नई दिल्ली, भारत: दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को दिल्ली आबकारी नीति मामले में CBI की अपील पर सुनवाई करते हुए तीन एमिकस क्यूरी (amicus curiae) नियुक्त करने का फैसला किया। यह कदम तब उठाया गया जब मामले के तीन पक्षकार—अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक ने कार्यवाही में शामिल न होने का निर्णय लिया।
कोर्ट ने एक अन्य पक्ष को जवाब दाखिल करने का अधिकार भी बंद कर दिया और मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार के लिए सूचीबद्ध कर दी। यह घटनाक्रम उस बयान के बाद सामने आया है जिसमें आप प्रमुख केजरीवाल ने न्यायमूर्ति स्वर्णा कांता शर्मा के समक्ष सुनवाई में शामिल होने से इनकार कर दिया था।
केजरीवाल का फैसला महात्मा गांधी के सिद्धांतों से प्रेरित
इस सप्ताह की शुरुआत में जारी एक सार्वजनिक बयान में केजरीवाल ने कहा था कि उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद कम हो गई है, इसलिए वह न तो व्यक्तिगत रूप से और न ही अपने वकील के माध्यम से इस मामले में पेश होंगे। उन्होंने अपने फैसले को महात्मा गांधी के सिद्धांतों से प्रेरित बताते हुए इसे 'सत्याग्रह' जैसा कदम बताया। उनका यह बयान उस समय आया जब हाई कोर्ट ने न्यायमूर्ति शर्मा को मामले से अलग करने (recusal) की उनकी याचिका खारिज कर दी थी।
Delhi High Court to appoint 3 senior counsel to assist after Arvind Kejriwal boycott of judge in Excise Policy caseRead here: https://t.co/ym0VHKiK1h pic.twitter.com/lEJ7PkrtoY
— Bar and Bench (@barandbench) May 5, 2026
लगाए गए आरोप केवल अनुमान पर आधारित- कोर्ट
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि लगाए गए आरोप केवल अनुमान (conjecture) पर आधारित हैं और पक्षपात (bias) के उचित संदेह के कानूनी मानकों पर खरे नहीं उतरते। अदालत ने यह भी कहा कि न्यायिक प्रक्रिया केवल धारणाओं के आधार पर प्रभावित नहीं हो सकती। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल संभावित पक्षपात या प्रतिकूल फैसले की आशंका के आधार पर जज के अलग होने की मांग नहीं की जा सकती। ऐसा करना न्यायपालिका की स्वतंत्रता और संस्थागत विश्वसनीयता को कमजोर कर सकता है।
The Delhi High Court has decided to appoint an amicus curiae in the CBI's petition challenging the trial court's order discharging AAP leaders Arvind Kejriwal, Manish Sisodia, and others in the excise policy case. The court took this decision after Kejriwal, Sisodia, and Durgesh… pic.twitter.com/egYe8CrTh9
— IANS (@ians_india) May 5, 2026
सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकते हैं केजरीवाल
इसके बाद केजरीवाल ने न्यायमूर्ति शर्मा को एक पत्र लिखकर कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा सम्मान है, लेकिन निष्पक्षता को लेकर उनकी चिंताएं बनी हुई हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वह इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकते हैं, हालांकि उन्होंने माना कि कार्यवाही से दूर रहने का फैसला उनकी कानूनी स्थिति को प्रभावित कर सकता है।
मामला दिल्ली आबकारी नीति 2021-22 से जुड़ा है
यह मामला दिल्ली आबकारी नीति 2021-22 से जुड़ा है, जिसमें केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने केजरीवाल और अन्य आरोपियों को दी गई राहत (discharge) को चुनौती दी है। अब जब मुख्य पक्षकार कार्यवाही से बाहर हो गए हैं और अदालत एमिकस क्यूरी नियुक्त करने जा रही है, तो मामले की सुनवाई कानून के अनुसार आगे बढ़ेगी।