मातोश्री पहुंचे डीके शिवकुमार, उद्धव ठाकरे से मुलाकात ने बढ़ाई सियासी हलचल

इस मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। कुछ राजनीतिक विश्लेषक इसे विपक्षी एकजुटता के प्रयास के रूप में देख रहे हैं, जबकि कुछ इसे शिवसेना (यूबीटी) की मौजूदा राजनीतिक चुनौतियों के बीच समर्थन जुटाने की कवायद मान रहे हैं।

By  Preeti Kamal June 21st 2026 12:30 PM -- Updated: June 21st 2026 10:09 AM

मुंबई, महाराष्ट्र: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। शिवसेना (यूबीटी) के भीतर जारी कथित बगावत और सांसदों के संभावित दल-बदल की अटकलों के बीच कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शनिवार को मुंबई स्थित मातोश्री पहुंचकर शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे से मुलाकात की।

यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब पार्टी के छह लोकसभा सांसदों द्वारा संसदीय दल की बैठक में अनुपस्थित रहने के बाद शिवसेना (यूबीटी) के भीतर असंतोष और टूट की चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं। बैठक के दौरान उद्धव ठाकरे की पत्नी रश्मि ठाकरे, युवासेना प्रमुख आदित्य ठाकरे और राज्यसभा सांसद संजय राउत भी मौजूद रहे।

उद्धव ठाकरे से मुलाकात कर विभिन्न मुद्दों पर हुई चर्चा

शिवसेना (यूबीटी) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि डीके शिवकुमार ने उद्धव ठाकरे से मुलाकात कर विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। वहीं, कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने भी अपनी पोस्ट में कहा कि दोनों नेताओं के बीच जनहित से जुड़े विषयों पर सार्थक बातचीत हुई।

'शिवसेना कांग्रेस में विलय नहीं करेगी'

इस मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। कुछ राजनीतिक विश्लेषक इसे विपक्षी एकजुटता के प्रयास के रूप में देख रहे हैं, जबकि कुछ इसे शिवसेना (यूबीटी) की मौजूदा राजनीतिक चुनौतियों के बीच समर्थन जुटाने की कवायद मान रहे हैं।

हालांकि, शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस के संभावित विलय की अटकलों को उद्धव ठाकरे पहले ही खारिज कर चुके हैं। शिवसेना के स्थापना दिवस कार्यक्रम में उन्होंने स्पष्ट कहा था कि शिवसेना कांग्रेस में विलय नहीं करेगी।

अनुपस्थित रहे सांसदों को 24 घंटे में लिखित जवाब का निर्देश

उधर, पार्टी के मुख्य सचेतक अनिल देसाई ने बैठक से अनुपस्थित रहे सांसदों को नया कारण बताओ नोटिस जारी किया है। सांसदों को 24 घंटे के भीतर लिखित जवाब देने का निर्देश दिया गया है। नोटिस में चेतावनी दी गई है कि यदि तय समय सीमा में जवाब नहीं दिया गया तो इसे पार्टी सदस्यता स्वेच्छा से छोड़ने के रूप में माना जाएगा और उनके खिलाफ संविधान की दसवीं अनुसूची यानी दल-बदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, लोकसभा में शिवसेना (यूबीटी) के कुल नौ सांसद हैं और छह सांसदों का संख्या बल दो-तिहाई के बराबर है। यदि वे किसी अन्य दल में विलय का रास्ता अपनाते हैं तो दल-बदल कानून के तहत उन्हें कुछ कानूनी संरक्षण मिल सकता है।

अमित शाह ने कोल्हापुर में दिया बयान

इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोल्हापुर में आयोजित एक जनसभा में कहा कि अब शिवसेना का कोई अलग गुट नहीं है, बल्कि केवल एक ही शिवसेना है, जिसका नेतृत्व एकनाथ शिंदे कर रहे हैं। शाह के इस बयान को भी महाराष्ट्र की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

गौरतलब है कि डीके शिवकुमार मुंबई में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले की पुत्री रेवती सुले के विवाह समारोह में शामिल होने पहुंचे थे। इसी दौरान उन्होंने मातोश्री जाकर उद्धव ठाकरे से मुलाकात की।

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