तमिलनाडु की राजनीति हमेशा से ही सिनेमा और सत्ता के अनूठे संगम के लिए जानी जाती रही है। एमजीआर (MGR), करुणानिधि और जयललिता जैसे दिग्गजों ने जिस विरासत को संवारा, आज उसी राह पर दक्षिण भारतीय सिनेमा के 'थलापति' विजय ने कदम रखा है। अपनी पार्टी तमिलगा वेट्टी कड़गम (TVK) के साथ विजय ने साल 2026 के विधानसभा चुनावों में जो हलचल पैदा की है, उसने दशकों पुराने द्रविड़ राजनीति के समीकरणों को हिलाकर रख दिया है।
आज जब हम 7 मई 2026 को खड़े हैं, तमिलनाडु की सियासी गलियों में सिर्फ एक ही सवाल गूंज रहा है—क्या विजय तमिलनाडु के अगले मुख्यमंत्री बन पाएंगे? और अगर हां, तो सत्ता की जादुई संख्या 118 तक पहुँचने के लिए उनका 'गाठ-जोड़' किसके साथ होगा?
तमिलनाडु में फिल्मी सितारों का राजनीति में आना कोई नई बात नहीं है, लेकिन विजय की एंट्री ने इसे एक नया मोड़ दिया है। जहां रजनीकांत जैसे सितारों ने राजनीति के किनारे से वापसी कर ली, वहीं विजय ने अपने करियर के चरम पर फिल्मों को अलविदा कहकर पूर्णकालिक राजनीति का रास्ता चुना।
विजय की पार्टी TVK का पहला राज्य स्तरीय सम्मेलन विक्रवंडी (V. Salai) में हुआ, जहाँ जुटी लाखों की भीड़ ने यह साफ कर दिया था कि वे केवल एक 'अभिनेता' को देखने नहीं, बल्कि एक 'नेता' को सुनने आए हैं। उनके भाषण में पेरियार, अंबेडकर और कामराज जैसी हस्तियों का ज़िक्र था, जिसने उनकी 'सेकुलर सोशल जस्टिस' (धर्मनिरपेक्ष सामाजिक न्याय) की विचारधारा को स्पष्ट किया।
साल 2026 के विधानसभा चुनावों के ताज़ा रुझानों और नतीजों ने तमिलनाडु को एक 'हंग असेंबली' (त्रिशंकु विधानसभा) की स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया है। 234 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की ज़रूरत है।
ताज़ा आंकड़ों के अनुसार:
विजय की पार्टी 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरी है, लेकिन बहुमत के जादुई आंकड़े से वह अब भी 10 कदम दूर हैं। यह वह मोड़ है जहां गठबंधन का गणित सबसे महत्वपूर्ण हो जाता है।
विजय ने शुरुआत से ही अपनी विचारधारा को "द्रविड़ राष्ट्रवाद" और "भारतीय राष्ट्रवाद" के संगम के रूप में पेश किया है। उन्होंने DMK को अपना वैचारिक विरोधी और BJP को अपना राजनीतिक विरोधी बताया है। ऐसे में गठबंधन की संभावनाएं बेहद दिलचस्प हो गई हैं:
विजय की सबसे बड़ी ताकत उनके 85,000 से अधिक संगठित फैन क्लब (विजय मक्कल इयक्कम) रहे हैं, जो अब राजनीतिक कैडरों में बदल चुके हैं। उनके 40-सूत्रीय घोषणापत्र में महिला सुरक्षा, युवाओं के लिए रोज़गार और भ्रष्टाचार मुक्त शासन पर ज़ोर दिया गया है। GTC Bharat की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, पहली बार वोट देने वाले युवाओं में विजय का क्रेज अभूतपूर्व है।
हर नए राजनीतिक उदय के साथ चुनौतियां भी आती हैं। विजय पर विपक्षी दलों, विशेषकर DMK द्वारा 'BJP की B-Team' होने के आरोप लगाए गए। हालांकि, विजय ने अपने भाषणों में स्पष्ट किया कि वे किसी के मोहरे नहीं हैं।
दूसरी बड़ी चुनौती प्रशासनिक अनुभव की है। एक सुपरस्टार होना और एक जटिल राज्य का शासन चलाना दो अलग बातें हैं। जनता के मन में यह सवाल अब भी है कि क्या विजय ज़मीनी स्तर की समस्याओं को उसी कुशलता से सुलझा पाएंगे जैसे वे पर्दे पर विलेन्स को हराते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय ने तमिलनाडु के द्विध्रुवीय (DMK vs AIADMK) राजनीति के ढांचे को ध्वस्त कर दिया है। वरिष्ठ पत्रकार आर. मणि के अनुसार, "विजय ने वह कर दिखाया जो पिछले 50 सालों में कोई नहीं कर पाया—एक तीसरी बड़ी शक्ति का उदय। अब सवाल केवल मुख्यमंत्री बनने का नहीं, बल्कि गठबंधन सरकार को पांच साल तक चलाने का है।"
2026 का चुनाव तमिलनाडु के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है। विजय ने 108 सीटें जीतकर यह साबित कर दिया है कि जनता बदलाव चाहती है। हालांकि वे बहुमत से थोड़े दूर हैं, लेकिन गठबंधन की राजनीति में वे वर्तमान में 'किंगमेकर' और 'किंग' दोनों की भूमिका में नज़र आ रहे हैं।
अगर वे कांग्रेस और अन्य सहयोगियों को साथ लेकर चलने में सफल रहे, तो 2026 में चेन्नई के फोर्ट सेंट जॉर्ज (सचिवालय) में विजय का राजतिलक निश्चित है। तमिलनाडु की जनता अब "सिनेमाई करिश्मे" और "वास्तविक सुशासन" के बीच के इस सफर को बड़ी उम्मीदों से देख रही है।
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