<?xml version='1.0' encoding='UTF-8' ?><rss xmlns:content='http://purl.org/rss/1.0/modules/content/' xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/'  version='2.0'><channel><title>GTC Bharat</title><link>https://www.gtcbharat.com</link><lastBuildDate><![CDATA[Thu, 25 Jun 2026 00:29:57 +0530 ]]></lastBuildDate><language>en</language><image><title>GTC Bharat</title><url>https://media.gtcbharat.com/uploads/GTC-Bhart.svg</url><link>https://www.gtcbharat.com</link></image><description>GTC Bharat: Hindi News(हिंदी न्यूज़): Bharat की ताज़ा खबरें | Hindi News, हिंदी समाचार </description><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/us-senate-challenges-trump-war-powers-iran-conflict-5097 ]]></guid><title><![CDATA[ ईरान युद्ध पर ट्रम्प को बड़ा झटका! अमेरिकी सीनेट ने राष्ट्रपति की युद्ध शक्तियों पर लगाई रोक ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/us-senate-challenges-trump-war-powers-iran-conflict-5097 ]]></link><pubDate><![CDATA[Wed, 24 Jun 2026 19:26:45 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ वॉशिंगटन से एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। 1973 के वॉर पॉवर्स एक्ट के बाद, यानी पिछले 53 सालों के इतिहास में पहली बार, अमेरिकी संसद के दोनों सदनों ने एक बैठे हुए राष ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"><span style="background-color: transparent; color: rgb(0, 0, 0); font-family: Arial, sans-serif; font-size: 11pt; white-space: pre-wrap;">वॉशिंगटन से एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। 1973 के वॉर पॉवर्स एक्ट के बाद, यानी पिछले 53 सालों के इतिहास में पहली बार, अमेरिकी संसद के दोनों सदनों ने एक बैठे हुए राष्ट्रपति की युद्ध शक्तियों को सीधे चुनौती दे दी है। और वो भी तब, जब ईरान के साथ हुआ हालिया संघर्ष अभी-अभी थमा है और दोनों देश समझौते की मेज पर हैं।</span></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:12pt;margin-bottom:12pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">अमेरिकी सीनेट ने एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पास किया है, जिसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को यह सख्त निर्देश दिया गया है कि वे ईरान में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को तत्काल रोकें। वोटिंग के दौरान ट्रम्प की अपनी ही पार्टी के भीतर एक गहरी दरार देखने को मिली, जब चार रिपब्लिकन सांसदों ने पाला बदलकर विपक्ष यानी डेमोक्रेट्स का साथ दिया।</span></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:12pt;margin-bottom:12pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">ट्रम्प ने इस प्रस्ताव को ‘बेमानी’ और ‘गलत समय पर लिया गया फैसला’ बताया है। अपने खिलाफ वोट देने वाले रिपब्लिकन सांसदों को उन्होंने ‘हारे हुए लोग’ तक कह दिया। लेकिन जब अमेरिका की संसद ही अपने राष्ट्रपति की नीतियों के खिलाफ खड़ी हो जाए, तो यह सवाल सिर्फ अमेरिका का नहीं, बल्कि पूरी वैश्विक कूटनीति का सवाल बन जाता है।</span></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"></p><hr><p></p><h3 dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:14pt;margin-bottom:4pt;"><span style="font-size:13pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:700;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">युद्ध की शुरुआत: ऑपरेशन एपिक फ्यूरी</span></h3><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:12pt;margin-bottom:12pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई शुरू की। इसे ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ नाम दिया गया। अमेरिकी प्रशासन का दावा था कि ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को रोकना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है। लेकिन कुछ ही घंटों में यह अभियान मध्य-पूर्व के सबसे बड़े सैन्य टकरावों में बदल गया।</span></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:12pt;margin-bottom:12pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">पहले 12 घंटों में ही 900 से अधिक हवाई हमले किए गए। ईरान के सैन्य अड्डों, रणनीतिक ठिकानों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया। जवाब में ईरान ने इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन और सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। धीरे-धीरे यह संघर्ष पूरे क्षेत्र में फैलने लगा।</span></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:12pt;margin-bottom:12pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">सबसे बड़ा झटका तब लगा जब ईरान ने होर्मुज़ स्ट्रेट को बंद कर दिया। यही वह समुद्री मार्ग है जिससे दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का व्यापार गुजरता है। कुछ ही दिनों में तेल बाजार में भारी उथल-पुथल मच गई, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई और दुनिया भर में महंगाई तथा ऊर्जा संकट की चिंताएं बढ़ने लगीं।</span></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:12pt;margin-bottom:12pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">28 फरवरी से लेकर जून के मध्य तक चले इस संघर्ष में हजारों सैन्य हमले हुए और अरबों डॉलर का नुकसान हुआ। पूरे युद्ध की लागत 100 अरब डॉलर से भी अधिक पहुंचने का अनुमान है। इतना ही नहीं, रक्षा उपकरणों और हथियारों के भंडार को फिर से भरने के लिए पेंटागन ने अतिरिक्त 80 अरब डॉलर के बजट की मांग भी की है।</span></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"></p><hr><p></p><h3 dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:14pt;margin-bottom:4pt;"><span style="font-size:13pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:700;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">सीनेट की बगावत: 50-48 का कांटे का मुकाबला</span></h3><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:12pt;margin-bottom:12pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">युद्ध के साथ-साथ अमेरिका के भीतर एक और बहस तेज होती गई। सवाल यह उठने लगा कि क्या राष्ट्रपति ट्रम्प ने कांग्रेस की औपचारिक मंजूरी के बिना अमेरिका को इस युद्ध में झोंक दिया? यही सवाल धीरे-धीरे वॉशिंगटन के सत्ता गलियारों से निकलकर अमेरिकी संसद तक पहुंच गया।</span></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:12pt;margin-bottom:12pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">सीनेट में हुए 50-48 के कांटे के मुकाबले में ट्रम्प की हार की पटकथा उनकी अपनी ही पार्टी के चार रिपब्लिकन सांसदों ने लिखी - लिसा मुर्कोवस्की, सुजन कॉलिन्स, रैंड पॉल और बिल कैसिडी। इन नेताओं ने पार्टी लाइन से अलग जाकर ट्रम्प के खिलाफ वोट दिया।</span></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:12pt;margin-bottom:12pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">यह पहली बार था जब सीनेट ने ऐसा प्रस्ताव पारित किया। इससे पहले नौ बार कोशिश हुई थी और हर बार नाकामी मिली। इस बार दो रिपब्लिकन सांसद; मिच मैककोनेल और डेव मैककॉर्मिक वोट के लिए मौजूद नहीं थे। अगर वे होते, तो 50-50 की टाई पर यह प्रस्ताव गिर जाता।</span></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:12pt;margin-bottom:12pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">सीनेट के डेमोक्रेटिक नेता चक शूमर ने इसे ट्रम्प की ‘ऐतिहासिक भूल’ बताया। डेमोक्रेट सांसद टिम केन ने कहा कि संविधान बहुत साफ है, युद्ध की घोषणा करने का अधिकार राष्ट्रपति का नहीं, संसद का है।</span></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:12pt;margin-bottom:12pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">हालांकि व्हाइट हाउस इस प्रस्ताव को केवल प्रतीकात्मक और बेमानी करार दे रहा है। व्हाइट हाउस का तर्क है कि युद्ध तो 7 अप्रैल के सीजफायर के बाद ही खत्म हो चुका था, इसलिए हटाने के लिए कोई सेना है ही नहीं। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बगावत ने अमेरिकी सत्ता के शीर्ष पर मौजूद गहरे मतभेदों को दुनिया के सामने उजागर कर दिया है। बढ़ते आर्थिक बोझ, महंगाई और युद्ध की राजनीतिक कीमत ने रिपब्लिकन और डेमोक्रेट… दोनों दलों के कई नेताओं को असहज कर दिया है।</span></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"></p><hr><p></p><h3 dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:14pt;margin-bottom:4pt;"><span style="font-size:13pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:700;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">कूटनीति की जंग: स्विट्जरलैंड से पाकिस्तान तक</span></h3><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:12pt;margin-bottom:12pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">मिसाइलें भले खामोश हो गई हों, लेकिन कूटनीति की जंग अभी भी पूरी ताकत से जारी है। स्विट्जरलैंड में जब अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधि बातचीत की मेज पर बैठे, तो बंद कमरों के भीतर हालात इतने आसान नहीं थे।</span></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:12pt;margin-bottom:12pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">सूत्रों के मुताबिक करीब 80 मिनट तक बेहद गोपनीय बातचीत चल रही थी। इसी दौरान राष्ट्रपति ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर ईरान को खुली चेतावनी दे दी। ट्रम्प के इस बयान ने बातचीत का माहौल अचानक तनावपूर्ण बना दिया। ईरानी मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालिबाफ इतने नाराज हुए कि बातचीत कुछ समय के लिए बाधित हो गई। ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ औपचारिक फोटो और सार्वजनिक हाथ मिलाने से भी इनकार कर दिया।</span></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:12pt;margin-bottom:12pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">कतर, ओमान, पाकिस्तान और कुछ यूरोपीय मध्यस्थ देशों की लगातार कोशिशों के बाद संवाद का सिलसिला जारी रखा गया।</span></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:12pt;margin-bottom:12pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो अचानक संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और कुवैत के दौरे पर पहुंचे। माना जा रहा है कि उनका मकसद खाड़ी देशों की उन आशंकाओं को दूर करना है जिनमें उन्हें डर है कि युद्ध के बाद बनने वाले नए समीकरणों में ईरान का प्रभाव और मजबूत हो सकता है।</span></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:12pt;margin-bottom:12pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">दूसरी तरफ ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियां सीधे पाकिस्तान पहुंचे, जहां प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर के साथ उनकी महत्वपूर्ण बैठक हुई। यह दौरा सिर्फ औपचारिक नहीं माना जा रहा, बल्कि क्षेत्रीय समर्थन और रणनीतिक संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।</span></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"></p><hr><p></p><h3 dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:14pt;margin-bottom:4pt;"><span style="font-size:13pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:700;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">परमाणु विवाद: एक समझौता, दो अलग-अलग दावे</span></h3><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:12pt;margin-bottom:12pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">इस पूरी शांति प्रक्रिया की सबसे बड़ी परीक्षा अब भी ईरान का परमाणु कार्यक्रम ही बना हुआ है। 17 जून को अमेरिका और ईरान के बीच एक 14-सूत्रीय समझौता-ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए। इसके तहत अगले 60 दिनों तक परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंधों में राहत, होर्मुज़ स्ट्रेट और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर बातचीत आगे बढ़ाने पर सहमति बनी।</span></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:12pt;margin-bottom:12pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">लेकिन समझौते के कुछ ही दिनों बाद दोनों देशों के दावों में बड़ा विरोधाभास सामने आ गया।</span></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:12pt;margin-bottom:12pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने दावा किया कि ईरान अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी IAEA के निरीक्षकों को दोबारा अपने परमाणु ठिकानों तक पहुंच देने पर सहमत हो गया है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने भी चेतावनी दी कि यदि ईरान ने अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण स्वीकार नहीं किया, तो कूटनीतिक बातचीत के रास्ते बंद हो सकते हैं।</span></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:12pt;margin-bottom:12pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">अगले ही दिन तेहरान ने अमेरिकी दावों को सिरे से खारिज कर दिया। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघाई ने कहा कि IAEA प्रमुख राफेल ग्रोसी के साथ ऐसी कोई बैठक नहीं हुई जिसमें निरीक्षकों की वापसी पर कोई नई प्रतिबद्धता दी गई हो। ईरान ने यह भी साफ कर दिया कि उसकी जमी हुई संपत्तियों के इस्तेमाल को लेकर अंतिम फैसला केवल तेहरान करेगा।</span></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:12pt;margin-bottom:12pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">होर्मुज़ स्ट्रेट को लेकर भी दोनों देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं। मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा है कि होर्मुज़ अब पहले जैसा नहीं रहेगा और ईरान वहां से गुजरने वाले जहाजों पर अधिक नियंत्रण और आर्थिक अधिकार चाहता है। वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का कहना है कि किसी भी देश को अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग पर टोल वसूलने का अधिकार नहीं दिया जा सकता।</span></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:12pt;margin-bottom:12pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">पाकिस्तान दौरे के दौरान ईरानी राष्ट्रपति ने एक और स्पष्ट संदेश दिया, ईरान अपने मिसाइल कार्यक्रम पर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा, क्योंकि यह उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता का विषय है।</span></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:12pt;margin-bottom:12pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">विशेषज्ञों का मानना है कि समझौते के बाद ये अगले 60 दिन बेहद महत्वपूर्ण होंगे। असली संघर्ष अब युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि भरोसे, परमाणु निरीक्षण और राजनीतिक प्रतिबद्धताओं के बीच होने वाला है।</span></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"></p><hr><p></p><h3 dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:14pt;margin-bottom:4pt;"><span style="font-size:13pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:700;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">होर्मुज़ में फंसे 11 हजार नाविक: UN का मेगा रेस्क्यू ऑपरेशन</span></h3><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:12pt;margin-bottom:12pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">इस युद्ध की सबसे दर्दनाक मानवीय तस्वीर आज होर्मुज़ स्ट्रेट में दिखाई दे रही है। शिपिंग विश्लेषण कंपनी Kpler के अनुसार फिलहाल कम से कम 327 बड़े वाणिज्यिक जहाज फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं। इन जहाजों पर सवार 11 हजार से ज्यादा नाविक महीनों से घर लौटने का इंतजार कर रहे हैं। ये कोई सैनिक नहीं हैं, ये आम नाविक हैं जो दो देशों की जंग के कारण समुद्र के बीचों-बीच कैद हो गए।</span></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:12pt;margin-bottom:12pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी IMO ने अब इन नाविकों को सुरक्षित निकालने के लिए एक बड़े इवैक्युएशन ऑपरेशन की शुरुआत की है। IMO के महासचिव आर्सेनियो डोमिंग्वेज़ के अनुसार इस संघर्ष के दौरान कम से कम 14 नाविक अपनी जान गंवा चुके हैं और हजारों लोग अब भी जोखिम में हैं।</span></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:12pt;margin-bottom:12pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">युद्ध के दौरान ईरान ने होर्मुज़ के कई हिस्सों में समुद्री बारूदी सुरंगें बिछा दी थीं। डेनमार्क, फ्रांस और ब्रिटेन ने मिलकर एक संयुक्त नौसैनिक सुरक्षा मिशन शुरू करने का फैसला किया है ताकि इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग को पूरी तरह सुरक्षित बनाया जा सके।</span></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:12pt;margin-bottom:12pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">कुछ राहत की खबरें भी सामने आई हैं। मरीन ट्रैफिक के आंकड़ों के मुताबिक जहाजों की आवाजाही धीरे-धीरे बढ़ने लगी है, जो संख्या कुछ समय पहले 30 से 40 जहाज प्रतिदिन तक सिमट गई थी, वह अब बढ़कर लगभग 90 के आसपास पहुंच रही है।</span></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:12pt;margin-bottom:12pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">भारत के लिए भी यह राहत की खबर है। विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत से जुड़े 11 जहाज, जिनमें 4 बड़े कच्चे तेल के टैंकर शामिल हैं, सुरक्षित रूप से होर्मुज़ पार कर चुके हैं। इसका असर वैश्विक तेल बाजार पर भी दिखाई दिया है और ब्रेंट क्रूड की कीमतें गिरकर मार्च के बाद के सबसे निचले स्तरों तक पहुंच गई हैं।</span></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:12pt;margin-bottom:12pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">हालांकि खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। ओमान और ईरान के बीच इस बात पर बातचीत चल रही है कि क्या होर्मुज़ से गुजरने वाले जहाजों पर नया टैक्स या टोल लगाया जाए। युद्ध भले रुक गया हो, लेकिन उसके आर्थिक और मानवीय परिणाम अभी भी पूरी दुनिया को प्रभावित कर रहे हैं।</span></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:0pt;margin-bottom:0pt;"></p><hr><p></p><h3 dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:14pt;margin-bottom:4pt;"><span style="font-size:13pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:700;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">आगे क्या: लोकतंत्र का सबसे पुराना सवाल</span></h3><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:12pt;margin-bottom:12pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">यह कहानी सिर्फ अमेरिकी सीनेट के एक वोट की नहीं है। यह उस मूल सवाल की कहानी है जो हर लोकतंत्र में बार-बार पूछा जाता है, क्या एक राष्ट्रपति, चाहे वह कितना भी ताकतवर क्यों न हो, अकेले अपने देश को युद्ध में झोंक सकता है? क्या युद्ध और शांति जैसे बड़े फैसलों में संसद की भूमिका अनिवार्य होनी चाहिए?</span></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:12pt;margin-bottom:12pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">53 साल बाद अमेरिकी सीनेट ने इसी सवाल को दोबारा जिंदा किया है।</span></p><p dir="ltr" style="line-height:1.38;margin-top:12pt;margin-bottom:12pt;"><span style="font-size:11pt;font-family:Arial,sans-serif;color:#000000;background-color:transparent;font-weight:400;font-style:normal;font-variant:normal;text-decoration:none;vertical-align:baseline;white-space:pre;white-space:pre-wrap;">ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत जारी है। होर्मुज़ में फंसे हजारों नाविक घर लौटने का इंतजार कर रहे हैं। दुनिया उम्मीद कर रही है कि मिसाइलों की जगह अब कूटनीति लेगी। लेकिन इतिहास हमें यही सिखाता है… युद्ध शुरू करना आसान है, शांति बनाए रखना बेहद मुश्किल।</span></p><p><br><br></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ ईरान युद्ध पर ट्रम्प को बड़ा झटका! अमेरिकी सीनेट ने राष्ट्रपति की युद्ध शक्तियों पर लगाई रोक ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/trump-warns-iran-over-strait-of-hormuz-global-oil-trade-concerns-5096 ]]></guid><title><![CDATA[ होर्मुज जलडमरूमध्य पर ट्रंप की ईरान को चेतावनी, बोले- गलत निकली जानकारी तो खत्म होगी बातचीत ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/trump-warns-iran-over-strait-of-hormuz-global-oil-trade-concerns-5096 ]]></link><pubDate><![CDATA[Wed, 24 Jun 2026 18:52:32 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक बार फिर वैश्विक चर्चा के केंद्र में है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस रणनीतिक जलमार्ग को लेकर ईरान को स्पष् ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p>दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक बार फिर वैश्विक चर्चा के केंद्र में है। <b>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप </b>ने इस रणनीतिक जलमार्ग को लेकर ईरान को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क न लगाने को लेकर मिली जानकारी गलत साबित हुई, तो अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत तुरंत समाप्त कर दी जाएगी।</p><p>ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह आशंका जताई जा रही थी कि ईरान इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर किसी प्रकार का टोल, बीमा शुल्क या अतिरिक्त कर लगाने पर विचार कर सकता है। इन अटकलों के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजारों और तेल व्यापार से जुड़े देशों की चिंताएं बढ़ गई थीं।</p><h5 class=""><b>ट्रंप का दावा, ईरान ने दिया आश्वासन</b></h5><p>डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच पर साझा किए गए एक संदेश में कहा कि ईरान की ओर से अमेरिका को यह भरोसा दिया गया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं डाला जाएगा। उन्होंने कहा कि न तो टोल लगाया जाएगा और न ही कोई विशेष बीमा शुल्क वसूला जाएगा।</p><p>हालांकि ट्रंप ने साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में यह दावा गलत साबित हुआ, तो दोनों देशों के बीच जारी कूटनीतिक संवाद और शांति प्रयासों पर गंभीर असर पड़ सकता है। उनके बयान को पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।</p><p>&lt;iframe src="https://truthsocial.com/@realDonaldTrump/116804880689253931/embed" class="truthsocial-embed" style="max-width: 100%; border: 0" width="600" allowfullscreen="allowfullscreen"&gt;&lt;/iframe&gt;&lt;script src="https://truthsocial.com/embed.js" async="async"&gt;&lt;/script&gt;<br></p><h5 class=""><b>क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज जलडमरूमध्य?</b></h5><p>स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है। यह जलमार्ग फारस की खाड़ी को अरब सागर और हिंद महासागर से जोड़ता है। वैश्विक कच्चे तेल के समुद्री व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है।</p><p>विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इस मार्ग में किसी प्रकार की रुकावट आती है या अतिरिक्त शुल्क लगाए जाते हैं, तो उसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों पर पड़ सकता है। इससे ऊर्जा आयात करने वाले देशों की अर्थव्यवस्था और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है।</p><h5 class=""><b>ईरान को धन देने की खबरों का खंडन</b></h5><p>ट्रंप ने उन रिपोर्टों को भी खारिज कर दिया जिनमें दावा किया गया था कि अमेरिका ने ईरान को आर्थिक सहायता या धनराशि उपलब्ध कराई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका ने ईरान को कोई सीधा भुगतान नहीं किया है और न ही प्रतिबंधों के तहत रोकी गई संपत्तियों को पूरी तरह उसके नियंत्रण में सौंपा गया है।</p><p>हालांकि उन्होंने यह संकेत दिया कि कुछ विशेष परिस्थितियों में नियंत्रित फंड का उपयोग मानवीय जरूरतों के लिए किया जा सकता है। ट्रंप के अनुसार, ऐसी राशि का इस्तेमाल खाद्य उत्पादों की खरीद के लिए किया जा सकता है, जिससे आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।</p><h5 class=""><b>कृषि उत्पादों की खरीद पर जोर</b></h5><p>अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि यदि किसी विशेष व्यवस्था के तहत ईरान को धन उपलब्ध कराया जाता है तो उसका उपयोग कृषि उत्पाद खरीदने में किया जाएगा। उन्होंने मक्का, गेहूं और सोयाबीन जैसे खाद्यान्नों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन वस्तुओं की आपूर्ति अमेरिकी किसानों से की जा सकती है।</p><p>विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम मानवीय आवश्यकताओं को पूरा करने के उद्देश्य से उठाया जा सकता है, जबकि व्यापक आर्थिक प्रतिबंधों की नीति यथावत बनी रह सकती है।</p><h5 class=""><b>वैश्विक बाजारों की नजर</b></h5><p>पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी हर खबर पर वैश्विक बाजारों की नजर बनी हुई है। तेल निर्यातक देशों, ऊर्जा कंपनियों और निवेशकों के लिए यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है।</p><p>ट्रंप का ताजा बयान इस बात का संकेत देता है कि अमेरिका किसी भी ऐसी स्थिति से बचना चाहता है जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है। वहीं, ईरान के रुख और भविष्य की कूटनीतिक बातचीत पर भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है।</p><p>आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जारी चर्चाएं किस दिशा में आगे बढ़ती हैं और इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था तथा ऊर्जा बाजारों पर क्या प्रभाव पड़ता है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ होर्मुज जलडमरूमध्य पर ट्रंप की ईरान को चेतावनी, बोले- गलत निकली जानकारी तो खत्म होगी बातचीत ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/iran-invites-pm-modi-khamenei-state-funeral-india-iran-relations-5094 ]]></guid><title><![CDATA[ खामेनेई के अंतिम संस्कार में PM मोदी को न्योता? ईरान के निमंत्रण दावे पर बढ़ी चर्चा ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/iran-invites-pm-modi-khamenei-state-funeral-india-iran-relations-5094 ]]></link><pubDate><![CDATA[Wed, 24 Jun 2026 15:10:48 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ ईरान और भारत के संबंधों को लेकर एक नई चर्चा सामने आई है। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ईरान के सर्वोच्च नेत ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>ईरान और भारत</b> के संबंधों को लेकर एक नई चर्चा सामने आई है। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ईरान के <b>राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन</b> ने भारत के <b>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी </b>को ईरान के सर्वोच्च नेता <b>अयातुल्ला अली खामेनेई</b> के प्रस्तावित राजकीय अंतिम संस्कार और दफन समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। हालांकि इस निमंत्रण और समारोह को लेकर आधिकारिक स्तर पर अभी स्पष्ट जानकारी का इंतजार है।</p><p>रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान में जुलाई के पहले सप्ताह से कई दिनों तक चलने वाले धार्मिक और राजकीय कार्यक्रम आयोजित किए जाने की योजना है। बताया जा रहा है कि इन कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में विदेशी प्रतिनिधिमंडल और दुनिया भर से श्रद्धांजलि देने वाले लोग शामिल हो सकते हैं।</p><h5 class=""><b>जुलाई में प्रस्तावित हैं कई कार्यक्रम</b></h5><p>सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित कार्यक्रमों की शुरुआत 4 जुलाई से तेहरान में हो सकती है। राजधानी तेहरान के प्रमुख धार्मिक परिसर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाने की बात कही जा रही है। इसके बाद विभिन्न शहरों में जुलूस, प्रार्थना सभाएं और स्मृति समारोह आयोजित किए जा सकते हैं।</p><p>रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि अंतिम कार्यक्रम मशहद में आयोजित किया जा सकता है, जो ईरान के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है। इन आयोजनों में लाखों लोगों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।</p><h5 class=""><b>भारत-ईरान संबंधों पर रहे हैं विशेष फोकस</b></h5><p>भारत और ईरान के बीच लंबे समय से सांस्कृतिक, आर्थिक और रणनीतिक संबंध रहे हैं। दोनों देशों के बीच ऊर्जा, व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर लगातार संवाद होता रहा है।</p><p>पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच कई दौर की बातचीत हुई है। पश्चिम एशिया में बदलते हालात के बीच भारत ने हमेशा संतुलित और कूटनीतिक दृष्टिकोण अपनाने की कोशिश की है।</p><p>विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी उच्चस्तरीय समारोह में भारत की भागीदारी होती है, तो उसे दोनों देशों के रिश्तों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जाएगा।</p><h5 class=""><b>पहले भी भेजे गए हैं भारतीय प्रतिनिधिमंडल</b></h5><p>भारत इससे पहले भी ईरान में आयोजित महत्वपूर्ण राजकीय कार्यक्रमों में अपने प्रतिनिधि भेजता रहा है। वर्ष 2024 में ईरान के तत्कालीन राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी के निधन के बाद भारत की ओर से उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने अंतिम संस्कार कार्यक्रम में हिस्सा लिया था।</p><p>इसी तरह, ईरान में नए राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण समारोह में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया गया था। इससे दोनों देशों के बीच बने कूटनीतिक संबंधों को मजबूती मिली थी।</p><h5 class=""><b>क्षेत्रीय हालात पर दुनिया की नजर</b></h5><p>पश्चिम एशिया में हाल के वर्षों में बढ़े तनाव और संघर्षों के बीच ईरान की राजनीतिक गतिविधियों पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। ऐसे में किसी भी बड़े राजकीय या धार्मिक आयोजन का अंतरराष्ट्रीय महत्व बढ़ जाता है।</p><p>रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने कई देशों को कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। इनमें एशिया और मध्य पूर्व के कई देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।</p><p>फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि भारत इस निमंत्रण पर क्या रुख अपनाता है और यदि कोई प्रतिनिधिमंडल भेजा जाता है तो उसका स्तर क्या होगा। आने वाले दिनों में इस विषय पर अधिक स्पष्टता सामने आने की उम्मीद है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ खामेनेई के अंतिम संस्कार में PM मोदी को न्योता? ईरान के निमंत्रण दावे पर बढ़ी चर्चा ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/india-welcomes-iran-us-mou-ajit-doval-5078 ]]></guid><title><![CDATA[ ईरान-अमेरिका समझौता वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अहम, भारत ने जताई उम्मीद ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/india-welcomes-iran-us-mou-ajit-doval-5078 ]]></link><pubDate><![CDATA[Tue, 23 Jun 2026 11:29:51 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ नई दिल्ली: भारत ने अमरीका और ईरान के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) का स्वागत किया है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने इस समझौते को लेकर "सतर्क आशावाद" व्यक्त करते हुए कहा कि इससे क्षेत्रीय स्थिर ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>नई दिल्ली: </b>भारत ने अमरीका और ईरान के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) का स्वागत किया है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने इस समझौते को लेकर "सतर्क आशावाद" व्यक्त करते हुए कहा कि इससे क्षेत्रीय स्थिरता, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक व्यापार को लाभ मिल सकता है।</span></p><p>16वीं ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक को संबोधित करते हुए अजीत डोभाल ने कहा, "भारत अमेरिका और ईरान के बीच हुए MoU का स्वागत करता है। हमें इस समझौते को लेकर सतर्क आशावाद है और हमें उम्मीद है कि यह सफल होगा। इससे ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी। हॉर्मुज जलडमरूमध्य का खुलना बेहद स्वागतयोग्य कदम है।"</p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;&lt;a href="https://x.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#WATCH&lt;/a&gt; | Delhi: At the 16th BRICS National Security Advisers&amp;#39; Meeting, National Security Advisor (NSA) Ajit Doval says, &amp;quot;We will also discuss the outcomes of the two BRICS joint working groups on counter-terrorism and on the security in the use of information and communication… &lt;a href="https://t.co/pWibfRP1Mm"&gt;pic.twitter.com/pWibfRP1Mm&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; ANI (@ANI) &lt;a href="https://x.com/ANI/status/2069289100142837807?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 23, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><p><b>वॉशिंगटन-तेहरान के बीच आपसी समझ से हल होंगे मसले</b></p><p><span style="font-size: 1rem;">अजीत डोभाल</span><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;ने</span>&nbsp;कहा कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बनी समझ ऊर्जा आपूर्ति को अधिक स्थिर बनाने में मदद करेगी, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजारों को राहत मिलेगी।</p><p>इसके आगे उन्होंने आगे कहा कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर आवाजाही सुगम होने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला में आने वाली बाधाएं भी कम होंगी। उन्होंने कहा, "इससे सप्लाई चेन में आने वाली रुकावटें दूर होंगी और उर्वरक, रसायन समेत कई क्षेत्रों में होने वाली कमी को पूरा करने में मदद मिलेगी।"</p><p><b>पश्चिम-एशिया के बीच संघर्ष विराम का पीएम मोदी ने किया था स्वागत</b>&nbsp;</p><p>राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने कहा कि क्षेत्र और उससे बाहर के देशों के लिए समुद्री मार्गों पर निर्बाध आवाजाही की सुविधा उपलब्ध होने से आर्थिक समृद्धि को भी बढ़ावा मिलेगा।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">इससे पहले 15 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच हुई शांति वार्ता का स्वागत किया था। उन्होंने क्षेत्र में जल्द शांति और स्थिरता बहाल करने तथा समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने पर जोर दिया था।</span></p><p><span style="font-size: 1rem;"><b>'दोनों देशों के बीच हुए समझौते से हालात बेहतर होंगे'</b></span></p><p>सोशल मीडिया मंच एक्स पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण दुनिया भर में आर्थिक व्यवधान उत्पन्न हुए और कई देशों में जान-माल का नुकसान हुआ।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने कहा, "भारत पश्चिम एशिया में संघर्ष समाप्त करने को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच बनी सहमति का स्वागत करता है। हमें उम्मीद है कि इस समझौते के क्रियान्वयन से क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल होगी तथा नौवहन और व्यापार की स्वतंत्रता सुनिश्चित होगी।"</span></p><p>इस बीच, अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच हुई तकनीकी वार्ताओं को "बेहद उत्पादक 36 घंटे" बताया। उन्होंने समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और ईरान के परमाणु कार्यक्रम की निगरानी से जुड़े मुद्दों पर हुई प्रगति को लेकर आशावाद व्यक्त किया।