes-prs-upgrade-5365 ]]></guid><title><![CDATA[ IRCTC की नई वेबसाइट से टिकट बुकिंग होगी आसान, एक क्लिक में दिखेंगी सभी सीटें ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/utility-news/irctc-new-website-ticket-booking-4-major-changes-prs-upgrade-5365 ]]></link><pubDate><![CDATA[Fri, 10 Jul 2026 16:24:19 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ भारतीय रेलवे जल्द ही यात्रियों के लिए टिकट बुकिंग का अनुभव पूरी तरह बदलने जा रहा है। भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (IRCTC) अपनी नई वेबसाइट का बीटा वर्जन लॉन्च करने की तैयारी में है, जिसमें यूजर  ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>भारतीय रेलवे </b>जल्द ही यात्रियों के लिए टिकट बुकिंग का अनुभव पूरी तरह बदलने जा रहा है। भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम <b>(IRCTC) </b>अपनी नई वेबसाइट का बीटा वर्जन लॉन्च करने की तैयारी में है, जिसमें यूजर इंटरफेस से लेकर टिकट बुकिंग प्रक्रिया तक कई बड़े बदलाव किए गए हैं। इन बदलावों का उद्देश्य टिकट बुकिंग को पहले से अधिक तेज, आसान और सुरक्षित बनाना है।</p><p>रेल मंत्रालय के अनुसार, नई वेबसाइट को आधुनिक तकनीक के साथ विकसित किया गया है ताकि यात्रियों को स्लो वेबसाइट, जटिल कैप्चा और बार-बार जानकारी भरने जैसी समस्याओं का सामना न करना पड़े। साथ ही, रेलवे अपने लगभग 40 साल पुराने पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) को भी अपग्रेड कर रहा है, जिससे आने वाले समय में टिकट बुकिंग की स्पीड और क्षमता दोनों बढ़ेंगी।</p><h5 class=""><b>यूजर एक्सपीरियंस होगा पहले से बेहतर</b></h5><p>नई वेबसाइट का डिजाइन यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। हाल ही में रेलवे अधिकारियों और एमएनआईटी जयपुर के छात्रों ने बीटा वर्जन का परीक्षण किया और कई सुझाव दिए, जिन्हें अंतिम संस्करण में शामिल किया गया है।</p><p>रेल मंत्रालय का कहना है कि वेबसाइट को अधिक सरल और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाया गया है, जिससे पहली बार टिकट बुक करने वाले यात्रियों को भी किसी तरह की परेशानी नहीं होगी।</p><h5 class=""><b>ये हैं नई वेबसाइट के 4 बड़े बदलाव</b></h5><p><b>1. एक स्क्रीन पर दिखेंगी सभी क्लास की सीटें</b></p><p>अब यात्रियों को अलग-अलग क्लास जैसे Sleeper, 3AC, 2AC या First AC पर अलग-अलग क्लिक करके सीट उपलब्धता देखने की जरूरत नहीं होगी। नई वेबसाइट में सभी क्लास की उपलब्ध सीटें एक ही स्क्रीन पर दिखाई देंगी, जिससे समय की बचत होगी।</p><p><b>2. टिकट बुकिंग होगी और तेज</b></p><p>रेलवे ने टिकट बुकिंग के स्टेप्स कम कर दिए हैं। पहले जहां टिकट बुक करने के लिए कई स्क्रीन से गुजरना पड़ता था, वहीं अब कम क्लिक में पूरी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। इससे खासकर तत्काल टिकट बुकिंग के दौरान यात्रियों को फायदा मिलेगा।<br></p><p><b>3. बार-बार डिटेल भरने से मिलेगी राहत</b></p><p>नई वेबसाइट में पैसेंजर प्रोफाइल सेव करने की सुविधा दी जाएगी। एक बार जानकारी सेव करने के बाद हर बार नाम, उम्र और अन्य विवरण दोबारा भरने की जरूरत नहीं होगी। इससे टिकट बुकिंग और तेज होगी।</p><p><b>4. आसान होगा लॉगिन और कैप्चा</b></p><p>नई वेबसाइट में कैप्चा को पहले की तुलना में काफी सरल बनाया गया है। साथ ही, टिकट बुकिंग के दौरान दिखाई देने वाले अनावश्यक विज्ञापन और चमकदार ग्राफिक्स भी हटाए जा रहे हैं, जिससे वेबसाइट का अनुभव बेहतर होगा।</p><h5 class=""><b>40 साल पुराना रिजर्वेशन सिस्टम होगा अपग्रेड</b></h5><p>IRCTC वेबसाइट में बदलाव के साथ-साथ भारतीय रेलवे अपने पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) को भी आधुनिक तकनीक से अपग्रेड कर रहा है। यह सिस्टम कई दशकों से टिकट बुकिंग का आधार रहा है।</p><p>नए अपग्रेड के बाद रेलवे एक आधुनिक रिजर्वेशन इंजन भी शुरू करेगा, जिससे अधिक संख्या में टिकट अनुरोधों को एक साथ प्रोसेस किया जा सकेगा। इससे वेबसाइट के क्रैश होने या धीमी होने जैसी समस्याएं काफी हद तक कम हो सकती हैं।</p><h5 class=""><b>तत्काल टिकट में फर्जी बुकिंग पर लगेगी रोक</b></h5><p>रेल मंत्रालय का कहना है कि नए सिस्टम का एक प्रमुख उद्देश्य तत्काल टिकट बुकिंग में होने वाली फर्जी ऑटोमेटेड बुकिंग को रोकना भी है।</p><p>नई तकनीक के जरिए बॉट्स और ऑटोमैटिक स्क्रिप्ट्स की पहचान करना आसान होगा, जिससे आम यात्रियों को तत्काल टिकट मिलने की संभावना पहले के मुकाबले बेहतर हो सकती है।</p><h5 class=""><b>कब होगी नई वेबसाइट लॉन्च?</b></h5><p>फिलहाल नई वेबसाइट का बीटा वर्जन परीक्षण के चरण में है। रेलवे आने वाले कुछ महीनों में इसे चरणबद्ध तरीके से सभी यात्रियों के लिए उपलब्ध कराने की तैयारी कर रहा है। यूजर फीडबैक के आधार पर अंतिम बदलाव किए जाएंगे, जिसके बाद नई वेबसाइट को पूरी तरह लाइव किया जाएगा।</p><p>रेल मंत्रालय का मानना है कि इस अपग्रेड के बाद टिकट बुकिंग पहले से अधिक तेज, पारदर्शी और सुविधाजनक होगी। साथ ही, भविष्य में यात्रियों को आधुनिक डिजिटल सेवाओं का बेहतर अनुभव भी मिलेगा।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ IRCTC की नई वेबसाइट से टिकट बुकिंग होगी आसान, एक क्लिक में दिखेंगी सभी सीटें ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/utility-news/e20-petrol-complete-truth-benefits-risks-mileage-engine-insurance-india-5353 ]]></guid><title><![CDATA[ E20 पेट्रोल विवाद पर खास रिपोर्ट: फायदा ज़्यादा... या आपकी गाड़ी पर खतरा? ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/utility-news/e20-petrol-complete-truth-benefits-risks-mileage-engine-insurance-india-5353 ]]></link><pubDate><![CDATA[Thu, 09 Jul 2026 18:52:02 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ नई दिल्ली: देश में पहली बार पेट्रोल सिर्फ पेट्रोल नहीं रहा। हर लीटर पेट्रोल के साथ अब राजनीति, विज्ञान, किसानों की उम्मीद, पर्यावरण की चिंता और करोड़ों वाहन मालिकों की आशंका भी जुड़ चुकी है। जिस एथेनॉ ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size: 11pt; font-family: Arial, sans-serif; color: rgb(0, 0, 0); background-color: transparent; font-style: normal; font-variant: normal; text-decoration: none; vertical-align: baseline; white-space: pre-wrap;"><b>नई दिल्ली:</b></span><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;"> देश में पहली बार पेट्रोल सिर्फ पेट्रोल नहीं रहा। हर लीटर पेट्रोल के साथ अब राजनीति, विज्ञान, किसानों की उम्मीद, पर्यावरण की चिंता और करोड़ों वाहन मालिकों की आशंका भी जुड़ चुकी है। जिस एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल, यानी E20 को कभी हरित ईंधन, किसानों की तरक्की का ज़रिया और भारत को तेल आयात से आज़ादी दिलाने वाला सपना बताया गया था, वही आज देश की सबसे बड़ी सार्वजनिक बहसों में शुमार हो चुका है।</span></p><p><b style="font-weight:normal;" id="docs-internal-guid-e5911d7e-7fff-e99d-657e-339c2681a8fd"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">सरकार का दावा है कि इससे देश के करोड़ों रुपये बचे हैं, विदेशी तेल पर निर्भरता घटी है, प्रदूषण कम हुआ है और किसानों की आमदनी भी बढ़ी है। दूसरी तरफ लाखों वाहन मालिक सवाल पूछ रहे हैं- अगर सब कुछ इतना अच्छा है, तो गाड़ियों की माइलेज क्यों घट रही है, मैकेनिकों के पास शिकायतें क्यों बढ़ रही हैं, कार कंपनियों की मैनुअल किताबों में अलग-अलग बातें क्यों लिखी हैं, और आखिर यह मामला अदालत तक क्यों पहुंचा?</span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">यह रिपोर्ट इसी बहस को शुरुआत से आखिर तक, हर पहलू के साथ समझने की कोशिश है, ताकि पाठक खुद तय कर सकें कि यह बदलाव उनके लिए कितना फायदेमंद है, और कितना चुनौतीपूर्ण।</span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p><img src="https://media.gtcbharat.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-08-at-65048-PM-8_3af2f8af612fde87ca0e92cc68d85f85_1600X900.webp" style="width: 1025.66px;"><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><h5 style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;" class=""><span style="font-size: 11pt; font-family: Arial, sans-serif; color: rgb(0, 0, 0); background-color: transparent; font-style: normal; font-variant: normal; text-decoration: none; vertical-align: baseline; white-space: pre-wrap;"><b>शुरुआत कहां से हुई, और आज क्या हैं हालात&nbsp;</b></span></h5><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">भारत में पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने का कार्यक्रम 2003 में एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू हुआ था। इसके बाद देश पहले E5, फिर E10 और अब E20 यानी 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल तक पहुंच चुका है। सरकार का लक्ष्य 2030 तक E20 हासिल करने का था, लेकिन पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक यह लक्ष्य दिसंबर 2025 में ही, तय समय से करीब पांच साल पहले, हासिल कर लिया गया, जबकि 2013-14 में ब्लेंडिंग का स्तर महज़ डेढ़ फीसदी के आसपास था। आज देश के लगभग सभी खुदरा पेट्रोल पंपों पर E20 उपलब्ध है।</span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">सरकार के मुताबिक भारत अपनी ज़रूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, जिस पर हर साल लाखों करोड़ रुपये खर्च होते हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय का दावा है कि 2014-15 से अब तक एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम से 1.9 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा की विदेशी मुद्रा बचाई जा चुकी है, किसानों को 1.6 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा का भुगतान समय से हुआ है, करीब 930 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन घटा है, और 310 लाख मीट्रिक टन से ज़्यादा कच्चे तेल के आयात की जगह ली जा चुकी है। देश की स्थापित एथेनॉल उत्पादन क्षमता अब करीब 2,000 करोड़ लीटर तक पहुंच चुकी है, और मौजूदा एथेनॉल सप्लाई ईयर (2025-26) में 1,200 करोड़ लीटर से ज़्यादा खरीद का अनुमान है।</span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी लगातार इसे भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम बताते रहे हैं। उनका कहना है कि यह सिर्फ ईंधन बदलने की नीति नहीं, बल्कि किसानों, पर्यावरण और अर्थव्यवस्था, तीनों के हित में लिया गया फैसला है।</span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">लेकिन जैसे-जैसे E20 पूरे देश में पहुंचा, वैसे-वैसे सवाल भी बढ़ने लगे। सोशल मीडिया पर माइलेज घटने, इंजन की परफॉर्मेंस प्रभावित होने और पुराने वाहनों में तकनीकी दिक्कतों के दावे वायरल होने लगे। भोपाल, रीवा और रायबरेली समेत कई शहरों में वाहन मालिकों ने शिकायतें उठाईं, जिसके बाद स्थानीय स्तर पर पेट्रोल के नमूनों की जांच तक कराई गई।</span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p><img src="https://media.gtcbharat.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-08-at-65048-PM_51255c82fe04c4a4b407c22df8171712_1600X900.webp" style="width: 1025.66px;"><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><h5 style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;" class=""><span style="font-size: 11pt; font-family: Arial, sans-serif; color: rgb(0, 0, 0); background-color: transparent; font-style: normal; font-variant: normal; text-decoration: none; vertical-align: baseline; white-space: pre-wrap;"><b>सर्वे बनाम सरकारी परीक्षण&nbsp;</b></span></h5><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">जून 2026 में जारी हुए लोकलसर्किल्स के एक सर्वे ने इस बहस को और तेज़ कर दिया। देश के 305 ज़िलों में 44 हज़ार से ज़्यादा लोगों की भागीदारी वाले इस सर्वे में, 2023 से पहले खरीदे गए पेट्रोल वाहनों के 66 प्रतिशत मालिकों ने दावा किया कि E20 इस्तेमाल करने के बाद उनकी गाड़ियों का माइलेज 10 प्रतिशत से ज़्यादा घटा है। 55 प्रतिशत लोगों ने मरम्मत और टूट-फूट बढ़ने की शिकायत की, और 53 प्रतिशत प्रतिभागियों ने सरकार की E20 नीति के क्रियान्वयन को 'बेहद खराब' या 'अप्रभावी' बताया। हालांकि यह एक स्वतंत्र सर्वे है, और सरकार इन दावों से सहमत नहीं है।</span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">दूसरी तरफ सरकार की परीक्षण एजेंसी ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) का कहना है कि चार पहिया गाड़ियों में करीब 40 हज़ार किलोमीटर और दोपहिया वाहनों में करीब 20 हज़ार किलोमीटर तक परीक्षण किए गए, जिनमें ड्राइविंग या ईंधन दक्षता पर कोई बड़ा नकारात्मक असर सामने नहीं आया, सिर्फ मामूली बदलाव दर्ज हुए। एजेंसी ने यह भी माना कि कुछ पुराने वाहनों में रबर के पुर्ज़ों, होज़, गैस्केट और सील पर एथेनॉल का असर पड़ सकता है। एक परीक्षण में 809 घंटे बाद एक वाहन के एग्ज़ॉस्ट वॉल्व में खराबी भी दर्ज हुई, हालांकि एजेंसी का कहना है कि इसके पीछे अन्य तकनीकी कारण भी हो सकते हैं।</span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी का कहना है कि माइलेज पर असर बेहद मामूली है और ज़्यादातर शिकायतें भ्रामक हैं। सरकार का यह भी कहना है कि केवल E20 पेट्रोल भरवाने से किसी वाहन का इंश्योरेंस अपने आप अमान्य नहीं होगा। फिलहाल सरकार का रोडमैप 31 अक्टूबर 2026 तक E20 पर केंद्रित है, और इसके आगे किसी भी कदम से पहले अंतर-मंत्रालयी समिति की रिपोर्ट और सभी पक्षों से सलाह-मशविरा किया जाएगा।