रांची, झारखंड: सालों की तैयारी, आर्थिक संघर्ष और परिवार के सहयोग के बाद सरकारी नौकरी हासिल करने वाले झारखंड के सैकड़ों उम्मीदवारों के लिए नियुक्ति पत्र किसी सपने के सच होने जैसा था। लेकिन नौकरी ज्वाइन करने के कुछ ही दिनों बाद भर्ती परीक्षाएं रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले ने उनकी खुशियों को चिंता में बदल दिया।
अब झारखंड हाईकोर्ट द्वारा सरकार के फैसले पर अंतरिम रोक लगाए जाने के बाद उम्मीदवारों को फिलहाल राहत मिली है। विरोध प्रदर्शन कर रहे कई उम्मीदवार अब अपने-अपने कार्यालयों में लौटने की तैयारी कर रहे हैं, हालांकि भर्ती और नियुक्तियों को लेकर कानूनी लड़ाई अभी जारी है।
पिता का सपना था सरकारी अधिकारी बनने का: नैना मिंच
ब्लॉक वेलफेयर ऑफिसर (BWO) नैना मिंच के लिए यह नौकरी सिर्फ एक सरकारी पद नहीं, बल्कि उनके पिता का सपना भी थी। कोरोना महामारी के दौरान पिता को खोने के बाद उन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपनी तैयारी जारी रखी।
नैना मिंच ने मीडिया से कहा, "मैंने इस नौकरी के लिए बहुत मेहनत की है। यह सिर्फ मेरा सपना नहीं था, बल्कि मेरे पिता का भी सपना था। उन्हें खोने के बाद भी मैंने खुद को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। जब नौकरी मिली तो लगा कि उनके आशीर्वाद से यहां तक पहुंची हूं। लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि सब कुछ फिर से छिन गया।" हाईकोर्ट की अंतरिम राहत के बाद उनका सरकारी अधिकारी बनने का सपना फिलहाल बरकरार है, लेकिन अंतिम फैसले को लेकर अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है।
सरकार के भर्ती रद्द करने के फैसले से बढ़ा विवाद
विवाद उस समय गहरा गया, जब हेमंत सोरेन सरकार ने कथित अनियमितताओं के आरोपों का हवाला देते हुए झारखंड कर्मचारी चयन आयोग संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा JSSC-CGL 2024 समेत आउटसोर्स एजेंसी TSR Data Processing Pvt Ltd (TDPL) द्वारा आयोजित अन्य भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला किया। सरकार के फैसले के बाद उन उम्मीदवारों ने विरोध शुरू कर दिया, जिन्होंने परीक्षा पास की थी, नियुक्ति पत्र प्राप्त कर लिया था और सरकारी सेवा में शामिल भी हो चुके थे।
उम्मीदवारों का कहना है कि यदि भर्ती प्रक्रिया में किसी व्यक्ति ने गलत तरीके अपनाए हैं तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन ईमानदारी से परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थियों को सामूहिक रूप से सजा नहीं मिलनी चाहिए।

हाईकोर्ट की अंतरिम रोक से मिली राहत
हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद उम्मीदवारों को अस्थायी राहत मिली है। प्रदर्शन कर रहे एक उम्मीदवार ने मीडिया से कहा, "हाईकोर्ट द्वारा सरकार के फैसले पर अंतरिम रोक लगाए जाने के बाद हमारा प्रदर्शन समाप्त हो गया है। हमें राहत मिली है और हम वापस अपने कार्यालयों में लौटेंगे।" हालांकि, अदालत का यह आदेश अंतरिम है और कथित अनियमितताओं तथा भर्ती रद्द करने के सरकार के फैसले पर अंतिम कानूनी फैसला अभी होना बाकी है।
छह साल की तैयारी के बाद मिली पहली नौकरी
वर्षा ऐंद के लिए यह नौकरी उनके वर्षों के संघर्ष का परिणाम थी। उन्होंने बताया कि करीब छह साल तक तैयारी और इंतजार के बाद उन्हें अपनी पहली सरकारी नौकरी मिली थी। उन्होंने कहा, "यह मेरी पहली नौकरी थी। मैंने इसके लिए कई साल मेहनत की थी। अचानक सब कुछ खोने की आशंका बेहद दर्दनाक थी। हमें न्यायपालिका पर भरोसा है और हम सिर्फ इतना चाहते हैं कि हमारी वर्षों की मेहनत को मान्यता मिले।"
शुरुआत से विवादों में रही JSSC-CGL परीक्षा
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, JSSC-CGL 2024 भर्ती प्रक्रिया शुरुआत से ही विवादों में रही। जनवरी 2024 में आयोजित पहली परीक्षा कथित प्रश्नपत्र लीक के बाद रद्द कर दी गई थी। इसके बाद सितंबर में दोबारा परीक्षा कराई गई, लेकिन इस परीक्षा को लेकर भी कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आए। भर्ती प्रक्रिया को लेकर लगातार बनी अनिश्चितता के बीच मामला अदालतों तक पहुंचा।
उम्मीदवारों के अनुसार, दिसंबर 2025 में झारखंड हाईकोर्ट ने अधिकारियों को उन चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी करने का निर्देश दिया था, जिनके खिलाफ कोई विशेष संदेह या आरोप नहीं था। इसके बाद जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने भी भर्ती प्रक्रिया को रद्द करने का आदेश देने से इनकार कर दिया था।

