गणेश चतुर्थी: राजकोट में 210 से ज्यादा लोगों ने बनाई मिट्टी की इको-फ्रेंडली गणपति प्रतिमाएं

राजकोट में गणेशोत्सव के दौरान इको-फ्रेंडली गणपति प्रतिमाओं को बढ़ावा देने के लिए कार्यशाला आयोजित हुई। 215 लोगों ने मिट्टी से प्रतिमाएं बनाईं। आयोजकों ने पीओपी, प्लास्टिक और रासायनिक रंगों से बचने तथा पर्यावरण संरक्षण के साथ उत्सव मनाने का संदेश दिया।

By  Preeti Kamal September 13th 2026 06:00 PM -- Updated: September 13th 2026 04:26 PM

राजकोट, गुजरात: गणेश चतुर्थी और गणेशोत्सव के बीच गुजरात के राजकोट में पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए इको-फ्रेंडली गणपति प्रतिमा बनाने की कार्यशाला आयोजित की गई। इस मुफ्त कार्यशाला में बच्चों, युवाओं, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों समेत करीब 215 लोगों ने हिस्सा लिया।

मिशन स्मार्ट सिटी ट्रस्ट (Mission Smart City Trust) की ओर से चित्रनगरी में आयोजित यह कार्यशाला लगातार छठे वर्ष हुई। आयोजकों के मुताबिक, इस पहल की शुरुआत वर्ष 2021 में की गई थी। इसका उद्देश्य गणेशोत्सव के दौरान प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) की प्रतिमाओं के बजाय प्राकृतिक मिट्टी से बनी गणपति प्रतिमाओं को बढ़ावा देना है। कार्यशाला में प्रतिभागियों को प्राकृतिक मिट्टी से गणपति की प्रतिमा बनाने और पर्यावरण के अनुकूल सामग्री से उसे सजाने का प्रशिक्षण दिया गया।


बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने लिया हिस्सा

इस वर्ष कार्यशाला में करीब 215 लोगों ने हिस्सा लिया। प्रतिभागियों में 10 से 12 वर्ष की उम्र के बच्चों से लेकर 70 वर्ष से अधिक उम्र के लोग भी शामिल रहे। अलग-अलग प्रतिभागियों ने अपनी पसंद और क्षमता के अनुसार गणपति की प्रतिमाएं तैयार कीं।

कुछ प्रतिमाएं करीब आधा फुट ऊंची थीं, जबकि कुछ प्रतिभागियों ने एक से डेढ़ फुट तक की प्रतिमाएं बनाईं। लोगों ने अपने घरों से सजावटी सामान और कलश भी लाकर प्रतिमाओं को सजाया।


पिछले 10 वर्षों से राजकोट में वॉल पेंटिंग प्रोजेक्ट किए जा रहे हैं

आयोजक मौलिक गोटेचा ने कहा कि पिछले करीब 10 वर्षों से राजकोट में वॉल पेंटिंग प्रोजेक्ट किए जा रहे हैं। गणेश उत्सव की व्यापकता को देखते हुए वर्ष 2021 से लोगों को POP की जगह पर्यावरण अनुकूल मिट्टी की प्रतिमाएं अपनाने के लिए प्रेरित करने की पहल शुरू की गई। उन्होंने कहा कि यह अभियान लगातार जारी है और हर वर्ष कार्यशाला मुफ्त आयोजित की जाती है।


पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

कार्यशाला में केवल प्रतिमा निर्माण पर ही जोर नहीं दिया गया, बल्कि गणेशोत्सव के दौरान पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर भी लोगों को जागरूक किया गया। आयोजकों ने नागरिकों से मिट्टी की प्रतिमाओं, प्राकृतिक रंगों और अन्य पर्यावरण-अनुकूल सामग्रियों का इस्तेमाल करने की अपील की।

साथ ही प्लास्टिक और प्रदूषण बढ़ाने वाली अन्य सामग्रियों से बचने का संदेश दिया गया। अभियान के दौरान “My Ganpati, My Responsibility” और “Save the Environment, Bring Home a Clay Ganpati” जैसे संदेश भी दिए गए।


बच्चों को छोटी उम्र से पर्यावरण के प्रति जागरूक करने पर जोर

कार्यशाला में शामिल प्रतिभागी जुही हर्षिता भट्ट ने बताया कि वह अपने दो बच्चों को भी कार्यक्रम में लेकर आईं ताकि वे छोटी उम्र से ही गणपति प्रतिमा बनाने और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी को समझ सकें। उन्होंने इस पहल को अच्छा प्रयास बताते हुए कहा कि बच्चों को कम उम्र से ऐसी गतिविधियों से जोड़ना उनके सीखने के लिए उपयोगी है।


सर्वश्रेष्ठ प्रतिमाओं को दिए गए पुरस्कार

कार्यशाला में प्रतिभागियों ने अलग-अलग आकार और डिजाइन की गणपति प्रतिमाएं तैयार कीं। महिलाओं ने भी पर्यावरण-अनुकूल गणेशोत्सव के संदेश को आगे बढ़ाने में सक्रिय भागीदारी की। आयोजकों की ओर से सर्वश्रेष्ठ प्रतिमाएं बनाने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार भी दिए गए।

आयोजकों ने बताया कि मिट्टी से बनी गणपति प्रतिमाओं को उचित तरीके से विसर्जित करने पर वे प्राकृतिक रूप से घुल सकती हैं। इससे जल स्रोतों पर पड़ने वाले प्रदूषण के प्रभाव को कम करने में मदद मिल सकती है। कार्यक्रम के समापन पर लोगों से आस्था और परंपरा के साथ पर्यावरण की जिम्मेदारी निभाते हुए गणेशोत्सव मनाने की अपील की गई।


10 दिनों तक चलता है गणेशोत्सव

गणेश चतुर्थी भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाने वाला 10 दिवसीय हिंदू पर्व है। इस दौरान घरों और सार्वजनिक स्थानों पर भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। पूजा-पाठ और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बाद उत्सव का समापन प्रतिमा विसर्जन के साथ होता है।

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