</span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br><br></b></p><h5 style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;" class=""><span style="font-size: 11pt; font-family: Arial, sans-serif; color: rgb(0, 0, 0); background-color: transparent; font-style: normal; font-variant: normal; text-decoration: none; vertical-align: baseline; white-space: pre-wrap;"><b>एथेनॉल है क्या, और पेट्रोल में मिलाया कैसे जाता है</b></span></h5><p><b style="font-weight:normal;"><br><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">एथेनॉल एक तरह का बायो-फ्यूल यानी जैव ईंधन है, जो मुख्य रूप से गन्ने के रस, शीरे (मोलासेस), मक्का, टूटे हुए चावल और कुछ अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। इन फसलों में मौजूद स्टार्च और शर्करा को पहले फर्मेंटेशन (किण्वन) की प्रक्रिया से गुज़ारा जाता है, फिर डिस्टिलेशन के ज़रिए शुद्ध एथेनॉल तैयार किया जाता है। इसके बाद पानी को पूरी तरह अलग किया जाता है, ताकि ईंधन के लिए इस्तेमाल होने वाला एनहाइड्रस एथेनॉल, यानी बिना पानी वाला शुद्ध अल्कोहल तैयार हो सके।</span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">इसके बाद तेल कंपनियों के डिपो में इसे तय अनुपात में पेट्रोल के साथ मिलाया जाता है। दस प्रतिशत एथेनॉल वाले मिश्रण को E10 कहा जाता है, बीस प्रतिशत एथेनॉल और अस्सी प्रतिशत पेट्रोल वाले मिश्रण को E20। यानी पेट्रोल पंप पर मिलने वाला E20 कोई अलग ईंधन नहीं, बल्कि तय वैज्ञानिक मानकों के अनुसार तैयार किया गया मिश्रण है।</span></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;"><br></span></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><img src="https://media.gtcbharat.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-08-at-65048-PM-3_59affaa931505b8b6cfdb096f9b3ac17_1600X900.webp" style="width: 1025.66px;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;"><br></span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">सरकार इस नीति के पीछे तीन बड़ी वजहें गिनाती है- विदेशी कच्चे तेल पर निर्भरता घटाना, किसानों को गन्ना-मक्का जैसी फसलों के लिए नया और स्थायी बाज़ार देना, और वाहनों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन में कमी लाना। गडकरी का कहना रहा है कि अगर किसान 'अन्नदाता' के साथ-साथ 'ऊर्जादाता' भी बनें, तो गांवों की अर्थव्यवस्था मज़बूत होगी और देश की ऊर्जा सुरक्षा भी बढ़ेगी।</span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">सरकार की योजना अब सिर्फ पेट्रोल तक सीमित नहीं है। गडकरी के मुताबिक डीज़ल के लिए भी वैकल्पिक जैव ईंधन पर काम चल रहा है। चूंकि एथेनॉल को सीधे डीज़ल में नहीं मिलाया जा सकता, इसलिए वैज्ञानिक इसे आइसोब्यूटेनॉल में बदलने की तकनीक पर काम कर रहे हैं, जिसमें टाटा मोटर्स समेत कई कंपनियां सहयोग कर रही हैं। सफल रहने पर डीज़ल में भी करीब 15 प्रतिशत तक आइसोब्यूटेनॉल मिलाने की योजना लागू हो सकती है।</span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p><img src="https://media.gtcbharat.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-08-at-65048-PM-1_6114ab96dce69504cae5ca1f679e7ed0_1600X900.webp" style="width: 1025.66px;"><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p><b style="font-weight:normal;"><br><br></b></p><h5 style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;" class=""><span style="font-size: 11pt; font-family: Arial, sans-serif; color: rgb(0, 0, 0); background-color: transparent; font-style: normal; font-variant: normal; text-decoration: none; vertical-align: baseline; white-space: pre-wrap;"><b>विरोध की जड़- मैकेनिक, इंश्योरेंस कंपनियां और कार कंपनियों की मैनुअल किताबें</b></span></h5><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">सबसे बड़ी चिंता उन करोड़ों लोगों की है, जिनके पास 2023 से पहले खरीदी गई गाड़ियां हैं। कई वाहन मालिकों ने माइलेज घटने के अलावा इंजन परफॉर्मेंस, कोल्ड स्टार्ट और फ्यूल सिस्टम से जुड़ी दिक्कतों की शिकायत भी की है। मैकेनिकों का एक वर्ग मानता है कि पुराने वाहनों में लंबे समय तक ज़्यादा एथेनॉल मिश्रित ईंधन इस्तेमाल करने से रबर के कुछ पुर्ज़ों, फ्यूल पाइप, गैस्केट और फ्यूल पंप पर असर पड़ सकता है- हालांकि ऑटोमोबाइल इंजीनियरों का कहना है कि यह असर वाहन की उम्र, तकनीक और डिज़ाइन पर निर्भर करता है, हर वाहन में एक जैसा नहीं होता।</span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">विवाद तब और बढ़ गया जब कुछ वाहन कंपनियों के पुराने ओनर मैनुअल सामने आए। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया कि कुछ कंपनियों के मैनुअल में अधिकतम E10 ईंधन इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है, और सवाल उठाया कि जब करोड़ों पुराने वाहन E20 के लिए डिज़ाइन ही नहीं किए गए थे, तो इसे पूरे देश में इतनी तेज़ी से क्यों लागू किया गया। उनका यह भी दावा रहा कि तीन जुलाई को केंद्र सरकार ने मारुति सुज़ुकी, टोयोटा किर्लोस्कर, हीरो मोटोकॉर्प, हुंडई, बजाज ऑटो और टीवीएस मोटर जैसी कंपनियों को एक साझा मंच पर बुलाकर E20 को सुरक्षित बताने के लिए कहा, जबकि टोयोटा की अपनी आधिकारिक मैनुअल किताब सिर्फ E10 तक की सलाह देती है।</span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">बीमा कंपनियों की तरफ से भी सतर्क करने वाले बयान आए। एक बड़ी बीमा कंपनी आईसीआईसीआई लोम्बार्ड ने कहा कि अगर कोई गाड़ी E20 के लिए नहीं बनी और फिर भी उसमें यह ईंधन डाला जाता है, तो इससे होने वाला नुकसान 'लापरवाही' माना जा सकता है, जिससे क्लेम खारिज होने का खतरा बढ़ जाता है। सरकार ने अपनी तरफ से स्पष्ट किया है कि केवल E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने से किसी वाहन का बीमा अपने आप अमान्य नहीं होता, लेकिन किसी भी क्लेम का फैसला वाहन की वास्तविक तकनीकी खराबी, निर्माता की गाइडलाइन और पॉलिसी की शर्तों के आधार पर ही होगा- यानी पॉलिसी रद्द न होना और क्लेम पास होना, ये दो अलग बातें हैं।</span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">दूसरी तरफ सरकार और कई प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनियों ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि E20 ईंधन सुरक्षित है और ज़्यादातर वाहनों में इससे कोई बड़ी तकनीकी समस्या नहीं आती। नितिन गडकरी ने आलोचकों को खुली चुनौती दी कि अगर किसी के पास ऐसा एक भी प्रमाणित मामला है जिसमें सिर्फ E20 की वजह से किसी वाहन का इंजन खराब हुआ हो, तो उसे सामने लाया जाए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर कई भ्रामक और प्रायोजित अभियान चलाए जा रहे हैं। गडकरी के परिवार से जुड़ी कंपनियों- सियान एग्रो इंडस्ट्रीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर और मानस एग्रो पर लगे हितों के टकराव के आरोपों को भी उन्होंने निराधार बताते हुए कहा कि उनकी पारिवारिक कंपनियां चीनी मिलें चलाती हैं, लेकिन नीति निर्माण में उनकी कोई भूमिका नहीं है।</span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p><img src="https://media.gtcbharat.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-08-at-65048-PM-4_9532c22d4915f28f8921c0f2d4ba6b61_1600X900.webp" style="width: 1025.66px;"><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><h5 style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;" class=""><span style="font-size: 11pt; font-family: Arial, sans-serif; color: rgb(0, 0, 0); background-color: transparent; font-style: normal; font-variant: normal; text-decoration: none; vertical-align: baseline; white-space: pre-wrap;"><b>अदालत में क्या हुआ</b></span></h5><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">यह विवाद अदालत तक भी पहुंचा। भारत पेट्रोलियम और अन्य तेल कंपनियों से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान मीडिया के एक हिस्से में यह खबर चली कि अटॉर्नी जनरल ने अदालत में E20 को एक ‘प्रयोग’ यानी एक्सपेरिमेंट बताया है। इस दावे के बाद विपक्ष ने सवाल उठाया कि अगर यह अब भी प्रयोग है, तो करोड़ों वाहनों पर इसे क्यों थोपा जा रहा है। हालांकि केंद्र सरकार और अटॉर्नी जनरल के कार्यालय ने इन खबरों का खंडन करते हुए स्पष्ट किया कि अदालत में नीति की वैधता या तकनीकी प्रभाव पर कोई टिप्पणी नहीं की गई थी, सुनवाई सिर्फ एथेनॉल आवंटन से जुड़े कानूनी विवाद तक सीमित थी। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मौजूदा एथेनॉल सप्लाई व्यवस्था को यथावत बनाए रखने का आदेश दिया है।</span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">पेट्रोलियम मंत्रालय ने इसी महीने एक विस्तृत 10-सूत्रीय स्पष्टीकरण भी जारी किया, जिसमें पानी की खपत, इंजन को नुकसान, इंश्योरेंस अमान्य होने और पर्यावरण को नुकसान जैसे कई वायरल दावों को भ्रामक बताया गया। मंत्रालय के मुताबिक एथेनॉल संयंत्रों को पर्यावरण मंज़ूरी लेनी होती है, भूजल नियमों का पालन करना होता है और ज़ीरो लिक्विड डिस्चार्ज सिस्टम चलाना अनिवार्य है।</span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br><br></b></p><h5 style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;" class=""><span style="font-size: 11pt; font-family: Arial, sans-serif; color: rgb(0, 0, 0); background-color: transparent; font-style: normal; font-variant: normal; text-decoration: none; vertical-align: baseline; white-space: pre-wrap;"><b>E25, E27, E30, E85 और E100 की तैयारी</b></span></h5><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">सरकार का रोडमैप E20 पर खत्म नहीं होता। 1 अप्रैल 2026 से E20 पेट्रोल के लिए न्यूनतम रिसर्च ऑक्टेन नंबर 95 तय किया जा चुका है, और भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने 22 से 30 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रण के लिए भी नए मानक अधिसूचित कर दिए हैं।</span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के मुताबिक अब देश की नज़र चरणबद्ध तरीके से E25, E27 और E30 की तरफ है। उनका दावा है कि E20 लागू होने के बाद बीते दस महीनों में इंजन फेल होने या टूटने का एक भी पुष्ट मामला सामने नहीं आया। उन्होंने ब्राज़ील का उदाहरण दिया, जहां सालों से E27 पेट्रोल इस्तेमाल हो रहा है। पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक 2030 तक E30 का लक्ष्य हासिल करने की योजना है, और BIS पहले ही E27 के मानकों पर काम शुरू कर चुका है।</span></p><p><br></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">इससे भी आगे बढ़कर सरकार ने E85 और लगभग पूरी तरह एथेनॉल पर आधारित ईंधन E100 को भी कानूनी मंज़ूरी दे दी है। गडकरी ने जून 2026 में नागपुर में हुई शुगर, एथेनॉल एंड बायो-एनर्जी इंडिया कॉन्फ्रेंस में बताया कि उन्होंने खुद उसी रात करीब आठ बजे E100 को कानूनी मान्यता देने वाली फाइल पर दस्तखत किए। दिल्ली में E85 बिकना भी शुरू हो चुका है, जिसकी कीमत मौजूदा E20 के मुकाबले करीब बीस रुपये प्रति लीटर कम है।&nbsp;</span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;&lt;a href="https://x.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#WATCH&lt;/a&gt; | Nagpur, Maharashtra: Union Minister Nitin Gadkari says, “Last night at 8 PM, I signed the file, finalising the regulations to legally authorise the use of 100% ethanol. I am delighted to share that I, along with Hardeep Singh Puri, had the opportunity to launch the 100%… &lt;a href="https://t.co/BDIyTZGZF4"&gt;pic.twitter.com/BDIyTZGZF4&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; ANI (@ANI) &lt;a href="https://x.com/ANI/status/2065790404180738447?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 13, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;"><br></span><b style="font-weight:normal;"></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">हालांकि E85 और E100 आम गाड़ियों में सीधे नहीं भरे जा सकते। इसके लिए खास तौर पर बनी ‘फ्लेक्स-फ्यूल’ गाड़ियां चाहिए, जिनमें इंजन टंकी में मौजूद एथेनॉल के अनुपात को खुद पहचानकर इग्निशन और फ्यूल इंजेक्शन को अपने आप बदल लेता है। मारुति सुज़ुकी अपनी वैगन आर का फ्लेक्स-फ्यूल वर्ज़न पहले ही दिखा चुकी है, हीरो मोटोकॉर्प की कुछ बाइकें भी तैयार हैं, और गडकरी के मुताबिक टोयोटा, सुज़ुकी, हुंडई और एमजी जैसी कंपनियां भी जल्द अपनी फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां उतारने वाली हैं। सरकार ने दिसंबर 2026 तक करीब पांच सौ पेट्रोल पंपों पर और 2027 के अंत तक करीब पांच हज़ार पंपों पर E85 जैसी सुविधा पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।</span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br><br></b></p><h5 style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;" class=""><span style="font-size: 11pt; font-family: Arial, sans-serif; color: rgb(0, 0, 0); background-color: transparent; font-style: normal; font-variant: normal; text-decoration: none; vertical-align: baseline; white-space: pre-wrap;"><b>सस्ते चावल की सब्सिडी, और एक नई स्टडी जो सवाल और गहरे कर देती है</b></span></h5><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">बीते हफ्ते सरकार ने एथेनॉल उत्पादन बढ़ाने के लिए भारतीय खाद्य निगम (FCI) के अतिरिक्त 20 लाख टन टूटे चावल के भंडार को इस कार्यक्रम के लिए जारी किया है- यह उस 52 लाख टन के अतिरिक्त है, जो पहले ही जारी किया जा चुका था। यह चावल अक्टूबर 2026 तक 2,320 रुपये प्रति क्विंटल और उसके बाद जून 2027 तक 2,390 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर एथेनॉल उत्पादकों को बेचा जाएगा, जबकि FCI की अपनी आर्थिक लागत करीब 4,100 रुपये प्रति क्विंटल बैठती है। यानी सरकार अनाज-आधारित एथेनॉल उत्पादकों को भारी सब्सिडी दे रही है, ताकि ब्लेंडिंग कार्यक्रम की रफ़्तार बनी रहे।