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ ईरान-अमेरिका समझौता वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अहम, भारत ने जताई उम्मीद ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/keir-starmer-resigns-uk-prime-minister-country-interest-decision-5066 ]]></guid><title><![CDATA[ ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने दिया इस्तीफा, बोले- ‘देशहित में लिया फैसला’ ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/keir-starmer-resigns-uk-prime-minister-country-interest-decision-5066 ]]></link><pubDate><![CDATA[Mon, 22 Jun 2026 14:29:16 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ लंदन, ब्रिटेन: ब्रिटेन की राजनीति में एक बड़े घटनाक्रम के तहत प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी है। लेबर पार्टी के भीतर बढ़ते दबाव और नेतृत्व को लेकर उठ रहे सवालों के  ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>लंदन, ब्रिटेन: </b>ब्रिटेन की राजनीति में एक बड़े घटनाक्रम के तहत प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी है। लेबर पार्टी के भीतर बढ़ते दबाव और नेतृत्व को लेकर उठ रहे सवालों के बीच उन्होंने यह फैसला लिया।</p><p>अपने संबोधन में कीर स्टारमर ने कहा, “इस समय सबसे बड़ा सवाल यह पूछा जा रहा है कि लेबर पार्टी को आगे ले जाने के लिए सबसे उपयुक्त व्यक्ति कौन है। पार्टी यह भी पूछ रही है कि क्या मैं अगले आम चुनाव में पार्टी का नेतृत्व करने के लिए सही व्यक्ति हूं। मैंने अपने सहयोगियों की राय सुनी है और उसे स्वीकार करता हूं। मैंने हमेशा देश को प्राथमिकता दी है, इसलिए मैं लेबर पार्टी के नेता पद से इस्तीफा दे रहा हूं।”</p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;Keir Starmer:&lt;br&gt;&lt;br&gt;I will ask the National Executive Committee of the Labour Party to set out a timetable with nominations opening on the 9th of July and completed by the summer recess.&lt;br&gt;&lt;br&gt;In the case of a contest, this will ensure a new leader is in place before Parliament returns in… &lt;a href="https://t.co/kq1qnVf8Rt"&gt;pic.twitter.com/kq1qnVf8Rt&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Clash Report (@clashreport) &lt;a href="https://x.com/clashreport/status/2068977969138192446?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 22, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><p><b>ब्रिटेन के सम्राट राजा चार्ल्स तृतीय को दी फैसले की जानकारी</b></p><p><span style="font-size: 1rem;">प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने</span>&nbsp;बताया कि उन्होंने अपने फैसले की जानकारी ब्रिटेन के सम्राट राजा चार्ल्स तृतीय को दे दी है। साथ ही लेबर पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति (NEC) से नए नेता के चयन की प्रक्रिया शुरू करने का अनुरोध किया है ताकि सितंबर में संसद के अगले सत्र से पहले नया नेता चुना जा सके।</p><p><b>भावुक दिखे स्टारमर</b></p><p class="grey-bg-red"><b><i>भावुक होते हुए स्टारमर ने अपनी पत्नी विक्टोरिया स्टारमर का धन्यवाद किया और कहा, “जब मैं देश की सबसे बड़ी जिम्मेदारी छोड़ूंगा, तब मैं अपनी पत्नी विक के लिए बेहतर पति और अपने बच्चों के लिए बेहतर पिता बनने पर अधिक समय दूंगा।”&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">लेबर पार्टी ने नेतृत्व चुनाव का कार्यक्रम भी तय कर दिया है। उम्मीदवारों के नामांकन 9 जुलाई से शुरू होंगे और 16 जुलाई तक पूरे किए जाएंगे। यदि चुनाव की जरूरत पड़ी तो सितंबर में संसद के दोबारा शुरू होने से पहले नए नेता का चयन कर लिया जाएगा।</span></i></b></p><p><b>बढ़ रहा था पार्टी के भीतर दबाव</b><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p>पिछले कुछ महीनों से स्टारमर पर राजनीतिक दबाव लगातार बढ़ रहा था। हालात तब और बिगड़ गए जब लेबर नेता एंडी बर्नहैम ने हालिया उपचुनाव में जीत दर्ज की और संभावित उत्तराधिकारी के रूप में उभरकर सामने आए। स्थानीय चुनावों में लेबर पार्टी के खराब प्रदर्शन और कुछ विवादित नियुक्तियों ने भी स्टारमर की स्थिति कमजोर कर दी थी।</p><p>कई मंत्रियों, सांसदों, सलाहकारों, दानदाताओं और ट्रेड यूनियन नेताओं से चर्चा के बाद स्टारमर इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि उनके लिए पद पर बने रहना मुश्किल हो गया है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">गौरतलब है कि 2024 के आम चुनाव में लेबर पार्टी ने भारी बहुमत के साथ सत्ता हासिल की थी, लेकिन दो साल के भीतर ही पार्टी नेतृत्व संकट में घिर गई। स्टारमर के इस्तीफे के बाद ब्रिटेन एक बार फिर राजनीतिक अनिश्चितता के दौर में प्रवेश कर गया है।</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने दिया इस्तीफा, बोले- ‘देशहित में लिया फैसला’ ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/iran-ghadir-nezami-delhi-brics-nsa-meeting-5060 ]]></guid><title><![CDATA[ ब्रिक्स NSA बैठक में शामिल होने दिल्ली पहुंचे ईरान के सुरक्षा अधिकारी गदीर नेज़ामी ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/iran-ghadir-nezami-delhi-brics-nsa-meeting-5060 ]]></link><pubDate><![CDATA[Mon, 22 Jun 2026 12:10:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ नई दिल्ली: ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (Supreme National Security Council) के उप सचिव गदीर नेज़ामी सोमवार को राजधानी नई दिल्ली पहुंचे। वह 22-23 जून को आयोजित होने वाली ब्रिक्स (BRICS) राष ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>नई दिल्ली: </b>ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (Supreme National Security Council) के उप सचिव गदीर नेज़ामी सोमवार को राजधानी नई दिल्ली पहुंचे। वह 22-23 जून को आयोजित होने वाली ब्रिक्स (BRICS) राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (NSA) और सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुखों की बैठक में हिस्सा लेंगे।</span><span style="font-size: 1rem;">अपने दौरे के दौरान गदीर नेज़ामी विभिन्न सहभागी देशों के अधिकारियों के साथ बैठकें करेंगे और सुरक्षा संबंधी मुद्दों तथा बहुपक्षीय सहयोग पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे।</span></p><p>भारत स्थित ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, “इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के उप सचिव गदीर नेज़ामी 22 जून को नई दिल्ली पहुंचे हैं। वह ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों और सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुखों की बैठक में भाग लेंगे। अपने प्रवास के दौरान वह कई विशेष सत्रों में शामिल होंगे और विभिन्न देशों के अधिकारियों से सुरक्षा मुद्दों एवं बहुपक्षीय सहयोग पर चर्चा करेंगे।”</p><p><b>बैठक की अध्यक्षता NSA अजीत डोभाल करेंगे</b></p><p>भारत 22-23 जून 2026 को ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक की मेजबानी कर रहा है। विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, इस बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल करेंगे।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">विदेश मंत्रालय के मुताबिक, बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और प्रतिनिधिमंडल प्रमुख “आज की दुनिया के सामने मौजूद गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियां” विषय पर विचार-विमर्श करेंगे।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;His Excellency Ghadir Nezami, Deputy Secretary of the Supreme National Security Council of the Islamic Republic of Iran, arrived in New Delhi on Monday, June 22, to participate in the Meeting of &lt;a href="https://x.com/hashtag/BRICS?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#BRICS&lt;/a&gt; National Security Advisers and Heads of Security Agencies. During his visit,… &lt;a href="https://t.co/dI0lcmew1B"&gt;pic.twitter.com/dI0lcmew1B&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Iran in India (@Iran_in_India) &lt;a href="https://x.com/Iran_in_India/status/2068930148439912832?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 22, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p><b>बैठक में होगी कई अहम मुद्दों पर चर्चा</b></p><p>बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी तेजी से बदलती चुनौतियों, उभरते सुरक्षा खतरों में नई तकनीकों की भूमिका और वैश्विक सुरक्षा पर उनके प्रभाव पर भी चर्चा होगी।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">इसके अलावा प्रतिनिधिमंडल प्रमुख हाल ही में आयोजित ब्रिक्स संयुक्त कार्य समूहों की बैठकों, आतंकवाद-रोधी सहयोग और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) के सुरक्षित उपयोग के परिणामों की भी समीक्षा करेंगे।</span></p><p><b>भारत चौथी बार ब्रिक्स सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहा है</b></p><p class="blue-bg-white"><b><i>यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब भारत वर्ष 2026 में चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। इससे पहले भारत 2012, 2016 और 2021 में भी ब्रिक्स की अध्यक्षता कर चुका है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का विषय “बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी” रखा गया है। यह विषय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2025 के रियो शिखर सम्मेलन में प्रस्तुत ‘जन-केंद्रित और मानवता-प्रथम’ दृष्टिकोण को दर्शाता है।</span></i></b></p><p><span style="font-size: 1rem;"><b>दुनिया की 11 अर्थव्यवस्थाओं का एक मंच है ब्रिक्स समूह</b></span></p><p>ब्रिक्स समूह दुनिया की 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों, ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात को एक मंच पर लाता है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">यह संगठन वैश्विक और क्षेत्रीय महत्व के समकालीन मुद्दों, राजनीतिक एवं आर्थिक शासन, आतंकवाद-रोधी सहयोग, जलवायु परिवर्तन, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था, व्यापार, कृषि, श्रम और रोजगार जैसे विषयों पर सहयोग और संवाद का महत्वपूर्ण मंच माना जाता है।</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ ब्रिक्स NSA बैठक में शामिल होने दिल्ली पहुंचे ईरान के सुरक्षा अधिकारी गदीर नेज़ामी ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/international-yoga-day-pokhara-nepal-5052 ]]></guid><title><![CDATA[ 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर नेपाल में दिखा उत्साह, हजारों योग साधकों ने लिया हिस्सा ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/international-yoga-day-pokhara-nepal-5052 ]]></link><pubDate><![CDATA[Sun, 21 Jun 2026 13:30:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ पोखरा, नेपाल: 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर रविवार को नेपाल के पोखरा स्टेडियम में हजारों योग प्रेमी एकत्र हुए और "स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग" थीम के तहत विभिन्न योगासन किए। हर वर्ष 21 जून ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>पोखरा, नेपाल:</b> 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर रविवार को नेपाल के पोखरा स्टेडियम में हजारों योग प्रेमी एकत्र हुए और <b>"स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग"</b> थीम के तहत विभिन्न योगासन किए। हर वर्ष 21 जून को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस योग के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक लाभों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित किया जाता है।</span></p><p>गंडकी प्रांत के मुख्यमंत्री सुरेन्द्र राज पांडे ने मीडिया से बातचीत में कहा, "संयुक्त राष्ट्र ने भी 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मान्यता दी है। नेपाल में भारतीय दूतावास हर वर्ष पोखरा में इस कार्यक्रम का आयोजन करता है। मैं लगातार चौथी बार इसमें भाग ले रहा हूं।"</p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;Pokhara, Nepal: Surendra Raj Pandey, Chief Minister of Gandaki Province says, &amp;quot;The United Nations also has endorsed the 21 June as the International Yoga Day. The Indian Embassy in Nepal has been organizing the event in Pokhara every year has been organizing event at the Pokhara… &lt;a href="https://t.co/1nONvqasrW"&gt;https://t.co/1nONvqasrW&lt;/a&gt; &lt;a href="https://t.co/cT22333OXo"&gt;pic.twitter.com/cT22333OXo&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; ANI (@ANI) &lt;a href="https://x.com/ANI/status/2068574360286417067?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 21, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><p><b>21 जून अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित</b></p><p>संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्ताव के बाद 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया था। पहला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 21 जून 2015 को मनाया गया था।</p><p>नेपाल उन देशों में शामिल था जिसने शुरुआत से ही इस प्रस्ताव का समर्थन किया। तत्कालीन प्रधानमंत्री सुशील कोइराला ने इस पहल का समर्थन किया था। बाद में यूरोपीय संघ और अन्य सदस्य देशों ने भी इसका समर्थन किया। यह प्रस्ताव महज 90 दिनों में 177 देशों के समर्थन के साथ संयुक्त राष्ट्र का रिकॉर्ड बना।</p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;To celebrate the 12th edition of the International Day of Yoga, the Embassy of India in Nepal &lt;a href="https://x.com/IndiaInNepal?ref_src=twsrc^tfw"&gt;@IndiaInNepal&lt;/a&gt; organized a Yoga demonstration on the banks of scenic Phewa Lake in Pokhara today.&lt;br&gt;&lt;br&gt;The event witnessed enthusiastic participation from the local community, representatives… &lt;a href="https://t.co/v0tE4EHc2K"&gt;pic.twitter.com/v0tE4EHc2K&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; IndiaInNepal (@IndiaInNepal) &lt;a href="https://x.com/IndiaInNepal/status/2068330758016471060?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 20, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><p><b>नेपाल में योग की परंपरा&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">पीढ़ियों से</span><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;है</span></b></p><p>नेपाल में योग की परंपरा काफी पुरानी रही है। विक्रम संवत 2036 से माघ 1 को विश्व योग दिवस के रूप में मनाया जाता रहा है। योग प्रचारक हरि प्रसाद पोखरेल और योग से जुड़ी विभिन्न संस्थाओं की पहल पर इसकी शुरुआत हुई थी।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">योग और प्राकृतिक चिकित्सा की शिक्षा वर्तमान में नेपाल संस्कृत विश्वविद्यालय में दी जाती है, जबकि त्रिभुवन विश्वविद्यालय ने भी संस्कृत विभाग के अंतर्गत योग अध्ययन शुरू किया है।</span></p><p><b>'हिमालय, पहाड़ी क्षेत्र योग साधना के लिए बेहद उपयुक्त'</b><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p>मुख्यमंत्री सुरेन्द्र राज पांडे ने कहा कि हिमालय और पहाड़ी क्षेत्र योग साधना के लिए बेहद उपयुक्त हैं। ऋषि-मुनि भी हिमालय की तलहटी में ध्यान करते थे और यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय दूतावास द्वारा आयोजित ऐसे कार्यक्रम भारत और नेपाल के बीच जन-जन के संबंधों को और मजबूत करते हैं।</p><p>उन्होंने कहा, "आज की भागदौड़ और तनावपूर्ण जीवनशैली में यदि हम थोड़ा समय योग के लिए निकालें तो जीवन तनावमुक्त बन सकता है। पोखरा में ऐसे कार्यक्रम आगे भी जारी रहने चाहिए।"</p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;&lt;a href="https://x.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#WATCH&lt;/a&gt; | Nepal: Thousands of Yoga enthusiasts converge in Pokhara Stadium observing International Yoga Day under the theme &amp;#39;Yoga for Healthy Ageing.&amp;#39; &lt;a href="https://t.co/iHMoSjBVT4"&gt;pic.twitter.com/iHMoSjBVT4&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; ANI (@ANI) &lt;a href="https://x.com/ANI/status/2068572036495253996?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 21, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><p><b>नेपाल के राष्ट्रपति ने दी लोगों को योग दिवस की शुभकामनाएँ</b></p><p>नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने भी लोगों से योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि योग शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।</p><p>अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर अपने संदेश में राष्ट्रपति ने देश और विदेश में रह रहे सभी नेपाली नागरिकों को सुख, शांति, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि विभिन्न शोध और ऐतिहासिक प्रमाण नेपाल की समृद्ध योग परंपरा को दर्शाते हैं और इसे राष्ट्रीय नीतियों, शिक्षा व्यवस्था तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में और अधिक शामिल किया जाना चाहिए।</p><p><b>'नियमित योगाभ्यास से कार्यक्षमता बढ़ती है'</b></p><p>राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि नियमित योगाभ्यास से कार्यक्षमता बढ़ती है, रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है, पाचन तंत्र बेहतर होता है और सकारात्मक सोच विकसित होती है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">वहीं, उपराष्ट्रपति राम सहाय प्रसाद यादव ने कहा कि नियमित योगाभ्यास न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, बल्कि मानसिक शांति, सकारात्मक सोच और आध्यात्मिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर नेपाल में दिखा उत्साह, हजारों योग साधकों ने लिया हिस्सा ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/us-iran-switzerland-talks-israel-hezbollah-conflict-5049 ]]></guid><title><![CDATA[ स्विट्जरलैंड में अमेरिका-ईरान वार्ता शुरू, इजरायल-हिजबुल्लाह तनाव पर फोकस ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/us-iran-switzerland-talks-israel-hezbollah-conflict-5049 ]]></link><pubDate><![CDATA[Sun, 21 Jun 2026 11:30:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ जिनेवा, स्विट्जरलैंड: पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने के उद्देश्य से स्विट्जरलैंड में शुरू हुई अमेरिका और ईरान के बीच महत्वपूर्ण वार्ता के पहले ही दिन इजरायल-हिजबुल्लाह संघर्ष सबसे प्रमुख मुद्दा ब ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>जिनेवा, स्विट्जरलैंड: </b>पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने के उद्देश्य से स्विट्जरलैंड में शुरू हुई अमेरिका और ईरान के बीच महत्वपूर्ण वार्ता के पहले ही दिन इजरायल-हिजबुल्लाह संघर्ष सबसे प्रमुख मुद्दा बनकर उभरा है। वार्ता में शामिल एक राजनयिक के अनुसार, दोनों पक्षों ने इस विषय पर चर्चा के लिए एक विशेष आपातकालीन सत्र शामिल किया है।</span></p><p>रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडलों के बीच होने वाली पहली औपचारिक बैठक में लेबनान आधारित संगठन हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच जारी संघर्ष पर चर्चा की जाएगी। यह घटनाक्रम अमेरिकी रणनीति में बदलाव का संकेत माना जा रहा है, क्योंकि इस मुद्दे को पहले सीधे तौर पर वार्ता का हिस्सा नहीं बनाया गया था।</p><p><b>स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर मतभेद</b></p><p>इस बीच, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भी दोनों देशों के बीच मतभेद सामने आए हैं। ईरान का दावा है कि इजरायल द्वारा कथित युद्धविराम उल्लंघनों और लेबनान पर हमलों के जवाब में उसने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर नियंत्रण स्थापित कर लिया है। दूसरी ओर, अमेरिका ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि ईरान का ऐसा कोई नियंत्रण नहीं है।</p><p><b>तेल व्यापार के लिए&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बेहद अहम</span></b></p><p class="grey-bg-red"><b><i>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि अंतिम समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका इस महत्वपूर्ण शिपिंग रूट पर अपने स्तर पर टोल लगाने जैसे कदम उठा सकता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज विश्व के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है और यहां किसी भी प्रकार का तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकता है।</i></b></p><p><b>अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस वार्ता के लिए रवाना</b></p><p>अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शनिवार को स्विट्जरलैंड के लिए रवाना हो गए, जबकि ईरानी प्रतिनिधिमंडल पहले ही वहां पहुंच चुका है। स्विस विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से ईरानी प्रतिनिधिमंडल के आगमन की पुष्टि की।</p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;We welcome the arrival of the Iranian delegation in &lt;a href="https://x.com/hashtag/Switzerland?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#Switzerland&lt;/a&gt;.&lt;br&gt;&lt;br&gt;The Iranian delegation is on its way to the Bürgenstock as part of the implementation of the MoU signed between the &lt;a href="https://x.com/hashtag/UnitedStates?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#UnitedStates&lt;/a&gt; and &lt;a href="https://x.com/hashtag/Iran?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#Iran&lt;/a&gt;. &lt;a href="https://t.co/5USLCr0h4H"&gt;pic.twitter.com/5USLCr0h4H&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Swiss MFA (@SwissMFA) &lt;a href="https://x.com/SwissMFA/status/2068431300373962786?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 20, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><p><b>पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका में है</b></p><p>इन वार्ताओं में कतर और पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। हालांकि, इजरायल, हिजबुल्लाह और लेबनान की सरकार सीधे तौर पर इन वार्ताओं का हिस्सा नहीं हैं। इसके बावजूद, क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को लेकर इन संगठनों से जुड़े मुद्दे चर्चा के केंद्र में बने हुए हैं।</p><p><b>'शहीदों और नागरिकों की अपेक्षाएं करेंगी मार्गदर्शन'</b></p><p>वार्ता शुरू होने से पहले ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने मिनाब स्कूल घटना के पीड़ितों को याद करते हुए कहा कि उनकी कुर्बानी ईरान के प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के दौरान देश के हितों की रक्षा के लिए प्रेरित करेगी। उन्होंने कहा कि ईरान के शहीदों और नागरिकों की अपेक्षाएं उनके हर कदम का मार्गदर्शन करेंगी।</p><p>विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्विट्जरलैंड में चल रही यह वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है, तो इससे न केवल अमेरिका और ईरान के संबंधों में सुधार हो सकता है, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया में स्थिरता स्थापित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।</p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="fa" dir="rtl"&gt;کودکان مظلوم میناب و تمام شهدای ایران عزیز را هر لحظه ناظر اعمال و رفتار خود می‌دانم. آنها ما را می‌بینند و از ما انتظار دارند. &lt;br&gt;خدا کند که شرمندهٔ شهدای مظلوم و ملت ایران نباشم و روسفید به یارانم بپیوندم که برای دیدنشان لحظه‌شماری می‌کنم.&lt;br&gt;&lt;br&gt; &lt;a href="https://x.com/hashtag/Minab168?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#Minab168&lt;/a&gt;&lt;br&gt;به یاد بچه‌های مدرسهٔ میناب &lt;a href="https://t.co/UDvZJOyJo2"&gt;pic.twitter.com/UDvZJOyJo2&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; محمدباقر قالیباف | MB Ghalibaf (@mb_ghalibaf) &lt;a href="https://x.com/mb_ghalibaf/status/2068440513104040140?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 20, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ स्विट्जरलैंड में अमेरिका-ईरान वार्ता शुरू, इजरायल-हिजबुल्लाह तनाव पर फोकस ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/israel-strikes-lebanon-five-killed-peace-deal-under-pressure-5042 ]]></guid><title><![CDATA[ लेबनान में फिर भड़की हिंसा, इजरायली हमलों में 5 लोगों की मौत ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/israel-strikes-lebanon-five-killed-peace-deal-under-pressure-5042 ]]></link><pubDate><![CDATA[Sat, 20 Jun 2026 14:30:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ बेरूत, ईरान: ईरान और अमरीका के बीच हाल ही में हुए शांति समझौते (MoU) के बावजूद मध्य पूर्व में तनाव कम होता नहीं दिख रहा है। दक्षिण लेबनान में शनिवार को हुए ताजा इजरायली हवाई हमलों में कम से कम पांच लो ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>बेरूत, ईरान:</b> ईरान और अमरीका के बीच हाल ही में हुए शांति समझौते (MoU) के बावजूद मध्य पूर्व में तनाव कम होता नहीं दिख रहा है। दक्षिण लेबनान में शनिवार को हुए ताजा इजरायली हवाई हमलों में कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई, जिनमें एक लेबनानी सैनिक और दो नाबालिग बच्चे भी शामिल हैं। लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी नेशनल न्यूज एजेंसी (NNA) ने यह जानकारी दी।</span></p><p>रिपोर्ट के अनुसार, कफररेमान चौराहे पर हुए एक हवाई हमले में लेबनानी सेना का एक जवान मारा गया। वहीं बारिश कस्बे में एक ही परिवार के चार सदस्य जिनमें माता, पिता और उनके दो बच्चों शामिल थे उनकी मौत हो गई।</p><p><b>कई इलाकों में लगातार हमले</b></p><p>NNA के मुताबिक, सोहमुर के केंद्रीय इलाके में भी हवाई हमला हुआ, जिसमें कई लोग घायल हुए। इसके अलावा कतरानी के शिब्ल क्षेत्र और जेज़ीन इलाके को भी निशाना बनाया गया।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">रिपोर्ट में कहा गया है कि बेरूत के उपनगरों के ऊपर कम ऊंचाई पर ड्रोन उड़ते देखे गए, जबकि हिमा लबाया क्षेत्र पर तीन हवाई हमले किए गए।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;At least five people have been killed in Israeli air strikes and drone attacks in southern Lebanon, Lebanese state media reports, just hours after a ceasefire between Israel and the Iran-backed Hezbollah group has taken effect.&lt;a href="https://t.co/mwO7fQA0yR"&gt;https://t.co/mwO7fQA0yR&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Al Arabiya English (@AlArabiya_Eng) &lt;a href="https://x.com/AlArabiya_Eng/status/2068210475070792113?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 20, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p><b>मलबे में फंसे लोगों की तलाश जारी</b></p><p>लेबनानी एजेंसी के अनुसार, हालिया हमलों से पहले कफररेमान, हब्बूश, नबातियेह अल-फौका, चौकीन, ज़ेबदीन और कफरजौज़ सहित कई कस्बों पर हमले किए गए थे। नबातियेह शहर में भी तीव्र हवाई कार्रवाई की गई।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">घटनास्थलों पर सिविल डिफेंस टीमों और राहतकर्मियों द्वारा बचाव अभियान चलाया जा रहा है। आशंका है कि कई लोग अब भी मलबे के नीचे दबे हो सकते हैं।</span></p><p><b>इजरायली सेना की ओर से कोई टिप्पणी नहीं</b></p><p>इजरायली समाचार पत्र जेरूसलम पोस्ट के अनुसार, लेबनान में हुए ताजा हमलों पर अभी तक इजरायल रक्षा बल (IDF) की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच हुए 14 सूत्रीय समझौते में लेबनान सहित क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां रोकने और 60 दिनों के भीतर स्थायी समझौते की दिशा में बातचीत आगे बढ़ाने का प्रावधान शामिल है। ऐसे में लेबनान में जारी हमले इस प्रक्रिया को जटिल बना सकते हैं।</span></p><p><b>इजरायली मंत्री के बयान पर विवाद</b></p><p>इस बीच इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर ने सोशल मीडिया मंच X पर एक विवादास्पद पोस्ट करते हुए लेबनान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई तेज करने की वकालत की।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने लिखा, "हर इजरायली मां के आंसू के बदले हजार लेबनानी माताएं रोनी चाहिए। पूरा लेबनान जलना चाहिए।"&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">बेन-गवीर के इस बयान की विभिन्न स्तरों पर आलोचना हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि इजरायल की पहली जिम्मेदारी अपने नागरिकों और सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है और इसके लिए कठोर कदम उठाने से पीछे नहीं हटना चाहिए।</span></p><p><b>क्षेत्र में बढ़ी अनिश्चितता</b></p><p>विश्लेषकों का मानना है कि ईरान-अमेरिका समझौते के बाद शांति की जो उम्मीद जगी थी, वह लेबनान में जारी हिंसा के कारण कमजोर पड़ सकती है। आने वाले दिनों में क्षेत्रीय कूटनीति और सुरक्षा हालात पर दुनिया की नजरें टिकी रहेंगी।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ लेबनान में फिर भड़की हिंसा, इजरायली हमलों में 5 लोगों की मौत ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/palestine-urges-pm-modi-to-mediate-after-us-iran-peace-deal-5032 ]]></guid><title><![CDATA[ ‘भारत ही कर सकता है यह अहम काम’, फिलिस्तीनी राजदूत ने पीएम मोदी से लगाई उम्मीद ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/palestine-urges-pm-modi-to-mediate-after-us-iran-peace-deal-5032 ]]></link><pubDate><![CDATA[Fri, 19 Jun 2026 15:51:36 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ नई दिल्ली: अमरीका और ईरान के बीच हुए ऐतिहासिक शांति समझौते (MoU) के बाद पश्चिम एशिया में कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी बीच भारत में फिलिस्तीन के राजदूत अब्दुल्ला एम. अबू शवेश (Abdullah M. Abu ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>नई दिल्ली:</b> अमरीका और ईरान के बीच हुए ऐतिहासिक शांति समझौते (MoU) के बाद पश्चिम एशिया में कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी बीच भारत में फिलिस्तीन के राजदूत अब्दुल्ला एम. अबू शवेश (</span>Abdullah M. Abu Shawesh<span style="font-size: 1rem;">) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से क्षेत्र में शांति और स्थिरता स्थापित करने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाने की अपील की है।</span></p><p>मीडिया को दिए एक विशेष साक्षात्कार में फिलिस्तीनी राजदूत ने कहा कि शांति समझौते को किसी की हार या जीत के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने कहा, <b>“जब शांति होती है तो कोई हारता नहीं है। शांति में सभी की जीत होती है। केवल वे कट्टरपंथी ताकतें इससे खुश नहीं होतीं जो संघर्ष और युद्ध को ही अपना लाभ मानती हैं।”</b></span></p><p><b>‘भारत ही निभा सकता है यह महत्वपूर्ण भूमिका’</b></p><p>राजदूत अबू शवेश ने भारत की वैश्विक स्थिति और लोकतांत्रिक ताकत का उल्लेख करते हुए कहा कि क्षेत्र में शांति स्थापित करने में भारत की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने कहा, “अगर भारत यह परिष्कृत और महत्वपूर्ण भूमिका नहीं निभा सकता, तो फिर कौन निभा सकता है? 1.4 अरब लोगों वाला भारत दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक शक्तियों में से एक है और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।”&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत पश्चिम एशिया में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;&lt;a href="https://x.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#WATCH&lt;/a&gt; | Delhi | On India’s position on Palestine, Palestinian Ambassador to India Abdullah M. Abu Shawesh says, “... In 1947, under the leadership of Mahatma Gandhi, India voted against the Partition Plan for Palestine, and he made his position very clear. Palestinians belong to… &lt;a href="https://t.co/ZRs2DKtVXu"&gt;pic.twitter.com/ZRs2DKtVXu&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; ANI (@ANI) &lt;a href="https://x.com/ANI/status/2067540638313398704?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 18, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p><b>‘शांति सभी के हित में’</b></p><p>फिलिस्तीनी राजदूत ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच हुआ समझौता क्षेत्र में तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने उन राजनीतिक ताकतों की आलोचना भी की जो इस समझौते को किसी पक्ष की हार या रणनीतिक नुकसान के रूप में देख रही हैं।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उनका कहना था कि शांति और स्थिरता पूरे क्षेत्र के लोगों के हित में है और इसे राजनीतिक लाभ-हानि के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।</span></p><p><b>गाजा में जारी है हिंसा</b></p><p>हालांकि अमेरिका-ईरान समझौते के बावजूद गाजा पट्टी में हिंसा थमती नजर नहीं आ रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दक्षिणी गाजा के खान यूनिस इलाके में एक तंबू के पास हुए इजरायली हवाई हमले में कम से कम एक व्यक्ति घायल हो गया।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">इसके अलावा खान यूनिस, दैर अल-बलह और बुरेज शरणार्थी शिविर के आसपास भी गोलीबारी और सैन्य कार्रवाई की खबरें सामने आई हैं। हालांकि कुछ घटनाओं में किसी के घायल होने की सूचना नहीं मिली है।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;&lt;a href="https://x.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#WATCH&lt;/a&gt; | Delhi | On President Trump&amp;#39;s plan for Gaza conflict, Palestinian Ambassador to India Abdullah M. Abu Shawesh says, “He only presented a comprehensive plan for ending the conflict in Gaza, which is not a peace plan at all... We cannot talk about peace plan and peace board… &lt;a href="https://t.co/aHhjyzAenw"&gt;pic.twitter.com/aHhjyzAenw&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; ANI (@ANI) &lt;a href="https://x.com/ANI/status/2067535319780790779?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 18, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p><b>भारत की भूमिका पर बढ़ी नजरें</b></p><p>अमरीका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद पश्चिम एशिया में नए कूटनीतिक समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में फिलिस्तीन द्वारा भारत से मध्यस्थता की अपील को क्षेत्रीय शांति प्रयासों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के दोनों पक्षों के साथ संतुलित संबंध और उसकी बढ़ती वैश्विक साख उसे भविष्य की किसी भी शांति पहल में अहम भूमिका निभाने का अवसर दे सकती है।</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ ‘भारत ही कर सकता है यह अहम काम’, फिलिस्तीनी राजदूत ने पीएम मोदी से लगाई उम्मीद ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/pm-modi-returns-delhi-after-france-slovakia-visit-5028 ]]></guid><title><![CDATA[ फ्रांस-स्लोवाकिया दौरे से लौटे पीएम मोदी, नवाचार और रणनीतिक साझेदारी पर रहा फोकस ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/pm-modi-returns-delhi-after-france-slovakia-visit-5028 ]]></link><pubDate><![CDATA[Fri, 19 Jun 2026 13:40:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को फ्रांस और स्लोवाकिया की अपनी दो देशों की यात्रा पूरी कर स्वदेश लौट आए। इस दौरे के दौरान उन्होंने नवाचार, प्रौद्योगिकी, आर्थिक सहयोग और रणनीतिक साझेदारी ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>नई दिल्ली:</b> प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को फ्रांस और स्लोवाकिया की अपनी दो देशों की यात्रा पूरी कर स्वदेश लौट आए। इस दौरे के दौरान उन्होंने नवाचार, प्रौद्योगिकी, आर्थिक सहयोग और रणनीतिक साझेदारी से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों और बैठकों में हिस्सा लिया।