Explainer: धर्मेंद्र प्रधान या समझौता? सरकार-CJP की आज की निर्णायक बैठक में क्या दांव पर है?

NEET पेपर लीक विवाद के बीच केंद्र सरकार और CJP के बीच अहम बैठक होने जा रही है। क्या धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर बात बनेगी या आंदोलन और तेज होगा? इस विस्तृत रिपोर्ट में पढ़ें सरकार और CJP की बैठक, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग, सोनम वांगचुक, संसद में घमासान और पूरे आंदोलन की हर बड़ी अपडेट।

By  Gurpreet Kaur July 25th 2026 12:48 PM

नई दिल्ली: देश के सबसे बड़े छात्र आंदोलनों में से एक अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। शुक्रवार को केंद्र सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधियों के बीच नई दिल्ली स्थित विठ्ठलभाई पटेल हाउस (कॉन्स्टिट्यूशन क्लब परिसर) में करीब दो घंटे तक चली औपचारिक बैठक के बाद सरकार ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग समेत प्रमुख मुद्दों पर जवाब देने के लिए शनिवार तक का समय मांगा। अब शनिवार को होने वाली अगली बैठक पर सबकी निगाहें टिकी हैं, क्योंकि इसी बातचीत से तय होगा कि कई सप्ताह से जारी छात्र आंदोलन किसी समाधान की ओर बढ़ेगा या फिर टकराव और तेज होगा।


उधर, आंदोलन का सबसे चर्चित चेहरा बने सोनम वांगचुक अपना 27 दिन लंबा अनशन समाप्त कर चुके हैं, लेकिन उन्होंने साफ कर दिया है कि यह आंदोलन खत्म नहीं हुआ है। दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देर रात छात्रों को संबोधित करते हुए पेपर लीक के खिलाफ सख्त कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली में सुधार का भरोसा दिया। ऐसे में आज की बातचीत केवल एक बैठक नहीं, बल्कि सरकार और आंदोलन, दोनों की विश्वसनीयता की अग्निपरीक्षा बन चुकी है।




आंदोलन अब सिर्फ परीक्षा सुधार तक सीमित नहीं रहा


नीट-यूजी 2026 पेपर लीक विवाद से शुरू हुआ यह आंदोलन अब केवल परीक्षा प्रणाली की खामियों तक सीमित नहीं है। पिछले कई सप्ताह से दिल्ली के जंतर-मंतर पर हजारों छात्र, अभिभावक और विभिन्न छात्र संगठन लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। शुरुआत में आंदोलन की प्रमुख मांगें थीं - पेपर लीक के दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई, राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की नैतिक जिम्मेदारी तय करना।


लेकिन समय बीतने के साथ आंदोलन का दायरा लगातार बढ़ता गया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कार्रवाई, छात्रों की सुरक्षा, कथित दमन, प्रशासनिक जवाबदेही और लोकतांत्रिक अधिकारों जैसे मुद्दों को भी अपने अभियान का हिस्सा बना लिया। 20 जुलाई को आयोजित ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प ने पूरे आंदोलन को नया राजनीतिक आयाम दे दिया। इसके बाद यह विवाद केवल शिक्षा मंत्रालय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शासन, जवाबदेही और लोकतांत्रिक अधिकारों पर राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया।





शुक्रवार की बैठक में क्या हुआ?


लगातार गतिरोध के बाद शुक्रवार को केंद्र सरकार और CJP के प्रतिनिधियों के बीच पहली औपचारिक उच्चस्तरीय वार्ता हुई। बैठक नई दिल्ली के विठ्ठलभाई पटेल हाउस (कॉन्स्टिट्यूशन क्लब परिसर) में आयोजित की गई और करीब दो घंटे तक चली।


सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह मौजूद रहे, जबकि CJP की ओर से मुख्य प्रवक्ता सौरव दास, राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका और प्रवक्ता वैष्णवी गौड़ ने हिस्सा लिया।


बैठक के बाद जेपी नड्डा ने बातचीत को ‘सकारात्मक और सौहार्दपूर्ण’ बताया। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि सरकार ने किन मांगों पर सहमति जताई है। उन्होंने केवल इतना कहा कि छात्र प्रतिनिधियों की सभी बातें विस्तार से सुनी गई हैं और सरकार इन पर विचार कर शनिवार को अपना पक्ष रखेगी।




CJP ने किन मांगों पर अड़ी रही?