</span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">लेकिन ठीक इसी हफ्ते, 8 जुलाई को साइंस जर्नल 'पीएलओएस वन' में भारत, जर्मनी और फ्रांस के शोधकर्ताओं की एक साझा स्टडी प्रकाशित हुई है, जो इस पूरी बहस में एक नया और गंभीर आयाम जोड़ती है। यह अध्ययन 2020 से 2050 तक के अनुमानों के आधार पर बताता है कि गन्ने पर आधारित एथेनॉल उत्पादन बढ़ने से ज़मीन के इस्तेमाल के तरीके, नाइट्रोजन उत्सर्जन, पानी की खपत और खाद्य सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक जैसे-जैसे एथेनॉल उत्पादन में गन्ने के रस के सीधे इस्तेमाल का हिस्सा बढ़ता है और मोलासेस यानी शीरे की हिस्सेदारी घटती है, वैसे-वैसे चीनी के अतिरिक्त उत्पादन (सरप्लस) में भी कमी आती जाती है, जिसका सीधा असर घरेलू बाज़ार में चीनी की उपलब्धता और कीमतों पर पड़ सकता है।</span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">यह अध्ययन सरकार के दावों को सिरे से खारिज नहीं करता, लेकिन यह ज़रूर दिखाता है कि ऊर्जा सुरक्षा और किसानों की आय के फायदे अपनी जगह हैं, पर ज़मीन, पानी और खाद्यान्न पर पड़ने वाला दीर्घकालिक दबाव भी उतना ही वास्तविक है, और यही वजह है कि विशेषज्ञ अब सिर्फ इंजन और माइलेज तक सीमित न रहकर, इस नीति के कृषि और पर्यावरणीय पहलुओं पर भी स्वतंत्र आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं।</span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br><br></b></p><h5 style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;" class=""><span style="font-size: 11pt; font-family: Arial, sans-serif; color: rgb(0, 0, 0); background-color: transparent; font-style: normal; font-variant: normal; text-decoration: none; vertical-align: baseline; white-space: pre-wrap;"><b>निष्कर्ष: किसी एक पक्ष के पास भी नहीं सच्चाई&nbsp;</b></span></h5><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">बीस फीसदी एथेनॉल, अस्सी फीसदी पेट्रोल, लेकिन इस बहस में सौ फीसदी सच्चाई किसी एक पक्ष के पास नहीं है। सरकारी आंकड़े कहते हैं कि देश ने विदेशी मुद्रा बचाई, किसानों की आमदनी बढ़ी, कार्बन उत्सर्जन घटा। जनता के अनुभव कहते हैं कि माइलेज घट रहा है, मरम्मत का खर्च बढ़ रहा है, और चुनने का हक तक सीमित हो गया है। और अब एक नई वैज्ञानिक स्टडी यह भी बताती है कि इसका असर सिर्फ गाड़ियों तक नहीं, बल्कि ज़मीन, पानी और खाद्य सुरक्षा तक जा सकता है।</span></p><p><b style="font-weight:normal;"><br></b></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">सवाल यह नहीं है कि एथेनॉल अच्छा है या बुरा। सवाल यह है कि जब कोई नीति करोड़ों लोगों की जेब, उनकी गाड़ियों की उम्र और देश की खाद्य-सुरक्षा तक से जुड़ी हो, तो क्या सिर्फ भरोसा करने को कहा जाना काफी है, या फिर पारदर्शी आंकड़े, स्पष्ट विकल्प और ज़रूरत पड़ने पर मुआवज़े की गारंटी भी उतना ही ज़रूरी हक है। सरकार कहती है भरोसा रखिए, कार कंपनियां कहती हैं मैनुअल पढ़िए, इंश्योरेंस कंपनियां कहती हैं सावधानी बरतिए, और अब वैज्ञानिक कहते हैं दीर्घकालिक असर पर नज़र रखिए। ऐसे में आम आदमी आखिर किसकी सुने, यही इस पूरी बहस का सबसे बड़ा और अनुत्तरित सवाल बना हुआ है।</span></p><p><br><br></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ E20 पेट्रोल विवाद पर खास रिपोर्ट: फायदा ज़्यादा... या आपकी गाड़ी पर खतरा? ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/utility-news/epfo-pf-interest-credit-by-15-july-2026-34-crore-members-update-5332 ]]></guid><title><![CDATA[ 15 जुलाई तक खातों में आएगा EPF ब्याज, 34 करोड़ लोगों को मिलेगा फायदा ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/utility-news/epfo-pf-interest-credit-by-15-july-2026-34-crore-members-update-5332 ]]></link><pubDate><![CDATA[Wed, 08 Jul 2026 13:50:05 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ देशभर के करोड़ों कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) खाताधारकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) वित्त वर्ष 2025-26 का ब्याज जल्द ही खातों में जमा करने जा रहा है। सरकारी सूत्र ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p>देशभर के करोड़ों <b>कर्मचारी भविष्य निधि (EPF)</b> खाताधारकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) वित्त वर्ष 2025-26 का ब्याज जल्द ही खातों में जमा करने जा रहा है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, ब्याज ट्रांसफर की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और<b> 15 जुलाई 2026 </b>तक पात्र सदस्यों के खातों में ब्याज की राशि पहुंचने की उम्मीद है।</p><p>इस बार करीब 34 करोड़ EPFO सदस्यों को ब्याज का लाभ मिलेगा। इनमें सक्रिय (Active) सदस्य ही नहीं, बल्कि वे सदस्य भी शामिल हैं, जिनका योगदान बंद हो चुका है, लेकिन नियमों के अनुसार वे अभी भी ब्याज पाने के पात्र हैं।</p><h5 class=""><b>ऑटो प्रोसेसिंग के जरिए होगी ब्याज की एंट्री</b></h5><p>सूत्रों के मुताबिक, EPFO ने इस बार ब्याज क्रेडिट करने की प्रक्रिया को पूरी तरह ऑटोमेटेड सिस्टम से जोड़ दिया है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए तय ब्याज की गणना पूरी हो चुकी है और अब खातों में राशि ट्रांसफर करने से पहले अंतिम तकनीकी सत्यापन (Field Verification) किया जा रहा है।</p><p>बताया जा रहा है कि यह प्रक्रिया एक से दो दिनों में पूरी हो जाएगी। इसके बाद ब्याज सीधे खाताधारकों के EPF अकाउंट में जमा होना शुरू हो जाएगा।</p><h5 class=""><b>कितने लोगों को मिलेगा लाभ?</b></h5><p>EPFO के आंकड़ों के अनुसार, संगठन के पास कुल लगभग 34 करोड़ सदस्य दर्ज हैं। इनमें करीब 9 करोड़ सक्रिय योगदानकर्ता (Active Members) हैं, जो नियमित रूप से अपने पीएफ खाते में अंशदान जमा कर रहे हैं।</p><p>इसके अलावा लाखों ऐसे सदस्य भी हैं, जिन्होंने नौकरी छोड़ दी है या रिटायर हो चुके हैं। EPFO के नियमों के मुताबिक, योगदान बंद होने के बाद भी कुछ शर्तों के तहत तीन वर्ष तक खाते में जमा राशि पर ब्याज मिलता रहता है। यही वजह है कि इस बार लाभार्थियों की संख्या काफी बड़ी है।</p><h5 class=""><b>1.44 लाख करोड़ रुपये होगा कुल ब्याज भुगतान</b></h5><p>सरकारी सूत्रों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के लिए EPFO करीब 1.44 लाख करोड़ रुपये ब्याज के रूप में वितरित करेगा। यह राशि सीधे लाभार्थियों के पीएफ खातों में जमा होगी।</p><p>ब्याज मिलने के बाद खाताधारकों की कुल जमा राशि बढ़ जाएगी, जिससे भविष्य में रिटायरमेंट फंड और अधिक मजबूत होगा।</p><h5 class=""><b>कैसे चेक करें ब्याज आया या नहीं?</b></h5><p><b>ब्याज जमा होने के बाद खाताधारक कई माध्यमों से अपना बैलेंस देख सकते हैं।</b></p><ul><li>EPFO की आधिकारिक वेबसाइट पर लॉग इन करके<br></li><li>UMANG ऐप के जरिए<br></li><li>EPFO Member Passbook Portal पर<br></li><li>UAN नंबर के माध्यम से<br></li><li>मिस्ड कॉल या SMS सेवा का उपयोग करके</li></ul><p>यदि आपका UAN सक्रिय है और आधार व बैंक खाते से लिंक है, तो बैलेंस चेक करना बेहद आसान हो जाता है।</p><h5 class=""><b>EPFO डिजिटल सेवाओं को भी बना रहा है बेहतर</b></h5><p>हाल के दिनों में EPFO ने अपने पोर्टल और डिजिटल सेवाओं को अपग्रेड करने का काम भी किया है। संगठन का उद्देश्य क्लेम सेटलमेंट, पासबुक अपडेट, ब्याज क्रेडिट और अन्य ऑनलाइन सेवाओं को पहले से अधिक तेज और पारदर्शी बनाना है।</p><p>नई डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद आने वाले समय में पीएफ से जुड़े कई कार्य पहले की तुलना में कम समय में पूरे किए जा सकेंगे।</p><h5 class=""><b>लंबी अवधि की बचत का मजबूत आधार</b></h5><p>EPF भारत में नौकरीपेशा लोगों के लिए सबसे भरोसेमंद रिटायरमेंट सेविंग्स स्कीम मानी जाती है। इसमें कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का योगदान जमा होता है, जिस पर हर साल सरकार द्वारा घोषित ब्याज मिलता है।</p><p>विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित EPF निवेश और उस पर मिलने वाला चक्रवृद्धि (Compound) ब्याज लंबे समय में एक मजबूत रिटायरमेंट फंड तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में 15 जुलाई तक ब्याज जमा होने की खबर करोड़ों कर्मचारियों के लिए राहत और खुशी दोनों लेकर आई है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ 15 जुलाई तक खातों में आएगा EPF ब्याज, 34 करोड़ लोगों को मिलेगा फायदा ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/utility-news/ayushman-bharat-opd-appointment-booking-process-pmjay-hindi-5299 ]]></guid><title><![CDATA[ आयुष्मान भारत के लाभार्थियों को बड़ी राहत, अब एक कॉल पर घर बैठे बुक होगी OPD अपॉइंटमेंट ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/utility-news/ayushman-bharat-opd-appointment-booking-process-pmjay-hindi-5299 ]]></link><pubDate><![CDATA[Mon, 06 Jul 2026 21:00:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के लाभार्थियों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को और आसान बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। अब पात्र लाभार्थियों को अस्पताल में ओपीडी (OPD) पर्च ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY)</b> के लाभार्थियों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को और आसान बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। अब पात्र लाभार्थियों को अस्पताल में <b>ओपीडी (OPD) </b>पर्ची बनवाने या डॉक्टर से मिलने के लिए लंबी लाइन में खड़े होने की जरूरत नहीं होगी। नई सुविधा के तहत वे घर बैठे एक हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके योजना से जुड़े अस्पतालों में अपनी<b> OPD</b> अपॉइंटमेंट पहले से बुक करा सकते हैं।</p><p>इस पहल का उद्देश्य मरीजों का समय बचाना, अस्पतालों में भीड़ कम करना और इलाज की प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाना है। खासकर बुजुर्गों, महिलाओं और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए यह सुविधा काफी राहत देने वाली साबित हो सकती है।</p><h5 class=""><b>एक कॉल से बुक होगी OPD अपॉइंटमेंट</b></h5><p>योजना से जुड़े आधिकारिक प्लेटफॉर्म के अनुसार, आयुष्मान भारत योजना के पात्र लाभार्थी 1800-1800-4444 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके OPD अपॉइंटमेंट बुक कर सकते हैं। कॉल के दौरान लाभार्थी को अपनी आवश्यक जानकारी साझा करनी होगी, जिसके बाद योजना से जुड़े (Empanelled) अस्पताल में उपलब्ध स्लॉट के अनुसार अपॉइंटमेंट तय कर दी जाएगी।</p><p>इस सुविधा से मरीजों को अस्पताल पहुंचने के बाद रजिस्ट्रेशन के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा और डॉक्टर से समय पर परामर्श मिल सकेगा।</p><h5 class=""><b>कैसे करें OPD अपॉइंटमेंट बुक?</b></h5><p>यदि आप आयुष्मान भारत योजना के पात्र लाभार्थी हैं, तो प्रक्रिया बेहद आसान है।</p><ul><li>हेल्पलाइन नंबर 1800-1800-4444 पर कॉल करें।<br></li><li>अपनी पहचान और आवश्यक जानकारी साझा करें।<br></li><li>अपनी पसंद के सूचीबद्ध (Empanelled) अस्पताल का चयन करें।<br></li><li>उपलब्ध समय के अनुसार OPD अपॉइंटमेंट कन्फर्म कराएं।<br></li><li>निर्धारित समय पर अस्पताल पहुंचकर डॉक्टर से परामर्श लें।</li></ul><p>&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;With Ayushman Sampark, PMJAY beneficiaries can book their OPD appointment at empanelled hospitals and skip the long queues.&lt;br&gt;&lt;br&gt;📷To book an appointment dial 📷1800-1800-4444&lt;a href="https://x.com/hashtag/healthcare?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#healthcare&lt;/a&gt; &lt;a href="https://x.com/hashtag/ayushmanbharatyojana?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#ayushmanbharatyojana&lt;/a&gt; &lt;a href="https://x.com/hashtag/ayushmancard?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#ayushmancard&lt;/a&gt; &lt;a href="https://x.com/hashtag/pmjay?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#pmjay&lt;/a&gt; &lt;a href="https://x.com/hashtag/helplinenumber?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#helplinenumber&lt;/a&gt; &lt;a href="https://x.com/hashtag/tolfreenumber?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#tolfreenumber&lt;/a&gt; &lt;a href="https://t.co/Yjx62oSY33"&gt;pic.twitter.com/Yjx62oSY33&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; PMJAY-UP (Ayushman Uttar Pradesh) (@PmjayP) &lt;a href="https://x.com/PmjayP/status/2074010978497581489?ref_src=twsrc^tfw"&gt;July 6, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;&nbsp;<br></p><p>इस डिजिटल सुविधा से इलाज की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित और तेज होगी।</p><h5 class=""><b>क्या है आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना?</b></h5><p>आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) देश की सबसे बड़ी सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में से एक है। इसकी शुरुआत 23 सितंबर 2018 को आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी।</p><p>इस योजना के तहत पात्र परिवारों को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जाता है। यह सुविधा देशभर के सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों में मिलती है।</p><h5 class=""><b>योजना के तहत क्या-क्या सुविधाएं मिलती हैं?</b></h5><p>इस योजना के अंतर्गत मरीजों को केवल अस्पताल में भर्ती होने का खर्च ही नहीं, बल्कि इलाज से जुड़ी कई अन्य सुविधाएं भी मिलती हैं। इनमें डॉक्टर की सलाह, जांच, दवाइयां, ऑपरेशन, आईसीयू, इम्प्लांट, अस्पताल में रहने और भोजन का खर्च शामिल है।</p><p>इसके अलावा अस्पताल में भर्ती होने से पहले के तीन दिन और डिस्चार्ज के बाद 15 दिन तक आवश्यक इलाज का खर्च भी योजना के दायरे में आता है। पहले से मौजूद गंभीर बीमारियां भी योजना के पहले दिन से कवर होती हैं। परिवार के सदस्यों की संख्या या उम्र को लेकर कोई सीमा निर्धारित नहीं है।</p><h5 class=""><b>मरीजों को होगा बड़ा फायदा</b></h5><p>नई OPD अपॉइंटमेंट सुविधा से अस्पतालों में भीड़ कम होगी और मरीजों को समय पर इलाज मिल सकेगा। इससे बुजुर्ग, दिव्यांग और दूर-दराज के इलाकों से आने वाले लोगों को विशेष लाभ मिलेगा। साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक डिजिटल, पारदर्शी और सुविधाजनक बनाने में भी मदद मिलेगी।</p><p>अगर आप भी आयुष्मान भारत योजना के पात्र लाभार्थी हैं, तो अस्पताल जाने से पहले हेल्पलाइन नंबर 1800-1800-4444 पर कॉल कर OPD अपॉइंटमेंट बुक कर सकते हैं। इससे आपका समय बचेगा और इलाज की प्रक्रिया पहले से अधिक आसान और व्यवस्थित होगी।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ आयुष्मान भारत के लाभार्थियों को बड़ी राहत, अब एक कॉल पर घर बैठे बुक होगी OPD अपॉइंटमेंट ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/utility-news/lucknow-kanpur-expressway-toll-rates-14-july-vehicle-wise-list-fastag-5239 ]]></guid><title><![CDATA[ Lucknow-Kanpur Expressway: 14 जुलाई से शुरू होगी टोल वसूली, जानिए किस वाहन पर कितना देना होगा शुल्क ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/utility-news/lucknow-kanpur-expressway-toll-rates-14-july-vehicle-wise-list-fastag-5239 ]]></link><pubDate><![CDATA[Fri, 03 Jul 2026 19:00:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ लखनऊ और कानपुर के बीच सफर करने वाले लाखों यात्रियों के लिए 14 जुलाई से बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने घोषणा की है कि **लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे** पर इसी तारीख से टोल  ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p></p><p>लखनऊ और कानपुर के बीच सफर करने वाले लाखों यात्रियों के लिए<b> 14 जुलाई</b> से बड़ा बदलाव होने जा रहा है।<b> राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) </b>ने घोषणा की है कि **<b>लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे</b>** पर इसी तारीख से टोल वसूली शुरू कर दी जाएगी। इसके साथ ही सभी प्रकार के वाहनों के लिए नई टोल दरें भी तय कर दी गई हैं। ऐसे में अगर आप इस एक्सप्रेसवे से यात्रा करने की योजना बना रहे हैं, तो सफर से पहले नई टोल दरों की जानकारी जरूर कर लें।</p><p>करीब 63 किलोमीटर लंबे छह लेन वाले इस एक्सप्रेसवे&nbsp; का निर्माण लगभग&nbsp; 4,700 करोड़ रुपये&nbsp; की लागत से किया गया है। भविष्य में जरूरत के अनुसार इसे आठ लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा। आधुनिक तकनीक से लैस इस एक्सप्रेसवे पर अत्याधुनिक टोल प्लाजा स्थापित किए गए हैं, जहां फास्टैग के जरिए बिना रुके टोल भुगतान किया जा सकेगा।</p><h5 class=""><b>14 जुलाई से लागू होंगी नई टोल दरें</b></h5><p>एनएचएआई द्वारा जारी प्रस्तावित टोल दरों के अनुसार, सबसे अधिक उपयोग करने वाले निजी वाहन चालकों को एक तरफ की यात्रा के लिए <b>275 रुपये</b> का भुगतान करना होगा। वहीं 24 घंटे के भीतर वापसी करने पर रियायती दर के तहत&nbsp;<b>415 रुपये</b>&nbsp;देने होंगे।</p><h5 class=""><b>वाहनवार टोल शुल्क</b></h5><table class="table table-bordered"><tbody><tr><td><b>वाहन का प्रकार</b></td><td><b>एक तरफ का टोल शुल्क</b></td></tr><tr><td>कार / जीप / वैन&nbsp;&nbsp;</td><td>&nbsp;₹275</td></tr><tr><td>24 घंटे के भीतर रिटर्न (कार)</td><td>₹415</td></tr><tr><td>हल्के कमर्शियल वाहन (LCV)</td><td>₹445</td></tr><tr><td>बस</td><td>₹935</td></tr><tr><td>ट्रक</td><td>₹935</td></tr><tr><td><p>मल्टी एक्सल वाहन</p></td><td>₹1,020</td></tr></tbody></table><b>**नोट:** वाणिज्यिक वाहनों के रिटर्न और मासिक पास संबंधी दरें एनएचएआई के अंतिम नोटिफिकेशन के अनुसार लागू होंगी।</b><p></p><h5 class=""><b>शुरुआती महीनों में NHAI खुद करेगा संचालन</b></h5><p>टोल वसूली शुरू होने के बाद शुरुआती **दो से तीन महीने तक एनएचएआई स्वयं टोल प्लाजा का संचालन करेगा।** इस दौरान एक्सप्रेसवे पर वाहनों की संख्या, ट्रैफिक पैटर्न और राजस्व का आकलन किया जाएगा। इसके बाद आगे की संचालन प्रक्रिया और ठेका व्यवस्था पर फैसला लिया जाएगा।</p><h5 class=""><b>FASTag Annual Pass वालों को मिलेगा बड़ा फायदा</b></h5><p>अगर आपके वाहन पर सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय का&nbsp; <b>₹3,075</b> वाला <b>Annual FASTag Pass&nbsp;</b> सक्रिय है, तो यह एक्सप्रेसवे आपके लिए काफी सस्ता साबित होगा।</p><p>इस पास के तहत एक वर्ष में&nbsp; <b>200</b> यात्राओं&nbsp; तक की सुविधा मिलती है। ऐसे में प्रत्येक यात्रा की औसत लागत करीब&nbsp; <b>15 रुपये</b> के आसपास पड़ती है। जो लोग रोजाना या नियमित रूप से लखनऊ और कानपुर के बीच सफर करते हैं, उनके लिए यह योजना काफी किफायती मानी जा रही है।</p><h5 class=""><b>हाईटेक सुविधाओं से लैस होगा एक्सप्रेसवे</b></h5><p>लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे को आधुनिक तकनीक के अनुरूप विकसित किया गया है। यहां लगाए गए स्मार्ट टोल सिस्टम के कारण वाहन टोल प्लाजा के पास पहुंचने से पहले ही FASTag स्कैन हो जाएगा। इससे लंबी कतारों से राहत मिलेगी और यात्रा का समय भी कम होगा।</p><p>इसके अलावा एक्सप्रेसवे पर बेहतर सड़क सुरक्षा, आपातकालीन सहायता, सीसीटीवी निगरानी और ट्रैफिक मैनेजमेंट जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध रहेंगी।</p><h5 class=""><b>यात्रियों के लिए क्या है सलाह?</b></h5><p>यदि आप 14 जुलाई के बाद इस एक्सप्रेसवे का उपयोग करने वाले हैं, तो अपने FASTag की वैधता और बैलेंस पहले ही जांच लें। नियमित यात्रा करने वाले वाहन मालिक Annual FASTag Pass का विकल्प चुनकर अपनी यात्रा लागत में काफी बचत कर सकते हैं।</p><p>नई टोल व्यवस्था लागू होने के साथ लखनऊ और कानपुर के बीच सफर पहले से अधिक तेज, सुरक्षित और व्यवस्थित होने की उम्मीद है। हालांकि यात्रियों को अब यात्रा की योजना बनाते समय टोल शुल्क को भी अपने बजट में शामिल करना होगा।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ Lucknow-Kanpur Expressway: 14 जुलाई से शुरू होगी टोल वसूली, जानिए किस वाहन पर कितना देना होगा शुल्क ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/utility-news/epfo-2-01-upi-pf-withdrawal-new-rules-cites-update-2026-5204 ]]></guid><title><![CDATA[ EPFO 2.01: अब UPI से निकाल सकेंगे PF का पैसा, अगले 7-10 दिनों में शुरू होगी नई सुविधा ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/utility-news/epfo-2-01-upi-pf-withdrawal-new-rules-cites-update-2026-5204 ]]></link><pubDate><![CDATA[Wed, 01 Jul 2026 19:32:14 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ देश के करोड़ों कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के खाताधारकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। EPFO जल्द ही अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ऐसा बदलाव करने जा रहा है, जिससे भविष्य निधि (PF) का पैसा निकालना पहले  ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p>देश के करोड़ों <b>कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO)</b> के खाताधारकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। EPFO जल्द ही अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ऐसा बदलाव करने जा रहा है, जिससे भविष्य निधि (PF) का पैसा निकालना पहले से कहीं अधिक आसान और तेज हो जाएगा। श्रम मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, **<b>EPFO 2.01</b>** नामक नए डिजिटल सिस्टम के तहत खाताधारकों को **<b>UPI के माध्यम से सीधे अपने बैंक खाते में PF राशि प्राप्त करने की सुविधा</b>** मिलने वाली है।</p><p>यह बदलाव ऐसे समय में सामने आया है, जब EPFO का ऑनलाइन पोर्टल डेटाबेस अपग्रेड और सॉफ्टवेयर माइग्रेशन के कारण अस्थायी रूप से बंद है। तकनीकी कार्य पूरा होने के बाद नई डिजिटल सेवाओं को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।</p><h5 class=""><b>अगले 7 से 10 दिनों में शुरू हो सकती है UPI सुविधा</b></h5><p>श्रम मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने जानकारी दी है कि **<b>UPI आधारित PF निकासी की सुविधा अगले 7 से 10 दिनों के भीतर शुरू होने की संभावना है</b>।** फिलहाल EPFO 2.01 सिस्टम को पूरी तरह स्थिर और सुरक्षित बनाने का काम जारी है। जैसे ही नया प्लेटफॉर्म पूरी तरह सक्रिय होगा, यह सुविधा भी सभी पात्र सदस्यों के लिए उपलब्ध करा दी जाएगी</p><p>नई व्यवस्था लागू होने के बाद खाताधारकों को EPFO पोर्टल पर अपनी&nbsp;&nbsp;<b>UPI ID</b> को बैंक खाते के साथ लिंक और सत्यापित&nbsp; करना होगा। इसके बाद स्वीकृत PF राशि सीधे UPI के माध्यम से बैंक खाते में ट्रांसफर की जा सकेगी।</p><h5 class=""><b>क्या है EPFO 2.01?</b></h5><p>EPFO 2.01 दरअसल कर्मचारी भविष्य निधि संगठन का नया डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे **<b>Centralized IT Enabled System (CITES)</b>** के तहत विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य पूरे सिस्टम को आधुनिक बनाना, क्लेम प्रोसेसिंग में लगने वाले समय को कम करना और करोड़ों सदस्यों को बेहतर ऑनलाइन अनुभव उपलब्ध कराना है।</p><p>नए सिस्टम के लागू होने के बाद विभिन्न सेवाएं एकीकृत होंगी और तकनीकी त्रुटियों में भी कमी आने की उम्मीद है।</p><h5 class=""><b>क्लेम सेटलमेंट होगा पहले से ज्यादा तेज</b></h5><p><b>EPFO 2.01</b> के लागू होने के बाद सबसे बड़ा बदलाव क्लेम प्रोसेसिंग में देखने को मिलेगा। अब PF निकासी के लिए लंबा इंतजार कम होगा और डिजिटल वेरिफिकेशन के जरिए दावों का निपटारा तेजी से किया जा सकेगा।</p><p>नई तकनीक की मदद से ऑनलाइन आवेदन, दस्तावेजों की जांच और भुगतान की पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और तेज होगी।</p><h5 class=""><b>बिना कारण बताए निकाल सकेंगे 75% PF</b></h5><p>EPFO 2.01 के तहत एक और बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद पात्र सदस्य अपने कुल PF बैलेंस का&nbsp; <b>75 प्रतिशत</b> तक हिस्सा बिना किसी विशेष कारण बताए निकाल सकेंगे।</p><p>इस राशि में कर्मचारी का योगदान, नियोक्ता का योगदान और उस पर अर्जित ब्याज भी शामिल होगा। अभी तक PF की बड़ी राशि निकालने के लिए मेडिकल इमरजेंसी, घर खरीदने, शिक्षा या विवाह जैसे कारण बताने आवश्यक होते थे। नई व्यवस्था लागू होने पर यह प्रक्रिया काफी सरल हो जाएगी।</p><h5 class=""><b>किन लोगों को मिलेगा फायदा?</b></h5><p>नई डिजिटल व्यवस्था का सबसे अधिक लाभ नौकरीपेशा कर्मचारियों को मिलेगा। इससे—</p><ul><li>PF निकासी की प्रक्रिया आसान होगी।<br></li><li>भुगतान पहले की तुलना में तेज मिलेगा।<br></li><li>UPI के माध्यम से सीधे बैंक खाते में राशि ट्रांसफर होगी।<br></li><li>डिजिटल क्लेम प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।<br></li><li>तकनीकी समस्याओं में कमी आएगी।</li></ul><h5 class=""><b>फिलहाल क्यों बंद है EPFO पोर्टल?</b></h5><p>EPFO ने हाल ही में अपने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को अपग्रेड करने के लिए मेंटेनेंस विंडो लागू की है। इसी कारण मेंबर पोर्टल, एम्प्लॉयर पोर्टल और कई ऑनलाइन सेवाएं अस्थायी रूप से बंद रखी गई हैं।<br></p><p>डेटाबेस माइग्रेशन और सॉफ्टवेयर अपग्रेड पूरा होने के बाद पोर्टल दोबारा सामान्य रूप से कार्य करेगा और नई सुविधाओं को धीरे-धीरे लागू किया जाएगा।</p><h5 class=""><b>डिजिटल EPFO की ओर बड़ा कदम</b></h5><p>विशेषज्ञों का मानना है कि EPFO 2.01 भारत के सामाजिक सुरक्षा तंत्र में एक बड़ा डिजिटल बदलाव साबित हो सकता है। UPI आधारित भुगतान, तेज क्लेम सेटलमेंट और आसान निकासी जैसी सुविधाएं करोड़ों कर्मचारियों के लिए भविष्य निधि प्रबंधन को अधिक सुविधाजनक बनाएंगी।</p><p>हालांकि नई सुविधाओं के पूर्ण रूप से लागू होने के लिए कुछ दिन और इंतजार करना होगा, लेकिन श्रम मंत्रालय के अनुसार आने वाले सप्ताह में EPFO के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेंगे। इससे करोड़ों PF खाताधारकों को तेज, सुरक्षित और बेहतर ऑनलाइन सेवाओं का लाभ मिल सकेगा।