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">विदेश मंत्रालय ने प्रधानमंत्री के पेरिस से रवाना होने की जानकारी देते हुए कहा कि इस यात्रा ने भारत और फ्रांस के बीच विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को नई ऊर्जा और दिशा प्रदान की है।</span></p><p>विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, “धन्यवाद फ्रांस! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्यापक और सफल फ्रांस यात्रा संपन्न की। इस दौरे ने भारत-फ्रांस विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को नई गति दी और विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की साझा प्रतिबद्धता को मजबूत किया।”</p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;Merci France!&lt;br&gt;&lt;br&gt;PM &lt;a href="https://x.com/narendramodi?ref_src=twsrc^tfw"&gt;@narendramodi&lt;/a&gt; wrapped up a productive visit to France, marked by wide-ranging engagements.&lt;br&gt; &lt;br&gt;The visit added fresh momentum to the India-France Special Global Strategic Partnership and reinforced the shared commitment to advancing cooperation across key sectors. &lt;a href="https://t.co/QHm2zXjCPR"&gt;pic.twitter.com/QHm2zXjCPR&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Randhir Jaiswal (@MEAIndia) &lt;a href="https://x.com/MEAIndia/status/2067685671968624697?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 18, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><p><b>परिणाम और संवाद दोनों दृष्टि से सफल रहा दौरा-&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">पीएम मोदी</span></b></p><p>प्रधानमंत्री मोदी ने भी अपनी यात्रा को लेकर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह दौरा संवाद और उपलब्धियों, दोनों दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण रहा।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने एक्स पर लिखा, “फ्रांस की यह यात्रा सहभागिता और परिणामों के लिहाज से व्यापक रही। इसकी शुरुआत नीस में आयोजित ‘भारत इनोवेट्स’ कार्यक्रम से हुई, जिसके बाद मैं G7 शिखर सम्मेलन के लिए एवियन गया। पेरिस में विवाटेक 2026, भारतीय समुदाय के कार्यक्रम और विभिन्न उद्योग जगत के प्रमुखों से मुलाकात भी इस यात्रा का हिस्सा रही।”</span></p><p>प्रधानमंत्री ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, फ्रांसीसी सरकार और वहां के लोगों द्वारा दिए गए गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में भारत और फ्रांस की मित्रता और अधिक मजबूत होगी।</p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;This visit to France has been extensive when it comes to engagement and outcomes. It began in Nice, where the Bharat Innovates programme was held, followed by Evian for G7 and then in Paris, where I addressed VivaTech 2026 and a large community programme, as well as met CEOs. &lt;br&gt;&lt;br&gt;I…&lt;/p&gt;&amp;mdash; Narendra Modi (@narendramodi) &lt;a href="https://x.com/narendramodi/status/2067664207852798191?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 18, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><p><b>विवाटेक 2026 में दिखी भारत की तकनीकी ताकत</b></p><p>पेरिस में आयोजित विवाटेक 2026 कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की डिजिटल क्रांति, स्टार्टअप इकोसिस्टम और नवाचार के क्षेत्र में हुई प्रगति को दुनिया के सामने रखा।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि भारत तकनीक का उपयोग केवल आर्थिक विकास के लिए नहीं, बल्कि आम नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए भी कर रहा है। उन्होंने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, स्टार्टअप संस्कृति और नवाचार आधारित विकास मॉडल पर भारत की उपलब्धियों को रेखांकित किया।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;Glad to have addressed VivaTech 2026 in Paris. Talked about India’s remarkable strides in tech, innovation and StartUps. Highlighted how India is using tech to bring a positive difference in people’s lives.&lt;a href="https://x.com/VivaTech?ref_src=twsrc^tfw"&gt;@VivaTech&lt;/a&gt; &lt;a href="https://t.co/Y06bIteiur"&gt;pic.twitter.com/Y06bIteiur&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Narendra Modi (@narendramodi) &lt;a href="https://x.com/narendramodi/status/2067624390498631991?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 18, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p><b>G-7 सम्मेलन में वैश्विक मुद्दों पर चर्चा</b></p><p>फ्रांस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने एवियन में आयोजित G-7 शिखर सम्मेलन में भी हिस्सा लिया। इस दौरान वैश्विक शासन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सतत विकास और ग्लोबल साउथ से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री का यह दौरा भारत की वैश्विक भूमिका को और मजबूत करने के साथ-साथ यूरोप के प्रमुख देशों के साथ रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी सहयोग को नई दिशा देने वाला साबित होगा।</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ फ्रांस-स्लोवाकिया दौरे से लौटे पीएम मोदी, नवाचार और रणनीतिक साझेदारी पर रहा फोकस ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/israel-strikes-lebanon-16-killed-iran-us-talks-postponed-5027 ]]></guid><title><![CDATA[ लेबनान पर इजरायल के हवाई हमले, 16 की मौत; ईरान-अमेरिका वार्ता भी टली ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/israel-strikes-lebanon-16-killed-iran-us-talks-postponed-5027 ]]></link><pubDate><![CDATA[Fri, 19 Jun 2026 12:24:43 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ तेल अवीव, तेहरान: पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। इजरायल रक्षा बल (IDF) ने शुक्रवार को लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हवाई हमले किए, जिनमें कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य  ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>तेल अवीव, तेहरान:</b> पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। इजरायल रक्षा बल (IDF) ने शुक्रवार को लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हवाई हमले किए, जिनमें कम से कम <b>16 लोगों की मौत हो गई </b>और कई अन्य घायल हो गए। वहीं दूसरी ओर, ईरान और अमरीका के बीच प्रस्तावित वार्ता भी फिलहाल टाल दी गई है, जिससे क्षेत्र में शांति प्रयासों को झटका लगा है।</span></p><p>अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में रातभर कई हमले किए। इजरायली सेना का कहना है कि यह कार्रवाई हिजबुल्लाह द्वारा संघर्षविराम के बार-बार उल्लंघन के जवाब में की गई है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">गौरतलब है कि हालिया ईरान-</span>अमरीका<span style="font-size: 1rem;">&nbsp;समझौते में इजरायल और लेबनान के बीच शत्रुता समाप्त करने की बात कही गई थी, लेकिन इसके बावजूद हमले जारी हैं।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;16 killed in Israeli strikes in southern Lebanon. &lt;a href="https://t.co/irKcK4xsJQ"&gt;pic.twitter.com/irKcK4xsJQ&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Clash Report (@clashreport) &lt;a href="https://x.com/clashreport/status/2067855063406567878?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 19, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;UPDATE: Israeli military says it &amp;#39;continues to strike Hezbollah&amp;#39; in southern Lebanon&lt;br&gt;&lt;br&gt;🔴 LIVE updates: &lt;a href="https://t.co/FNulMQtSCf"&gt;https://t.co/FNulMQtSCf&lt;/a&gt; &lt;a href="https://t.co/6DHavPDbI9"&gt;pic.twitter.com/6DHavPDbI9&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Al Jazeera Breaking News (@AJENews) &lt;a href="https://x.com/AJENews/status/2067850000118284732?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 19, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><p><b>ईरान-अमरीका वार्ता स्थगित</b></p><p>इस बीच स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि अमेरिका, ईरान, कतर और पाकिस्तान के बीच प्रस्तावित वार्ता को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">विदेश मंत्रालय ने कहा कि स्विट्जरलैंड इन वार्ताओं को सुगम बनाने के लिए तैयार है और बर्गेनस्टॉक में तैयारियों का काम जारी है। हालांकि, फिलहाल वार्ता की नई तारीख को लेकर कोई जानकारी नहीं दी गई है।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;&lt;a href="https://x.com/hashtag/BREAKING?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#BREAKING&lt;/a&gt;: US-Iran talks at Bürgenstock will not take place as planned on Friday – Swiss Foreign Ministry &lt;a href="https://t.co/flsjm7l3wN"&gt;pic.twitter.com/flsjm7l3wN&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; TRT World Now (@TRTWorldNow) &lt;a href="https://x.com/TRTWorldNow/status/2067826214258016442?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 19, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p><b>जेडी वेंस की स्विट्जरलैंड यात्रा भी टली</b></p><p>व्हाइट हाउस के एक प्रवक्ता ने बताया कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस फिलहाल स्विट्जरलैंड नहीं जा रहे हैं क्योंकि तकनीकी वार्ताओं की योजना अभी अंतिम रूप नहीं ले पाई है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल तैयार है और जैसे ही परिस्थितियां अनुकूल होंगी, वह वार्ता के लिए रवाना हो सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि इस तरह की बातचीत की प्रक्रिया अक्सर जटिल और अप्रत्याशित होती है।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;US-Iran talks planned for June 19 at the Burgenstock mountaintop resort in Switzerland will not take place, according to a Swiss foreign ministry statement after US Vice President JD Vance pulled out of the planned trip &lt;a href="https://t.co/e3puWa3aqp"&gt;https://t.co/e3puWa3aqp&lt;/a&gt; &lt;a href="https://t.co/oMaVOstPvF"&gt;pic.twitter.com/oMaVOstPvF&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Reuters (@Reuters) &lt;a href="https://x.com/Reuters/status/2067842635495288913?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 19, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p><b>ईरान की चेतावनी</b></p><p>उधर तेहरान में ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिवालय ने स्पष्ट किया है कि यदि समझौते का कोई पक्ष उल्लंघन करता है, तो उसका जवाब पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार दिया जाएगा।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">ईरानी समाचार एजेंसी आईएसएनए के अनुसार, परिषद ने कहा कि अमेरिका पर पूरा भरोसा नहीं किया जा सकता और समझौते के क्रियान्वयन की बारीकी से निगरानी की जाएगी। यदि अमेरिकी पक्ष किसी भी तरह का उल्लंघन करता है तो ईरान उचित जवाबी कदम उठाएगा।</span></p><p><b>क्षेत्रीय शांति पर सवाल</b></p><p>विशेषज्ञों का मानना है कि लेबनान में जारी सैन्य कार्रवाई और ईरान-अमेरिका वार्ता के स्थगित होने से पश्चिम एशिया में स्थायी शांति की संभावनाओं पर प्रश्नचिह्न लग गया है। आने वाले दिनों में दोनों घटनाक्रम क्षेत्रीय राजनीति और सुरक्षा पर बड़ा असर डाल सकते हैं।</p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;Lebanon’s National News Agency (NNA) confirms Israeli airstrikes and artillery pounded the Nabatieh region of southern Lebanon overnight into Friday in one of the heaviest assaults of the recent offensive.&lt;br&gt;&lt;br&gt;The official news agency confirms Israel has killed at least 16 people…&lt;/p&gt;&amp;mdash; Drop Site (@DropSiteNews) &lt;a href="https://x.com/DropSiteNews/status/2067853425967030288?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 19, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><div><br></div> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ लेबनान पर इजरायल के हवाई हमले, 16 की मौत; ईरान-अमेरिका वार्ता भी टली ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/raja-krishnamoorthi-condemns-go-back-to-india-chants-5026 ]]></guid><title><![CDATA[ 'Go back to India' नारों की अमेरिकी सांसद ने की निंदा, बोले- 'किसी के खिलाफ नफरत स्वीकार नहीं' ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/raja-krishnamoorthi-condemns-go-back-to-india-chants-5026 ]]></link><pubDate><![CDATA[Fri, 19 Jun 2026 11:58:44 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ वॉशिंगटन डीसी: अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने टेक्सास (Texas) के एक सिटी हॉल के बाहर लगाए गए नस्लीय और श्वेत वर्चस्ववादी नारों की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि किसी भी समुदाय के खिलाफ नफरत और भेदभा ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>वॉशिंगटन डीसी: </b>अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने टेक्सास (</span>Texas<span style="font-size: 1rem;">) के एक सिटी हॉल के बाहर लगाए गए नस्लीय और श्वेत वर्चस्ववादी नारों की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि किसी भी समुदाय के खिलाफ नफरत और भेदभाव का&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">अमरीका</span><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;में कोई स्थान नहीं है।&nbsp;डेमोक्रेट सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि कुछ सप्ताह पहले टेक्सास के एक सिटी हॉल के बाहर श्वेत वर्चस्ववादियों ने <b>'</b></span><b style="font-size: 1rem;">Go back to India'</b><span style="font-size: 1rem;"><b>&nbsp;</b>(भारत वापस जाओ) और <b>'</b></span><b style="font-size: 1rem;">You will not replace us'</b><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;(तुम हमारी जगह नहीं ले सकते) जैसे नारे लगाए थे।</span></p><p>उन्होंने कहा, “चाहे यह नफरत हिंदुओं, मुसलमानों, यहूदियों या किसी अन्य समुदाय के खिलाफ हो, अमरीका में इसकी कोई जगह नहीं है। हमें कट्टरता, पूर्वाग्रह और भेदभाव के खिलाफ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा होना होगा।”</p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;“Go back to India.” “You will not replace us.”&lt;br&gt;Those were the chants of white supremacists outside a Texas city hall just weeks ago. Whether directed at Hindus, Muslims, Jews, or any other community, hate has no place in America. We must stand shoulder-to-shoulder against… &lt;a href="https://t.co/gSm3QWjFWj"&gt;pic.twitter.com/gSm3QWjFWj&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Congressman Raja Krishnamoorthi (@CongressmanRaja) &lt;a href="https://x.com/CongressmanRaja/status/2067718305155056106?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 18, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><p><b>भारतीयों के खिलाफ नस्लीय टिप्पणियों पर पहले भी उठे सवाल</b></p><p>अमरीका में भारतीय समुदाय को लेकर नस्लीय टिप्पणियों का मुद्दा पहले भी चर्चा में रहा है। मई में भारत दौरे के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी इस विषय पर प्रतिक्रिया दी थी।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में रुबियो ने कहा था कि भारतीयों के खिलाफ नस्लीय टिप्पणियां करने वाले लोग <b>“मूर्खतापूर्ण बातें” </b>करते हैं और ऐसे बयान अमरीका के मूल्यों का प्रतिनिधित्व नहीं करते।</span></p><p><b>‘कुछ लोग सोशल मीडिया पर बेवकूफी भरी बातें करते हैं’</b></p><p>मार्को रुबियो ने बाद में अपने बयान को स्पष्ट करते हुए कहा था कि वह मुख्य रूप से सोशल मीडिया पर की जाने वाली टिप्पणियों की बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इनमें से कुछ पोस्ट ट्रोल्स या बॉट्स द्वारा भी किए जा सकते हैं।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">रुबियो ने कहा, <b>“लोग सोशल मीडिया पर हर समय बेवकूफी भरी बातें करते हैं। दुर्भाग्य से यह केवल किसी एक देश तक सीमित नहीं है।”</b></span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;Marco Rubio on racism against Indians:&lt;br&gt;&lt;br&gt;Every country in the world has stupid people. &lt;br&gt;&lt;br&gt;I&amp;#39;m sure there are stupid people here, there are stupid people in the United States that make dumb comments all the time. &lt;a href="https://t.co/82muvpTAqK"&gt;pic.twitter.com/82muvpTAqK&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Clash Report (@clashreport) &lt;a href="https://x.com/clashreport/status/2058466056088269280?ref_src=twsrc^tfw"&gt;May 24, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p><b>अमरीका को बताया प्रवासियों का स्वागत करने वाला देश</b></p><p>अमेरिकी विदेश मंत्री ने जोर देकर कहा कि अमरीका आज भी दुनिया भर से आने वाले प्रवासियों का स्वागत करने वाला देश है और कुछ व्यक्तियों की आपत्तिजनक टिप्पणियों को पूरे देश की सोच के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">राजा कृष्णमूर्ति और मार्को रुबियो, दोनों नेताओं के बयानों को भारतीय-अमेरिकी समुदाय के प्रति समर्थन और अमरीका में विविधता तथा समावेशिता के पक्ष में एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है।</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ 'Go back to India' नारों की अमेरिकी सांसद ने की निंदा, बोले- 'किसी के खिलाफ नफरत स्वीकार नहीं' ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/iran-us-peace-deal-khamenei-approval-trump-5025 ]]></guid><title><![CDATA[ अमेरिका-ईरान शांति समझौता: 'अमेरिका की ज्यादा मांगें नहीं मानेंगे', ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई का बड़ा बयान... ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/iran-us-peace-deal-khamenei-approval-trump-5025 ]]></link><pubDate><![CDATA[Fri, 19 Jun 2026 10:50:03 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ तेहरान, ईरान: अमरीका और ईरान के बीच संघर्ष समाप्त करने के उद्देश्य से हुए शांति समझौते पर ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने कहा है कि उनकी व्यक्तिगत राय इस समझौते को लेकर अलग थी, लेकिन राष्ट्रपत ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>तेहरान, ईरान:</b> अमरीका और ईरान के बीच संघर्ष समाप्त करने के उद्देश्य से हुए शांति समझौते पर ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने कहा है कि उनकी व्यक्तिगत राय इस समझौते को लेकर अलग थी, लेकिन राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के अन्य सदस्यों के आश्वासन के बाद उन्होंने इसे मंजूरी दी।</span></p><p>अपने बयान में खामेनेई ने कहा कि राष्ट्रपति पेजेशकियन ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि यदि अमरीका कोई अत्यधिक या अनुचित मांग करेगा तो ईरान उसके आगे नहीं झुकेगा।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने कहा, “सिद्धांत रूप से मेरी राय अलग थी, लेकिन राष्ट्रपति और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने ईरानी जनता के अधिकारों तथा प्रतिरोध मोर्चे के हितों की रक्षा का भरोसा दिया। इसी प्रतिबद्धता के आधार पर मैंने अपनी अनुमति प्रदान की। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि अमेरिकी पक्ष जरूरत से ज्यादा मांगें करेगा तो वे उन्हें स्वीकार नहीं करेंगे।”</span></p><p><b>'ट्रंप ने हर तरह का दबाव इस्तेमाल किया'</b></p><p>खामेनेई ने दावा किया कि इस समझौते को अंतिम रूप देने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हर संभव दबाव और प्रभाव का इस्तेमाल किया।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने कहा, “समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। इस मुकाम तक पहुंचने के लिए संबंधित अधिकारियों ने ईमानदारी से प्रयास किए, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी इसे संभव बनाने के लिए हर तरह के दबाव और साधनों का उपयोग किया।”</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;The full text of the message of Imam Sayyid Mojtaba Khamenei, the Leader of the Islamic Revolution, addressing the Iranian nation regarding the Memorandum of Understanding between the presidents of Iran and America, June 18, 2026 &lt;a href="https://t.co/9nSD2NfkVe"&gt;pic.twitter.com/9nSD2NfkVe&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Ayatollah Mojtaba Khamenei (@MKhamenei_ir) &lt;a href="https://x.com/MKhamenei_ir/status/2067671868954268060?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 18, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p><b>समझौते की शर्तों के पालन का इंतजार</b></p><p>ईरान के सर्वोच्च नेता ने कहा कि अब देश समझौते की शर्तों के वास्तविक क्रियान्वयन का इंतजार करेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में होने वाली आमने-सामने की वार्ताओं का अर्थ अमेरिकी पक्ष की हर बात को स्वीकार करना नहीं होगा।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने कहा, “अब हम और ईरान की जनता इस बात का इंतजार करेंगे कि समझौते की शर्तें किस तरह लागू होती हैं। भविष्य की वार्ताओं का मतलब यह नहीं होगा कि हम दुश्मन की स्थिति को स्वीकार कर रहे हैं।”</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;Iran&amp;#39;s Supreme Leader &lt;a href="https://x.com/hashtag/Mojtaba_Khamenei?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#Mojtaba_Khamenei&lt;/a&gt; said on Thursday ‌he had ​authorised a ‌memorandum of ‌understanding signed ⁠by ‌the &lt;a href="https://x.com/hashtag/Iranian?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#Iranian&lt;/a&gt; ‌and &lt;a href="https://x.com/hashtag/US?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#US&lt;/a&gt; presidents, ⁠despite holding a different view, after receiving assurances from President Masoud Pezeshkian and other senior officials… &lt;a href="https://t.co/RmdMWIA8Dp"&gt;pic.twitter.com/RmdMWIA8Dp&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Gulf Times (@GulfTimes_QATAR) &lt;a href="https://x.com/GulfTimes_QATAR/status/2067671840340983935?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 18, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p><b>अमरीका की प्रतिक्रिया</b></p><p>उधर अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि अब यह देखा जाएगा कि ईरान समझौते की शर्तों का पालन करता है या नहीं।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">वेंस ने दावा किया कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है और यूरेनियम संवर्धन से जुड़ी उसकी प्रमुख सुविधाएं खत्म हो चुकी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की पारंपरिक सैन्य क्षमता को गंभीर नुकसान पहुंचा है और अब अगला कदम यह देखना होगा कि तेहरान राष्ट्रपति ट्रंप की शांति योजना के अगले चरण का पालन करता है या नहीं।</span></p><p><b>क्षेत्रीय राजनीति पर नजर</b></p><p>विश्लेषकों का मानना है कि यह समझौता पश्चिम एशिया की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है। हालांकि इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों देश समझौते की शर्तों का कितना ईमानदारी से पालन करते हैं और भविष्य की वार्ताएं किस दिशा में आगे बढ़ती हैं।</p><p><img src="https://media.gtcbharat.com/wp-content/uploads/2026/06/MojtabakhameneiLetter_46f6eb293938c86bf482b0451a34ec11_2480X3508.webp" style="width: 910.383px;"><br></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ अमेरिका-ईरान शांति समझौता: 'अमेरिका की ज्यादा मांगें नहीं मानेंगे', ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई का बड़ा बयान... ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/pm-modi-paris-indian-diaspora-pride-5017 ]]></guid><title><![CDATA[ पेरिस में पीएम मोदी का भव्य स्वागत, भारतीय समुदाय ने जताया गर्व ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/pm-modi-paris-indian-diaspora-pride-5017 ]]></link><pubDate><![CDATA[Thu, 18 Jun 2026 10:44:30 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ पेरिस, फ्रांस: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पेरिस पहुंचते ही भारतीय समुदाय में खुशी और गर्व का माहौल देखने को मिला।&nbsp;भारतीय समुदाय के एक सदस्य ने मीडिया से बातचीत में कहा, “मैं एक वैज्ञानिक हूं और ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>पेरिस, फ्रांस:</b> प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पेरिस पहुंचते ही भारतीय समुदाय में खुशी और गर्व का माहौल देखने को मिला।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">भारतीय समुदाय के एक सदस्य ने मीडिया से बातचीत में कहा, “मैं एक वैज्ञानिक हूं और मुझे इस बात पर बहुत गर्व है कि<b> ‘भारत इनोवेट्स 2026’ </b>का संयुक्त रूप से उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने किया है।”</span></p><p>भारतीय समुदाय के सदस्य प्रतीक ने बताया कि वह बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर से जुड़े हुए हैं, जिसका उद्घाटन इस वर्ष सितंबर में होने जा रहा है।<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने कहा, “मैं बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर से जुड़ा हूं, जो इस वर्ष सितंबर में खुलने जा रहा है। यह पेरिस का पहला हिंदू मंदिर होगा। हमने मोदी जी को भी आमंत्रित किया है और पूरे भारत के लोगों को भी आमंत्रण दिया है।”&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">इंडिया-फ्रांस एसोसिएशन के अध्यक्ष बीरेन शाह ने कहा, <b>“हम पेरिस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत करके बेहद खुश हैं। वह हम सभी को गौरवान्वित कर रहे हैं।”</b></span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;&lt;a href="https://x.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#WATCH&lt;/a&gt; | France | Prime Minister Narendra Modi is in Paris for further bilateral engagements, and to attend the VivaTech Summit, Europe&amp;#39;s largest technology and startup event. &lt;br&gt;&lt;br&gt;Biren Shah, President of the India France Association says, &amp;quot;...We are very glad to receive Prime… &lt;a href="https://t.co/VYQPLCU5bX"&gt;pic.twitter.com/VYQPLCU5bX&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; ANI (@ANI) &lt;a href="https://x.com/ANI/status/2067427573345456340?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 18, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p><b>पीएम मोदी ने की पेरिस में भारतीय समुदाय की सराहना</b></p><p><span style="font-size: 1rem;">प्रधानमंत्री मोदी ने भी भारत और फ्रांस के बीच संबंधों को मजबूत बनाने में भारतीय समुदाय की भूमिका की सराहना की।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, “मैं कुछ समय पहले ही पेरिस पहुंचा हूं, जहां भारतीय समुदाय ने मेरा गर्मजोशी से स्वागत किया। भारत और फ्रांस को और करीब लाने के उनके प्रयासों पर मुझे गर्व है। भारत-फ्रांस साझेदारी हमारे ग्रह की प्रगति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।”</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;Reached Paris a short while ago to a warm welcome by the Indian diaspora. I am proud of their efforts in bringing India and France closer. The India-France partnership is vital for the progress of our planet. &lt;a href="https://t.co/TGX8Aw5RIw"&gt;pic.twitter.com/TGX8Aw5RIw&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Narendra Modi (@narendramodi) &lt;a href="https://x.com/narendramodi/status/2067356169501610287?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 17, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p><b>पेरिस दौरे से पहले पीएम मोदी ने G-7 सम्मेलन में लिया था भाग</b></p><p>प्रधानमंत्री मोदी फ्रांस यात्रा के अंतिम चरण के तहत आज पेरिस पहुंचे। फ्रांस की राजधानी पहुंचने पर उनके होटल के बाहर बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय के लोगों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। समर्थकों ने उत्साहपूर्वक उनका अभिनंदन किया और उनके समर्थन में नारे लगाए।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">पेरिस दौरे से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने एवियन में आयोजित&nbsp;</span>G-7<span style="font-size: 1rem;">&nbsp;शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया था, जहां उन्होंने वैश्विक शासन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और ग्लोबल साउथ के साथ सहयोग जैसे महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर कई नेताओं के साथ चर्चा की।</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ पेरिस में पीएम मोदी का भव्य स्वागत, भारतीय समुदाय ने जताया गर्व ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/g7-summit-2026-modi-meloni-trump-funny-conversations-evian-summit-5014 ]]></guid><title><![CDATA[ G7 Summit 2026: सिगरेट से लेकर इंस्टाग्राम तक, नेताओं की अनौपचारिक बातचीत ने बटोरी सुर्खियां ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/g7-summit-2026-modi-meloni-trump-funny-conversations-evian-summit-5014 ]]></link><pubDate><![CDATA[Wed, 17 Jun 2026 18:40:46 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ एवियन में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान वैश्विक नेताओं की हल्की-फुल्की बातचीत कैमरों में कैद हुई, जिसमें जॉर्जिया मेलोनी, डोनाल्ड ट्रंप और पीएम मोदी के बीच दिलचस्प चर्चाएं चर्चा का विषय बन गईं।फ्रां ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p>एवियन में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान वैश्विक नेताओं की हल्की-फुल्की बातचीत कैमरों में कैद हुई, जिसमें <b>जॉर्जिया मेलोनी</b>, <b>डोनाल्ड ट्रंप</b> और <b>पीएम मोदी</b> के बीच दिलचस्प चर्चाएं चर्चा का विषय बन गईं।</p><p>फ्रांस के खूबसूरत शहर एवियन में आयोजित G7 Summit 2026 केवल वैश्विक राजनीति, व्यापार और सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों तक सीमित नहीं रहा। सम्मेलन के दौरान दुनिया के कई प्रमुख नेताओं के बीच हुई अनौपचारिक बातचीत भी सुर्खियों में छा गई। इन चर्चाओं ने नेताओं के मानवीय और सहज पक्ष को दुनिया के सामने पेश किया, जिसकी झलक सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और क्लिप्स में देखने को मिली।</p><p>G7 सम्मेलन में अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, इटली, ब्रिटेन, कनाडा और जापान सहित कई देशों के शीर्ष नेता शामिल हुए। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी विशेष आमंत्रित नेता के रूप में सम्मेलन में पहुंचे। जहां एक ओर वैश्विक संघर्ष, आर्थिक सहयोग और जलवायु परिवर्तन जैसे विषयों पर चर्चा हुई, वहीं दूसरी ओर कुछ अनौपचारिक बातचीत लोगों का ध्यान खींचने में सफल रही।</p><p>सबसे ज्यादा चर्चा इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की उस बातचीत की रही, जिसमें उन्होंने धूम्रपान छोड़ने के अपने अनुभव साझा किए। एक अनौपचारिक बातचीत के दौरान जब जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने उनसे पूछा कि क्या उन्होंने सुबह सिगरेट पी है, तो मेलोनी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि उन्होंने धूम्रपान पूरी तरह छोड़ दिया है और 1 मई से एक भी सिगरेट नहीं पी। उनके इस जवाब पर आसपास मौजूद नेताओं ने तालियां बजाकर उनका उत्साह बढ़ाया।</p><p>&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;Italy&amp;#39;s Meloni says she quit smoking at G7 Summit. &lt;a href="https://t.co/Z3NFztqS6m"&gt;pic.twitter.com/Z3NFztqS6m&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Clash Report (@clashreport) &lt;a href="https://x.com/clashreport/status/2066932766915088593?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 16, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;&nbsp;<br></p><p>सम्मेलन के दौरान खेल भी चर्चा का विषय बना। कई नेताओं ने फुटबॉल, ओलंपिक और अन्य अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों पर अपने विचार साझा किए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत के दौरान व्हाइट हाउस में आयोजित UFC कार्यक्रम का जिक्र किया और इस खेल आयोजन की लोकप्रियता पर टिप्पणी की। उन्होंने UFC प्रमुख डाना व्हाइट की भी सराहना की।</p><p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की मुलाकात भी काफी चर्चा में रही। समूह फोटो के दौरान दोनों नेताओं के बीच हुई दोस्ताना बातचीत कैमरे में रिकॉर्ड हो गई। मेलोनी ने पीएम मोदी का स्वागत करते हुए कहा कि उनसे दोबारा मिलकर खुशी हुई। इस दौरान दोनों नेताओं ने सोशल मीडिया और इंस्टाग्राम की लोकप्रियता पर भी हल्की-फुल्की चर्चा की, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया।</p><p><img style="width: 780.067px;" src="https://media.gtcbharat.com/wp-content/uploads/2026/06/modi-meloni_23f96b9b46bc30eca869629f246f9145_1280X720.webp"><br></p><p>इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक टिप्पणी भी चर्चा का विषय बन गई। एक अनौपचारिक बातचीत के दौरान उन्होंने ग्रीनलैंड का जिक्र करते हुए यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा से सवाल किया। हालांकि बातचीत का पूरा संदर्भ स्पष्ट नहीं हो पाया, लेकिन यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई।</p><p>फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की एक बातचीत भी कैमरों में रिकॉर्ड हुई, जिसमें उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से हुई मुलाकात को चुनौतीपूर्ण बताया। इस बातचीत ने भी राजनीतिक हलकों में चर्चा को जन्म दिया।</p><p>विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे सम्मेलन केवल औपचारिक बैठकों तक सीमित नहीं होते, बल्कि नेताओं के बीच बनने वाले व्यक्तिगत संबंध और अनौपचारिक संवाद भी वैश्विक कूटनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। G7 Summit 2026 में सामने आए ये पल इसी मानवीय पक्ष को दर्शाते हैं, जिसने दुनिया भर के लोगों की दिलचस्पी बढ़ा दी है।</p><p>एवियन में आयोजित यह सम्मेलन एक बार फिर साबित करता है कि वैश्विक मंचों पर गंभीर मुद्दों के साथ-साथ मानवीय संवाद भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं और कई बार यही छोटे पल सबसे ज्यादा याद किए जाते हैं।