Ankit Sharma Murder Case: ताहिर हुसैन को उम्रकैद, कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने इसे गंभीर अपराध माना, लेकिन दुर्लभतम श्रेणी का मामला नहीं बताया।

By  Laxman July 31st 2026 06:19 PM

नई दिल्ली: उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के चर्चित मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन सहित दोषी ठहराए गए अन्य आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने ताहिर हुसैन पर पांच लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

यह मामला फरवरी 2020 में हुए उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़ा है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा था। अदालत के फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी चर्चा का विषय बन गया है।

कोर्ट ने क्या कहा?

सजा सुनाते हुए अदालत ने कहा कि यह अपराध अत्यंत गंभीर और समाज को झकझोर देने वाला है। कोर्ट के अनुसार, मृतक के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया और हत्या के बाद शव को नाले में फेंक दिया गया।

हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह मामला "दुर्लभतम में दुर्लभ" (Rarest of Rare) श्रेणी में नहीं आता, इसलिए दोषियों को मृत्युदंड देने के बजाय आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

अदालत ने हत्या के अलावा दंगा, अपहरण, घातक हथियारों से हमला और अन्य संबंधित धाराओं में भी दोषियों को सजा सुनाई है।

 

ताहिर हुसैन ने फैसले पर क्या कहा?

अदालत का फैसला आने के बाद ताहिर हुसैन ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर भरोसा है और उन्हें उम्मीद है कि उच्च न्यायालय में उन्हें न्याय मिलेगा।

उन्होंने संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि "देर है, अंधेर नहीं", जिससे संकेत मिलता है कि वह इस फैसले को उच्च अदालत में चुनौती देंगे।

अभियोजन पक्ष ने मांगी थी फांसी

सजा तय करने से पहले अभियोजन पक्ष ने अदालत से दोषियों के लिए मृत्युदंड की मांग की थी।

विशेष लोक अभियोजक ने अदालत में दलील दी कि अंकित शर्मा का अपहरण कर उनके साथ अत्यंत क्रूरता की गई। अभियोजन के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर कई गंभीर चोटों के निशान मिले थे और घटना की प्रकृति बेहद निर्मम थी।

अभियोजन पक्ष का कहना था कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए इसे दुर्लभतम मामलों में शामिल किया जाना चाहिए।

बचाव पक्ष ने रखा अपना पक्ष

दूसरी ओर बचाव पक्ष ने अदालत से नरमी बरतने की अपील की। ताहिर हुसैन के वकीलों ने दलील दी कि उनके मुवक्किल की भूमिका को लेकर कई सवाल हैं और मामले के सभी आरोपियों को दोषी नहीं ठहराया गया।

उन्होंने यह भी कहा कि कुल 11 आरोपियों में से 6 को अदालत पहले ही बरी कर चुकी है। इसके अलावा ताहिर हुसैन के जेल में अच्छे आचरण का भी हवाला दिया गया।

बचाव पक्ष का कहना था कि केवल चोटों की संख्या के आधार पर मृत्युदंड का फैसला उचित नहीं होगा।

91 गवाहों की गवाही के बाद आया फैसला

यह मामला लंबे समय तक अदालत में चला। सुनवाई के दौरान अदालत ने 91 गवाहों के बयान दर्ज किए और उपलब्ध साक्ष्यों की विस्तृत जांच की।

सभी सबूतों और गवाहों की गवाही पर विचार करने के बाद अदालत ने पांच आरोपियों को दोषी करार दिया, जबकि छह अन्य आरोपियों को पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण बरी कर दिया गया।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज

फैसले के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने इस फैसले को कानून की जीत बताया और आम आदमी पार्टी पर निशाना साधा।

वहीं, इस मामले को लेकर आम आदमी पार्टी की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।

हाईकोर्ट में चुनौती की तैयारी

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले का अगला चरण दिल्ली हाईकोर्ट में अपील का होगा। ताहिर हुसैन पहले ही संकेत दे चुके हैं कि वह निचली अदालत के फैसले को चुनौती देंगे।

अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि उच्च न्यायालय में इस मामले की सुनवाई कब शुरू होती है और आगे कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है।

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