दिल्ली में रैलियों से कारोबार प्रभावित होने पर राहुल गांधी से CAIT के 5 सवाल, पूछा- नुकसान की भरपाई कौन करेगा?

CAIT ने दिल्ली में राजनीतिक रैलियों और प्रदर्शनों से व्यापार प्रभावित होने का आरोप लगाते हुए राहुल गांधी को पत्र लिखा है। संगठन ने पांच सवाल पूछे और दिवाली बाद राष्ट्रीय बैठक के साथ देशव्यापी धिक्कार दिवस मनाने की घोषणा की है।

By  Preeti Kamal November 5th 2026 11:20 AM -- Updated: November 5th 2026 10:44 AM

नई दिल्ली: दिल्ली में राजनीतिक रैलियों, विरोध प्रदर्शनों और धरनों के कारण व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित होने का मुद्दा गरमा गया है। व्यापारियों के संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को कड़ा पत्र लिखकर कई सवाल उठाए हैं। संगठन ने पूछा है कि राजनीतिक प्रदर्शनों के कारण कारोबारियों और कामगार परिवारों को हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई कौन करेगा?

CAIT ने खास तौर पर 1 नवंबर 2026 को रामलीला मैदान में कांग्रेस की ओर से आयोजित रैली और पिछले एक महीने के दौरान विभिन्न संगठनों के प्रदर्शनों को कांग्रेस तथा अन्य राजनीतिक दलों के समर्थन पर सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि त्योहारों और शादी-ब्याह की खरीदारी के महत्वपूर्ण सीजन में लगातार प्रदर्शनों के कारण दिल्ली के बाजारों तक ग्राहकों की पहुंच प्रभावित हुई है। इससे व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

दिवाली के बाद देशभर के व्यापारिक नेताओं की बैठक बुलाएगा CAIT

CAIT ने कहा है कि वह राहुल गांधी के जवाब का इंतजार करेगा। हालांकि, दिवाली के बाद नई दिल्ली में दिल्ली के व्यापारियों और देशभर के प्रमुख व्यापारिक नेताओं की राष्ट्रीय स्तर की बैठक बुलाई जाएगी। इसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी।

संगठन ने इस मुद्दे को केवल दिल्ली के व्यापारियों तक सीमित नहीं माना है। CAIT का कहना है कि यदि इस तरह की परिस्थितियां जारी रहती हैं, तो दूसरे शहरों में भी व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए यह एक गंभीर राष्ट्रीय मुद्दा है।

CAIT ने चेतावनी देते हुए कहा कि देश का व्यापारिक समुदाय इतना कमजोर नहीं है कि वह अनिश्चितकाल तक ऐसी परिस्थितियों को सहन करता रहे। अब समय आ गया है कि कड़ा संदेश दिया जाए और इसके लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय हो। संगठन ने इस मुद्दे पर देशव्यापी 'धिक्कार दिवस' (Dhikkar Diwas) मनाने का भी ऐलान किया है। इसकी तारीख नई दिल्ली में प्रस्तावित राष्ट्रीय बैठक के दौरान तय की जाएगी।

राहुल गांधी और कांग्रेस से CAIT ने पूछी राजनीतिक जवाबदेही

CAIT के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया ने पत्र में राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी की राजनीतिक एवं नैतिक जिम्मेदारी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी एक तरफ लोगों से स्थानीय बाजारों से खरीदारी करने की अपील करते हैं, जबकि दूसरी तरफ ऐसे राजनीतिक प्रदर्शनों का समर्थन करते हैं, जिनसे ग्राहकों का बाजारों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।

भरतिया के मुताबिक, यह केवल राजनीतिक विरोधाभास नहीं है, बल्कि इससे आम व्यापारियों की आजीविका सीधे प्रभावित होती है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) और 19(1)(g) का भी उल्लेख किया। अनुच्छेद 19(1)(a) नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है, जबकि अनुच्छेद 19(1)(g) उन्हें कोई भी पेशा अपनाने और व्यापार या व्यवसाय करने का अधिकार प्रदान करता है।

भरतिया ने सवाल उठाया कि क्या राहुल गांधी के लिए विरोध प्रदर्शन का अधिकार व्यापार करने और आजीविका कमाने के अधिकार से बड़ा है? क्या संविधान का अनुच्छेद 19(1)(g) केवल भाषण देने और किताबें लिखने वालों के लिए है या छोटे व्यापारियों, दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों और रोज कमाकर परिवार चलाने वाले लोगों के अधिकारों की भी रक्षा करता है?