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ G7 Summit 2026: सिगरेट से लेकर इंस्टाग्राम तक, नेताओं की अनौपचारिक बातचीत ने बटोरी सुर्खियां ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/donald-trump-iran-deal-warning-g7-summit-mou-not-final-5012 ]]></guid><title><![CDATA[ G7 सम्मेलन में ट्रंप का बड़ा बयान: ईरान से समझौता अभी अधूरा, जरूरत पड़ी तो फिर करेंगे कार्रवाई ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/donald-trump-iran-deal-warning-g7-summit-mou-not-final-5012 ]]></link><pubDate><![CDATA[Wed, 17 Jun 2026 17:07:40 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ ईरान समझौते पर ट्रंप का यू-टर्न, G7 सम्मेलन में बोले- अभी कुछ तय नहीं, जरूरत पड़ी तो फिर करेंगे हमलाफ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बार  ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p>ईरान समझौते पर ट्रंप का यू-टर्न, G7 सम्मेलन में बोले- अभी कुछ तय नहीं, जरूरत पड़ी तो फिर करेंगे हमला</p><p>फ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की खबरों के बीच ट्रंप के नए बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित समझौता अभी अंतिम चरण में नहीं पहुंचा है और अमेरिका अपने हितों से कोई समझौता नहीं करेगा।</p><p>ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ चल रही बातचीत को लेकर सकारात्मक संकेत जरूर हैं, लेकिन अभी किसी भी समझौते को अंतिम रूप नहीं दिया गया है। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि यदि अमेरिका को समझौते की शर्तें स्वीकार्य नहीं लगीं, तो आगे की कार्रवाई के सभी विकल्प खुले रहेंगे।</p><h5 class=""><b>समझौते पर अभी भी बनी हुई है अनिश्चितता</b></h5><p>पिछले कुछ सप्ताहों से अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक स्तर पर प्रयास जारी हैं। कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में दावा किया गया था कि दोनों देश किसी सहमति के करीब पहुंच रहे हैं। हालांकि ट्रंप के ताजा बयान ने संकेत दिया है कि बातचीत अभी भी कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अटकी हुई है।</p><p>उन्होंने कहा कि अमेरिका अपनी सुरक्षा और रणनीतिक हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देगा। किसी भी समझौते का उद्देश्य क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक सुरक्षा होना चाहिए।</p><h5 class=""><b>होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी दिया बड़ा अपडेट</b></h5><p>जी7 सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आने वाले एक-दो दिनों में यह मार्ग पूरी तरह सामान्य स्थिति में आ सकता है।</p><p>ट्रंप के अनुसार, क्षेत्र में तनाव कम होने के साथ समुद्री गतिविधियां फिर से तेज हो रही हैं। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार को राहत मिलने की उम्मीद है। उन्होंने दावा किया कि तेल की कीमतों में लगातार गिरावट देखी जा रही है और यह जल्द ही युद्ध पूर्व स्तर से भी नीचे आ सकती हैं।</p><h5 class=""><b>वैश्विक बाजारों की नजर अमेरिका-ईरान वार्ता पर</b></h5><p>विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी प्रकार का समझौता वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर सीधा प्रभाव डाल सकता है। खासकर तेल निर्यात और समुद्री व्यापार के लिहाज से यह क्षेत्र बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।</p><p>ट्रंप ने कहा कि बाजार इस संभावित समझौते को सकारात्मक रूप से देख रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय अमेरिका के राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा।</p><h5 class=""><b>मध्य पूर्व में शांति की उम्मीद</b></h5><p>कई महीनों से जारी तनाव के बीच दुनिया की निगाहें अमेरिका और ईरान के संबंधों पर टिकी हुई हैं। यदि दोनों देशों के बीच समझौता होता है तो इससे मध्य पूर्व में स्थिरता बढ़ सकती है। हालांकि ट्रंप के बयान से यह भी साफ हो गया है कि बातचीत अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है और आने वाले दिनों में घटनाक्रम तेजी से बदल सकता है।</p><p>विश्लेषकों का मानना है कि जी7 सम्मेलन के बाद अमेरिका की अगली रणनीति पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी, क्योंकि इसका असर केवल मध्य पूर्व ही नहीं बल्कि वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ G7 सम्मेलन में ट्रंप का बड़ा बयान: ईरान से समझौता अभी अधूरा, जरूरत पड़ी तो फिर करेंगे कार्रवाई ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/donald-trump-iran-talks-second-phase-easier-no-us-funding-5002 ]]></guid><title><![CDATA[ ईरान समझौते पर ट्रंप का बड़ा बयान, बोले- 'अब अगला चरण होगा आसान' ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/donald-trump-iran-talks-second-phase-easier-no-us-funding-5002 ]]></link><pubDate><![CDATA[Tue, 16 Jun 2026 18:30:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ एवियन, फ्रांस: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ हुए शांति समझौते के बाद अगले चरण की वार्ता को लेकर आशावाद जताया है। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ बातचीत का दूसरा चरण पहले की तुलना में "और ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>एवियन, फ्रांस: </b>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ हुए शांति समझौते के बाद अगले चरण की वार्ता को लेकर आशावाद जताया है। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ बातचीत का दूसरा चरण पहले की तुलना में "और आसान" होगा। साथ ही उन्होंने उन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें दावा किया जा रहा था कि अमरीका समझौते के तहत ईरान को आर्थिक सहायता देगा।</span></p><p>फ्रांस के एवियन में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी के साथ द्विपक्षीय बैठक में ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ समझौता लगभग पूरा हो चुका है और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। उन्होंने&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">कहा, "ईरान के साथ हमारा समझौता हो चुका है और यह सफल होना चाहिए। अब यह दूसरे चरण में जाएगा, जो मुझे लगता है कि वास्तव में अधिक आसान होगा।"</span></p><p><b>"मैं पिछले सप्ताह हमला नहीं करना चाहता था"</b></p><p><span style="font-size: 1rem;">ट्रंप ने</span>&nbsp;हाल के सैन्य अभियानों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी इच्छा सैन्य कार्रवाई से बचने की थी, लेकिन परिस्थितियों ने ऐसा करने के लिए मजबूर कर दिया। उन्होंने&nbsp;कहा<span style="font-size: 1rem;">, "मैं पिछले सप्ताह हमला नहीं करना चाहता था, लेकिन हमारे पास कोई दूसरा विकल्प नहीं था। हमने कार्रवाई की और अब हम ऐसी स्थिति में हैं जहां आगे इसकी जरूरत नहीं पड़नी चाहिए। हमारे पास एक निष्पक्ष और अच्छा समझौता है।"</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;Trump believes second stage of Iran talks &amp;quot;will be actually easier&amp;quot;, rules out possibility of sending funds from US&lt;br&gt;&lt;br&gt;Read &lt;a href="https://x.com/ANI?ref_src=twsrc^tfw"&gt;@ANI&lt;/a&gt; Story I &lt;a href="https://t.co/KWkSOVaL7M"&gt;https://t.co/KWkSOVaL7M&lt;/a&gt; &lt;a href="https://x.com/hashtag/Trump?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#Trump&lt;/a&gt; &lt;a href="https://x.com/hashtag/IranTalks?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#IranTalks&lt;/a&gt; &lt;a href="https://x.com/hashtag/Funds?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#Funds&lt;/a&gt; &lt;a href="https://x.com/hashtag/US?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#US&lt;/a&gt; &lt;a href="https://t.co/Geuadi53Xu"&gt;pic.twitter.com/Geuadi53Xu&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; ANI Digital (@ani_digital) &lt;a href="https://x.com/ani_digital/status/2066858008764920135?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 16, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p><b>ईरान में निवेश और वित्तीय सहायता से ट्रंप ने किया खारिज</b></p><p>अमेरिकी राष्ट्रपति ने उन अटकलों को भी खारिज किया जिनमें कहा गया था कि अमेरिका ईरान में निवेश करेगा या उसे वित्तीय सहायता देगा।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "हम ईरान में कोई पैसा निवेश नहीं कर रहे हैं। कल जो अफवाह फैली थी, वह पूरी तरह बेतुकी थी। अमेरिका की ईरान में पैसा लगाने की कोई बाध्यता नहीं है।"</span></p><p>रिपोर्टों के अनुसार, वार्ता के अगले चरण में ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े तकनीकी मुद्दों, आर्थिक राहत के उपायों, हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने की प्रक्रिया और लगभग 300 अरब डॉलर के पुनर्निर्माण कोष पर चर्चा हो सकती है। बताया जा रहा है कि यह कोष अमेरिका के बजाय खाड़ी देशों द्वारा वित्तपोषित किया जाएगा।</p><p><b>ईरान शर्तें मानेगा, तो&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">पुनर्निर्माण</span><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;कोष मिलने की संभावना- अमेरिकी उपराष्ट्रपति</span></b></p><p><span style="font-size: 1rem;">अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी एक इंटरव्यू में कहा कि यदि ईरान समझौते की शर्तों का पालन करता है, तो उसे पुनर्निर्माण कोष तक पहुंच मिल सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि समझौते में ईरान की 24 अरब डॉलर की जमी हुई संपत्ति जारी करने जैसी कोई व्यवस्था शामिल नहीं है।</span></p><p>इससे पहले ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर दावा किया था कि ईरान के साथ हुआ यह "महान समझौता" पूरे पश्चिम एशिया में शांति और सुरक्षा लाएगा। उन्होंने कहा था कि समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य फिर से खुल जाएगा और क्षेत्र तथा दुनिया के लिए तेल आपूर्ति सामान्य हो जाएगी।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">ट्रंप ने यह भी दावा किया कि उनसे पहले कई अमेरिकी राष्ट्रपति ईरान के साथ स्थायी शांति स्थापित करने में असफल रहे, लेकिन मौजूदा समझौता क्षेत्र में नई स्थिरता और सहयोग का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ ईरान समझौते पर ट्रंप का बड़ा बयान, बोले- 'अब अगला चरण होगा आसान' ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/iran-psychologists-decode-donald-trump-us-talks-4999 ]]></guid><title><![CDATA[ ट्रंप को समझने के लिए ईरान ने मनोवैज्ञानिकों की ली मदद, रिपोर्ट में बड़ा दावा ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/iran-psychologists-decode-donald-trump-us-talks-4999 ]]></link><pubDate><![CDATA[Tue, 16 Jun 2026 15:50:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ तेहरान, ईरान: अमरीका के साथ अप्रत्यक्ष वार्ता के दौरान ईरान ने एक असामान्य कूटनीतिक रणनीति अपनाई। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने अपनी वार्ता टीम को सलाह देने के लिए वरिष्ठ मनोवैज्ञानिकों को शामि ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>तेहरान, ईरान: </b>अमरीका के साथ अप्रत्यक्ष वार्ता के दौरान ईरान ने एक असामान्य कूटनीतिक रणनीति अपनाई। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने अपनी वार्ता टीम को सलाह देने के लिए वरिष्ठ मनोवैज्ञानिकों को शामिल किया, ताकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यवहार और निर्णय लेने के तरीके को बेहतर ढंग से समझा जा सके।</span></p><p>'Drop Site' न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल में इस्लामाबाद में हुई बातचीत के बाद ईरानी वार्ता दल के सलाहकार समूह में दो वरिष्ठ मनोवैज्ञानिकों को शामिल किया गया था। इन विशेषज्ञों का मुख्य उद्देश्य ट्रंप की प्रतिक्रियाओं और व्यवहारिक पैटर्न का विश्लेषण करना था, ताकि बातचीत के दौरान भेजे जाने वाले संदेशों को उसी अनुरूप तैयार किया जा सके।</p><p><img src="https://media.gtcbharat.com/wp-content/uploads/2026/06/Iran_607645a6a2bf28c63f23700e06c7e75d_1326X987.webp" style="width: 910.383px;"><br></p><p><b>ट्रंप के व्यवहार को बेहतर समझने की कोशिश में ईरान</b></p><p>रिपोर्ट में एक ईरानी अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि वार्ता टीम ने मनोवैज्ञानिकों की मदद इसलिए ली ताकि राष्ट्रपति ट्रंप के व्यवहार को बेहतर तरीके से समझते हुए प्रभावी संवाद रणनीति बनाई जा सके।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">अधिकारी ने दावा किया कि मनोवैज्ञानिकों की सिफारिशों को बातचीत और लिखित संदेशों में शामिल करने के बाद ट्रंप की प्रतिक्रियाओं में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला।</span></p><p><span style="font-size: 1rem;"><b>28 फरवरी को ईरान पर हुआ था संयुक्त हमला</b></span></p><p><a href="https://www.dropsitenews.com/p/iran-trump-psychologists-ceasefire-negotiations" target="_blank">रिपोर्ट के अनुसार</a>, ईरानी पक्ष का मानना है कि इन विशेषज्ञों की सलाह को अपनाने के बाद वार्ता का माहौल पहले की तुलना में अधिक रचनात्मक और सहयोगपूर्ण हुआ।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">इस बीच, रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि ईरान और अमेरिका के बीच उस संघर्ष को समाप्त करने के उद्देश्य से एक प्रारंभिक समझौता हुआ है, जो 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमलों के बाद शुरू हुआ था।</span></p><p><span style="font-size: 1rem;"><b>मनोवैज्ञानिक को शामिल करना एक असाधारण कदम</b></span></p><p>हालांकि, इस दावे को लेकर अब तक अमेरिका या ईरान की ओर से कोई आधिकारिक सार्वजनिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए रिपोर्ट में किए गए दावों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया जा सका है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक कूटनीति में व्यवहारिक मनोविज्ञान और नेतृत्व विश्लेषण का उपयोग नया नहीं है, लेकिन किसी देश द्वारा औपचारिक वार्ता प्रक्रिया में मनोवैज्ञानिकों को शामिल करना एक असाधारण कदम माना जा रहा है।</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ ट्रंप को समझने के लिए ईरान ने मनोवैज्ञानिकों की ली मदद, रिपोर्ट में बड़ा दावा ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/pm-modi-thanks-slovakia-pmrobert-fico-india-eu-fta-support-4991 ]]></guid><title><![CDATA[ रॉबर्ट फिको ने की भारत की डिजिटल और AI उपलब्धियों की सराहना, बोले- 'कई विकसित देशों से आगे' ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/pm-modi-thanks-slovakia-pmrobert-fico-india-eu-fta-support-4991 ]]></link><pubDate><![CDATA[Mon, 15 Jun 2026 17:50:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ ब्रातिस्लावा, स्लोवाकिया: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-यूरोपीय संघ (EU) मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप देने में सहयोग के लिए स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको का आभार व्यक्त किया है ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>ब्रातिस्लावा, स्लोवाकिया: </b>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-यूरोपीय संघ (EU) मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप देने में सहयोग के लिए स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच यह ऐतिहासिक समझौता दोनों पक्षों के उद्योगों, स्टार्टअप्स और व्यापारियों के लिए नए अवसर पैदा करेगा।</span></p><p>स्लोवाकिया की राजधानी ब्रातिस्लावा में आयोजित संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और स्लोवाकिया इस समझौते के शीघ्र क्रियान्वयन की दिशा में काम करेंगे ताकि दोनों देशों के कारोबारी समुदाय को इसका अधिकतम लाभ मिल सके।</p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;Addressing the joint press meet with PM Robert Fico of Slovakia.&lt;a href="https://x.com/RobertFicoSVK?ref_src=twsrc^tfw"&gt;@RobertFicoSVK&lt;/a&gt; &lt;a href="https://t.co/qP50HdYhUO"&gt;https://t.co/qP50HdYhUO&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Narendra Modi (@narendramodi) &lt;a href="https://x.com/narendramodi/status/2066453753679806791?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 15, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><p><b>पीएम मोदी ने स्लोवाकिया के पीएम फिको का&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">आभार व्यक्त</span><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;किया</span></b></p><p>प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "भारत-EU FTA को अंतिम रूप देने में समर्थन के लिए मैं स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री का विशेष आभार व्यक्त करता हूं। हम इसके जल्द कार्यान्वयन के लिए मिलकर काम करेंगे ताकि दोनों देशों के उद्योग, स्टार्टअप और व्यापारी अधिकतम लाभ उठा सकें।"&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने भारत और स्लोवाकिया के बीच बढ़ते व्यापारिक और आर्थिक संबंधों पर संतोष जताते हुए कहा कि दोनों देशों की संभावनाएं और आकांक्षाएं इससे कहीं अधिक बड़ी हैं। उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं ने सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान की है और संबंधों को नई ऊर्जा देने पर विस्तार से चर्चा की है।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;I thank Prime Minister Fico for the warm welcome at the iconic Bratislava Castle. We shall keep working together to further strengthen the India-Slovakia friendship.&lt;a href="https://x.com/RobertFicoSVK?ref_src=twsrc^tfw"&gt;@RobertFicoSVK&lt;/a&gt; &lt;a href="https://t.co/8552LodfUG"&gt;pic.twitter.com/8552LodfUG&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Narendra Modi (@narendramodi) &lt;a href="https://x.com/narendramodi/status/2066472995254898880?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 15, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p><span style="font-size: 1rem;"><b>दोनों देशों ने लिए आपसी सहयोग के लिए महत्वपूर्ण निर्णय</b></span></p><p class="grey-bg-red"><b><i>प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ऑटोमोबाइल, रेलवे, उन्नत विनिर्माण (एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग) और ग्रीन टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्र दोनों देशों के लिए विशेष महत्व रखते हैं। उन्होंने बताया कि इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं, जिनका लाभ दोनों देशों के नागरिकों को मिलेगा।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">वहीं, स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको ने भारत की तेज आर्थिक प्रगति, डिजिटलीकरण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के क्षेत्र में उपलब्धियों की खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारत ने कई विकसित देशों को पीछे छोड़ते हुए उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।</span></i></b></p><p><span style="font-size: 1rem;"><b>"भारत और स्लोवाकिया कई साझा हितों से जुड़े हुए हैं"</b></span></p><p>फिको ने कहा, "भारत और स्लोवाकिया कई साझा हितों से जुड़े हुए हैं। मैं भारत को उसकी शानदार उपलब्धियों के लिए बधाई देता हूं। डिजिटलीकरण और AI के क्षेत्र में भारत ने असाधारण प्रगति की है और कई विकसित देशों की तुलना में तेज गति से आगे बढ़ा है।"&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने यूरोपीय संघ की मौजूदा आर्थिक चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की विकास दर और आर्थिक मॉडल से बहुत कुछ सीखा जा सकता है।</span></p><p>फिको ने कहा, "यूरोपीय संघ अभी कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। यदि हम भी 6 से 7 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि हासिल कर पाएं, तो यह हमारे लिए बड़ी उपलब्धि होगी।"&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">दोनों नेताओं की बैठक को भारत और स्लोवाकिया के बीच आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;𝐏𝐌 𝐌𝐨𝐝𝐢, 𝐒𝐥𝐨𝐯𝐚𝐤 𝐏𝐌 𝐑𝐨𝐛𝐞𝐫𝐭 𝐅𝐢𝐜𝐨 𝐣𝐨𝐢𝐧𝐭 𝐩𝐫𝐞𝐬𝐬 𝐦𝐞𝐞𝐭 𝐢𝐧 𝐁𝐫𝐚𝐭𝐢𝐬𝐥𝐚𝐯𝐚&lt;br&gt;&lt;br&gt;Obviously, I cannot omit political stability, which you represent Prime Minister in India. &lt;br&gt;&lt;br&gt;I congratulate you to the fact that you&amp;#39;re the longest-serving Prime… &lt;a href="https://t.co/YaTsjOxs3u"&gt;pic.twitter.com/YaTsjOxs3u&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; All India Radio News (@airnewsalerts) &lt;a href="https://x.com/airnewsalerts/status/2066474794749763917?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 15, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ रॉबर्ट फिको ने की भारत की डिजिटल और AI उपलब्धियों की सराहना, बोले- 'कई विकसित देशों से आगे' ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/us-iran-deal-108-days-war-timeline-explained-4983 ]]></guid><title><![CDATA[ हॉर्मुज से युद्धविराम तक: जानिए 108 दिन के संघर्ष की पूरी कहानी... ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/us-iran-deal-108-days-war-timeline-explained-4983 ]]></link><pubDate><![CDATA[Mon, 15 Jun 2026 11:24:09 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ अमरीका-ईरान डील:&nbsp;पश्चिम एशिया में अमरीका, इज़राइल और ईरान के बीच चला संघर्ष 108 दिनों तक जारी रहा और हाल के वर्षों के सबसे गंभीर सुरक्षा संकटों में शामिल हो गया। हालांकि विस्तारित युद्धविराम के ब ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>अमरीका-ईरान डील:</b>&nbsp;</span>पश्चिम एशिया में अमरीका, इज़राइल और ईरान के बीच चला संघर्ष 108 दिनों तक जारी रहा और हाल के वर्षों के सबसे गंभीर सुरक्षा संकटों में शामिल हो गया। हालांकि विस्तारित युद्धविराम के बाद सक्रिय सैन्य कार्रवाई काफी हद तक थम गई है, लेकिन उन मुद्दों पर बातचीत अभी भी जारी है, जिनकी वजह से यह युद्ध शुरू हुआ था।</p><p><span style="font-size: 1rem;"><b>28 फरवरी 2026</b> को&nbsp;</span>अमरीका<span style="font-size: 1rem;">&nbsp;और इज़राइल ने ईरान के भीतर कई सैन्य और सरकारी ठिकानों पर समन्वित हवाई हमले किए। शुरुआती हमलों में ईरान के कई वरिष्ठ अधिकारियों की मौत हुई, जबकि नागरिक हताहत भी हुए।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">इसके जवाब में ईरान ने इज़राइल, अमेरिकी सैन्य ठिकानों और क्षेत्रीय सहयोगी देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए। साथ ही उसने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="zxx" dir="ltr"&gt;&lt;a href="https://t.co/w2cWfNsBrR"&gt;pic.twitter.com/w2cWfNsBrR&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Department of State (@StateDept) &lt;a href="https://x.com/StateDept/status/2066289775565291886?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 14, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p><b>&lt;iframe src="https://truthsocial.com/@realDonaldTrump/116754191159188049/embed" class="truthsocial-embed truthsocial-video" style="max-width: 100%; border: 0" width="600" allowfullscreen="allowfullscreen"&gt;&lt;/iframe&gt;&lt;script src="https://truthsocial.com/embed.js" async="async"&gt;&lt;/script&gt;</b></p><p><b>हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से क्यों बढ़ा संकट?</b></p><p>हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से क्षेत्रीय संघर्ष वैश्विक आर्थिक चिंता में बदल गया। तेल और गैस आपूर्ति प्रभावित हुई, अंतरराष्ट्रीय शिपिंग नेटवर्क पर दबाव बढ़ा और ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता फैल गई।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">मार्च के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार दावा करते रहे कि अमेरिकी और इज़राइली सैन्य कार्रवाई ने ईरान की सैन्य क्षमता को गंभीर रूप से कमजोर कर दिया है। दूसरी ओर, ईरान ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका जमीनी स्थिति को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है।</span></p><p><b>युद्धविराम की शुरुआत कैसे हुई?</b></p><p>मार्च के अंतिम सप्ताह और अप्रैल की शुरुआत में कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">25 मार्च को पाकिस्तान के अधिकारियों ने कथित तौर पर अमेरिका का 15 सूत्रीय प्रस्ताव ईरान तक पहुंचाया। इसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर प्रतिबंध, मिसाइल सीमाएं, हॉर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलना और चरणबद्ध तरीके से प्रतिबंधों में राहत देने जैसे प्रावधान शामिल थे।</span></p><p>ईरान ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया और बदले में सुरक्षा गारंटी, युद्ध क्षतिपूर्ति और अपनी संप्रभुता को मान्यता देने जैसी मांगों वाला प्रतिप्रस्ताव पेश किया।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">इसके बाद 31 मार्च को पाकिस्तान और चीन ने संयुक्त शांति प्रस्ताव पेश किया, जिससे बातचीत को नई गति मिली।</span></p><p><b>अंतिम क्षणों में बढ़ गया था संकट</b></p><p class="grey-bg-red"><b><i>समझौते से कुछ घंटे पहले लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर इज़राइली हमलों ने पूरी प्रक्रिया को पटरी से उतारने का खतरा पैदा कर दिया था।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने बातचीत छोड़ने और जवाबी सैन्य कार्रवाई की तैयारी तक शुरू कर दी थी। हालांकि अमेरिका, कतर और पाकिस्तान के मध्यस्थों ने तेजी से हस्तक्षेप कर तनाव को और बढ़ने से रोका।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">आखिरकार ईरान ने तत्काल जवाबी कार्रवाई से परहेज किया और बातचीत जारी रखने पर सहमति दी।</span></i></b></p><p><b>क्या है मौजूदा समझौता?</b></p><p class="blue-bg-white"><b><i>ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने घोषणा की कि समझौते के तहत ईरान और उसके सहयोगी मोर्चों, जिनमें लेबनान भी शामिल है, उन पर सैन्य अभियान रोक दिए जाएंगे।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">हालांकि यह अंतिम शांति संधि नहीं है। यह केवल एक प्रारंभिक रूपरेखा समझौता (Framework Agreement) है, जो दोनों पक्षों को 60 दिनों का समय देता है ताकि वे परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा, प्रतिबंधों और हॉर्मुज जलडमरूमध्य जैसे विवादित मुद्दों पर अंतिम समाधान तलाश सकें।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">इस सप्ताह स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर समारोह होने की उम्मीद है, जिसके बाद परमाणु विशेषज्ञों और अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थों के साथ तकनीकी स्तर की बातचीत शुरू होगी।</span></i></b></p><p><b>108 दिन की जंग: एक नजर में...</b></p><ul><li>28 फरवरी 2026: अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर हमले शुरू किए।</li><li>ईरान ने मिसाइल और ड्रोन हमलों से जवाब दिया।</li><li>हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद किया गया।</li><li>वैश्विक ऊर्जा और शिपिंग बाजार प्रभावित हुए।</li><li>मार्च में कई दौर की कूटनीतिक पहल हुई।</li><li>पाकिस्तान और चीन ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई।</li><li>अप्रैल में युद्धविराम की दिशा में सहमति बनी।</li><li>108 दिनों बाद प्रारंभिक शांति समझौते पर सहमति बनी।</li><li>अगले 60 दिनों में अंतिम समझौते पर बातचीत होगी।</li></ul> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ हॉर्मुज से युद्धविराम तक: जानिए 108 दिन के संघर्ष की पूरी कहानी... ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/iran-irgc-warning-strait-of-hormuz-shipping-alert-4973 ]]></guid><title><![CDATA[ हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य 'पूरी तरह बंद', ईरान की नौसेना ने जहाजों को जारी किया अलर्ट ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/iran-irgc-warning-strait-of-hormuz-shipping-alert-4973 ]]></link><pubDate><![CDATA[Sun, 14 Jun 2026 15:00:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ लंदन, ब्रिटेन: ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के आसपास संचालित वाणिज्यिक जहाजों को इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने के खिलाफ चेतावनी जारी की ह ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>लंदन, ब्रिटेन: </b>ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (</span>IRGC<span style="font-size: 1rem;">) की नौसेना ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के आसपास संचालित वाणिज्यिक जहाजों को इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने के खिलाफ चेतावनी जारी की है। यह चेतावनी एक सार्वजनिक समुद्री रेडियो चैनल पर प्रसारित ऑडियो संदेश के जरिए दी गई। यह रिकॉर्डिंग हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के पास मौजूद एक वाणिज्यिक जहाज के चालक दल के सदस्य द्वारा साझा की गई।</span></p><p>रेडियो संदेश में IRGC नौसेना ने फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में संचालित सभी जहाजों को संबोधित करते हुए कहा कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद कर दिया गया है। संदेश में कहा गया, "आपकी सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए अगली सूचना तक हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में किसी भी प्रकार की आवाजाही से पूरी तरह बचें।" IRGC&nbsp;ने यह भी चेतावनी दी कि यदि कोई जहाज इस मार्ग में आवाजाही करता है तो उससे "निर्णायक तरीके से निपटा जाएगा।"</p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;Iran&amp;#39;s IRGC warns vessels against transiting Strait of Hormuz in new audio&lt;br&gt;&lt;br&gt;Read &lt;a href="https://x.com/ANI?ref_src=twsrc^tfw"&gt;@ANI&lt;/a&gt; Story| &lt;a href="https://t.co/ltMSAnPpjQ"&gt;https://t.co/ltMSAnPpjQ&lt;/a&gt; &lt;a href="https://x.com/hashtag/Iran?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#Iran&lt;/a&gt; &lt;a href="https://x.com/hashtag/IRGC?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#IRGC&lt;/a&gt; &lt;a href="https://x.com/hashtag/StraitofHormuz?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#StraitofHormuz&lt;/a&gt; &lt;a href="https://t.co/TAu5c4G8xG"&gt;pic.twitter.com/TAu5c4G8xG&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; ANI Digital (@ani_digital) &lt;a href="https://x.com/ani_digital/status/2066076856387063825?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 14, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;🇮🇷 Iran targets vessels in Strait of Hormuz. IRGC warns: Any ship attempting transit faces consequences.&lt;br&gt;&lt;br&gt;Global oil markets on edge as Tehran prepares historic response. &lt;a href="https://t.co/c88wtmEaN4"&gt;pic.twitter.com/c88wtmEaN4&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; China V (@China_V7) &lt;a href="https://x.com/China_V7/status/2065493122356785372?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 12, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><b></b></p><p><b>शांति समझौते की चर्चा के बीच बढ़ा तनाव</b></p><p>ईरान की यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की खबरें सामने आ रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को दावा किया था कि ईरान के साथ शांति समझौते पर रविवार को हस्ताक्षर हो सकते हैं और इसके तुरंत बाद हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोल दिया जाएगा। हालांकि जमीनी स्तर पर हालात अब भी बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं।</p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;🚨 BREAKING:&lt;br&gt;&lt;br&gt;🇺🇸🇮🇷 THE DEAL BETWEEN THE U.S. AND IRAN WON&amp;#39;T BE SIGNED TOMORROW PER FARS&lt;br&gt;&lt;br&gt;TEHRAN SAYS SIGNING THE DOCUMENT PREMATURELY IS IMPOSSIBLE&lt;br&gt;&lt;br&gt;INSIDERS SAY THAT TRUMP IS PRESSURING IRAN TO SIGN IT TOMORROW, BUT THEY WON&amp;#39;T ACCEPT IT&lt;br&gt;&lt;br&gt;THIS IS NOT GOOD FOR THE DEAL... &lt;a href="https://t.co/sAPfMwvkwg"&gt;pic.twitter.com/sAPfMwvkwg&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; IRGC NEWS (@IRGC_IRAN_News) &lt;a href="https://x.com/IRGC_IRAN_News/status/2066036639106044212?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 14, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><p><b>अमेरिकी सेना ने गिराए ईरानी ड्रोन</b></p><p>अमेरिकी सेना ने शुक्रवार देर रात दावा किया था कि उसने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाने वाले कई ईरानी ड्रोन मार गिराए हैं। इस घटना ने क्षेत्र में पहले से मौजूद सैन्य तनाव को और बढ़ा दिया है।</p><p><b>वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अहम है हॉर्मुज़</b></p><p class="grey-bg-red"><b><i>हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल और प्राकृतिक गैस की बड़ी मात्रा इसी रास्ते से गुजरती है। लगातार बढ़ते तनाव और जहाजों पर हमलों के कारण पिछले कुछ महीनों में इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।</i></b></p><p><b>46 समुद्री घटनाएं, 14 लोगों की मौत</b></p><p>अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के आंकड़ों के अनुसार, 11 जून तक हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य और व्यापक मध्य पूर्व क्षेत्र में 46 समुद्री घटनाओं की पुष्टि हुई है। इन घटनाओं में अब तक 14 वाणिज्यिक जहाज कर्मियों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।</p><p><b>तेल टैंकर पर हमले की भी हुई थी निंदा</b></p><p>IMOने बुधवार को एक वाणिज्यिक तेल टैंकर पर हुए हमले की कड़ी निंदा की थी। इस हमले में तीन चालक दल के सदस्यों की मौत हुई थी। बाद में अमेरिकी सेना ने इस हमले की जिम्मेदारी स्वीकार की थी, जिससे क्षेत्र में तनाव और अधिक बढ़ गया।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य 'पूरी तरह बंद', ईरान की नौसेना ने जहाजों को जारी किया अलर्ट ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/pm-modi-thanks-serbian-president-vucic-longest-serving-elected-pm-4971 ]]></guid><title><![CDATA[ 'दुनिया उनकी आवाज सुनती है', सर्बियाई राष्ट्रपति ने की पीएम मोदी की जमकर तारीफ ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/pm-modi-thanks-serbian-president-vucic-longest-serving-elected-pm-4971 ]]></link><pubDate><![CDATA[Sun, 14 Jun 2026 13:10:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ नीस, फ्रांस: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के सबसे लंबे समय तक निर्वाचित सरकार प्रमुख बनने पर शुभकामनाएं देने के लिए सर्बिया के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुचिच का आभार व्यक्त किया है। सोशल मीडिया मंच  ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>नीस, फ्रांस:</b> प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के सबसे लंबे समय तक निर्वाचित सरकार प्रमुख बनने पर शुभकामनाएं देने के लिए सर्बिया के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुचिच का आभार व्यक्त किया है। सोशल मीडिया मंच एक्स पर राष्ट्रपति वुचिच के संदेश का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और सर्बिया के बीच मजबूत मित्रता और सहयोग को रेखांकित किया।