30 दिसंबर को मिला नियुक्ति पत्र, अगले दिन ज्वाइनिंग
प्रदर्शन में शामिल ब्लॉक वेलफेयर ऑफिसर सत्याम दासौंधी ने बताया कि हाईकोर्ट से मिली अंतरिम राहत के बाद आंदोलन समाप्त कर दिया गया है। उन्होंने कहा, "यह सिर्फ अंतरिम रोक है, लेकिन इससे हमें राहत मिली है। हम कल से वापस अपने कार्यालयों में जाएंगे।" उन्होंने बताया कि दिसंबर 2025 में अदालत ने CID जांच जारी रहने के दौरान नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की अनुमति दी थी। अदालत के आदेश के बाद सरकार ने अंतिम परिणाम घोषित किया।
सत्याम के अनुसार, चयनित उम्मीदवारों को 30 दिसंबर 2025 को नियुक्ति पत्र मिला और उन्होंने 31 दिसंबर 2025 को अपने पदों पर कार्यभार संभाल लिया।उन्होंने कहा कि बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा, लेकिन हाईकोर्ट के आदेश में कोई बदलाव नहीं हुआ। ऐसे में उम्मीदवारों को लगा था कि उनकी नौकरी अब सुरक्षित है।
'दोषियों पर कार्रवाई हो, लेकिन ईमानदार उम्मीदवारों को क्यों सजा?'
सत्याम दासौंधी ने बताया कि भर्ती प्रक्रिया में कथित तौर पर प्रश्नपत्र लीक, नकल और पैसे देकर नौकरी पाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए। उन्होंने कहा, "अगर किसी ने गलत काम किया है तो उसके खिलाफ निश्चित रूप से कार्रवाई होनी चाहिए। हमें जांच से कोई समस्या नहीं है और हम पूरा सहयोग करने के लिए तैयार हैं। लेकिन जिन्होंने अपनी मेहनत और ईमानदारी से परीक्षा पास की, उनकी नौकरी क्यों छीन ली जाए?" उम्मीदवारों का तर्क है कि जांच के जरिए दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है, जबकि निर्दोष और ईमानदार अभ्यर्थियों की नियुक्ति को बरकरार रखा जाना चाहिए।

नियुक्ति पत्र के साथ अब कानूनी लड़ाई भी
फिलहाल, हाईकोर्ट की अंतरिम रोक ने उम्मीदवारों को अपने कार्यालयों में लौटने का रास्ता दिया है। लेकिन उनकी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। इन उम्मीदवारों के लिए यह मामला अब केवल सरकारी नौकरी का नहीं रहा। यह वर्षों की तैयारी, परिवारों के त्याग और व्यक्तिगत संघर्ष की उस लड़ाई का सवाल बन गया है, जिसका अंतिम फैसला अदालत में होना बाकी है। उम्मीदवार फिलहाल राहत के साथ काम पर लौट रहे हैं, लेकिन उनके मन में यह आशंका अभी भी बनी हुई है कि लंबे समय से चल रही कानूनी लड़ाई का अंतिम नतीजा क्या होगा।
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