JPSC विवाद पर झारखंड में सियासी संग्राम, विधायक ने लगाए 'रेट फिक्स' के गंभीर आरोप
रांची में छात्रों का आंदोलन तेज होने के बीच विपक्ष ने भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाए। AJSU विधायक ने विधानसभा पहुंचकर कथित नौकरी 'रेट चार्ट' दिखाया, जबकि छात्र CBI जांच और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग पर अड़े हैं।
रांची: झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर जारी विवाद अब राजनीतिक रूप से और अधिक गर्माता जा रहा है। रांची में कई दिनों से आंदोलन कर रहे प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थी जहां भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं, वहीं विपक्ष ने भी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाना शुरू कर दिया है। विधानसभा परिसर में विपक्षी नेताओं ने छात्रों के समर्थन में प्रदर्शन किया और भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए।
इसी दौरान AJSU पार्टी के विधायक निर्मल महतो ने एक पोस्टर दिखाते हुए दावा किया कि विभिन्न सरकारी पदों के लिए कथित तौर पर "रेट" तय किए गए हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और सरकार की ओर से भी इस संबंध में कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
विधानसभा में उठा भर्ती प्रक्रिया का मुद्दा
विधानसभा पहुंचे विधायक निर्मल महतो ने कहा कि राज्य में सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं और इसकी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए। उनके हाथ में मौजूद पोस्टर में अलग-अलग सरकारी पदों के सामने कथित रकम लिखी हुई थी।
उन्होंने दावा किया कि विभिन्न पदों के लिए अलग-अलग दरें तय की गई हैं और मेरिट के अनुसार भी रकम में अंतर बताया जा रहा है। विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि यदि इन दावों की निष्पक्ष जांच हो तो कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। हालांकि उन्होंने जो आरोप लगाए हैं, उनकी पुष्टि किसी आधिकारिक जांच रिपोर्ट से नहीं हुई है।
छात्रों की मुख्य मांगें क्या हैं?
रांची में प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि उनकी लड़ाई किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष में नहीं, बल्कि निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया के लिए है। छात्र लगातार निम्न प्रमुख मांगें उठा रहे हैं—
- JPSC और JSSC भर्ती प्रक्रिया की CBI जांच।
- कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच।
- दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई।
- भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना।
- सरकार की ओर से स्पष्ट जवाब और समयबद्ध कार्रवाई।
छात्रों का कहना है कि जब तक इन मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
भूख हड़ताल और आंदोलन जारी
रांची में कई छात्र लगातार धरना और भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं। आंदोलनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाने की कोशिश की है, लेकिन अभी तक संतोषजनक समाधान नहीं मिला है।
छात्र नेताओं का कहना है कि वे बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन बातचीत केवल औपचारिकता नहीं होनी चाहिए। उनका आग्रह है कि वार्ता पारदर्शी तरीके से हो और मीडिया की मौजूदगी में की जाए, ताकि पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक रहे।
सरकार ने बनाई उच्चस्तरीय समिति
बढ़ते आंदोलन और विपक्ष के दबाव को देखते हुए राज्य सरकार ने वार्ता के लिए चार मंत्रियों की एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है। सरकार का कहना है कि मामले की जांच संबंधित एजेंसियां कर रही हैं और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि छात्रों का कहना है कि यदि सरकार निष्पक्ष जांच चाहती है तो केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) से जांच कराने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
विपक्ष को मिला नया मुद्दा
भर्ती विवाद अब राजनीतिक रंग भी ले चुका है। विपक्षी दल लगातार सरकार को घेर रहे हैं और परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहे हैं। विधानसभा में भी इस मुद्दे पर जोरदार हंगामा देखने को मिला।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार जल्द समाधान नहीं निकालती, तो यह मामला आने वाले समय में और बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।
10 अगस्त के कार्यक्रम पर नजर
आंदोलनकारी छात्र 10 अगस्त को विधानसभा घेराव की तैयारी कर रहे हैं। इससे पहले सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच संभावित वार्ता को लेकर चर्चा जारी है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बातचीत से कोई सकारात्मक समाधान निकलता है या आंदोलन और तेज होगा।
फिलहाल झारखंड में भर्ती प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों ने प्रशासन, राजनीति और युवाओं के भविष्य से जुड़ी बहस को नई दिशा दे दी है। आने वाले दिनों में सरकार की कार्रवाई और जांच की दिशा इस पूरे विवाद की तस्वीर साफ करेगी।