</span></p><p>प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा, "राष्ट्रपति वुचिच, आपकी गर्मजोशी और दिल से दी गई शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद।" उन्होंने हाल ही में हुई दोनों नेताओं की मुलाकात को याद करते हुए कहा, "मुझे आपकी हालिया भारत यात्रा और हमारी सार्थक चर्चाएं अच्छी तरह याद हैं। भारत सर्बिया के साथ अपनी मित्रता को बहुत महत्व देता है और आने वाले वर्षों में हमारी साझेदारी को और मजबूत करने के लिए साथ काम करने को उत्सुक है।"</p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;Thank you President Vučić for your warm and heartfelt wishes.&lt;br&gt;&lt;br&gt;I fondly recall your recent visit to India and our productive discussions. India deeply values its friendship with Serbia and I look forward to working together to further strengthen our partnership in the years… &lt;a href="https://t.co/dVZnPPrFc6"&gt;https://t.co/dVZnPPrFc6&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Narendra Modi (@narendramodi) &lt;a href="https://x.com/narendramodi/status/2065986909789376683?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 14, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><p><b>वुचिच ने दी थी विशेष बधाई</b></p><p>इससे पहले सर्बिया के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुचिच ने एक्स पर एक विस्तृत संदेश साझा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी को भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने पर बधाई दी थी। उन्होंने लिखा, "भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने पर नरेंद्र मोदी को हार्दिक बधाई।"</p><p><b>जनता के विश्वास का प्रतीक बताया</b></p><p>वुचिच ने कहा कि किसी देश के सर्वोच्च पद पर लंबे समय तक बने रहना जनता के गहरे विश्वास को दर्शाता है। उन्होंने कहा, "देश के सर्वोच्च पद पर इतनी लंबी अवधि तक बने रहना इस बात का प्रमाण है कि नागरिक उस नेता पर भरोसा करते हैं जिसने अपना जीवन जनता की सेवा और देश की प्रगति के लिए समर्पित किया है।"</p><p><b>नेतृत्व की असली पहचान पर दिया जोर</b></p><p class="grey-bg-red"><b><i>सर्बियाई राष्ट्रपति ने कहा कि किसी राजनेता की असली ताकत केवल वर्षों तक सत्ता में बने रहने या चुनावी जीत से नहीं मापी जाती, बल्कि उसकी विरासत, उपलब्धियों और दूरदृष्टि से आंकी जाती है। उन्होंने कहा, "एक राजनेता की वास्तविक शक्ति उसके कार्यकाल की अवधि से नहीं, बल्कि उसके द्वारा छोड़ी गई विरासत, हासिल किए गए परिणामों और उस दृष्टि से मापी जाती है जो समय की राजनीति से आगे तक कायम रहती है।"</i></b></p><p><b>पीएम मोदी के वैश्विक प्रभाव की सराहना</b></p><p>वुचिच ने दोनों नेताओं की हालिया मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी में एक अनुभवी राजनेता की दूरदर्शिता और आधुनिक दुनिया की चुनौतियों की गहरी समझ देखी। उन्होंने कहा, "हमारी बातचीत में मैंने एक ऐसे नेता को देखा जो परंपरा, पहचान और राष्ट्रीय हितों को संरक्षित रखने के महत्व को भली-भांति समझते हैं।"</p><p>सर्बियाई राष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का अनुभव, दूरदृष्टि और भारत के प्रति समर्पण उन्हें एक वैश्विक नेता बनाता है, जिसकी "आवाज पूरी दुनिया में सुनी और सम्मानित की जाती है।"&nbsp;</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ 'दुनिया उनकी आवाज सुनती है', सर्बियाई राष्ट्रपति ने की पीएम मोदी की जमकर तारीफ ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/iran-protests-against-us-peace-deal-araghchi-4970 ]]></guid><title><![CDATA[ अमेरिका के साथ समझौते को लेकर ईरान में विरोध प्रदर्शन, विदेश मंत्री के खिलाफ लगे नारे ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/iran-protests-against-us-peace-deal-araghchi-4970 ]]></link><pubDate><![CDATA[Sun, 14 Jun 2026 12:30:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ मशहद, ईरान: अमरीका के साथ संभावित शांति समझौते के विरोध में ईरान के उत्तर-पूर्वी शहर मशहद में विदेश मंत्रालय के एक कार्यालय के बाहर दर्जनों लोगों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने ईरान के विदेश मंत ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>मशहद, ईरान:</b> अमरीका के साथ संभावित शांति समझौते के विरोध में ईरान के उत्तर-पूर्वी शहर मशहद में विदेश मंत्रालय के एक कार्यालय के बाहर दर्जनों लोगों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के खिलाफ नारेबाजी की।</span></p><p>फार्स समाचार एजेंसी (Fars news agency ) द्वारा साझा किए गए एक वीडियो में काले चादर पहने महिलाएं लाल और काले झंडे लहराते हुए दिखाई दीं। प्रदर्शनकारी विदेश मंत्रालय कार्यालय के बाहर "बेइज्जत अराघची मुर्दाबाद" और "घुसपैठिए अराघची मुर्दाबाद" जैसे नारे लगा रहे थे।</p><p><b>समझौते को लेकर बढ़ा आंतरिक विरोध</b></p><p>यह प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब अमरीका&nbsp;के साथ संभावित शांति समझौते को लेकर ईरान के भीतर राजनीतिक मतभेद तेज हो गए हैं। कट्टरपंथी राजनीतिक गुटों का आरोप है कि प्रस्तावित समझौते की मौजूदा शर्तें ईरान के रणनीतिक हितों को नुकसान पहुंचा सकती हैं।</p><p>विरोधियों का कहना है कि यह समझौता ईरान को हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पर अपने प्रभाव और रणनीतिक बढ़त से वंचित कर सकता है। उनका आरोप है कि समझौते को अंतिम रूप देने के लिए ईरानी वार्ताकारों ने जरूरत से ज्यादा रियायतें दी हैं।</p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;Hardline Iranians have begun protesting against Foreign Minister Abbas Araghchi and Iranian Parliament Speaker Ghalibaf throughout the day over the emerging US‑Iran deal.&lt;br&gt;&lt;br&gt;Protestors are chanting “Death to Araghchi, the dishonorable compromiser.” “Araghchi, have shame; leave… &lt;a href="https://t.co/q3fuZmb5lj"&gt;pic.twitter.com/q3fuZmb5lj&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; World Source News (@Worldsource24) &lt;a href="https://x.com/Worldsource24/status/2065890716111299069?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 13, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><p><b>टीवी इंटरव्यू के बाद भड़का विवाद</b></p><p>यह विरोध प्रदर्शन उस समय सामने आया जब राज्य टेलीविजन पर प्रसारित एक इंटरव्यू में अब्बास अराघची ने कहा कि प्रस्तावित समझौते में ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिका द्वारा लगाए गए नौसैनिक प्रतिबंध को हटाने का प्रावधान शामिल है।</p><p>अराघची ने कहा था, "हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य का प्रबंधन पहले जैसा नहीं रहेगा," हालांकि उन्होंने यह भी दोहराया कि यह रणनीतिक समुद्री मार्ग ईरान के प्रमुख प्रतिरोधी साधनों में से एक बना रहेगा।</p><p><b>तेहरान में भी विरोध की खबरें</b></p><p>सोशल मीडिया पर प्रसारित कुछ अपुष्ट वीडियो में राजधानी तेहरान स्थित विदेश मंत्रालय मुख्यालय के बाहर भी इसी तरह की भीड़ दिखाई देने का दावा किया गया है।</p><p>इन वीडियो में प्रदर्शनकारी "अराघची इस्तीफा दो" और "गालिबाफ इस्तीफा दो" जैसे नारे लगाते नजर आए। ये नारे विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ के खिलाफ लगाए गए, जो इस वार्ता प्रक्रिया में मुख्य वार्ताकार की भूमिका भी निभा रहे हैं।</p><p><b>समझौते के समय को लेकर अलग-अलग दावे</b></p><p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तानी अधिकारियों ने दावा किया है कि संघर्ष समाप्त करने के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा यह समझौता रविवार तक अंतिम रूप ले सकता है। पाकिस्तान की ओर से यह भी कहा गया है कि समझौते पर इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर समारोह की तैयारी की जा रही है। हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने इस समयसीमा को लेकर सतर्क रुख अपनाया है।</p><p>ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा, "यह कल नहीं होगा," लेकिन उन्होंने यह स्वीकार किया कि आने वाले दिनों में समझौते को औपचारिक रूप दिया जा सकता है। फिलहाल संभावित समझौते को लेकर ईरान के भीतर राजनीतिक बहस और विरोध लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ अमेरिका के साथ समझौते को लेकर ईरान में विरोध प्रदर्शन, विदेश मंत्री के खिलाफ लगे नारे ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/quetta-hospital-acid-attack-security-failure-4955 ]]></guid><title><![CDATA[ क्वेटा अस्पताल में महिला डॉक्टर पर एसिड अटैक से मचा बवाल, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/quetta-hospital-acid-attack-security-failure-4955 ]]></link><pubDate><![CDATA[Fri, 12 Jun 2026 17:12:32 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ बलूचिस्तान, पाकिस्तान: क्वेटा के सिविल अस्पताल में एक महिला डॉक्टर पर हुए एसिड हमले के बाद बलूचिस्तान का चिकित्सा समुदाय प्रांतीय प्रशासन के खिलाफ और अधिक मुखर हो गया है। डॉक्टरों ने इस घटना को प्रशास ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>बलूचिस्तान, पाकिस्तान:</b> क्वेटा के सिविल अस्पताल में एक महिला डॉक्टर पर हुए एसिड हमले के बाद बलूचिस्तान का चिकित्सा समुदाय प्रांतीय प्रशासन के खिलाफ और अधिक मुखर हो गया है। डॉक्टरों ने इस घटना को प्रशासनिक लापरवाही और स्वास्थ्य संस्थानों में बदहाल सुरक्षा व्यवस्था का गंभीर उदाहरण बताया है।</span></p><p>पाकिस्तान मेडिकल एसोसिएशन (पीएमए) क्वेटा ज़ोन ने हमले की स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग करते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। यह जानकारी द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट में सामने आई है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार, क्वेटा प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीएमए क्वेटा ज़ोन के महासचिव शोएब बलोच ने वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ इस घटना की निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि न्याय की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों के खिलाफ प्रतिशोधात्मक कार्रवाई की जा रही है।</span></p><p><span style="font-size: 1rem;"><b>पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए आंदोलन जारी</b></span></p><p>शोएब बलोच ने कहा कि डॉक्टरों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई और प्रशासनिक दबाव डाला जा रहा है, जबकि वे केवल चिकित्सा कर्मियों की सुरक्षा को लेकर अपनी वैध चिंताएं उठा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि डॉक्टरों का आंदोलन किसी व्यक्तिगत या राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि पीड़ित महिला डॉक्टर को न्याय दिलाने, कार्यस्थल की सुरक्षा मजबूत करने, स्वास्थ्य क्षेत्र में पारदर्शिता लाने और भ्रष्टाचार व कुप्रबंधन के आरोपों को उजागर करने के लिए चलाया जा रहा है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने कहा कि यह हमला केवल एक महिला डॉक्टर पर नहीं, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा, चिकित्सा पेशे और सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों पर भी हमला है।</span></p><p><a href="https://www.tribuneindia.com/news/world/security-collapse-at-quetta-hospital-sparks-outrage-as-doctors-demand-justice/" target="_blank">जानकारी के अनुसार</a>, पीएमए नेतृत्व ने सिविल अस्पताल क्वेटा की सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियों की ओर भी ध्यान दिलाया। जिस सर्जिकल कॉम्प्लेक्स में हमला हुआ, वहां कई वार्ड और ऑपरेशन थिएटर मौजूद हैं और वहां पर्याप्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती होनी चाहिए थी। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि घटना के तुरंत बाद वहां कोई सुरक्षा कर्मी मौजूद नहीं था, जिससे अस्पताल प्रशासन की कार्यक्षमता और तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।</p><p><b>अधिकांश सीसीटीवी कैमरे खराब होने का आरोप</b></p><p>अस्पताल की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी चिंताएं सामने आई हैं। पीएमए अधिकारियों का आरोप है कि अधिकांश सीसीटीवी कैमरे खराब या निष्क्रिय थे। हमले से संबंधित फुटेज केवल ऑर्थोपेडिक वार्ड द्वारा निजी तौर पर लगाए गए कैमरों से ही उपलब्ध हो सकी।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">इन सुरक्षा विफलताओं का हवाला देते हुए एसोसिएशन ने पारदर्शी न्यायिक जांच, दोषियों की जवाबदेही तय करने और प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों के खिलाफ की जा रही दंडात्मक कार्रवाइयों को तत्काल वापस लेने की मांग की है।</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ क्वेटा अस्पताल में महिला डॉक्टर पर एसिड अटैक से मचा बवाल, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/trump-claims-iran-war-ended-tehran-denies-final-deal-4951 ]]></guid><title><![CDATA[ ट्रंप का बड़ा दावा- "आज ईरान के साथ युद्ध खत्म", तेहरान ने समझौते से किया इनकार ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/trump-claims-iran-war-ended-tehran-denies-final-deal-4951 ]]></link><pubDate><![CDATA[Fri, 12 Jun 2026 11:57:37 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ वॉशिंगटन, अमरीका: अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमरीका ने ईरान के साथ चल रहा युद्ध समाप्त कर दिया है और ईरान ने कभी परमाणु हथियार न बनाने पर सहमति जताई है। हालांकि, ईरान ने ट्र ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>वॉशिंगटन, अमरीका: </b>अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमरीका ने ईरान के साथ चल रहा युद्ध समाप्त कर दिया है और ईरान ने कभी परमाणु हथियार न बनाने पर सहमति जताई है। हालांकि, ईरान ने ट्रंप के इस दावे की पुष्टि नहीं की है और कहा है कि किसी भी समझौते पर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">डोनाल्ड ट्रंप ने जॉर्जिया के लेफ्टिनेंट गवर्नर बर्ट जोन्स के समर्थन में आयोजित एक वर्चुअल रैली को संबोधित करते हुए कहा, "हमने आज ईरान के साथ युद्ध समाप्त कर दिया है और उन्होंने परमाणु हथियार न रखने पर सहमति दी है।"</span></p><p><span style="font-size: 1rem;">ट्रंप ने यह भी कहा कि अमरीका और ईरान शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने के बेहद करीब हैं। उनके अनुसार, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस सप्ताहांत यूरोप में संभावित समझौता समारोह में शामिल हो सकते हैं।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;🇺🇸🇮🇷⚡️ — President Trump on Iran:&lt;br&gt;&lt;br&gt;We ended the war with Iran today, and they have agreed never to have a nuclear weapon, something that we insisted on. That was the whole purpose. That was 95% of it, and they&amp;#39;ve done it in the most powerful way you can do it. &lt;a href="https://t.co/5adsFp9Nvg"&gt;pic.twitter.com/5adsFp9Nvg&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Commentary Donald J. Trump Truth Social Posts On X (@TrumpTruthOnX) &lt;a href="https://x.com/TrumpTruthOnX/status/2065224230812434725?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 12, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><p><span style="font-size: 1rem;">हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने स्पष्ट किया कि समझौते को लेकर अभी कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकला है। उन्होंने कहा कि ईरान ने अभी तक किसी औपचारिक समझौते को मंजूरी नहीं दी है।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;The brutal U.S. attacks on Indian commercial vessels which have killed at least three Indian nationals, stand as clear evidence of America’s ongoing policy of armed robbery and State piracy.&lt;br&gt;&lt;br&gt;We extend our sympathies to the families and friends of the slain Indian sailors and…&lt;/p&gt;&amp;mdash; Esmaeil Baqaei (@IRIMFA_SPOX) &lt;a href="https://x.com/IRIMFA_SPOX/status/2065177891445355004?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 11, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><p><b><span style="font-size: 1rem;">ट्रंप पहले भी कई बार</span><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;कर चुके हैं समझौते का दावा</span></b></p><p>इस बीच, ईरानी समाचार एजेंसी Tasnim ने ट्रंप के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले दो महीनों में भी ट्रंप कई बार समझौता होने का दावा कर चुके हैं, इसलिए आधिकारिक ईरानी घोषणा से पहले ऐसे बयानों पर भरोसा नहीं किया जाना चाहिए।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर यह भी कहा कि बातचीत में प्रगति को देखते हुए उन्होंने ईरान पर प्रस्तावित सैन्य हमले और बमबारी को रद्द कर दिया है।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया में इज़राइल, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, तुर्किये और पाकिस्तान जैसे देशों की भी भूमिका रही है।&nbsp;</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;Media Claims of Finalized Iran-US Agreement Baseless &lt;br&gt;&lt;br&gt;A Tasnim report dismissed recent claims by a British outlet about a finalized draft agreement between Iran and the US as unfounded. &lt;a href="https://t.co/kvLOBWm1jP"&gt;https://t.co/kvLOBWm1jP&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Tasnim News Agency (@Tasnimnews_EN) &lt;a href="https://x.com/Tasnimnews_EN/status/2065123616992252343?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 11, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p><span style="font-size: 1rem;"> </span></p><p><b>कतर के दूत और ईरान के विदेश मंत्री के बीच कई मुद्दों पर सहमति</b><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p><span style="font-size: 1rem;">रिपोर्टों के अनुसार, कतर के दूत अली अल-थावादी और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच देर रात तक चली बातचीत में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनी है। हालांकि अंतिम मंजूरी ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई से मिलना अभी बाकी है।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;🚨 JUST IN: PRESIDENT TRUMP ANNOUNCES:&lt;br&gt;&lt;br&gt;“WE ENDED THE WAR WITH IRAN TODAY.”&lt;br&gt;&lt;br&gt;TRUMP ALSO SAYS THE DOCUMENTS ARE IN FINAL SHAPE AND A SIGNING WILL TAKE PLACE SOON. &lt;a href="https://t.co/lIxy0Ro73w"&gt;pic.twitter.com/lIxy0Ro73w&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Crypto News Hunters 🎯 (@CryptoNewsHntrs) &lt;a href="https://x.com/CryptoNewsHntrs/status/2065272312660635683?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 12, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ ट्रंप का बड़ा दावा- "आज ईरान के साथ युद्ध खत्म", तेहरान ने समझौते से किया इनकार ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/donald-trump-warning-to-iran-tehran-middle-east-tensions-4935 ]]></guid><title><![CDATA[ ईरान पर फिर गरजे डोनाल्ड ट्रंप, बोले- ‘अब तेहरान को अपनी गलतियों की कीमत चुकानी होगी’ ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/donald-trump-warning-to-iran-tehran-middle-east-tensions-4935 ]]></link><pubDate><![CDATA[Wed, 10 Jun 2026 17:27:15 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर सुर्खियों में है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर कड़ा बयान देते हुए कहा है कि तेहरान को अब अपनी नीतियों और फैसलों की कीमत चुकानी पड़ेगी। ट ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p>अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर सुर्खियों में है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर कड़ा बयान देते हुए कहा है कि तेहरान को अब अपनी नीतियों और फैसलों की कीमत चुकानी पड़ेगी। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य पूर्व में जारी संघर्ष 100 दिनों का आंकड़ा पार कर चुका है और क्षेत्रीय हालात अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाए हैं।</p><p>ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किए गए संदेश में दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमताओं को भारी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि ईरान की नौसेना और वायुसेना का बड़ा हिस्सा कमजोर हो चुका है और देश की रणनीतिक स्थिति पहले जैसी नहीं रही। ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरान ने कई महत्वपूर्ण अवसरों पर समझौते की दिशा में आगे बढ़ने के बजाय समय गंवाया, जिसका परिणाम अब उसे भुगतना पड़ सकता है।</p><h5 class=""><b>ट्रंप के बयान से बढ़ी कूटनीतिक हलचल</b></h5><p>अमेरिकी राष्ट्रपति के इस बयान ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह संदेश केवल ईरान के लिए चेतावनी नहीं है, बल्कि यह अमेरिका की भविष्य की रणनीति का भी संकेत हो सकता है।</p><p>ट्रंप ने कहा कि ईरान लंबे समय से केवल बयानबाजी कर रहा है, जबकि वास्तविक स्थिति उसके पक्ष में नहीं है। उन्होंने दावा किया कि यदि समय रहते समझौता होता, तो यह ईरान के लिए अधिक लाभकारी साबित हो सकता था।</p><h5 class=""><b>होर्मुज जलडमरूमध्य की घटना का भी किया जिक्र</b></h5><p>इससे पहले भी ट्रंप ईरान को लेकर सख्त रुख अपना चुके हैं। हाल ही में उन्होंने दावा किया था कि होर्मुज जलडमरूमध्य के पास गश्त कर रहे एक अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर पर हमला किया गया था। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि हेलीकॉप्टर में मौजूद दोनों पायलट सुरक्षित हैं।</p><p>ट्रंप ने उस घटना को गंभीर बताते हुए कहा था कि अमेरिका अपने सैन्य संसाधनों पर किसी भी प्रकार के हमले को नजरअंदाज नहीं करेगा और आवश्यक होने पर जवाबी कार्रवाई भी की जा सकती है।</p><h5 class=""><b>बार-बार समझौते का दावा, लेकिन नतीजा नहीं</b></h5><p>पिछले कई महीनों से डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ संभावित समझौते को लेकर लगातार बयान देते रहे हैं। कई मौकों पर उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच समझौता अंतिम चरण में है या ईरान बातचीत के लिए तैयार है।</p><p>हालांकि अब तक ऐसी किसी ठोस डील की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप के बयानों और वास्तविक कूटनीतिक स्थिति के बीच कई बार अंतर देखने को मिला है। यही कारण है कि उनके हालिया बयान को भी सावधानी से देखा जा रहा है।</p><h5 class=""><b>मध्य पूर्व की स्थिरता पर बढ़ी चिंता</b></h5><p>ईरान और अमेरिका के बीच तनाव केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र पर पड़ता है। तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार मार्ग और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे सीधे तौर पर इस तनाव से जुड़े हुए हैं।</p><p>विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच बयानबाजी और टकराव बढ़ता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी इसका असर पड़ सकता है।</p><h5 class=""><b>आगे क्या?</b></h5><p>फिलहाल दुनिया की नजरें अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हैं। जहां एक ओर ट्रंप कड़े संदेश दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों देशों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान खोजने की अपील कर रहा है।</p><p>आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या दोनों पक्ष बातचीत की दिशा में आगे बढ़ते हैं या फिर क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ ईरान पर फिर गरजे डोनाल्ड ट्रंप, बोले- ‘अब तेहरान को अपनी गलतियों की कीमत चुकानी होगी’ ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/israel-to-install-chhatrapati-shivaji-maharaj-statue-4924 ]]></guid><title><![CDATA[ इजरायल में लगेगी छत्रपति शिवाजी महाराज की भव्य प्रतिमा, भारतीय संस्कृति को मिलेगा वैश्विक सम्मान ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/israel-to-install-chhatrapati-shivaji-maharaj-statue-4924 ]]></link><pubDate><![CDATA[Tue, 09 Jun 2026 14:46:19 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ मुंबई: इजरायल ने छत्रपति शिवाजी महाराज के सम्मान में अपने किसी प्रमुख शहर में उनकी एक भव्य प्रतिमा स्थापित करने की योजना की घोषणा की है। इस परियोजना को भारत और इजरायल के बीच सांस्कृतिक और जन-जन के संब ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>मुंबई:</b> इजरायल ने छत्रपति शिवाजी महाराज के सम्मान में अपने किसी प्रमुख शहर में उनकी एक भव्य प्रतिमा स्थापित करने की योजना की घोषणा की है। इस परियोजना को भारत और इजरायल के बीच सांस्कृतिक और जन-जन के संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">शिवराज्याभिषेक दिवस के अवसर पर मुंबई स्थित इजरायल के महावाणिज्य दूत यानिव रेवाच ने इस प्रस्ताव की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह प्रतिमा केवल एक स्मारक नहीं होगी, बल्कि दोनों देशों के लोगों को जोड़ने वाली दीर्घकालिक परियोजना साबित होगी।</span></p><p>यानिव रेवाच ने कहा, "हम अच्छी तरह समझते हैं कि छत्रपति शिवाजी महाराज का भारत के लिए कितना बड़ा महत्व है। हमारी योजना महाराज की एक विशाल प्रतिमा तैयार कर उसे इजरायल के किसी बड़े शहर में स्थापित करने की है। यह सिर्फ एक सामान्य परियोजना नहीं, बल्कि लंबे समय तक चलने वाली पहल होगी, जो भारतीय और इजरायली लोगों को आपस में जोड़ने का कार्य करेगी।"</p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;&lt;a href="https://x.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#WATCH&lt;/a&gt; | Mumbai: Regarding his meeting with Maharashtra CM Devendra Fadnavis, Consul General of Israel to Mumbai, Yaniv Revach, says, &amp;quot;...we understand exactly what the influence is and how important Chhatrapati Shivaji Maharaj is to India... the idea was to build the big statue… &lt;a href="https://t.co/yLTw8K4LIO"&gt;pic.twitter.com/yLTw8K4LIO&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; ANI (@ANI) &lt;a href="https://x.com/ANI/status/2063239946362830877?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 6, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><p><b>छत्रपति शिवाजी की प्रतिमा दोनों देशों के मजबूत संबंधों का प्रतीक</b></p><p><span style="font-size: 1rem;">यानिव रेवाच&nbsp;</span>ने बताया कि इजरायल में छत्रपति शिवाजी महाराज के बारे में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। उनके अनुसार, भारत की यात्रा के दौरान उन्होंने देखा कि भारतीय लोगों के मन में इजरायल और उसके राष्ट्रीय नायकों के प्रति गहरा सम्मान है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">इससे पहले, यानिव रेवाच ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को लिखे एक पत्र में कहा था कि इजरायल में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा दोनों देशों के मजबूत संबंधों का प्रतीक बनेगी।</span><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;</span></p><p>उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि महाराष्ट्र और भारतीय यहूदी समुदाय के ऐतिहासिक संबंध रहे हैं, जिनके वंशज आज इजरायली समाज में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">इजरायल के महावाणिज्य दूतावास ने कहा कि मित्रता और सांस्कृतिक सहयोग की इसी भावना के तहत इजरायल में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा स्थापित करने का निर्णय लिया गया है।</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ इजरायल में लगेगी छत्रपति शिवाजी महाराज की भव्य प्रतिमा, भारतीय संस्कृति को मिलेगा वैश्विक सम्मान ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/mt-marivex-fire-24-indian-seafarers-safe-4917 ]]></guid><title><![CDATA[ होर्मुज जलडमरूमध्य के दक्षिण में भारतीय नाविकों वाले जहाज में आग, सभी 24 सुरक्षित ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/mt-marivex-fire-24-indian-seafarers-safe-4917 ]]></link><pubDate><![CDATA[Mon, 08 Jun 2026 18:45:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ नई दिल्ली: बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय (एमओपीएसडब्ल्यू) ने सोमवार को पुष्टि की कि एमटी मेरिवेक्स नामक जहाज में होर्मुज जलडमरूमध्य के दक्षिण में आग लगने की घटना हुई है। जहाज पर सवार सभी 24  ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>नई दिल्ली:</b> बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय (एमओपीएसडब्ल्यू) ने सोमवार को पुष्टि की कि एमटी मेरिवेक्स नामक जहाज में होर्मुज जलडमरूमध्य के दक्षिण में आग लगने की घटना हुई है। जहाज पर सवार सभी 24 भारतीय नाविक सुरक्षित हैं।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">पश्चिम एशिया की स्थिति पर आयोजित अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग में शिपिंग डिवीजन के निदेशक ओपेश कुमार शर्मा ने बताया कि आग लगने की सूचना सोमवार दोपहर करीब 1:30 बजे प्राप्त हुई थी।</span></p><p>उन्होंने कहा, "हमें जो प्रारंभिक जानकारी मिली है, उसके अनुसार सभी भारतीय नाविक फिलहाल सुरक्षित हैं।"&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">ओपेश कुमार शर्मा ने बताया कि मंत्रालय भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विदेश मंत्रालय, विदेशों में भारतीय मिशनों, भारतीय नौसेना और रक्षा मंत्रालय के साथ लगातार संपर्क में है।</span></p><p><b>सटीक जानकारी जुटाने और जांच का काम जारी- ओपेश कुमार</b></p><p><span style="font-size: 1rem;">ओपेश कुमार शर्मा&nbsp;</span>ने कहा कि मंत्रालय जहाज के मालिकों से भी संपर्क में है और घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही ओमान स्थित भारतीय मिशन से भी लगातार समन्वय किया जा रहा है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">जब उनसे पूछा गया कि क्या जहाज किसी प्रोजेक्टाइल या मिसाइल की चपेट में आया था, तो उन्होंने कहा कि इस संबंध में अभी सटीक जानकारी जुटाई जा रही है और जांच जारी है।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;VIDEO | Delhi: Addressing the Inter-Ministerial Briefing on Recent Developments in West Asia, Director in the Ministry of Ports, Shipping and Waterways, Opesh Kumar Sharma said, &amp;quot;There has been a recent report that at around 1:30 pm today, a fire broke out on the vessel MT Merry… &lt;a href="https://t.co/fyEoFAVXiQ"&gt;pic.twitter.com/fyEoFAVXiQ&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Press Trust of India (@PTI_News) &lt;a href="https://x.com/PTI_News/status/2063937743106048172?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 8, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p><b>जहाज पर केवल भारतीय नाविक ही सवार थे</b><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p><span style="font-size: 1rem;">ओपेश कुमार शर्मा&nbsp;</span>ने बताया कि जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से काफी दक्षिण में और सुरक्षित दूरी पर था। यह एक तेल टैंकर है, लेकिन घटना के समय इसमें कोई कार्गो नहीं था और यह बैलेस्ट स्थिति में चल रहा था। जहाज पर केवल भारतीय नाविक ही सवार थे।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">शर्मा ने बताया कि महानिदेशालय शिपिंग (डीजी शिपिंग) के कंट्रोल रूम ने सक्रिय होने के बाद से अब तक 12,020 कॉल और 26,832 से अधिक ईमेल संभाले हैं। पिछले 96 घंटों में नाविकों, उनके परिवारों और समुद्री क्षेत्र से जुड़े लोगों की ओर से 390 कॉल और 968 ईमेल प्राप्त हुए हैं।</span></p><p><b>सोशल मीडिया पर साझा की गई जानकारी</b><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p><span style="font-size: 1rem;">निदेशक ओपेश कुमार शर्मा ने</span>&nbsp;कहा कि मंत्रालय अब तक 3,506 से अधिक भारतीय नाविकों की सुरक्षित स्वदेश वापसी सुनिश्चित कर चुका है, जिनमें पिछले 96 घंटों में लौटे 32 नाविक भी शामिल हैं।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">इस बीच, फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया (एफएसयूआई) ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर बताया था कि ओमान तट के पास जहाज पर मौजूद 24 भारतीय नाविकों ने तत्काल सहायता की मांग की है।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">इसके जवाब में ओमान स्थित भारतीय दूतावास ने बताया कि उसने जहाज पर मौजूद नाविकों से सीधा संपर्क स्थापित कर लिया है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है।</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ होर्मुज जलडमरूमध्य के दक्षिण में भारतीय नाविकों वाले जहाज में आग, सभी 24 सुरक्षित ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/ukpnp-protest-over-pok-human-rights-concerns-4915 ]]></guid><title><![CDATA[ PoJK में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ पाकिस्तानी वाणिज्य दूतावास के बाहर प्रदर्शन ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/ukpnp-protest-over-pok-human-rights-concerns-4915 ]]></link><pubDate><![CDATA[Mon, 08 Jun 2026 16:41:41 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ लीड्स, ब्रिटेन: पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में मानवाधिकारों की स्थिति को लेकर ब्रिटेन के शहर लीड्स में कश्मीरी प्रवासी समुदाय के सदस्यों ने एक बैठक आयोजित की। इस दौरान प्रतिभागियों ने ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>लीड्स, ब्रिटेन:</b> पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में मानवाधिकारों की स्थिति को लेकर ब्रिटेन के शहर लीड्स में कश्मीरी प्रवासी समुदाय के सदस्यों ने एक बैठक आयोजित की। इस दौरान प्रतिभागियों ने आरोप लगाया कि वहां नागरिक स्वतंत्रताओं का दमन किया जा रहा है और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग किया गया है।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">बैठक में ब्रिटिश राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, कश्मीरी समुदाय के नेताओं और निर्वाचित पार्षदों ने भाग लिया।</span></p><p>यह बैठक ऐसे समय हुई जब PoJK में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के नेतृत्व में राजनीतिक प्रतिनिधित्व और शासन व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों में कम से कम 11 लोगों की मौत हुई है और कई अन्य घायल हुए हैं।</p><p><b>कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की निंदा की गई</b></p><p>कार्यक्रम में वक्ताओं ने विशेष रूप से रावलाकोट और आसपास के क्षेत्रों में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण प्रदर्शन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं। साथ ही प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आंसू गैस और अन्य बल प्रयोग किए जाने की भी बात कही गई।</p><p><b>अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हालात पर नज़र रखने का आग्रह किया गया</b></p><p>वक्ताओं ने प्रभावित परिवारों के लिए न्याय की मांग की और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से क्षेत्र की स्थिति पर करीबी नजर रखने का आग्रह किया।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">इस बीच यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (UKPNP) ने 8 जून को पाकिस्तानी वाणिज्य दूतावास के बाहर प्रदर्शन करने की घोषणा की है। संगठन का कहना है कि इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कश्मीरी राजनीतिक कार्यकर्ता शामिल होंगे।