CBSE री-इवैल्यूएशन के लिए नया पोर्टल मंजूर, IIT मद्रास और IIT कानपुर की अहम भूमिका...
नई दिल्ली: CBSE के पोस्ट-रिजल्ट सिस्टम की सुरक्षा जांच करने वाले IIT पैनल ने नए परीक्षक-उन्मुख पोर्टल को पूर्ण सुरक्षा मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही हजारों छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन (री-इवैल्यूएशन) का रास्ता साफ हो गया है। यह नया पोर्टल उस पुराने पोर्टल की जगह लाया गया है, जिसे कोएम्प्ट एडुटेक ने विकसित किया था। सुरक्षा जांच में उस पोर्टल में कई गंभीर कमजोरियां पाई गई थीं, जिसके बाद CBSE ने उसे इस्तेमाल न करने का फैसला लिया।
IIT पैनल के एक सदस्य ने बताया कि नया पोर्टल पुराने कोड के आधार पर तैयार किया गया है, लेकिन इसमें सुरक्षा के लिहाज से बड़े बदलाव किए गए हैं। उन्होंने कहा कि बदलाव कार्यक्षमता में नहीं, बल्कि सुरक्षा को मजबूत करने के लिए किए गए हैं। पैनल सदस्य के अनुसार पुराने पोर्टल में ऐसी कई सुरक्षा कमजोरियां थीं, जिनके जरिए डेटा और रिकॉर्ड तक अनधिकृत पहुंच संभव थी। यह एक गंभीर मामला था और सभी संभावित खामियों को दूर करने के लिए विस्तृत समीक्षा की गई।
ऑन-स्क्रीन मार्किंग पोर्टल में सामने आईं थी साइबर सुरक्षा संबंधी खामियां
कोएम्प्ट एडुटेक उस समय विवादों में आया था जब बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग और मूल्यांकन के लिए उपयोग किए जाने वाले ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) पोर्टल में साइबर सुरक्षा संबंधी खामियां सामने आई थीं। कई व्हिसलब्लोअर्स ने भी इस सिस्टम की सुरक्षा पर सवाल उठाए थे। इन निष्कर्षों के बाद CBSE ने ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम से जुड़े सभी डेटा और रिकॉर्ड को कंपनी के सर्वरों से हटाकर अपने नियंत्रण वाले सर्वरों में स्थानांतरित कर दिया।
नए पोर्टल को बनाने में कई संस्थानों की भूमिका है
जब नए पोर्टल के विकासकर्ताओं के बारे में पूछा गया तो पैनल सदस्य ने बताया कि इसमें कई संस्थानों की भूमिका रही। डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन (डीआईसी) और IIT मद्रास ने बेस कोड को बेहतर बनाने पर काम किया, जबकि IIT कानपुर ने सुरक्षा कमजोरियों की पहचान और परीक्षण किया। इस बीच, 7 जून पुनर्मूल्यांकन और अंकों के सत्यापन के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि थी। CBSE ने अभी तक यह नहीं बताया है कि कुल कितने छात्रों ने पुनर्मूल्यांकन का विकल्प चुना है।
4 जून 2026 तक CBSE की पोस्ट-रिजल्ट शिकायत निवारण प्रक्रिया के तहत कुल 70,433 सफल आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें 7,314 आवेदन अंकों के सत्यापन के लिए और 63,119 आवेदन पुनर्मूल्यांकन के लिए दर्ज किए गए थे।