11वीं के बाद पढ़ाई छोड़ी, AI से सीखा साइबर फ्रॉड का खेल; फर्जी ऐप से उड़ाए लाखों रुपये...

उत्तर प्रदेश के कानपुर में 18 वर्षीय युवक को कथित तौर पर AI और टेलीग्राम की मदद से फर्जी बैंकिंग ऐप और मालवेयर APK बनाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक, उसके बनाए ऐप्स का इस्तेमाल साइबर ठग OTP और बैंकिंग जानकारी चुराने के लिए करते थे।

By  Preeti Kamal July 23rd 2026 01:40 PM -- Updated: July 23rd 2026 01:16 PM

कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर में 11वीं कक्षा की पढ़ाई छोड़ चुके 18 वर्षीय युवक को कथित तौर पर फर्जी बैंकिंग ऐप्स और मालवेयर वाले APK बनाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और टेलीग्राम की मदद से ऐसे डिजिटल टूल तैयार किए, जिनका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर साइबर ठगी में किया जा रहा था।

आरोपी की पहचान रोहित वीरेंद्र सिंह शाक्य के रूप में हुई है। गुजरात की सूरत साइबर क्राइम सेल ने उसे गिरफ्तार किया है। जांचकर्ताओं के मुताबिक, आरोपी ने महज 16 साल की उम्र से AI टूल्स और टेलीग्राम की मदद से खतरनाक APK फाइल्स बनाना शुरू कर दिया था।

PNB One जैसा फर्जी ऐप भेजकर उड़ाए गए 5 लाख रुपये

इस पूरे नेटवर्क का खुलासा सूरत में दर्ज एक साइबर फ्रॉड केस की जांच के दौरान हुआ। मई 2026 में एक व्यक्ति को व्हाट्सऐप पर पंजाब नेशनल बैंक के आधिकारिक PNB One ऐप जैसा दिखने वाला APK भेजा गया। पीड़ित ने इसे असली ऐप समझकर डाउनलोड कर लिया। ऐप इंस्टॉल होते ही उसका मोबाइल फोन कथित तौर पर हैक हो गया और कुछ ही मिनटों में उसके प्राइम को-ऑपरेटिव बैंक खाते से 5 लाख रुपये यूनियन बैंक के एक खाते में ट्रांसफर कर दिए गए। शिकायत के बाद सूरत साइबर क्राइम सेल ने जांच शुरू की और जांच के दौरान कथित तौर पर इस नेटवर्क के मुख्य आरोपी तक पहुंची।

मोबाइल में आते थे OTP और बैंकिंग डिटेल्स

पुलिस के मुताबिक, आरोपी दो तरह के ऐप तैयार करता था। पहला ऐप पीड़ित के मोबाइल फोन में इंस्टॉल किया जाता था, जबकि दूसरा एडमिन ऐप के रूप में काम करता था। जांच एजेंसी के अनुसार, एडमिन ऐप की मदद से साइबर अपराधी पीड़ित के मोबाइल फोन से OTP, बैंकिंग डिटेल्स और अन्य संवेदनशील जानकारी को कथित तौर पर रियल टाइम में देख सकते थे।

15 हजार रुपये में सेटअप, हर महीने 15 हजार की फीस

जांच में कथित तौर पर आरोपी का सब्सक्रिप्शन आधारित बिजनेस मॉडल भी सामने आया। पुलिस के अनुसार, वह सॉफ्टवेयर की शुरुआती तैनाती के लिए 15 हजार रुपये लेता था और इसके बाद सेवा जारी रखने के लिए हर महीने 15 हजार रुपये अतिरिक्त वसूलता था। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ग्राहकों की मांग के अनुसार बैंकों, सरकारी विभागों और बड़ी कंपनियों के नाम पर फर्जी ऐप और पेमेंट लिंक तैयार करता था। जांच में पीएनबी, एसबीआई, एक्सिस बैंक, यूको बैंक, बिगबास्केट, अमेरिकन एक्सप्रेस और आरटीओ चालान सेवाओं से मिलते-जुलते कथित फर्जी ऐप्स और लिंक का भी पता चला है।

झारखंड, हरियाणा और राजस्थान के साइबर गिरोहों से कनेक्शन

जांचकर्ताओं के अनुसार, झारखंड के जामताड़ा के अलावा हरियाणा और राजस्थान में सक्रिय कुछ साइबर अपराधी गिरोह कथित तौर पर आरोपी से वायरस वाले ऐप्स हासिल करते थे। साइबर क्राइम अधिकारियों और आईटी विशेषज्ञों की टीम ने कानपुर के एक होटल में छापेमारी कर आरोपी को गिरफ्तार किया। पुलिस ने उसके लैपटॉप, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरण भी जब्त किए हैं। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान और गिरफ्तारी की कोशिश कर रही है।

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