महिला आरक्षण बिल आज होगा पास: अन्नपूर्णा देवी का दावा, विपक्ष की शंकाएं होंगी दूर...

By  Preeti Kamal April 17th 2026 01:40 PM -- Updated: April 17th 2026 01:12 PM

नई दिल्ली, भारत: महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने गुरुवार को कहा कि महिला आरक्षण बिल लोकसभा में "निश्चित रूप से पारित होगा" और प्रधानमंत्री व गृह मंत्री ने विपक्ष की चिंताओं का समाधान कर दिया है। उन्होंने आगे कहा कि विपक्ष द्वारा उठाए गए सभी संदेहों को सरकार ने स्पष्ट कर दिया है।

मीडिया से बातचीत में देवी ने कहा, "कल बहुत सार्थक चर्चा हुई, सभी सदस्यों ने अपने-अपने विचार रखे। जहां भी विपक्ष को कोई संदेह था, प्रधानमंत्री ने बहुत स्पष्ट रूप से कहा कि किसी भी तरह की शंका की जरूरत नहीं है। गृह मंत्री ने भी प्रतिशत के जरिए इसे समझाया है... अब कोई संदेह नहीं रहना चाहिए। आज यह आरक्षण बिल निश्चित रूप से पारित होगा।"

पीएम ने की विपक्ष की आशंकाओं को दूर करने की कोशिश 

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परिसीमन और 2029 के चुनावों से महिला आरक्षण लागू करने के लिए लोकसभा की सीटों में "अनुपातिक वृद्धि" को लेकर विपक्ष की आशंकाओं को दूर करने की कोशिश की थी।

लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा और मतदान जारी है, जो संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान करता है। इसके साथ ही केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 (दिल्ली और जम्मू-कश्मीर में लागू करने के लिए) और परिसीमन विधेयक, 2026 (लोकसभा सीटों को बढ़ाकर 850 करने और पुनर्निर्धारण करने के लिए) भी शामिल हैं।

गुरुवार को बिल संसोधन पर 12 घंटे लंबा सत्र चला

गुरुवार को लोकसभा में महिला आरक्षण बिल में संशोधनों पर चर्चा के लिए 12 घंटे का लंबा सत्र चला, जिसमें जनगणना के बाद ही कानून लागू करने की शर्त को हटाने पर चर्चा हुई। अंतिम मतदान के अनुसार, कुल 333 वोटों में से 251 ‘पक्ष’ (AYES) और 185 ‘विपक्ष’ (NOES) में पड़े। 251 वोटों के बहुमत के साथ संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 और परिसीमन विधेयक, 2026 सहित तीनों विधेयकों को लोकसभा में पेश किया गया।

लोकसभा सीटों की संख्या 850 तक बढ़ाने के प्रस्ताव

परिसीमन, यानी निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण, आमतौर पर हर 10 साल में जनगणना के बाद किया जाता है, जैसा कि संविधान के अनुच्छेद 82 और अनुच्छेद 170(3) में उल्लेखित है। साल 2001 में संविधान (84वां संशोधन) अधिनियम, 2001 के तहत लोकसभा और विधानसभाओं में सीटों के बंटवारे को 1971 की जनगणना के आधार पर स्थिर कर दिया गया था और केवल 2026 की जनगणना के बाद ही परिसीमन की अनुमति दी गई थी।

विपक्षी सांसदों ने परिसीमन और लोकसभा सीटों की संख्या 850 तक बढ़ाने के प्रस्ताव को लेकर चिंता जताई। उनका आरोप है कि इस प्रस्तावित कानून से सदन में दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो सकता है।

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