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ EPFO 2.01: अब UPI से निकाल सकेंगे PF का पैसा, अगले 7-10 दिनों में शुरू होगी नई सुविधा ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/utility-news/epfo-online-services-closed-until-2-july-pf-portal-update-2026-5200 ]]></guid><title><![CDATA[ EPFO Update: आज भी बंद रहेंगी ऑनलाइन सेवाएं, अब 2 जुलाई से शुरू होगा पोर्टल ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/utility-news/epfo-online-services-closed-until-2-july-pf-portal-update-2026-5200 ]]></link><pubDate><![CDATA[Wed, 01 Jul 2026 12:01:24 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के करोड़ों खाताधारकों के लिए महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। यदि आप अपने पीएफ खाते से जुड़े किसी ऑनलाइन काम, जैसे क्लेम दाखिल करना, पासबुक डाउनलोड करना या बैलेंस चेक क ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO)</b> के करोड़ों खाताधारकों के लिए महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। यदि आप अपने पीएफ खाते से जुड़े किसी ऑनलाइन काम, जैसे क्लेम दाखिल करना, पासबुक डाउनलोड करना या बैलेंस चेक करना चाहते हैं, तो आपको अभी थोड़ा और इंतजार करना होगा। EPFO ने अपनी ऑनलाइन सेवाओं की बहाली की तारीख आगे बढ़ा दी है और अब पोर्टल **<b>2 जुलाई</b>** से दोबारा शुरू होने की उम्मीद है।</p><p>पहले संगठन ने जानकारी दी थी कि ऑनलाइन सेवाएं 1 जुलाई से बहाल कर दी जाएंगी, लेकिन अब जारी नए नोटिस के अनुसार सिस्टम अपग्रेड और डेटाबेस कंसोलिडेशन का काम जारी रहने के कारण मेंबर और एम्प्लॉयर पोर्टल 1 जुलाई की रात 11:59 बजे तक बंद रहेगा।</p><h5 class=""><b>कब शुरू होंगी सेवाएं?</b></h5><p>EPFO के अनुसार, मेंटेनेंस कार्य पूरा होने के बाद **<b>2 जुलाई को रात 12:00 बजे (00:00 बजे)</b>** से ऑनलाइन सेवाएं दोबारा शुरू होने की संभावना है। इसके बाद सदस्य पहले की तरह पोर्टल और संबंधित डिजिटल सेवाओं का उपयोग कर सकेंगे।</p><h5 class=""><b>कौन-कौन सी सेवाएं हैं प्रभावित?</b></h5><p>ऑनलाइन सेवाएं बंद रहने के कारण कई महत्वपूर्ण सुविधाएं फिलहाल उपलब्ध नहीं हैं। इस दौरान सदस्य नया पीएफ क्लेम दाखिल नहीं कर पाएंगे। इसके अलावा 26 जून से पहले जमा किए गए कई ऑनलाइन क्लेम की प्रोसेसिंग भी फिलहाल रुकी हुई है, जिसे सेवाएं बहाल होने के बाद आगे बढ़ाया जाएगा।<br></p><p>इस अवधि में उपयोगकर्ता अपनी पीएफ पासबुक डाउनलोड नहीं कर सकेंगे और UAN से जुड़ी कई ऑनलाइन सुविधाओं का भी लाभ नहीं उठा पाएंगे।</p><h5 class=""><b>UMANG ऐप पर भी असर</b></h5><p>EPFO ने स्पष्ट किया है कि केवल आधिकारिक पोर्टल ही नहीं, बल्कि **UMANG ऐप** पर उपलब्ध EPFO सेवाएं भी इस दौरान प्रभावित रहेंगी। मेंटेनेंस के चलते सदस्य निम्नलिखित सेवाओं का उपयोग नहीं कर पाएंगे—</p><ul><li>पीएफ बैलेंस चेक करना<br></li><li>ऑनलाइन क्लेम दाखिल करना<br></li><li>क्लेम स्टेटस देखना<br></li><li>शिकायत दर्ज कराना<br></li><li>एस्टेब्लिशमेंट सर्च<br></li><li>स्कीम सर्टिफिकेट के लिए आवेदन<br></li><li>जीवन प्रमाण (Jeevan Pramaan) सेवाएं</li></ul><h5 class=""><b>क्यों किया जा रहा है अपग्रेड?</b></h5><p>EPFO का कहना है कि यह पूरा सिस्टम अपग्रेड और डेटाबेस माइग्रेशन भविष्य में सेवाओं को अधिक तेज, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने के लिए किया जा रहा है। अपग्रेड पूरा होने के बाद सदस्यों को बेहतर डिजिटल अनुभव मिलने की उम्मीद है।</p><p>संगठन ने खाताधारकों से अस्थायी असुविधा के लिए सहयोग की अपील की है और भरोसा दिलाया है कि सेवाएं शुरू होने के बाद सभी ऑनलाइन सुविधाएं सामान्य रूप से उपलब्ध होंगी।</p><h5 class=""><b>जरूरत पड़ने पर यहां करें संपर्क</b></h5><p>यदि इस दौरान किसी सदस्य को किसी प्रकार की जानकारी या सहायता चाहिए, तो वे EPFO के आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर **<b>14470</b>** पर संपर्क कर सकते हैं। सेवाएं बहाल होने के बाद पीएफ क्लेम, पासबुक, UAN और अन्य सभी ऑनलाइन सुविधाएं फिर से सामान्य रूप से उपलब्ध होंगी।</p><p><br></p><p><br></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ EPFO Update: आज भी बंद रहेंगी ऑनलाइन सेवाएं, अब 2 जुलाई से शुरू होगा पोर्टल ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/utility-news/post-office-small-savings-interest-rates-july-september-2026-ppf-ssy-scss-5195 ]]></guid><title><![CDATA[ Post Office Small Savings: PPF, SSSS और SCSS की ब्याज दरों पर सरकार का फैसला, जानें नई दरें ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/utility-news/post-office-small-savings-interest-rates-july-september-2026-ppf-ssy-scss-5195 ]]></link><pubDate><![CDATA[Wed, 01 Jul 2026 12:00:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ पोस्ट ऑफिस की छोटी बचत योजनाओं में निवेश करने वाले करोड़ों लोगों के लिए राहत भरी खबर है। केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर 2026) के लिए **स्मॉल सेविंग स्कीम्स** की ब्याज ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p>पोस्ट ऑफिस की छोटी बचत योजनाओं में निवेश करने वाले करोड़ों लोगों के लिए राहत भरी खबर है। केंद्र सरकार ने <b>वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर 2026) </b>के लिए *<b>*स्मॉल सेविंग स्कीम्स</b>** की ब्याज दरों का ऐलान कर दिया है। सरकार ने इस बार किसी भी योजना की ब्याज दर में बदलाव नहीं किया है। यानी निवेशकों को पहले की तरह ही इन योजनाओं पर रिटर्न मिलता रहेगा।</p><p>वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, जुलाई से सितंबर 2026 की तिमाही के दौरान सभी छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरें अप्रैल-जून 2026 तिमाही के समान रहेंगी। इससे उन निवेशकों को राहत मिलेगी, जो सुरक्षित और गारंटीड रिटर्न के लिए पोस्ट ऑफिस योजनाओं पर भरोसा करते हैं।</p><h5 class=""><b>किन योजनाओं पर कितना मिलेगा ब्याज?</b></h5><p>सरकार के फैसले के अनुसार **व<b>रिष्ठ नागरिक बचत योजना (SCSS)</b>** और **<b>सुकन्या समृद्धि योजना (SSY)</b>** पर सबसे अधिक **<b>8.2 प्रतिशत</b>** वार्षिक ब्याज मिलता रहेगा। वहीं **<b>राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (NSC)</b>** पर **<b>7.7 प्रतिशत</b>** और **<b>सार्वजनिक भविष्य निधि (PPF)</b>** पर **<b>7.1 प्रतिशत</b>** ब्याज जारी रहेगा।</p><p>इसके अलावा **<b>पोस्ट ऑफिस मासिक आय योजना (MIS)</b>** पर **<b>7.4 प्रतिशत</b>** और **<b>किसान विकास पत्र (KVP)</b>** पर **<b>7.5 प्रतिशत</b>** की ब्याज दर बरकरार रखी गई है। <b>KVP में निवेश की राशि 115 महीनों में दोगुनी </b>होने की व्यवस्था बनी रहेगी।</p><h5 class=""><b>टाइम डिपॉजिट और RD की दरें भी नहीं बदलीं</b></h5><p><b>डाकघर की सावधि जमा (Time Deposit) योजनाओं पर भी ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।</b></p><ul><li>1 वर्ष की टाइम डिपॉजिट – <b>6.9%</b><br></li><li>2 वर्ष की टाइम डिपॉजिट – <b>7.0%</b><br></li><li>3 वर्ष की टाइम डिपॉजिट – <b>7.1%</b><br></li><li>5 वर्ष की टाइम डिपॉजिट – <b>7.5%</b><br></li><li>5 वर्षीय आवर्ती जमा (RD) – <b>6.7%</b></li></ul><p>सरकार ने सभी योजनाओं की मौजूदा दरों को यथावत रखते हुए निवेशकों को स्थिर रिटर्न का भरोसा दिया है।</p><h5 class=""><b>क्यों लोकप्रिय हैं पोस्ट ऑफिस की योजनाएं?</b></h5><p>देश में आज भी बड़ी संख्या में लोग पोस्ट ऑफिस की छोटी बचत योजनाओं में निवेश करना पसंद करते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह इन योजनाओं पर सरकार की गारंटी और निश्चित रिटर्न है। शेयर बाजार की अस्थिरता से दूर रहने वाले निवेशकों के लिए ये योजनाएं सुरक्षित निवेश का विकल्प मानी जाती हैं।</p><p>इसके अलावा PPF, SSY और 5 वर्षीय टाइम डिपॉजिट जैसी कई योजनाओं में आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत टैक्स छूट का लाभ भी मिलता है। यही कारण है कि मध्यम वर्ग, वरिष्ठ नागरिकों और लंबी अवधि के निवेशकों के बीच इन योजनाओं की लोकप्रियता लगातार बनी हुई है।</p><h5 class=""><b>निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है यह फैसला?</b></h5><p>ब्याज दरों में कोई बदलाव न होने का मतलब है कि मौजूदा निवेशकों को पहले की तरह ही रिटर्न मिलता रहेगा और नए निवेशक भी उसी ब्याज दर पर निवेश कर सकेंगे। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक और घरेलू आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने ब्याज दरों को स्थिर रखने का फैसला किया है।</p><p>यदि आप सुरक्षित निवेश, नियमित आय या भविष्य के लिए लंबी अवधि की बचत की योजना बना रहे हैं, तो पोस्ट ऑफिस की ये सरकारी योजनाएं आज भी भरोसेमंद विकल्प मानी जाती हैं।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ Post Office Small Savings: PPF, SSSS और SCSS की ब्याज दरों पर सरकार का फैसला, जानें नई दरें ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/utility-news/ssy-vs-fd-best-investment-for-child-future-sukanya-samriddhi-yojana-comparison-5191 ]]></guid><title><![CDATA[ SSY या FD? बच्चों के भविष्य के लिए कौन-सा निवेश देगा ज्यादा फायदा, जानिए पूरी तुलना ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/utility-news/ssy-vs-fd-best-investment-for-child-future-sukanya-samriddhi-yojana-comparison-5191 ]]></link><pubDate><![CDATA[Wed, 01 Jul 2026 10:00:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ हर माता-पिता की इच्छा होती है कि उनके बच्चों का भविष्य आर्थिक रूप से सुरक्षित रहे। उच्च शिक्षा, करियर और शादी जैसे बड़े खर्चों के लिए समय रहते निवेश करना समझदारी माना जाता है। ऐसे में अक्सर यह सवाल सा ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p>हर माता-पिता की इच्छा होती है कि उनके बच्चों का भविष्य आर्थिक रूप से सुरक्षित रहे। उच्च शिक्षा, करियर और शादी जैसे बड़े खर्चों के लिए समय रहते निवेश करना समझदारी माना जाता है। ऐसे में अक्सर यह सवाल सामने आता है कि बच्चों के भविष्य के लिए **<b>सुकन्या समृद्धि योजना (SSY)</b>** बेहतर है या **<b>फिक्स्ड डिपॉजिट (FD)</b>**। दोनों योजनाओं के अपने-अपने फायदे हैं, लेकिन सही विकल्प आपकी जरूरत और वित्तीय लक्ष्य पर निर्भर करता है।</p><p>यदि निवेश विशेष रूप से बेटी के भविष्य के लिए किया जा रहा है, तो सरकार की सुकन्या समृद्धि योजना एक लोकप्रिय विकल्प है। वहीं, यदि निवेश में अधिक लचीलापन और समय से पहले निकासी की सुविधा चाहिए, तो फिक्स्ड डिपॉजिट भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है।<br></p><h5 class=""><b>सुकन्या समृद्धि योजना की खास बातें</b></h5><p>सुकन्या समृद्धि योजना केंद्र सरकार द्वारा समर्थित एक छोटी बचत योजना है, जिसे केवल बेटियों के लिए शुरू किया गया है। इस योजना में 10 वर्ष से कम आयु की बच्ची के नाम पर खाता खोला जा सकता है। इसमें न्यूनतम 250 रुपये और अधिकतम 1.5 लाख रुपये प्रति वर्ष जमा किए जा सकते हैं।</p><p>वर्तमान वित्त वर्ष की पहली तिमाही के लिए इस योजना पर **8.2 प्रतिशत वार्षिक चक्रवृद्धि ब्याज** दिया जा रहा है। निवेश 15 वर्षों तक करना होता है, जबकि योजना 21 वर्ष में परिपक्व होती है।</p><p>इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत कर छूट मिलती है। साथ ही ब्याज और मैच्योरिटी राशि भी टैक्स फ्री रहती है।</p><h5 class=""><b>लंबी अवधि में बन सकता है बड़ा फंड</b></h5><p>यदि कोई अभिभावक हर वर्ष अधिकतम 1.5 लाख रुपये का निवेश लगातार 15 वर्षों तक करता है, तो योजना की परिपक्वता पर बेटी के नाम एक बड़ा फंड तैयार हो सकता है। सरकार द्वारा तय ब्याज दर के अनुसार यह राशि कई लाख रुपये तक पहुंच सकती है, जिससे उच्च शिक्षा या अन्य बड़े खर्च पूरे किए जा सकते हैं।</p><h5 class=""><b>फिक्स्ड डिपॉजिट भी है सुरक्षित विकल्प</b></h5><p>फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD निवेश का एक पारंपरिक और भरोसेमंद माध्यम है। इसमें लड़के और लड़कियों दोनों के नाम पर निवेश किया जा सकता है। कई बैंक बच्चों के लिए विशेष एफडी योजनाएं भी उपलब्ध कराते हैं, जिनमें आकर्षक ब्याज दरें दी जाती हैं।</p><p>एफडी की सबसे बड़ी खासियत इसकी लचीलापन है। अधिकांश बैंक जरूरत पड़ने पर समय से पहले राशि निकालने की सुविधा भी देते हैं, हालांकि इसके लिए कुछ शर्तें लागू हो सकती हैं।</p><h5 class=""><b>दोनों में क्या है अंतर?</b></h5><p>सुकन्या समृद्धि योजना लंबी अवधि के निवेश और टैक्स बचत के लिहाज से अधिक लाभदायक मानी जाती है। वहीं फिक्स्ड डिपॉजिट उन लोगों के लिए बेहतर विकल्प हो सकती है, जिन्हें निवेश में अधिक लचीलापन चाहिए या जिनके बच्चे बेटे हैं, क्योंकि एसएसवाई केवल बेटियों के लिए उपलब्ध है।</p><p>इसके अलावा एफडी पर मिलने वाला ब्याज कई मामलों में कर योग्य होता है, जबकि सुकन्या समृद्धि योजना में निवेश, ब्याज और परिपक्वता राशि तीनों पर टैक्स छूट का लाभ मिलता है।</p><h5 class=""><b>किसे चुनें?</b></h5><p>यदि आपका लक्ष्य बेटी के भविष्य के लिए लंबी अवधि में सुरक्षित और टैक्स-फ्री फंड तैयार करना है, तो सुकन्या समृद्धि योजना बेहतर विकल्प साबित हो सकती है। वहीं यदि आपको कभी भी धन की आवश्यकता पड़ सकती है या निवेश में अधिक लचीलापन चाहिए, तो फिक्स्ड डिपॉजिट भी उपयोगी हो सकती है।