फिल्म 'सतलुज' को लेकर SGPC का मार्च, 14 जुलाई को सतलुज किनारे होगी अरदास...

यह फिल्म जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है, जिन्होंने 1980 और 1990 के दशक में पंजाब में कथित अवैध हत्याओं और गुप्त अंतिम संस्कारों के मामलों को उजागर किया था। वर्ष 1995 में वह लापता हो गए थे और बाद में उनका शव हरीके पुल के पास सतलुज नदी से बरामद हुआ था। उन पर कथित अपहरण और हत्या के आरोप तत्कालीन पंजाब पुलिस अधिकारियों पर लगे थे।

By  Preeti Kamal July 10th 2026 12:31 PM -- Updated: July 10th 2026 12:59 PM

अमृतसर, पंजाब: शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने शुक्रवार को अमृतसर में 'सतलुज' फिल्म पर लगे प्रतिबंध के खिलाफ विरोध मार्च निकाला और डिप्टी कमिश्नर को ज्ञापन सौंपकर फिल्म से प्रतिबंध हटाने की मांग की। यह फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है।

मीडिया से बातचीत में SGPC के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि फिल्म में जसवंत सिंह खालड़ा द्वारा पंजाब में उग्रवाद और संघर्ष के दौर के दौरान कथित तौर पर अज्ञात और लावारिस लोगों के अंतिम संस्कार से जुड़े मामलों को उजागर किया गया है। उन्होंने बताया कि जसवंत सिंह खालड़ा ने 1980 से 1997 के बीच श्मशान घाटों और नगर निकायों से उन लोगों का रिकॉर्ड जुटाया था, जिनका कथित तौर पर बिना पहचान के अंतिम संस्कार कर दिया गया था।

उस दौर में कई निर्दोष लोग भी प्रभावित हुए- SGPC अध्यक्ष

हरजिंदर सिंह धामी ने कहा, "उस दौर में कई निर्दोष लोग भी प्रभावित हुए। जो लोग हथियार लेकर लड़ रहे थे, वह अलग बात है, लेकिन सरकार ने न्याय और मानवाधिकारों के लिए काम करने वाले कई निर्दोष लोगों को भी नहीं बख्शा।" उन्होंने आरोप लगाया कि जसवंत सिंह खालड़ा को हिरासत में लेकर कथित तौर पर प्रताड़ित किया गया और बाद में उनकी हत्या कर दी गई।

फिल्म का नाम पहले 'पंजाब 95' था फिर 'सतलुज' किया गया

हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि इस फिल्म का पहले नाम 'पंजाब 95' था, जिसे बाद में बदलकर 'सतलुज' कर दिया गया। सेंसर प्रक्रिया के दौरान फिल्म में कई कट लगाए गए। इसके बावजूद जब यह पंजाब में दो दिन तक चली तो सरकार ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया। धामी ने सवाल उठाया, "सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि इतिहास दिखाने में आखिर क्या गलत था?"

उन्होंने कहा कि SGPC फिल्म की रिलीज के लिए अपना अभियान जारी रखेगी। श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार के निर्देश पर 14 जुलाई को सतलुज नदी के किनारे अरदास आयोजित की जाएगी। उन्होंने लोगों से इसमें शामिल होने की अपील की और कहा कि आयोजन की सभी व्यवस्थाएं एसजीपीसी करेगी। उन्होंने कहा कि यह फिल्म नई पीढ़ी तक पहुंचनी चाहिए, ताकि 1984, 1995 या 2000 के बाद जन्मे युवा पंजाब के उस दौर की वास्तविक घटनाओं को समझ सकें।

फिल्म के पास थिएटर में रिलीज का प्रमाणन नहीं था- सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय 

इस बीच सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि फिल्म के पास थिएटर में रिलीज के लिए आवश्यक प्रमाणन नहीं था। मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि फिल्म निर्माताओं ने आवश्यक प्रमाणन प्रक्रिया पूरी करने के बजाय फिल्म का नाम बदलकर शुक्रवार को इसे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज कर दिया। अधिकारी ने आरोप लगाया कि यह रिलीज सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के प्रावधानों का उल्लंघन है।

फिल्म 'सतलुज' जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है

यह फिल्म जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है, जिन्होंने 1980 और 1990 के दशक में पंजाब में कथित अवैध हत्याओं और गुप्त अंतिम संस्कारों के मामलों को उजागर किया था। वर्ष 1995 में वह लापता हो गए थे और बाद में उनका शव हरीके पुल के पास सतलुज नदी से बरामद हुआ था। उन पर कथित अपहरण और हत्या के आरोप तत्कालीन पंजाब पुलिस अधिकारियों पर लगे थे।

हनी त्रेहान के निर्देशन में बनी इस फिल्म का निर्माण आरएसवीपी और मैकगफिन पिक्चर्स ने किया है। फिल्म में अर्जुन रामपाल, कंवलजीत सिंह, सुविंदर विक्की और गीतिका विद्या ओहल्यान प्रमुख भूमिकाओं में हैं।

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