तमिल सिनेमा के दिग्गज फिल्मकार के. भाग्यराज को राजकीय सम्मान, मुख्यमंत्री विजय ने किया ऐलान
बहुमुखी प्रतिभा के धनी के. भाग्यराज ने 75 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया और 25 से अधिक फिल्मों का निर्देशन किया। वह निर्माता, उपन्यासकार और साप्ताहिक पत्रिका 'भाग्य' के संपादक भी रहे। फिल्म 'मुंधानई मुदिचु' के लिए उन्हें फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार भी मिला।
चेन्नई, तमिलनाडु: तमिल सिनेमा के दिग्गज अभिनेता, निर्देशक और पटकथा लेखक के. भाग्यराज का शनिवार को चेन्नई में कार्डियक अरेस्ट के कारण निधन हो गया। वह 73 वर्ष के थे। कार्डियोपल्मोनरी कार्डियक अरेस्ट आने के बाद उन्हें चेन्नई के ग्रीनवेज़ इलाके स्थित अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद 27 जून 2026 को उन्होंने अंतिम सांस ली।
तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शोक व्यक्त करते हुए लिखा, "वरिष्ठ तमिल फिल्म निर्देशक और लेखक के. भाग्यराज का निधन सिनेमा जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उनकी अनूठी कहानी कहने की शैली, रचनात्मक प्रतिभा और तमिल सिनेमा में उनका अमूल्य योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के फिल्मकारों और सिनेमा प्रेमियों को प्रेरित करती रहेगी। मैं उनके परिवार, मित्रों और लाखों प्रशंसकों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें।"
मुख्यमंत्री विजय ने के.भागयराज के निधन को बताया "अपूरणीय क्षति"
मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने के. भाग्यराज के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने घोषणा की है कि भाग्यराज का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर जारी अपने शोक संदेश में कहा कि के. भाग्यराज ने अपनी बहुमुखी प्रतिभा से तमिल सिनेमा पर अमिट छाप छोड़ी। उन्होंने निर्देशक, अभिनेता, पटकथा लेखक, संवाद लेखक और संगीतकार के रूप में दशकों तक फिल्म जगत को समृद्ध किया। विजय ने उनके निधन को तमिल फिल्म उद्योग के लिए "अपूरणीय क्षति" बताया।
के. भाग्यराज को 'किंग ऑफ स्क्रीनप्ले' के नाम से जाना जाता था
7 जनवरी 1953 को जन्मे के. भाग्यराज को तमिल सिनेमा में 'किंग ऑफ स्क्रीनप्ले' के नाम से जाना जाता था। उन्होंने अपनी फिल्मों में पारंपरिक बड़े नायकों की जगह मध्यमवर्गीय किरदारों, प्रभावशाली संवादों और भावनात्मक कहानियों को प्रमुखता देकर मुख्यधारा के सिनेमा को नई दिशा दी।
उन्होंने वर्ष 1979 में फिल्म 'सुवरिल्लाथा चित्रंगल' से निर्देशन की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने 'अंधा 7 नाटकल' (1981), 'मुंधानई मुदिचु' (1983), 'चिन्ना वीडु' (1985) और 'एंगा चिन्ना रासा' (1987) जैसी कई यादगार फिल्में दीं। 'एंगा चिन्ना रासा' पर आधारित कई भाषाओं में रीमेक बने, जिनमें हिंदी की सुपरहिट फिल्म 'बेटा' भी शामिल है।
करियर की शुरुआत सहायक निर्देशक के रूप में की
अपने करियर की शुरुआत उन्होंने दिवंगत फिल्मकार भारतीराजा के सहायक निर्देशक के रूप में की थी। बाद में वह तमिल सिनेमा के सबसे प्रभावशाली पटकथा लेखकों में शामिल हो गए। उनकी सशक्त पटकथाओं और संवाद लेखन ने उन्हें मास्टर स्टोरीटेलर की पहचान दिलाई। बहुमुखी प्रतिभा के धनी के. भाग्यराज ने 75 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया और 25 से अधिक फिल्मों का निर्देशन किया। वह निर्माता, उपन्यासकार और साप्ताहिक पत्रिका 'भाग्य' के संपादक भी रहे।
फिल्म 'मुंधानई मुदिचु' के लिए मिला फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार
फिल्म 'मुंधानई मुदिचु' के लिए उन्हें फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार भी मिला। उनके परिवार में पत्नी एवं पूर्व अभिनेत्री पूर्णिमा भाग्यराज, बेटी सरन्या और अभिनेता बेटे शांतनु भाग्यराज हैं। गौरतलब है कि उनके निधन से सिर्फ 17 दिन पहले उनके गुरु और प्रसिद्ध फिल्मकार भारतीराजा का भी निधन हुआ था। ऐसे में तमिल फिल्म उद्योग ने बेहद कम समय में अपने दो दिग्गजों को खो दिया है।