</span></p><p><span style="font-size: 1rem;"><b>प्रदर्शन का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करना है</b></span></p><p>प्रदर्शन का उद्देश्य PoJK की स्थिति की ओर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करना और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग उठाना है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">आयोजकों ने घटनाओं की निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग करते हुए संयुक्त राष्ट्र, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों, विदेशी सरकारों और वैश्विक मीडिया से न्याय और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के प्रयासों का समर्थन करने की अपील की।</span></p><p>UKPNP ने कहा कि राजनीतिक और सामाजिक विवादों का समाधान बल प्रयोग के बजाय संवाद, लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के अनुरूप किया जाना चाहिए। संगठन ने यह भी दोहराया कि शांतिपूर्ण विरोध लोकतांत्रिक अधिकार है और प्रदर्शनकारियों से कानून का पालन करते हुए शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने की अपील की।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ PoJK में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ पाकिस्तानी वाणिज्य दूतावास के बाहर प्रदर्शन ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/trump-urges-israel-iran-stop-shooting-4914 ]]></guid><title><![CDATA[ डोनाल्ड ट्रंप की ईरान-इजरायल से अपील, 'तुरंत बंद करें गोलीबारी' ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/trump-urges-israel-iran-stop-shooting-4914 ]]></link><pubDate><![CDATA[Mon, 08 Jun 2026 15:49:16 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ वॉशिंगटन, तेल अवीव: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और इजरायल-ईरान के बीच फिर शुरू हुई सैन्य झड़पों के बीच अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों देशों से तुरंत संघर्ष रोकने की अपील की है।&nbsp;डोनाल्ड ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>वॉशिंगटन, तेल अवीव:</b> मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और इजरायल-ईरान के बीच फिर शुरू हुई सैन्य झड़पों के बीच अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों देशों से तुरंत संघर्ष रोकने की अपील की है।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा, "इजरायल और ईरान को तुरंत गोलीबारी बंद करनी चाहिए।"</span></p><p>सीजफायर के बाद सोमवार को इजरायल और ईरान के बीच फिर से हमले और जवाबी हमले हुए, जिससे पूरे मध्य पूर्व में व्यापक क्षेत्रीय युद्ध की आशंका बढ़ गई है। 8 अप्रैल को युद्धविराम लागू होने के बाद यह दोनों देशों के बीच पहली बड़ी सैन्य भिड़ंत मानी जा रही है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">इस बीच, ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने भी इजरायल पर हमले की जिम्मेदारी ली है। यमन स्थित हूती समूह ने दावा किया कि उसने इजरायल को निशाना बनाया और चेतावनी दी कि लाल सागर में इजरायल से जुड़े जहाज फिर से उनके निशाने पर होंगे।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;Israel and Iran must immediately stop “shooting.” President DONALD J. TRUMP&lt;br&gt;&lt;br&gt;( TruthSocial: Jun 8 2026, 5:36 AM ET )​​​‍​​‌‍​​‌‍​​​​​​​‌‍​​​​​​​​‌‍​​‌‍​​​​‌‍​​​​​​​​​‌‍​‌‍​​​​​​​​​​‌‍​​​​​‌‍​​​​​​‌‍​‌‍​​​‌‍​​​​‌‍​​​​​​​​‌‍​​​​​​​​​‌‍​​‌‍ &lt;a href="https://t.co/UH64jBwk6u"&gt;pic.twitter.com/UH64jBwk6u&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Commentary Donald J. Trump Truth Social Posts On X (@TrumpTruthOnX) &lt;a href="https://x.com/TrumpTruthOnX/status/2063918307208765721?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 8, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p><b>रविवार को बिना पूर्व चेतावनी के हुए थे हवाई हमले</b></p><p>तनाव उस समय और बढ़ गया जब इजरायल ने रविवार को बेरूत के दक्षिणी उपनगरों में बिना पूर्व चेतावनी के हवाई हमले किए। इसके बाद तेहरान ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी थी और फिर दोनों पक्षों के बीच मिसाइल हमलों का दौर शुरू हो गया।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात जल्द नहीं संभले तो यह संघर्ष पूरे क्षेत्र को एक बड़े युद्ध की ओर धकेल सकता है, जिसका असर वैश्विक सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ डोनाल्ड ट्रंप की ईरान-इजरायल से अपील, 'तुरंत बंद करें गोलीबारी' ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/india-advisory-indians-leave-iran-immediately-4913 ]]></guid><title><![CDATA[ भारत सरकार की नई एडवाइजरी, ईरान में मौजूद भारतीयों से तुरंत देश छोड़ने की अपील ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/india-advisory-indians-leave-iran-immediately-4913 ]]></link><pubDate><![CDATA[Mon, 08 Jun 2026 16:30:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ नई दिल्ली: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान-इजरायल के बीच ताजा सैन्य टकराव के बीच भारत सरकार ने ईरान में मौजूद भारतीय नागरिकों के लिए नई एडवाइजरी जारी की है। भारत ने अपने नागरिकों को ईरान की यात्रा स ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>नई दिल्ली:</b> मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान-इजरायल के बीच ताजा सैन्य टकराव के बीच भारत सरकार ने ईरान में मौजूद भारतीय नागरिकों के लिए नई एडवाइजरी जारी की है। भारत ने अपने नागरिकों को ईरान की यात्रा से बचने और वहां मौजूद लोगों को जल्द से जल्द देश छोड़ने की सलाह दी है।&nbsp;</span></p><p><span style="font-size: 1rem;">तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने एक बयान जारी कर कहा कि क्षेत्र की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए भारतीय नागरिक ईरान की यात्रा न करें। साथ ही जो भारतीय वर्तमान में ईरान में हैं, उन्हें उपलब्ध किसी भी परिवहन माध्यम से तुरंत वहां से निकलने की सलाह दी गई है।</span></p><p><span style="font-size: 1rem;"><b>ईरान-इजरायल के बीच हमलों का नया दौर शुरू</b></span></p><p>यह सलाह ऐसे समय में जारी की गई है जब ईरान और इजरायल के बीच मिसाइल हमलों का नया दौर शुरू हो गया है। ईरान द्वारा उत्तरी इजरायल पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागे जाने के कुछ घंटों बाद इजरायली वायुसेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए पश्चिमी और मध्य ईरान में कई सैन्य ठिकानों पर हमले किए।<span style="font-size: 1rem;">इजरायली रक्षा बल (IDF) ने कहा कि उसकी वायुसेना ने ईरानी शासन से जुड़े सैन्य लक्ष्यों को निशाना बनाया है।</span></p><p><img src="https://media.gtcbharat.com/wp-content/uploads/2026/06/Advisory_37aa878963486b1ce24a032666b81023_1178X1356.webp" style="width: 910.383px;"><span style="font-size: 1rem;"><br></span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;STORY | India issues fresh Iran travel warning, urges citizens to leave&lt;br&gt;&lt;br&gt;India on Monday reiterated its warning to its nationals in Iran to avoid any travel to the country and exit the region by available means of transport.&lt;br&gt;&lt;br&gt;The advisory comes in view of the latest developments… &lt;a href="https://t.co/ovl0STmhqu"&gt;pic.twitter.com/ovl0STmhqu&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Press Trust of India (@PTI_News) &lt;a href="https://x.com/PTI_News/status/2063895144890617959?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 8, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><p><span style="font-size: 1rem;"><b>बेरूत में कई विस्फोटों की खबरें आई सामने</b></span></p><p>इस बीच, बेरूत में भी कई विस्फोटों की खबरें सामने आई हैं। वहीं, अमेरिकी विदेश विभाग ने जॉर्डन में मौजूद अपने नागरिकों के लिए सुरक्षा चेतावनी जारी की है। विभाग ने कहा कि जॉर्डन के हवाई क्षेत्र में मिसाइल, ड्रोन या रॉकेट देखे जाने की रिपोर्ट मिली है। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने और स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों पर नजर रखने को कहा गया है।</p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;🎯STRUCK: Several infrastructure sites at the petrochemical complex in Mahshahr, in southwestern Iran. &lt;br&gt;&lt;br&gt;These facilities were used by the armed forces of the Iranian terror regime to produce and export raw materials for weapons production.&lt;br&gt;&lt;br&gt;The targeted infrastructure produced…&lt;/p&gt;&amp;mdash; Israel Defense Forces (@IDF) &lt;a href="https://x.com/IDF/status/2063929078860730753?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 8, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><p><b>तनाव को बढ़ने से रोकने के लिए बातचीत का मौका देना चाहिए</b></p><p>इसी दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कथित तौर पर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से ईरान के हमले का तत्काल जवाब न देने और कूटनीतिक प्रयासों को और समय देने का आग्रह किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ट्रंप का मानना है कि तनाव को और बढ़ने से रोकने के लिए बातचीत को मौका दिया जाना चाहिए।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">ईरान का कहना है कि उसका मिसाइल हमला बेरूत में हुए इजरायली हमले के जवाब में किया गया था। वहीं इजरायल ने इसे अपनी सुरक्षा के खिलाफ हमला बताते हुए जवाबी कार्रवाई की है।</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ भारत सरकार की नई एडवाइजरी, ईरान में मौजूद भारतीयों से तुरंत देश छोड़ने की अपील ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/india-indonesia-joint-commission-strategic-partnership-4904 ]]></guid><title><![CDATA[ रक्षा, व्यापार और समुद्री सहयोग बढ़ाने पर भारत-इंडोनेशिया में सहमति ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/india-indonesia-joint-commission-strategic-partnership-4904 ]]></link><pubDate><![CDATA[Sun, 07 Jun 2026 17:45:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ नई दिल्ली: एशिया के दो प्रमुख लोकतांत्रिक देशों भारत और इंडोनेशिया के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने इंडोनेशियाई समकक्ष ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>नई दिल्ली: </b>एशिया के दो प्रमुख लोकतांत्रिक देशों भारत और इंडोनेशिया के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने इंडोनेशियाई समकक्ष सुजियोनो के साथ भारत-इंडोनेशिया संयुक्त आयोग (जेसीएम) की आठवीं बैठक की सह-अध्यक्षता की।</span></p><p>इस उच्चस्तरीय बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी (कॉम्प्रिहेन्सिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप) की प्रगति की समीक्षा की गई, जिसने हाल के वर्षों में उल्लेखनीय गति हासिल की है।</p><p><b>एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया पर साझा की जानकारी&nbsp;</b></p><p>एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा, "विदेश मंत्री सुजियोनो के साथ भारत-इंडोनेशिया संयुक्त आयोग की आठवीं बैठक की सह-अध्यक्षता कर खुशी हुई। हमारी व्यापक रणनीतिक साझेदारी ने हाल के वर्षों में मजबूत प्रगति की है। हमने राजनीतिक, रक्षा एवं सुरक्षा, समुद्री सहयोग, व्यापार, फिनटेक, स्वास्थ्य, फार्मास्यूटिकल्स, उर्वरक, महत्वपूर्ण खनिज, पर्यटन, शिक्षा और सांस्कृतिक सहयोग पर सार्थक चर्चा की।"</p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;A pleasure to co-chair the 8th India - Indonesia Joint Commission meeting alongside FM Sugiono &lt;a href="https://x.com/Kemlu_RI?ref_src=twsrc^tfw"&gt;@Kemlu_RI&lt;/a&gt;. &lt;br&gt;&lt;br&gt;Our Comprehensive Strategic Partnership has witnessed a strong growth in recent years. &lt;br&gt;&lt;br&gt;Held substantive discussions on our political, defence &amp;amp; security, maritime &amp;amp;… &lt;a href="https://t.co/U39U3rCtj8"&gt;pic.twitter.com/U39U3rCtj8&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) &lt;a href="https://x.com/DrSJaishankar/status/2063566101796319444?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 7, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><p><b>दोनों मंत्रियों ने बदलते क्षेत्रीय परिदृश्य पर अपने विचार साझा किए</b></p><p>द्विपक्षीय सहयोग के अलावा बैठक में क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हुआ। दोनों मंत्रियों ने बदलते क्षेत्रीय परिदृश्य पर अपने विचार साझा किए और बहुपक्षीय सहयोग को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।</p><p>वार्ता का एक प्रमुख केंद्र भारत-आसियान संबंधों को और गहरा करना रहा। भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति के तहत आसियान में इंडोनेशिया की महत्वपूर्ण भूमिका को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता, समृद्धि और नियम-आधारित व्यवस्था के लिए बेहद अहम माना गया।</p><p><b>बैठक में कई क्षेत्रों के विषय में विस्तार से हुई चर्चा</b></p><p class="grey-bg-red"><b><i>बैठक के दौरान राजनीतिक, रक्षा और सुरक्षा सहयोग, समुद्री एवं शिपिंग क्षेत्र, व्यापार, फिनटेक, उर्वरक, दवा उद्योग और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने पर व्यापक चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने सांस्कृतिक आदान-प्रदान, पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग को भी बढ़ाने पर जोर दिया, ताकि दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क और मजबूत हो सके।</i></b></p><p><b>विदेश मंत्री सुजियोनो ने बुनियादी ढांचे की बेहतरी पर की चर्चा</b></p><p>वहीं इंडोनेशिया के विदेश मंत्री सुजियोनो ने कहा कि नई दिल्ली में हुई बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, समुद्री सुरक्षा, डिजिटल कनेक्टिविटी, बुनियादी ढांचा, स्वास्थ्य और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हुई।</p><p>उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रस्तावित जकार्ता यात्रा का स्वागत करते हुए कहा कि यह दौरा दोनों देशों के सहयोग को और गहरा करने तथा जनता को ठोस लाभ पहुंचाने का अवसर प्रदान करेगा।</p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;Delighted to co-chair the 8th Indonesia–India Joint Commission Meeting with &lt;a href="https://x.com/DrSJaishankar?ref_src=twsrc^tfw"&gt;@DrSJaishankar&lt;/a&gt;, External Affairs Minister of India in New Delhi (7/6).&lt;br&gt;&lt;br&gt;We discussed key priorities under the Indonesia–India Comprehensive Strategic Partnership, from trade and maritime security to… &lt;a href="https://t.co/FXlRN02KXb"&gt;pic.twitter.com/FXlRN02KXb&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Menteri Luar Negeri Republik Indonesia (@Menlu_RI) &lt;a href="https://x.com/Menlu_RI/status/2063549246251700258?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 7, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><p><b>यह दौरा द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने में सहायक साबित होगा- विशेषज्ञ&nbsp;</b></p><p>एस. जयशंकर ने यह भी कहा कि वर्ष 2025 में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो का भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होना दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को नई ऊर्जा देने वाला साबित हुआ।</p><p>यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत और इंडोनेशिया दोनों आसियान-भारत व्यापक रणनीतिक साझेदारी (2026-2030) सहित कई क्षेत्रीय पहलों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह दौरा बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण साबित होगा।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ रक्षा, व्यापार और समुद्री सहयोग बढ़ाने पर भारत-इंडोनेशिया में सहमति ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/nepal-fm-shishir-khanal-india-talks-relations-4902 ]]></guid><title><![CDATA[ भारत-नेपाल के बीच फिर बढ़ेगी राजनीतिक सक्रियता, शिशिर खनाल ने जताई उम्मीद ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/nepal-fm-shishir-khanal-india-talks-relations-4902 ]]></link><pubDate><![CDATA[Sun, 07 Jun 2026 15:30:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ नई दिल्ली: नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने भारत के साथ लंबे समय से लंबित द्विपक्षीय मुद्दों के समाधान के लिए निष्क्रिय पड़े तंत्रों को फिर से सक्रिय करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। साथ ही उन्होंन ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>नई दिल्ली:</b> नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने भारत के साथ लंबे समय से लंबित द्विपक्षीय मुद्दों के समाधान के लिए निष्क्रिय पड़े तंत्रों को फिर से सक्रिय करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। साथ ही उन्होंने दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय राजनीतिक संवाद और यात्राओं को दोबारा शुरू करने की वकालत की है। यह बात उन्होंने भारत की अपनी तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा के समापन पर कही।</span></p><p>मीडिया से बातचीत में शिशिर खनाल ने कहा कि भारत और नेपाल के बीच कई द्विपक्षीय तंत्र लंबे समय से निष्क्रिय पड़े हैं, लेकिन दोनों देशों में सकारात्मक संवाद की इच्छा मौजूद है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने बताया कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के साथ हुई बैठकों में दोनों पक्षों ने सहमति जताई कि द्विपक्षीय मुद्दों के समाधान के लिए मौजूदा तंत्रों का प्रभावी उपयोग किया जाना चाहिए।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;&lt;a href="https://x.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#WATCH&lt;/a&gt; | Delhi: Nepal&amp;#39;s Foreign Minister Shisir Khanal says, &amp;quot;The boundary issues, these are very long, outstanding issues. So what we proposed is that even on the boundary issues, there are mechanisms that existed between the two countries, but many of these mechanisms have… &lt;a href="https://t.co/Obgi2S78s0"&gt;pic.twitter.com/Obgi2S78s0&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; ANI (@ANI) &lt;a href="https://x.com/ANI/status/2063515899043487863?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 7, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;VIDEO | Delhi: Nepal&amp;#39;s Foreign Minister Shisir Khanal says, &amp;quot;The meeting with the External Affairs Minister Jaishankar was extremely positive. We discussed a variety of issues that exist between Nepal and India, a spirit of collaboration and strengthening of our bilateral… &lt;a href="https://t.co/Wq3XgMeABK"&gt;pic.twitter.com/Wq3XgMeABK&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Press Trust of India (@PTI_News) &lt;a href="https://x.com/PTI_News/status/2063526824672641085?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 7, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p><b>सीमा से जुड़े मुद्दों पर मौजूदा तंत्रों का उपयोग किया जाए- शिशिर खनाल</b></p><p>शिशिर खनाल ने कहा, "सीमा से जुड़े मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं। हमने सुझाव दिया है कि इन मुद्दों पर भी दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तंत्रों का उपयोग किया जाए। कई तंत्र निष्क्रिय हैं, हालांकि एक तंत्र अभी भी सक्रिय रूप से काम कर रहा है और हम उसके प्रयासों की सराहना करते हैं। दोनों पक्षों की भावना यही है कि बातचीत की मेज पर बैठकर मुद्दों पर चर्चा करने में कोई नुकसान नहीं है।"</p><p>उन्होंने भारत-नेपाल संबंधों को गतिशील बताते हुए उम्मीद जताई कि दिल्ली में हुई चर्चाओं के सकारात्मक परिणाम आने वाले महीनों में देखने को मिलेंगे।</p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;VIDEO | Delhi: Nepal&amp;#39;s Foreign Minister Shisir Khanal says, &amp;quot;We look at India with an open heart, clear eyes, and a single transparent agenda. The economic transformation of Nepal. When we look across the border, we see a rising India. An India that has fundamentally and… &lt;a href="https://t.co/DwqzjVrF8m"&gt;pic.twitter.com/DwqzjVrF8m&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Press Trust of India (@PTI_News) &lt;a href="https://x.com/PTI_News/status/2063508991196516805?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 7, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><p><b>शिशिर खनाल के भारत दौरे के दो मुख्य उद्देश्य हैं</b></p><p>शिशिर खनाल ने बताया कि उनकी यात्रा के दो प्रमुख उद्देश्य थे। पहला, पिछले करीब दो वर्षों से रुकी हुई उच्चस्तरीय राजनीतिक यात्राओं को फिर से शुरू करना और दूसरा, प्रधानमंत्री बलेंद्र "बालेन" शाह के नेतृत्व वाली नई सरकार की प्राथमिकताओं से भारत को अवगत कराना।</p><p>उन्होंने कहा, "करीब दो वर्ष पहले दोनों देशों के बीच आखिरी उच्चस्तरीय यात्रा हुई थी। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, विदेश मंत्री और उनकी टीम के साथ हमारी बैठकें बेहद सकारात्मक और सार्थक रहीं। हमने कनेक्टिविटी, द्विपक्षीय संबंधों, ऊर्जा और बहुपक्षीय सहयोग समेत कई विषयों पर चर्चा की।</p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;Delhi: Nepal&amp;#39;s Foreign Minister Shishir Khanal says, &amp;quot;We look at India with an open heart, clear eyes and a single transparent agenda, the economic transformation of Nepal. When we look across the border, we see a rising India, an India that has fundamentally and beautifully… &lt;a href="https://t.co/DaAHXohwlG"&gt;pic.twitter.com/DaAHXohwlG&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; IANS (@ians_india) &lt;a href="https://x.com/ians_india/status/2063512885243027672?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 7, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><p><b>जनकपुर-अयोध्या रेल संपर्क परियोजना का विशेष उल्लेख</b>&nbsp;</p><p>कनेक्टिविटी को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने जनकपुर-अयोध्या रेल संपर्क परियोजना का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नेपाल इस परियोजना को जल्द शुरू होते देखना चाहता है।</p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;&lt;a href="https://x.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#WATCH&lt;/a&gt; | Delhi: Nepal&amp;#39;s Foreign Minister Shisir Khanal says, &amp;quot;We hope to see Janakpur-Ayodhya rail connectivity very soon. That&amp;#39;s something we discussed. We are very eager to see that resume from Janakpur and through that to other areas as well.&amp;quot;&lt;br&gt;&lt;br&gt;On the expected visit by Nepal&amp;#39;s… &lt;a href="https://t.co/z75yikVYNg"&gt;pic.twitter.com/z75yikVYNg&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; ANI (@ANI) &lt;a href="https://x.com/ANI/status/2063518941042073786?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 7, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><p><b>"हम उम्मीद करते हैं कि जनकपुर-अयोध्या रेल संपर्क जल्द शुरू होगा"</b></p><p>शिशिर खनाल ने कहा, "हम उम्मीद करते हैं कि जनकपुर-अयोध्या रेल संपर्क जल्द शुरू होगा। इस विषय पर हमारी विस्तृत चर्चा हुई है। हम चाहते हैं कि यह रेल सेवा जल्द शुरू हो और भविष्य में अन्य क्षेत्रों तक भी इसका विस्तार हो।" उन्होंने विश्वास जताया कि उनकी यह यात्रा भारत और नेपाल के बीच नियमित उच्चस्तरीय संवाद की नई शुरुआत साबित होगी।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ भारत-नेपाल के बीच फिर बढ़ेगी राजनीतिक सक्रियता, शिशिर खनाल ने जताई उम्मीद ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/us-guard-act-targets-chinese-robots-national-security-4884 ]]></guid><title><![CDATA[ चीनी रोबोट्स पर अमेरिका की सख्ती, आयात प्रतिबंध लगाने के लिए नया विधेयक पेश ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/us-guard-act-targets-chinese-robots-national-security-4884 ]]></link><pubDate><![CDATA[Fri, 05 Jun 2026 15:50:04 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ वॉशिंगटन डीसी, अमरीका: अमरीका में दोनों प्रमुख दलों के सांसदों के एक समूह ने GUARD Act (Guarding the US Against Adversarial Robotics Dominance Act) नामक एक नया विधेयक पेश किया है। इस प्रस्तावित कानून  ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>वॉशिंगटन डीसी, अमरीका: </b>अमरीका में दोनों प्रमुख दलों के सांसदों के एक समूह ने <b>GUARD Act (Guarding the US Against Adversarial Robotics Dominance Act)</b> नामक एक नया विधेयक पेश किया है। इस प्रस्तावित कानून के तहत चीन और अन्य प्रतिद्वंद्वी देशों में बने रोबोट्स की राष्ट्रीय सुरक्षा समीक्षा की जाएगी और जरूरत पड़ने पर उनके&nbsp;</span>अमरीका<span style="font-size: 1rem;">&nbsp;में आयात पर प्रतिबंध लगाया जा सकेगा।</span></p><p>अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की <b>House Select Committee on China</b> के अनुसार, यह विधेयक समिति के अध्यक्ष <b>John Moolenaar, Jay Obernolte</b> और <b>Jennifer McClellan</b> द्वारा पेश किया गया है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">जॉन मूलेनार ने कहा कि चीन में निर्मित रोबोट अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और अमेरिकी श्रमिकों के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं।</span></p><p><b>जासूसी के लिए इस्तेमाल हो सकती हैं प्रणालियां-&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">जॉन मूलेनार</span></b></p><p>जॉन मूलेनार&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">का आरोप है कि इन प्रणालियों में ऐसी कमजोरियां हो सकती हैं जिनका इस्तेमाल जासूसी के लिए किया जा सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि चीन की रोबोटिक्स तकनीक को अमेरिका में गहराई तक स्थापित होने देना खतरनाक साबित हो सकता है।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">विधेयक के समर्थकों का कहना है कि कुछ चीनी रोबोटिक्स कंपनियां, विशेष रूप से <b>Unitree Robotics</b>, भारी सरकारी सब्सिडी का लाभ उठाकर अपने उत्पाद बेहद कम कीमत पर बेच रही हैं। उनका दावा है कि इससे अमेरिकी रोबोटिक्स उद्योग को नुकसान पहुंच सकता है और चीन पर तकनीकी निर्भरता बढ़ सकती है।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;A bipartisan group of lawmakers introduced legislation to block the importation of robots made in China, as experts sound the alarm over security risks from advanced robots made by U.S. rivals. &lt;a href="https://t.co/J9wyIvKE0c"&gt;https://t.co/J9wyIvKE0c&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; The Washington Times (@WashTimes) &lt;a href="https://x.com/WashTimes/status/2062516029851406829?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 4, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p><b>संचार उपकरणों और सेवाओं को सुरक्षित रखना जरूरी</b><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p>जे ओबरनोल्टे ने कहा कि जैसे-जैसे रोबोटिक्स अमेरिकी अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा बन रही है, वैसे-वैसे इन प्रणालियों को संचालित करने वाले संचार उपकरणों और सेवाओं को सुरक्षित रखना जरूरी हो गया है। उनके अनुसार <b>GUARD Act</b> राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ घरेलू रोबोटिक्स नवाचार को भी बढ़ावा देगा।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">जेनिफर मैक्लेलन ने कहा कि अमरीका&nbsp;को चीन, रूस, ईरान और उत्तर कोरिया जैसे देशों से उत्पन्न होने वाले संभावित खतरों के प्रति सतर्क रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि सुरक्षा जोखिम पैदा करने वाले उपकरणों को घरों, कार्यालयों और सार्वजनिक स्थानों से दूर रखा जाना चाहिए।</span></p><p><b>'प्रतिद्वंद्वी देशों में बने ह्यूमनॉइड&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">रोबोट्स की जांच करनी होगी'</span></b></p><p class="grey-bg-red"><b><i>प्रस्तावित कानून के तहत अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों को चीन जैसे प्रतिद्वंद्वी देशों में बने ह्यूमनॉइड और चार पैरों वाले (Quadruped) रोबोट्स की जांच करनी होगी। जिन रोबोट्स को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा माना जाएगा, उन्हें Federal Communications Commission (FCC) की "कवर्ड लिस्ट" में डाल दिया जाएगा, जिसके बाद उनका अमेरिकी बाजार में प्रवेश प्रतिबंधित हो जाएगा।</i></b></p><p><b>उत्पाद की एक वर्ष के भीतर समीक्षा होना ज़रुरी</b></p><p><span style="font-size: 1rem;">विधेयक में यह भी प्रावधान है कि यदि किसी उत्पाद की एक वर्ष के भीतर समीक्षा नहीं होती है, तो उसे स्वतः ही FCC की कवर्ड लिस्ट में शामिल कर दिया जाएगा।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">इससे पहले भी जॉन मूलेनार और समिति के अन्य सदस्यों ने अमेरिकी प्रशासन को एक द्विदलीय पत्र भेजकर यूनिट्री रोबोटिक्स से जुड़े संभावित राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिमों को लेकर चिंता जताई थी। सांसदों ने कंपनी को अमेरिकी रक्षा विभाग की चीनी सैन्य कंपनियों की सूची, वाणिज्य विभाग की एंटिटी लिस्ट और FCC की कवर्ड लिस्ट में शामिल करने की मांग की थी।</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ चीनी रोबोट्स पर अमेरिका की सख्ती, आयात प्रतिबंध लगाने के लिए नया विधेयक पेश ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/india-venezuela-energy-partnership-2026-4869 ]]></guid><title><![CDATA[ भारत-वेनेजुएला ऊर्जा साझेदारी को मिलेगा नया विस्तार: विदेश मंत्रालय ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/india-venezuela-energy-partnership-2026-4869 ]]></link><pubDate><![CDATA[Thu, 04 Jun 2026 16:30:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ नई दिल्ली: भारत और वेनेजुएला ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने तथा ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय वार्ता ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>नई दिल्ली:</b> भारत और वेनेजुएला ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने तथा ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय वार्ता में ऊर्जा, व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य, ऑटोमोबाइल और अन्य क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसरों पर चर्चा हुई।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">विदेश मंत्रालय में सचिव (पूर्व) रुद्रेंद्र टंडन ने बताया कि वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति Delcy Rodríguez एक बड़े मंत्रीमंडलीय प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत आई हैं और उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ विस्तृत बातचीत हुई।</span></p><p>टंडन ने कहा कि वेनेजुएला हाल के महीनों में भारत के लिए कच्चे तेल का प्रमुख आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है और दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में "पूर्ण पूरकता" मौजूद है। उन्होंने कहा कि भारत और वेनेजुएला अपस्ट्रीम तथा डाउनस्ट्रीम दोनों क्षेत्रों में दीर्घकालिक ऊर्जा साझेदारी विकसित कर सकते हैं।</p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="hi" dir="ltr"&gt;&lt;a href="https://x.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#WATCH&lt;/a&gt; | चर्चा में ऊर्जा क्षेत्र से परे आर्थिक साझेदारी को व्यापक बनाने पर भी ध्यान केंद्रित किया गया। वेनेजुएला संसाधनों से समृद्ध देश है, जिसमें प्रतिभाशाली और मेहनती लोगों की बड़ी संख्या है, और अब यह सतत आर्थिक विकास के पथ पर अग्रसर होने के प्रारंभिक संकेत दिखा रहा है। इससे… &lt;a href="https://t.co/zFzsMsNmMP"&gt;pic.twitter.com/zFzsMsNmMP&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; डीडी न्यूज़ (@DDNewsHindi) &lt;a href="https://x.com/DDNewsHindi/status/2062471736399142940?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 4, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><p><b>ऊर्जा क्षेत्र के अलावा खनन, पशुपालन,&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">परिवहन, कृषि उपकरण&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">आदि पर हुई चर्चा</span></b></p><p>बैठक में ऊर्जा क्षेत्र के अलावा खनन, पशुपालन, परिवहन, कृषि उपकरण, ऑटोमोबाइल और फार्मा उद्योगों में निवेश एवं व्यापार की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। भारत ने इन क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने में रुचि दिखाई।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">विदेश मंत्रालय के अनुसार, वेनेजुएला भारत को भविष्य के लिए एक "पसंदीदा साझेदार" मानता है। दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा करने तथा ग्लोबल साउथ के हितों को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ भारत-वेनेजुएला ऊर्जा साझेदारी को मिलेगा नया विस्तार: विदेश मंत्रालय ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/india-un-development-reforms-peacekeepers-ecosoc-4835 ]]></guid><title><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों को भारत ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/india-un-development-reforms-peacekeepers-ecosoc-4835 ]]></link><pubDate><![CDATA[Tue, 02 Jun 2026 11:45:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ न्यूयॉर्क, अमरीका: भारत ने सोमवार को संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक परिषद (ईकोसॉक) में वैश्विक विकास प्रयासों के दौरान संयुक्त राष्ट्र के विकास स्तंभ की प्राथमिकता बनाए रखने और राष्ट्रीय स्वामित्व ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>न्यूयॉर्क, अमरीका: </b>भारत ने सोमवार को संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक परिषद (ईकोसॉक) में वैश्विक विकास प्रयासों के दौरान संयुक्त राष्ट्र के विकास स्तंभ की प्राथमिकता बनाए रखने और राष्ट्रीय स्वामित्व को केंद्र में रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।</span></p><p>संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वथनेनी हरीश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने ईकोसॉक के विकास संबंधी परिचालन गतिविधियों के सत्र के दौरान संयुक्त राष्ट्र की उप महासचिव एवं संयुक्त राष्ट्र सतत विकास समूह की अध्यक्ष अमीना जे. मोहम्मद के साथ संवाद में भाग लिया।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने कहा कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र के विकास स्तंभ की प्रमुख भूमिका को बनाए रखने के महत्व को रेखांकित किया और दोहराया कि सभी विकास प्रयासों के केंद्र में राष्ट्रीय स्वामित्व होना चाहिए।</span></p><p><span style="font-size: 1rem;"><b>किसी भी तरह का सुधार देशों के विकास को मज़बूत करने वाला हो</b></span></p><p><span style="font-size: 1rem;">भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि संयुक्त राष्ट्र की रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर प्रणाली में किसी भी प्रकार का सुधार सदस्य देशों की विकास प्राथमिकताओं को मजबूत करने वाला होना चाहिए। भारत का मानना है कि इस प्रणाली में किसी भी पुनर्संतुलन का उद्देश्य देशों को विकास कार्यक्रमों में बेहतर सहयोग प्रदान करना होना चाहिए।