FCRA और परिसीमन बिल पर सस्पेंस, क्या विपक्ष से ‘Give and Take’ करेगी सरकार?
FCRA और परिसीमन बिल को लेकर संसद के मॉनसून सत्र के आखिरी तीन दिन बेहद अहम हैं। सरकार विपक्ष के साथ ‘Give and Take’ के जरिए सहमति बनाने की कोशिश कर सकती है, जबकि दोनों विधेयकों के भविष्य पर अभी सस्पेंस बना हुआ है।
नई दिल्ली: संसद के मॉनसून सत्र के अब सिर्फ तीन दिन बचे हैं और इसके साथ ही दो अहम विधेयकों—FCRA संशोधन बिल और परिसीमन संविधान संशोधन बिल—को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। सरकार ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि दोनों विधेयकों को सदन में कब और किस रणनीति के साथ लाया जाएगा। हालांकि, सरकारी सूत्रों के मुताबिक विपक्षी दलों के साथ सहमति बनाने के लिए ‘Give and Take’ का विकल्प खुला हुआ है।
20 जुलाई से शुरू हुए मॉनसून सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच लगातार टकराव देखने को मिला है। हंगामे के बीच सरकार ने कुछ विधेयकों को पारित भी कराया, लेकिन FCRA और परिसीमन जैसे मुद्दों पर अभी सहमति नहीं बन पाई है।
छात्रों पर पुलिस कार्रवाई पर चर्चा को सरकार तैयार
संसद की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में सरकार ने 20 जुलाई को संसद भवन की ओर मार्च कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर चर्चा की विपक्ष की मांग स्वीकार कर ली। सरकार की ओर से कहा गया कि गृह मंत्री अमित शाह सदन में इस विषय पर जवाब देंगे।
हालांकि, इसके बाद विपक्षी दलों के बीच भी एकराय नजर नहीं आई। समाजवादी पार्टी ने राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े मामले पर चर्चा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जवाब की मांग रख दी। ऐसे में संसद का गतिरोध पूरी तरह खत्म होने के संकेत अभी नहीं मिले हैं।
FCRA बिल पर सरकार के सामने क्या विकल्प?
FCRA संशोधन बिल को लेकर विपक्ष का विरोध जारी है। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने सरकार के बिल को संयुक्त संसदीय समिति यानी JPC के पास भेजने के विकल्प को भी खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि सरकार को यह विधेयक वापस लेना चाहिए।
दूसरी ओर, सरकारी सूत्रों के मुताबिक आने वाले तीन दिनों में FCRA बिल को सदन में पेश करने का विकल्प अभी खुला है। सूत्रों का दावा है कि सरकार इस मुद्दे पर कांग्रेस और DMK जैसे दलों के साथ बातचीत कर सकती है।
सरकार FCRA बिल में कुछ बदलाव करके विपक्ष की आपत्तियां कम करने की कोशिश भी कर सकती है। इसी के साथ परिसीमन बिल पर समर्थन हासिल करने के लिए राजनीतिक स्तर पर सहमति बनाने की संभावना पर भी चर्चा है।
DMK के रुख पर नजर
FCRA और परिसीमन दोनों मुद्दों पर DMK का रुख सरकार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, FCRA पर कुछ कदम पीछे हटने के बदले परिसीमन बिल पर DMK के समर्थन की संभावना तलाशने की कोशिश हो सकती है।
हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि दोनों पक्षों के बीच किसी तरह की औपचारिक सहमति बनी है या नहीं। ऐसे में अगले कुछ दिन संसद की राजनीति के लिहाज से बेहद अहम रहने वाले हैं।
शरद पवार गुट के सांसदों की PM मोदी से मुलाकात
परिसीमन बिल को लेकर राजनीतिक गतिविधियां उस समय और तेज हुईं, जब NCP के शरद पवार गुट के सभी आठ लोकसभा सांसदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। बताया गया कि बैठक का मुख्य मुद्दा महाराष्ट्र में सूखे और अकाल की स्थिति था।
हालांकि, इस मुलाकात को परिसीमन बिल के लिए समर्थन जुटाने की सरकार की संभावित कोशिश से भी जोड़कर देखा जा रहा है। सरकारी सूत्रों का दावा है कि परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन को पारित कराने के लिए सरकार के पास जरूरी संख्या मौजूद है।
फिर बिल क्यों नहीं ला रही सरकार?
यही सवाल अब संसद के गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा में है। अगर सरकार के पास आवश्यक संख्या होने का दावा है तो परिसीमन बिल को अभी तक सदन में क्यों नहीं लाया गया? सरकारी सूत्रों के अनुसार विपक्ष इस विधेयक को रोकने के लिए लगातार अलग-अलग मुद्दों के जरिए सदन में गतिरोध बनाए रखना चाहता है।
वहीं विपक्ष का तर्क है कि सरकार को पहले विवादित विधेयकों पर व्यापक चर्चा और सहमति का रास्ता अपनाना चाहिए।
विशेष सत्र की भी चर्चा
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर अगले दो दिनों में परिसीमन विधेयक सदन में नहीं आया या पारित नहीं हो सका तो सरकार की अगली रणनीति क्या होगी। क्या सरकार शीतकालीन सत्र तक इंतजार करेगी या फिर इसके लिए विशेष सत्र बुलाने का विकल्प चुना जाएगा?
फिलहाल सरकार और विपक्ष दोनों की रणनीति पर नजर बनी हुई है। मॉनसून सत्र के आखिरी तीन दिन यह तय कर सकते हैं कि FCRA और परिसीमन बिल संसद की कार्यवाही में आगे बढ़ते हैं या राजनीतिक सहमति के अभाव में इनका इंतजार बढ़ जाता है।