सुप्रीम कोर्ट ने अमित जोगी की सजा पर लगाई रोक, फिलहाल उम्रकैद नहीं..
नई दिल्ली, भारत: सुप्रीम कोर्ट ने अमित जोगी को अंतरिम राहत देते हुए एनसीपी नेता राम अवतार जग्गी हत्याकांड में उनकी दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा पर रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, संदीप मेहता और विजय बिश्नोई की पीठ ने यह अंतरिम आदेश पारित किया, जिससे मामले की सुनवाई पूरी होने तक सजा पर रोक रहेगी।
अमित जोगी ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जिसमें उनकी बरी होने की सजा को पलटते हुए उन्हें दोषी ठहराकर उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने जोगी की याचिका पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिस जारी किया था। हाईकोर्ट का यह फैसला सीबीआई द्वारा ट्रायल कोर्ट के बरी करने के फैसले के खिलाफ दायर अपील पर आया था।
आत्मसमर्पण से छूट देने की भी मांग की थी
अपनी याचिका में जोगी ने दोषसिद्धि के बाद निर्धारित समय के भीतर आत्मसमर्पण से छूट देने की भी मांग की थी। यह मामला 2003 में एनसीपी नेता राम अवतार जग्गी की हत्या से जुड़ा है। वर्ष 2007 में ट्रायल कोर्ट ने 28 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, लेकिन सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस फैसले को पलटते हुए उन्हें दोषी करार दिया और तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था।
उम्रकैद की सजा को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया
पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा बरी किए जाने के फैसले को पलटने के खिलाफ जोगी की याचिका पर सीबीआई और राज्य सरकार से जवाब मांगा था। अब अमित जोगी ने अपनी दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है, साथ ही तय समय में आत्मसमर्पण से छूट की मांग भी की है।
वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अमित जोगी की ओर से की पैरवी
इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, मुकुल रोहतगी, विवेक तन्खा, सिद्धार्थ दवे और शशांक गर्ग ने अमित जोगी की ओर से पैरवी की, जबकि पीड़ित पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा पेश हुए।