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;Participated in the dialogue with the Dy SG &lt;a href="https://x.com/AminaJMohammed?ref_src=twsrc^tfw"&gt;@AminaJMohammed&lt;/a&gt; who is also the Chair of 🇺🇳 Sustainable Development Group in the ECOSOC Operational Activities for Development Segment.&lt;br&gt;&lt;br&gt;Underscored the importance of preserving the primacy of the UN development pillar and reiterated… &lt;a href="https://t.co/0o4GqMgYxe"&gt;pic.twitter.com/0o4GqMgYxe&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Parvathaneni Harish (@AmbHarishP) &lt;a href="https://x.com/AmbHarishP/status/2061628490747719910?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 2, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p><b>लगभग 4,000 शांति सैनिकों को दी गई&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">श्रद्धांजलि</span><span style="font-size: 1rem;">, इनमें 184 भारतीय रहे</span></b></p><p>रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर प्रणाली की फंडिंग और प्रशासनिक व्यवस्था पर चर्चा करते हुए भारत ने पारदर्शिता, जवाबदेही और इसके विकासात्मक प्रभावों के व्यापक आकलन की आवश्यकता पर भी जोर दिया।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">इससे पहले 30 मई को भारत और ऑस्ट्रिया के स्थायी मिशनों ने संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिक दिवस के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया। इस दौरान संयुक्त राष्ट्र के झंडे तले सर्वोच्च बलिदान देने वाले लगभग 4,000 शांति सैनिकों को श्रद्धांजलि दी गई, जिनमें 184 भारतीय भी शामिल थे।</span></p><p><b>शांति स्थापना अभियानों के दौरान 45 वर्दीधारी सैनिकों ने दी&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">प्राणों की आहुति</span></b></p><p>पिछले एक वर्ष में शांति स्थापना अभियानों के दौरान 45 वर्दीधारी शांति सैनिकों ने अपने प्राणों की आहुति दी। भारत ने उनके साहस, समर्पण और अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा में योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।</p><p>संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के अनुसार, भारत 1948 से संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों का महत्वपूर्ण साझेदार रहा है। अब तक भारत लगभग 3 लाख सैनिकों को 50 से अधिक संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में तैनात कर चुका है। इनमें से 184 भारतीय शांति सैनिकों ने अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">इस अवसर पर भारत स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय ने मेजर अभिलाषा बराक को भी सम्मानित किया। वह वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल लेबनान में सेवाएं दे रही हैं और उन्हें वर्ष 2025 के "मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर" पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों को भारत ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/iran-us-talks-lebanon-ceasefire-trump-4828 ]]></guid><title><![CDATA[ ईरान-अमेरिका वार्ता में अविश्वास बरकरार, तेहरान ने अमेरिका पर बदले रुख का लगाया आरोप ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/iran-us-talks-lebanon-ceasefire-trump-4828 ]]></link><pubDate><![CDATA[Mon, 01 Jun 2026 17:00:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ तेहरान: ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सोमवार को कहा कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच जारी संवाद गहरे अविश्वास के माहौल में हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका बार-बार अपना रुख ब ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>तेहरान:</b> ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सोमवार को कहा कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच जारी संवाद गहरे अविश्वास के माहौल में हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका बार-बार अपना रुख बदल रहा है, जिससे किसी समझौते तक पहुंचने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।</span><span style="font-size: 1rem;">साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बघाई ने कहा, "बातचीत गंभीर अविश्वास और संदेह के माहौल में शुरू हुई थी और संदेशों का आदान-प्रदान भी इसी वातावरण में हो रहा है।"</span></p><p>उन्होंने कहा कि कूटनीति केवल आपसी विश्वास पर निर्भर नहीं करती, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों के विरोधाभासी और बदलते बयान वार्ता को जटिल बना रहे हैं। बघाई के अनुसार, "अमेरिका के साथ बातचीत की सबसे बड़ी मुश्किल यही है कि उसके अधिकारी बार-बार अपने रुख बदलते हैं। इससे प्रक्रिया बाधित होती है और समाधान की राह लंबी हो जाती है।"</p><p><b><span style="font-size: 1rem;">ईरानी प्रवक्ता ने&nbsp;</span>कूटनीतिक प्रयासों को विफल करने का लगाया आरोप</b></p><p>ईरानी प्रवक्ता ने इजरायल पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह कूटनीतिक प्रयासों को विफल करना चाहता है। उन्होंने कहा कि लेबनान में इजरायली कार्रवाई का उद्देश्य हालात में सुधार की संभावनाओं को खत्म करना है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">परमाणु मुद्दे से जुड़े सवालों पर बघाई ने दोहराया कि फिलहाल ईरान का मुख्य फोकस संघर्ष को समाप्त करना है। उन्होंने कहा, "परमाणु मुद्दों पर कोई बातचीत नहीं हुई है और हमारा ध्यान युद्ध समाप्त कराने पर केंद्रित है।"</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;&amp;quot;Changes in US position disrupting process&amp;quot;: Iran&amp;#39;s foreign ministry; stresses on end to Israeli offensive in Lebanon&lt;br&gt;&lt;br&gt;Read &lt;a href="https://x.com/ANI?ref_src=twsrc^tfw"&gt;@ANI&lt;/a&gt; Story | &lt;a href="https://t.co/unei1mt8WV"&gt;https://t.co/unei1mt8WV&lt;/a&gt;&lt;a href="https://x.com/hashtag/Iran?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#Iran&lt;/a&gt; &lt;a href="https://x.com/hashtag/US?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#US&lt;/a&gt; &lt;a href="https://x.com/hashtag/IranForeignMinistry?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#IranForeignMinistry&lt;/a&gt; &lt;a href="https://x.com/hashtag/Israel?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#Israel&lt;/a&gt; &lt;a href="https://x.com/hashtag/Lebanon?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#Lebanon&lt;/a&gt; &lt;a href="https://t.co/Bhusy70kMM"&gt;pic.twitter.com/Bhusy70kMM&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; ANI Digital (@ani_digital) &lt;a href="https://x.com/ani_digital/status/2061364991580856685?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 1, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p><b>युद्धविराम किसी भी संभावित ईरान-अमेरिका समझौते का अहम हिस्सा</b></p><p>बघाई ने यह भी कहा कि लेबनान में युद्धविराम किसी भी संभावित ईरान-अमेरिका समझौते का अहम हिस्सा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इजरायल और अमेरिका ने युद्धविराम व्यवस्थाओं का उल्लंघन किया है, जबकि ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई का जवाब दिया।</p><p>वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान वास्तव में समझौता करना चाहता है और यह समझौता अमेरिका तथा उसके सहयोगियों के लिए लाभदायक होगा। उन्होंने अपने राजनीतिक विरोधियों और कुछ रिपब्लिकन नेताओं की आलोचना करते हुए कहा कि लगातार सार्वजनिक टिप्पणियां उनकी बातचीत की कोशिशों को कठिन बनाती हैं।</p><p><b>"ईरान समझौता करना चाहता है और यह एक अच्छा समझौता होगा"</b></p><p>ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा, "ईरान समझौता करना चाहता है और यह एक अच्छा समझौता होगा। लेकिन कुछ डेमोक्रेट और कुछ रिपब्लिकन लगातार बयान देकर बातचीत को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।"&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने लोगों से धैर्य रखने की अपील करते हुए कहा, "आराम से बैठिए, अंत में सब ठीक हो जाएगा, जैसा हमेशा होता है।"</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ ईरान-अमेरिका वार्ता में अविश्वास बरकरार, तेहरान ने अमेरिका पर बदले रुख का लगाया आरोप ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/richard-marles-pays-tribute-national-war-memorial-4822 ]]></guid><title><![CDATA[ ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर दी श्रद्धांजलि ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/richard-marles-pays-tribute-national-war-memorial-4822 ]]></link><pubDate><![CDATA[Mon, 01 Jun 2026 13:40:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ नई दिल्ली, भारत: ऑस्ट्रेलिया के उप प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स ने सोमवार को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की।रिचर्ड मार्ल्स भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक रक्ष ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>नई दिल्ली, भारत:</b> ऑस्ट्रेलिया के उप प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स ने सोमवार को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की।</span><span style="font-size: 1rem;">रिचर्ड मार्ल्स भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक रक्षा मंत्रियों के संवाद (Defence Ministers' Dialogue) में भाग लेने के लिए भारत पहुंचे हैं।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">भारत में ऑस्ट्रेलिया के राजदूत फिलिप ग्रीन ने उनका स्वागत किया। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि यह यात्रा भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) की बढ़ती मजबूती, रणनीतिक गहराई और स्थायी मित्रता को दर्शाती है।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">सोमवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और रिचर्ड मार्ल्स नई दिल्ली में दूसरे भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा मंत्रियों के संवाद की सह-अध्यक्षता करेंगे।</span></p><p><b>दोनों देशों के बीच प्रगति की समीक्षा होगी</b></p><p>रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस बैठक में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग की प्रगति की समीक्षा की जाएगी और सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान की जाएगी।<span style="font-size: 1rem;">बैठक में रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने, सैन्य अंतर-संचालन क्षमता (Military Interoperability) बढ़ाने, रक्षा उद्योग सहयोग, सह-विकास एवं सह-उत्पादन के अवसरों तथा क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;भारत में आपका स्वागत है &lt;a href="https://x.com/RichardMarlesMP?ref_src=twsrc^tfw"&gt;@RichardMarlesMP&lt;/a&gt;&lt;br&gt;&lt;br&gt;Australia’s Deputy Prime Minister &amp;amp; Defence Minister is in Delhi for our annual 🇦🇺🇮🇳 Defence Ministerial Dialogue. The visit highlights the momentum, strategic depth &amp;amp; enduring &lt;a href="https://x.com/hashtag/dosti?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#dosti&lt;/a&gt; defining the 🇦🇺🇮🇳 Comprehensive Strategic Partnership. &lt;a href="https://t.co/QKcCLWqYX6"&gt;pic.twitter.com/QKcCLWqYX6&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Philip Green OAM (@AusHCIndia) &lt;a href="https://x.com/AusHCIndia/status/2061323389445526002?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 1, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p><b>यह यात्रा दोनों देशों के बीच की गहराई को रेखांकित करती है</b></p><p>यह वार्ता भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रणनीतिक विश्वास और रक्षा सहयोग को और मजबूत करने, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता को बढ़ावा देने तथा सुरक्षा क्षेत्र में नए सहयोगी अवसर तलाशने में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">रक्षा मंत्रालय ने बताया कि रिचर्ड मार्ल्स की यह यात्रा अक्टूबर 2025 में ऑस्ट्रेलिया में आयोजित पहले रक्षा मंत्रियों के संवाद के बाद हो रही है और यह दोनों देशों के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को दर्शाती है।</span></p><p>भारत के स्वतंत्र, खुले, समावेशी और समृद्ध इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के दृष्टिकोण में ऑस्ट्रेलिया एक महत्वपूर्ण साझेदार है। यह यात्रा दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों की बढ़ती परिपक्वता और गहराई को भी रेखांकित करती है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर दी श्रद्धांजलि ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/modi-meets-myanmar-president-min-aung-hlaing-4821 ]]></guid><title><![CDATA[ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग से की मुलाकात ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/modi-meets-myanmar-president-min-aung-hlaing-4821 ]]></link><pubDate><![CDATA[Mon, 01 Jun 2026 13:00:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ नई दिल्ली, भारत: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग से मुलाकात की।&nbsp;दोनों नेताओं के बीच राष्ट्रीय राजधानी स्थित हैदराबाद हाउस में बैठक हुई। राष्ट्रपति ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>नई दिल्ली, भारत:</b> प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग से मुलाकात की।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">दोनों नेताओं के बीच राष्ट्रीय राजधानी स्थित हैदराबाद हाउस में बैठक हुई। राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग <b>30 मई से 2 जून तक</b> भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं। यह दौरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर हो रहा है।</span></p><p><span style="font-size: 1rem;">राष्ट्रपति के रूप में यू मिन आंग ह्लाइंग की यह पहली भारत यात्रा है। उनके साथ कैबिनेट मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों और प्रमुख उद्योगपतियों का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी आया है।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">इससे पहले रविवार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग से मुलाकात की थी।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;&lt;a href="https://x.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#WATCH&lt;/a&gt; | Delhi | Prime Minister Narendra Modi meets Myanmar President U Min Aung Hlaing at Hyderabad House. This marks Hlaing&amp;#39;s first visit to India in his current capacity as the President.&lt;br&gt;&lt;br&gt;(Source: DD) &lt;a href="https://t.co/b5LflsRVxB"&gt;pic.twitter.com/b5LflsRVxB&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; ANI (@ANI) &lt;a href="https://x.com/ANI/status/2061328192137576947?ref_src=twsrc^tfw"&gt;June 1, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p><b>राष्ट्रपति से मुलाकात कर विभिन्न मुद्दों पर हुई चर्चा</b></p><p>विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने म्यांमार के राष्ट्रपति से मुलाकात कर विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">शनिवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग से मुलाकात की थी। उन्होंने भारत और म्यांमार के बीच लंबे समय से चले आ रहे द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत बनाने की दिशा में राष्ट्रपति के सकारात्मक दृष्टिकोण की सराहना की।</span></p><p><b>दोनों देशों के बीच समृद्धि के लिए साझेदारी को नई गति मिलेगी</b><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p>एस. जयशंकर ने कहा था कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग की बैठक को लेकर आशान्वित हैं, जिससे दोनों देशों के बीच शांति, प्रगति और समृद्धि के लिए साझेदारी को नई गति मिलेगी।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">भारत पहुंचने से पहले राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग ने बिहार के बोधगया का दौरा किया। वहां उन्होंने विश्व प्रसिद्ध महाबोधि मंदिर में दर्शन किए। यह बौद्ध धर्म का प्रमुख तीर्थस्थल और यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">विदेश मंत्रालय ने भारत और म्यांमार के बीच गहरे सभ्यतागत, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को रेखांकित करते हुए इस यात्रा को दोनों देशों के रिश्तों के लिए महत्वपूर्ण बताया है।</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग से की मुलाकात ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/nepal-everest-day-himalaya-climate-change-4787 ]]></guid><title><![CDATA[ नेपाल ने मनाया 73वां एवरेस्ट दिवस, पर्वतारोहियों का सम्मान ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/nepal-everest-day-himalaya-climate-change-4787 ]]></link><pubDate><![CDATA[Fri, 29 May 2026 14:00:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ काठमांडू, नेपाल: नेपाल ने शुक्रवार को 73वां एवरेस्ट दिवस मनाया। इस अवसर पर रिकॉर्ड बनाने वाले पर्वतारोहियों को सम्मानित किया गया और बढ़ते वैश्विक तापमान के बीच हिमालय संरक्षण का आह्वान किया गया।&nbsp; ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>काठमांडू, नेपाल:</b> नेपाल ने शुक्रवार को 73वां एवरेस्ट दिवस मनाया। इस अवसर पर रिकॉर्ड बनाने वाले पर्वतारोहियों को सम्मानित किया गया और बढ़ते वैश्विक तापमान के बीच हिमालय संरक्षण का आह्वान किया गया।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">सैकड़ों पर्वतारोही और एवरेस्ट फतह करने वाले लोग काठमांडू की सड़कों पर जागरूकता रैली में शामिल हुए। बाद में नेपाल सरकार ने उन्हें दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर चढ़ाई की उपलब्धि के लिए सम्मानित किया।</span></p><p>नेपाल का शेरपा समुदाय मुख्य रूप से पर्वतारोहण और अभियानों पर निर्भर है। शेरपाओं को एवरेस्ट शिखर तक रस्सियां लगाने की जिम्मेदारी दी जाती है, जिसके बाद आधिकारिक रूप से पर्वतारोहियों के लिए शिखर मार्ग खोल दिया जाता है।</p><p><b>शेरपा हिमालयी अभियानों के लिए सबसे उपयुक्त होते हैं</b></p><p>ऊंचाई वाले इलाकों में अधिक मजबूत माने जाने वाले शेरपा हिमालयी अभियानों के लिए सबसे उपयुक्त होते हैं। पर्वतारोही ऑक्सीजन सिलेंडर, उपकरण ढोने और शिखर मार्ग पर सुरक्षा सहायता के लिए शेरपाओं पर निर्भर रहते हैं। उन्हें उच्च हिमालयी अभियानों के विशेषज्ञ और श्रेष्ठ पर्वतारोही माना जाता है।</p><p><img src="https://media.gtcbharat.com/wp-content/uploads/2026/05/NepalPic_7e3e9ff8fa995b6c1fab7234f20ac4d6_1280X853.webp" style="width: 656.328px;"><br></p><p><b>"ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले समुदाय जोखिम में हैं"</b></p><p>शेरपाओं के लगातार रिकॉर्ड बनाने और योगदान के बीच हिमालय संरक्षण की मांग भी तेज हुई है। हिमालय नेपाल की अर्थव्यवस्था और पर्वतारोहण उद्योग की रीढ़ माना जाता है।</p><p>नेपाल के संस्कृति, पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्री खड़क राज पौडेल (गणेश) ने कहा, “वैश्विक तापमान बढ़ने से सगरमाथा (एवरेस्ट) और अन्य पर्वत खतरे में हैं। ग्लेशियर धीरे-धीरे पिघल रहे हैं और ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले समुदाय जोखिम में हैं। केवल वे ही नहीं, बल्कि समुद्री तटीय इलाकों में रहने वाली पूरी दुनिया प्रभावित हो रही है और जल स्रोत भी सूख रहे हैं। हिमालय दुनिया के लिए पानी का प्रमुख स्रोत है।”</p><p><b>पिछले 30 वर्षों में लगभग 2,000 वर्षों की बर्फ ग़ायब</b></p><p>हालिया शोध में पाया गया है कि माउंट एवरेस्ट के ग्लेशियरों ने पिछले 30 वर्षों में लगभग 2,000 वर्षों की बर्फ खो दी है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">पर्वतीय और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) ने भी जलवायु परिवर्तन पर गंभीर चिंता जताई है।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">संस्था ने अपने जागरूकता अभियान में कहा, “एवरेस्ट की पहली सफल चढ़ाई के 70 साल बाद, पृथ्वी का सबसे ऊंचा पर्वत — तिब्बती में चोमोलुंगमा और नेपाली में सगरमाथा — अभूतपूर्व और लगभग अपरिवर्तनीय बदलावों से गुजर रहा है।”</span></p><p><img src="https://media.gtcbharat.com/wp-content/uploads/2026/05/NepalPics_e566da8dddf1602785aaa1f1b37e4679_1280X853.webp" style="width: 656.328px;"><span style="font-size: 1rem;"><br></span></p><p><b>पिछले 25 वर्षों में ग्लेशियर की 54 मीटर से अधिक मोटाई खोई</b></p><p>शोधकर्ताओं के अनुसार, साउथ कोल ग्लेशियर ने पिछले 25 वर्षों में 54 मीटर से अधिक मोटाई खो दी है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">इस वर्ष नेपाल में पर्वतारोहियों की संख्या में बड़ा इजाफा देखा गया है। पर्यटन विभाग ने केवल एवरेस्ट के लिए 495 लोगों को चढ़ाई की अनुमति दी है, जो 1953 में सर एडमंड हिलेरी और तेनजिंग नोर्गे शेरपा द्वारा पहली बार एवरेस्ट फतह किए जाने के बाद सबसे अधिक संख्या है।</span></p><p><b>वसंत अभियान के दौरान कुल 7 मौतें दर्ज की गईं</b><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p>अधिकारियों के मुताबिक, इस साल वसंत अभियान के दौरान कुल 7 मौतें दर्ज की गई हैं।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">इससे पहले 2021 में नेपाल ने रिकॉर्ड 409 परमिट जारी किए थे, जिसके कारण एवरेस्ट शिखर पर अत्यधिक भीड़ हो गई थी। इसे उस वर्ष हुई अधिक मौतों का एक प्रमुख कारण माना गया था। 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के प्रभाव के चलते परमिट की संख्या घटकर 325 रह गई थी।</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ नेपाल ने मनाया 73वां एवरेस्ट दिवस, पर्वतारोहियों का सम्मान ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/japan-fm-india-visit-quad-meeting-2026-4754 ]]></guid><title><![CDATA[ क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने भारत आएंगे जापान के विदेश मंत्री ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/japan-fm-india-visit-quad-meeting-2026-4754 ]]></link><pubDate><![CDATA[Mon, 25 May 2026 14:00:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ नई दिल्ली, भारत: जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी दो दिवसीय भारत दौरे पर आने वाले हैं। इस दौरान वे क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेंगे। विदेश मंत्रालय (MEA) की ओर से जारी आध ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>नई दिल्ली, भारत:</b> जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी दो दिवसीय भारत दौरे पर आने वाले हैं। इस दौरान वे क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेंगे। विदेश मंत्रालय (MEA) की ओर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ भी बैठक करेंगे।</span></p><p>विदेश मंत्रालय के मुताबिक, विदेश मंत्री मोतेगी आज नई दिल्ली पहुंचेंगे और शाम को हैदराबाद हाउस में एस. जयशंकर से मुलाकात करेंगे।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">मंगलवार को वह क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेंगे और संयुक्त प्रेस बयान भी जारी करेंगे।</span></p><p><b>भारत, राष्ट्रीय राजधानी में क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की मेजबानी करेगा</b><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p>इसके बाद मोतेगी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सेवा तीर्थ में मुलाकात करेंगे।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की बदलती सुरक्षा स्थिति और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर चर्चा के लिए भारत राष्ट्रीय राजधानी में क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की मेजबानी करने जा रहा है।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;Japanese FM to arrive in India for Quad Foreign Ministers&amp;#39; Meeting&lt;br&gt;&lt;br&gt;Read &lt;a href="https://twitter.com/ANI?ref_src=twsrc^tfw"&gt;@ANI&lt;/a&gt; Story| &lt;a href="https://t.co/LexgMcw3Zk"&gt;https://t.co/LexgMcw3Zk&lt;/a&gt; &lt;a href="https://twitter.com/hashtag/India?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#India&lt;/a&gt; &lt;a href="https://twitter.com/hashtag/Japan?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#Japan&lt;/a&gt; &lt;a href="https://twitter.com/hashtag/QuadFMM?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#QuadFMM&lt;/a&gt; &lt;a href="https://twitter.com/hashtag/ToshimitsuMotegi?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#ToshimitsuMotegi&lt;/a&gt; &lt;a href="https://t.co/pb7LxdDtti"&gt;pic.twitter.com/pb7LxdDtti&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; ANI Digital (@ani_digital) &lt;a href="https://twitter.com/ani_digital/status/2058812501203304775?ref_src=twsrc^tfw"&gt;May 25, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p><b>उच्चस्तरीय बैठक 26 मई को आयोजित होगी</b><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p class="grey-bg-red"><b><i>भारत, अमरीका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के समूह क्वाड की यह उच्चस्तरीय बैठक 26 मई को आयोजित होगी, जिसकी अध्यक्षता विदेश मंत्री एस. जयशंकर करेंगे।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">एस. जयशंकर के निमंत्रण पर ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग, जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी और अमरीका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो इस बैठक में हिस्सा लेंगे।</span></i></b></p><p><b>अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर होगा विचार-विमर्श</b><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p>‘फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक’ के क्वाड विजन के तहत मंत्री जुलाई 2025 में वॉशिंगटन डीसी में हुई चर्चाओं को आगे बढ़ाएंगे। बैठक में क्वाड सहयोग के प्राथमिक क्षेत्रों में प्रगति की समीक्षा, विभिन्न पहलों पर चर्चा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र सहित अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने भारत आएंगे जापान के विदेश मंत्री ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/marco-rubio-hezbollah-lebanon-israel-talks-4749 ]]></guid><title><![CDATA[ 'हिज्बुल्लाह लेबनान के लोगों को बना रहा शिकार': मार्को रुबियो ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/marco-rubio-hezbollah-lebanon-israel-talks-4749 ]]></link><pubDate><![CDATA[Mon, 25 May 2026 11:20:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ नई दिल्ली, भारत: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सोमवार को कहा कि इजरायल और लेबनान के बीच लगातार बातचीत जारी है। उन्होंने हिज्बुल्लाह पर निशाना साधते हुए उसे ईरान का “प्रॉक्सी संगठन” बताया और कह ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>नई दिल्ली, भारत: </b>अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सोमवार को कहा कि इजरायल और लेबनान के बीच लगातार बातचीत जारी है। उन्होंने हिज्बुल्लाह पर निशाना साधते हुए उसे ईरान का “प्रॉक्सी संगठन” बताया और कहा कि वह लेबनान के लोगों को नुकसान पहुंचा रहा है।</span></p><p>राष्ट्रीय राजधानी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान रुबियो ने कहा कि लेबनान और इजरायल के बीच अलग से बातचीत चल रही है।<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने कहा, “लेबनान को लेकर हम अलग से काम कर रहे हैं। 45 दिनों का युद्धविराम लागू है। लेबनान सरकार और इजरायल के बीच साप्ताहिक बैठकों के साथ रोजाना बातचीत भी जारी है। समस्या लेबनान और इजरायल नहीं हैं, असली समस्या हिज्बुल्लाह है।”</span></p><p><b>हिज्बुल्लाह ने लेबनान सरकार को गिराने की बात कही</b></p><p>रुबियो ने हिज्बुल्लाह के हालिया बयान का जिक्र करते हुए कहा कि संगठन ने लेबनान सरकार को गिराने की बात कही है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने कहा, “कल रात ही हिज्बुल्लाह ने लेबनान सरकार को उखाड़ फेंकने की बात कही। इससे साफ पता चलता है कि हम किससे निपट रहे हैं। यह पूरी तरह ईरान का प्रॉक्सी है। जब तक हिज्बुल्लाह हथियारबंद रहेगा, लेबनान में शांति स्थापित करना मुश्किल होगा, क्योंकि वह वहां के लोगों को ही पीड़ित बना रहा है।”</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;&lt;a href="https://twitter.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#WATCH&lt;/a&gt; | Delhi: On Iran, US Secretary of State Marco Rubio says, &amp;quot;The President is not going to make a bad deal. No one has been more serious about the threat of a nuclear Iran than President Trump has been. And so I&amp;#39;m very confident that we should all be very confident that… &lt;a href="https://t.co/RJikpNJ1dG"&gt;https://t.co/RJikpNJ1dG&lt;/a&gt; &lt;a href="https://t.co/DwNzkk3XG8"&gt;pic.twitter.com/DwNzkk3XG8&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; ANI (@ANI) &lt;a href="https://twitter.com/ANI/status/2058759865385054565?ref_src=twsrc^tfw"&gt;May 25, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p><span style="font-size: 1rem;"><b>हिज्बुल्लाह की कार्रवाई का जवाब देना इजरायल का अधिकार</b></span></p><p>अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि वॉशिंगटन लगातार लेबनान और इजरायल दोनों सरकारों के संपर्क में है। उन्होंने कहा कि यदि हिज्बुल्लाह इजरायल पर मिसाइल दागता है, तो इजरायल को आत्मरक्षा का पूरा अधिकार है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने कहा, “अगर हिज्बुल्लाह मिसाइल हमले करेगा या करने की कोशिश करेगा, तो इजरायल को जवाब देने और उसे रोकने का पूरा अधिकार है।”</span></p><p><span style="font-size: 1rem;"><b>हिज्बुल्लाह के खिलाफ इजरायल लड़ रहा है युद्ध, अमेरिका नहीं</b></span></p><p>इस बीच, ‘जेरूसलम पोस्ट’ की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हिज्बुल्लाह प्रमुख नईम कासिम को समर्थन और फंडिंग जारी रखने का भरोसा दिया है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">रिपोर्ट के मुताबिक, अराघची ने टेलीग्राम पर संदेश जारी कर कहा कि ईरान उन संगठनों का समर्थन आखिरी समय तक करता रहेगा, जो अपने अधिकारों और आजादी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।</span></p><p>उन्होंने यह भी कहा कि लेबनान में युद्धविराम किसी भी संभावित समझौते की अहम शर्त है, हालांकि हिज्बुल्लाह के खिलाफ युद्ध इजरायल लड़ रहा है, अमेरिका नहीं।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ 'हिज्बुल्लाह लेबनान के लोगों को बना रहा शिकार': मार्को रुबियो ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/trump-white-house-shooting-national-security-4743 ]]></guid><title><![CDATA[ व्हाइट हाउस के पास गोलीबारी, हमलावर ढेर ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/trump-white-house-shooting-national-security-4743 ]]></link><pubDate><![CDATA[Sun, 24 May 2026 13:15:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ वॉशिंगटन डीसी, अमरीका: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को व्हाइट हाउस के पास हुई गोलीबारी की घटना में त्वरित कार्रवाई करने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों और सीक्रेट सर्विस अधिकारियों का धन ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>वॉशिंगटन डीसी, अमरीका: </b>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को व्हाइट हाउस के पास हुई गोलीबारी की घटना में त्वरित कार्रवाई करने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों और सीक्रेट सर्विस अधिकारियों का धन्यवाद किया। इस मुठभेड़ में हमलावर मारा गया। डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि आरोपी का हिंसक इतिहास रहा था और वह देश की सबसे महत्वपूर्ण इमारतों में से एक व्हाइट हाउस को लेकर जुनूनी मानसिकता रखता था।</span></p><p>उन्होंने लिखा, “हमारी महान सीक्रेट सर्विस और कानून प्रवर्तन एजेंसियों का धन्यवाद, जिन्होंने व्हाइट हाउस के पास एक बंदूकधारी के खिलाफ बेहद तेज और पेशेवर कार्रवाई की। उसका हिंसक अतीत था और संभवतः वह हमारे देश की सबसे प्रिय इमारत के प्रति जुनूनी था। व्हाइट हाउस गेट्स के पास सीक्रेट सर्विस एजेंट्स के साथ हुई गोलीबारी में वह मारा गया।”</p><p><b>“हमारे देश की राष्ट्रीय सुरक्षा इसकी मांग करती है”</b></p><p>ट्रंप ने कहा कि यह घटना व्हाइट हाउस कॉरेस्पॉन्डेंट्स डिनर के दौरान हुई गोलीबारी के एक महीने बाद सामने आई है और इससे यह स्पष्ट होता है कि भविष्य के सभी राष्ट्रपतियों के लिए वॉशिंगटन डीसी में अब तक का सबसे सुरक्षित और संरक्षित परिसर बनाया जाना कितना जरूरी है। उन्होंने कहा, “हमारे देश की राष्ट्रीय सुरक्षा इसकी मांग करती है।”</p><p><b>संदिग्ध की पहचान 21 वर्षीय नसीरे बेस्ट के रूप में हुई</b></p><p>सीबीएस न्यूज के अनुसार, इस गोलीबारी में मारे गए संदिग्ध की पहचान 21 वर्षीय नसीरे बेस्ट के रूप में हुई है। जांच से जुड़े एक सूत्र के हवाले से बताया गया कि वह पिछले लगभग 18 महीनों से वॉशिंगटन डीसी में रह रहा था।</p><p>रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि जुलाई 2025 में नसीरे बेस्ट का अमेरिकी सीक्रेट सर्विस के साथ पहले भी सामना हो चुका था, जब उसने कथित तौर पर व्हाइट हाउस में घुसने की कोशिश की थी। उस समय सीक्रेट सर्विस अधिकारियों ने उसे गिरफ्तार किया था।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">सीबीएस न्यूज के मुताबिक, उस घटना के बाद मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते उसे मनोरोग वार्ड में भेजा गया था।</span></p><p><img src="https://media.gtcbharat.com/wp-content/uploads/2026/05/Trump_12008e4f038d7bb42b95fa91217500a2_586X435.webp" style="width: 586px;"><span style="font-size: 1rem;"><br></span></p><p><b>संदिग्ध को जवाबी कार्रवाई में गोली मारी गई</b><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p>इस बीच, शनिवार रात (स्थानीय समयानुसार) व्हाइट हाउस के पास स्थित सीक्रेट सर्विस चेकपॉइंट पर गोलीबारी करने के बाद संदिग्ध को जवाबी कार्रवाई में गोली मार दी गई। बाद में अस्पताल में उसकी मौत हो गई। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि संदिग्ध चेकपॉइंट के पास पहुंचा, बैग से हथियार निकाला और अधिकारियों पर गोलीबारी शुरू कर दी।</p><p><b>एक राहगीर के घायल होने की भी खबर है</b></p><p>सीक्रेट सर्विस अधिकारियों ने भी जवाबी फायरिंग की, जिसमें वह घायल हो गया। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। घटना में एक राहगीर भी गोली लगने से घायल हुआ, हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि उसे संदिग्ध की गोली लगी या अधिकारियों की जवाबी फायरिंग में चोट आई। फिलहाल उसकी स्थिति के बारे में जानकारी नहीं दी गई है।</p><p>अमेरिकी सीक्रेट सर्विस ने अपने बयान में कहा, “शनिवार शाम करीब 6 बजे 17वीं स्ट्रीट और पेनसिल्वेनिया एवेन्यू इलाके में एक व्यक्ति ने अपने बैग से हथियार निकालकर गोलीबारी शुरू कर दी।”