</p><p>निवेश करने से पहले अपनी आय, वित्तीय लक्ष्य और भविष्य की जरूरतों का आकलन करना जरूरी है। सही योजना का चयन आपके बच्चे के भविष्य को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ SSY या FD? बच्चों के भविष्य के लिए कौन-सा निवेश देगा ज्यादा फायदा, जानिए पूरी तुलना ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/utility-news/delhi-special-lok-adalat-2026-pending-cases-settlement-august-21-23-5108 ]]></guid><title><![CDATA[ दिल्ली में 21 से 23 अगस्त तक विशेष लोक अदालत, लंबित मामलों के निपटारे का सुनहरा अवसर ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/utility-news/delhi-special-lok-adalat-2026-pending-cases-settlement-august-21-23-5108 ]]></link><pubDate><![CDATA[Thu, 25 Jun 2026 13:33:16 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ अगर आपका कोई मामला लंबे समय से अदालत में लंबित है और आप जल्द न्याय की उम्मीद कर रहे हैं, तो आपके लिए राहत भरी खबर है। न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी और आम लोगों के लिए सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वप ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p>अगर आपका कोई मामला लंबे समय से अदालत में लंबित है और आप जल्द न्याय की उम्मीद कर रहे हैं, तो आपके लिए राहत भरी खबर है। न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी और आम लोगों के लिए सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए <b>दिल्ली में 21, 22 और 23 अगस्त 2026 </b>को तीन दिवसीय विशेष लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। इस आयोजन का उद्देश्य ऐसे मामलों का तेजी से निपटारा करना है, जिन्हें आपसी सहमति और समझौते के जरिए सुलझाया जा सकता है।</p><p>इस विशेष अभियान को <b>**'समाधान समारोह-2026'**</b> नाम दिया गया है। इसके माध्यम से लंबे समय से अदालतों में लंबित मामलों को कम करने और लोगों को शीघ्र न्याय उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। न्यायिक विशेषज्ञों का मानना है कि लोक अदालतें विवादों के समाधान का सरल, सस्ता और प्रभावी माध्यम साबित होती हैं।</p><h5 class=""><b>किन मामलों का होगा निपटारा?</b></h5><p>विशेष लोक अदालत में उन मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिनका समाधान बातचीत और समझौते के जरिए संभव है। इनमें बैंक ऋण और रिकवरी विवाद, बीमा दावे, सड़क दुर्घटना मुआवजा, संपत्ति और भूमि विवाद, पारिवारिक मामले, उपभोक्ता शिकायतें तथा चेक बाउंस से जुड़े मामले शामिल हो सकते हैं।</p><p>इसके अलावा ऐसे अन्य सिविल विवाद भी शामिल किए जा सकते हैं, जिनमें दोनों पक्ष आपसी सहमति से समझौते के लिए तैयार हों। इससे वर्षों से लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है।</p><p>&lt;blockquote class="instagram-media" data-instgrm-captioned data-instgrm-permalink="https://www.instagram.com/p/DZ4bvcZiDt1/?utm_source=ig_embed&amp;amp;utm_campaign=loading" data-instgrm-version="14" style=" background:#FFF; border:0; border-radius:3px; box-shadow:0 0 1px 0 rgba(0,0,0,0.5),0 1px 10px 0 rgba(0,0,0,0.15); margin: 1px; max-width:540px; min-width:326px; padding:0; width:99.375%; width:-webkit-calc(100% - 2px); width:calc(100% - 2px);"&gt;&lt;div style="padding:16px;"&gt; &lt;a href="https://www.instagram.com/p/DZ4bvcZiDt1/?utm_source=ig_embed&amp;amp;utm_campaign=loading" style=" background:#FFFFFF; line-height:0; padding:0 0; text-align:center; text-decoration:none; width:100%;" target="_blank"&gt; &lt;div style=" display: flex; flex-direction: row; align-items: center;"&gt; &lt;div style="background-color: #F4F4F4; border-radius: 50%; flex-grow: 0; height: 40px; margin-right: 14px; width: 40px;"&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="display: flex; flex-direction: column; flex-grow: 1; justify-content: center;"&gt; &lt;div style=" background-color: #F4F4F4; border-radius: 4px; flex-grow: 0; height: 14px; margin-bottom: 6px; width: 100px;"&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style=" background-color: #F4F4F4; border-radius: 4px; flex-grow: 0; height: 14px; width: 60px;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="padding: 19% 0;"&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="display:block; height:50px; margin:0 auto 12px; width:50px;"&gt;&lt;svg width="50px" height="50px" viewBox="0 0 60 60" version="1.1" xmlns="https://www.w3.org/2000/svg" xmlns:xlink="https://www.w3.org/1999/xlink"&gt;&lt;g stroke="none" stroke-width="1" fill="none" fill-rule="evenodd"&gt;&lt;g transform="translate(-511.000000, -20.000000)" fill="#000000"&gt;&lt;g&gt;&lt;path d="M556.869,30.41 C554.814,30.41 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516.448,57.996 516.448,50 C516.448,42.003 516.479,41.056 516.623,37.899 C516.755,34.978 517.244,33.391 517.654,32.338 C518.197,30.938 518.846,29.942 519.894,28.894 C520.942,27.846 521.94,27.196 523.338,26.654 C524.393,26.244 525.979,25.756 528.898,25.623 C532.057,25.479 533.004,25.448 541,25.448 C548.997,25.448 549.943,25.479 553.102,25.623 C556.021,25.756 557.607,26.244 558.662,26.654 C560.06,27.196 561.058,27.846 562.106,28.894 C563.154,29.942 563.803,30.938 564.346,32.338 C564.756,33.391 565.244,34.978 565.378,37.899 C565.522,41.056 565.552,42.003 565.552,50 C565.552,57.996 565.522,58.943 565.378,62.101 M570.82,37.631 C570.674,34.438 570.167,32.258 569.425,30.349 C568.659,28.377 567.633,26.702 565.965,25.035 C564.297,23.368 562.623,22.342 560.652,21.575 C558.743,20.834 556.562,20.326 553.369,20.18 C550.169,20.033 549.148,20 541,20 C532.853,20 531.831,20.033 528.631,20.18 C525.438,20.326 523.257,20.834 521.349,21.575 C519.376,22.342 517.703,23.368 516.035,25.035 C514.368,26.702 513.342,28.377 512.574,30.349 C511.834,32.258 511.326,34.438 511.181,37.631 C511.035,40.831 511,41.851 511,50 C511,58.147 511.035,59.17 511.181,62.369 C511.326,65.562 511.834,67.743 512.574,69.651 C513.342,71.625 514.368,73.296 516.035,74.965 C517.703,76.634 519.376,77.658 521.349,78.425 C523.257,79.167 525.438,79.673 528.631,79.82 C531.831,79.965 532.853,80.001 541,80.001 C549.148,80.001 550.169,79.965 553.369,79.82 C556.562,79.673 558.743,79.167 560.652,78.425 C562.623,77.658 564.297,76.634 565.965,74.965 C567.633,73.296 568.659,71.625 569.425,69.651 C570.167,67.743 570.674,65.562 570.82,62.369 C570.966,59.17 571,58.147 571,50 C571,41.851 570.966,40.831 570.82,37.631"&gt;&lt;/path&gt;&lt;/g&gt;&lt;/g&gt;&lt;/g&gt;&lt;/svg&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="padding-top: 8px;"&gt; &lt;div style=" color:#3897f0; font-family:Arial,sans-serif; font-size:14px; font-style:normal; font-weight:550; line-height:18px;"&gt;View this post on Instagram&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="padding: 12.5% 0;"&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="display: flex; flex-direction: row; margin-bottom: 14px; align-items: center;"&gt;&lt;div&gt; &lt;div style="background-color: #F4F4F4; border-radius: 50%; height: 12.5px; width: 12.5px; transform: translateX(0px) translateY(7px);"&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="background-color: #F4F4F4; height: 12.5px; transform: rotate(-45deg) translateX(3px) translateY(1px); width: 12.5px; flex-grow: 0; margin-right: 14px; margin-left: 2px;"&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style="background-color: #F4F4F4; border-radius: 50%; height: 12.5px; width: 12.5px; transform: translateX(9px) translateY(-18px);"&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="margin-left: 8px;"&gt; &lt;div style=" background-color: #F4F4F4; border-radius: 50%; flex-grow: 0; height: 20px; width: 20px;"&gt;&lt;/div&gt; &lt;div style=" width: 0; height: 0; border-top: 2px solid transparent; border-left: 6px solid #f4f4f4; border-bottom: 2px solid transparent; transform: translateX(16px) 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font-family:Arial,sans-serif; font-size:14px; line-height:17px; margin-bottom:0; margin-top:8px; overflow:hidden; padding:8px 0 7px; text-align:center; text-overflow:ellipsis; white-space:nowrap;"&gt;&lt;a href="https://www.instagram.com/p/DZ4bvcZiDt1/?utm_source=ig_embed&amp;amp;utm_campaign=loading" style=" color:#c9c8cd; font-family:Arial,sans-serif; font-size:14px; font-style:normal; font-weight:normal; line-height:17px; text-decoration:none;" target="_blank"&gt;A post shared by DSLSA DELHI (@dslsa_delhi)&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&lt;/div&gt;&lt;/blockquote&gt;<br>&lt;script async src="//www.instagram.com/embed.js"&gt;&lt;/script&gt;</p><p><b><br></b></p><p><b>क्या होंगे लाभ?</b></p><p>लोक अदालत में विवादों का निपटारा सामान्य अदालतों की तुलना में काफी कम समय में हो जाता है। यहां दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर सहमति के आधार पर समाधान निकालने का प्रयास किया जाता है।</p><p>इस प्रक्रिया का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें किसी प्रकार की कोर्ट फीस नहीं लगती। यदि किसी मामले में पहले कोर्ट फीस जमा की गई है, तो निर्धारित नियमों के तहत उसे वापस भी किया जा सकता है। इससे न केवल लोगों का समय और पैसा बचता है, बल्कि लंबे कानूनी विवादों से मानसिक तनाव भी कम होता है।</p><h5 class=""><b>कहां होगा आयोजन?</b></h5><p>तीन दिवसीय विशेष लोक अदालत का आयोजन दिल्ली में किया जाएगा। इसका संचालन कानूनी सहायता उपलब्ध कराने वाली संबंधित संस्था के सहयोग से किया जाएगा। जिन मामलों को लोक अदालत के लिए उपयुक्त माना जाएगा, उनसे जुड़े पक्षों को सूचना दी जाएगी।</p><p>साथ ही इच्छुक लोग संबंधित हेल्पलाइन नंबर, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण या आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से भी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। अधिकारियों का कहना है कि अधिक से अधिक लोगों को इस सुविधा का लाभ दिलाने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा।</p><h5 class=""><b>न्याय प्रक्रिया को मिलेगी गति</b></h5><p>देशभर की अदालतों में लाखों मामले वर्षों से लंबित हैं। ऐसे में विशेष लोक अदालत जैसे प्रयास न्याय व्यवस्था पर बढ़ते दबाव को कम करने में मददगार साबित हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि समझौते योग्य मामलों का शीघ्र निपटारा होने से अदालतों को गंभीर और जटिल मामलों पर अधिक समय देने का अवसर मिलेगा।</p><p>यदि आपका भी कोई मामला समझौते के माध्यम से सुलझ सकता है, तो यह विशेष लोक अदालत आपके लिए न्याय पाने का एक बेहतर और आसान अवसर साबित हो सकती है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ दिल्ली में 21 से 23 अगस्त तक विशेष लोक अदालत, लंबित मामलों के निपटारे का सुनहरा अवसर ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/utility-news/lpg-png-rules-update-lpg-connection-closure-after-june-30-5090 ]]></guid><title><![CDATA[ LPG-PNG नियमों में बड़ा बदलाव: 30 जून के बाद किन उपभोक्ताओं का बंद हो सकता है LPG कनेक्शन? ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/utility-news/lpg-png-rules-update-lpg-connection-closure-after-june-30-5090 ]]></link><pubDate><![CDATA[Wed, 24 Jun 2026 11:46:55 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ देश में घरेलू गैस उपभोक्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव लागू होने जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा जारी नए नियमों के तहत अब कुछ उपभोक्ताओं को एलपीजी (LPG) और पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) दोनों कनेक्शन एक साथ ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p>देश में घरेलू गैस उपभोक्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव लागू होने जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा जारी नए नियमों के तहत अब कुछ उपभोक्ताओं को एलपीजी (LPG) और पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) दोनों कनेक्शन एक साथ रखने की अनुमति नहीं होगी। इसी कारण 30 जून की समय सीमा को लेकर लाखों उपभोक्ताओं के बीच भ्रम और चिंता की स्थिति बनी हुई है।</p><p>हालांकि यह नियम सभी एलपीजी उपभोक्ताओं पर लागू नहीं होगा। इसका असर केवल उन परिवारों पर पड़ेगा जिनके घर तक पहले से पीएनजी की सुविधा उपलब्ध है या जिनके क्षेत्र में पीएनजी का बुनियादी ढांचा विकसित किया जा चुका है।</p><h5 class=""><b>क्या है सरकार का नया नियम?</b></h5><p>पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने मार्च 2026 में "प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम उत्पाद वितरण आदेश, 2026" जारी किया था। इस आदेश के तहत स्पष्ट किया गया कि जिन क्षेत्रों में पीएनजी की सुविधा उपलब्ध है, वहां उपभोक्ता एक साथ एलपीजी और पीएनजी दोनों का उपयोग नहीं कर सकेंगे।</p><p>सरकार ने ऐसे उपभोक्ताओं को पीएनजी में स्थानांतरित होने के लिए 90 दिनों का समय दिया था। यह अवधि अब समाप्त होने जा रही है। सरकार का उद्देश्य आयातित एलपीजी पर निर्भरता कम करना और अधिक से अधिक घरों को पाइप्ड गैस नेटवर्क से जोड़ना है।</p><h5 class=""><b>किन लोगों पर लागू होगा नियम?</b></h5><p>यह नियम केवल उन उपभोक्ताओं पर लागू होगा जिन्हें पीएनजी सुविधा उपलब्ध होने की सूचना दी जा चुकी है। यदि किसी उपभोक्ता के घर तक पाइप्ड गैस नेटवर्क पहुंच चुका है और उसे गैस वितरण कंपनी की ओर से स्विच करने का नोटिस मिला है, तो उसे निर्धारित समय के भीतर पीएनजी अपनानी होगी।