UGC New Rules: विवादित नियमों पर मोदी सरकार करेगी पुनर्विचार, सुप्रीम कोर्ट में कमेटी बनाने का प्रस्ताव

UGC New Regulations पर विवाद के बीच मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में नियमों की समीक्षा के लिए कमेटी बनाने की तैयारी जताई है। मामला नियम 3(C) को लेकर दाखिल याचिका से जुड़ा है। जानें सरकार का पक्ष, याचिकाकर्ताओं के आरोप और सुप्रीम कोर्ट में अब तक क्या हुआ।

By  Laxman November 5th 2026 03:06 PM

विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की ओर से लागू किए गए नए नियमों पर विवाद लगातार जारी है। अब केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इन नियमों पर दोबारा विचार करने की बात कही है। सरकार ने अदालत को बताया कि नियमों से जुड़ी चिंताओं का समाधान निकालने के लिए एक कमेटी बनाने की तैयारी है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नए प्रावधान लागू होने पर किसी भी छात्र या समुदाय को भेदभाव अथवा असुरक्षा का अनुभव न हो।

इस मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ को सरकार के रुख की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर रही है और ऐसा रास्ता निकालना चाहती है, जिससे सभी वर्गों के छात्रों के हित सुरक्षित रह सकें।

सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों में हर छात्र के अधिकारों और हितों की रक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है। फिलहाल अदालत ने केंद्र सरकार को इस विषय पर विचार करने के लिए अतिरिक्त समय दिया है।

जनवरी 2026 से विवादों में हैं UGC के नए नियम

UGC ने उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने और जातिगत भेदभाव रोकने के उद्देश्य से नए नियम अधिसूचित किए थे। ये नियम 13 जनवरी 2026 को जारी किए गए थे। हालांकि, अधिसूचना सामने आने के बाद इनके कुछ प्रावधानों को लेकर विवाद शुरू हो गया।

देश के अलग-अलग हिस्सों में छात्रों ने इन नियमों के विरोध में प्रदर्शन किए। विरोध करने वालों का आरोप था कि नियमों में कुछ ऐसे प्रावधान हैं, जिनसे उच्च शिक्षा संस्थानों में सभी वर्गों के छात्रों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित होने के बजाय पक्षपात की आशंका पैदा हो सकती है।

विवाद बढ़ने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। अदालत ने जनवरी 2026 में विवादित नियमों पर अंतरिम रोक लगा दी थी। इसके साथ ही केंद्र सरकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था।

नियम 3(C) को लेकर याचिका में क्या आरोप?

इस मामले में दाखिल याचिका में UGC के नए नियमों के प्रावधान 3(C) को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि यह प्रावधान मनमाना और भेदभावपूर्ण है। उनका कहना है कि इसके इस्तेमाल से कुछ वर्गों के छात्रों को उच्च शिक्षा के अवसरों से वंचित किए जाने की आशंका है।

याचिका में यह भी दावा किया गया है कि संबंधित प्रावधान संविधान के तहत मिले मौलिक अधिकारों के अनुरूप नहीं है। इसमें समानता के अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े संवैधानिक संरक्षण का हवाला दिया गया है।

इसके अलावा याचिकाकर्ताओं ने UGC के इस प्रावधान को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 के भी विपरीत बताया है। उनका तर्क है कि उच्च शिक्षा में समान अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाए गए कानून के साथ इस तरह का प्रावधान मेल नहीं खाता।

हालांकि, ये याचिकाकर्ताओं की ओर से लगाए गए आरोप हैं। इन पर अंतिम कानूनी फैसला सुप्रीम कोर्ट को करना है।

सरकार कमेटी बनाकर दूर करेगी छात्रों की आशंकाएं?

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने संकेत दिया कि नियमों की समीक्षा के लिए कमेटी बनाई जा सकती है। सरकार का उद्देश्य ऐसे प्रावधान तैयार करना है, जिनसे जातिगत भेदभाव रोकने का लक्ष्य भी पूरा हो और किसी अन्य वर्ग के छात्रों को अनुचित व्यवहार की आशंका भी न रहे।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार इस विषय पर विचार कर रही है। पिछली सुनवाई में भी UGC की ओर से कहा गया था कि नए नियमों पर पुनर्विचार किया जा रहा है।

कमेटी के गठन से जुड़े विस्तृत विवरण, उसके सदस्यों और समीक्षा की समयसीमा की जानकारी उपलब्ध कराई गई सामग्री में नहीं दी गई है। इसलिए अभी यह देखना बाकी है कि सरकार इस प्रक्रिया को किस तरह आगे बढ़ाती है।

अब सुप्रीम कोर्ट के अगले कदम पर नजर

UGC के नए नियमों को लेकर विवाद अब केवल विश्वविद्यालयों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह संवैधानिक अधिकारों और उच्च शिक्षा में समानता से जुड़ा अहम कानूनी मुद्दा बन गया है।

एक तरफ नियमों का उद्देश्य शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोकना है, वहीं दूसरी तरफ याचिकाकर्ताओं ने इनके कुछ प्रावधानों की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। ऐसे में सरकार के सामने दोनों पक्षों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए समाधान तैयार करने की चुनौती है।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को अतिरिक्त समय दिया है। अब सबकी नजर सरकार की ओर से प्रस्तावित कमेटी और नियमों की समीक्षा पर रहेगी। साथ ही अदालत की आगामी सुनवाई में यह भी स्पष्ट हो सकता है कि विवादित नियमों को किस रूप में लागू किया जाएगा। फिलहाल अंतरिम रोक और पुनर्विचार की प्रक्रिया के बीच अंतिम निर्णय का इंतजार किया जा रहा है।

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