</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ व्हाइट हाउस के पास गोलीबारी, हमलावर ढेर ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/iran-trump-lookalike-buffalo-viral-4739 ]]></guid><title><![CDATA[ ट्रंप से तुलना के बाद ‘भैंसा उदास’, ईरान का दावा ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/iran-trump-lookalike-buffalo-viral-4739 ]]></link><pubDate><![CDATA[Sat, 23 May 2026 19:00:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ मॉस्को, रूस: ईरान ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तंज कसते हुए बांग्लादेश के एक सफेद भैंसे का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसकी शक्ल कथित तौर पर ट्रंप से मिलती-जुलती बताई जा रही है।&nbs ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>मॉस्को, रूस:</b> ईरान ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तंज कसते हुए बांग्लादेश के एक सफेद भैंसे का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसकी शक्ल कथित तौर पर ट्रंप से मिलती-जुलती बताई जा रही है।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">वॉशिंगटन और तेहरान के बीच जारी तनाव के बीच ईरान ने दावा किया कि ट्रंप से तुलना किए जाने के बाद यह भैंसा खाना छोड़ चुका है।</span></p><p>रूस में ईरान के आधिकारिक एक्स अकाउंट से पोस्ट किया गया, “बेचारा! डोनाल्ड ट्रंप से तुलना किए जाने के बाद बांग्लादेशी भैंसा परेशान है।”&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">पोस्ट के साथ रूसी सरकारी मीडिया RT की रिपोर्ट का वीडियो भी साझा किया गया, जिसमें कहा गया, “ट्रंप जैसा दिखने वाला बांग्लादेशी भैंसा लोगों की भीड़ देखने के बाद भूख खो बैठा है।”</span></p><p><b>ईद-उल-अजहा से पहले लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गया</b><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p>‘डोनाल्ड ट्रंप’ नाम से मशहूर यह भैंसा बांग्लादेश के नारायणगंज जिले में ईद-उल-अजहा से पहले लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गया है। यह इलाका राजधानी ढाका के पास स्थित है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">करीब 700 किलोग्राम वजन वाले इस सफेद भैंसे ने अपने सुनहरे रंग और चेहरे की बनावट के कारण इंटरनेट पर खूब सुर्खियां बटोरीं। सोशल मीडिया यूजर्स ने दावा किया कि इसकी शक्ल अमेरिकी राष्ट्रपति से मिलती है।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;Poor thing!&lt;br&gt;&lt;br&gt;Bangladeshi buffalo upset by comparisons to Donald Trump😐&lt;br&gt;&lt;br&gt;RT: A Bangladeshi buffalo that resembles Trump has lost its appetite after people flocked to see him. &lt;a href="https://t.co/6BnayVaJrY"&gt;pic.twitter.com/6BnayVaJrY&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Iran in Russia (@IranembinRussia) &lt;a href="https://twitter.com/IranembinRussia/status/2057816924340298219?ref_src=twsrc^tfw"&gt;May 22, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p><b>चेहरे की बनावट और हेयरस्टाइल ने खींचा ध्यान</b></p><p>स्थानीय अखबार ‘प्रोथोम आलो’ से बातचीत में एक व्यक्ति ने कहा, “जब मैंने फेसबुक पर इसकी तस्वीरें देखीं तो यह बिल्कुल डोनाल्ड ट्रंप जैसा लगा। इसके चेहरे की बनावट और हेयरस्टाइल तक ट्रंप से मेल खाते हैं।”&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">इस भैंसे की देखभाल करने वाले जिया उद्दीन मृधा ने बताया कि इंटरनेट पर वायरल होने के बाद रोज बड़ी संख्या में लोग फार्म पर आकर इसके साथ तस्वीरें खिंचवा रहे हैं।</span></p><p><span style="font-size: 1rem;"><b>इसे हल्के-फुल्के मज़ाकिया अंदाज़ से जोड़ा गया</b></span></p><p>यह हल्का-फुल्का मजाक ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच भू-राजनीतिक तनाव चरम पर है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों और रणनीतिक स्थानों पर संयुक्त हमले किए थे। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच ड्रोन, मिसाइल और जवाबी हमलों का दौर कई हफ्तों तक चला, जिसके बाद अप्रैल में एक नाजुक युद्धविराम लागू हुआ।</span></p><p>तब से दोनों देशों के रिश्तों में लगातार तल्खी बनी हुई है और दोनों पक्ष आधिकारिक बयानों और सोशल मीडिया के जरिए एक-दूसरे पर तीखे हमले कर रहे हैं।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">Axios की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और CIA निदेशक जॉन रैटक्लिफ समेत वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की।</span></p><p><span style="font-size: 1rem;"><b>बैठक में नए सैन्य हमलों के विकल्पों पर हुई चर्चा</b></span></p><p>बैठक में ईरान के खिलाफ संभावित नए सैन्य हमलों के विकल्पों पर चर्चा हुई, यदि मौजूदा बातचीत पूरी तरह विफल हो जाती है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">इसी दौरान पाकिस्तान सेना प्रमुख आसिम मुनीर तेहरान पहुंचे, जहां उन्होंने तनाव कम करने और मध्यस्थता की कोशिश की। वहीं कतर का एक दूत भी वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए ईरान पहुंचा।</span></p><p>इन घटनाक्रमों के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने अपना वीकेंड कार्यक्रम बदलते हुए वॉशिंगटन लौटने का फैसला किया। उन्होंने अपने बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर की शादी समारोह में शामिल होने का कार्यक्रम भी “सरकारी परिस्थितियों” का हवाला देते हुए रद्द कर दिया।</p><p><b>चार साल के इस दुर्लभ सफेद भैंसे की हो चुकी है नीलामी</b></p><p>इस बीच नारायणगंज स्थित राबेया एग्रो फार्म में यह भैंसा व्यावसायिक आकर्षण भी बन गया। चार साल के इस दुर्लभ सफेद भैंसे को ईद-उल-अजहा से पहले बेच दिया गया।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">फार्म मालिक जिया उद्दीन मृधा ने एएनआई को बताया कि भैंसे को 550 टका प्रति किलोग्राम की दर से बेचा गया, जिसकी कुल कीमत लगभग 3 लाख 85 हजार टका रही।</span></p><p>उन्होंने कहा कि उनके छोटे भाई ने उसके अनोखे हेयरस्टाइल की वजह से प्यार से उसका नाम “डोनाल्ड ट्रंप” रख दिया था।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">मृधा ने कहा, “यह सिर्फ एक प्रतीकात्मक नाम है। हमने प्यार और मजाक में यह नाम दिया। इंसान और जानवर की वास्तव में तुलना नहीं की जा सकती।”</span></p><p><span style="font-size: 1rem;"><b>ईद पर कुर्बानी के लिए खरीदा जा चुका है यह भैंसा</b></span></p><p>यह वायरल भैंसा जिंजीरा (रसूलपुर) इलाके के व्यापारी मोहम्मद शोरोन ने ईद-उल-अजहा की कुर्बानी के लिए खरीदा है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">हालांकि इसकी सोशल मीडिया लोकप्रियता के कारण खरीदार इसे सार्वजनिक रूप से दिखाने से बच रहा है, ताकि वायरल प्रसिद्धि से जुड़ी परेशानियों से बचा जा सके।</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ ट्रंप से तुलना के बाद ‘भैंसा उदास’, ईरान का दावा ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/marco-rubio-delhi-visit-pm-modi-talks-4735 ]]></guid><title><![CDATA[ कोलकाता दौरे के बाद दिल्ली पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/marco-rubio-delhi-visit-pm-modi-talks-4735 ]]></link><pubDate><![CDATA[Sat, 23 May 2026 15:00:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ नई दिल्ली, भारत: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो शनिवार को कोलकाता दौरा समाप्त करने के बाद नई दिल्ली पहुंचे। उनके साथ उनकी पत्नी जेनेट डी रुबियो, भारत में अमरीकी राजदूत सर्जियो गोर और अमरीका के प्र ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>नई दिल्ली, भारत:</b> अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो शनिवार को कोलकाता दौरा समाप्त करने के बाद नई दिल्ली पहुंचे। उनके साथ उनकी पत्नी जेनेट डी रुबियो, भारत में अमरीकी राजदूत सर्जियो गोर और अमरीका के प्रिंसिपल डिप्टी नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर रॉबर्ट गैब्रियल भी मौजूद थे।</span></p><p>राष्ट्रीय राजधानी में अपने दौरे के दौरान मार्को रुबियो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे और अमरीकी&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">दूतावास सपोर्ट एनेक्स बिल्डिंग के समर्पण समारोह में संबोधन देंगे।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">इससे पहले शनिवार को रुबियो ने कोलकाता में मदर टेरेसा को श्रद्धांजलि देने के लिए मिशनरीज ऑफ चैरिटी का दौरा किया।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;&lt;a href="https://twitter.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc^tfw"&gt;#WATCH&lt;/a&gt; | US Secretary of State Marco Rubio arrives in Delhi after his visit to Kolkata in West Bengal earlier today. &lt;br&gt;&lt;br&gt;Here in Delhi, Secretary Rubio is scheduled to meet with Prime Minister Narendra Modi, deliver remarks at a U.S. Embassy Support Annex Building dedication… &lt;a href="https://t.co/1OpbhzDJid"&gt;pic.twitter.com/1OpbhzDJid&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; ANI (@ANI) &lt;a href="https://twitter.com/ANI/status/2058084165019402429?ref_src=twsrc^tfw"&gt;May 23, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p><b>"मदर टेरेसा ने करुणा और सेवा की अद्भुत विरासत छोड़ी है"</b><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p><span style="font-size: 1rem;">मार्को रुबियो&nbsp;</span>ने एक्स पर लिखा, “मदर टेरेसा ने करुणा और सेवा की अद्भुत विरासत छोड़ी है। आज मिशनरीज ऑफ चैरिटी जाकर उनकी विरासत को श्रद्धांजलि देना और कैथोलिक आस्था को सेवा के रूप में जीवंत देखना मेरे लिए सम्मान की बात है।”</p><p>अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी प्रतिनिधिमंडल की दिल्ली यात्रा को लेकर एक्स पर पोस्ट साझा किया। उन्होंने लिखा, “दिल्ली के लिए उड़ान में!” और विमान के अंदर की तस्वीर साझा की, जिसमें मार्को रुबियो, उनकी पत्नी, रॉबर्ट गैब्रियल और वे स्वयं नजर आए।</p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;Mother Teresa left a tremendous legacy of compassion and service. I was honored to visit the Missionaries of Charity today to pay homage to her legacy and to see the living example of the Catholic faith in action. &lt;a href="https://t.co/HCiATKgUDc"&gt;pic.twitter.com/HCiATKgUDc&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Secretary Marco Rubio (@SecRubio) &lt;a href="https://twitter.com/SecRubio/status/2058073860185231853?ref_src=twsrc^tfw"&gt;May 23, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><p><b>पीएम मोदी समेत अन्य वरिष्ठ से हो सकती है मुलाक़ात</b></p><p>इससे पहले शनिवार सुबह रुबियो और उनकी पत्नी कोलकाता से दिल्ली रवाना हुए। इस दौरान उनके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य वरिष्ठ भारतीय नेताओं से मुलाकात करने की संभावना जताई गई।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">सर्जियो गोर ने यह भी पुष्टि की कि रॉबर्ट गैब्रियल अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं। उन्होंने लिखा, “हमारे प्रिय मित्र रॉबर्ट गैब्रियल भी सचिव रुबियो के साथ यात्रा कर रहे हैं। भारत में उनका फिर से स्वागत है।”</span></p><p>मार्को रुबियो शनिवार सुबह कोलकाता पहुंचे थे। यह पिछले 14 वर्षों में किसी शीर्ष अमेरिकी राजनयिक की कोलकाता यात्रा थी।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">कोलकाता दौरा 23 से 26 मई तक चलने वाली उनकी चार दिवसीय भारत यात्रा की शुरुआत माना जा रहा है।</span></p><p><b>भारत-अमरीका के बीच रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत</b><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p>इस दौरान वे नई दिल्ली, आगरा और जयपुर समेत कई शहरों का दौरा करेंगे। उच्चस्तरीय बैठकों में व्यापार, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा सुरक्षा और भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।</p><p>यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। साथ ही 26 मई को नई दिल्ली में होने वाली QUAD विदेश मंत्रियों की बैठक से पहले इस यात्रा को काफी अहम माना जा रहा है।</p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;In the air to Delhi! &lt;a href="https://t.co/R2KnqpUh1N"&gt;pic.twitter.com/R2KnqpUh1N&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Ambassador Sergio Gor (@USAmbIndia) &lt;a href="https://twitter.com/USAmbIndia/status/2058060465675366499?ref_src=twsrc^tfw"&gt;May 23, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><p><b>मार्को रुबियो की यह पहली भारत यात्रा है</b></p><p>सर्जियो गोर ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा था, “सचिव मार्को रुबियो कोलकाता पहुंच चुके हैं। यह उनकी पहली भारत यात्रा है। आज बाद में हम नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। व्यापार, तकनीक, रक्षा, QUAD और कई अन्य मुद्दों पर अगले कुछ दिनों में चर्चा और प्रगति होगी।”</p><p>अमेरिकी राजदूत के अनुसार, आगामी बैठकों में रक्षा साझेदारी, उन्नत प्रौद्योगिकी, व्यापारिक संबंध और QUAD सहयोग को मजबूत करने पर विशेष जोर रहेगा।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ कोलकाता दौरे के बाद दिल्ली पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/hamza-burhan-killed-pok-al-badr-pulwama-network-4719 ]]></guid><title><![CDATA[ भारत का मोस्ट वांटेड आतंकी हमजा बुरहान PoK में मारा गया ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/hamza-burhan-killed-pok-al-badr-pulwama-network-4719 ]]></link><pubDate><![CDATA[Thu, 21 May 2026 16:35:34 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकी नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। प्रतिबंधित आतंकी संगठन Al-Badr से जुड़े मोस्ट वांटेड आतंकी अरजमंद गुलजार उर्फ “हमजा बुरहान” की पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में गोली मारकर ह ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><b>जम्मू-कश्मीर </b>में सक्रिय आतंकी नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। प्रतिबंधित आतंकी संगठन <b>Al-Badr</b> से जुड़े मोस्ट वांटेड आतंकी <b>अरजमंद गुलजार उर्फ “हमजा बुरहान”</b> की पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (<b>PoK</b>) में गोली मारकर हत्या कर दी गई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक अज्ञात हमलावरों ने उसे निशाना बनाया।</p><p>सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार हमजा बुरहान लंबे समय से भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल था और दक्षिण कश्मीर में आतंकियों की भर्ती, फंडिंग और हथियार सप्लाई नेटवर्क संभाल रहा था। उसकी मौत को घाटी में सक्रिय आतंकी ढांचे के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।</p><h4 class=""><b>पाकिस्तान जाकर बना था आतंकी कमांडर</b></h4><p><b>हमजा बुरहान</b> मूल रूप से जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के रत्नीपोरा इलाके का रहने वाला था। करीब सात साल पहले वह वैध दस्तावेजों के जरिए पाकिस्तान गया था। वहां पहुंचने के बाद उसने <b>अल-बद्र</b> संगठन जॉइन कर लिया और धीरे-धीरे संगठन के प्रमुख ऑपरेशनल चेहरों में शामिल हो गया।</p><p>खुफिया एजेंसियों के मुताबिक वह पाकिस्तान में बैठकर कश्मीर में आतंकियों की भर्ती और कट्टरपंथी नेटवर्क को सक्रिय करने का काम कर रहा था। उस पर युवाओं को सोशल मीडिया के जरिए भड़काने और आतंकवादी गतिविधियों के लिए तैयार करने के आरोप भी थे।</p><h4 class=""><b>गृह मंत्रालय ने घोषित किया था आतंकवादी</b></h4><p>भारत सरकार के Ministry of Home Affairs ने वर्ष 2022 में अरजमंद गुलजार को आधिकारिक रूप से आतंकवादी घोषित किया था। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार वह दक्षिण कश्मीर में कई आतंकी गतिविधियों से जुड़ा हुआ था।</p><p>उसका नाम हथियार सप्लाई, फंडिंग नेटवर्क, ग्रेनेड हमलों और आतंकी भर्ती जैसे मामलों में सामने आया था। भारतीय एजेंसियां लंबे समय से उसे मोस्ट वांटेड सूची में शामिल किए हुए थीं।</p><h4 class=""><b>पुलवामा से जुड़ा था नेटवर्क</b></h4><p>पुलवामा और आसपास के इलाके लंबे समय से घाटी में आतंकवाद के संवेदनशील केंद्र माने जाते रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि हमजा बुरहान का नेटवर्क पुलवामा, शोपियां और अवंतीपोरा जैसे इलाकों में सक्रिय था।</p><p>जांच एजेंसियों के मुताबिक वह पाकिस्तान से बैठे-बैठे स्थानीय ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGWs) के जरिए आतंकी गतिविधियों को अंजाम दिलाता था। उसके नेटवर्क के जरिए हथियार और फंडिंग घाटी तक पहुंचाई जाती थी।</p><h4 class=""><b>सोशल मीडिया के जरिए फैलाता था कट्टरपंथ</b></h4><p>सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि हमजा बुरहान सोशल मीडिया का इस्तेमाल कट्टरपंथ फैलाने के लिए करता था। उसे उन आतंकियों में गिना जाता था जो डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए युवाओं को प्रभावित कर हथियार उठाने के लिए उकसाते थे।</p><p>विशेषज्ञों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में आतंकवादी संगठन सोशल मीडिया प्रचार को हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं और हमजा इसी रणनीति का अहम हिस्सा था।</p><h4 class=""><b>मौत को लेकर कई अटकलें</b></h4><p>फिलहाल उसकी हत्या किसने की, इसे लेकर आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। कुछ रिपोर्ट्स में इसे आतंकी गुटों के अंदरूनी संघर्ष से जोड़कर देखा जा रहा है, जबकि कुछ सूत्र इसे टारगेटेड अटैक बता रहे हैं।</p><p>हालांकि भारतीय सुरक्षा एजेंसियां पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।</p><h4 class=""><b>सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता</b></h4><p>विशेषज्ञों का मानना है कि हमजा बुरहान की मौत से दक्षिण कश्मीर में सक्रिय आतंकी नेटवर्क को बड़ा झटका लगेगा। खासकर भर्ती और फंडिंग चैनल प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है।</p><p>सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि घाटी में आतंकवाद के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और सीमा पार बैठे नेटवर्क पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है।</p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ भारत का मोस्ट वांटेड आतंकी हमजा बुरहान PoK में मारा गया ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/rajnath-singh-korean-war-tribute-south-korea-4717 ]]></guid><title><![CDATA[ कोरियाई युद्ध में भारतीय सैनिकों के योगदान को राजनाथ सिंह ने किया नमन ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/rajnath-singh-korean-war-tribute-south-korea-4717 ]]></link><pubDate><![CDATA[Thu, 21 May 2026 15:20:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ पाजू, दक्षिण कोरिया: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को कोरियाई युद्ध की 75वीं वर्षगांठ पर इमजिंगक पीस पार्क में आयोजित स्मृति समारोह में भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि दी।&nbsp;रक्षा मंत्री ने उन  ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>पाजू, दक्षिण कोरिया:</b> रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को कोरियाई युद्ध की 75वीं वर्षगांठ पर इमजिंगक पीस पार्क में आयोजित स्मृति समारोह में भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि दी।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">रक्षा मंत्री ने उन बहादुर सैनिकों को याद किया, जिन्होंने क्षेत्र में शांति के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी।</span></p><p>राजनाथ सिंह ने कहा, “यह स्मारक साहस, करुणा और बलिदान का प्रतीक है। यह भारत और कोरिया के बीच सदियों पुरी दोस्ती का संदेश भी देता है। सात दशक पहले जब कोरियाई प्रायद्वीप युद्ध की त्रासदी में घिरा था, तब भारत ने मानवता के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई थी। शांति और सेवा की भावना से प्रेरित होकर भारत ने अपनी 60 पैरा फील्ड एम्बुलेंस यूनिट के जरिए युद्ध में योगदान दिया।”</p><p><img src="https://media.gtcbharat.com/wp-content/uploads/2026/05/KoreanWar_4f66d77b616577c6322082fa2216f131_1091X611.webp" style="width: 656.328px;"><br></p><p><b>रक्षा मंत्री का स्वागत क्वोन ओह-यूल ने किया</b></p><p>समारोह स्थल पर रक्षा मंत्री का स्वागत क्वोन ओह-यूल ने किया। इस दौरान कोरियाई युद्ध में भारतीय सैनिकों के योगदान को दर्शाने वाली फोटो प्रदर्शनी भी लगाई गई।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">कार्यक्रम के दौरान दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में एमओयू हस्ताक्षर समारोह और स्मारक संकेतक का अनावरण किया गया। भारत और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रगान भी सैन्य बैंड द्वारा प्रस्तुत किए गए।</span></p><p><b>दो मिनट का मौन रखा गया और 'लास्ट पोस्ट' बजाई गई</b><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p>शहीद सैनिकों के सम्मान में स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की गई, दो मिनट का मौन रखा गया और “लास्ट पोस्ट” बजाई गई।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">समारोह को संबोधित करते हुए क्वोन ओह-यूल ने कोरियाई युद्ध में भारतीय सैनिकों के योगदान की सराहना की और दोनों देशों की साझा विरासत को संरक्षित रखने के महत्व पर जोर दिया।</span></p><p><img src="https://media.gtcbharat.com/wp-content/uploads/2026/05/KoreanWar2_c946578d75fecdd6f974e76c928cb7d0_1092X611.webp" style="width: 656.328px;"><span style="font-size: 1rem;"><br></span></p><p>इस दौरान मई 2026 के “कोरियन वॉर हीरो सर्टिफिकेट” से कर्नल एजी रंगराज की भतीजी कल्पना प्रसाद को सम्मानित किया गया। कर्नल रंगराज को युद्ध में उनकी विशिष्ट सेवा के लिए यह सम्मान दिया गया।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">इससे पहले 20 मई को राजनाथ सिंह और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री आन ग्यू-बैक के बीच सियोल में व्यापक द्विपक्षीय वार्ता हुई थी।</span></p><p><b>दोनों देशों के नेताओं ने रक्षा सहयोग के दायरे की समीक्षा की</b></p><p>रक्षा मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने रक्षा सहयोग के पूरे दायरे की समीक्षा की और रक्षा उद्योग, उत्पादन, समुद्री सुरक्षा, उभरती प्रौद्योगिकी, सैन्य आदान-प्रदान, लॉजिस्टिक्स और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।</p><p>दोनों पक्षों ने भारत की “एक्ट ईस्ट पॉलिसी” और दक्षिण कोरिया की क्षेत्रीय रणनीतिक दृष्टि के बीच बढ़ती समानता को स्वीकार किया और स्वतंत्र, खुला और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।</p><p><img src="https://media.gtcbharat.com/wp-content/uploads/2026/05/KoreanWar3_b678c13a283aae177cd151c2211b6185_1012X606.webp" style="width: 656.328px;"><br></p><p><b>कई अहम क्षेत्रों के समझौता ज्ञापनों पर हुए हस्ताक्षर</b></p><p>रक्षा सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में कई समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें रक्षा साइबर सहयोग, भारत के नेशनल डिफेंस कॉलेज और कोरिया नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी के बीच प्रशिक्षण तथा संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में सहयोग शामिल है।</p><p>राजनाथ सिंह ने दक्षिण कोरिया के डिफेंस एक्विजिशन प्रोग्राम एडमिनिस्ट्रेशन मंत्री ली योंग-चुल से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने संयुक्त विकास, संयुक्त उत्पादन और संयुक्त निर्यात के नए अवसर तलाशने पर सहमति जताई।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">इसके अलावा भारत-कोरिया डिफेंस इनोवेशन एक्सेलेरेटर इकोसिस्टम (KIND-X) के जरिए दोनों देशों के इनोवेशन इकोसिस्टम को जोड़ने की रूपरेखा पर भी चर्चा हुई।</span></p><p><img src="https://media.gtcbharat.com/wp-content/uploads/2026/05/KoreanWar4_f8560cdae0b079d6984c1f90d29da5ff_1083X609.webp" style="width: 656.328px;"><span style="font-size: 1rem;"><br></span></p><p><b>'आत्मनिर्भर भारत' पहल के तहत उपलब्ध अवसरों पर प्रकाश डाला</b><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p>बाद में राजनाथ सिंह ने भारत-दक्षिण कोरिया रक्षा उद्योग बिजनेस राउंडटेबल की अध्यक्षता की, जिसमें दोनों देशों के वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और रक्षा उद्योग से जुड़े प्रतिनिधि शामिल हुए।</p><p>रक्षा मंत्री ने भारत के बढ़ते रक्षा औद्योगिक इकोसिस्टम और “आत्मनिर्भर भारत” पहल के तहत उपलब्ध अवसरों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कोरियाई रक्षा कंपनियों से भारतीय उद्योग के साथ साझेदारी मजबूत करने का आह्वान किया।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने भारतीय और कोरियाई कंपनियों की साझेदारी को आत्मनिर्भर भारत अभियान के लिए अहम बताया।</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ कोरियाई युद्ध में भारतीय सैनिकों के योगदान को राजनाथ सिंह ने किया नमन ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/india-china-stable-bilateral-relations-4695 ]]></guid><title><![CDATA[ बीजिंग में भारत-चीन वार्ता, द्विपक्षीय संबंध मजबूत करने पर जोर ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/india-china-stable-bilateral-relations-4695 ]]></link><pubDate><![CDATA[Tue, 19 May 2026 15:00:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ बीजिंग, चीन: भारत और चीन ने द्विपक्षीय संबंधों को “स्थिर, पूर्वानुमान योग्य और पारस्परिक रूप से लाभकारी” बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।&nbsp;चीन स्थित भारतीय दूतावास ने जानकारी दी कि भारत के ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>बीजिंग, चीन:</b> भारत और चीन ने द्विपक्षीय संबंधों को “स्थिर, पूर्वानुमान योग्य और पारस्परिक रूप से लाभकारी” बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">चीन स्थित भारतीय दूतावास ने जानकारी दी कि भारत के राजदूत विक्रम दोराईस्वामी ने बीजिंग में चीन के विदेश मंत्रालय के एशियाई मामलों के विभाग के महानिदेशक लियू जिनसोंग से परिचयात्मक मुलाकात की।</span></p><p><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;इस दौरान दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय सहयोग की स्थिति की समीक्षा की।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">भारतीय दूतावास ने सोमवार को X पर पोस्ट करते हुए बताया कि बातचीत में “द्विपक्षीय संबंध, क्षेत्रीय घटनाक्रम, लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने और ब्रिक्स ढांचे के तहत सहयोग” जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।</span></p><p><span style="font-size: 1rem;"><b>आपसी संवाद के बीच दोनों देश सहमत</b></span></p><p>दोनों अधिकारियों ने भारत और चीन के बीच लगातार राजनयिक संवाद जारी रखने पर भी जोर दिया। उन्होंने सहमति जताई कि दोनों देशों के नेताओं के दृष्टिकोण के अनुरूप स्थिर, पूर्वानुमान योग्य और पारस्परिक लाभकारी संबंधों को आगे बढ़ाने के प्रयास जारी रहेंगे।</p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;Ambassador &lt;a href="https://twitter.com/VDoraiswami?ref_src=twsrc^tfw"&gt;@VDoraiswami&lt;/a&gt; held an introductory meeting with Mr. Liu Jinsong, Director General of the Department of Asian Affairs of the Ministry of Foreign Affairs today.&lt;br&gt;&lt;br&gt;The two sides exchanged views on bilateral relations, regional developments, promoting people-to-people… &lt;a href="https://t.co/JJxJ051bPX"&gt;pic.twitter.com/JJxJ051bPX&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; India in China (@EOIBeijing) &lt;a href="https://twitter.com/EOIBeijing/status/2056375754016149534?ref_src=twsrc^tfw"&gt;May 18, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span></p><p><b>सफल मेजबानी के लिए भारत को दी बधाई</b></p><p>इससे पहले 15 मई को भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने नई दिल्ली में 14-15 मई को आयोजित ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक की सफल मेजबानी के लिए भारत को बधाई दी थी।</p><p>चीन के विदेश मंत्री वांग यी की अनुपस्थिति में बैठक में चीन का प्रतिनिधित्व करने वाले शू फेइहोंग ने कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य के बीच ब्रिक्स देशों ने विभिन्न मुद्दों पर गहन और रचनात्मक चर्चा की।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने कहा कि चीन सभी सदस्य देशों के साथ एकजुटता और सहयोग को और मजबूत करने के लिए तैयार है।</span></p><p><b>शू फेइहोंग ने सोशल मीडिया पर शेयर की पोस्ट</b><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p class="grey-bg-red"><b><i>शू फेइहोंग ने X पर लिखा, “जटिल वैश्विक परिस्थितियों के बीच ब्रिक्स देशों ने कई मुद्दों पर गहन और सकारात्मक चर्चा की। चेयर स्टेटमेंट और आउटकम डॉक्यूमेंट अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों, ब्रिक्स के भविष्य और वैश्विक शासन प्रणाली में सुधार पर व्यापक सहमति को दर्शाते हैं।”&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने आगे कहा, “अगले अध्यक्ष देश के रूप में चीन सभी साझेदारों के साथ सहयोग और एकजुटता को गहरा करने के लिए तैयार है और अगले वर्ष चीन में सहयोगियों का स्वागत करने को उत्सुक है।”</span></i></b></p><p><b><span style="font-size: 1rem;">भारत के नए&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">राजदूत विक्रम दोराईस्वामी ने&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">7 मई को संभाली कमान</span></b></p><p><span style="font-size: 1rem;">इससे पहले 7 मई को चीन में भारत के नए नियुक्त राजदूत विक्रम दोराईस्वामी ने चीन के विदेश मंत्रालय के सहायक विदेश मंत्री और प्रोटोकॉल विभाग के महानिदेशक होंग लेई को अपने परिचय पत्र की प्रति सौंपी थी।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">भारतीय दूतावास के अनुसार, यह समारोह बीजिंग में आयोजित हुआ, जिसने चीन में भारतीय राजदूत के औपचारिक कार्यभार ग्रहण करने की प्रक्रिया को चिह्नित किया।</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ बीजिंग में भारत-चीन वार्ता, द्विपक्षीय संबंध मजबूत करने पर जोर ]]></media:description></item><item><guid isPermaLink='true'><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/trump-kevin-warsh-fed-chair-oath-4691 ]]></guid><title><![CDATA[ ट्रंप करेंगे नए फेड चेयर केविन वॉर्श के शपथ ग्रहण की मेजबानी ]]></title><link><![CDATA[ https://www.gtcbharat.com/world-news/trump-kevin-warsh-fed-chair-oath-4691 ]]></link><pubDate><![CDATA[Tue, 19 May 2026 12:45:00 +0530 ]]></pubDate><description><![CDATA[ वॉशिंगटन डीसी, अमरीका: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शुक्रवार को नए फेडरल रिजर्व चेयर केविन वॉर्श के शपथ ग्रहण समारोह की मेजबानी करेंगे। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, यह समारोह इसलिए भी म ]]></description><content:encoded><![CDATA[ <p><span style="font-size: 1rem;"><b>वॉशिंगटन डीसी, अमरीका:</b> अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शुक्रवार को नए फेडरल रिजर्व चेयर केविन वॉर्श के शपथ ग्रहण समारोह की मेजबानी करेंगे। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, यह समारोह इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि ट्रंप ने ब्याज दरों में कटौती को लेकर जेरोम पॉवेल से मतभेद के बाद वॉर्श की नियुक्ति में खास दिलचस्पी दिखाई थी।</span></p><p>14 मई को व्हाइट हाउस ने जानकारी दी थी कि केविन वॉर्श को फेडरल रिजर्व सिस्टम के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के चेयरमैन के रूप में पुष्टि मिल चुकी है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">निवर्तमान फेड चेयर जेरोम पॉवेल, जिन्हें ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में नियुक्त किया था, ने फेडरल रिजर्व में शपथ ली थी। हालांकि उस समय ट्रंप समारोह में शामिल नहीं हुए थे।</span></p><p><b>ट्रंप ने&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">जेरोम पॉवेल से पहले केविन वॉर्श का लिया था इंटरव्यू</span></b></p><p>2017 में ट्रंप ने फेड चेयर पद के लिए जेरोम पॉवेल से पहले केविन वॉर्श का भी इंटरव्यू लिया था। बाद में पॉवेल को चुना गया। वर्ष 2021 में बाइडेन प्रशासन ने पॉवेल को दूसरे कार्यकाल के लिए दोबारा नियुक्त किया था।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">1987 में एलन ग्रीनस्पैन आखिरी ऐसे फेडरल रिजर्व चेयर थे जिन्होंने व्हाइट हाउस में शपथ ली थी।</span></p><p>पिछले सप्ताह अमेरिकी सीनेट ने केविन वॉर्श को चार साल के कार्यकाल के लिए फेडरल रिजर्व चेयर के रूप में मंजूरी दी। फेडरल रिजर्व ने कहा था कि वॉर्श के शपथ लेने तक जेरोम पॉवेल कार्यवाहक प्रमुख बने रहेंगे।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">सीनेट से मंजूरी मिलने और नैतिक मानकों को पूरा करने के लिए अपनी कुछ निजी निवेश हिस्सेदारी बेचने पर सहमति देने के बाद सत्ता हस्तांतरण को सुचारु माना जा रहा है।</span></p><p><span style="color: rgb(136, 153, 166); font-family: &quot;Helvetica Neue&quot;, sans-serif; font-size: 12px; text-align: center; white-space: nowrap;">&lt;blockquote class="twitter-tweet"&gt;&lt;p lang="en" dir="ltr"&gt;President Trump will swear in Kevin Warsh as the next chairman of the US Federal Reserve on Friday, a White House official said &lt;a href="https://t.co/k3tMLONigB"&gt;https://t.co/k3tMLONigB&lt;/a&gt; &lt;a href="https://t.co/rCrZM1e92E"&gt;pic.twitter.com/rCrZM1e92E&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Reuters (@Reuters) &lt;a href="https://twitter.com/Reuters/status/2056421623901651360?ref_src=twsrc^tfw"&gt;May 18, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"&gt;&lt;/script&gt;</span><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p><b>पश्चिम एशिया में तनाव के चलते तेल की कीमतें बढ़ीं</b><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p>हालांकि, जेरोम पॉवेल कुछ समय तक फेडरल रिजर्व बोर्ड के गवर्नर बने रहेंगे।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">केविन वॉर्श ऐसे समय फेडरल रिजर्व की कमान संभाल रहे हैं जब अमेरिकी अर्थव्यवस्था महंगाई, घटते उपभोक्ता विश्वास और ईरान युद्ध से जुड़ी अनिश्चितताओं का सामना कर रही है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के चलते तेल की कीमतें बढ़ गई हैं और बाजार में अस्थिरता बनी हुई है।</span></p><p><b>फेडरल रिजर्व से जुड़ने वाले सबसे युवा गवर्नर थे वॉश</b><span style="font-size: 1rem;"></span></p><p>वॉर्श 2006 में फेडरल रिजर्व से जुड़ने वाले सबसे युवा गवर्नर थे। इससे पहले वह बुश प्रशासन और मॉर्गन स्टेनली में काम कर चुके थे। उन्होंने वॉल स्ट्रीट का अनुभव फेडरल रिजर्व में लाया, जहां आमतौर पर अर्थशास्त्रियों का दबदबा रहता था।</p><p>2008-09 की वैश्विक आर्थिक मंदी के दौरान अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए फेडरल रिजर्व के बड़े बॉन्ड खरीद कार्यक्रम को लेकर वॉर्श चिंतित रहे थे। उन्हें आशंका थी कि यह कार्यक्रम जरूरत से ज्यादा बड़ा हो जाएगा और अंततः सरकार के हाथों का उपकरण बन सकता है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">वॉर्श ने फेड की 6 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की बैलेंस शीट को कम करने का वादा किया है। इसके साथ ही उन्होंने कई अन्य बदलावों के संकेत दिए हैं, जिनसे वॉल स्ट्रीट को मिले-जुले संकेत मिले हैं।</span></p> ]]></content:encoded><media:description type='plain'><![CDATA[ ट्रंप करेंगे नए फेड चेयर केविन वॉर्श के शपथ ग्रहण की मेजबानी ]]></media:description></item></channel></rss>