लखनऊ, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश में स्कूली शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में हरदोई और बांदा जनपदों में मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालयों के निर्माण के लिए कुल ₹5,216.77 लाख यानी करीब ₹52.17 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की है। दोनों विद्यालय प्री-प्राइमरी से कक्षा 12 तक की शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित किए जाएंगे।

हरदोई जनपद की तहसील सवायजपुर के राजस्व ग्राम शेखपुर में मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय-द्वितीय (फेज-2) के निर्माण के लिए ₹2,689.14 लाख यानी करीब ₹26.89 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की गई है। उत्तर प्रदेश सरकार के ई-परियोजना संबंधी आधिकारिक रिकॉर्ड में भी शेखपुर, जनपद हरदोई में बेसिक शिक्षा विभाग से संबंधित परियोजना के लिए ₹2,689.14 लाख की राशि दर्ज है। यह विद्यालय प्री-प्राइमरी से कक्षा 12 तक के विद्यार्थियों को एक ही परिसर में शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित किया जाएगा।

बांदा के भसरौड में ₹25.28 करोड़ की परियोजना

इसी क्रम में बांदा जनपद की तहसील नरैनी के ग्राम भसरौड में मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय के निर्माण के लिए ₹2,527.63 लाख यानी करीब ₹25.28 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की गई है। सरकारी ई-परियोजना रिकॉर्ड में भी भसरौड, तहसील नरैनी से संबंधित निर्माण परियोजना के लिए ₹2,527.63 लाख की राशि दर्ज है। यह विद्यालय भी प्री-प्राइमरी से कक्षा 12 तक की शिक्षा के लिए विकसित किया जाएगा।

एक परिसर में मिलेगी स्कूल शिक्षा की पूरी व्यवस्था

मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालयों की अवधारणा का उद्देश्य विद्यार्थियों को प्राथमिक स्तर से लेकर माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक स्तर तक बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थियों को अपने ही क्षेत्र में आधुनिक और व्यवस्थित स्कूल सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। हरदोई और बांदा की इन दोनों परियोजनाओं पर स्वीकृत धनराशि को जोड़ने पर कुल ₹5,216.77 लाख (लगभग ₹52.17 करोड़) होती है।

शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर जोर

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सरकारी विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार पर लगातार जोर दिया जा रहा है। मॉडल कंपोजिट विद्यालय इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तौर पर देखे जा रहे हैं। इन दोनों विद्यालयों के निर्माण से संबंधित स्वीकृत परियोजनाओं के पूरा होने के बाद संबंधित क्षेत्रों के विद्यार्थियों को एक ही परिसर में प्री-प्राइमरी से कक्षा 12 तक शिक्षा की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।