पेरिस, फ्रांस: फ्रांस में छात्रों के नेतृत्व में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने फ्रांस की आव्रजन और विविधता संबंधी नीतियों की आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि विविधता और करुणा के नाम पर पश्चिमी उदारवादियों ने फ्रांस समेत कई देशों में बाहरी आबादी को बसाया, लेकिन सामाजिक समायोजन और सांस्कृतिक अनुकूलता से जुड़े सवालों की अनदेखी की। इस बीच, फ्रांस में जारी प्रदर्शनों को पूर्व ‘येलो वेस्ट’ आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं का समर्थन मिलने के संकेत हैं।

जेडी वेंस ने कहा कि फ्रांस जैसे खूबसूरत देश को इस स्थिति से बाहर निकलना चाहिए, ताकि वहां की ऐतिहासिक धरोहरों को और नुकसान न पहुंचे। उन्होंने अमेरिकी नागरिकों को भी इस घटनाक्रम पर ध्यान देने की सलाह दी और अमेरिकी डेमोक्रेट्स की नीतियों पर निशाना साधा। वेंस ने सोशल मीडिया पर कहा, “पश्चिमी उदारवादियों ने विविधता और करुणा के नाम पर तीसरी दुनिया के लोगों को फ्रांस और दूसरे देशों में बसाया। उन्होंने सामाजिक समायोजन और अनुकूलता से जुड़े बुनियादी सवालों को नजरअंदाज किया। उन्हें चेतावनी दी गई थी कि इसका परिणाम ऐसा होगा, लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं दिया।”

फ्रांस में क्यों हो रहे हैं प्रदर्शन?

फ्रांस में पिछले कुछ हफ्तों से छात्र शिक्षा बजट में कटौती और स्कूलों की खराब परिस्थितियों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने स्कूलों में सुविधाओं की कमी और पुलिस की कथित अत्यधिक बल प्रयोग की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि, जेडी वेंस ने इन प्रदर्शनों को आव्रजन और विविधता संबंधी नीतियों से जोड़कर देखा है, जबकि रिपोर्टों में मौजूदा छात्र आंदोलन के प्रमुख मुद्दों में शिक्षा व्यवस्था, स्कूलों की स्थिति और पुलिस कार्रवाई का उल्लेख किया गया है।

फ्रांस के आंतरिक मंत्री लॉरेंट नुनेज ने फ्रांस 24 को बताया कि क्रय शक्ति में गिरावट के विरोध में हुए प्रदर्शनों में देशभर में लगभग 5.5 लाख लोग शामिल हुए, जिनमें राजधानी पेरिस में करीब 1.1 लाख प्रदर्शनकारी थे। उनके मुताबिक, तोड़फोड़ के आरोपों में पुलिस ने 400 लोगों को गिरफ्तार किया।

‘येलो वेस्ट’ आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ता भी हो सकते हैं शामिल

फ्रांस में जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच 2018 के ‘येलो वेस्ट’ आंदोलन से जुड़े कुछ कार्यकर्ताओं के भी प्रदर्शन में शामिल होने की चर्चा है। यह आंदोलन उस समय बढ़ती ईंधन कीमतों और आर्थिक असमानता के खिलाफ शुरू हुआ था, जिसमें हजारों लोग सड़कों पर उतरे थे।

उस आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़पें हुई थीं। रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस की रबर की गोलियों और अन्य कार्रवाई में 2,500 से अधिक प्रदर्शनकारी और 1,800 पुलिसकर्मी घायल हुए थे।

फ्रांस 24 की रिपोर्ट के मुताबिक, येलो वेस्ट आंदोलन से जुड़े कुछ कार्यकर्ताओं ने मौजूदा प्रदर्शनों में अपनी शुरुआती भागीदारी से इनकार किया था। कार्यकर्ता रोड्रिगेज ने कहा कि 17 अक्टूबर के प्रदर्शनों के पीछे येलो वेस्ट आंदोलन नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि ईंधन कीमतों और असंतोष की बात होते ही लोगों को येलो वेस्ट से जोड़ दिया जाता है।

वहीं, कार्यकर्ता सोफी टिसियर ने मौजूदा विरोध-प्रदर्शनों की तुलना 2018 के आंदोलन से करते हुए कहा कि यह आंदोलन पूरी तरह जायज है और फ्रांस के लोग थक चुके हैं। रोड्रिगेज ने भी कहा कि येलो वेस्ट आंदोलन से जुड़े लोगों में संघर्ष अधूरा रह जाने की निराशा अब भी मौजूद है और वे नए जनआंदोलन के साथ जुड़ने की संभावना देख रहे हैं।

हिंसा और तोड़फोड़ पर राष्ट्रपति मैक्रों सख्त

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने प्रदर्शन के दौरान हिंसा, लूटपाट और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं पर कड़ा रुख अपनाया है। सोशल मीडिया मंच एक्स पर उन्होंने कहा कि फ्रांस में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है और तोड़फोड़, सरकारी कार्यालयों पर हमले तथा दुकानों में लूटपाट करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मैक्रों ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाले सुरक्षा बलों के प्रति समर्थन जताते हुए कहा कि देश उन लोगों के खिलाफ एकजुट रहेगा, जो अराजकता फैलाने और संस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं। फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू ने भी बढ़ती अशांति की निंदा की। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना वैध है, लेकिन आगजनी, लूटपाट और सार्वजनिक या निजी संपत्ति पर हमले बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।

आगजनी और दुकानों में लूटपाट की घटनाएं

फ्रांस 24 की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ स्थानों पर प्रदर्शन हिंसक हो गए। इन घटनाओं में एक प्रदर्शनकारी का हाथ गंभीर रूप से घायल होकर कट गया, कई जगह आग लगाई गई और दर्जनों खुदरा दुकानों में लूटपाट की गई।

लगातार बढ़ती अशांति ने फ्रांस में राजनीतिक तनाव को और गहरा कर दिया है। शिक्षा बजट, स्कूलों की स्थिति और पुलिस कार्रवाई से शुरू हुए छात्र प्रदर्शनों के बीच अब आव्रजन, आर्थिक असंतोष और येलो वेस्ट आंदोलन से जुड़े मुद्दे भी चर्चा में हैं। इस पूरे घटनाक्रम पर फ्रांसीसी सरकार की प्रतिक्रिया और प्रदर्शनकारियों की आगे की रणनीति पर नजर बनी हुई है।