लंदन: ब्रिटिश सिख कार्यकर्ता जगतार सिंह जौहल को भारत में करीब नौ साल की हिरासत के बाद जमानत मिल गई है, लेकिन उनकी घर वापसी को लेकर परिवार की चिंता अब भी बनी हुई है। ब्रिटेन के स्लॉ (Slough) से सांसद तनमनजीत सिंह धेसी ने उनके मामले पर गहरी चिंता जताते हुए कहा है कि यह मामला बहुत लंबे समय से चल रहा है और इसका जल्द समाधान होना चाहिए।
धेसी ने ब्रिटिश संसद में इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि उनके क्षेत्र के कई लोग और वह स्वयं जौहल के मामले पर लगातार नजर रखे हुए हैं। उन्होंने जमानत मिलने को राहत की बात बताया, लेकिन कहा कि जौहल का परिवार अब भी मानसिक तनाव और अनिश्चितता से गुजर रहा है तथा उन्हें अपने परिजन की घर वापसी का इंतजार है।
जगतार सिंह जौहल कौन हैं और मामला क्या है?
स्कॉटलैंड के डम्बर्टन निवासी और ब्रिटिश नागरिक जगतार सिंह जौहल को नवंबर 2017 में पंजाब से गिरफ्तार किया गया था। उन पर कथित आतंकवादी गतिविधियों और पंजाब में लक्षित हत्याओं से जुड़े मामलों में आरोप लगाए गए। भारतीय अधिकारियों के आरोपों का सामना कर रहे जौहल ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि हिरासत के दौरान उनसे यातना देकर कबूलनामा लिया गया था। इन आरोपों और उनके कानूनी मामले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता जताई गई है।
ब्रिटिश संसद में उठा घर वापसी का मुद्दा
दिल्ली हाई कोर्ट ने 18 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से जुड़े सात मामलों में उन्हें जमानत दी थी। इसके बाद 1 अक्टूबर 2026 को वह तिहाड़ जेल से रिहा हुए। हालांकि, जमानत मिलने के बावजूद उनके खिलाफ आठ मामले लंबित हैं और जमानत की शर्तों के तहत उनका पासपोर्ट जमा है। वह फिलहाल भारत छोड़कर स्कॉटलैंड नहीं लौट सकते।


जगतार सिंह जौहल के परिवार की चिंता का उल्लेख किया गया
15 अक्टूबर 2026 को ब्रिटिश संसद में जौहल के मामले पर चर्चा के दौरान स्लॉ के सांसद तनमनजीत सिंह धेसी ने उनके परिवार की चिंता का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जौहल को नौ साल बाद जमानत मिलने से परिवार को राहत मिली होगी, लेकिन अनिश्चितता और परेशानी अभी समाप्त नहीं हुई है। धेसी ने सवाल उठाया कि क्या यह मामला बहुत लंबा नहीं खिंच गया है और क्या इसे जल्द सुलझाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने ब्रिटिश सरकार से भारतीय अधिकारियों के साथ हुई बातचीत की जानकारी संसद को देने की मांग भी की।

ब्रिटिश सरकार ने क्या कहा?
ब्रिटेन के विदेश, राष्ट्रमंडल एवं विकास कार्यालय के मंत्री क्रिस एलमोर ने संसद में कहा कि जौहल की जमानत एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन उनका मामला अभी समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि भारत में ब्रिटिश उच्चायोग के अधिकारी जौहल से दो बार मिल चुके हैं और उन्हें कांसुलर सहायता दी जाती रहेगी।
ब्रिटिश सरकार ने कहा कि जौहल के खिलाफ लंबित मामलों का भारत की स्वतंत्र न्यायिक व्यवस्था के भीतर जल्द निपटारा होना चाहिए। सरकार ने उनके लंबे समय तक मुकदमे से पहले हिरासत में रहने, यातना और दुर्व्यवहार के आरोपों तथा निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार को लेकर अपनी चिंताएं भी भारतीय अधिकारियों के समक्ष उठाई हैं।
अब परिवार को घर वापसी का इंतजार
जौहल की जेल से रिहाई के बावजूद उनकी कानूनी लड़ाई जारी है। परिवार और ब्रिटिश सांसद चाहते हैं कि लंबित मामलों का शीघ्र समाधान हो, ताकि वह अपने परिवार के पास स्कॉटलैंड लौट सकें। फिलहाल उनकी वापसी इन मामलों की कानूनी स्थिति और जमानत की शर्तों से जुड़ी हुई है।
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