पुडुचेरी, भारत: तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर जारी सियासी हलचल के बीच AIADMK के 28 विधायकों को पुडुचेरी के पूरनकुप्पम स्थित एक निजी रिसॉर्ट में ठहराया गया है। राजनीतिक गलियारों में इस कदम को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, ये विधायक पार्टी के वरिष्ठ नेता सी. वी. शनमुगम के समर्थक बताए जा रहे हैं।
इस बीच विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) को सरकार बनाने के लिए अभी और समर्थन की जरूरत है। विजय ने कांग्रेस के पांच विधायकों का समर्थन हासिल कर लिया है, लेकिन बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए उन्हें अभी छह और विधायकों की जरूरत है।
रिसॉर्ट पॉलिटिक्स: पुडुचेरी बना नया केंद्र
सूत्रों के मुताबिक, राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने विजय से बहुमत साबित करने और समर्थन देने वाले विधायकों की सूची पेश करने को कहा है। यह बातचीत चेन्नई में हुई दूसरी बैठक के दौरान हुई। राज्यपाल ने “मैजिक नंबर” को लेकर स्पष्टता मांगी और TVK के दावे के समर्थन में विधायकों का ब्योरा देने को कहा।
#WATCH | 28 Tamil Nadu AIADMK MLAs are currently accommodated at a private resort in Puducherry's Poorankuppam, as per media reportsStay updated with all the stories that matter — download the Hindustan Times app pic.twitter.com/8W4biqzf0V
— Hindustan Times (@htTweets) May 7, 2026
विजय की TVK: बहुमत के करीब लेकिन अब भी दूर
सूत्रों के अनुसार, सरकार गठन के लिए समर्थन जुटाने की कोशिशें जारी हैं और AIADMK नेताओं के साथ बातचीत हो रही है। इस सिलसिले में पूर्व मंत्री और TVK उम्मीदवार के. ए. सेंगोत्तैयन भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
क्या सीवी शनमुगम बनेंगे डिप्टी सीएम?
सूत्रों का यह भी दावा है कि संभावित सत्ता साझेदारी को लेकर चर्चा चल रही है, जिसमें C.V. शन्मुगम को उपमुख्यमंत्री पद और महत्वपूर्ण मंत्रालय देने का प्रस्ताव शामिल हो सकता है। 28 विधायकों को रिसॉर्ट में शिफ्ट किए जाने के बाद राजनीतिक सरगर्मी और बढ़ गई है। हालांकि, Edappadi K Palaniswami ने TVK को समर्थन देने के प्रस्ताव से सहमति नहीं जताई है, जिससे पार्टी के अंदर मतभेद सामने आए हैं।
पार्टी के भीतर मतभेद और कानूनी विकल्प
सूत्रों के मुताबिक, O S Manian सहित कुछ नेता TVK को समर्थन देने के पक्ष में हैं, बशर्ते उन्हें सरकार में प्रमुख पद मिलें। इस बीच, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने TVK को सरकार गठन के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट का रुख करने की सलाह भी दी है। कुछ नेताओं ने दोबारा चुनाव कराने की संभावना भी जताई है।