₹200 करोड़ मनी लॉन्ड्रिंग केस में जैकलीन फर्नांडिस और सुकेश चंद्रशेखर पर आरोप तय करने के निर्देश

By  Preeti Kamal May 30th 2026 06:00 PM -- Updated: May 30th 2026 05:35 PM

नई दिल्ली, भारत: दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने शनिवार को ₹200 करोड़ की कथित जबरन वसूली से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुकेश चंद्रशेखर, लीना मारिया पॉल, जैकलीन फर्नांडिस और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही अदालत ने ₹200 करोड़ की कथित जबरन वसूली से जुड़े MCOCA मामले में भी सुकेश चंद्रशेखर, लीना मारिया पॉल और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया है।

हालांकि जैकलीन फर्नांडिस इस जबरन वसूली मामले में आरोपी नहीं हैं। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने दोनों मामलों में आरोप तय करने के निर्देश दिए। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री के आधार पर प्रथम दृष्टया सभी आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त आधार और मजबूत संदेह बनता है। इसलिए उनके खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 3 के तहत आरोप तय किए जाने चाहिए, जिसकी सजा धारा 4 में निर्धारित है।

अदालत ने अगली सुनवाई 3 जून को तय की

मामले में आरोपों पर औपचारिक हस्ताक्षर के लिए अदालत ने अगली सुनवाई 3 जून को तय की है। सभी आरोपियों को दोपहर 2 बजे अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। यह मामला अदिति सिंह की शिकायत पर दर्ज दिल्ली पुलिस केस से जुड़ा है। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था।

अदालत ने जैकलीन फर्नांडिस को समन जारी किया था

इससे पहले दिल्ली उच्च न्यायालय ने जैकलीन फर्नांडिस की वह याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ दायर पूरक आरोपपत्र को रद्द करने की मांग की थी। ED ने अपने पूरक आरोपपत्र में उन्हें आरोपी बनाया था। आरोपपत्र पर संज्ञान लेने के बाद अदालत ने जैकलीन को समन जारी किया था। अदालत में पेश होने के बाद उन्हें जमानत मिल गई थी।

जैकलिन ने सरकारी गवाह बनने की अर्जी वापस ली

सुकेश चंद्रशेखर फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। वहीं उनकी पत्नी लीना मारिया पॉल को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है, लेकिन MCOCA मामले में उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाएं अभी दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित हैं। हाल ही में जैकलीन फर्नांडिस ने इस मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सरकारी गवाह (Approver) बनने के लिए दायर अपनी अर्जी भी वापस ले ली थी।

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