रुड़की: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने IIT रुड़की के दीक्षांत समारोह में अपने शुरुआती करियर का एक बेहद मुश्किल अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि जब वह 20 के दशक में एक युवा IPS अधिकारी के तौर पर सिक्किम में तैनात थे, तब सीमा निगरानी के लिए भेजी गई उनकी टीम चीनी सेना यानी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की हिरासत में पहुंच गई थी।

डोभाल के मुताबिक, उस समय सिक्किम भारत में विलय की प्रक्रिया से गुजर रहा था और सीमा क्षेत्र की निगरानी उनकी जिम्मेदारियों में शामिल थी। उन्होंने एक टीम को करीब पांच दिन के मिशन पर भेजा था, लेकिन तय समय के बाद भी टीम वापस नहीं लौटी। कई दिन बीतने के बाद उन्हें इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) मुख्यालय से जानकारी मिली कि टीम चीनी सेना की हिरासत में है।

‘मुझे लगा था करियर खत्म हो गया’

डोभाल ने बताया कि यह खबर मिलते ही उन्हें लगा कि अब उनका करियर खत्म हो गया है। उन्होंने कहा कि वह उस समय 20 के दशक में थे और उन्हें लगा कि अब उन्हें कोई दूसरा करियर शुरू करना पड़ेगा। टीम को बाद में बिना किसी नुकसान के चीनी हिरासत से रिहा कर दिया गया।

घटना की जांच के दौरान सामने आया कि टीम को मुख्यालय से दिए गए नक्शों और स्केच में गलतियां थीं। इन गलतियों के कारण सीमा की स्थिति को लेकर भ्रम पैदा हुआ था। जांच में डोभाल को इस घटना के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया गया। हालांकि, डोभाल ने कहा कि जांच में दोषी न पाए जाने के बावजूद वह इस घटना से बेहद निराश और दुखी थे। उन्होंने उस दौर को जिंदगी का ऐसा समय बताया, जब व्यक्ति खुद को बेहद निराश महसूस करता है।

तिब्बती शेरपा ने दिया ‘मैप रीडिंग’ का मंत्र

डोभाल ने बताया कि इसी मुश्किल दौर में इंटेलिजेंस ब्यूरो में उनके साथ काम करने वाले एक बुजुर्ग तिब्बती शेरपा ने उन्हें जीवन को समझने का एक अलग नजरिया दिया। डोभाल के मुताबिक, उस शेरपा ने कई साल बर्फीले पहाड़ों में बिताए थे और आठ बार माउंट एवरेस्ट पर चढ़ चुके थे। शेरपा ने उन्हें समझाया कि जिंदगी भी एक तरह की ‘मैप रीडिंग’ है। इसके लिए तीन बातें स्पष्ट होनी चाहिए—आप अभी कहां हैं, आपको कहां जाना है और वहां पहुंचने के लिए रास्ता क्या है। डोभाल ने बताया कि यह सलाह बाद में उनके लिए जीवन को देखने का एक महत्वपूर्ण नजरिया बन गई।

IIT रुड़की के दीक्षांत समारोह में साझा किया अनुभव

डोभाल 19 सितंबर को IIT रुड़की के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। संस्थान के 25वें दीक्षांत समारोह के दो दिनों में कुल 2,701 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की जा रही हैं। समारोह में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन.एस. राजा सुब्रमानी भी बतौर विशिष्ट अतिथि शामिल हुए। डोभाल ने छात्रों के सामने अपने इस पुराने अनुभव को साझा करते हुए बताया कि करियर और जीवन में मुश्किल परिस्थितियां आ सकती हैं, लेकिन परिस्थितियों को सही तरीके से समझना और आगे की दिशा तय करना महत्वपूर्ण है। उनका ‘मैप रीडिंग’ वाला उदाहरण इसी अनुभव से जुड़ा था।