महिला आरक्षण बिल पर सियासी घमासान, जानिए नेताओं की तीखी प्रतिक्रियाएं...

By  Preeti Kamal April 18th 2026 12:02 AM

नई दिल्ली: महिला आरक्षण बिल का लोकसभा में पारित न हो पाना केवल एक विधायी घटना नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति के बदलते समीकरणों और गहरे अंतर्विरोधों का आईना भी है। यह विधेयक, जो संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा था, अपनी मंशा से ज्यादा अपने प्रावधानों को लेकर विवादों में घिर गया। 

विशेष रूप से इसे परिसीमन और 2029 के बाद लागू करने की शर्तों से जोड़ने ने विपक्ष को सरकार पर सवाल उठाने का अवसर दिया। विधेयक के खारिज होते ही राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो गया। विपक्षी दलों ने इसे अपनी रणनीतिक जीत बताया, जहां राहुल गांधी ने इसे “संविधान की रक्षा” करार दिया।

सरकार के लिए यह एक एक अस्थायी झटका

वहीं, सरकार की ओर से इस हार को एक अस्थायी झटका माना गया, लेकिन इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि संवैधानिक संशोधन जैसे गंभीर मुद्दों पर व्यापक सहमति के बिना आगे बढ़ना कठिन है। महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषय पर भी राजनीतिक मतभेदों का हावी होना यह दर्शाता है कि नीति निर्माण में केवल उद्देश्य नहीं, बल्कि प्रक्रिया और समय-निर्धारण भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं।

आज लोकसभा में बहुत अजीब दृश्य दिखा- अमित शाह

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा, "आज लोकसभा में बहुत अजीब दृश्य दिखा। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लिए जरूरी संविधान संशोधन बिल को कांग्रेस, TMC, DMK और समाजवादी पार्टी ने पारित नहीं होने दिया। महिलाओं को 33% आरक्षण देने के बिल को गिरा देना, उसका उत्साह मनाना और जयनाद करना सचमुच निंदनीय और कल्पना से परे है।"

पूरे देश ने विपक्ष का पाखंड देखा- देवेंद्र फडणवीस

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री  देवेंद्र फडणवीस ने विपक्ष पर तंज कसते हुए एक्स पर लिखा, "बेहद शर्मनाक! आज पूरे देश ने विपक्ष का पाखंड देखा। उनके पास हमारी #नारीशक्ति के साथ खड़े होने का ऐतिहासिक अवसर था, लेकिन वे इसमें असफल रहे। उनके लिए महिला सशक्तिकरण केवल भाषणों और नारों तक ही सीमित है। उन्होंने प्रगति की जगह राजनीति को चुना। नारी शक्ति वंदन विधेयक के प्रति उनके विरोध ने यह उजागर कर दिया है कि वे वास्तव में किसके हितों की सेवा करते हैं।"

इसके आगे उन्होंने लिखा कि भारत की महिलाएं देख रही हैं - और वे इसे नहीं भूलेंगी! लेकिन हमारे लिए, महिला सशक्तिकरण केवल भाषणों तक सीमित नहीं है। यह एक प्रतिबद्धता है। हम कल से सड़कों पर उतरेंगे और हम अपनी नारी शक्ति को हर अधिकार, हर न्याय और हर सम्मान दिलाएंगे।

'विपक्ष ने एक ऐतिहासिक कदम उठाने से रोका'

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने प्रतिक्रिया देते हुए एक्स पर लिखा, "महिला आरक्षण विधेयक को रोककर, कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष ने भारत को महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाने से रोक दिया है। यह केवल राजनीतिक बाधा नहीं है, बल्कि उन लाखों महिलाओं के साथ विश्वासघात है जो संसद में समान अधिकार और उचित प्रतिनिधित्व की हकदार हैं। राष्ट्र इसे याद रखेगा।"

'महिलाओं के नाम पर, संविधान को तोड़ने का प्रयास'

