महिला आरक्षण बिल पर राजनीति तेज, कांग्रेस ने उठाए सवाल...

By  Preeti Kamal April 19th 2026 11:03 AM

नई दिल्ली: कांग्रेस के राज्यसभा सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन की आलोचना करते हुए इसे “चुनावी भाषण” बताया और विधायी प्रक्रिया के समय और मंशा पर सवाल उठाए।

मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस सांसद ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने के लिए लाए गए संशोधन को संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 और परिसीमन विधेयक, 2026 से जोड़ने के कारण समर्थन घट गया।

परिसीमन विधेयक के साथ जोड़ना गलत था 

अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा, “मैं स्पष्ट कहना चाहता हूँ कि जब 2023 में महिला आरक्षण विधेयक पारित हुआ था, तब 500 सांसदों ने भाग लिया था और 498 सांसदों ने इसका समर्थन किया था। इस बार नए परिसीमन विधेयक के साथ इसे जोड़ने पर समर्थन 498 से घटकर 298 रह गया, यानी 200 सांसद इसके खिलाफ हो गए। ऐसा क्यों हुआ? क्योंकि इसे परिसीमन से जोड़ा गया। कोई भी महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं था। उस समय भी सभी दलों ने कहा था कि इसे तुरंत लागू किया जाए।”

इस बिल को चुनाव के बाद भी ला सकते थे 

विधेयक के समय पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि इसे तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों के बाद भी लाया जा सकता था। उन्होंने कहा, “अगर इनके मन में राजनीति नहीं थी, तो राष्ट्रपति ने इस बिल पर रात 10 बजे हस्ताक्षर क्यों किए? आप इसे चुनावों के बाद भी ला सकते थे। प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम संबोधन एक चुनावी भाषण जैसा था। राहुल गांधी को ऐसा मंच नहीं मिलता। जब दो राज्यों में चुनाव होने वाले हैं, तब राष्ट्र के नाम संबोधन का क्या मतलब है?”

विधेयक की हार, महिलाओं के सपने को कुचला- पीएम मोदी

यह बयान तब आया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष पर महिला आरक्षण विधेयक को रोकने का आरोप लगाया और कहा कि उन्होंने महिलाओं के सपनों को “कुचल” दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस विधेयक की हार महिलाओं के आत्मसम्मान पर सीधा आघात है और महिलाएं इस अपमान को कभी नहीं भूलेंगी। उन्होंने कहा, “महिलाएं सब कुछ भूल सकती हैं, लेकिन अपने सम्मान का अपमान नहीं भूलतीं।”

विधेयक के पक्ष में 298 और विपक्ष में 230 मत

लोकसभा में शुक्रवार को विपक्षी दलों ने संविधान संशोधन विधेयक के खिलाफ मतदान किया। संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक को एक साथ पारित करने के लिए पेश किया गया था, जिसमें 298 वोट पक्ष में और 230 विपक्ष में पड़े।

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