झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, JSSC CGL परीक्षा रद्द करने का सरकार का आदेश निरस्त; अभ्यर्थियों को मिली राहत

झारखंड हाईकोर्ट ने JSSC CGL परीक्षा रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले को निरस्त कर दिया है। भर्ती विज्ञापन रद्द करने का आदेश भी खारिज हुआ। फैसले से परीक्षा पास कर चुके हजारों अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है।

By  Preeti Kamal November 6th 2026 01:00 PM -- Updated: November 6th 2026 12:27 PM

रांची: झारखंड के हजारों युवाओं के लिए बड़ी राहत की खबर है। झारखंड हाईकोर्ट ने शुक्रवार, 6 नवंबर को झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की संयुक्त स्नातक स्तरीय (CGL) परीक्षा रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले को निरस्त कर दिया। अदालत ने भर्ती के लिए जारी विज्ञापन रद्द करने के सरकारी आदेश को भी खारिज कर दिया है।

इस फैसले से JSSC CGL परीक्षा पास कर चुके अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है। राज्य सरकार ने कथित अनियमितताओं और भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोपों के बाद इस परीक्षा सहित कई भर्ती प्रक्रियाओं को रद्द करने का फैसला लिया था।

22 भर्ती परीक्षाएं रद्द करने के फैसले से शुरू हुआ था विवाद

दरअसल, झारखंड सरकार ने 18 अगस्त 2026 को एक अधिसूचना जारी कर कुल 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया था। इनमें झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षाएं और JSSC CGL परीक्षा भी शामिल थीं।

सरकार का यह फैसला प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद आया था। अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए जांच और कार्रवाई की मांग की थी। सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए सफल अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि कुछ अभ्यर्थियों के खिलाफ अनियमितताओं के आरोपों के आधार पर पूरी परीक्षा और सभी चयनित उम्मीदवारों की नियुक्तियां रद्द करना उचित नहीं है।

1,932 अभ्यर्थियों की नियुक्तियों पर मंडरा रहा था संकट

JSSC CGL परीक्षा विज्ञापन संख्या 10/2023 के तहत आयोजित की गई थी। इस भर्ती के माध्यम से करीब 1,932 अभ्यर्थियों की नियुक्ति हुई थी। सरकार के परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया रद्द करने के फैसले से चयनित उम्मीदवारों के भविष्य पर अनिश्चितता पैदा हो गई थी।

अभ्यर्थियों की ओर से अदालत में दलील दी गई थी कि यदि कुछ उम्मीदवारों के खिलाफ अनियमितताओं के सबूत हैं तो उनके विरुद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए। लेकिन कथित गड़बड़ियों के आधार पर सभी सफल उम्मीदवारों को एक साथ दंडित करना उचित नहीं है।

सरकार ने परीक्षा में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का दिया था हवाला

राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में परीक्षा रद्द करने के फैसले का बचाव करते हुए बड़े पैमाने पर अनियमितताओं, वित्तीय लेन-देन और प्रश्नपत्र लीक होने से जुड़े आरोपों का हवाला दिया था।

सरकार की ओर से दलील दी गई थी कि परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी की भूमिका संदिग्ध थी और जांच में कई गंभीर तथ्य सामने आए हैं। सरकार का कहना था कि ऐसी स्थिति में वास्तविक रूप से योग्य और कथित तौर पर गड़बड़ी में शामिल अभ्यर्थियों को अलग करना मुश्किल था।

CID जांच और JPSC परीक्षा का मामला भी चर्चा में

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर सीआईडी (CID) की जांच भी चल रही है। इस बीच 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर भी विवाद सामने आया है।

इस मामले में सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, झारखंड सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। याचिका में कथित अनियमितताओं की सीबीआई या किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने और सुरक्षा उपायों के साथ दोबारा प्रारंभिक परीक्षा आयोजित कराने की मांग की गई है।

अब चयनित अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है- याचिकाकर्ता

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनन कुमार मिश्रा ने अदालत में कहा था कि परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्र लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। JSSC CGL पर हाईकोर्ट के ताजा फैसले के बाद अब चयनित अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है। हालांकि, कथित अनियमितताओं की जांच और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का मामला अलग से जारी रहेगा।

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