CJP प्रदर्शन पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, लाठीचार्ज मामले में केंद्र और पुलिस से मांगा जवाब

संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई और सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है। अदालत ने घटना से जुड़े सभी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए हैं।

By  Laxman July 22nd 2026 04:11 PM

नई दिल्ली में CJP के संसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई अब न्यायिक जांच के दायरे में पहुंच गई है। दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रदर्शनकारियों पर कथित लाठीचार्ज और जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक को हटाए जाने के मामले में दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है। अदालत ने दोनों पक्षों से निर्धारित समय सीमा के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए जांच से जुड़े सभी महत्वपूर्ण डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि घटना से संबंधित CCTV फुटेज, पुलिसकर्मियों के बॉडी कैमरा रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध रिकॉर्ड किसी भी स्थिति में नष्ट या हटाए नहीं जाने चाहिए।

चार सप्ताह में मांगा जवाब

दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को चार सप्ताह के भीतर अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके बाद याचिकाकर्ता को भी पुलिस और सरकार के जवाब पर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा। अदालत ने अगली सुनवाई में दोनों पक्षों के जवाबों के आधार पर मामले की आगे की सुनवाई करने की बात कही।

क्या है पूरा मामला?

यह याचिका CJP के संसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर दाखिल की गई है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बल प्रयोग किया और जंतर-मंतर पर धरना दे रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को भी जबरन वहां से हटाया गया। इन आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया गया है।

डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने पर जोर

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के संरक्षण पर जोर दिया। अदालत का मानना है कि CCTV फुटेज, बॉडी कैमरा रिकॉर्डिंग और अन्य वीडियो सामग्री घटना की वास्तविक परिस्थितियों को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसलिए संबंधित एजेंसियों को इन्हें सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं।

अगली सुनवाई पर रहेंगी नजरें

इस मामले में अब सभी की निगाहें केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस के जवाब पर टिकी हैं। चार सप्ताह बाद जब दोनों पक्ष अपना पक्ष अदालत के सामने रखेंगे, तब यह स्पष्ट होगा कि मामले की जांच किस दिशा में आगे बढ़ेगी। फिलहाल हाईकोर्ट के नोटिस और साक्ष्य सुरक्षित रखने के आदेश ने इस पूरे घटनाक्रम को कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण बना दिया है।

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