चुनाव में गड़बड़ी के आरोपों के बीच अभिजीत दीपके ने विपक्ष को दी चुनाव बहिष्कार की सलाह
SIR विवाद के बीच सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके ने विपक्षी दलों से चुनावों में भागीदारी पर पुनर्विचार करने की अपील की। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी को लेकर स्पष्ट रुख अपनाने की बात कही। चुनाव आयोग ने आरोपों को स्वीकार नहीं किया है।
नई दिल्ली: चुनाव आयोग की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) को लेकर जारी विवाद के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने विपक्षी दलों से चुनावों में भागीदारी पर पुनर्विचार करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाता है, तो उसे इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।
दीपके ने सोशल मीडिया मंच X पर एक पोस्ट में चुनावों के बहिष्कार का सुझाव देते हुए कहा कि यदि चुनावों में हेरफेर होने का आरोप लगाया जा रहा है, तो उसी प्रक्रिया में लगातार हिस्सा लेना उसे वैधता देने जैसा हो सकता है। यह दिपके का राजनीतिक मत और अपील है, चुनाव आयोग द्वारा स्वीकार किया गया तथ्य नहीं।
विपक्ष से बोले- सिर्फ आरोप लगाने से बात नहीं बनेगी
अभिजीत दीपके ने विपक्षी दलों से कहा कि उन्हें चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपने रुख पर विचार करना चाहिए। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि अगर किसी राजनीतिक दल को लगता है कि चुनाव प्रभावित किए जा रहे हैं, तो वह उसी व्यवस्था के तहत लगातार चुनाव क्यों लड़ रहा है। दिपके ने अपने पोस्ट में यह भी कहा कि चुनावी अनियमितताओं का मुद्दा किसी एक राज्य या किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक, यदि किसी राज्य में ऐसी समस्या है तो उसे दूसरे राज्यों में भी समान रूप से उठाया जाना चाहिए।
48 घंटे में सीईसी के इस्तीफे की मांग
दीपके की यह अपील CJP की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के लिए 48 घंटे की समयसीमा दिए जाने के एक दिन बाद सामने आई है। 24 सितंबर को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान CJP ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और ऐसा नहीं होने पर देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी। संगठन ने आगामी चुनावों को फिलहाल रोकने और SIR को 2025 की मतदाता सूची की स्थिति पर वापस ले जाने की भी मांग रखी।
चुनाव आयोग को लेकर क्या है विवाद?
CJP की मांगों की पृष्ठभूमि में द इंडियन एक्सप्रेस की 23 सितंबर की रिपोर्ट है। रिपोर्ट के अनुसार, निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार चुनाव आयोग के फैसलों और आदेशों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट में इन आपत्तियों को मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने, फॉर्म-6 में बदलाव और चुनावी डेटा तक पहुंच जैसे मुद्दों से जोड़ा गया है।
हालांकि, चुनाव आयोग के अधिकारियों ने इन रिपोर्टों में बताए गए मतभेदों को संस्थागत असहमति के रूप में पेश किए जाने पर आपत्ति जताई है। आयोग के अनुसार, अलग-अलग राय और लिखित टिप्पणियां बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था की सामान्य विचार-विमर्श प्रक्रिया का हिस्सा हैं और SIR सहित अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
CJP की आगे की मांगें क्या हैं?
CJP ने सीईसी के इस्तीफे के अलावा आगामी चुनावों पर अस्थायी रोक लगाने, SIR को 2025 की मतदाता सूची की स्थिति में वापस ले जाने और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून में बदलाव की मांग की है। संगठन ने अपने अभियान को चुनावी पारदर्शिता और चुनाव आयोग में सुधार के मुद्दे से भी जोड़ा है। 24 सितंबर की रिपोर्टों के अनुसार, CJP ने सीईसी के इस्तीफे के लिए 48 घंटे की समयसीमा और उसके बाद देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी थी। इस पूरे विवाद में फिलहाल दो अलग-अलग पक्ष सामने हैं—एक ओर विपक्ष और CJP जैसे समूह चुनावी प्रक्रिया तथा SIR को लेकर गंभीर सवाल उठा रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि उसकी अंतिम निर्णय प्रक्रिया सर्वसम्मत रही है।