NEET-UG पेपर लीक विवाद और जंतर-मंतर आंदोलन: 34वें दिन का पूरा लेखा-जोखा
CJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभिजीत दीपके और प्रवक्ता आशुतोष रांका ने स्पष्ट कर दिया है कि केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा द्वारा अपने आवास पर बातचीत के लिए भेजे गए न्योते को उन्होंने खारिज कर दिया है। संगठन का कहना है कि बंद कमरों या मंत्रियों के घरों में वार्ता नहीं होगी; अगर सरकार गंभीर है तो उसे खुद जंतर-मंतर आना होगा या किसी तटस्थ स्थान पर बातचीत करनी होगी।
नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट-यूजी परीक्षा धांधली, कथित पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधारों की मांग को लेकर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) तथा देश के लाखों युवाओं का आंदोलन आज 34वें दिन में प्रवेश कर चुका है। 28 जून से अनशन पर बैठे प्रसिद्ध पर्यावरणविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के उपवास का भी आज 26वां दिन है। यह पूरा मामला अब सिर्फ छात्रों के एक सामान्य प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह देश की राजनीति, न्याय व्यवस्था और प्रशासनिक चौकसी की सबसे बड़ी परीक्षा बन चुका है। बीते 24 घंटों में इस आंदोलन ने सड़कों पर हिंसा, संसद में भारी हंगामे और प्रधानमंत्री के बड़े ऐलाानों के साथ एक नया और बेहद गंभीर मोड़ ले लिया है।
बुधवार रात करीब साढ़े आठ बजे कनॉट प्लेस के टॉल्स्टॉय मार्ग के पास प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच सीधी और हिंसक झड़प हो गई। दिल्ली पुलिस का दावा है कि प्रदर्शनकारियों की आड़ में छिपे कुछ उपद्रवियों और असामाजिक तत्वों ने पुलिस बल पर अचानक पत्थरों और कांच की बोतलों से हमला कर दिया। इस पथराव में कनॉट प्लेस की सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) विवेक भगत समेत कुल पांच पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और लाठीचार्ज करना पड़ा।
दिल्ली पुलिस ने इस घटना के संबंध में औपचारिक एफआईआर (FIR) दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इसी बीच, सोशल मीडिया पर प्रदर्शन के दौरान एक युवती की मौत की खबर तेजी से वायरल हुई, जिसे दिल्ली पुलिस ने पूरी तरह फर्जी, भ्रामक और अफवाह करार देते हुए लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की।
कल रात हुई इस हिंसा के बाद गुरुवार सुबह राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बना दिया गया। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने सुरक्षा कारणों और कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए राजीव चौक, पटेल चौक, लोक कल्याण मार्ग, सुप्रीम कोर्ट, आईटीओ और झंडेवालान समेत कुल 17 प्रमुख मेट्रो स्टेशनों को अगले आदेश तक बंद कर दिया, हालांकि इंटरचेंज की सुविधा जारी रखी गई।
सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन बंद होने का असर अदालत के कामकाज पर भी पड़ा, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत से वकीलों और कर्मचारियों के लिए राहत की गुहार लगाई। इस पर सीजेआई ने कहा कि वे स्थिति का जायजा ले रहे हैं और जरूरत पड़ने पर प्रशासनिक स्तर पर हस्तक्षेप करेंगे।
सोनम वांगचुक का स्वास्थ्य, पत्नी का बयान और CJP का रुख
सफदरजंग अस्पताल से गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल शिफ्ट किए गए आंदोलन के प्रमुख चेहरे सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर डॉक्टरों ने नया मेडिकल बुलेटिन जारी किया है। लगातार 26 दिनों के उपवास के कारण उनके लिवर और किडनी के पैरामीटर्स में गिरावट दर्ज की गई है, हालांकि वर्तमान में उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है। अस्पताल के बिस्तर से ही CJP प्रवक्ता सौरव दास के जरिए सोनम वांगचुक ने सभी युवाओं और समर्थकों के नाम एक संदेश जारी किया है।
उन्होंने अपील की है कि यह लड़ाई देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य और शिक्षा तंत्र पर भरोसा बहाल करने की है, इसलिए इसे पूरी तरह अहिंसक और शांतिपूर्ण बनाए रखना जरूरी है। वांगचुक ने यह शर्त भी रखी है कि यदि सरकार प्रदर्शनकारी छात्रों पर कोई भी पुलिस केस या दंडात्मक कानूनी कार्रवाई न करने का लिखित आश्वासन देती है, तो वे अपना अनशन खत्म करने पर विचार कर सकते हैं।
इसी दौरान सोनम वांगचुक की पत्नी गितांजलि वांगचुक ने भी मीडिया के सामने आकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि उनके पति की यह भूख हड़ताल किसी व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि देश के युवाओं के न्याय के लिए है। उन्होंने सरकार से अपनी हठधर्मिता छोड़कर छात्रों और आंदोलनकारियों से तुरंत सीधे संवाद की पहल करने का आग्रह किया।