</p><p>यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो संबंधित एलपीजी कनेक्शन की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। सरकार ने पहले ही स्पष्ट किया था कि पीएनजी उपलब्ध होने के बावजूद एलपीजी का उपयोग जारी रखना नियमों के विरुद्ध माना जाएगा।</p><h5 class=""><b>जिन क्षेत्रों में PNG नहीं है, उन्हें चिंता की जरूरत नहीं</b></h5><p>सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन इलाकों में अभी तक पीएनजी नेटवर्क नहीं पहुंचा है, वहां एलपीजी उपभोक्ताओं की गैस आपूर्ति पहले की तरह जारी रहेगी। ऐसे उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है।</p><p>इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों और उन शहरों के कई हिस्सों में रहने वाले लोग जहां पीएनजी सुविधा उपलब्ध नहीं है, उन्हें अपने एलपीजी कनेक्शन को लेकर परेशान होने की आवश्यकता नहीं है।</p><h5 class=""><b>तेल कंपनियां क्यों दे रही हैं PNG पर जोर?</b></h5><p>सरकारी तेल कंपनियों और गैस वितरण एजेंसियों का मानना है कि पीएनजी अधिक सुविधाजनक, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प है। इसमें सिलेंडर बुकिंग, डिलीवरी की प्रतीक्षा और गैस खत्म होने जैसी समस्याएं नहीं होतीं।</p><p>कंपनियों का कहना है कि पीएनजी उपभोक्ताओं को लगातार गैस आपूर्ति मिलती है, जिससे घरेलू उपयोग आसान हो जाता है। यही कारण है कि सरकार और गैस कंपनियां उपभोक्ताओं को तेजी से पीएनजी नेटवर्क से जोड़ने का प्रयास कर रही हैं।</p><h5 class=""><b>30 जून से पहले क्या करें?</b></h5><p>विशेषज्ञों का सुझाव है कि उपभोक्ता सबसे पहले यह जांच करें कि उनके क्षेत्र में पीएनजी सुविधा उपलब्ध है या नहीं। यदि सुविधा उपलब्ध है तो संबंधित गैस कंपनी या वितरण एजेंसी से संपर्क कर पीएनजी कनेक्शन की प्रक्रिया शुरू कर देनी चाहिए।</p><p>इसके लिए पहचान पत्र, पता प्रमाण और अन्य आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे। साथ ही उपभोक्ताओं को अपना मोबाइल नंबर भी अपडेट रखना चाहिए ताकि गैस कंपनी की ओर से भेजी जाने वाली सूचनाएं समय पर प्राप्त हो सकें।</p><h5 class=""><b>तेजी से बढ़ रहा PNG नेटवर्क</b></h5><p>सरकारी आंकड़ों के अनुसार मार्च 2026 के बाद से लाखों उपभोक्ता एलपीजी छोड़कर पीएनजी नेटवर्क से जुड़ चुके हैं। देशभर में बड़ी संख्या में नए कनेक्शन दिए गए हैं और कई क्षेत्रों में अतिरिक्त पाइपलाइन नेटवर्क तैयार किया जा चुका है।</p><p>सरकार का मानना है कि यह कदम ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने, आयात खर्च कम करने और स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।<br></p><p>ऐसे में यदि आपके क्षेत्र में पीएनजी सुविधा उपलब्ध है, तो समय रहते आवश्यक प्रक्रिया पूरी करना भविष्य में किसी असुविधा से बचने का बेहतर विकल्प हो सकता है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ LPG-PNG नियमों में बड़ा बदलाव: 30 जून के बाद किन उपभोक्ताओं का बंद हो सकता है LPG कनेक्शन? ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/utility-news/house-construction-cost-saving-tips-low-budget-home-building-guide-5070 ]]></guid><title><![CDATA[ कम बजट में बनाएं अपना घर: सही प्लानिंग और स्मार्ट तकनीक से लाखों रुपये तक बचा सकते हैं ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/utility-news/house-construction-cost-saving-tips-low-budget-home-building-guide-5070 ]]></link><pubDate><![CDATA[Mon, 22 Jun 2026 17:09:11 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ नई दिल्ली: महंगाई के इस दौर में अपना घर बनवाना हर परिवार का सपना तो है, लेकिन बढ़ती निर्माण लागत के कारण यह सपना कई लोगों के लिए चुनौती बन गया है। सीमेंट, सरिया, ईंट और मजदूरी की बढ़ती कीमतों ने घर नि ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>नई दिल्ली: </b>महंगाई के इस दौर में अपना घर बनवाना हर परिवार का सपना तो है, लेकिन बढ़ती निर्माण लागत के कारण यह सपना कई लोगों के लिए चुनौती बन गया है। सीमेंट, सरिया, ईंट और मजदूरी की बढ़ती कीमतों ने घर निर्माण को पहले की तुलना में काफी महंगा बना दिया है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निर्माण की योजना सही तरीके से बनाई जाए और कुछ आधुनिक तकनीकों को अपनाया जाए, तो लागत में बड़ी कटौती संभव है।</p><p>घर बनाने से पहले अधिकांश लोग केवल डिजाइन और सुविधाओं पर ध्यान देते हैं, जबकि निर्माण तकनीक और सामग्री का चयन भी बजट को प्रभावित करता है। सही विकल्प चुनकर हजारों नहीं बल्कि लाखों रुपये तक बचाए जा सकते हैं।</p><h5 class=""><b>लोड-बेयरिंग स्ट्रक्चर से घट सकती है लागत</b></h5><p>छोटे और एक मंजिला मकानों के लिए लोड-बेयरिंग स्ट्रक्चर को किफायती विकल्प माना जाता है। इस तकनीक में भवन का भार दीवारों पर रहता है, जिससे भारी कॉलम और बीम की आवश्यकता कम हो जाती है।</p><p>इसका सीधा फायदा यह होता है कि सरिया, सीमेंट और अन्य निर्माण सामग्री की खपत कम होती है। विशेषज्ञों के अनुसार सीमित बजट वाले परिवारों के लिए यह तकनीक बेहतर विकल्प साबित हो सकती है।</p><h5 class=""><b>निर्माण सामग्री के चयन से भी होगी बचत</b></h5><p>घर बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री कुल लागत का बड़ा हिस्सा तय करती है। सामान्य ईंटों की जगह फ्लाई ऐश ईंटों का उपयोग करने से खर्च कम किया जा सकता है। ये ईंटें अपेक्षाकृत सस्ती होती हैं और उनकी फिनिशिंग बेहतर होने के कारण प्लास्टर पर भी कम खर्च आता है।</p><p><img style="width: 780.067px;" src="https://media.gtcbharat.com/wp-content/uploads/2026/06/brick_2e118a30d8df857f4a8b0e8e8512ade8_1280X720.webp"><br></p><p>इसी तरह लकड़ी की महंगी चौखटों की जगह कंक्रीट या अन्य टिकाऊ विकल्पों का उपयोग करने से बजट को नियंत्रित किया जा सकता है। आधुनिक निर्माण तकनीकों में कम लागत वाली सामग्री का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।</p><h5 class=""><b>डिजाइन को रखें सरल</b></h5><p>विशेषज्ञों का कहना है कि जटिल डिजाइन और अतिरिक्त सजावटी संरचनाएं निर्माण लागत को काफी बढ़ा देती हैं। यदि घर का नक्शा सरल रखा जाए और केवल आवश्यक सुविधाओं पर ध्यान दिया जाए, तो कुल खर्च में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।</p><p>कम बजट वाले मकानों में अनावश्यक बालकनी, अतिरिक्त कॉलम और जटिल छत डिजाइन से बचने की सलाह दी जाती है।</p><h5 class=""><b>सरिया और सीमेंट पर बड़ी बचत संभव</b></h5><p>घर निर्माण में सरिया और सीमेंट सबसे महंगे घटकों में शामिल होते हैं। यदि निर्माण तकनीक ऐसी चुनी जाए जिसमें इनकी आवश्यकता कम हो, तो लागत में बड़ा अंतर दिखाई देता है।</p><p>विशेषज्ञों के मुताबिक सही संरचनात्मक योजना अपनाने से सीमेंट की खपत में कमी लाई जा सकती है, जबकि सरिया का उपयोग भी सीमित किया जा सकता है। इससे निर्माण का कुल बजट काफी हद तक नियंत्रित रहता है।</p><p>निर्माण शुरू करने से पहले करें सही योजना</p><p>घर बनाने से पहले विस्तृत बजट तैयार करना बेहद जरूरी है। सामग्री की कीमतों की तुलना, स्थानीय बाजार का अध्ययन और अनुभवी इंजीनियर की सलाह लेने से अनावश्यक खर्च से बचा जा सकता है।</p><p>इसके अलावा निर्माण कार्य को चरणबद्ध तरीके से पूरा करने से भी आर्थिक दबाव कम होता है और गुणवत्ता पर बेहतर नियंत्रण रखा जा सकता है।</p><h5 class=""><b>स्मार्ट प्लानिंग से पूरा हो सकता है घर का सपना</b></h5><p>विशेषज्ञों का मानना है कि सीमित बजट का मतलब यह नहीं है कि घर की गुणवत्ता से समझौता किया जाए। सही डिजाइन, उपयुक्त निर्माण तकनीक और लागत प्रभावी सामग्री के जरिए मजबूत और आरामदायक मकान तैयार किया जा सकता है।</p><p>आज के समय में तकनीक और बेहतर योजना के सहारे लाखों परिवार कम खर्च में अपना घर बनाने का सपना साकार कर रहे हैं। जरूरत केवल सही जानकारी और सोच-समझकर फैसले लेने की है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ कम बजट में बनाएं अपना घर: सही प्लानिंग और स्मार्ट तकनीक से लाखों रुपये तक बचा सकते हैं ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/utility-news/highest-fd-rates-2026-senior-citizens-best-fixed-deposit-banks-list-5069 ]]></guid><title><![CDATA[ FD पर 8%+ ब्याज! सीनियर सिटीजंस के लिए ये बैंक सबसे आगे ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/utility-news/highest-fd-rates-2026-senior-citizens-best-fixed-deposit-banks-list-5069 ]]></link><pubDate><![CDATA[Mon, 22 Jun 2026 16:20:46 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ नई दिल्ली: बाजार में उतार-चढ़ाव और निवेश के बढ़ते जोखिमों के बीच फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) एक बार फिर निवेशकों की पहली पसंद बनती जा रही है। खासकर वरिष्ठ नागरिकों के लिए कई बैंक आकर्षक ब्याज दरों की पेशकश क ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>नई दिल्ली:</b> बाजार में उतार-चढ़ाव और निवेश के बढ़ते जोखिमों के बीच फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) एक बार फिर निवेशकों की पहली पसंद बनती जा रही है। खासकर वरिष्ठ नागरिकों के लिए कई बैंक आकर्षक ब्याज दरों की पेशकश कर रहे हैं, जिससे उन्हें नियमित और सुरक्षित रिटर्न का लाभ मिल रहा है। वर्तमान समय में कुछ स्मॉल फाइनेंस बैंक 8 प्रतिशत से अधिक ब्याज देकर निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींच रहे हैं।</p><p>विशेषज्ञों का मानना है कि जिन निवेशकों की प्राथमिकता पूंजी की सुरक्षा और निश्चित आय है, उनके लिए FD अभी भी सबसे भरोसेमंद विकल्पों में से एक है।</p><h5 class=""><b>सीनियर सिटीजंस को मिल रहा अतिरिक्त फायदा</b></h5><p>अधिकांश बैंक वरिष्ठ नागरिकों को सामान्य ग्राहकों की तुलना में अतिरिक्त ब्याज दर प्रदान करते हैं। यही वजह है कि रिटायरमेंट के बाद नियमित आय की तलाश करने वाले लोग फिक्स्ड डिपॉजिट को प्राथमिकता दे रहे हैं।</p><p>बैंकों द्वारा दी जाने वाली अतिरिक्त ब्याज दर से लंबी अवधि में निवेशकों की कमाई में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होती है।</p><h5 class=""><b>सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक बना आकर्षण का केंद्र</b></h5><p>एफडी पर उच्च ब्याज देने वाले बैंकों की सूची में सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक प्रमुख स्थान पर है। बैंक वरिष्ठ नागरिकों को चयनित अवधि की एफडी पर 8.05 प्रतिशत तक ब्याज की पेशकश कर रहा है।</p><p>यह दर विशेष रूप से उन निवेशकों के लिए आकर्षक मानी जा रही है जो सुरक्षित निवेश के साथ बेहतर रिटर्न चाहते हैं।</p><h5 class=""><b>जना स्मॉल फाइनेंस बैंक भी दे रहा मजबूत रिटर्न</b></h5><p>जना स्मॉल फाइनेंस बैंक भी वरिष्ठ नागरिकों के लिए प्रतिस्पर्धी ब्याज दरें उपलब्ध करा रहा है। बैंक की कुछ सावधि जमा योजनाओं पर 8 प्रतिशत तक का ब्याज मिल रहा है।</p><p>विशेषज्ञों के अनुसार, यह दर पारंपरिक बड़े बैंकों की तुलना में अधिक है, जिससे निवेशकों को अतिरिक्त लाभ मिल सकता है।</p><h5 class=""><b>उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक की योजनाएं भी चर्चा में</b></h5><p>उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक ने भी वरिष्ठ नागरिकों के लिए आकर्षक एफडी योजनाएं शुरू की हैं। बैंक विभिन्न अवधियों पर 7.7 प्रतिशत तक ब्याज प्रदान कर रहा है।</p><p>बैंक की ये योजनाएं उन लोगों के लिए उपयोगी साबित हो सकती हैं जो मध्यम अवधि के निवेश के साथ स्थिर आय चाहते हैं।</p><h5 class=""><b>निवेश से पहले इन बातों का रखें ध्यान</b></h5><p>उच्च ब्याज दर देखने के साथ-साथ निवेशकों को बैंक की विश्वसनीयता, जमा बीमा सुरक्षा, अवधि और समयपूर्व निकासी से जुड़े नियमों की भी जांच करनी चाहिए।</p><p>विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बड़ी रकम निवेश करने से पहले अलग-अलग बैंकों की योजनाओं की तुलना जरूर करें ताकि बेहतर विकल्प का चयन किया जा सके।</p><h5 class=""><b>RBI के प्रस्तावित नियमों से बढ़ेगी पारदर्शिता</b></h5><p>भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में जमा योजनाओं और ब्याज दरों को लेकर कुछ नए नियमों का मसौदा जारी किया है। इन नियमों का उद्देश्य ग्राहकों को ब्याज दरों की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराना और बैंकों के बीच पारदर्शिता बढ़ाना है।</p><p>यदि ये नियम लागू होते हैं तो निवेशकों के लिए विभिन्न बैंकों की एफडी योजनाओं की तुलना करना और भी आसान हो जाएगा। इससे ग्राहकों को अपनी जरूरत और लक्ष्य के अनुसार सही निवेश विकल्प चुनने में मदद मिलेगी।</p><h5 class=""><b>FD क्यों बनी हुई है पसंदीदा निवेश योजना?</b></h5><p>फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश की सबसे बड़ी खासियत इसकी सुरक्षा और निश्चित रिटर्न है। शेयर बाजार और अन्य जोखिम वाले निवेश विकल्पों की तुलना में FD निवेशकों को मानसिक शांति देती है। यही कारण है कि लाखों लोग आज भी अपनी बचत का बड़ा हिस्सा फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करना पसंद करते हैं।</p><p><b>नोट- किसी भी तरह के निवेश से पहले अपने मार्केट एक्सपर्ट्स की सलाह जरूर लें.