नई दिल्ली:  दिल्ली-NCR में सर्दियों की शुरुआत के साथ वायु प्रदूषण ने एक बार फिर लोगों की चिंता बढ़ा दी है। बुधवार, 4 नवंबर को राजधानी की हवा बेहद खराब श्रेणी में दर्ज की गई। भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 369 रहा। वहीं, कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर 400 के पार पहुंच गया। मंदिर मार्ग पर AQI 508 दर्ज किया गया, जो गंभीर श्रेणी में आता है।

मंगलवार को दिल्ली का औसत AQI 350 दर्ज किया गया था। इसके बाद बुधवार सुबह भी हवा की गुणवत्ता में सुधार नहीं दिखा। राजधानी के कई हिस्सों में धुंध और प्रदूषण का असर महसूस किया जा रहा है। GRAP के दूसरे चरण के उपाय लागू होने के बावजूद प्रदूषण का स्तर चिंता का विषय बना हुआ है।

कई इलाकों में AQI 400 के पार

दिल्ली के अलग-अलग मॉनिटरिंग स्टेशनों पर प्रदूषण का स्तर काफी अधिक दर्ज किया गया। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, जहांगीरपुरी और पंजाबी बाग में AQI 447, रोहिणी में 433, विवेक विहार में 428, अलीपुर में 419 और नरेला में 418 रहा। आरके पुरम और आईटीओ में भी AQI 417 दर्ज किया गया, जबकि पटपड़गंज में यह 410 तक पहुंच गया।

इन आंकड़ों से पता चलता है कि प्रदूषण की समस्या केवल किसी एक इलाके तक सीमित नहीं है। राजधानी के कई आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब बनी हुई है। हालांकि, अलग-अलग मॉनिटरिंग स्टेशनों की रीडिंग और शहर के औसत AQI में अंतर हो सकता है।

क्यों बढ़ रहा है दिल्ली में प्रदूषण?

दिल्ली में सर्दियों के दौरान प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई कारण जिम्मेदार होते हैं। वाहनों से निकलने वाला धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल, सड़कों पर जमा मिट्टी और कचरा जलाने जैसी गतिविधियां हवा में प्रदूषक कणों की मात्रा बढ़ाती हैं।

मौसम में बदलाव भी इस समस्या को गंभीर बना देता है। हवा की रफ्तार कम होने पर प्रदूषक कण वातावरण में लंबे समय तक बने रह सकते हैं। इसके अलावा उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में पराली जलाने की घटनाओं को भी दिल्ली की हवा खराब होने से जुड़े कारकों में गिना जाता है। हालांकि, राजधानी के प्रदूषण में पराली का योगदान हवा की दिशा और मौसम के अनुसार बदलता रहता है। इसे प्रदूषण का एकमात्र कारण नहीं माना जा सकता। 

GRAP-2 के तहत लागू किए गए उपाय

वायु गुणवत्ता बिगड़ने के बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने दिल्ली-NCR में GRAP के दूसरे चरण के उपाय लागू किए हैं। इनका उद्देश्य प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों पर नियंत्रण करना और हवा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने की कोशिश करना है।

इसके तहत सड़कों की मैकेनिकल सफाई, धूल वाले स्थानों पर पानी का छिड़काव और निर्माण स्थलों पर नियमों का पालन सुनिश्चित करने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। प्रदूषण वाले हॉटस्पॉट और ट्रैफिक जाम वाले इलाकों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।

लोगों से निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करने, सार्वजनिक परिवहन अपनाने और कार पूलिंग को बढ़ावा देने की अपील की जा रही है। हालांकि, इन उपायों का असर तभी दिखाई देगा जब संबंधित एजेंसियां लगातार निगरानी और कार्रवाई करेंगी।

एंटी-स्मॉग गन और सड़कों की सफाई पर जोर

प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली में धूल प्रबंधन की गतिविधियां तेज करने की तैयारी है। लोक निर्माण विभाग (PWD) ने 200 ट्रक-माउंटेड एंटी-स्मॉग गन की जांच के लिए समितियां गठित की हैं। उपकरणों की स्थिति और काम करने की क्षमता की जांच के बाद उन्हें अभियान में शामिल किया जाएगा।

विभाग की योजना करीब 1,400 किलोमीटर के सड़क नेटवर्क पर सफाई और धूल नियंत्रण से जुड़े काम करने की है। इसमें सड़कों की सफाई, फुटपाथों के किनारे जमा धूल हटाना और जरूरत के मुताबिक पानी का छिड़काव करना शामिल है।

विशेषज्ञों के अनुसार, केवल एंटी-स्मॉग गन चलाने से प्रदूषण की समस्या खत्म नहीं होगी। वाहनों के धुएं, निर्माण गतिविधियों, औद्योगिक उत्सर्जन और खुले में कचरा जलाने पर भी प्रभावी नियंत्रण जरूरी है। 

गुरुग्राम में भी प्रशासन सख्त

दिल्ली से सटे गुरुग्राम में भी प्रदूषण को देखते हुए प्रशासन ने कदम उठाए हैं। जिला प्रशासन ने 5 नवंबर से 20 नवंबर तक धूल पैदा करने वाली निर्माण और तोड़फोड़ गतिविधियों पर रोक लगाने का आदेश दिया है। सड़क, राजमार्ग, फ्लाईओवर और पाइपलाइन से जुड़ी कई परियोजनाएं इस दायरे में आती हैं। कुछ आवश्यक सेवाओं और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को छूट दी गई है।

इसके अलावा सरकारी और निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों को कार्यालय बुलाने तथा बाकी कर्मचारियों को घर से काम करने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी की जरूरत

खराब हवा का असर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस या हृदय संबंधी बीमारी से जूझ रहे लोगों पर अधिक पड़ सकता है। प्रदूषण के संपर्क में आने से आंखों में जलन, गले में खराश, खांसी और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

ऐसे समय में लोगों को प्रदूषण का स्तर अधिक होने पर बाहर लंबे समय तक व्यायाम करने से बचना चाहिए। जरूरत पड़ने पर अच्छी फिटिंग वाला N95 मास्क इस्तेमाल किया जा सकता है। अस्थमा या अन्य श्वसन संबंधी बीमारी से पीड़ित लोगों को अपनी निर्धारित दवाएं लेते रहना चाहिए और परेशानी बढ़ने पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

अगले दिनों में भी राहत की उम्मीद कम

IITM के उपलब्ध पूर्वानुमान के मुताबिक, गुरुवार को भी दिल्ली की हवा बेहद खराब श्रेणी में रह सकती है। अनुमान में AQI करीब 343 रहने की संभावना जताई गई थी। मौसम विभाग के अनुसार 4 से 6 नवंबर के दौरान आसमान मुख्य रूप से साफ रहने और सुबह धुंध छाए रहने की संभावना है।

फिलहाल दिल्ली-NCR में प्रदूषण से राहत के लिए सरकारी उपायों के साथ नागरिकों की भागीदारी भी जरूरी है। वाहनों का सीमित इस्तेमाल, सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता, कचरा न जलाना और निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण जैसे कदम प्रदूषण कम करने में मदद कर सकते हैं। राजधानी के लोगों को फिलहाल AQI पर नजर रखने और अपनी सेहत का ध्यान रखने की जरूरत है।