शेयर बाजार में दिवाली जैसा उत्साह: सेंसेक्स 1,610 अंक उछला, निफ्टी 24,378 के पार; कच्चा तेल $100 से नीचे
भारतीय शेयर बाजार में सेंसेक्स और निफ्टी ने शानदार तेजी दर्ज की। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, विदेशी निवेशकों की खरीदारी और अमेरिकी चुनाव परिणामों से बाजार का माहौल मजबूत हुआ। बैंकिंग, रियल्टी और आईटी शेयरों में भी तेजी रही।
मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 5 नवंबर को जोरदार तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने शानदार बढ़त दर्ज की। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, विदेशी निवेशकों की वापसी और वैश्विक बाजारों में सकारात्मक माहौल ने घरेलू शेयर बाजार को मजबूती दी। इस तेजी का असर मिडकैप, स्मॉलकैप और लगभग सभी प्रमुख सेक्टरों के शेयरों पर भी देखने को मिला।
कारोबार के दौरान बीएसई सेंसेक्स 1,609.54 अंक यानी 2.08 प्रतिशत की बढ़त के साथ 78,910.94 पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 में 417.45 अंकों यानी 1.74 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह 24,378.05 के स्तर पर बंद हुआ। बाजार में आई इस तेजी को व्यापक समर्थन मिला। निफ्टी मिडकैप 100 में 1.46 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 1.49 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। वहीं, निफ्टी 100 भी 1.78 प्रतिशत चढ़कर बंद हुआ।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से बाजार को राहत
शेयर बाजार में तेजी की एक बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों का 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आना रहा। ब्रेंट क्रूड की कीमत रिपोर्ट तैयार किए जाने के समय करीब 94 डॉलर प्रति बैरल बताई गई। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से देश के आयात बिल, महंगाई और आर्थिक दबाव को कम करने की उम्मीद बढ़ती है। इससे निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ और घरेलू शेयरों में खरीदारी बढ़ी।
विदेशी निवेशकों की बाजार में वापसी
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की खरीदारी ने भी बाजार को मजबूती दी। उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक, नवंबर के शुरुआती तीन कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में करीब 17,235 करोड़ रुपये का निवेश किया।
एनरिच मनी (Enrich Money) के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और संस्थागत निवेशकों की खरीदारी से वैश्विक जोखिम लेने की धारणा में सुधार हुआ है। हालांकि, बाजार की इस तेजी को आगे भी बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने कहा कि विदेशी निवेशकों की वापसी घरेलू शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है। यदि विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीदारी लगातार जारी रहती है, तो बाजार में रिकवरी को और मजबूती मिल सकती है।
बैंकिंग और रियल्टी सेक्टर में सबसे ज्यादा तेजी
सेक्टर के लिहाज से निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स 2.55 प्रतिशत की बढ़त के साथ सबसे आगे रहा। इसके अलावा प्रमुख सेक्टरों का प्रदर्शन इस प्रकार रहा:
- निफ्टी रियल्टी में 1.92 प्रतिशत की तेजी।
- निफ्टी आईटी में 1.72 प्रतिशत की बढ़त।
- निफ्टी ऑटो में 1.66 प्रतिशत का उछाल।
- निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 1.52 प्रतिशत की तेजी।
- निफ्टी मीडिया में 1.36 प्रतिशत की बढ़त।
- निफ्टी एफएमसीजी में 1.08 प्रतिशत का इजाफा।
इससे स्पष्ट है कि बाजार की तेजी केवल चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि कई प्रमुख सेक्टरों में खरीदारी देखने को मिली।
सोने और चांदी की कीमतों में भी उछाल
शेयर बाजार के साथ कीमती धातुओं में भी तेजी दर्ज की गई। 24 कैरेट सोने की कीमत 1.48 प्रतिशत बढ़कर 1,45,356 रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच गई। वहीं, चांदी 1.34 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,90,255 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई।
कोटक नियो के कमोडिटी और करेंसी रिसर्च प्रमुख अनिंद्य बनर्जी ने कहा कि दोनों कीमती धातुओं में दिवाली 2025 के बाद आई तेजी का अतिरिक्त प्रभाव अब काफी हद तक खत्म हो चुका है। उनके मुताबिक, मौजूदा स्तर से सोने और चांदी में तेजी का अगला दौर शुरू हो सकता है।
हालांकि, उन्होंने इसके लिए कच्चे तेल की कीमतों को अहम शर्त बताया। उनका कहना है कि जब तक तेल की कीमतों में दोबारा तेज उछाल नहीं आता, तब तक बुलियन बाजार के लिए माहौल अनुकूल रह सकता है। पश्चिम एशिया में युद्ध की नई स्थिति तेल की कीमतों को प्रभावित कर सकती है।
एशियाई बाजारों में मिला-जुला कारोबार
भारतीय बाजार में तेजी के बीच एशियाई शेयर बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स 3.36 प्रतिशत बढ़कर 24,723 पर पहुंचा, जबकि सिंगापुर का स्ट्रेट्स टाइम्स 0.10 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 5,297 पर रहा।
दूसरी ओर, जापान का निक्केई 225 इंडेक्स 0.58 प्रतिशत गिरकर 61,825 पर आ गया। ताइवान वेटेड इंडेक्स में 1.67 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 42,241 पर रहा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स भी करीब 4 प्रतिशत टूटकर 5,459 पर पहुंच गया। वैश्विक बाजारों के इस मिले-जुले प्रदर्शन के बावजूद भारतीय शेयर बाजार में कच्चे तेल की नरमी और विदेशी निवेशकों की खरीदारी ने सकारात्मक माहौल बनाए रखा।
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव का भी बाजार पर असर
अमरीका में नवंबर 2026 के मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने सीनेट और प्रतिनिधि सभा, दोनों में बहुमत हासिल किया है। इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। चुनाव परिणामों के बाद वैश्विक बाजारों में कारोबारी धारणा में बदलाव देखने को मिला।