</b></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ FD पर 8%+ ब्याज! सीनियर सिटीजंस के लिए ये बैंक सबसे आगे ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/utility-news/how-to-check-epf-balance-online-sms-umang-app-5068 ]]></guid><title><![CDATA[ PF Interest Update: आपके खाते में आया ब्याज या नहीं? इन आसान तरीकों से तुरंत करें बैलेंस चेक ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/utility-news/how-to-check-epf-balance-online-sms-umang-app-5068 ]]></link><pubDate><![CDATA[Mon, 22 Jun 2026 15:24:09 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ नई दिल्ली: देश के करोड़ों कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) खाताधारकों के लिए राहत भरी खबर है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए घोषित 8.25 प्रतिशत ब्याज दर को मंजूरी मिलने के बाद अब कर्मचारियों के खातों में ब्याज र ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>नई दिल्ली:</b> देश के करोड़ों कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) खाताधारकों के लिए राहत भरी खबर है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए घोषित 8.25 प्रतिशत ब्याज दर को मंजूरी मिलने के बाद अब कर्मचारियों के खातों में ब्याज राशि जमा होने की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। ऐसे में नौकरीपेशा लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि उनके खाते में ब्याज का पैसा कब आएगा और इसे कैसे चेक किया जाए।</p><p>ईपीएफओ (EPFO) ने अपने सदस्यों को बैलेंस और ब्याज की जानकारी प्राप्त करने के लिए कई डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। अब खाताधारक बिना किसी कार्यालय के चक्कर लगाए घर बैठे अपने पीएफ खाते का स्टेटस देख सकते हैं।</p><h5 class=""><b>जल्द खातों में जमा हो सकता है ब्याज</b></h5><p>सूत्रों के मुताबिक, श्रम मंत्रालय की मंजूरी के बाद EPFO को जल्द ही खातों में ब्याज राशि जमा करने के निर्देश दिए जा सकते हैं। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 8.25 फीसदी ब्याज दर तय की है। यह लगातार तीसरा वर्ष है जब ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं किया गया है।</p><p>ब्याज क्रेडिट होने के बाद खाताधारकों के कुल बैलेंस में स्वतः वृद्धि दिखाई देगी। इसलिए कर्मचारियों को सलाह दी जा रही है कि वे समय-समय पर अपने खाते की जांच करते रहें।</p><h5 class=""><b>पीएफ बैलेंस चेक करना क्यों है जरूरी?</b></h5><p>विशेषज्ञों के अनुसार पीएफ खाता केवल रिटायरमेंट फंड नहीं है, बल्कि यह कर्मचारियों की दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा भी है। खाते का बैलेंस नियमित रूप से देखने से निवेश की स्थिति समझने, भविष्य की योजना बनाने और जरूरत पड़ने पर आंशिक निकासी का सही निर्णय लेने में मदद मिलती है।</p><p>इसके अलावा यदि खाते में कोई तकनीकी त्रुटि या योगदान से जुड़ी समस्या हो तो उसका समय रहते समाधान भी किया जा सकता है।</p><h5 class=""><b>SMS के जरिए ऐसे जानें बैलेंस</b></h5><p>EPFO अपने सदस्यों को SMS सेवा भी प्रदान करता है। यदि आपका UAN सक्रिय है और मोबाइल नंबर EPFO रिकॉर्ड से जुड़ा हुआ है तो आप एक मैसेज भेजकर बैलेंस की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।</p><p>इसके लिए मोबाइल से "EPFOHO UAN ENG" लिखकर 7738299899 पर भेजना होगा। कुछ ही समय में खाते से जुड़ी जानकारी SMS के माध्यम से प्राप्त हो जाएगी।</p><h5 class=""><b>ऑनलाइन पोर्टल से करें चेक</b></h5><p>ऑनलाइन बैलेंस देखने के लिए EPFO की पासबुक सेवा का उपयोग किया जा सकता है। सदस्य अपने UAN और पासवर्ड के जरिए लॉगिन कर खाते की पूरी डिटेल देख सकते हैं।</p><p>पासबुक में कर्मचारी और नियोक्ता दोनों के योगदान, ब्याज राशि और कुल बैलेंस की जानकारी उपलब्ध रहती है। यह तरीका सबसे विस्तृत और भरोसेमंद माना जाता है।</p><h5 class=""><b>UMANG ऐप से भी मिलेगी जानकारी</b></h5><p>सरकार के UMANG ऐप के जरिए भी पीएफ खाते की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। ऐप डाउनलोड करने के बाद EPFO सेवाओं में जाकर ‘View Passbook’ विकल्प चुनना होगा। OTP सत्यापन के बाद खाते का पूरा विवरण स्क्रीन पर दिखाई देगा।</p><h5 class=""><b>मिस्ड कॉल देकर भी जानें बैलेंस</b></h5><p>यदि इंटरनेट उपलब्ध नहीं है, तो मिस्ड कॉल सेवा सबसे आसान विकल्प है। EPFO में पंजीकृत मोबाइल नंबर से 9966044425 पर मिस्ड कॉल देने के बाद कुछ ही मिनटों में SMS के जरिए खाते का बैलेंस भेज दिया जाता है।</p><h5 class=""><b>समय-समय पर खाते की जांच रखें जारी</b></h5><p>विशेषज्ञों का मानना है कि ब्याज क्रेडिट के इस दौर में कर्मचारियों को अपने EPF खाते पर नजर बनाए रखनी चाहिए। इससे न केवल वित्तीय योजना बेहतर बनती है, बल्कि भविष्य के लिए जमा हो रहे फंड की सही स्थिति का भी पता चलता रहता है।</p><p>सरकारी सुरक्षा और नियमित ब्याज के कारण EPF आज भी कर्मचारियों के लिए सबसे भरोसेमंद बचत साधनों में से एक माना जाता है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ PF Interest Update: आपके खाते में आया ब्याज या नहीं? इन आसान तरीकों से तुरंत करें बैलेंस चेक ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/utility-news/post-office-mis-scheme-monthly-income-plan-government-investment-2026-5065 ]]></guid><title><![CDATA[ एक बार निवेश, हर महीने कमाई: पोस्ट ऑफिस की इस स्कीम में मिल सकती है नियमित आय ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/utility-news/post-office-mis-scheme-monthly-income-plan-government-investment-2026-5065 ]]></link><pubDate><![CDATA[Mon, 22 Jun 2026 14:07:32 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ नई दिल्ली: आज के समय में हर व्यक्ति ऐसी निवेश योजना की तलाश में रहता है, जो न केवल सुरक्षित हो बल्कि नियमित आय भी उपलब्ध कराए। खासकर सेवानिवृत्त लोगों, गृहिणियों और कम जोखिम वाले निवेशकों के लिए ऐसी य ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>नई दिल्ली: </b>आज के समय में हर व्यक्ति ऐसी निवेश योजना की तलाश में रहता है, जो न केवल सुरक्षित हो बल्कि नियमित आय भी उपलब्ध कराए। खासकर सेवानिवृत्त लोगों, गृहिणियों और कम जोखिम वाले निवेशकों के लिए ऐसी योजनाएं अधिक आकर्षक होती हैं। पोस्ट ऑफिस की मंथली इनकम स्कीम (POMIS) इसी तरह की एक लोकप्रिय सरकारी योजना है, जो एकमुश्त निवेश के बदले हर महीने निश्चित आय का अवसर प्रदान करती है।</p><p>पोस्ट ऑफिस द्वारा संचालित यह योजना उन लोगों के लिए बेहतर विकल्प मानी जाती है, जो शेयर बाजार या अन्य जोखिम वाले निवेश साधनों से दूर रहकर सुरक्षित रिटर्न चाहते हैं। चूंकि यह योजना सरकार समर्थित है, इसलिए इसमें निवेश की सुरक्षा को लेकर निवेशकों को अतिरिक्त भरोसा मिलता है।</p><h5 class=""><b>क्या है पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम?</b></h5><p>पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम एक स्मॉल सेविंग स्कीम है, जिसमें निवेशक एक बार राशि जमा करके हर महीने ब्याज के रूप में आय प्राप्त कर सकते हैं। यह योजना नियमित नकद प्रवाह चाहने वाले लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है।</p><p>योजना के तहत एकल (Single) और संयुक्त (Joint) दोनों प्रकार के खाते खोले जा सकते हैं। वर्तमान नियमों के अनुसार एकल खाते में अधिकतम 9 लाख रुपये तक निवेश किया जा सकता है, जबकि संयुक्त खाते में निवेश की सीमा 15 लाख रुपये तक है।</p><h5 class=""><b>कितना मिलता है ब्याज?</b></h5><p>वर्तमान में इस योजना पर 7.4 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर उपलब्ध है। खास बात यह है कि ब्याज का भुगतान हर महीने किया जाता है, जिससे निवेशकों को नियमित आय प्राप्त होती रहती है। यह सुविधा उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है, जिन्हें हर महीने निश्चित रकम की जरूरत होती है।</p><h5 class=""><b>निवेश से कैसे बन सकती है मासिक आय?</b></h5><p>यदि कोई निवेशक संयुक्त खाते के माध्यम से 15 लाख रुपये का निवेश करता है, तो मौजूदा ब्याज दर के आधार पर उसे हर महीने लगभग 9,250 रुपये तक की आय प्राप्त हो सकती है। सालाना आधार पर यह राशि करीब 1.11 लाख रुपये बैठती है। हालांकि वास्तविक रिटर्न ब्याज दरों में भविष्य के बदलावों के अनुसार अलग हो सकता है।</p><h5 class=""><b>समय से पहले खाता बंद करने के नियम</b></h5><p>इस योजना में निवेश करने से पहले इसके नियमों को समझना जरूरी है। खाता खुलने के एक वर्ष के भीतर इसे बंद नहीं किया जा सकता। वहीं, निर्धारित अवधि से पहले खाता बंद कराने पर कुछ कटौती भी लागू हो सकती है। इसलिए निवेशकों को योजना की अवधि पूरी होने तक निवेश बनाए रखने की सलाह दी जाती है।</p><h5 class=""><b>किन लोगों के लिए है बेहतर विकल्प?</b></h5><p>वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार यह योजना वरिष्ठ नागरिकों, रिटायर्ड कर्मचारियों, गृहिणियों और नियमित मासिक आय चाहने वाले निवेशकों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। साथ ही यह उन लोगों के लिए भी बेहतर विकल्प है जो पूंजी की सुरक्षा के साथ स्थिर आय चाहते हैं।</p><h5 class=""><b>निवेश से पहले रखें इन बातों का ध्यान</b></h5><p>हालांकि यह योजना सुरक्षित मानी जाती है, लेकिन निवेश करने से पहले अपनी वित्तीय जरूरतों और लक्ष्यों का आकलन करना जरूरी है। ब्याज दरें समय-समय पर बदल सकती हैं, इसलिए निवेश से पहले नवीनतम दरों और नियमों की जानकारी जरूर प्राप्त करें।</p><p>सरकारी सुरक्षा, नियमित आय और आसान संचालन की वजह से पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम आज भी छोटे और मध्यम निवेशकों के बीच भरोसेमंद निवेश विकल्प बनी हुई है।</p><p><b>नोट- किसी भी तरह के निवेश से पहले अपने मार्केट एक्सपर्ट्स की सलाह जरूर लें.</b></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ एक बार निवेश, हर महीने कमाई: पोस्ट ऑफिस की इस स्कीम में मिल सकती है नियमित आय ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/utility-news/job-change-pf-account-transfer-merge-process-epfo-rules-5064 ]]></guid><title><![CDATA[ नौकरी बदली है तो तुरंत करें यह जरूरी काम, नहीं तो अटक सकता है आपका PF पैसा ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/utility-news/job-change-pf-account-transfer-merge-process-epfo-rules-5064 ]]></link><pubDate><![CDATA[Mon, 22 Jun 2026 13:42:29 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ नई दिल्ली: नौकरी बदलने के बाद अधिकांश कर्मचारी नई जिम्मेदारियों और वेतन पर ध्यान देते हैं, लेकिन कई बार अपने पीएफ (Provident Fund) खाते को लेकर जरूरी प्रक्रिया पूरी करना भूल जाते हैं। विशेषज्ञों का कह ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>नई दिल्ली:</b> नौकरी बदलने के बाद अधिकांश कर्मचारी नई जिम्मेदारियों और वेतन पर ध्यान देते हैं, लेकिन कई बार अपने पीएफ (Provident Fund) खाते को लेकर जरूरी प्रक्रिया पूरी करना भूल जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आपने हाल ही में नौकरी बदली है, तो पुराने PF खाते का बैलेंस नए खाते में ट्रांसफर करना बेहद जरूरी है। ऐसा नहीं करने पर भविष्य में क्लेम, निकासी और खाता प्रबंधन में दिक्कतें आ सकती हैं।</p><h5 class=""><b>एक UAN से जुड़ सकते हैं कई PF खाते</b></h5><p>जब कोई कर्मचारी नई कंपनी जॉइन करता है, तो उसके यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) के तहत एक नई Member ID बन जाती है। ऐसे में एक ही UAN से जुड़े कई PF खाते दिखाई देने लगते हैं। हालांकि ये खाते अपने आप मर्ज नहीं होते, इसलिए कर्मचारी को ट्रांसफर प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है।</p><h5 class=""><b>क्यों जरूरी है PF ट्रांसफर?</b></h5><p>पुराने PF खाते का बैलेंस नए खाते में ट्रांसफर करने से सभी रिटायरमेंट बचत एक जगह सुरक्षित रहती है। इससे खातों की निगरानी आसान होती है और भविष्य में निकासी या फाइनल सेटलमेंट के समय परेशानी नहीं होती। साथ ही निष्क्रिय खातों से जुड़ी समस्याओं से भी बचा जा सकता है।</p><h5 class=""><b>टैक्स लाभ बनाए रखने में मिलती है मदद</b></h5><p>PF ट्रांसफर का एक बड़ा फायदा यह भी है कि कर्मचारी की सेवा अवधि लगातार बनी रहती है। EPFO नियमों के अनुसार पांच साल की निरंतर सेवा पूरी होने पर PF निकासी टैक्स फ्री होती है। यदि खाते अलग-अलग बने रहें तो टैक्स से जुड़ी जटिलताएं बढ़ सकती हैं।</p><h5 class=""><b>ऑटोमैटिक ट्रांसफर कब होता है?</b></h5><p>कुछ मामलों में EPFO स्वतः PF ट्रांसफर की प्रक्रिया शुरू कर देता है। इसके लिए आधार लिंक होना, KYC अपडेट होना, बैंक विवरण सत्यापित होना और पुराने व नए नियोक्ता का रिकॉर्ड सही होना जरूरी है। नए नियोक्ता की ओर से पहला PF योगदान जमा होने के बाद सिस्टम ट्रांसफर रिक्वेस्ट जनरेट कर सकता है।</p><h5 class=""><b>ऑनलाइन कैसे करें PF ट्रांसफर?</b></h5><p>कर्मचारी EPFO के यूनिफाइड मेंबर पोर्टल पर लॉगिन कर "One Member One EPF Account" विकल्प के जरिए ऑनलाइन ट्रांसफर रिक्वेस्ट भेज सकते हैं। OTP सत्यापन और आवश्यक जानकारी भरने के बाद आवेदन जमा किया जा सकता है। इसके बाद नियोक्ता की मंजूरी मिलने पर EPFO ट्रांसफर प्रक्रिया पूरी कर देता है।</p><h5 class=""><b>दो UAN होने पर क्या करें?</b></h5><p>यदि किसी कर्मचारी के नाम पर दो अलग-अलग UAN जारी हो गए हैं, तो वह EPFO को ईमेल भेजकर पुराने UAN को बंद करने और दोनों खातों को मर्ज करने का अनुरोध कर सकता है।</p><h5 class=""><b>कर्मचारियों के लिए जरूरी सलाह</b></h5><p>वित्तीय जानकारों का मानना है कि नौकरी बदलने के बाद PF खाते की स्थिति जरूर जांचनी चाहिए। समय पर ट्रांसफर और मर्जर की प्रक्रिया पूरी करने से भविष्य में पेंशन, निकासी और अन्य रिटायरमेंट लाभ प्राप्त करने में किसी तरह की परेशानी नहीं होती।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ नौकरी बदली है तो तुरंत करें यह जरूरी काम, नहीं तो अटक सकता है आपका PF पैसा ]]></media:description></item></channel></rss>