दूसरी तरफ, CJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभिजीत दीपके और प्रवक्ता आशुतोष रांका ने स्पष्ट कर दिया है कि केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा द्वारा अपने आवास पर बातचीत के लिए भेजे गए न्योते को उन्होंने खारिज कर दिया है। संगठन का कहना है कि बंद कमरों या मंत्रियों के घरों में वार्ता नहीं होगी; अगर सरकार गंभीर है तो उसे खुद जंतर-मंतर आना होगा या किसी तटस्थ स्थान पर बातचीत करनी होगी। इसके साथ ही CJP ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की अपनी मुख्य मांग को एक बार फिर दोहराया है।
प्रधानमंत्री का फास्ट-ट्रैक कोर्ट का ऐलान और विपक्ष का पलटवार
सड़कों पर बढ़ते जन-आक्रोश और जंतर-मंतर के दबाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पूरे विवाद पर पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ी। उन्होंने सोशल मीडिया पर घोषणा करते हुए कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। सरकार ने फैसला किया है कि पेपर लीक और परीक्षा धांधली से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए देश में विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे ताकि दोषियों को कम से कम समय में सख्त सजा दी जा सके और परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह मजबूत बनाया जा सके।
हालांकि, प्रधानमंत्री के इस बड़े ऐलान का आंदोलनकारियों और विपक्षी दलों पर कोई खास असर देखने को नहीं मिला। जंतर-मंतर पर डटे छात्रों ने इसे आधी-अधूरी कवायद बताया और कहा कि सिर्फ तेजी से मुकदमे चलाने से परीक्षा व्यवस्था में फैला भ्रष्टाचार खत्म नहीं होगा।
विपक्ष के नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और अखिलेश यादव समेत INDIA गठबंधन के नेताओं ने संसद परिसर में 'ब्लैक डे' मनाते हुए सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार ने पूरी शिक्षा प्रणाली को ध्वस्त कर दिया है और जब तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं होता और हिंसा की निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक यह लड़ाई रुकने वाली नहीं है।
संसद का मानसून सत्र ठप और देशव्यापी जन-समर्थन
सड़क पर जारी इस घमासान का सीधा असर संसद के मानसून सत्र पर भी पड़ा। सत्र के चौथे दिन भी लोकसभा और राज्यसभा में एक मिनट के लिए भी सामान्य कामकाज नहीं हो सका। विपक्षी सांसदों ने दोनों सदनों के वेल में जाकर जमकर नारेबाजी की, जिसके चलते लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही को बार-बार स्थगित करना पड़ा। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि सरकार नीट-यूजी और परीक्षा सुधारों के हर पहलू पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष सिर्फ हंगामा करके संसद को ठप करना चाहता है। आरोप-प्रत्यारोप के इस दौर के चलते सरकार का विधायी एजेंडा पूरी तरह अटक गया है।
दूसरी ओर, जंतर-मंतर से शुरू हुई इस आंदोलन की चिंगारी अब देश के अन्य हिस्सों में भी फैलने लगी है। मुंबई, चंडीगढ़, हैदराबाद, चेन्नई और पुणे जैसे बड़े शहरों में छात्रों और नागरिक संगठनों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया है। समाज के प्रतिष्ठित चेहरों का भी इसे व्यापक समर्थन मिल रहा है। प्रसिद्ध समाजसेवी अन्ना हजारे ने महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में छात्रों के समर्थन में मौन व्रत रखा।
फिल्म जगत से सलमान खान, आलिया भट्ट, अनुपम खेर, नसीरुद्दीन शाह और प्रकाश राज ने छात्रों की चिंताओं को वाजिब ठहराते हुए सरकार से संवेदनशीलता दिखाने की अपील की है। वहीं खेल जगत से ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा और पूर्व क्रिकेटर शिखर धवन ने भी युवाओं के भविष्य और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की वकालत की है। 34वें दिन में प्रवेश कर चुका यह संग्राम अब केवल जंतर-मंतर का धरना नहीं, बल्कि देश के सबसे बड़े राष्ट्रीय मुद्दों में से एक बन गया है।
लोकतंत्र में विरोध जताने का हक और कानून-व्यवस्था बनाए रखना, दोनों ही महत्वपूर्ण हैं। लेकिन जब देश के लाखों युवाओं का भविष्य दांव पर लगा हो, तो समाधान बैरिकेड्स और पुलिस की कार्रवाई से नहीं, बल्कि मेज पर बैठकर किए गए सच्चे और पारदर्शी संवाद से ही निकल सकता है। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच बातचीत का कोई नया रास्ता निकलता है, या जंतर-मंतर की यह जंग आने वाले दिनों में और विकराल रूप धारण करेगी।