बैठक के दौरान CJP ने अपनी प्रमुख मांगों के साथ परीक्षा सुधार से जुड़े पांच बिंदुओं वाला विस्तृत ज्ञापन सरकार को सौंपा। संगठन ने स्पष्ट किया कि उसकी तीन प्रमुख मांगें किसी भी स्थिति में वापस नहीं ली जाएंगी-


  • केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा।

  • कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले नीट अभ्यर्थियों के परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा।

  • आंदोलन में शामिल छात्रों और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेना तथा भविष्य में किसी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई न करना।


इसके अलावा संगठन ने 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया। CJP ने मांग की कि केंद्र सरकार, रैपिड एक्शन फोर्स के वरिष्ठ अधिकारी और दिल्ली पुलिस सार्वजनिक रूप से उन छात्रों से माफी मांगें, जो कथित रूप से पुलिस कार्रवाई में घायल हुए।





सरकार ने क्या संकेत दिए?


बैठक के बाद CJP नेताओं ने दावा किया कि सरकार ने कुछ मानवीय और प्रशासनिक मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया है, लेकिन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे जैसे राजनीतिक मुद्दे पर अंतिम जवाब देने के लिए शनिवार तक का समय मांगा है।


हालांकि सरकार की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई। सरकार ने केवल इतना कहा कि सभी मांगों पर विचार किया जा रहा है और अगली बैठक में अपना विस्तृत पक्ष रखा जाएगा।


इसी बीच सरकारी सूत्रों के हवाले से ऐसी खबरें भी सामने आईं कि सरकार फिलहाल धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के पक्ष में नहीं है और उसका जोर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली में सुधार तथा परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने पर रहेगा। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।


यही वजह है कि शनिवार को होने वाली अगली बैठक को पूरे आंदोलन का सबसे अहम पड़ाव माना जा रहा है। अब सबकी निगाह इस बात पर टिकी है कि सरकार राजनीतिक जवाबदेही के सवाल पर क्या रुख अपनाती है और क्या बातचीत किसी ठोस समाधान तक पहुंच पाती है।




सोनम वांगचुक ने अनशन खत्म किया, लेकिन आंदोलन नहीं


आंदोलन का सबसे चर्चित चेहरा बने सोनम वांगचुक ने 27 दिन बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार के साथ बातचीत शुरू होने और कुछ मुद्दों पर सकारात्मक संकेत मिलने के बाद यह फैसला लिया गया है। हालांकि उन्होंने साफ किया कि उनका अनशन खत्म हुआ है, लेकिन आंदोलन नहीं।


वांगचुक ने कहा कि अब आगे की दिशा सरकार के अगले कदम पर निर्भर करेगी। यदि बातचीत के दौरान किए गए आश्वासनों पर अमल नहीं हुआ, तो आंदोलन फिर से तेज किया जा सकता है। उन्होंने छात्रों से भी शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज़ उठाते रहने की अपील की।




आंदोलन का नया फोकस


पेपर लीक के मुद्दे से शुरू हुआ यह आंदोलन अब केवल परीक्षा सुधार तक सीमित नहीं है। CJP का कहना है कि 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ हुई पुलिस कार्रवाई की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।


संगठन ने दावा किया है कि वह प्रदर्शन से जुड़े वीडियो और अन्य साक्ष्य एकत्र कर कानूनी कार्रवाई की तैयारी करेगा। दूसरी ओर दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए थे।



यही वजह है कि अब आंदोलन में शिक्षा व्यवस्था के साथ-साथ प्रशासनिक जवाबदेही का मुद्दा भी प्रमुख बन चुका है।






