दिल्ली पुलिस ने 5 राज्यों में डिजिटल अरेस्ट ठगी से बचाए ₹1.53 करोड़, बुजुर्गों को किया सतर्क

दिल्ली पुलिस ने पांच राज्यों में डिजिटल अरेस्ट ठगी के मामलों में समय रहते हस्तक्षेप कर ₹1.53 करोड़ के संभावित अतिरिक्त नुकसान को रोका। बुजुर्गों को गिरफ्तारी की धमकी देकर पैसे ऐंठने वाले साइबर ठगों से सतर्क रहने की अपील की गई।

By  Preeti Kamal October 18th 2026 07:07 PM -- Updated: October 18th 2026 06:55 PM

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की वित्तीय निगरानी प्रकोष्ठ (एफएमसी) की आईएफएसओ इकाई की पीड़ित पहचान एवं सुरक्षा टीम ने पांच राज्यों में डिजिटल अरेस्ट ठगी के कई मामलों में हस्तक्षेप कर संभावित रूप से ₹1.53 करोड़ के अतिरिक्त नुकसान को रोकने में मदद की है।

पुलिस के अनुसार, टीम ने कई वरिष्ठ नागरिकों को ठगों के चंगुल से बचाया और उनकी बची हुई रकम सुरक्षित रखने के लिए समय रहते कार्रवाई की। पुलिस ने बताया कि टीम ने संदिग्ध लेन-देन की निगरानी की, ठगी के शिकार ऐसे लोगों की पहचान की जो अब भी धोखेबाजों के दबाव में थे, और उनसे संपर्क कर आगे होने वाले वित्तीय नुकसान को रोका।

साइबर हेल्पलाइन 1930 से मिली शिकायत के बाद शुरू हुई कार्रवाई

यह कार्रवाई साइबर हेल्पलाइन 1930 के माध्यम से मिली शिकायत के बाद शुरू हुई। 14 सितंबर को दिल्ली के सागरपुर में रहने वाले एक सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी को ठगों ने निशाना बनाया। आरोपियों ने खुद को भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) का अधिकारी बताया और दावा किया कि उनके आधार कार्ड पर जारी सिम कार्ड तथा क्रेडिट कार्ड का कनाडा में दुरुपयोग हुआ है।

इसके बाद उन्हें एक वीडियो कॉल पर ऐसे व्यक्ति से जोड़ा गया, जिसने खुद को भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) का अधिकारी बताया। उसने अधिकारी को धनशोधन के मामले में गिरफ्तारी की धमकी दी। डर के कारण पीड़ित ने बैंक ऑफ बड़ौदा, आईसीआईसीआई बैंक और भारतीय स्टेट बैंक के खातों से बड़ी रकम ट्रांसफर कर दी। इस मामले में 29 सितंबर को इलेक्ट्रॉनिक प्राथमिकी (ई-एफआईआर) दर्ज की गई।

दिल्ली में 77 वर्षीय बुजुर्ग को बचाया

पीड़ित के आईसीआईसीआई बैंक खाते की जांच में पता चला कि रकम हैदराबाद के एक्सिस बैंक के एक ऐसे खाते में पहुंची थी, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर ठगी की रकम प्राप्त करने के लिए किया जा रहा था। आगे की जांच में सामने आया कि 21 से 29 सितंबर के बीच पांच अन्य लोगों ने भी इसी खाते में पैसे भेजे थे। पुलिस टीम ने समय रहते इन पीड़ितों से संपर्क किया।

दिल्ली के नजफगढ़ में भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के 77 वर्षीय सेवानिवृत्त कर्मचारी 17 सितंबर से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगों के दबाव में थे। आरोपी उनसे तीन लाख रुपये और मांग रहे थे तथा सोना-चांदी गिरवी रखने के लिए दबाव बना रहे थे। पुलिस की काउंसलिंग, हेल्पलाइन 1930 के माध्यम से सत्यापन और मौके पर पहुंची पुलिस टीम की कार्रवाई से यह सिलसिला समाप्त हुआ। इससे लगभग ₹3.48 लाख के अतिरिक्त नुकसान को रोकने में मदद मिली।

राजस्थान में मकान गिरवी रखने का बना रहे थे दबाव

राजस्थान में 80 वर्षीय कपड़ा व्यापारी अपनी पत्नी के साथ रहते हैं। पुलिस के अनुसार, वह पहले ही ठगों को ₹18 लाख दे चुके थे। इसके बाद आरोपी उनसे मकान गिरवी रखकर अतिरिक्त ₹10 लाख देने का दबाव बना रहे थे। दिल्ली पुलिस की टीम ने उन्हें राज्य की साइबर हेल्पलाइन से जोड़ा, जिसके बाद अतिरिक्त भुगतान रोका जा सका।

उत्तर प्रदेश में दंपती से ₹52 लाख की ठगी

उत्तर प्रदेश में करीब 70 वर्ष के एक सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारी और उनकी पत्नी, जो पेशे से नर्स हैं, को ठगों ने यह कहकर डराया कि उनका आधार कार्ड विस्फोट से जुड़े एक मामले में इस्तेमाल हुआ है। पुलिस के मुताबिक, दंपती लगभग ₹52 लाख गंवा चुके थे। समय पर हस्तक्षेप से उनकी ₹10 लाख की सावधि जमा (एफडी) तुड़वाने की कोशिश रोक दी गई।

महाराष्ट्र और गुजरात में भी समय रहते हस्तक्षेप

महाराष्ट्र में 65 वर्षीय अस्पताल सहायक को 15 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगों ने अपने दबाव में रखा था। वह लगभग ₹85 लाख गंवा चुके थे। पुलिस टीम ने परिवार की सावधि जमा को सुरक्षित रखने में मदद की, क्योंकि ठग उनसे अतिरिक्त ₹55 लाख मांग रहे थे।

वहीं, गुजरात में 50 वर्षीय कारोबारी ने निवेश समझकर ₹25 लाख ट्रांसफर कर दिए थे। वह कुल ₹1 करोड़ निवेश करने की योजना के तहत बाकी ₹75 लाख भी भेजने वाले थे। पुलिस टीम ने समय रहते उन्हें सतर्क किया और आगे का भुगतान रुकवा दिया।

दिल्ली पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट को बताया फर्जी तरीका

दिल्ली पुलिस के अनुसार, इन पांच राज्यों में की गई कार्रवाई में चार मामलों के पीड़ित 65 से 80 वर्ष की उम्र के बुजुर्ग थे। इनमें से कई लोग अकेले रहते थे। टीम ने बैंकों, हेल्पलाइन 1930 और संबंधित राज्यों की साइबर इकाइयों के साथ समन्वय कर शिकायतें दर्ज कराने और शेष धनराशि सुरक्षित रखने में मदद की।

दिल्ली पुलिस ने लोगों को आगाह किया कि डिजिटल अरेस्ट नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है। कोई भी वास्तविक सरकारी अधिकारी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी की धमकी देकर पैसे जमा करने की मांग नहीं करता। ऐसी स्थिति में घबराकर रकम ट्रांसफर न करें और तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।

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