अमृतसर, पंजाब: श्री अकाल तख्त साहिब में रविवार को पांच सिंह साहिबान की बैठक में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के पूर्व सदस्य अमरजीत सिंह चावला और श्री अकाल तख्त साहिब के अतिरिक्त मुख्य ग्रंथी ज्ञानी मलकीत सिंह को खालसा पंथ से खारिज करने का फैसला सुनाया गया। यह कार्रवाई सिख मर्यादा और पंथक नियमों के कथित उल्लंघन से जुड़े मामले में की गई है।
रिपोर्टों के मुताबिक, श्री अकाल तख्त साहिब में हुई बैठक के बाद जथेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने दोनों के संबंध में फैसला सुनाया। निर्णय में अमरजीत सिंह चावला को पंथक नियमों और सिख मर्यादा के उल्लंघन से जुड़े आरोपों के आधार पर खारिज किए जाने की बात कही गई। फैसले के तहत सिख संगत से दोनों के साथ धार्मिक, सामाजिक या राजनीतिक स्तर पर किसी प्रकार की सांझ नहीं रखने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों पर भविष्य में किसी सिख संस्था, गुरुद्वारा प्रबंधन समिति या धार्मिक मंच पर सेवा करने की आजीवन रोक भी लगाई गई है।
तत्काल प्रभाव से सख़्ती से कार्रवाई की अपील
इस मामले में सिख कौम के धार्मिक शख्सियतों से यह विनम्र अपील की गई थी कि कथित सिख अमरजीत चावला को तत्काल प्रभाव से सिख धर्म से निष्कासित किया जाए। अमरजीत चावला ने कथित तौर पर पराई स्त्री की इज्जत लूटने जैसा बज्र गुनाह किया है, जबकि वह उस समय धार्मिक पद पर थे।इसलिए यह समय है कि SGPC और पावन श्री अकाल तख्त साहिब की मर्यादा को बचाया जाए। आशा है कि जल्द ही उन्हें हमेशा के लिए कौम से निष्कासित किया जाएगा। कृपया इस वीडियो में हुई बातचीत को सुना जाए और तत्काल प्रभाव से सख्ती से कार्रवाई की जाए।
✍️@J_SriAkalTakht @SGPCPresident ਸਿੱਖ ਕੌਮ ਦੀਆਂ ਦੋਹਾਂ ਧਾਰਮਿਕ ਸਖਸ਼ੀਅਤਾਂ ਨੂੰ ਬੇਨਤੀ ਹੈ ਕਿ ਅਖੌਤੀ ਸਿੱਖ ਅਮਰਜੀਤ ਚਾਵਲਾ ਨੂੰ ਤੁਰੰਤ ਪ੍ਰਭਾਵ ਤੋਂ ਸਿੱਖ ਧਰਮ ਵਿਚੋਂ ਛੇਕਿਆ ਜਾਵੇ ਜੀ।ਅਮਰਜੀਤ ਚਾਵਲਾ ਨੇ ਪਰ ਇਸਤਰੀ ਦੀ ਪੱਤ ਲੁਟਣ ਜਿਹਾ ਬੱਜਰ ਗੁਨਾਹ ਕੀਤਾ ਹੈ ਜਦੋਂ ਕਿ ਉਹ ਧਾਰਮਿਕ ਅਹੁਦੇ ਉਪਰ ਸਨ। ਇਸ ਵਾਸਤੇ ਐਸਜੀਪੀਸੀ… pic.twitter.com/rGQjuJ2tER
— GURDEEP SINGH MATHARU (@GurdeepSinghDau) September 20, 2026
क्या है पूरा विवाद?
यह मामला अमरजीत सिंह चावला के खिलाफ एक महिला की शिकायत पर दर्ज मामले के बाद सामने आया। आनंदपुर साहिब पुलिस ने 21 अगस्त को चावला के खिलाफ मामला दर्ज किया था। शिकायत में महिला ने यौन शोषण, धमकी और दबाव सहित गंभीर आरोप लगाए थे। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64, 127(2) और 351(2) का उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, शिकायतकर्ता पंजाब के संगरूर जिले की रहने वाली है और वर्तमान में बहरीन में रहती है। महिला ने आनंदपुर साहिब की एक सराय में खुद को रोके जाने और दुष्कर्म का आरोप लगाया था। इन आरोपों की जांच पुलिस कर रही है।
चावला ने आरोपों को बताया था झूठा
अमरजीत सिंह चावला ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को खारिज किया था। उन्होंने इसे झूठा और साजिश बताते हुए कहा था कि वह अदालत के सामने अपनी बेगुनाही साबित करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने SGPC सदस्यता और शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद समेत अपने राजनीतिक और धार्मिक पदों से इस्तीफा दे दिया था। 18 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, FIR दर्ज होने के लगभग एक महीने बाद भी चावला की गिरफ्तारी नहीं हुई थी और रोपड़ पुलिस ने कहा था कि जांच जारी है तथा सबूत जुटाए जा रहे हैं।

ज्ञानी मलकीत सिंह पर क्या कार्रवाई हुई थी?
इस मामले में श्री अकाल तख्त साहिब के अतिरिक्त मुख्य ग्रंथी ज्ञानी मलकीत सिंह और तख्त श्री केसगढ़ साहिब में तैनात चालक मोहन सिंह के नाम भी शिकायत में सामने आए थे। हिन्दुस्तान टाइम्स के अनुसार, शिकायतकर्ता ने दोनों पर अश्लील संदेश भेजने के आरोप लगाए थे, हालांकि उन्हें FIR में आरोपी के रूप में नामित नहीं किया गया था। इसके बाद SGPC ने 17 सितंबर को दोनों कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था और मामले की विस्तृत जांच SGPC के फ्लाइंग विभाग को सौंपी थी। SGPC के मुख्य सचिव कुलवंत सिंह मन्नन ने कहा था कि संस्था किसी ऐसे कर्मचारी को नहीं बख्शेगी जिसका नाम अनैतिक गतिविधियों से जुड़ा पाया जाए।
अब अकाल तख्त के फैसले का असर
20 सितंबर को सुनाए गए फैसले के बाद अमरजीत सिंह चावला और ज्ञानी मलकीत सिंह के संबंध में अकाल तख्त साहिब की ओर से धार्मिक और संस्थागत स्तर पर कड़ा निर्णय सामने आया है। हालांकि, चावला के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले में आरोपों की कानूनी जांच और न्यायिक प्रक्रिया अलग से जारी रहेगी। किसी व्यक्ति के खिलाफ FIR या धार्मिक कार्रवाई अपने आप में अदालत द्वारा दोष सिद्ध होने के समान नहीं है।
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