नई दिल्ली,भारत: ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने अनअप्रूव्ड फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन (FDC) दवाओं के खिलाफ देशभर में अभियान शुरू किया है। दवा नियामक ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ड्रग कंट्रोलर्स से 90 FDC दवाओं की जांच करने को कहा है कि क्या इनकी स्वीकृति दी गई है या नहीं। इन दवाओं में मल्टीविटामिन, फोलिक एसिड, सिरप, पैरासिटामोल, क्लोट्रिमाजोल और बेटामेथासोन क्रीम, डाइक्लोफेनाक पोटेशियम और डाइसाइक्लोमाइन हाइड्रोक्लोराइड टैबलेट्स आदि शामिल हैं।
जानकारी के अनुसार, “साल 2025 के SUGAM लैब परीक्षण डेटा में बड़ी संख्या में दवा सैंपल (FDCs) अनअप्रूव्ड पाए गए हैं और इन्हें ‘न्यू ड्रग’ की श्रेणी में रखा गया है। किसी भी नई दवा का निर्माण बिक्री के लिए तब तक नहीं किया जा सकता, जब तक उसे लाइसेंसिंग अथॉरिटी से मंजूरी न मिल जाए, जैसा कि न्यू ड्रग्स एंड क्लिनिकल ट्रायल रूल्स, 2019 के नियम 3 में परिभाषित है। साथ ही, नियम 80 के अनुसार, जो भी व्यक्ति API या फार्मास्यूटिकल फॉर्मुलेशन के रूप में नई दवा का निर्माण बिक्री या वितरण के लिए करना चाहता है, उसे केंद्रीय लाइसेंसिंग प्राधिकरण से अनुमति के लिए फॉर्म CT-21 में आवेदन करना होगा और छठी अनुसूची के अनुसार शुल्क जमा करना होगा।”
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— ANI Digital (@ani_digital) March 23, 2026
अनअप्रूव्ड दवाओं की मौजूदगी गंभीर चिंता का विषय
मीडिया में आई खबर के अनुसार आदेश में कहा गया कि सप्लाई चेन में अनअप्रूव्ड दवाओं की मौजूदगी गंभीर चिंता का विषय है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए संभावित खतरा पैदा करती है। यह ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 और इसके तहत बनाए गए नियमों के उल्लंघन को भी दर्शाता है। इसलिए संबंधित निर्माताओं, मार्केटर्स और अन्य हितधारकों के खिलाफ उचित जांच और नियामकीय कार्रवाई शुरू करें। साथ ही यह सुनिश्चित करें कि ऐसी अनअप्रूव्ड दवाओं के निर्माण, बिक्री और वितरण को रोकने के लिए सख्त निगरानी और प्रवर्तन किया जाए।
नियामक ने इसे गंभीर मामला बताया
जनहित को ध्यान में रखते हुए नियामक ने इसे गंभीर मामला बताया है और कहा है, “यदि किसी निर्माता ने निर्माण लाइसेंस मिलने से पहले, NDCT नियम 2019 के नियम 83 के तहत आवश्यक ‘न्यू ड्रग’ अनुमति जमा की है, तो उसकी प्रति उपलब्ध कराएं। साथ ही आपसे अनुरोध है कि जल्द से जल्द इस पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट (ATR) इस कार्यालय को भेजें। सार्वजनिक स्वास्थ्य के हित में इस मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।”