आंखों के लिए फायदेमंद यह पोषक तत्व कैंसर इलाज को बना सकता है और असरदार: स्टडी
वॉशिंगटन डीसी, अमरीका: शिकागो विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने ज़ीएक्सैंथिन (Zeaxanthin) नामक एक पौधों से मिलने वाले पोषक तत्व की एक नई भूमिका का खुलासा किया है, जो अब तक आंखों के स्वास्थ्य के लिए जाना जाता था। Cell Reports Medicine में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार, यह कैरोटेनॉयड अब इम्यून सिस्टम को कैंसर से लड़ने में मदद कर सकता है, क्योंकि यह महत्वपूर्ण इम्यून कोशिकाओं की कार्यक्षमता को बढ़ाता है।
शोध के अनुसार, ज़ीएक्सैंथिन एक सरल और आसानी से उपलब्ध सप्लीमेंट हो सकता है, जो कैंसर इम्यूनोथेरेपी को और प्रभावी बना सकता है। अध्ययन की वरिष्ठ लेखिका Jing Chen ने कहा कि हमें यह देखकर आश्चर्य हुआ कि आंखों के लिए फायदेमंद ज़ीएक्सैंथिन कैंसर के खिलाफ इम्यूनिटी को बढ़ाने में भी नई भूमिका निभाता है। उन्होंने आगे कहा कि यह साधारण पोषक तत्व आधुनिक कैंसर उपचार जैसे इम्यूनोथेरेपी को और मजबूत बना सकता है।
कैसे काम करता है ज़ीएक्सैंथिन?
यह शोध इस बात पर आधारित है कि पोषक तत्व इम्यून सिस्टम को कैसे प्रभावित करते हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि ज़ीएक्सैंथिन सीधे CD8 T-सेल्स की क्षमता को बढ़ाता है, जो कैंसर कोशिकाओं को पहचानने और नष्ट करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
ज़ीएक्सैंथिन T-सेल रिसेप्टर (TCR) को स्थिर बनाता है, जिससे:
- T-सेल्स ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं
- साइटोकाइन उत्पादन बढ़ता है
- कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने की क्षमता मजबूत होती है
इम्यूनोथेरेपी को मिला बूस्ट
चूहों पर किए गए परीक्षण में पाया गया कि ज़ीएक्सैंथिन देने से ट्यूमर की वृद्धि धीमी हो गई। जब इसे इम्यून चेकपॉइंट इनहिबिटर्स (एक प्रकार की इम्यूनोथेरेपी) के साथ दिया गया, तो इसका असर और ज्यादा बढ़ गया। लैब में मानव T-सेल्स पर किए गए प्रयोगों में भी यह पाया गया कि ज़ीएक्सैंथिन ने मेलानोमा, मल्टीपल मायलोमा, ग्लियोब्लास्टोमा जैसे कैंसर सेल्स को नष्ट करने की क्षमता बढ़ा दी।
सुरक्षित और आसानी से मिलने वाला पोषक तत्व
ज़ीएक्सैंथिन पहले से ही आंखों के लिए सप्लीमेंट के रूप में उपयोग किया जाता है और यह प्राकृतिक रूप से इन खाद्य पदार्थों में पाया जाता है:
- संतरे वाली शिमला मिर्च
- पालक
- केल
- यह सस्ता, सुरक्षित और आसानी से उपलब्ध होने के कारण कैंसर उपचार के साथ उपयोग के लिए संभावित विकल्प माना जा रहा है।
आगे क्या?
हालांकि परिणाम उत्साहजनक हैं, लेकिन अभी यह शोध शुरुआती चरण में है। अभी तक के निष्कर्ष मुख्य रूप से लैब और जानवरों पर आधारित हैं। इंसानों पर इसके प्रभाव को समझने के लिए क्लीनिकल ट्रायल जरूरी होंगे। Jing Chen ने कहा कि यह खोज न्यूट्रिशनल इम्यूनोलॉजी के एक नए क्षेत्र को खोलती है, जहां हम समझ सकते हैं कि भोजन के तत्व इम्यून सिस्टम के साथ कैसे काम करते हैं।