राहुल गांधी के सामने रखे गए ये 5 सवाल

CAIT ने अपने पत्र में राहुल गांधी से पांच प्रमुख सवालों के जवाब मांगे हैं:

1. विरोध प्रदर्शन या व्यापार का अधिकार: क्या विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार व्यापार करने और आजीविका कमाने के अधिकार से ज्यादा महत्वपूर्ण है?

2. व्यापारियों के नुकसान की भरपाई कौन करेगा: क्या देश की राजधानी के व्यापारिक जीवन को ठप करना राजनीतिक और नैतिक रूप से उचित है? प्रभावित व्यापारियों के नुकसान की भरपाई कौन करेगा?

3. स्थानीय बाजारों में खरीदारी की अपील पर सवाल: राहुल गांधी स्थानीय बाजारों से खरीदारी करने की अपील कैसे कर सकते हैं, जबकि वह ऐसे प्रदर्शनों का समर्थन करते हैं, जिनसे ग्राहक बाजारों तक नहीं पहुंच पाते?

4. आर्थिक नुकसान की जिम्मेदारी किसकी: क्या कांग्रेस पार्टी और उसके राजनीतिक सहयोगी उन प्रदर्शनों से होने वाली आर्थिक परेशानियों की जिम्मेदारी स्वीकार करते हैं, जिनका वे समर्थन करते हैं?

5. क्या अपने कारोबार पर ऐसी रुकावट स्वीकार करेंगे: यदि राहुल गांधी के अपने कारोबार, आजीविका या दैनिक कमाई पर इसी तरह लंबे समय तक असर पड़ता, तो क्या वह ऐसी परिस्थितियों को स्वीकार करते?

दिल्ली सिर्फ राजनीतिक प्रदर्शनों का केंद्र नहीं, बड़ा व्यापारिक हब भी है

बीसी भरतिया ने कहा कि राजनीतिक दलों को समझना चाहिए कि दिल्ली केवल राजनीतिक रैलियों और प्रदर्शनों का स्थान नहीं है, बल्कि देश के प्रमुख व्यापारिक और आर्थिक केंद्रों में से एक है। दिल्ली के बाजार लाखों लोगों की आजीविका का आधार हैं और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के साथ-साथ सरकारी राजस्व में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। उन्होंने राहुल गांधी से केवल पत्र का जवाब देने की अपील नहीं की, बल्कि आत्ममंथन करने और भविष्य में इस तरह की आर्थिक बाधाएं दोबारा न होने देने की भी मांग की।

'विरोध का अधिकार है, लेकिन दूसरों की आजीविका बाधित नहीं होनी चाहिए'

CAIT ने स्पष्ट किया कि विरोध प्रदर्शन करना लोकतंत्र का अभिन्न हिस्सा है और प्रत्येक नागरिक को इसका अधिकार है। हालांकि, संगठन का कहना है कि इस अधिकार का इस्तेमाल इस तरह नहीं होना चाहिए, जिससे किसी दूसरे व्यक्ति का कारोबार, रोजगार या आजीविका प्रभावित हो। दिवाली के बाद होने वाली राष्ट्रीय बैठक में व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधि आगे की रणनीति तय करेंगे। साथ ही देशव्यापी धिक्कार दिवस के आयोजन की तारीख भी घोषित की जाएगी।

© Copyright Galactic Television & Communications Pvt. Ltd. 2026. All rights reserved.