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NCERT बनाम निजी प्रकाशक: शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल...

By: GTC Bharat Desk  |  Edited By: Preeti Kamal  |  Updated at: May 07th 2026 12:16 PM

NCERT बनाम निजी प्रकाशक: शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल...
NCERT बनाम निजी प्रकाशक: शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल...

नई दिल्ली, भारत: नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद NCERT अपनी पाठ्यपुस्तकों की मांग और आपूर्ति के बीच के अंतर को भरने के लिए तेजी से काम कर रहा है। अब तक निर्धारित पुस्तकों में से केवल आधी से कुछ अधिक किताबें ही छप पाई हैं। NCERT ने नए पाठ्यक्रम ढांचे के तहत कक्षा 3 से 9 तक की संशोधित पाठ्यपुस्तकें जारी की हैं।

2026-27 शैक्षणिक सत्र के लिए लगभग 15 करोड़ किताबें छापने की योजना बनाई गई थी, लेकिन अधिकारियों के मुताबिक अब तक केवल 7 से 8 करोड़ प्रतियां ही छपी हैं। शिक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मांग और आपूर्ति के अंतर पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “हमें उम्मीद है कि मई महीने में हम बड़ी संख्या में किताबें छाप पाएंगे। NCERT ने करीब 15 करोड़ किताबें छापने की योजना बनाई थी, जिनमें से लगभग 7-8 करोड़ किताबें छप चुकी हैं।”

नया शैक्षणिक सत्र 1 अप्रैल से शुरू हो चुका है

अधिकारियों ने यह भी भरोसा जताया कि जल्द ही NCERT आपूर्ति की कमी को पूरा कर लेगा। इस देरी के कारण कई छात्रों को नई किताबें नहीं मिल पाई हैं, जबकि नया शैक्षणिक सत्र 1 अप्रैल से शुरू हो चुका है। जब अधिकारियों से पूछा गया कि संशोधित किताबों के अभाव में छात्र कैसे पढ़ाई कर रहे हैं, तो उन्होंने कहा, “पिछले वर्षों की किताबें उपलब्ध हैं और छात्र उन्हीं से पढ़ाई कर रहे हैं।”

निजी प्रकाशकों की किताबों पर बढ़ती निर्भरता से चिंता

किताबों की उपलब्धता में देरी के अलावा निजी स्कूलों द्वारा महंगी निजी प्रकाशकों की किताबों पर बढ़ती निर्भरता को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। इससे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। आरोप हैं कि कई निजी स्कूल निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने के लिए दबाव बना रहे हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने भी आरोप लगाया कि एक 'शिक्षा माफिया' सस्ती सरकारी किताबों की पहल को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है।

NHRC के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने सुझाया रास्ता

प्रियंक कानूनगो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि उन्होंने राज्यों को निर्देश दिए हैं कि निजी स्कूलों में महंगी निजी किताबों की जगह सस्ती NCERT और SCERT किताबों का उपयोग सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि यह कदम मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 और शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 के तहत उठाया गया है। इन शिकायतों पर प्रतिक्रिया देते हुए शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि CBSE ने निजी स्कूलों से NCERT की किताबें इस्तेमाल करने का आग्रह किया है।




TAGS : Social Media  |  New Delhi  |  Education  |  NCERT

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