नई दिल्ली: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पुतिन के बीच शुक्रवार को द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है। रूस की ओर से इस बैठक की पुष्टि राष्ट्रपति के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने की है। दोनों नेताओं की बातचीत में भारत-रूस आर्थिक और व्यापारिक संबंधों से जुड़े मुद्दों पर विशेष जोर रहने की उम्मीद है।

Trade और Economy पर रहेगा फोकस

दिमित्री पेस्कोव के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की बैठक में व्यापार और अर्थव्यवस्था प्रमुख एजेंडे में शामिल होंगे। दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने के साथ-साथ व्यापार से जुड़े अवसरों पर भी चर्चा हो सकती है।

भारत और रूस के बीच सहयोग के नए क्षेत्रों पर भी बातचीत चल रही है। इनमें Rare Earth यानी दुर्लभ खनिजों की खोज और उससे जुड़े सहयोग का मुद्दा अहम माना जा रहा है। आधुनिक तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक्स और कई रणनीतिक उद्योगों में दुर्लभ खनिजों की भूमिका महत्वपूर्ण है।

BRICS में रूस का फोकस क्या होगा?

पुतिन की भारत यात्रा का मुख्य उद्देश्य ब्रिक्स सम्मेलन में भाग लेना है। पेस्कोव ने कहा कि रूस संगठन के भीतर सुरक्षा, आर्थिक, वित्तीय और सांस्कृतिक सहयोग को मजबूत करने के पक्ष में है।

रूस ब्रिक्स के सहयोग के विभिन्न प्रारूपों में भागीदारी के लिए नए देशों को आमंत्रित किए जाने के विचार का भी समर्थन करता है। इससे संगठन के दायरे और सहयोग के संभावित क्षेत्रों को और विस्तार देने की दिशा में काम हो सकता है।

यूक्रेन युद्ध पर भी रूस ने रखा रुख

भारत की ओर से यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के प्रयासों में संभावित भूमिका को लेकर पूछे गए सवाल पर पेस्कोव ने कहा कि रूस भारत के योगदान की इच्छा का स्वागत करता है।

उन्होंने कहा कि रूस शांति के रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए तैयार है, लेकिन उनके अनुसार यह प्रक्रिया यूक्रेन यानी कीव के रुख पर भी निर्भर करती है। रूस ने शांतिपूर्ण तरीकों से संघर्ष के समाधान की अपनी तत्परता दोहराई।

इस बैठक पर इसलिए भी नजर रहेगी क्योंकि इसमें दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार, आर्थिक साझेदारी, दुर्लभ खनिजों और वैश्विक मुद्दों पर अपने रुख साझा कर सकते हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में बैठक के विस्तृत एजेंडे या किसी संभावित समझौते का पूरा विवरण सामने नहीं आया है।