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा, "संशोधन विधेयक गिर गया। उन्होंने महिलाओं के नाम पर, संविधान को तोड़ने के लिए, असंवैधानिक तरकीब का इस्तेमाल किया। भारत ने देख लिया। INDIA ने रोक दिया। जय संविधान।"

यह लोकतंत्र का मुद्दा था- प्रियंका गांधी वाड्रा

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने मीडिया से बातचीत में कहा, "यह महिलाओं के आरक्षण का मुद्दा नहीं, बल्कि लोकतंत्र का मुद्दा था। हम परिसीमन को महिलाओं के आरक्षण से जोड़ने पर कभी सहमत नहीं हो सकते। इस विधेयक का पारित होना संभव ही नहीं था। यह हमारे देश में लोकतंत्र की एक बड़ी जीत है।"

मोदी सरकार की उल्टी गिनती शुरू- अरविंद केजरीवाल

आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि संसद में डिलिमिटेशन बिल फेल हुआ, मोदी जी के अहंकार की हार हुई...मोदी सरकार की उल्टी गिनती शुरू।

एम.के. स्टालिन ने सरकार पर साधा निशाना

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने एक्स पर लिखा, "तमिलनाडु ने दिल्ली को हराया! 23 अप्रैल को हम सब मिलकर दिल्ली के अहंकार और उस अहंकार का समर्थन करने वाले गुलामों को परास्त करेंगे!"

' न तो दक्षिण को न्याय मिला, न ही महिलाओं को'

वाई. एस. जगनमोहन रेड्डी ने एक्स पर पोस्ट की और उसमें लिखा कि विपक्षी दलों को गंभीरता से आत्म-प्रश्न करना चाहिए; उन्होंने क्या हासिल किया है? जबकि वास्तविकता यह है कि दक्षिण में जनसंख्या में गिरावट आएगी और महिला आरक्षण विधेयक स्थगित कर दिया गया है! न तो दक्षिण को न्याय मिला है और न ही महिलाओं को!"

इसके आगे उन्होंने लिखा कि यदि 2026 की जनगणना होती है तो दक्षिण की स्थिति और भी बदतर हो जाएगी, परिवार नियोजन के मामलों में अनुशासनहीनता के लिए उन्हें और भी दंडित किया जाएगा।

"भारतीय लोकतंत्र के लिए दुखद दिन"

बीजेपी नेता तेजस्वी सूर्या ने इस बिल के पास न होने पर चिंता व्यक्त करते हुए लिखा कि भारतीय लोकतंत्र के लिए दुखद दिन। एक बार फिर, कांग्रेस ने महिला आरक्षण विधेयक का विरोध करके देश की महिलाओं के साथ विश्वासघात किया है, जैसा कि पहले भी कई बार हो चुका है। इतिहास इसे दर्ज करेगा। और भारत की महिलाएं निश्चित रूप से कांग्रेस को इस पाप की कीमत चुकाने पर मजबूर करेंगी।

महिला सशक्तिकरण के मुद्दे को नहीं मिल सकी ज़मीन

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर भारत में उत्तर-दक्षिण विभाजन की बहस को तेज कर दिया है। जहां एक ओर जनसंख्या आधारित परिसीमन की बात हो रही है, वहीं दूसरी ओर जनसंख्या नियंत्रण में सफल राज्यों को नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में महिला सशक्तिकरण का मुद्दा भी क्षेत्रीय और राजनीतिक हितों के बीच उलझता नजर आता है।

निष्कर्ष के तौर पर हम यह कह सकते हैं कि इस विधेयक का गिरना यह संकेत देता है कि भारतीय लोकतंत्र में केवल बहुमत ही नहीं, बल्कि सहमति और संतुलन भी उतने ही आवश्यक हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सरकार और विपक्ष महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर एक साझा रास्ता निकाल पाते हैं, या यह विषय भी राजनीतिक खींचतान का हिस्सा बना रहेगा।


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