प्रधानमंत्री का संदेश और सरकार की रणनीति


बातचीत के दौर के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं के लिए जिम्मेदार लोगों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए आवश्यक सुधार कर रही है।


केंद्र सरकार पहले ही सार्वजनिक परीक्षाओं में गड़बड़ियों को रोकने के लिए कानून लागू कर चुकी है और अब उसका फोकस इस कानून को प्रभावी तरीके से लागू करने, जांच तेज करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने पर है।


हालांकि विपक्ष का कहना है कि केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है। उसका आरोप है कि जब तक राजनीतिक और प्रशासनिक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक छात्रों का भरोसा पूरी तरह बहाल नहीं हो सकेगा।




संसद से सड़क तक जारी सियासी टकराव


जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है, तो उसका असर संसद के भीतर भी साफ दिखाई दे रहा है। विपक्ष लगातार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सरकार पर हमलावर है, जबकि सरकार का कहना है कि वह परीक्षा सुधार, जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर प्रतिबद्ध है।


इसी मुद्दे पर संसद में कई बार हंगामा हुआ और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विपक्ष का आरोप है कि सरकार राजनीतिक जवाबदेही से बच रही है, जबकि सरकार का कहना है कि पूरे मामले की जांच चल रही है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई ही उसकी प्राथमिकता है।





आज की बैठक क्यों है सबसे अहम?


अब सबकी नजर सरकार और CJP के बीच होने वाली अगली बैठक पर है। इस बैठक में आंदोलन की प्रमुख मांगों पर सरकार का स्पष्ट रुख सामने आने की उम्मीद है।


सबसे बड़ा सवाल अब भी वही है—क्या सरकार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर कोई फैसला लेगी, या फिर परीक्षा प्रणाली में सुधार और प्रशासनिक कार्रवाई के भरोसे आंदोलन को शांत करने की कोशिश करेगी?


दूसरी ओर CJP पहले ही साफ कर चुका है कि यदि उसकी प्रमुख मांगों पर ठोस प्रगति नहीं हुई, तो आंदोलन को देशभर में और व्यापक रूप दिया जाएगा।




आगे क्या हो सकता है?


आज की बातचीत के बाद मोटे तौर पर तीन संभावनाएं बनती हैं-


  • पहली, सरकार कुछ मांगों पर सहमति जताकर बातचीत को आगे बढ़ाए और आंदोलन फिलहाल शांत हो जाए।

  • दूसरी, परीक्षा सुधार और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर सहमति बने, लेकिन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर गतिरोध बना रहे।

  • तीसरी, यदि बातचीत बेनतीजा रहती है, तो आंदोलन एक बार फिर तेज हो सकता है और इसका असर संसद से लेकर देश के कई राज्यों तक दिखाई दे सकता है।


यानी आने वाले कुछ घंटे यह तय करेंगे कि यह विवाद समाधान की दिशा में बढ़ता है या फिर राजनीतिक संघर्ष और लंबा खिंचता है।




निष्कर्ष


नीट-यूजी 2026 पेपर लीक विवाद अब केवल एक परीक्षा का मामला नहीं रह गया है। यह छात्रों के भरोसे, परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और सरकार की जवाबदेही से जुड़ा राष्ट्रीय मुद्दा बन चुका है।


सरकार बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश में है, जबकि आंदोलनकारी अपनी प्रमुख मांगों पर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में आज की बैठक केवल एक औपचारिक वार्ता नहीं, बल्कि पूरे आंदोलन का निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है।


अब सबसे बड़ा सवाल यही है- क्या सरकार ऐसा समाधान पेश कर पाएगी, जिससे छात्रों का भरोसा दोबारा कायम हो, या फिर यह आंदोलन आने वाले दिनों में और बड़ा राजनीतिक रूप ले लेगा? इसका जवाब आज की बातचीत और उसके बाद सरकार के अगले कदम से तय होगा।

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