राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने चुनाव आयोग की ओर से कराए जा रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR का समर्थन किया है। संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा है कि मतदाता सूची में मौजूद गलतियों को दूर करना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए जरूरी है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब इस प्रक्रिया का उद्देश्य वोटर लिस्ट को दुरुस्त करना है, तो राजनीतिक दल इसका विरोध क्यों कर रहे हैं? होसबाले ने यह भी कहा कि किसी मुद्दे का विरोध करने से पहले राजनीतिक दलों को उसकी वास्तविकता और उद्देश्य को समझना चाहिए।
होसबाले बुधवार को इंदौर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की वार्षिक बैठक समाप्त होने के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने SIR के अलावा Gen-Z आंदोलन, आरक्षण और संघ के पंजीकरण जैसे मुद्दों पर भी अपनी राय रखी।
SIR का उद्देश्य मतदाता सूची की गलतियां दूर करना
दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण कोई नई प्रक्रिया नहीं है। देश में समय-समय पर मतदाता सूचियों की जांच और उनमें सुधार का काम होता रहा है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूची में सही और पात्र लोगों के नाम दर्ज हों।
उन्होंने बताया कि कई मामलों में ऐसे लोगों के नाम मतदाता सूची में बने रहते हैं, जिनकी मृत्यु हो चुकी होती है। इसके अलावा एक ही व्यक्ति का नाम अलग-अलग स्थानों की मतदाता सूचियों में दर्ज होने की समस्या भी सामने आती है। उनके मुताबिक, ऐसी गड़बड़ियों को ठीक करना चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता के लिए जरूरी है।
होसबाले ने यह भी कहा कि भारतीय नागरिक नहीं होने वाले लोगों के नाम मतदाता सूची में दर्ज होना सही नहीं है। उन्होंने इसे देश की आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा विषय बताया।
VIDEO | RSS general secretary Dattatreya Hosabale claimed that certain “anarchic forces” from within and outside the country were instigating the youth. He said a change of government should take place only through elections and not through violence or unrest. He defended the Election Commission's Special Intensive Revision (SIR) of electoral rolls, saying it was necessary to ensure error-free voter lists. He said the Opposition should have examined the matter before protesting against it.Hosabale was speaking to reporters in Indore after the annual meeting of the Akhil Bharatiya Karyakari Mandal, the Rashtriya Swayamsevak Sangh's (RSS) principal organisational body. Responding to a question about the recent Gen Z protests at Delhi's Jantar Mantar, he said certain “anarchic forces” from within and outside the country were conspiring to instigate the youth.“However, every society and government must pay attention to the aspirations and concerns of young people. The RSS urges that there should be dialogue with the youth,” he added.
— Press Trust of India (@PTI_News) November 4, 2026
टीएन शेषन के कार्यकाल का दिया उदाहरण
SIR के विरोध पर सवाल उठाते हुए संघ के सरकार्यवाह ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन के कार्यकाल का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जब शेषन मुख्य चुनाव आयुक्त थे, तब बिहार की मतदाता सूची में भी सुधार की प्रक्रिया चलाई गई थी।
होसबाले ने सवाल किया कि उस समय भी मतदाता सूची का परिष्कार हुआ था, तो अब इस प्रक्रिया पर राजनीतिक विवाद क्यों खड़ा किया जा रहा है? उन्होंने अपने उदाहरण से समझाया कि अगर कोई व्यक्ति अब अपने पैतृक गांव के बजाय किसी दूसरे शहर में रहता है, तो उसका नाम उसी स्थान की मतदाता सूची में होना चाहिए जहां वह वास्तव में रहता है।
उनका कहना था कि लोकतंत्र में राजनीतिक दलों को अपनी विचारधारा और एजेंडे के अनुसार काम करने का अधिकार है, लेकिन केवल विरोध करने के लिए विरोध करना उचित नहीं है।
सत्ता परिवर्तन के नाम पर अशांति फैलाना गलत
होसबाले ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में सत्ता परिवर्तन को चुनावों से जोड़ते हुए कहा कि सरकार बदलने का अधिकार जनता के पास है। मतदाता अपने मताधिकार के जरिए सरकार चुनते और बदलते हैं।
हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि सत्ता परिवर्तन के उद्देश्य से अशांति, हिंसा या समाज में भेदभाव फैलाना उचित नहीं है। उनके अनुसार, लोकतंत्र में राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन उन्हें सामाजिक तनाव और हिंसा का कारण नहीं बनना चाहिए।
Gen-Z आंदोलन पर क्या बोले RSS सरकार्यवाह?
दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए Gen-Z आंदोलन को लेकर पूछे गए सवाल पर होसबाले ने देश और विदेश की कुछ अराजक ताकतों पर युवाओं को भड़काने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि ऐसी ताकतें साजिश के तहत युवाओं को प्रभावित करने का प्रयास कर रही हैं। हालांकि, उन्होंने अपने बयान में किसी खास संगठन या व्यक्ति का नाम नहीं लिया और न ही इस कथित साजिश के समर्थन में कोई विस्तृत प्रमाण प्रस्तुत किया।
होसबाले की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब युवाओं की राजनीतिक भागीदारी, रोजगार, सामाजिक मुद्दों और लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर देश में अलग-अलग मंचों पर चर्चा हो रही है।
आरक्षण व्यवस्था को बताया सामाजिक जरूरत
जातिगत आरक्षण के मुद्दे पर भी दत्तात्रेय होसबाले ने संघ का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि भारत में आरक्षण की व्यवस्था ऐतिहासिक और सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बनाई गई है। जब तक समाज में भेदभाव, पिछड़ापन, असमानता और सामाजिक विषमता मौजूद है, तब तक आरक्षण की व्यवस्था जारी रहनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि आरक्षण जैसे संवेदनशील विषय पर राजनीतिक दलों को वोट बैंक की राजनीति से बचना चाहिए। उनके मुताबिक, इस व्यवस्था का उद्देश्य सामाजिक असमानताओं को दूर करना और वंचित वर्गों को आगे बढ़ने का अवसर देना होना चाहिए।
100 साल बाद भी RSS का पंजीकरण क्यों नहीं?
संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के बावजूद उसके पंजीकरण नहीं कराए जाने से जुड़े सवाल पर भी होसबाले ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि RSS देश के संविधान और कानूनों के अनुरूप काम कर रहा है।
उनका तर्क था कि सामाजिक हितों के लिए लोग एकजुट होकर बिना पंजीकरण के भी संस्थाओं और संगठनों का संचालन कर सकते हैं। उन्होंने संघ के कामकाज को सामाजिक गतिविधियों और संगठनात्मक व्यवस्था से जोड़ते हुए कहा कि पंजीकरण न होना अपने आप में किसी संगठन के काम करने में बाधा नहीं है।
SIR से लेकर आरक्षण तक, होसबाले ने रखी संघ की राय
इंदौर में हुई बातचीत के दौरान दत्तात्रेय होसबाले ने कई राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर संघ का पक्ष रखा। उन्होंने SIR को मतदाता सूची में सुधार की जरूरी प्रक्रिया बताया, Gen-Z आंदोलन के संदर्भ में कथित बाहरी हस्तक्षेप पर चिंता जताई और आरक्षण को सामाजिक समानता के लिए जरूरी करार दिया।
उनके बयान से स्पष्ट है कि RSS मतदाता सूची के पुनरीक्षण के समर्थन में खड़ा है। वहीं, SIR को लेकर राजनीतिक दलों के बीच जारी मतभेद और चुनावी प्रक्रिया पर उठ रहे सवाल आने वाले समय में भी बहस का विषय बने रह सकते हैं।
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